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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
विदेह नूतन अंक सम्पादकीय
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गजेन्द्र ठाकुर- नूतन अंक सम्पादकीय
 

विदेह: सदेह: ७

मैथिली पद्य (विदेह अंक ५१-१००)

समग्र साहित्यिक समीक्षा: सभटा साहित्यकार

भारतीय रस-ध्वनि-वक्रोक्ति-औचित्य । पाश्चात्य आलोचना । गंगेशक नव्य-न्याय । विदेह समानान्तर इतिहास ढाँचा

सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर । आइएसबीएन: 978-93-80538-65-5

भूमिका: सदेह ७ क स्वरूप आ विशेषता

विदेह: सदेह: ७ मैथिली पद्यक सबसँ विशाल संकलन थिक: ६२४ पृष्ठ, १५१ साहित्यकार, विदेह अंक ५१-१०० सँ बीछल। ई सदेह ३ (मैथिली पद्य, अंक २६-५०) केर उत्तरवर्ती थिक - दुनू मिलिकऽ विदेह केर काव्य-पुरालेख सृजित करैत अछि।

सदेह ७ केर विधागत विविधता अपूर्व अछि: कविता, गीत, गजल, आजाद गजल, भक्ति-गजल, कता, हजल, नात, बन्द, कसीदा, हाइकू, टनका-वाका, हैबून, शेनर्यू, कुण्डलिया, झारू, क्षणिका, गद्य-कविता - सब एक खण्डमे। अनूदित कविता सेहो: तेलुगु (अन्नावरन देवेन्द्र), ओडिया (इप्सिता सारंगी), भोजपुरी (परिचय दास), डोगरी (प्रो. चम्पा शर्मा)।

चारि ढाँचा: (क) रस-ध्वनि-वक्रोक्ति-औचित्य; (ख) बूर्द्यू, स्पिवाक, बाख्तिन, ग्राम्शी, बेन्यामिन, फानन, अम्बेडकर, कामू, हाइडेगर, फ्रायड; (ग) गंगेश उपाध्यायक नव्य-न्याय; (घ) विदेह समानान्तर इतिहास ढाँचा।

१. गजेन्द्र ठाकुर (सम्पादक)

पद्य साहित्य आ ओकर समीक्षाशास्त्र (निबन्ध) + कुण्डलिया १-४ / टनका / हाइकू / शेनर्यू / हैबून / / कता / गजल / कटिहारी

समीक्षाशास्त्र: ठाकुरक सैद्धान्तिक निबन्ध मैथिली पद्य केर समग्र ढाँचा थिक: प्लेटो केर 'आयोन' + अरस्तु केर 'काव्यशास्त्र' सँ आरम्भ करैत मैथिली छन्द परम्परा, अर्वाचीन मुक्त छन्द, जापानी शैली (हाइकू-टनका), अरबी-फारसी शैली (गजल-कसीदा) धरि। 'कोनो रचना अप्रासङ्गिक नहि होइत अछि जँ ओ अहाँकेँ हिलोड़ि दिअए तँ ओ रचना सार्थक।' ई विदेह केर समावेशी समीक्षा केर घोषणापत्र थिक।

कविताक विश्लेषण: कुण्डलिया (शास्त्रीय मैथिली अन्तःश्लिष्ट दोहा शैली) + टनका (जापानी ५-७-५-७-७ वर्ण शैली) + हाइकू + शेनर्यू + हैबून (हाइकू+गद्य) + रुबाइ (अरबी शैली) + कता (फारसी शैली) + गजल + कटिहारी (मिथिला लोक शैली) - ई विस्तार घोषित करैत अछि जे मैथिली कविता विश्व साहित्य केर अछि।

नव्य-न्याय: गंगेशक 'सामान्य' (सार्वभौमिक): ठाकुरक निबन्ध तर्क करैत अछि जे उत्तम कविता केर 'सामान्य लक्षण' (सार्वभौमिक अभिलक्षण) 'झमारनाइ' (प्रभाव, अनुनाद) अछि - ई नव्य-न्याय केर 'व्याप्ति'- आधारित तर्क थिक।

२. अंजनी कुमार वर्मा 'दाऊजी'

आत्मबल / ओजक भोज / समस्या / वासंती गीत / दुइ गोट भूख / सुखाएल अतीत / बेरोजगारक आत्मा / जाति आ तंत्र / कोसी (अनेक कविता)

रस-ध्वनि: 'आत्मबल' - वीर रस। 'दुइ गोट भूख' - करुण - दोर भूख: भौतिक + मनोवैज्ञानिक। 'जाति आ तंत्र' - रौद्र+व्यंग्य - अम्बेडकर जाति समीक्षा। 'कोसी' - करुण+ पारिस्थितिकीय। ध्वनि: 'सुखाएल अतीत' (सुखल अतीत) = हानि केर रूपमे विषाद। वक्रोक्ति: 'ओजक भोज' (ऊर्जा केर भोज) - 'ओज' (ऊर्जा) कतय अछि जखन 'भोज' खाली अछि?

ग्राम्शी / अम्बेडकर: 'जाति आ तंत्र' = ग्राम्शी केर संस्थागत वर्चस्व + अम्बेडकर केर जाति विश्लेषण: जाति  प्रणाली अछि। 'बेरोजगारक आत्मा' = बेरोजगार व्यक्ति केर आत्मा - आर्थिक हाशियाकरण केर आध्यात्मिक दरिद्रता।

३. मिथिलेश कुमार झा

खबरदार / गजल

रस-ध्वनि: 'खबरदार' (सावधान!) - वीर रस। राजनैतिक चेतावनी कविता। गजल: शृंगार-वियोग। दुनू शैली केर विरोधाभास: सार्वजनिक चेतावनी + व्यक्तिगत लालसा - एक कवि केर दूटा नागरिकता।

४. बलराम साह

आकि नींद टूटि गेल

रस-ध्वनि: 'आकि नींद टूटि गेल'- वीर+शान्त। 'आकि' (जेना) = सपन जकाँ जागृति ध्वनि: की ई वास्तविक जागृति थिक या सपना? वक्रोक्ति: नींद टूटनाइ = राजनैतिक चेतना।

५. रवि भूषण पाठक

हाइकू / ऐ बेर छठिमे / मरणोपरान्त / बर्फ भोर / चमारक ऋण / दीवाली के पहिले / धनतेरस राति / हम पुरहितिया / चालीसक बात (२०+ कविता)

परिचय: रवि भूषण पाठक सदेह ७ मे २०+ कविता। हुनकर विस्तार असाधारण अछि: दलित भक्ति ('ऐ बेर छठिमे'), अस्तित्वगत ('मरणोपरान्त'), पर्व समीक्षा ('धनतेरस'), जीवन समीक्षा ('चालीसक बात')

'ऐ बेर छठिमे' विशेष विश्लेषण: गजेन्द्र ठाकुर विशेष रूपसँ उल्लेख करैत छथि: 'ऐ बेर छठिमे' मे दलित भक्ति बिम्ब अछि - देवता दुसाध-टोला पाछाँ सँ उगैत अछि। ध्वनि: सूर्य (दैवी) दलित पड़ोस सँ उगैत अछि - ई स्थानिक धर्मशास्त्र थिक। वक्रोक्ति: दैवी प्रकाश केर उत्पत्ति दलित स्थानमे।

'चमारक ऋण' दलित अस्मिता: 'चमारक ऋण' (चमार केर ऋण) - रौद्र+करुण। ध्वनि: 'ऋण' (ऋण) - दलित समुदाय केर समाज प्रति अदत्त ऋण? वा समाज केर दलित प्रति अदत्त नैतिक ऋण? ई अस्पष्टता कविताक शक्ति अछि। अम्बेडकर: दलित सब किछु देलक एहि सभ्यता केँ - सभ्यता ओकर ऋणी अछि।

नव्य-न्याय: गंगेशक 'अन्वय-व्यतिरेक': 'चमारक ऋण' - जतय चमार (दलित) अछि, ततय ऋण (सामाजिक उत्पीड़न) अछि; जतय चमार अनुपस्थित अछि, ततय ऋण अनुपस्थित अछि - ई सह-अस्तित्व/अनुपस्थिति तर्क।

६. राजेश मोहन झा 'गुंजन'

मिझाइत दीप / मूड़नक भोज / थेथर नेता / गरम जमाना / पलायन / सुगर फ्री 

रस-ध्वनि: 'मिझाइत दीप' (बुझैत दीप) - करुण। 'थेथर नेता' (बेशरम नेता) - हास्य+रौद्र। 'सुगर फ्री'- हास्य'पलायन' (पलायन) - करुण। ध्वनि: 'मूड़नक भोज' (मुण्डन केर भोज) - जीवन-चक्र अनुष्ठान केर रूपमे सामाजिक व्यय व्यंग्य।

ग्राम्शी / स्त्रीवादी: 'थेथर नेता' = ग्राम्शी केर अधीनस्थ जे वर्चस्ववादी शासक बनि जाइत अछि।

भूल सुधार: नवीन कुमार 'आशा'क “अन्तरकलह आ विचार” आ “बैसल-बैसल सोची मन मे विदेहक ७२ म अंक (१५ दिसम्बर २०१०) मे ई-प्रकाशित भेल मुदा गलतीसँ ई दुनू कविता विदेह-सदेह ७ मे राजेश मोहन झा 'गुंजन' केर नामसँ प्रकाशित भऽ गेल। ओना तकर सुधार कऽ देल गेल विदेह-सदेह ३४ मे, जखन भूल-सुधार सूचनाक संग ई दुनू कविता नवीन कुमार 'आशा'क नामसँ प्रकाशित भेल।

७. नवीन कुमार 'आशा'

सुनू सुनाउ अपन खबरि / रोटी / हमरा भेटल

रस-ध्वनि: 'रोटी'- करुण। रोटी केरूपमे जीवन केर मूलभूत माँग। 'सुनू सुनाउ' - संवादात्मक अपील। 'हमरा भेटल'- शान्त+शृंगार। ध्वनि: 'आशा' नाम - कवि केर नाममे आशा + निराश वास्तविकता केर बीच।

८. शम्भुनाथ झा 'वत्स'

ग्रवादी बनि जाइ

रस-ध्वनि: 'ग्रवादी बनि जाइ' (क्रान्तिकारी बनि जाइ) - वीर रस। साहित्याचार्य, वेदविद्: शास्त्रीय संस्कृत विद्वान राजनैतिक कविता लिखैत। वक्रोक्ति: ब्राह्मण विद्वान क्रान्ति केर आह्वान करैत - ई ग्राम्शीय 'कार्बनिक बुद्धिजीवी' केर संकेत थिक।

९. अजित मिश्र

नव वर्ष

रस-ध्वनि: 'नव वर्ष' - शान्त+शृंगार। नव वर्ष नवीकरण केर रूपक केरूपमे। वर्ड्सवर्थ केर 'समय केर धब्बा': नव वर्ष समय केर गमन आ सम्भावना केर चिन्ह लगाबैत अछि।

१०. डॉ. शेफालिका वर्मा

नव वर्ष / इजोरियाक भाषा / उपेक्षित / देश / विधाता / बच्चा आ बेवस्था / स्मृति-शेष

रस-ध्वनि: 'इजोरियाक भाषा'- शृंगार+शान्त। ध्वनि: इजोरिया= स्त्रीलिंगी, अप्रत्यक्ष वाणी। 'उपेक्षित' (उपेक्षित) - करुण। 'विधाता' (विधाता/स्रष्टा) - रौद्र+व्यंग्य - भाग्य/भगवान केर प्रश्न। 'बच्चा आ बेवस्था' - करुण+वीभत्स।

स्पिवाक / पारिस्थितिकीय-स्त्रीवादी: 'देश' + 'विधाता' + 'उपेक्षित': शेफालिका वर्मा केर कविता व्यवस्थित रूपसँ पितृसत्तात्मक संरचना सभ पर प्रश्न करैत अछि- दैवी, राष्ट्रिय, पारिवारिक। स्पिवाक: महिलाक स्वर एहि सब क्षेत्रमे हाशियाकृत ('उपेक्षित') अछि।

११. सतीश चन्द्र झा

चुनाव १-२ / भाषा आ राजनीति / सत्यक जीत / भूखल पेट / पाँच साल / सौंसे बिहार एखनो बेहाल / नेन्ना तेतरी

रस-ध्वनि: 'चुनाव' - हास्य+व्यंग्य+रौद्र। 'भाषा आ राजनीति' - वीर+व्यंग्य- मैथिली भाषा राजनीति। 'भूखल पेट' - करुण। 'सौंसे बिहार एखनो बेहाल' - रौद्र+करुण। 'नेन्ना तेतरी' - लोक नामकरण केर राजनैतिक कविता। ध्वनि: 'पाँच साल'= चुनाव चक्र केरूपमे आवर्ती दुःस्वप्न।

ग्राम्शी / स्पिवाक: 'भाषा आ राजनीति' = बूर्द्यू केर भाषिक पूँजी + ग्राम्शी केर सांस्कृतिक वर्चस्व: मैथिली भाषा राजनीति सत्ता राजनीति थिक।

१२. सुबोध कुमार ठाकुर

विडम्बना / प्रतीक्षा

रस-ध्वनि: 'विडम्बना + प्रतीक्षा' - करुण+शान्त ('विडम्बना' = दुखान्त व्यंग्य)। दुनू कवितामे एक नीरस प्रतीक्षा केर भाव।

१३. किशन कारीगर

दौगल चलि जाएब

रस-ध्वनि: 'दौगल चलि जाएब गाम'- करुण+वात्सल्य। पलायन-उलटफेर केर इच्छा - सहर सँ गाम लौटबाक लालसा।

१४. राम विलास साहु

कोइली

रस-ध्वनि: 'कोइली कूहकै आमक डारि'- शृंगार। विद्यापति परम्पराक निरन्तरता। कोइली केर कूक प्रेम केर सन्देशवाहक।

१५. पंकज कुमार झा

उद्बोधन

रस-ध्वनि: 'उद्बोधन' (उद्बोधन/जागृति आह्वान) - वीर रस। जागरूकता केर आह्वान केरूपमे कविता।

१६. मुन्नाजी

हाइकू / बोनिहार / माटिक ललकार

रस-ध्वनि: 'बोनिहार' (बोनिहार/कृषक) - करुण+वीर। ग्राम्शी केर अधीनस्थ - कृषक केर आवाज। 'माटिक ललकार' (माटि केर ललकार) - भूमि केर पुकार - पारिस्थितिकीय चेतना। हाइकू - क्षणिक बिम्ब सभक शृंखला।

१७. ज्योति सुनीत चौधरी

हाइकू-टनका / भ्रष्टाचार / जीतक परिभाषा / प्रजातन्त्रक खेल / स्वतन्त्रता दिवस / पोखरिक कमल / मिथिला चित्रकला (आ अन्य अनेक कविता)

रस-ध्वनि: 'भ्रष्टाचार'- रौद्र+व्यंग्य। 'प्रजातन्त्रक खेल' - रौद्र+करुण। 'पोखरिक कमल' (पोखरि केर कमल)- शान्त+शृंगार। 'मिथिला चित्रकला' - अद्भुत। 'जीतक परिभाषा' (विजय केर परिभाषा) - वीर। ध्वनि: लन्दन-प्रवासी दृष्टिकोण: 'प्रजातन्त्रक खेल'  खेल' बाहर सँ देखल - आरो विध्वंसकारी।

स्पिवाक / मिथिला चित्रकला: स्पिवाक केर प्रवासी अधीनस्थ: ज्योति सुनीत चौधरी लन्दन सँ 'प्रजातन्त्रक खेल' केर बारेमे लिखैत छथि - बाहरी-भीतरी स्थिति। 'मिथिला चित्रकला' = विदेह केर दृश्य कला + साहित्यिक कला एकीकरण केर प्रतिबद्धता।

१८. अन्नावरन देवेन्द्र

तेलुगु पद्य: अन्तिम शब्द (मैथिली अनुवाद)

रस-ध्वनि: 'अन्तिम शब्द'- करुण+शान्त। तेलुगु मूल + मैथिली अनुवाद। ध्वनि: 'अन्तिम शब्द' - अन्तिम शब्द की अछि? मौन? मृत्यु? प्रेम?

बेन्यामिन / अन्तर-साहित्यिक: बेन्यामिन केर 'परवर्ती जीवन': मैथिलीमे तेलुगु कविता- दक्षिण भारतीय स्वर उत्तर भारतीय भाषामे। विदेह केर राष्ट्रव्यापी परिकल्पना: भारत केर साहित्यिक विविधता एक्के मञ्च पर।

१९. गिरीश चन्द्र लाल

नील अकास / शुभ प्रभात / मन में भेल अछि भोर / एक रंग अनेक रंग

रस-ध्वनि: 'नील अकास' (नील आकाश) - शान्त+शृंगार। 'शुभ प्रभात- वात्सल्य+शान्त। 'मन मे भेल अछि भोर'- शान्त+वीर। 'एक रंग अनेक रंग' - अद्भुत। तीनू: आकाश + प्रभात + रङ्ग - प्रकाश केरूपमे आशा।

२०. गंगेश गुंजन

आजाद गजल १-२ / स्वतन्त्रता दिवस २०१०

रस-ध्वनि: 'आजाद गजल' = मुक्त गजल (बिना औपचारिक बहर/मीटर केर) - गंगेश गुंजन केर नवाचार। 'स्वतन्त्रता दिवस २०१०' - वीर+व्यंग्य। ध्वनि: 'आजाद' (मुक्त) गजल 'स्वतन्त्रता' (स्वतन्त्रता) दिवस पर - शैली-स्वतन्त्रता सामग्री-स्वतन्त्रता केर दर्पण करैत अछि। बाख्तिन बहुस्वरता।

२१. मनीष झा 'बौआभाइ'

भेल एहेन अवतार छल

रस-ध्वनि: 'भेल एहेन अवतार छल’- अद्भुत+व्यंग्य। अवतार रूपक- आधुनिक जीवनमे दैवी अवतरण केर व्यंग्य।

२२. लालबाबू कर्ण

जन्मभूमि

रस-ध्वनि: 'जन्मभूमि' - वात्सल्य+वीर। जन्मभूमि सँ लगाव - मिथिला प्रेम।

२३. चन्द्रशेखर कामति

दुनू परानी फूकि-फूकि पी

रस-ध्वनि: 'दुनू परानी फूकि-फूकि पी'- हास्य+शृंगार। घरेलू हास्य - दम्पति केर दैनिक जीवन केर चित्रण।

२४. मनोज झा 'मुक्ति'

देखाबटी छोड़ि दे

रस-ध्वनि: 'देखाबटी छोड़ि दे'- शान्त+व्यंग्य। पाखण्ड केर त्याग केर आह्वान।

२५. राजेन्द्र चौधरी

श्रीकृष्ण भजन

रस-ध्वनि: 'श्रीकृष्ण भजन' - भक्ति रस। पारम्परिक भक्ति कविता - विद्यापति परम्पराक निरन्तरता।

२६. रमाकान्त राय 'रमा'

वन्दना

रस-ध्वनि: 'वन्दना' (वन्दना) - भक्ति+शान्त। प्रार्थना केर रूपमे कविता।

२७. प्रकाश प्रेमी

गीत

२८. सुमन झा 'सृजन'

कैक्टस जकाँ दिल

रस-ध्वनि: 'कैक्टस जकाँ दिल'- शृंगार+करुण। नागफनी केर काँट- प्रेम केर पीड़ा केर रूपक।

 

२९. शिवकुमार मिश्र

भलमानुस समाज

रस-ध्वनि: 'भलमानुस समाज'- हास्य+व्यंग्य। 'भला मानुस' केर समाज केर व्यंग्यपूर्ण चित्रण - वास्तविकता सँ दूर।

३०. डॉ. बचेश्वर झा

भेँट, भावाञ्जलि

३१. श्यामल सुमन

सत्य (कहू की फूसि बजै छी?)

३२. जय प्रकाश मंडल

उपराग

रस-ध्वनि: 'उपराग' (उपराग/ग्रहण) - करुण। ग्रहण रूपक - अन्धकार केर क्षण केर चित्रण।

३३. सत्येश्वर कुमार झा

दस गोट क्षणिका

रस-ध्वनि: 'दस गोट क्षणिका' (दस क्षणिका) - शान्त। दस क्षणिका - दस क्षण केर बिम्ब शृंखला।


३४. कपिलेश्वर साहु

कोसी

रस-ध्वनि: 'कोसी' (कोसी नदी) - रौद्र+करुण। कोसी बाढ़ २००८: पारिस्थितिकीय + दलित प्रलय। बेन्यामिन: साक्षी बनल।

३५. राधाकान्त मंडल 'रमण'

स्वागत गीत

रस-ध्वनि: 'स्वागत गीत' (स्वागत गीत) - वात्सल्य+शृंगार। अतिथि सत्कार परम्परा केर गीत।

३६. धीरेन्द्र प्रेमर्षि

फगुआ गीत

रस-ध्वनि: 'फगुआ गीत' (फगुआ/होली गीत) - हास्य+शृंगार। बाख्तिन उत्सवी-लोकधर्मी - होली केर उत्सवी उन्माद।

३७. सरोज 'खिलाड़ी'

गीत

रस-ध्वनि: सरोज खिलाड़ी केर गीत- शृंगार+करुण। स्त्री, प्रेम आ वियोग।

३८. नन्द विलास राय

जनसंख्या

रस-ध्वनि: 'जनसंख्या' (जनसंख्या) - व्यंग्य। जनसंख्या वृद्धि केर व्यंग्यपूर्ण चित्रण।

३९. विनीत ठाकुर

शान्ति दूत परवा

रस-ध्वनि: 'शान्ति दूत' (शान्ति दूत) - शान्त रस। शान्ति केर सन्देशवाहक केर रूपमे कविता।

४०. इन्द्रकान्त झा

गीत

रस-ध्वनि: गीत। गीत परम्पराक निरन्तरता।

४१. मनोज कुमार मंडल

बेटी / मिथिला / नारी चरित्र

रस-ध्वनि: 'बेटी' (बेटी) - करुण+वीर। स्त्रीवादी - बेटी केर स्थिति पर प्रश्न। 'मिथिला' - वात्सल्य+शान्त। 'नारी चरित्र' - स्त्री केर चरित्र केर पुनर्मूल्याङ्कन।

४२. डॉ. राजीव + जया वर्मा (दम्पति)

हमर गाम

रस-ध्वनि: 'हमर गाम'- वात्सल्य+शान्त। संयुक्त लेखन (दम्पति) - विदेह केर दम्पति-लेखन परम्परा।

४३. रामभरोस कापड़ि 'भ्रमर'

गजल

रस-ध्वनि: 'गजल'- शृंगार-वियोग। नेपाली मैथिली आजाद गजल परम्परा।

४४. कामिनी कामायनी

बाजारमे स्त्री

रस-ध्वनि: 'बाजारमे स्त्री'- वीभत्स+वीर। स्त्री केर वस्तुीकरण केर चित्रण। स्पिवाक: महिला बजारमे वस्तु केर रूपमे।

४५. बेचन ठाकुर

गीत

रस-ध्वनि: बेचन ठाकुर केर गीत - शृंगार+हास्य। लोक-नाट्य परम्पराक निरन्तरता।

४६. रमण कुमार सिंह

दिल्लीमे...

रस-ध्वनि: 'दिल्लीमे...' - करुण+व्यंग्य। बूर्द्यू केर महानगरीय क्षेत्र - दिल्लीमे मैथिली प्रवासी केर विस्थापन।

४७. विद्यानन्द झा 'विदू'

हमर मिथिला / दहेज

रस-ध्वनि: 'हमर मिथिला' - वात्सल्य+शान्त। मिथिला प्रेम। 'दहेज' - रौद्र+करुण। दहेज प्रथा केर विरोधी कविता।

४८. इन्दु भूषण कुमार

सफलता हमर रानी / दहेज

रस-ध्वनि: 'सफलता हमर रानी'- हास्य+व्यंग्य। सफलता केर व्यंग्यपूर्ण चित्रण। 'दहेज' - रौद्र+करुण - दहेज विरोधी।

४९. विवेकानन्द झा

नोरमे अछि बेस संभावना / हे सिंगरहार / खत्म करऽ चाहैत छी जिनगी / हम / हाइकू-शेनर्यू 

परिचय: विवेकानन्द झा - ३०+ कविता। गजेन्द्र ठाकुर विशेष रूपसँ उनकर 'हम कविता' 'हमही अहाँक फूलडाली सँ उझकि कऽ खसल कनेर' केर उद्धरण करैत छथि।

'खत्म करऽ चाहैत छी जिनगी' विशेष विश्लेषण: ई कविता अस्तित्वगत संकट केर प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति थिक। करुण+रौद्र। कामू केर 'केवल एक गम्भीर दार्शनिक समस्या अछि'- अल्बर्ट कामूक 'द मिथ ऑफ सिसिफस' निबंधमे जीवनक निरर्थकताक बादो जीबाक संघर्ष केँ  एकमात्र गंभीर दार्शनिक प्रश्न मानल गेल अछि। ई दर्शन मानैत अछि जे मानव जीवनमे अर्थक खोज ब्रह्मांडक द्वारा ओकरापर ध्यान नै देनाइ, ऐ दुनूकक बीच ढुइस 'एब्सर्ड' (विसंगति) अछि, से एकरा आत्महत्याक बदला उत्साह सँ जीबाक चाही। ई कविता मैथिलीमे सेहो गम्भीरता सँ लेल गेल अछि। ध्वनि: 'खत्म करबाक' इच्छा केर अभिव्यक्ति एकटा जीवित रहबाक कार्य अछि - जोर सँ कहनाइ ओकरा रोकैत अछि।

रस-ध्वनि: 'नोरमे अछि बेस संभावना'- करुण+वीर। ध्वनि: नोर = सम्भावना केर बीज - ग्राम्शी केर 'बुद्धिक निराशावाद, इच्छा केर आशावाद' 'हे सिंगरहार'- शृंगार+करुण। 'हम' - केवल आत्म-दृढ़ोक्ति।

हाइडेगर / प्रामाणिकता: विवेकानन्द झा केर कविताक केवल मात्रा + विस्तार हाइडेगर 'प्रामाणिक अस्तित्व' केर प्रदर्शन करैत अछि - अपन सब आयाममे जीवन सँ पूर्ण रूपसँ जुड़ल। शेष कविता - हाइकू-शेनयू शृंखला):

हाइकू आ शेनर्यू (जापानी शैली) केर अनेक सङ्कलन- प्रकृति, ऋतु, क्षण केर बिम्ब। मैथिलीमे जापानी शैली केर सफल प्रयोग।

५१. रोशन झा

हाइकू-गजल

रस-ध्वनि: हाइकू-गजल संकर शैली - हाइकू केर संक्षिप्तता + गजल केर रदीफ-काफिया संरचना।

५२. प्रबीण चौधरी 'प्रतीक'

हाइकू-गजल

रस-ध्वनि: हाइकू-गजल संकर शैली केर निरन्तरता।


५३. सुभाष चन्द्र

क्षणिका

रस-ध्वनि: क्षणिका - शुद्ध अल्पतमवाद। एक क्षण केर सम्पूर्ण बिम्ब।

५४. रवीन्द्र कुमार दास

क्षणिका

रस-ध्वनि: क्षणिका - क्षण केर बिम्ब। प्रकृति चित्रण।

५५. कुसुम ठाकुर

हाइकू-शेनयू

रस-ध्वनि: हाइकू-शेनर्यू - स्त्री दृष्टिकोण सँ हाइकू।

५६. रमाकान्त झा 'सौराठ'

घर ने पथार

रस-ध्वनि: 'घर ने पथार अछि टूटल मरैया'- करुण। टूटल घर केर रूपक - परिवारिक विघटन।

५७. मृदुला प्रधान

एकटा आपबीती / गणतन्त्र दिवस / यमुनाजी

रस-ध्वनि: 'कतए गेल गणतन्त्र दिवस'- रौद्र+व्यंग्य। गणतन्त्र दिवस केर विलाप। 'यमुनाजी'- पारिस्थितिकीय- यमुना केरूपमे मरैत देवी। 'एकटा आपबीती'- व्यक्तिगत आख्यान - स्त्री संघर्ष केर कथा।

५८. प्रवीण कश्यप

आच्छादन

रस-ध्वनि: 'आच्छादन'- शान्त। भावनात्मक आवरण केर रूपक।

५९. अरविन्द ठाकुर

आजाद गजल

रस-ध्वनि: 'आजाद गजल' (मुक्त गजल) - अरविन्द ठाकुर विदेह गजल आन्दोलन केर भाग। बिना बहर केर गजल - शैलीगत स्वतन्त्रता।

६०. धीरेन्द्र कुमार

हमर गाम

रस-ध्वनि: 'हमर गाम' - वात्सल्य+शान्त। गाम प्रेम केर कविता- मिथिलाक ग्रामीण जीवन केर चित्रण।

६१. अखिलेश कुमार मंडल

ट्रेनक चोरबा

रस-ध्वनि: 'ट्रेनक चोरबा' (ट्रेन केर चोर) - हास्य+व्यंग्य। काफ्कीय अर्थहीनता।

६२. कालीनाथ ठाकुर

कुण्डलिया १-७ (अभिशाप बापक पाप)

रस-ध्वनि: 'अभिशाप बापक पाप कुण्डलिया १-७- करुण+रौद्र। पिता केर श्राप विषय शास्त्रीय कुण्डलिया शैलीमे। शास्त्रीय शैली + समकालीन विषय।

६३. सत्यानन्द पाठक

आह! जाड़ चलि गेल!

रस-ध्वनि: 'जाड़ गेल'- शान्त+करुण। ऋतु परिवर्तन केर रूपक - जीवन केर परिवर्तन।

६४. दयाकान्त

मैथिल

रस-ध्वनि: 'मैथिल'- वीर रस। मैथिल अस्मिता केर गौरवगान।

६५. रमेश

गद्य कविता

रस-ध्वनि: गद्य कविता - शान्त+बौद्धिक। गद्य केर शैलीमे काव्यात्मकता - शैलीगत प्रयोग।

६६. शिवशंकर सिंह ठाकुर

रुबाइ-गजल

रस-ध्वनि: रुबाइ (अरबी प्रेम-विलाप शैली) + गजल । शृंगार+करुण।

 

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-गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक विदेह, whatsapp/ Arattai no +919560960721 HTTP://VIDEHA.CO.IN/ ISSN 2229-547X VIDEHA

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