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कोंकणी कथा : मर्णताळणी
मूल कथाकार :
वसंत भगवंत सावंत
हिन्दी अनुवाद :
डॉ. शंभु कुमार सिंह ओ श्री
सेबी
फर्नांडीस
मैथिली अनुवाद :
डॉ.
शंभु कुमार सिंह
मृत्युकेँ टारब
“कनिष्ठ अभियंताक जीप आबि रहल अछि.....सभ केओ काज पर लागि जाउ।” गाछ पर चढ़ि मौध निकालबाक प्रयास क’ रहल फ्रांसिस पहाड़ीक बाटे हपसैत अबैत जीपकेँ देखि सभ मजदूरकेँ चेतएबाक स्वरमे चिकरल आ स्वयं सेहो शीघ्रहिं नीचाँ उतरि गेल। बीड़ी पीबाक बहन्ना सँ काम बन्न क’ कए गप्प कर’ वला आ लगपासमे बैसल सभटा मजदूर हाँइ–हाँइ उठि हाथमे दबिया ल’ क’ गाछ–बिरीछ काटए लागल। आइ भोरहि सँ मजदूर सभ मोन लगा कए काज नहि केने छल। हमरा सभकेँ दाणे पहाड़ दए चढ़िकए अबैत–अबैत साढ़े नओ बजि गेल रहय । आइ हम स्वयं ओकरा सभक समक्ष ठाढ़ भ’ कए काज नहि ल’ रहल छलहुँ एहिलेल ओहो सभ नहुएँ–नहुएँ काज क’ रहल छल। बिना काजक दिन खेपैत देखियो कए हम ओकरा सभ पर गोस्सा नहि क’ सकलहुँ। आइ हमर मोन नीक नहि रहय। भोरहिं सँ हम पहाड़क टिल्हा पर सातनक गाछक नीचाँ बैसल रही। हम जतए बैसल रही ओतए सँ नीचाँ सलावली नहरक काज चलैत रहैक, जे साफ झलकैत रहैक। बहुतो रास मशीनक हल्ला होइत रहैक। नहरक काज आधासँ बेसी भ’ चुकल छलैक। आगूक पाँच–छओ बरखक भीतरहिं काज पूर्ण भ’ जएबाक उमेद रहैक आर ओहि नहरक पानि पीबा आर आन प्रयोगक लेल एहि दाणे पहाड़ पर ट्रिटमेंन्ट प्लान्ट बन’ वला रहैक। हमरा एतुका कार्यभार भेटबासँ पूर्वहिं निरीक्षण भ’ गेल रहैक। यैह किछु दिनमे काजक ठीका (निविदा) निकालि ठिकेदारकेँ काज संपन्न करएबाक आदेश द’ देल गेल रहैक। अगिले सप्ताह मुख्यमंत्रीक हाथेँ शिलान्यास हेबाक रहैक। एहिलेल ओहि जमीनकेँ चिह्नित करबाक लेल कार्यपालक अभियंता साहेब एतेक मजदूरकेँ लगा कए एहि महत्वपूर्ण जमीनकेँ साफ करबाक लेल कहने छलैक। काल्हि आ परसू तँ मजदूर सभकेँ लड़ा–चड़ा कए हम नीक जकाँ काज करा लेने रही मुदा आइ हमर मोन काजमे नहि लागि रहल छल।
कनिष्ठ अभियंताक जीप पहाड़ीक बाटे एम्हरे आबि रहल छलैक आ ओहिसँ आबए बला आवाजसँ हमर बेचैनी बढ़ल जा रहल छल। सभ मजदूर दौड़ि कए काज करबाक नाटकमे लागि गेल, मुदा हमरा उठि कए ठाढ़ होएबाक साधंस नहि भेल। हमरा बुझाइत छल जेना हमरा देहसँ प्राण निकलल जा रहल हो। काल्हि भोरहिंतँ कनिष्ठ अभियंता द्वारा कार्यस्थल केर निरीक्षण क’ लेल गेल छलैक तखन एखन दिनक बारह बजे ओ किएक आबि रहल छलैक? निश्चित रूपेँ ओ हमरा बाबूजीक मृत्युक खबरि ल’ कए आबि रहल हेताह, हमरा लागल। “आइ काज पर नहि जाउ” भोरहिसँ हमर घरक लोक सभ कहैत छलाह। बाबूजी कखन अपन अंतिम साँस लेताह भरोस नहि। ओछाओन पर पड़ल बाबूजीक हालति एकदम खराप भ’ गेल छलनि। मुदा दाणे पहाड़केँ साफ करएबाक काज हमरा भेटल रहय। जँ एहिकालमे कोनहुँ प्रकारक व्यवधान भेलैक तँ हमरा नोकरीसँ निकालि देबाक धमकी कार्यपालक अभियंता पहिनहिं द’ देने रहय। हम कनिष्ठ अभियंताक व्यवहारसँ नीक जकाँ अवगत रही एहिलेल हम घरक लोकसभक कथनी नहि मानि डिब्बामे दूटा रोटी राखि काज पर चलि देलहुँ। हमरा दाणे जंक्शन धरि पहुँचतहि आठ बजि गेल छल। सभ मजदूर अपन–अपन दबिया आ डिब्बा ल’ कए हमर बाट देखैत छल। दाणे पहाड़ दिस जाएबला ट्रक सभक बाट नहि देखि हमसभ पयरे चलब आरंभ क’ देलहुँ जे जँ बाटमे कतहुँ ट्रक भेटि गेल तँ ओकरा हाथ द’ देबैक। मुदा कुर्डे पहुँच’ धरि हमरा सभकेँ एक्को टा गाड़ी नहि भेटल। ओतए सँ एकपेरिया बाटे अएबाक कारणेँ हमरा सभकेँ बड्ड विलम्ब भ’ गेल।
मरणशय्या पर पड़ल हमर बाबूजीक चिन्ता आर पैदल चलिकए अएबाक थकानक कारणेँ हमर प्राण कंठ धरि आबि गेल छल। आ एखन हमरा बाबूजीक मृत्युक खबरि ल’ कए आब’ वला जीपकेँ देखिकए हमरा आँखिक सोझाँ तारा नाचए लागल। गाड़ी ऊपर आबि रहल छल। केहनो हृदयविदारक समाद हो हम ओकरा सुनबाक लेल अपना मोनकेँ एकाग्रचित्त केलहुँ आ आँखि मुनि लेलहुँ। हमरा आँखिक समक्ष चित्र सभ नाचय लागल – ‘आब ओ जीप ठहरत.....कनिष्ठ अभियंता जीपसँ उतरि जेताह.....काज करएवला मजदूर सभसँ “पर्यवेक्षक कतए छथि ?” पूछताह.....ओ लोकनि गाछ दिस आँगूर देखेतनि, अभियंता घुमिकए हमरा दिस उपर अओताह.....हमरा कान्ह पर हाथ राखि बजताह.....मिस्टर नायक......हमसभ एखन सांगे केर कार्यालय जाएब।’ हम चुप रहब।
अहाँक लेल एकटा खबरि अछि....इट इज नॉट मच सिरियस.....(ओतेक चिंताजन नहि अछि.....) मुदा अहाँकेँ शीघ्रहिं घर बजाओल गेल अछि। हम जीप ल’ कए ओम्हरे जाएबला छी.....ओतहिसँ अहूँकेँ छोड़ि देब। कनिष्ठ अभियंता जानि-बूझिकए हमरा बाबूजीक मृत्युक खबरि नुका रहल अछि, ई हमरा पता लागत.....हमर करेज फाटि जाएत, हमरा आँखिमे नोर आबि जाएत।
यू इडियट (बदमाश).....,एमहर आउ ! राजा जकाँ बैसल छथि....नॉनसेन्स (बेकूफ)। अहाँकेँ देल गेल काजक कोनो परवाहि नहि अछि? आब अहाँकेँ घरहिं पठा देब.....।
सोचलहुँ की आ क्षणहिंमे भ’
गेल की, हमरो पता नहि चलि सकल। आँखि खोलिकए देखलहुँ तँ कनिष्ठ अभियंताक जीप
ल’
कए आएल कार्यपालक अभियंता हमरा पर डाँट–फटकारक बरखा केने जा रहल छल। अपना
समक्ष राक्षस सदृश
ठाढ़ कार्यपालक अभियंताकेँ देखि हमर तँ हड्डी काँपि गेल।
हे भगवान, एहि ब्रह्म बबाक चाँगुरसँ हमरा मुक्ति दिया दिअ।
मोनहि–मोन भगवानसँ प्रार्थना करैत हम कार्यपालक अभियंताक समक्ष ठाढ़ रहलहुँ।
अहाँक ओकादि एतेक बढ़ि गेल? मजदूर सभपर ध्यान नहि राखि, हमरा अबैत देखियहुकेँ ओतए साहूकार जकाँ बैसल रहलहुँ? ई सभटा काज चारि दिनक भीतरहिने संपन्न करएबाक लेल कहने रही , कमीना नहितन? एना तँ अहाँ हमरहु संकटमे द’ देब....ठहरू ! एखनहि हम अहाँकेँ सबक सिखबैत छी....हम एखनहि कार्यालय जा कए, अहाँक ‘टर्मिनेशन ऑर्डर’ निकालि दैत छी...।
क्षण भरिक लेल हमरा एहन बुझाएल जेना एकटा अल्सेशियन कुकुर हमरा पर भूकैत एम्हरे आबि रहल अछि। हमरा मुँहसँ एक्कहुटा शब्द नहि नकलि सकल।
साहेब, हिनक बाबूजी बहुत बेराम छनि....एहिलेल ओ कनेक कालक लेल बैसि गेल छलाह, एकटा मजदूर हमर पक्ष लैत कार्यपालक अभियंताकेँ समझएबाक प्रयास कएलक मुदा साहेब पर हुनक बातक कोनहुँ असरि नहि भेलनि।
बेराम छथि तँ होमए दिऔक, जीवैत तँ छथि ने? एहि तरहक बहन्ना बना कए अहाँ काज परसँ बेसी नागा नहि रहल करू, नहि तँ सभदिनक लेल घरहिं बैसा देब। कार्यपालक अभियंता हमरा पर आओर भड़कि गेलाह। ओहि भरल दुपहरियामे हमरा आँखिक समक्ष तरेगन झिलमिलबए लागल।
यूजलेस सुपरवाइजर....(बेकाम पर्यवेक्षक....) एतए आउ.....देखू ई सभटा गाछ–बिरीछ कटवा लेब। परसू धरि ई सभटा साफ भ’ जएबाक चाही। मंगल दिन सी.एम. (मुख्यमंत्री) अओताह, ओहिसँ पहिने कनिष्ठ अभियंताकेँ चिन्हित करबाक लेल ई जगह साफ–सुथरा भेटबाक चाही। जँ ठीक समय पर ई काज नहि भेल तँ हम अहाँकेँ देखि लेब।
अहूँ सभ केओ सुनि लेलहुँ की नहि? सभ मजदूरकेँ सुनएबाक लेल ओ ओकरा दिस देखलक आ जा कए जीपमे बैसि गेल।
पल भरिक लेल हमरा एहन लागल जेना ढ़लानसँ उतर’ वला ओहि जीपक पाछू हमरा डोरिसँ बान्हि घिसियाओल जा रहल अछि। हमरा आँखिमे नोर आबि गेल। नोकरीसँ निकालि देबाक धमकीसँ हमर सौंसे देह सुन्न भेल जा रहल अछि, हमरा एहन बुझाएल। एहि नोकरीसँ हाथ धो लेब हमरा बसक गप्प नहि छल। बी.कॉम. कएलाक बाद लगभग दू वर्ष धरि हम बेरोजगार रही। पछिले साल बाबूजीकेँ लकवाक प्रकोप भेल छलनि ओ तहिएसँ ओछाओन पकड़ि नेने छथि। बाबूजीक दवाइ, कॉलेजमे पढ़ए वला अपन छोट भाय आर मैट्रिकमे पढ़यवाली अपन छोटकी बहिनक सभटा दायित्व हमरहिं कन्हा पर छल। कतेकोक पयर पकड़लाक पश्चात् हमरा हिसाब-किताबक काज भेटल छल, मुदा डेढ़ दूइ सय टकासँ बेसी हमरा कहियो नहि भेटि सकल। कतेको पैरवीक केलाक पश्चात् हमरा बारह टकाक दैनिक मजदूरी पर सुपरवाइजर (पर्यवेक्षक)क ई काज भेटल छल। हमर दुब्बर-पातर कद-काठी देखि कनिष्ठ अभियंता हमरा सुपरवाइजरक नोकरी देबाक लेल किन्नहुँ राजी नहि छल, मुदा ओकरा लग ल’ जाएबला हमर शुभचिन्तक हमर विषम परिस्थिति आ लचारीक तेना ने बखान कएलनि जे नहियों चाहैत ओ हमरा ई नोकरी द’ देलक। हमर छोटो छिन गलती केँ ल’ कए ओ हमरा सदिखन उँच-नीच कहैत रहैत छल। पछिला तीन माससँ तीन-सवा तीन सय टकाक महिनवारी दरमाहासँ हम साधारण रूपेँ अपन जिनगी चला रहल छलहुँ। एहि सप्ताह बाबूजीक तबीयत बिगड़ि जेबाक कारणेँ हमरा लग जतेको पाइ छल, सभटा हुनक दबाइ आ डागदरक पाछू खर्च भ’ गेल। जँ बाबूजीक संग किछु भ’ गेलनि तँ हम कोना की करब, से सोचबाक साहस आब हमरामे नहि रहि गेल छल।
हम अंतर्द्वन्द्व मे फँसि गेल रही। कार्यपालक अभियंता हमरा नोकरीसँ निकालि देबाक धमकी द’ कए गेल छल। हमरा बुझाइत छल जेना हमर हड्डीक मज्झा जमल जा रहल अछि। कोनो मजदूर दौड़ि कए हमरा थाम्हि लेलक आ गैलन मे भरल पानिसँ हमरा आँखि पर छिट्टा देलक नहि तँ हम ओतहिं अचेत भ’ कए गिर जेतहुँ।
खएलाक पश्चात् हम भारी मनसँ ओतए आबि ठाढ़ भ’ गेलहुँ जतए आन मजदूर सभ काज करैत रहथि। हमर नजरि घूमि-फिरि ओहि बाटक दिस जा रहल छल। बाबूजीक मरबाक खबरि ल’ कए जीप आब आएल तब आएल, यैह सोचैत-सोचैत हम आधा दिन बिता देलहुँ। हमर एहि स्थिति पर दया करैत मजदूर सभसँ जतेक संभव भ’ सकलैक ततेक काज क’ देलक। जँ मजदूर सभ एहने लगनसँ काज करैत रहल तँ ई काज काल्हि धरि पूरा भ’ जेतैक, हमरा बुझाएल। साँझुक पहर हम जल्दीए निकलि कए पहाड़ीक बाटे उतरैत नीचाँ आबि गेलहुँ। लकड़ी ल’ जाएबला ट्रक भेटि गेलाक कारणेँ हम राति हेबासँ पहिनहिं बजार पहुँचि गेलहुँ। झटकि कए चलि हम घरक बाट पकड़लहुँ। पिचरोड खतम भेलाक बाद गली वला माटिक सड़क पर हमर चालि कने मद्धिम भ’ गेल। एहि गलीक ओहि छज्जाकेँ पार कएलाक बाद हम अपन वार्डमे पहुँचि जेतहुँ। हम सोचए लागलहुँ जे हमरा आँगनमे हमर किछु पड़ोसी लोकनि हाथ पर हाथ ध’ ठाढ़ छथि। हमरा देखतहिं ओ लोकनि अपनामे गप्प करए लगलाह। हम जेना-जेना घरक दिस बढ़ैत रही तहिना-तहिना कानबाक शोर बढ़ैत जा रहल छल। जहिना हम अँगना पहुँचब, एकटा पड़ोसी आबि हमरा गल-बाँही द’ घर ल’ जैताह। घरमे बाबूजीक प्राणहीन लहास पड़ल रहतनि। एकटा कोनमे कानि-कानि कए बेदम भेल हमर माय आ बहिनकेँ सम्हारबाक लेल पड़ोसक औरत लोकनि बैसल हेतीह। हुनका सोझाँ सोडाक बोतल आ काटल पेयाजु राखल रहतनि। बाबूजीक लहासक समक्ष एकटा दीप राखल हेतनि। एक दिस तश्तरीमे अगरबत्ती राखल रहत। लगहिमे एकटा पात्रमे चीनी राखल रहत। ओहिमे लोक सभ द्वारा चुट्टासँ उठाओल गेल चीनीक चेन्ह होएत। हमहूँ ओहिमेसँ एक चुट्टा चीनी उठाएब आ बाबूजीक फूजलका मुँहमे ध’ देबनि आ “बाबा” कहि जोरसँ कानए लागब।
जखन हम आँगन पहुँचलहुँ तँ हमरा केओ नहि देखना मे आएल। घरसँ ककरहुँ बाजबाक आवाज आबि रहल छलैक। हम जूता खोललहुँ आ नहुएँ-नहुएँ पयर राखैत भीतर चलि गेलहुँ।
आउ बाउ! शायद अहींक खातिर हिनकर प्राण कंठ धरि आबिकए अटकि गेल छनि। आब हिनका एहि कष्टसँ मुक्तिए भटि जेबाक चाहियनि, हमरा भीतर अबैत देखि हमरा माय लग बैसलि एकटा औरत बाजलि। हम बाबूजीक ओछाओन दिस देखलहुँ। जाहि गतिएँ हुनक छाती उपर-नीचाँ होइत छलनि, हमरासँ देखल नहि जा रहल छल। मुँह सँ निकल’ वला शब्द सुन’ मे नहि आबि रहल छल। आँखि खुजले छलनि। बाबूजीक ई स्थिति देखि हमरा बुझा पड़ल जेना ओ सरिपहुँ हमरहिं बाट जोहि रहल छलाह।
हमर छोटकी बहिन हमरा चाह देलनि। चाह पीबि हम अँगपोछासँ अपन मुँह झाँपि बाबूजीए लग बैसि गेलहुँ।
देखा पर चाही, जँ आजुक राति ई काटि लैत छथि तँ..... नहि जँ आइ रातिए किछु भ’ गेलनि तँ एहना स्थितिमे एमहर-ओमहर दौड़ब नहि, काल्हि भोरहिं उठिकए संबंधी लोकनिकेँ समाद पठा देबनि, की ठीक ने? हमरा भरोस देबाक लेल एकटा पड़ोसिन कहलथि। अँगपोछासँ झाँपल अपन माथ डोला हम हँ कहलियनि। राति बढ़ल जा रहल छलैक मुदा हमरा निन्न नहि आबि रहल छल। हम ओतहि बैसल रहलहुँ। रातिक बारह बाजि गेल रहैक मुदा बाबूजीक घर्र-घर्र केर आवाज एखनहुँ नहि कम भेल रहनि। घरक आन सभ सदस्य एमहर-ओमहर कोनमे सूति रहल छलाह। राति तीन बजे धरि बाबूजीक हालतिमे कोनहुँ सुधार नहि भेलनि। मुदा भोर होइतहिं हम द्वन्द्वक स्थितिमे आबि गेलहुँ। आब की करी? नोकरी पर जाइ, वा नहि? काज एकदम अनिवार्य रहैक आ जँ हम नहि गेलहुँ तँ कार्यपालक अभियंता हमरा छोड़त नहि। जँ कार्यपालक अभियंताक डरे नोकरी पर चलियो गेलहुँ आ एमहर बाबूजीक संग किछु खराप भ’ गेलनि तखन की हैत?
माए.... हम नोकरी पर चलि जाउ? हम साहस क’ कए माए सँ पूछलहुँ। माए तँ किछु नहि बाजलीह मुदा एखनहि हमरा घर आयल हमर किछु पड़ोसी सभ हमरा पर अपन गोस्सा निकालए लगलाह।
साँचे अहाँक दिमाग ठौर पर अछि कि नहि? एतए अहाँक बाबूजी मरण-शय्या पर पड़ल छथि आ अहाँकेँ नोकरी सूझैत अछि?
नहि, नहि हमर कार्यपालक अभियंता बड्ड खरूस छथि।
ओ शैतान छथि की? नीक-बेजाए केर ओकरा ज्ञान नहि छनि?
हम चुप भ’ गेलहुँ। दुपहर होइत-होइत घर्राहटि आर बढ़िते गेलनि।
चलू नीके छैक.... आइ बृहस्पति दिन छैक, प्राण छोड़बाक लेल आजुक दिन उत्तम अछि। हमर बूढ़ पड़ोसिन बाजलथि। एतबा सुनतहि हमर माए आर जोर-जोर सँ कानए लगलीह।
साँझ होइत-होइत हमरा मोनमे आर डर समा गेल। जँ आइयो बाबूजी प्राण नहि निकललनि आ हुनक मृत्यु नहि भेलनि तँ ‘काल्हि काज पर किएक नहि आएल छलहुँ?’ एकर स्पष्टीकरण हम कनिष्ठ अभियंता केँ कोना देबनि? बाबूजी मरि गेलाह तकर पहिलुक दिन अहाँ काज पर किएक नहि एलहुँ? एहि तरहक प्रश्न सभ पूछि-पूछि ओ हमर पिंड नहि छोड़ताह.....जँ हम नोकरी पर नहि गेलहुँ आ मजदूर लोकनि काजकेँ आर बेसी घिच लैक तखन.......? आ एहि गोस्साक कारणेँ जँ ओ हमर ‘टर्मिनेशन आर्डर’ निकालि देलक तखन.....? कार्यपालक अभियंताक काल्हुक पल-पल केर दृश्य हमरा आँखिक सोझाँ नाचय लागल।
दू बजेक पश्चात् खराप नक्षत्र आरंभ होइ बला रहैक, ओहिसँ पहिनहि हुनका मुक्ति भेटि जयबाक चाहियनि.....! केओ एहन बाजलथि। मुदा हमरा बुझाएल दू बजे नहि बारह बज’ सँ पहिनहि हुनक प्राण जयबाक चाहियनि, ताकि बाबूजीक मृत्यु बृहस्पतिए दिन भ’ गेल छलनि, कार्यपालक अभियंताकेँ बतएबामे हमरा सुविधा होएत।
राति आठ बजे हम एक बाटी मरगिल्ला खा बाबूजी लग बैसि गेलहुँ। काल्हि राति भरिक जगरनाक कारणेँ हमरहुँ आँखि निन्नक बाट जोहि रहल छल। एखन हमर आँखि लागलहि छल कि केओ हमरा हाथ लगा उठा देलक। घरमे सात-आठ पड़ोसी लोकनि ठाढ़ छलाह। हुनका सभक आँखि बाबूजी पर स्थिर भ’ गेल छलनि। बाबूजीक मुँहसँ होमए वला घर्र-घर्र केर आवाज आर बेसी भ’ रहल छलनि। हम जल्दीसँ उठिकए बैसि गेलहुँ। बाबूजीक आवाज आर बढ़ि गेलनि। क्षण भरिक लेल हुनक सौंसे देह हिललनि आ अचानक सभ किछु शांत भ’ गेल। कतेक बाजि रहल छैक, कने ध्यानसँ देखियौक केओ? केओ बजलाह। केओ आगू बढ़ि पलंग सँ लटकल बाबूजीक हाथ सीधा क’ कए हुनक फुजल आँखि बन्न क’ देलकनि।
हमर माए आ बहिन एक्कहि सँग जोर सँ चिकरैत बाबूजीक लहास पर हाथ राखि कानब शुरू क’ देलथि। एखन धरि ठाढ़ भए हमरा बाबूजीकेँ देख’वला हमर भाए झुकिकए गिरहि वला छल कि तखनहि केओ हुनका पकड़ि लेलकनि आर ओकरा मुँह पर पानिक छिट्टा देलकनि। मुदा हमरा तँ नीक लागल।
हम एकटा दीर्घ निसाँस लेलहुँ आर देखलहुँ.....हमर बाबूजी.....हमर खून, हमरहि सोझाँ मरल पड़ल छथि.....,हमर साक्षात् बाबूजी हमरा सदाक लेल छोड़िकए चलि गेल छलाह। हम ई देखतहिं रहि गेलहुँ।
ने जानि कोन-सन अनुभूति हमरा करेज सँ बाहर आबि गेल, बाबूजीकक लहास पकड़ि हम फूटि-फूटि कए कानब शुरू क’ देलहुँ.....
हम्मर बाबूजी.........।
