प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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डॉ. धनाकर ठाकुर (संपर्क- 9843376861)

ध्वनिविज्ञानी प्रो. डा. रामावतार यादवक अनुसार वर्णरत्नाकरक भाषा मैथिली

ध्वनिविज्ञान भाषाक एकटा शाखा थिक जकरा विषयमे सामान्य जनक ज्ञान सीमित रहैत अछि। डा.रामावतार यादव एहिपर काज कएलन्हि आओर मैथिलीपर सेहो। तेँ हुनक नाम हमहुँ सूनलहुँ। पढ़बाक संयोग अनायासहि भेल, कारण ई हमर विषय नहि अछि, तथापि अपन मातृभाषाकेँ उपेक्षित कोना क' सकै छी। मातृभाषा लेल केओ किछुओ केलन्हि ओ आदरणीय छथि। एहि क्रममे हमरा हुनकासँ मात्र एक बेर भेँट काठमांडूमे उनैसम अन्तरराष्ट्रिय मैथिली सम्मेलनक उपरांत भेल छल 14 अप्रैल 2009 . केँ। अन्तरराष्ट्रिय मैथिली परिषदक शिष्टमंडलकेँ नेपालक महामहिम उपराष्ट्रपति परमानन्द झासँ भेँट करबाक छल जाहिमे अन्तरराष्ट्रिय मैथिली परिषदक निवर्तमान अध्यक्ष डा. भुवनेश्वर प्रसाद गुरुमैता आ' नवनियुक्त अध्यक्ष डा. कमलकांत झाक संग डा. रामावतार यादव  सेहो छलथि। बहुत बात आब हमरा याद नहि अछि, मुदा डा. रामावतार यादवक एकटा बात स्मरण जरूर अछि जे ओ गुरूमैताजीकेँ कहलखिन्ह जे गुरुमैताजी, "वर्णरत्नाकरक भाषा मैथिली अछि"

हमरो तँ यैह बूझल छल जे ओ मैथिलीक पहिल पोथी उपलब्ध अछि आओर यैह डा. रामावतार यादव सेहो मानैत छथि। एकर चर्च डा. यादव अपन पोथी "A Reference Grammar of Maithili'क पृष्ठ संख्या 13 पर कएलनि अछि। एहि प्रसंग पहिनहुँ कतोक ठाम अनेक विद्वान् लोकनि द्वारा कएल गेल अछि। तत्कालीन समय जँ विश्वकोश होइतैक तँ तकर खोज अवश्य भेल रहैत आ' तखन मैथिली क्लासिकल भाषामे आबि जाइत। मुदा,   मैथिली वा अन्य प्राक्मैथिली भाषा मध्य विद्वान् लोकनिक बीच अद्यावधि विवादक विषय बनल अछि। गुरुमैताजी कम बजैत छथि, किछु नहि बजलाह वा चलैत कालमे नहि सुनलाह किन्तु एक बात जरूर जे डा. रामावतार यादवक अनुसार वर्णरत्नाकरक भाषा मैथिली अछि आओर हमरासन सामान्य लोकक लेल यैह पर्याप्त।

आब हुनक पोथी 'A Reference Grammar of Maithili' पर किछु विचार कएल जाए। अंग्रेजीमे लिखल करीब चारि सए पृष्ठक ई पुस्तक एकटा संदर्भ ग्रन्थ थिक। एहि पोथीक पहिल अध्याय मैथिली व्याकरण सान्दर्भिक एक शताब्दीक परम्परापर अछि जे जार्ज अब्राहम ग्रियर्सनक 1881.क लिखल व्याकरणसँ प्रारम्भ होइत अछि। पश्चात् आर. झा -1955., बालगोविंद झा 'व्यथित' 1966 ., पं.गोविन्द. झाक 1966., डी. झा 1976 ., वाई. झाक 1979 ., भैरवलाल दास आ' आनन्द  मिश्र मैथिलीक व्याकरण लिखलन्हि जकरा सभक चर्चा प्रस्तुत पुस्तकमे भेल अछि।

एहि पोथीमे आठ स्वर ओ 26 व्यंजनक विस्तारसँ वर्णन विभृत अछि। ध्वनिवैशिष्ट्य एहि पोथीक केन्द्र अछि आओर ई सिद्ध करैत अछि जे मैथिली हिन्दी वा बंगलाक बोली नहि अपितु पृथक् भाषा थिक। संभवतः अंगिका, जकरा ग्रियर्सन पूर्वमे 'छिका छिकी: कहलखिन्ह हम दक्षिणी मैथिली नामकरण देल, से आब  स्वीकार भय चुकल अछि तकरा संग मगही ओ नगपुरिया मैथिलीक बोलीक कसौटीपर ताकल जा सकैत छल।

एकर दोसर अध्यायमे ध्वनि-तंत्र आओर लिपिपर अछि जे अलग अध्यायक विषय अछि। लिपि मिथिलाक्षर बंगला जकाँ प्रचलित भेल जा रहल अछि जखन कि एहिमे 62% अन्तरक संदर्भ देल गेल अछि। संज्ञा ओ सर्वनामपर अलग अध्याय अछि किन्तु ओकरा विशेषणक अध्यायमे मिझरा देल गेल अछि। मैथिलीमे संज्ञाक चारि लिंग- पुलिंग, स्त्रीलिंगक अतिरिक्त नपुंसक लिंग संस्कृते जकाँ, आओर चारिम उभयलिंगी चर्चा भेल अछि। मुदा, आधुनिक मैथिलीमे लिंग-भेद समाप्त भेल जा रहल अछि। तहिना एकवचन ओ बहुवचनक प्रायः नहिए जकाँ अछि। मैथिलीमे संस्कृतहि जकाँ आठ कारक प्रारम्भिक वैयाकरण द्वारा आनल गेल, मुदा संबोधनकेँ एत' फराक नहि देखाओल गेल अछि। कर्म ओ सम्प्रदानक बीच अन्तर नहिए जकाँ। मैथिलीमे सर्वनाम पुरुष, सम्मान, वचन ओ कारक लेल अछि, लिंग लेल नहि। तीन पुरुषमे दोसर, तेसर लेल आदर-अपने, अहाँ, तों क्रमश: उच्चतम, उच्च ओ मध्य सम्मानसँ, तूँ असम्मानसँ। तेसर पुरुषक आदरक लेल ओ सब लोकनि संग अनादर लेल उ सभ / ओ सब। 'अं'केँ विविध प्रकारक विशेषण मानल गेल अछि -एक, पहिल, आधा, साढ़े, दोसर, दूनू। विशेषण मैथिलीमे वचन ओ कारक भेद नहि करैत अछि; सीमित लिंगभेद करैत अछि। सभटाकेँ लगाए बहुवचन बना लिअ। क्रियाक अध्यायमे क्रियाक मोहाबरा लय लेल गेल अछि। क्रियाक लक्षण मैथिलीकेँ भारतक आन बाँकी भारतीय-आर्य भाषा सभसँ फराक एक भाषाक रूपमे स्थापित कए दैत अछि। वचन ओ लिंग मैथिली लेल विशिष्ट नहि। पाँच भावक, सम्मानक संग, क्रियापदक अति सार्थक ओ पठनीय विशद विवेचना प्रस्तुत पोथीमे कएल गेल अछि।

क्रियाविशेषणक अध्यायमे  पार्टिकल तहिना जे लेखक स्वीकार करैत छथि। क्रियाविशेषणक परिभाषा मैथिलीमे कठिन अछि तथापि विभेद वर्णित अछि। युक्ति, अन्तर्विरोध, गौणपद अधिक आदि प्रकारक एतहि विवरण नीक जकाँ भेटैत अछि। वाक्य ओ वाक्यरचनाक दू अध्यायकेँ संगमे राखल जा सकैत छल। वाक्यक विविध प्रकारक वर्णन अछि। मैथिलीमे ज्ञापक वा डिक्लेरेटिव वाक्यांश बहुधा जाहिमे कर्ता ओ कर्म दूनू क्रियाक नियंत्रण करैत अछि। अभद्र भाषा व्यवहारमे अछि किन्तु कान मूनि लिअ, लेखक कहैत छथि। मैथिलीमे कर्ता, कर्म, क्रियाक वाक्य रचनाक्रम सामान्यतः अछि किन्तु सुभद्र झाक संदर्भ लेल गेल अछि वक्ताक मोताबिक शब्दक्रम राखि सकैत छी, किन्तु आर. पी यादवक एहिपर असहमति छनि। नकारात्मक समेत अनेक प्रकारक कारणात्मक वाक्यरचनाक विस्तार पोथीमे भेटत। मैथिलीमे विविध भावक समन्वय संभव अछि। जोड़ि लिअ, तोड़ि लिअ। विविध प्रकारक वाक्यखंडक, उपयोगी जानकारीसँ भरल पोथी अछि।

सभ अध्यायपर नोट आओर संदर्भ ग्रन्थ- सूचीक संग नाम ओ भाषाइ सूची एहि कार्यकेँ वरेण्य बना दैत अछि किन्तु अंग्रेजी व्याकरणक पारिभाषिक शब्दावली वैयाकरण सभ लेल बोधगम्य; किन्तु, हमरा सन पाठक लेल अबोधगम्य। ओतहि जँ मैथिली अनुवाद एहन तकनीकी शब्दक रहैत तँ सुगम होइत। तहिना एकर अनुवाद मैथिलीमे अपेक्षित जाहिमे कोष्ठमे अंग्रेजीमे एहन शब्द जरूर होअए। संगहि एकटा संक्षिप्त अध्याय मैथिली व्याकरणक विशिष्टतापर सेहो जे सभ अध्यायमे आएल जरूर अछि किन्तु एतेक विस्तारमे बिसरा जाइत अछि।

 

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