प्रणव कुमार झा
राम चरित
मीता ! कहब अहाँसं मोनक बात,
रामक लीला, जेना शीतल बसात।
चारु भाय संग जनम लेल अयोध्या ,
संगहि हँसल, खेलल सब योद्धा ॥
बाल्यकालक ओ मधुर उमंग,
लक्ष्मण-भरत-शत्रुघ्नक संग।
गुरुकुल गमन, विद्या विस्तार,
संगहि चारू, गमलाह संसार॥
विश्वामित्र संग जखन गेलाह,
लक्ष्मणसंग शस्त्र विद्या लेलाह।
धनुष-बाण तानि यज्ञ सम्हाराल ,
भाय संग बल से राक्षस मारल ॥
जनकपुर आयल मंगल बेला ,
चारू भाय संग विवाह रचेला ।
सीता-उर्मिला, श्रुति मांडवी संग,
दाम्पत्य जीवन में रंगल रंग ॥
वन-पथ सेहो धीरज संग बढ़लाह,
लक्ष्मण-सीता संग सब दुःख सहलाह।
सुग्रीव, हनुमान, जामवंत संग लेलखिन ,
सबहक संग लंका फतह केलखिन॥
लंका जीतलाह , रावण संहारल ,
अयोध्या में मिलजुलि दीप जारल ।
सरयू तट जखन देह छोड़लाह ,
तखनहुँ संगक छवि नै मोरलाह ॥
मंदिर, चित्र, आरो काव्य पुरान,
सभमें देखलहुँ यैह विधान।
राम कखनो एकसर नै रहला,
सभके संग हृदय में बसला॥
मीता! जमाना कतेक बदलि गेल
रामक छवि एकसर कय देल।
संगक संस्कृति कियैक मेटायल?
एकल भाव कोना के आयल?
राम छवि छल मुस्की भरल,
कोमल दृष्टि, करुणा झरल।
धीर-गंभीर, सौम्य विचार,
क्रोधित रूप देखल एकहि बार ॥
कमलनयन में आगि कोना
क्रोधित राम देखायल कोना?
ई कोन समय, केहन व्यवहार?
रामक छवि भेल किये विकार?
संगक संस्कृति कियैक टूटल?
एकल भाव कियैक फूटल?॥
प्रणव मोन कानैत अछि भीत
राम बिना संग, सूना प्रीत।
मीता ! सजाबू वैह रूप उत्तम ,
बंधु संग बसैत जतय पुरुषोत्तम ॥
राम तऽ करुणा , धीरज आधार,
संगक संस्कृति अछि जीवनक सार।
एकसर छवि अछि मिथ्या प्रचार,
संगमे सजैत सदैव राम दरबार ॥
- रामनवमी 2026
-प्रणव कुमार झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली
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