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संतोष कुमार राय 'बटोही'

संतोष कुमार राय 'बटोही' केर डायरी 'लव यू टू'

29-04-2016


दिल्ली टू मंगरौना


ब्याह केर दिन फिक्स भऽ चुकल छै। गाम पर तैयारी भऽ रहल छै। ज्ञानदीप पब्लिक इस्कूल सँ अनुमति लऽकऽ गाम ऐबाक टिकट कटेलहुँ हम। इस्कूल केँ मालिक दस हजार टाका गिफ्ट लेल देलाथि। मोन हरखित भेल जे गाम जायब ब्याह लेल। उनतीस तारीख सँ पहिने गाम आबि सकैत छलहुँ, परञ्च मुखिया चुनाव पंचायत मे छलैक। ओही मे किनको पक्ष मे वोटिंग केनै ठीक नहि बुझना गेल। ताहि दुआरे विचारलहुँ वोटिंग बादे गाम जाय।

तेरहम बरख मे गामक ई हमर चारिम यात्रा छल। माय हमरा संगे छेलीह। ब्याहक कपड़ाक खरीददारी चाँदनी चौक सँ केने छलहुँ। कॉस्मेटिक सामान केँ खरीदारी गोविन्दपूरी मार्केट सँ केने छलहुँ। कॉस्मेटिक सामानक लिस्ट रेणू मैम तैयार केने रहतीह। ब्याहक लेल कोट-पेंट आओर जूता सेहो गोविन्दपुरी मार्केट सँ खरीदलहुँ अछि। कॉस्मेटिक सामान सभटा ब्रांडेड कम्पनी केर छल।

02-05-2016

कोहवर घर


फुसक घर गिर गेल रहै। लोक कहैत छै ने -'घर पर खर नहि, कान पर बीड़ी ' इएहे हमर दशा छल। ब्याह सँ पहिने घर बनाबऽ पडल । मँझला भैय्या केँ कहलियै ,तँ ओ फुसक घर नहि बनौलाथि। ईँट, सिमेंट, बालू वगैरह-वगैरह लेल टाका लऽकऽ बड़ि मेहनत सँ घर बनौलाथि। दु मई केँ घर पर एलबेस्टर चढौल गेल। नहि घर मे खिडकी, नहि किबाड ! घर मे माटि सेहो नहि भरल गेलै। पुरनका घरक किबाड मँझला भैय्या सेट कऽ देलथिन्ह। दीवार मे भूर सेहो छेबे करै। ओही मे एकटा भनसा घर सेहो निकैल देल गेल छै साइड मे।वरण्डाह नहि छै अई घर मे। आब अहाँ बुझि सकैत छी केएन ई कोहबर घर अछि। सूअरक खोवहारी से कहल जा सकैए ।

गोसाँई कालीवंदी गोरैया हमरे घर मे छथि। ताईं अऐ घरक विशेष प्रयोजन छै। दोसरक घर सँ तार खींचि कऽ सीलिंग फैन लगौल गेल। ओ सीलिंग फैन मरियल जकाँ कुहैर कऽ चलि रहल अछि। हवा तँ नहिएटा लगैत छै देह मे। काँचे बाँसक झाझन देल गेल छै एस्बेस्टस के नीचा मे। ब्याहक बाद अपने सँ किछु दीवार केँ जोड़ि देलियै। भनसा घर मे फटकी नहि छै।

17-09-2016

मायक अंतिम साँस

ज्ञानदीप पब्लिक इस्कूल सँ रिजाइन मारि कऽ 21 सितंबर केँ गाम जेबाक लेल टिकट कटेलहुँ । सात सितंबर केँ रिजाइन देने छलहुँ । इस्कूल केँ डायरेक्टर कहलाथि जे इस्कूल कोना खोलल जायत छै आओर कोना चलौल जायत छै यानी मैनेजमेंट केर जानकारी लऽ लिय । हमहुँ बुझलियै ठीके कहैत छथि। हमहुँ हुनकर सभटा बही-खाता केँ उल्टा देलियैन्ह। इस्कूल खोलवाक गुण लेलौंह।

परञ्च 17 सितंबर हमर जिनगी केर सभ सँ खराब दिन छल। माय केँ बीपी बढ़ि गेलैन्ह। माय केँ बीपी वाला गोली सैध गेल छलैन्ह। ओ हमरा नहि कहलीह। हम बीपीक गोटी आनि केँ माय केँ देलियैन्ह। ओ गोटी काज नहि केलकैन्ह। डागडर लग ल' गेलियैन्ह। माय केँ साँस ऊपर-नीचा चल' लगलैन्ह। नर्स मुँह मे किछु लगौलकैन्ह। पेट खपनै बन्न भ' गेलैन्ह। आँखि तैक रहल छलथिन्ह। हमरा भेल माय ठीक भ' गेलीह। परञ्च मायक साँस रुकिए गेलैन्ह। ओ अखनो धरि आँखि सँ देख रहल छथिन्ह हमरा भेल। परञ्च मायक प्राण आँखिक मार्ग सँ निकैल गेलैन्ह। माय मरि गेलीह।

-संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम-मंगरौना।
 

 

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