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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-२०२०.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन।

 

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

विष्णु कान्त मिश्र

चारि पत्र

कालचक्र (कथा संग्रहसॅ)

 

पहिल पत्र

--------- उजियारपुर,

२१.८.१९६०

मन मोहिनी,

शरदक चानजकाॅ चमकैत रहू । आइ पन्द्रह दिनसॅ अहाॅक कुशल नहि बूझि पानिसॅ बाहर माछजकाॅ छटपटाए रहल छी। बी० एड०कोर्सक अध्ययनमे मोन नहि लागि रहल अछि। रहि_रहि क' ध्यान अहींक पूर्णिमाक चान सदृश मुॅहपर जा 'क ' अटकि जाइत अछि। अहाॅक डोकासनक आॅखि ,तीसीवला नाक,धनुष सदृशभौंह, डरकसके स्पर्श करैत भादवक मेघसन केशपाश ,मालपूआसदृश गाल,पीपरक पातके पतनुकान करयवला ओष्ठ हमरा मानसपटल पर तेना ने अपन साम्राज्य स्थापित क ' लैत अछि जे रात्रि क ' औंघियो हेराए जाइत अछि।

 

हे प्रयाण प्रिये! मधुश्रावणीमे हम अहाॅक गाम आएल रही।अहाॅ एकटा पायलट फरमाइश करने रही।हम उजियारपुर पहुचितहि बाबू के पोस्टकार्ड लीखि ट्रेनिंग कालेजक फूसि बजट देखाय पायलकलेल रुपैया मॅगाय लेलहुॅ। कोजागरा क अब किछुए दिन बाॅकी रहि गेल छैक । दस दिन पूर्वहि हम क्लास छोड़ि अहाॅक

खातिर गाम आबि जाएब ।

 

हे मृग नयनी! अहाॅक बाबू बढ़ कसाई छथि ।ओ हमरा अहाॅक बीच बदला छथि। दस तारीख क' हम गाम आएब ।हम बुझैत छी जे ओ हमरा बजयबाकलेल ककरो नहि पठौताह। एकटा युक्तिबुझाय दैत छी। अहाॅ अपन बहिनपा पानजोड़ीके सिखाय अपना मायक माध्यमसॅ बाबूपर दबाब बनाएब । जखनहि केओ हमरा बजयबाकलेल अओताह कि धुरिआएले पैर हम हुनकहिसंग पहुंचिए जाएब ।

 

हे प्राणाधार!अहाॅ त' बुझिते छी जेअहांक बाबू पुरान विचारक लोक छथि।कहां सिनेमा देखबाक प्रसंग अपना अन्तर्देशीयपत्रमे लिखने रही।हम ओकरा लेल तैयार छी ।हॅ, बाबूसॅ चोराय क' जाय पड़ता।जयबाक कार्यक्रम हम अहांके बुझाया दैत छी।भिनसरवे रात्रि दूनूगोटे उठि क 'विदा भ' जाएब।घंटे कोस चलब तैयो दूं घंटामे राजनगर पहुचि जाएब।साढ़े पांच बजे ट्रेनसं पौने छह बजे मधुबनी उतरि रिक्शासॅ जाय कपिलेश्वर महादेवा दर्शन करब। पुनः मधुबनी आबि टेबुल-कुर्सीवला होटलमेभोजन क ' मैटिनी शो सिनेमा देखि लेब।सबा छ:बजे ट्रेनसॅ।विदा भ ' साढ़े आठ-पोने नौ बजे धरि गामपर छवि आएब।बाबू ल'ग मायपेटक दर्दके डाक्टरसॅ देखयबाक बहाना बनाया लेथिन्ह।

 

हे चन्द्र मुखी! हमर माय-बाबूजीमाघमे सोझे बरखे द्विरागमन करयबाक निर्णय ल' रहल छथि।अगहनमे हमरो परीक्षा सम्पन्न भ' जाएत।भगवती के किछु कबुला क' दिओन्ह जे कोनो हाई स्कूलमे झट द' हमरानोकरी भ' जाय ।फेरि दूनूगोटे बाहरे रहब।अहाॅक बाबू महींंस रखने छथि, मुदा ओ एहन ने कंजूस छथि जे एको चूरुक दूध अहाॅलेल नहि राखि सभटा बेचि लैत छथि ।अहाॅक सगर देहमे हड्डियेटा बाॅचल अछि । मायके कहबनि जे थैरिसॅजखनहि बाबू महींस दूहि क ' लाबथि त' ओ एक गिलास दूध अहाॅकलेल चोरा क' राखि लेतीह।एखन जॅ देह नहि फौदाएत त ' कहिया?हॅ, एकटा गप बिसरि गेल छलहु , नढ़िया टोलक खखरू बाबू वैद्य ल' ग पानजोरीके संग ल' छवि जाएब आ च्यवनप्राश कीनि आनब।पानजोड़ीसॅ कैंचा पैंच ल' लेब ।हम अबैत छी त ' सधाय देबनि ।एक गिलास दूधमे एक चम्मच च्यवनप्राश घोरि क ' प्रतिदिन पीबिलेल करब। रातिके बारह बाजि रहल छै।नींद त' हमरा नहिए हैत । एहि करोटसॅ ओहि करोट ओंघराइत रहब। तखन त ' ---

' एहि आशा अटक्यो रहत, अलि गुलाब के फ़ूल।

अइहैंफेर बसन्त ऋतु, इन डारन ओ फूल ।।

।। इति ।।

अहाॅक पिआसल अहींक

भ्रमर ---

देवनाथ

 

दोसर पत्र

------------

हाई स्कूल, सहरसा

3/12/1970

प्रिये,

शुभाशीर्वाद। हम एतय सकुशल छी। अहाँ क लिखल अंतर्देशीय पत्र एखनहि डाकपिउन हस्तगत करौलक अछि। पत्र पढ़ि सभ समाचार सॅ अवगत भेलहुँ।

काशीनाथ के सर्दी भ' गेल छैक। ओकरा वैद्य जीसँ सितोपलादि चूर्णआनि देल करियौक। जड़कालाक समयछैक। अपनहु ठंडा सॅबचल रहब। दुन् माय-बेटा अठकपारिसॅ गायक दूध उठौना ल' पीब। हॅ, खाली पेटमे अधिक लाभ करत। कतेक दिन सँ सोचैत छी जे फेमिलीक संग रहब। प्राण अहुरिया काटि रहल अछि। मुदा अपने जाएब नेपाल, कपार संगहि जाएत । पछिला कर्जसभ कने झाड़ि लैत छी त' निश्चिन्त भ' सभ केओ एत्तहि सहरसेमे रहब। अहाॅजे घूटर कप्रसंग लिखलहुँ अछि जे ओ सपरिवार संगहि रहैत छथि से ओ त' मातवर घरक छथि। अनकर देखाउस करब त' छओ मास व्यथे मरब।

गर्मीक छुट्टीमे हम गाँव आएब त' सभकें एतहि नेने आएव। काशीनाथ के सेहो एही ठाम स्कूलमे एडमिशन कराय देबैक- उसराहा परक तेफसिला दसकठवा खेत कहियो मरहन्ना नहि जाएवला, ताहिमे तीन मन धान बॉँटिके देलक अछि। खेतक आरिपर जखनहि जायवला केओ नहि छैक त' एहिना हेतैक। बटाइदार सभसँ नार-पोआर जमा करबा लेब आ ओकरे सभकें कहबैक जे बेचाय देत। खेतक मालगुजारीकलेल अहाँ लिखलहुँ जे कर्मचरी तंग क' रहल अछि से की करबैक। फरवरी धरिक मोहलति ल' लिअ । फरवरी कदरमाहा भेटितहि हम मनीआर्डर क' देब। एखन हमरा एक सय चालीस रुपैया दरमाहा अछि। अपना बुतात जोगर राखि हम चारि महि दिन एक सय दस मनीआर्डर क' देलहुँ अछि । जाड़ काला आबि गेल छैक। फलानेनवला . एकटा ओढ़नी अपना लेल आ बौआक लेल एकटा भरिबहुआँ स्वेटर-टोपी अवश्य कीनि लेब। अकलुआ माय मुँहक जोर छैक। ओ सदिखन झगड़ाक बीह तकिते रहैत छैक। ओ 'एकटा राहरि, सभसैँ बाहरि' छैक । एकरा सॅ मुॅह नहि लगाएब ।

हम एतय ट्यूशन सेहो पछिला दू मासससॅप्रारम्भ क' लेने छी। ई रुपैया हम अहाँके नहि पठाय अपनहि एतय जमा क' रहल छी जाहिसॅ झगड़ू बाबूक मोट कर्जसॅ उद्धार भ ' सकी । अहाॅके बुझले अछि जे दू बरख पहिने काशी नाथक निमोनिया बीमारी मे हुनकासॅ सत्तरि टाका दू पाइ सूदिपर लेने छलियनि ।सूदि-मूरि जोड़ि क' बहुत रास भ' गेलैक ।माय -बाबूक श्राद्धक कर्ज सभ सधि गेल अछि ।दुनू माय-बेटा अपना स्वास्थ्य पर ध्यान राखि ठंडासॅ बचि क' रहब ।कलम आब बन्द करैत छी ।पत्रक जवाब घुरती डाकसॅ अवश्य देब।

अहींक ,

---देवनाथ

 

 

तेसर पत्र

--------

हाई स्कूल,सहरसा

३/ १२/ १९९०

प्रिय काशीनाथक माय,

शुभाशीष।

अहाॅक पत्र काल्हि जखन एकटा पानक दोकानपर ठाढ़ रही त' डाकपिउन हस्तगत करौलक । हम मोटा-मोटी कुशल छी ।पत्र पढ़िसभ समाचारसॅ अवगत भेलहु ।बेटा-पुतोहुक प्रसंगक सभ गप पढ़लहु ।की करबैक ?देह लगाए क' अंगेज' पड़ता।'अपन हारल आ बहुक मारल 'लोक बजितो नहि अछि ।बेंगाइक बेटा _पुतोहुक परतर जे अहाॅ तकैत छी से कोना होएत ।हम-अहाॅ ओहि जन्ममे दैवक घरमे आगि लगोने रहियैक ।सीता कुम्मरि एक पहर दिन उठलाक पश्चात सूति क' उठैत छथि। घर-आंगनक झाड़ू -बहारू , मनसा घर नीपब ,जारनि-काठी ओरिआएब,भानस-भात करब सभटा अहांके अपनहि करय पड़ैत अछि ।काशीयोनाथ बौकजकाॅ सभटा देखैत रहैत छथि ।की करबैक ?देह लगा क' मारू।बहिरा करैत बनि जाउ ।सगर पोखरिमे एकटा पोठी। हॅ, अहाँ लिखलहुँ जे काशी नाथ नी कुमरि के ल' जाय चाहैतछथि डेरा पर पटना। एहि लेल अहाँ कोना फसाद नहि करब। कनियाँके पटना सॅडेढ़ मास अएना भ' गेलनि। ओ मुर्गी जकाँ छटपटाइत होएतीह। जकरा जाहि बस्तुकएक बेरि चस्का लागि जाइत छैक, ओकरा छोड़ब पाथरपर दूध उगाएब जकाँ होइत छै। कतहु दुनू व्यक्तिबेकति रहथु, माँ भगवती सानन्दरखथुन। अहाँ कहते छी जे रात क' सपनो रूपेपएरो मे तेल नहि लगा देलनि। इहो नीके भेल। कमसँ कम एकर आदति त' नहि लागल। अहाँ कहैत छीजेसात दिनक छुट्टी ल' काशी नाथ गाम आयल छथि, मुदा खेत-पथार, कलम-गाछीदेखय नहि गएलाह। एतुका धन-सम्पतिसॅ हुनका कोनो मतलब नहि।की करबैक । हमरा-अहाँक परोक्ष भेला सन्ता एकर-सुख-दुःख ओ अपनहि बुझता । हम जनैत छी जे उदर विकार सँ अहाँ अस्वस्थ रहैत छी। लवण भास्कर चूर्ण आ त्रिफला चूर्णकसेवन नियमित रूप सॅ कएल करब । हम स हरसे ल' अनितहुँ, मुदा घरमे ताला बन्द क 'कोना आएब। चोरक हल्ला यदाकदाह होइत रहै छैक ।सुन्न घर-आंगन पाबिअन्न-पानि, सीता कुम्मरिक गहना-गुड़िया, पेटी-बाकस सभटा चोरबा सभ उठाके ल' जाएत। आब त' कोतवाल लोसभ रातिके पहरा देब छोड़ि देने छैक । रातिके जॅ कोनो जन-बोनिहारकें सुतबाको लेल कहबैक त' ' मारि करैत अछि ओकर दरमाहा । बौआ एतेक दिनसँ कमाइतो छथि, तथापि खगले रहैत छथि। जीवन भरि जे किछु कमाइ भेल ताहिसँ त' नाना प्रकारक भूरे सभकें मुनैतअएलहु।माय-बापक श्राद्ध ककर्ज, काशीनाथक मुंडन, उपनयन हुनक बी.ए. धरिक पढ़ाइक खर्च, पावनि-तिहार, दवाइ-वीरो आदिमे सभटा कमाइ चलि गेल। नोकरी कयलाकपश्चातो काशी नाथ कइएक बेरि हमरहिसँ टाका लेलनि अछि। हम-अहाँ एकटा ट्रान्जिस्टर किनबाक लेल सोचिते रहि गेल हुँ। नहि कीनि सकलहुँ। बौआ फूसि बाजि हमरासँ टाका मँगाय नोकरीक चारिए मासक पश्चात ट्रान्जिस्टर कीनि लेलनि। द्विरागमनक दुइएक मासक अभ्यन्तर कनियोके पटना ल' गेलाह। एहि बात सभहक चिन्ता नहि करब। चिन्ता चिता समान होइत छैक । स्वास्थ्य पर एहिसँ कुप्रभाव पड़त। दू वर्ष पश्चात हम रिटायर्ड भ' जाएब । अहाँके बुझले अछि जे हमरा सबके पेंशन नहि भेटैत छैक। अस्तु 'अनेर गायक राम रखवार' । पत्रक जवाब शीघ्र देव।

क्रमश: काल्हि अहाॅक,

-काशी नाथक बाबू

 

 

चारिम पत्र

-----------

मैनापट्टी,

१७/४/२००१

चिरंजीवी काशी नाथ,

शुभाशीर्वाद।

एतय हमरा लोकनि नेपलिया रेल गाडी जकाॅ कुशल छी । डेढ़ माससॅ अहाँक समाचार नहि बूझि चिन्तित छी। पन्द्रह दिनसे अहाँक माय बीमार छयि ।ओ भनसा घर नी पीके निकलय लगलीह कि पएर पिछड़बाक कारणें चौकठि पर घड़ामसॅखसिपड़लीह। बेहोशी कारणे दाँती लागि गेलनि। लोक सभमुँह पर पानि छीटय लगलनि। केओ सरौता सॅदांत छोड़ाबय लगलनि त' गोटेक घंटाक प श्चातहोश मे अलीह। बादमे ढोढ़नबाबासँ दू सय रुपैया कर्ज ल' सरकारी अस्पताल ल' गेलियनि। डॉक्टर कहलक जे चोटक संग-संग ठेहुनक हड्डी टूटि गेल छनि। ढौआ-कौड़ीक अभाव में पुनः ढ़ोढ़न बाबाके सिमराहावाला पॅँचकठवा तेफसिला खेत भरना द 'चारि हजार टाका लेलहुँ। ठेहुन आ छाती दुनू ठाम बड़का पलस्तर क देने छनि। चौकीके थोड़ेक गोलमोल कटबाय आ ओकरा नीचाएकटा पैघ बर्तन राखिदेने छियैक।ओही मे सुतले-सुतले दीर्घशंका-लघुशंका करैतछथि। बाड़ीमे डबल खाधि कोड़ि देने छियैक। ओहीमे जाएके ओकरा खसायथोड़ेक माटिसँ झाँपि दैत छियैक। काँच-पाकल भोजन स्वयं बनाय लैत छी। हमरो स्वास्थ्य स्थिति नीक नहि अछि। डॉक्टर टी.बी. कायम कएलक अछि। अंग्रेजी दवाइ बड़ महग होएबाक कारणे वैद्य सँ दवाइ भ' रहल अति। भोजन मे दू पटल करय पड़ैत अछि। अहाँ क मायकलेल भात आ अपना लेल रोटी। अहाँ हमरा लोकनिक कोनो चिन्ता नहि करब। हमसभ काँच घैल छी। काँच घैलके मुंगरक आस।

सीता कुम्मरि आ हरिनाथ के शुभ आशीर्वाद ।

शुभकांक्षी,

देवनाथ

पुनश्च : बंगट कोनो काजसँ पटना गेल छलाह। काल्हि हमरा हुन कासॅ मेंट भेल । ओ कहलनि जे अहाँ लोकनिक सभ परिस्थितिसँ हम अहाँक बालक के अवगत कराय देलियनि । अहाँ लोकनिक कुशलक्षेम कहलनि।अहाँ ताजमहल देखबाक लेल सपरिवार आठम दिन आगरा जाय रहल छी ई खबरि सुनि मन प्रसन्न भेल। हमरा लोकनिके त' आब 'औषधं जाह्नवी तोयं, वैद्यो नारायणः हरिः।

 

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