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रबीन्द्र नारायण मिश्र

ठेहा परक मौलाएल गाछ (धारावाहिक)

41

 

होटलमे रात्रि विश्रामक बाद हमसभ भोरे फेरसँ मुरलीकेँ संपर्क केलहुँ । एहिबेर ओकर फोन लागि गेल । ओ पुछैत अछि-

"कतएसँ बाजि रहल छी?"

"हमसभ बेंगलुरु आएल छी। दिल्लीमे मोन उबिआ गेल छल। भेल जे थोड़बो दिनक हेतु कतहुसँ घुमि आबी। भेल जे तोरोसँ भेंट भए जाएत। तोहर कारखाना सेहो देखि लेब । पड़ोसीसँ सेहो भेंट भए जाएत।"

"नीक केलहुँ। हमर कारखानाक काज तँ शुरु भए गेल मुदा परेसानी बहुत भए रहल अछि।

"से की?"

"सामानसभ बाहर पठाओल जा रहल छल। शत्रुसभ बहुत रास सामानसभ रेलवेयार्डसँ चोरा लेलक । बहुत रास सामानसभ रेलवे यार्डेमे राखल-राखल सड़ि रहल अछि ।"

"से केना भेल? ई तँ रेलवेक गलती अछि। ओकरा सामानक सुरक्षा करबाक चाही।"

"ओकरोसभक एहिमे हाथ लागि रहल अछि। पुलिस सेहो मदति नहि कए रहल अछि । ओही चक्करमे परेसान छी। कारखानाकेँ बरबाद करएपर लागल अछि।"

 "आब की होएत? मकानक बन्हक कोना छुटत?"- हमसभ मुरलीक बात सुनि कए चिंतामे पड़ि गेलहुँ । हमरसभक मुख्य चिंता तँ से छल।

फोनेपर मुरली हमरासभक होटलक पता लेलक आ थोड़े कालक बाद अपने ओतए आबि गेल । ताबे हमसभ होटलसँ निकलबाक हेतु तैयार रही। मुरली अबैत अछि। हमसभ ओकर आग्रहपर ओकरा संगे बिदा भए जाइत छी। हमसभ मुरली संगे ओकर डेरापर पहुँचैत छी। तीन कोठरीक  बड़ीटा डेरा छैक ओकर। सौंसे सामानसभ यत्र-तत्र पसरल छल। कतहु किछु,कतहु किछु। रमा डेरापर पहुँचितहि ओकरा सुव्यवस्थित करबामे लागि जाइत छथि। हम ताबे स्नान-ध्यान करैत छी। मुरली ककरो-ककरो फोन कए रहल छल। हमरासभक हेतु सिंघारा आ जिलेबी मंगा कए रखने छल। स्नान-ध्यानक बाद हमसभ चाह-जलखै करैत छी। मुरली सेहो चाह पीबैत अछि। कनी-मनी सिंघारा सेहो खाइत अछि। मीठ नहि खाइत अछि सुगर बढ़ि गेल छैक। रक्तचाप सेहो बढ़ल रहैत छैक। से बातसभ पहिल बेर बूझि रहल छी। तकरसभक दबाइ खाइत अछि। एतेक परेसानीक अछैतो ओ कारखानाक काजसँ बाहर चलि जाइत अछि। जाइत-जाइत कहैत अछि-

"अहाँसभ आराम करू। हमरा वापस अएबामे देरी भए सकैत अछि। अहाँसभ हड़बड़ाएब नहि।"

हम की उत्तर दितिऐक । सहमतिमे मुरी हिला देलिऐक । मुरली अपन झोरा लेने बाहर भए जाइत अछि। हम अखबार पढ़ि रहल छी। रमा पूजा-पाठमे लागि जाइत छथि। मुरली जाइत-जाइत लगपासक दोकानसभक जनतब आ मोबाइल फोन संख्या सेहो देने गेल जाहिसँ जरूरी सामानसभ फोनेपर  कहि कए मगा सकैत छी। ओना मुरलीक डेरामे तत्काल सभटा चीज रहैक,मुदा अव्यवस्थित। थोड़ेकाल विश्राम केलाक बाद हम पड़ोसीकेँ फोन लगबैत छी। ओकरासभटा बात कहैत छिऐक । ओ एसगरे अपन घरमे पड़ल छल। पुतहु जहलमे बंद छैक। ओकरा आजन्म कारावासक दंड भेल छैक। बेटा घर छोड़ि कतहु चलि गेलैक। कतए गेलैक-कहाँ गेलैक कोनो अता-पता नहि छैक। फोनपर एतेक बात सुनि कए हमहूँसभ परेसान भए गेलहुँ । मोन भेल जे तुरंत ओकरासभ भेंट करी ।

"मुदा ओकर डेरा जाएब कोना? एहिठाम तँ केओ अछि नहि?"

"एहिमे चिंताक कोन बात छैक? ताला लगा दिऔक आ चलू। दिनभरि एहिठाम रहिए कए की करब? केओ अछिओ नहि जे कतहु घुमाओ देत। तखन तँ घरमे मुनल पड़ल रहबासँ नीक जे पड़ोसी हाल-चाल लेबए चली।

"ठीके कहलहुँ। एतहु तँ बैसले छी।"

दुनू बेकती  पड़ोसीक डेरा हेतु टैक्सी करैत छी । पड़ोसीक घर बेसी फटकी नहि छल। हमरासभकेँ टैक्सीबाला ओकर घरक सामनेमे ठाढ़ कए देलक। हमसभ ओकरा भाड़ा दैत छी आ पड़ोसीक घर दिस बढ़ैत छी। ओकर घर सोसाइटीक भीतरमे द्वारिसँ सटले बामा कातमे प्रथम तलपर छल। द्वारिपर बैसल प्रहरी हमरा अपन गंतव्यक जानकारी लैत अछि आ सामनेक फ्लैट दिस इसारा करैत अछि। हम दुनू बेकती लगेमे फलक ठेलापरसँ दू किलो सेब कीनि लैत छी। ओकरा झोरामे रखैत छी आ पड़ोसीक फ्लैट दिस बढ़ैत छी। कनीके आगू गेलहुँ तँ ओकरा सामने सीढ़ीपरसँ हुलकैत देखैत छी।

"आबह, आबह।"-ओतहिसँ पड़ोसी चिकरल। ओकर बगए देखि हम दुखी भए जाइत छी। देह कांट-कांट भए गेल छैक । माथपरहक केस उड़िआ रहल छैक। ओकरा देखलासँ लगैत अछि जेना कतेक दिनसँ दुखित होअए।

हम सीढ़ीपर कनीके आगू बढ़ल रही कि पड़ोसी सामने प्रकट भए गेल। हमरा देखितहि ओ जोर-जोरसँ कानए लागल। ओकर परिस्थिति देखि रमा सेहो बहुत दुखी भए गेल रहथि । हमसभ सोचिए नहि पाबी जे आखिर ओकरा की कहिऐक? एहि बएसमे अपने लोक द्वारा एहन कष्ट देल जेतैक से के सोचि सकैत छल? दिल्लीसँ आएल छल जे अपन घर जा रहल छी। मुदा एतए अएलाक बाद तँ जेना ओकरसभ किछु बरबाद भए गेलैक। पत्नीक हत्या भए गेलैक। पुतहु आजन्म कारावास काटि रहल छैक। बेटा बौरा कए कतहु चलि गेलैक। ओकर कोनो अता-पता नहि छैक । ओ असगर जीबिए रहल अछि सएह बहुत।

42

 

कहबी छैक जे गुड़क मारि धोकरे जनैत अछि।  पड़ोसीक मनोदशा आन के बूझि सकैत छल? किछु कहि देब,बुझा -सुझा देब बहुत आसान होइत छैक। जखन अपनापर पड़ैत छैक तखन सभटा बुधिआरी धएले रहि जाइत छैक। पड़ोसी कतेक बुधिआर,सहनशील आ मिलनसार छल? हमरा लोकनिक हेतु तँ ओ ईश्वरक वरदाने छल। जखन कखनहु कोनो समस्या भेल ओ हमरा लग ठाढ़े रहैत छल।  देहसँ,टाकासँ ,विचारसँ ओ हमरासभक मदति करिते रहैत छल। एहन नीक लोक एतेक कष्टमे पड़ि गेल। एहिसँ आश्चर्य आ दुखक बात आर की भए सकैत छल? कहल जाइत अछि जे नीक केलापर नीक फल होइत छैक,मुदा एहिठाम तँ उनटे देखा रहल अछि।

हमसभ अपना भरि पड़ोसीक दुख बाँटबाक प्रयास करैत छी। ओकरा लग घंटो बैसल रहि जाइत छी। ओकर मोन दोसर दिस घुमैक ताहि हेतु तरह-तरहक बात करबाक प्रयास करैत छी। मुदा ओ रहि-रहि कए ओतहि पहुँचि जाइत अछि । हम आखिर पुछिए देलिऐक-

"आर तँ जे भेल से भेल मुदा तोहर बेटा किएक तोरा छोड़ि कए चलि जाइत रहल?"

"की कहिअह? असलमे ओकरा मोनमे गड़ि गेल छैक जे ओकर पत्नीक जहल पहुँचाबएमे हमरे हाथ अछि। हमही ओकर खिलाफ गबाही देलिऐक। आब तूँही कहह जे हम सही बात कोना नहि कहितिऐक। फेर पुलिसकेँ तँ सीसीटीभीमे साक्षात साक्ष्य भेटि गेल रहैक।  ओकर ईहो कहब छैक जे हमसभ यदि एतए नहि अबितहुँ तँ ई फसादसभ नहि होइत। मुदा हमसभ अपन घर कोना नहि अबितहुँ? एतए नहि अबितहुँ तँ कतए जइतहुँ? ककरा लग जइतहुँ? अपन बनाओल घर अछि,अपन बेटा-पुतहु अछि ,ताहि ठाम कोना नहि अबितहुँ? मुदा ओ एही बातकेँ पकड़ि कए बैसि गेल। दुर्घटना कोनो नियारल होइत छैक? अकस्मात बहुत रास बातसभ होइत गेलैक जाहिपर ककरो वश नहि रहैक। अंतमे कहहि पड़त जे भावी प्रबल होइत अछि।

हमरा पड़ोसी बात सुनि-सुनि बहुत कष्ट होइत छल। पता नहि ओ कतए खाइत अछि,कोना समय बितबैत अछि,एसगर एहि घरमे कना जीबि रहल अछि?हम ओकरा पुछबो केलिऐक-

"आखिर तूँ एतए खाइत-पीबैत कोना छह?"

"गुरुद्वारा चलि जाइत छी। ओतहि लंगरमे सामिल भए जाइत छी । ओएहसभ हमर जीवनक आधार अछि। यदि से नहि रहैत तँ कहि नहि कहिआ मरि गेल रहितहुँ।"

"हमरा तँ मोन होइत अछि जे तूँ हमरेसभक संगे दिल्लीएमे रहह।"

"से कोना संभव भए सकैत अछि? जिनगीक कोन ठेकान अछि? कतेक दिन जिअब,की की देखब,की-की भोगब?"

"हमरो हालति कोनो ठीक नहि अछि। मकान बन्हक पड़ि गेल अछि। मुरली बहुत रास टाका से लए लेलनि, कारखाना खोललनि। आब ओहिमे घाटा लागि रहल छनि। कारबार बंद पड़ल छनि। हुनकर पहिले बेर बनल सामानसभकेँ प्रतिद्वंदीसभ बरबाद करबा देलकनि।"

"ई तँ बहुत अनर्थ भेल। कम सँ कम मकान बचा कए राखबाक छलह।"

"बहुत प्रयास केलिऐक। मुदा होइत अछि ओएह जे लिखल रहैत अछि।"

"ओना हमर फ्लैट खालीए अछि। तूँसभ जखन चाहह एतए रहि सकैत छह।"

"अखन ओ स्थिति नहि आएल अछि। अपना भरि प्रयासमे छी जे मकान बाँचि जाए। आगू भगवान मालिक।"

हम,रमा आ पड़ोसी एहि तरहेँ एक-दोसरक कष्ट बाँटि रहल छलहुँ,एक-दोसरकेँ बौसि रहल छलहुँ कि अचानक घरक घंटी बाजल। जाबे पड़ोसी उठितए,केबार खोलितए ताहिसँ पहिनहि ओ व्यक्ति केबार लग पहुँचि गेल आ केबारपर जोरसँ लात मारलक । केबारक छिटकनी नीकसँ नहि लागल रहैक ओ सड़कि कए नीचाँ खसि पड़लैक,केबार खुजि गेलैक। हमरासभक सामनेमे एकटा अधबएसू ,कारी,भुट्ट जबान ठाढ़ छल। ओकर माथक केस उड़िआ रहल छल । दाढ़ी बढ़ल छल । बामा हाथमे एकटा झोरा छल। ओहिमे किछु राखल छल,जेना किछु कागज-पत्तर होइक। हमरासभ के छी,नहि छी ताहि बातक बिना कोनो परिबाह केने ओ पड़ोसीपर चिकरल- "जल्दीसँ निकलि जाह एहिठामसँ । यदि जानक काज छह तँ भागह,नहि तँ आब बचबह नहि। ई सभ केओ काज नहि अएतह? जहिना हमरा बरबाद केलह अछि ,तहिना तोरो अखने स्वाहा कए देबह।"-से कहि ओ झोरामे हाथ देलक। पड़ोसी डरे थर- थर काँपि रहल छल। हम दुनू बेकती तँ अबाक छलहुँ।

"ई के अछि? एना पड़ोसीपर किएक चिकरि रहल अछि?"

"तूँसभ सेहो निकलह । जल्दी निकलह । हमरा एकरासँ ओलि चुकाबए दएह। देरी करबह तँ तोरोसभक अनेरे दुर्दशा होएत?"

"मुदा तूँ छह के? एना किएक बाजि रहल छह?"-रमा साहस कए ओकरा पुछलखिन।

"हम छी एकर अभागल बेटा। आरो किछु पुछबाक छह तँ पुछि लएह । मुदा एहिठामसँ जल्दी ससरि जाह। आइ हमरा एकरा संगे नओ-छओ करबाक अछि। आब बहुत भए गेल।"

पड़ोसी तँ जेना मुरुत भए गेल छल। की बाजैत? की करैत? जखन बेटे एहन निकलि गेलैक तखन ओ कइए की सकैत छल? एकटा लोटा लेलक,झोरामे दू खंड धोती आ गमछा रखलक आ बिदा भए गेल। हमहूँसभ ओकरा पाछू-पाछू ओहि फ्लैटसँ बाहर भए गेलहुँ । ओ हमरासभकेँ निकलैत देखि जोरसँ ठहाका पाड़लक। बाजि उठल-" अपन-अपन जान लए कए भागैत जो । भाग, भाग "

हमसभ बिना किछु उत्तर देने ओहि फ्लैटसँ बाहर भए गेलहुँ, आगू बढ़ि गेलहुँ ।

43

 

पड़ोसीक मनोदशाक वर्णन करब संभव नहि अछि। जीवन भरि जाहि संतानक हेतु संघर्ष केलक, सएह आइ काल बनि कए ठाढ़ भेल छैक। कारण जे होइक। सही गलतीक बात भए सकैत छैक। मुदा बात एहि हद धरि चलि जाए जतए बाप-बेटा एक-दोसरक शत्रु बनि जाए, निश्चय एकटा दुखद प्रसंग तँ अछिए । हम इएह सभ सोचैत रमा आ  पड़ोसीक संगे बाहर भेलहुँ । संयोगसँ तुरंते एकटा टैक्सी भेटि गेल । ओकरा मुरलीक डेरा धरि पहुँचा देबाक आग्रह केलिऐक । ओ तैयार भए गेल । हमसभ टेक्सीमे बैसि जाइत छी। टैक्सी अपन गंतव्य दिस बिदा भए जाइत अछि। हम पड़ोसीकेँ टोकैत छी। किछु कहबाक प्रयास करैत छी। मुदा ओ तँ जेना जीबैत लास बनि गेल छल। ओकर आँखिमे शून्यता भरल छलैक। ओ एकटक बाहर दिस देखिते जा रहल छल । किछु नहि बजैत छल,किछु नहि सुनैत छल। थोड़े कालक बाद टैक्सी गुरुद्वारा लग पहुँचल। ओ अचानक सक्रिय भए गेल। वाहन चालककेँ टैक्सी रोकबाक आग्रह केलक। जाबे हमसभ किछु कहितिऐक,ओ टैक्सीसँ उतरि गेल। हमहूँसभ ओकरा लागल उतरि गेलहुँ । हम पुछलिऐक-

"एहिठाम किएक उतरि गेलह। अखन हमरासभक संगे चलह। तोरा विश्रामक जरुरी छह। थोड़बोकाल सुस्तेलाक बाद जेना जे विचार हेतह से करिअह।"

"हम आब कतहु नहि जाएब। हम एही गुरुद्वारामे रहब। हमसभ ओकर जिदक आगू हारि गेलहुँ । पड़ोसीक संगे गुरुद्वारा गेलहुँ । ओहिठाम सभगोटे माथा टेकलहुँ। तकर बाद हमसभ प्रसाद लेलहुँ । थोड़े काल शबद कीर्तन सुनलहुँ । कीर्तन सुनि हमरसभक मोन कनी शांत भेल। पड़ोसीकेँ सेहो स्थिर देखलिऐक। पड़ोसी ओतहि बैसि गेल आ हमरासभकेँ इसारासँ कहि देलक जे आब ओ कतहु नहि जाएत। एतहि रहत। हमहूँसभ की करितहुँ? आखिर ओकरा ठामहि छोड़ि टैक्सीसँ मुरलीक डेरा बिदा भए गेलहुँ।

हम आ रमा मुरलीक डेरा पहुँचि रहल छी। सीढ़ीएपर मुरली भेटि गेल।

"हम तँ कखनसँ अहाँक फोन लगा रहल छी। मुदा ओहिमे निरंतर "फोन बंद अछि" क समाद आबि रहल अछि। हम फोन निकालैत छी। वस्तुतः फोन बंद अछि। ओकर बैट्री खतम भए गेल छैक। घर पहुँचितहि सभसँ पहिने ओकरा चार्जींगमे लगा दैत छी। मुरली हमरासभक भोजनक हेतु किछु अनने अछि। ओ झोरासँ दूटा पैकेट निकालि कए टेबुलपर रखैत अछि।

"ई की अछि?"

"खा कए देखिऔक ने? बहुत नीक लागत। एहिठामक ई प्रसिद्ध भोजन अछि।"

हम तँ बहुत भूखाएल रही। तुरंत खेनाइ शुरु कए दैत छी। मुदा रमा ओकरा छुबितो नहि छथि।

"कहि नहि की केना बनल होएत? हमरा ई  सभ नहि अरघत।"

"मुदा भूखले कोना रहब?"

"से किएक? किछु बना लेब ।"

"जे विचार।"

हम भरिपेट भोजन कए लेलहुँ । रमा भूखले रहि गेलथि,किछु नहि खेलथि ।

"मुरली तँ भोजन कइए कए आएल अछि। तखन हम असगर लेल की बनाउ?"

"ने अहाँ पाकिटबाला भोजन करब, ने अपने बनाएब तखन जान कोना बाँचत?"

रमा हारि कए ओहो ओहि डिब्बाकेँ खोलैत छथि। बहुत अछता-पछता कए ओहिमेसँ एक टुकड़ी मुँहमे रखैत छथि।

"ई तँ बहुत स्वादिष्ट अछि। मुँहमे दैते देरी गलि गेल।"

"तेँ ने कहलहुँ । ओहिना धारणा नहि बना लेबाक चाही।"

हमसभ थाकल तँ रहबे करी । ओछाओनपर जाइते सुता गेल। हमसभ भोरे उठलहुँ तँ मुरली निकलि गेल छल। तकर बाद कैकदिन धरि ओ नहि आएल। ओकरो कारखानामे उरी-बिरी लागल छैक। पहिले खेपक सामानसभकेँ तेना ने फँसा देलकैक जे ओकर हाल-बेहाल छैक। अखन धरि किछु फएदा नहि भेलैक। खर्चे होइत रहलैक। संभवतः ओ लाजे छीह काटि रहल अछि। हमसभ मास दिनसँ फ्लैटपर पड़ल छी। मोसकिलसँ दू वा तीन बेर ओकरासँ भेंट भेल। ओ यदि कहिओ काल एतए अएबो कएल तँ बहुत देरीसँ । ओहन हालतिमे की गप्प होइत?

हमसभ ओहि फ्लैटमे मुनल-मुनल तंग भए गेलहुँ । कहिओ काल शालिनीसँ गप्प भए जाइत छल। मुदा ओकरो स्वास्थ्य एमहर खराप भए गेल छैक । सहर-सहर कोरोना फैल गेल छैक। ओकर पूरा परिवार सेहो कोरोनाक चपेटमे आबि गेल छैक। ततबा समाचार शालिनी पछिला बेर फोनपर गप्पमे कहने रहए। बेंगलुरुमे सेहो कोनो नीक हाल नहि छैक। एहनमे हमसभ दिल्ली वापसो नहि भए सकैत छी। माहौल देखिते-देखिते एतेक खराप भए जाएत तकर केओ अनुमान नहि लगा सकैत छल। मुदा आब तँ जेना सौंसे दुनिआपर विनाशक पहड़ा भेल छैक । आब की करी? किछु फुरा नहि रहल अछि।

एहनो हालतिमे मुरली कारखानाकेँ बचेबाक प्रयासमे लागल रहल। मुदा से संभव नहि भए पाबि रहल छैक। चारूकात लाकडाउन भए गेल छैक। जनसभ काज छोड़ि-छोड़ि अपन-अपन गाम वापस चलि गेलैक। एहि तरहेँ जे कनी-मनी बाँचल छलैक से कसरि कोरोना पूरा कए देलकैक। ओकर कारखाना निठ्ठाह बैसि गेलैक। बैंकक कर्जक भुगतान नहि भए सकलैक। हेबो कोना करितैक? बैक कर्जक वापसीक हेतु किछुदिन धरि मोहलति देलकैक। मुदा सूदोक भुगतान नहि भए पबैक। आखिर ओ सभ न्यायालयमे नालिस कए देलक। हमरसभक दिल्लीक फ्लैटकेँ सील कए देलक । आब यदि दिल्ली जेबो करब तखन रहब कतए? ई भारी समस्या आबि गेल अछि। हम बूझिऐक जे भविष्यपर खतरा भए सकैत अछि। अपन घर बचा कए राखबाक अछि। मुदा भाबी प्रबल होइत अछि। हमर सोचलाहासभ किछु नहि भेल । सभटा उनटा-पुनटा होइत चलि गेल।

मुरलीओ की करितए? लाजे मुँह नुकओने रहए। डेरापर अएबो नहि करए। एहन हालतिमे हमसभ आब एहि ठामसँ कहिआ निकलब आ कतए जाएब से किछु नहि बूझा रहल अछि। जे भावी।

 

44

 

देखिते-देखिते चारूकातक माहौल कोरोनाक आक्रमणसँ भयाओन भए गेल छल। समय-साल एहन भए जाएत से के सोचि सकैत छल? हमसभ ओसोरापर बैसल इएहसभ आपसमे गप्प करैत रही । अचानक फोनक घंटी बाजल।

"हम मुम्बईक सरकारी अस्पतालसँ बाजि रहल छी।"

"हँ, हँ, बाजू।"

"शालिनीक पितासँ गप्प करबाक छल।"

"की बात?"

"शालिनि, हुनकर पति आ बेटी सभ एही अस्पतालमे भर्ती छथि। हुनकासभकेँ कोरोना भए गेल छनि। शालिनी हमरा अहाँक फोन संख्या देने रहथि आ कहने रहथि जे जरूरी भेलापर अहाँसँ गप्प कएल जाए।"

"ओकरसभक की समाचार छैक?"

"समाचार कोनो नीक तँ नहिए कहल जा सकैत अछि?"

"से की?"

"शालिनी आ हुनकर पति भेंटिलेटरपर छथि। संक्रमण बहुत बढ़ि गेल छनि।"

"ओह! नम्रताक की हाल छैक?"

"ओ आब ठीक अछि। ओकरा साँझ धरि नहि तँ काल्हि अस्पतालसँ छुट्टी भेटि सकैत अछि? मुदा समस्या अछि जे ओ जाएत कतए?ओकर परिचर्या के करत? अस्पतालसँ छुटलाक बादो ओकरा मास दिन देखभालक प्रयोजन रहतैक।"

फोन कटि जाइत अछि? हमसभकिछु नहि सोचि पाबि रहल छी। रमा ई समाचारसभ बूझि ठामहि टगि जाइत छथि। दाँतपर-दाँत बैसि गेल छनि। जल्दीसँ पानिक झोंका दैत छिअनि । थोड़े कालक बाद ओ आस्तेसँ आँखि खोलैत छथि। पुछैत छथि-

"शालिनी कोना अछि? कोना छैक ओकर पति?नम्रताक की हाल अछि?"

 एतेक बाजि कए ओ फेर बेहोस भए जाइत छथि। हम सोचिए नहि पाबि रहल छी जे की करू?रमाक हालति देखि तँ आर परेसान छी। पहिने ई ठीक होथि तकर बादे किछु आर सोचल जाएत। स्थानीय डाक्टरसँ फोनपर विमर्श करैत छी। ओ किछु दबाइ लिखा दैत अछि। दबाइक दोकानकेँ फोन कए ओ दबाइसभ मंगबैत छी। रमाकेँ दबाइसभ खुआबैत छी। दबाइ खेलाक बाद ओ सुति जाइत छथि। तीन घंटाक बाद हुनकर निन टूटैत छनि। ओ तुरंत शालिनी आ ओकर हाल-चाल पुछैत छथि।

एही बीचमे मुम्बईसँ फेर फोन आएल। शालिनीक पतिक देहावसान भए गेलनि। शालिनीक हालति सेहो नीक नहि छनि। लंग्स मात्र पैंतीस प्रतिशत बाँचल छनि। महग-महग सुइआ पड़ि रहल छनि। देखा चाही की होइत छनि? नम्रताकेँ काल्हि अस्पतालसँ छुट्टी भेटि जेतैक। मुदा ओ जाएत कतए? ई सभसँ पैघ समस्या अछि। हम ई बातसभ रमाकेँ नहि कहलिअनि। सोचलहुँ जे बेसी बातसभ बुझतीह तँ फेर ओएह स्थिति भए जेतनि। पहिने ई थेहगर भए जाथु। फेर किछु करब।

 मुदा मुम्बईमे परिस्थिति तेहन भए गेल छल जे बेसी विलंब नहि कएल जा सकैत छल। अस्तु,हम रमाकेँ बिना कहने मुम्बई जेबाक निर्णय करैत छी। मुदा जाएब कोना? ट्रेन,जहाजसभ बंद अछि। संयोगसँ एकटा टैक्सी भेटि जाइत अछि। काल्हि भोरे हम आ रमा ओहीसँ मुम्बई बिदा होएब । आगू जे गति लिखल होएत से होएत। रमा ओहि दिन विश्रामक बाद रातिभरि सुतले रहि गेलथि। संभवतः दबाइसभक असरि रहल होएत। भोरे अन्हरोखे जखन उठलथि तँ हमसभ बात हुनका कहलिअनि। ओहो जल्दीसँ तैयार होइत छथि। हमदुनू बेकती टैक्सीसँ मुम्बई बिदा होइत छी। बीच-बीचमे मुम्बई अस्पतालमे फोन लगाबक प्रयास करैत छी। मुदा फोन नहि लगैत अछि। मुम्बई पहुँचएमे दू दिन लागि जाइत अछि। ताबे पता नहि की हाल रहत? इएह चिंता अछि। दोसर दिन साँझमे हमसभ मुम्बई पहुँचि जाइत छी। टैक्सी हमरासभकेँ सोझे अस्पताल लेने चलि जाइत अछि । अस्पताल पहुँचितहि हमसभ शालिनीक अता-पता करैत छी।

"ओ बाँचल अछि। ओकर हालतिमे लगातार सुधार भए रहल छैक।"- डाक्टर कहलक।

 "आ नम्रता?"

"ओ आब ठीक अछि। ओकरा अखन अस्पतालेक अतिथिगृहमे राखल गेल अछि । आब अहाँसभ ओकरा जखन चाही अपना संगे लए जा सकैत छी।"

"शालिनीक पतिक लासक की भेलनि?"

"जखन लास लेबए केओ आगू नहि भेल सरकार ओकर अंतिम संस्कार करबा देलक।"

हमसभ सुनिते जा रहल छलहुँ। किछु  बजबाक स्थितिमे नहि रही। बजबो की करतहुँ? नम्रतासँ भेंट करबाक उत्सुकता छल। शालिनीसँ तँ भेंट नहिए भए सकैत छल। रच्छ छल जे ओकर हालतिमे सुधार भए रहल छलैक। हमसभ अस्पतालक अतिथिगृह पहुँचैत छी। ओहिठाम नम्रताक कोठरी लग पहुँचैत छी। बाहरेसँ हमसभ ओकरा देखैत छी। ओहो हमरासभकेँ देखैत अछि।

"अखन किछुदिन नम्रतासँ एहिना भेंट होएत। एक सप्ताहक बादे अहाँ हुनका लए जा सकैत छी।"

"ताबे हमसभ कतए रहब?"

"एतहु रहि सकैत छी। अतिथिगृहमे, अथवा घर जा सकी तँ अहाँक मरजी।"

हम आ रमा बहुत थाकि गेल रही। नम्रताकेँ देखि मोनमे संतोष भेल। कम सँ कम ई तँ बाँचि गेल। हमसभ ओतहि अतिथिगृहमे फराक कोठरीमे रहि जाइत छी जाहिसँ नम्रतासँ संपर्क बनल रहत। शालिनीक हाल-चाल सेहो भेटैत रहत।

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सात दिनक बाद शालिनीकेँ सेहो अस्पतालसँ छोड़ि देल गेलैक। शालिनी,नम्रता आ हम दुनू बेकती शालिनीक घरपर पहुँचैत छी। अखन धरि शालिनीकेँ नहि बूझल रहैक जे ओकर पति आब नहि रहलाह। दुनूगोटे संगे-संग दुखित भेल रहए। संगे अस्पताल गेल रहए। अस्पतालोमे लगे-पासमे रहए। मुदा वापसीमे ओ नहि छथिन। हमरासभकेँ एहि प्रश्नक उत्तर देबाक हेतु नियति अनने छल। एहन विकट स्थितिक सामना करए पड़त से नहि सोचने रही। शालिनी बेर-बेर हुनका बारेमे पुछि रहल अछि। हमरासभक मौनसँ ओ बूझि गेल जे मामिला गड़बड़ अछि। ओ चिचिआ उठैत अछि।

"बाजैत किएक नहि छैं? ओ कतए छथिन? हुनकर की हाल छनि?"

हमसभ की कहितिऐक? आखिर ओ जे बूझबाक छल से बूझि गेलि। तकरबाद जे दृश्य भेल से लिखब मोसकिल थिक । ओकरा रहि-रहि कए दाँती लागि रहल छल,जहाँ होस होइक कि ओ इएह प्रश्नसभ पुछए लगैत छल। आखिर हम ओकरा अस्पतालक कागज हाथमे पकड़ा देलिऐक। ओ ओकरा पढ़ैत अछि आ भोकारि पारि कए कानए लगैत अछि। नम्रता सेहो ओकरा संगे कानि रहल अछि। रमा आ हम तँ परेसान रहबे करी। लगपासक लोकसभ कोरोनाक डरसँ केओ लगमे नहि आएल। आखिर कनैत-कनैत ओ सभ थाकि गेलि। कखनहु ई हेबेक रहैक। हमसभ एहि स्थितिकेँ देखबाक हेतु विवश रही।

 शालिनी आ नम्रताकेँ आश्वस्त हेबामे समय लगलैक। आठ-दस दिनक बाद ओकर मोन कनी  स्थिर भेलैक। ओ नम्रताकेँ देखि कए संतोष केने रहए । अस्पतालसँ अबैत काल डाक्टर कहने रहैक जे मास दिनका बाद सभकिछु जाँच करबा लेब । अस्पतालसँ छुटलाक बाद नम्रताकेँ दस्तकब्ज भए गेल छैक। से ठीके नहि भए रहल छैक। शालिनीकेँ दम फुलैत रहैत छैक। दुनूगोटेकेँ हमसभ अस्पतालमे जाँचक हेतु लए जाइत छी। नम्रताकेँ किछु दबाइ देल जाइत छैक। एक सप्ताह धरि ओ दबाइ खाएत । तकरबाद जरूरी भेलापर फेरसँ डाक्टरसँ देखा लेत। शालिनीक सेहो पूरा जाँच होइत छैक। ओकरा हृदय संबंधी समस्या बुझा रहल छैक जे पहिने कहिओ नहि रहैक। ई एकटा नव समस्या ठाढ़ भए गेलैक। ओकर पति तँ चलिए गेलखिन,संगे अपने सेहो स्वस्थ नहि रहि सकलि। अपितु,हृदयसंबंधी बिमारी भए गेलैक। शालिनीक पतिक देहान्तक बाद हँसैत नहि देखलिऐक। ओ सदिखन अपन पतिक शोकमे नोर बहबैत रहैत अछि। एहनमे दबाइ की असरि करतैक ?  जखन मोने अस्वस्थ अछि तखन देहमे की फएदा हेतैक?शालिनी आ नम्रताक उचित उपचार चलैत रहल। नम्रता तँ शीघ्रे ठीक होइत गेल। मुदा शालिनीकेँ किछु-ने-किछु समस्या लागले रहैत छल। उकासी तँ दिन-राति होइते रहैत छलैक।

एहन माहौलमे हमरासभकेँ के पुछैत अछि? जखन हमर धिआ-पुताक जीवन संकटमे पड़ल अछि तखन अपना बारेमे की सोचू?हमरासभक हालति सेहो कोनो ठीक नहि छल। बहुत दिनसँ डाक्टरसँ देखओने नहि रही। पुरने दबाइसभ चलि रहल अछि।  एमहर रमाकेँ ठेहुनमे दर्द बढ़ि गेल छनि। चलबामे मोसकिल होइत छनि। हमरा सदिखन धोआनि-ढेकार दैत रहैत अछि। मुदा कएल की जाए? जेना-तेना समय काटि रहल छी। कहुना ई सभ ठीक होअए तखन अपनासभपर ध्यान दी। बहुत रास समस्याक समाधान समय स्वयं करैत अछि।  समय द्वारा देल गेल घाव समये भरैत अछि।   एही आशामे हमसभ जीबि रहल छी। आशा करैत छी जे किछुदिनमे शालिनी सेहो सम्यक भए जाएत आ अपन जीवन संघर्षकेँ आगू चला सकत।

मुम्बईमे हमरसभक एकमास केना बितल से हमहीसभ जनैत छी। आब मोन उबि रहल अछि। नम्रता ठीक भए गेल अछि । शालिनीक स्वास्थ्य ऊपर-नीचाँ होइत रहैत छैक । तथापि,ओ घरेसँ काज शुरु कए देलक अछि।  आब जखन एमहरसँ मोन कनी हल्लुक भेल तँ आर चिंतासभ असबार भेल जा रहल अछि। मुरलीक की हाल छैक? श्यामक जहल कहिआ खतम हेतैक? पड़ोसीक चिंता सेहो होइते रहैत अछि। ओएह तँ एकटा एहन आदमी छल जकरासँ मोनक गप्प करी। आब ओ अपने अस्तव्यस्त भए गेल अछि। आर तँ जे भेल से भेल,हमरसभक घरो बन्हक पड़ि गेल अछि आ आब ओकरा वापस हेबाक कोनो संभावना नहि लागि रहल अछि। मुरलीक कारखाना लगातार घाटामे चलि गेलनि। कर्मचारीसभ कोरोनाक समयेमे छोड़ि गेल। बैंकक कर्ज बढ़िते जा रहल छैक। हमरसभक मकानक तँ भगवाने मालिक छथि। एकदिन हम बैंक प्रबन्धककेँ फोनो केलिऐक ।

"हमरसभक मकान कोना छुटि सकैत अछि?"

"बैंकक कर्जा सधत तखनहि ई संभव अछि।"

"कतेक कर्जा छैक?"

"दू करोड़ तँ मूर अछि। ऊपरसँ सूदिओ देबाक हेतैक।"

हम प्रबन्धकक बात सुनि कए अबाक रहि गेलहुँ । रमाकेँ ई बातसभ नहि कहलिअनि। ओ तँ ओहिना परेसान रहैत छथि । स्वास्थ्य से संग नहि दए रहल छनि। दूपहरिआमे असगर बैसल रही कि पड़ोसीक फोन आएल ।

"कोना छह?"

"की कहिअह? गुरुद्वारामे किछुदिन रहलहुँ। मुदा ओतए असालतन तँ नहि रहि सकैत छलहुँ । ओएहसभ सरकारी वृद्धाश्रमक पता देलक। ओहीठाम छी। मुदा एहिठाम तँ नर्कोसँ बेसी खराप हालति छैक।"

"से किएक?"

"की-की कहिअह? कतहु जइअह,सरकारी वृद्धाश्रममे नहि जइअह।"

"से किएक?"

"की कहियह? लगैत अछि कहिओ खून भए जाएब।"

"राम, राम।"

"अपन हाल कहह?"

ओ एतबे पुछलक कि हम फोनेपर कानए लगलहुँ । हमरा फोनपर कनैत देखि रमा दौड़लीह।

"की भेल? एना किएक कानि रहल छी? "

पड़ोसी से हमर कानब सुनि कए परेसान भए गेल । हम आगू किछु नहि बाजि सकलहुँ । फोन राखि देलिऐक। रमा हमरा लग बैसल छलीह । किछु कहने बिना जेना बहुत किछु कहि रहल छलीह ।

 

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