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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-२०२१.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन।

 

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मुन्नाजी

आधुनिक विश्वकथाक बाट पर जाइत -- बीहनि कथा
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मैथिली बीहनि कथा ( Maithili seed story) भारतीय साहित्यक नव विधा थिक. एहेन नव जे कियो कखनो एकर हाथ- पएर तोड़बा लेल, कियो झांटि बाढ़नि क' बैलेबा लेल त' कियो कंठ मोकि प्राण लेबा लेल आतुर, सक्रिय आ उग्र देखल जाइ छथि.समाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनैतिक आ सबहक सार रूपें साहित्यिक रचनाधर्मिता मे नवताक प्रवेश आगू बढ़बामे सहायक होइ छै. पीढ़ी दर पीढ़ी जेना कोनो परम्परा स्वहस्तान्तरित होइ छै, तहिना सब पीढ़ीमे नव परम्पराक सूत्रपात से हो होइछ.से पुरान परम्पराक संवर्द्धित/ परिष्कृत रूप होइ आकि पूर्णत: नव सृजन.इ नवताक सोझां अबिते दू पीढ़ीक बीच द्वन्द्वता आ तहन अराड़ि,मानवीय स्वभाव सन बुझू.इ बदलाव पहिने नहुंए- नहुंए पएर पसारै जहन संचार तंत्रक अभाव वा शिथिलता छल. मुदा आब.... यांत्रिक पसार भेने लोकक जीवन सेहो यंत्रवत भ' गेल. तें सामाजिक बदलावमे सेहो शीघ्रता देखएत.साहित्य सेहो समाजेक हिस्सा ने!

वर्तमान मे जे भारतीय साहित्यक सिरखारी ( रूप रेखा) देखाइछ ओकर व्याकरणिक आधार संस्कृत आ विधा निरूपणक आधार मूलत: अंग्रेजी साहित्य रहल ऐछ! अंग्रेजी, संस्कृत वा अन्यान्यो भाषामे साहित्य लेखनक शुरुआत काव्य विधा सं प्रारम्भ भेल जे अंग्रेजी मे पोएट्री कहबैछ. मुदा ओकर प्रारूप विभिन्न स्वरूपें/ नामे लिखाइत स्वतंत्र अस्तित्व मे स्थापित भ' चुकल ऐछ. यथा- कविता, गीत, गजल, हाइकु, क्षणिका..... आदि. प्रारम्भ मे कथा लेखन सेहो पद्ये विधा अंग छल. यथा- कथा काव्य!

पद्य( Poetry)के पछाति गद्य( Prose) विधाक जन्म भेल. पद्ये जकां गद्यो विधान्तर्गत रचनाक कतेको प्रकार ऐछ, जे स्वतंत्र नामे स्वतंत्र अस्तित्व मे सर्वविदित ऐछ! यथा - नाटक, उपन्यास- उपन्यासिका,लघुकथा, बीहनि कथा... आदि!

बीहनि कथाक परिभाषा आ खगता?
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पौराणिक स्त्रोतें बहरएल कथाक परिष्कृत, आधुनिक स्वतंत्र विधा थिक बीहनि कथा. जकरा न्यूनतम 20 आ अधिकतम 100 शब्दमे लिखबाक विधान ऐछ! इ ककरो नामान्तरण,कायान्तरण वा विधान्तरण नै, स्वतंत्र रूपमे विद्यमान ऐछ. जे स्पष्ट कथ्य आ गसल शिल्पें लिखल पुष्ट कथा थिक. जाहि मे निष्कर्ष पाठक पर छोइर देल जाइछ.

खगता! सृजनक आधार होइछ.आ खगल लोक ओकर पूर्ति बेर अपन अनुकूल बस्तुकें अंगिकार क' अंगेजैए.कालान्तरें लोक व्यवहार- ओढ़न-पहिरन, पढ़ब- लिखब सबमे स्वाभाविक परिवर्तन होइछ. लोक सदिखन परिवर्तित वा नव स्वरूपकें अंगेजबा लेल उदार होइछ.यांत्रिक युगमे इ इच्छा आओर प्रबल सन! कथाकार आ पाठकक ताहि इच्छापूर्तिक नव साहित्यिक साधन थिक -" बीहनि कथा "

पहिने समादकें कतौ पठेबाक लेल चिट्ठीक प्रयोग होइत छल. ओइ चिट्ठीक प्रारूप मे से हो भिन्नता. क्रममे सर्वप्रथम पोस्टकार्ड तहन अन्तर्देशी आ अन्तिम मे लिफाफे चलन सोझां आयल. आब गौर करू जे चिट्ठी लिखै/ लिखबै बला पर निर्भर छल जे कियो अपन सबटा बात पोस्टकार्ड मे लिखि पठबै छल, ककरो बात पूर करै लेल अन्तर्देशीक खगता त' कियो लिफाफ मे पन्नाक पन्ना भरि बात पूर करै छल. मुदा कालान्तरे लोककें असोकर्ज होम' लगलै ओकर पहुंचबाक नमहर समयान्तराल सं.तहन लोककें कम समयमे समाद पहुंचेबाक खगता पूर' लेल एलै- तार ( टेलिग्राम). जे द्रुत गतियें कम सं कम शब्दमे पास बलाक मगजमे समा क्रियाशील क' दै.त' चिट्ठीक प्रारूप मे 'तार' भेल बीहनि कथा.जे सीमित शब्द( अधिकतम 100) मे अपन बात सं पूर्ण रूपें पाठककें झकझोरवा मे सक्षम हुअए.आब वास्तविकता देखू जे तार बन्न भ' गेल, यांत्रिक विस्तार मे ओ इमेल धरि पहुंचि गेल. मुदा कथामे जहन हम सब तार धरि नै पहुंचि पाबि रहलौं तहन इमेलक कल्पने व्यर्थ!
आब दोसर रूपें बुझू भारतक सबसं लोकप्रिय खेल ऐछ -' क्रिकेट ' जकर प्रारम्भ टेस्ट मैच सं शुरू भेल छल. आगू आबि जहन लोककें समयाभाव भेने शीघ्र फलक आश जगलै तहन टेस्टक संग एक दिना( वनडे) खेलक प्रारुप एलै.जकरा झटसं लोक अपन हियामे बसा लेलक.जखन जिनगी आओर व्यस्त , समय शिथिल भेलै तहन आयल -'ट्वेन्टी- ट्वेन्टी! ऐ खेलक प्रारूप मे ट्वेन्टी- ट्वेन्टी बुझू बीहनि कथा !

चलू फेर घुरि चली साहित्यमे.गद्य लेखनक प्रारम्भ उपन्यास सं भेल छल. कालान्तरे पाठकक आ लेखकक व्यस्ततावश जनमल विधा लघुकथा( शॉर्ट स्टोरी) जाहि अन्तर्गत मैथिली मे कथा गल्पक लेखन होइछ.कालक्रमे लोककें अति व्यस्तता सं पलखतिक अभाव आ साहित्यिक नव रूचिएं कथाक परिष्कृत रूप वा लेटेस्ट दर्जन रूपमे सोझां आयल बीहनि कथा(शीड स्टोरी) .

आब गप्प करी विधान वा बन्हनक!पहिने बीहनि कथाकें अंग्रेजीक फ्लैशफिक्सनक टेलब्राक अन्तर्गत राखि अधिकतम 150 शब्दमे लिखबाक प्रावधान सोझां आयल. इ सुनिये मैथिली मनीषी सब छटपटा उठला! कहलनि- ऐं गद्यकें कोना कोनो बन्हनमे बान्ध जा सकैए? बान्ह आ नियम त' पद्य लेल होइछ.तहन हुनकर सबहक इ विचार आ कि हाहाकार! हास्यास्पद लागल.इ प्रत्यक्ष उदाहरण सोझां ऐछ जे उपन्यास सं लघुकथा होइत बीहनि कथा धरि अवरोही क्रममे पहुंचब शब्देक सिकुड़न थिक.कथ्यक सिकुड़न नै होइछ. अहां एकहि कथ्य सं शब्द विस्तार दैत बीहनि कथा सं लघुकथा होइत उपन्यास धरिक सृजन क' सकै छी.आ तें बीहनि कथामे अन्त खुजल रहैछ, बन्न नै.माने निष्कर्ष नै रहैछ.ओ पाठक तय करए.

बीहनि कथा स्थापनाक प्रारम्भिक क्रममे विस्तृत अध्ययनक निष्कर्षत: मैथिली कथा साहित्य संकट ग्रस्त देखएल.भाय- भैय्या री, गोंधिया गोधव्वल आ नकल लात तर दबल.लतखुर्दन सन! जे सब लिखथि हुनके किछु गोटेक समूहमे ढ़ाठल.कियो एकरा ओइ ढ़ाठसं बहराकय राष्ट्रीय पटल पर ल' जेबाक मनोरथ तक नै पोसने. बस! अपन परार मे बान्हि -" हम सुनरी हमर पिया सुनरा,गामक लोक बनरी-बनरा " के चरितार्थ करैत. हमरा जन्म इएह मूल कारण हेतै जे मैथिली साहित्य अन्यान्य भारतीय साहित्यक क्रममे सबसं पाछु नै वरन् क्रम सं कतिएल सन! कतौ हेरएल- बेरएल बुझू.ऐ दुर्दशासं आहत हम, इ मनोरथ वा लौ़ल जे कही, करैत मैथिली कथा साहित्यकें बीहनि कथा माध्यमे राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय, वैश्विक बनेबाक संकल्प लेलौं.जहन विश्व भरिक विधाकें अंगीकार क' हम सब अंगेजने छी, तहन माय मैथिलीक एकमात्र चिलका/ विधा बीहनि कथाकें विश्व भरिमे पसार कि एक नै करी?

अंग्रेजी साहित्यक विधाक क्रममे-- नोवेल, शॉर्ट स्टोरी होइत सीड स्टोरी पर पहुंचबाक क्रममे हिन्दी लघुकथाक नकल मैथिली मे देखएल. जे भातमे आंकड़ सन लागल.ओइ नकल केर एकटा कारण छल हमर सबहक हिन्दीयाइन भेनाइ.हिन्दी साहित्य जेना अंग्रेजी साहित्य सं प्रभावित तहिना मैथिली साहित्य हिन्दी साहित्य सं आच्छादित! तकर मूल कारण रहल हमरा सबकें हिन्दी पट्टीक अंग रहनाइ.अफन सबहक शिक्षाको माध्यम हिन्दी, जाहि सं पत्र- पत्रिका, पोथी पढ़बामे हिन्दीये ग्राह्य ! फिल्म, समाचार, आ साहित्य देखब, पढ़ब- सूनब सब हिन्दीमे तें ओइसं प्रभावित भ' ओकर कोर्ट चिलका ' लघुकथाकें पोसपुत मानि लेब स्वभाविक सन! निसंतान दंपति द्वारा पोसपुत कोर लेब बेजए नै, मुदा जहन अपना लग मए मैथिलीक चिलका बीहनि ऐछ तहन दोसराक मुंह ताकब कते उचित?
कोनो नीकक अनुकरण बेजए नै, मुदा अंधानुकरण अनुचित! किएक त' नकल लेल अकल चाही से देखएल शुन्य उदाहरणार्थ- अंग्रेजीक शॉर्ट स्टोरी क अन्तर्गत मैथिलीक रचना सृजन होइछ- कथा/ गल्प. तें सब कथा संग्रह पर अंग्रेजी मे लिखल भेटत- Collection of Short stories. एत' एकटा हास्यास्पद स्थिति जे हिन्दी बलाक देखांउसे शुरू भेल लघुकथा ताहु संग्रह पर अंग्रेजी मे लिखल ऐछ- Collection of short stories. जहन कि दुनूक प्रकृति/ स्वरूप देखू जे दुनूमे पिता- पुत्र बला स्थिति.तहन त' पहिचानक संकट. एतै नकल लेल अकल केर खगता देखार होइछ.खैर! गौर करबा योगय महत्वपूर्ण बात जे मैथिली मे जे विधा ऐछ- सब कोनो ने कोनो भाषा सं आयातित ऐछ. जहन कि बीहनि कथा मैथिलीक अपन माटि- पानि पर अपन शब्दें जनमल एक मात्र पूर्णत: मैथिली साहित्यक विधा थिक. ककरो कायान्तरण, नामान्तरण, आ कि कोनो आन विधान विधान्तरण नै थिक. बीहनि कथा विधाकें मैथिली मे स्थापित भेलोपरान्त एकरा विश्व कथाक बाट पर आगू बढ़ेबाक क्रममे टेलब्राक अधिन अधिकतम 150 शब्द धरि लिखबाक सीमान राख गेल छल. आगू बढ़ैत विश्व कथा विधायक संशोधने ओ निरस्त भ' गेल.तहन ओकरा अंग्रेजीक माइक्रो स्टोरीज वर्ग में आनि स्थापित आ मान्य भेल. जाहि अन्तर्गत अधिकतम 100 शब्दमे स्पष्ट कथ्य आ गसल शिल्पें लिखल संपुष्ट कथा ' बीहनि कथा ' नामे स्थापित भेल.इ कोनो कथाक छेंट वा फिलर नै थिक.

आब विश्व कथा साहित्यक अध्ययन आ निरुपण करैत आधुनिक कथा साहित्यक भिन्न वर्गीकरण सोझां आयल. जकर विवरण ऐ प्र कारें ऐछ- अंग्रेजी साहित्यमे गद्य लेखनक शुरूआत नोवेल सं भ' शार्ट स्टोरी होइत सीड स्टोरी धरि आबि क्रियशील ऐछ! नोवेलक पछाति 1896 में नव खगता आ पूर्तिक लेल जनमल शार्ट स्टोरी 1930 धरि पुरातन सन भ' गेल.1930 मेछोट कथाक नव खगता- पूर्ति वा खांहिश मे जनमल वेरी शार्ट स्टोरीज केर अवधारणा. मोन पाड़ू 1930 माने मैथिली शार्ट स्टोरीज ( कथा/ गल्प) क शैशव काल! ओइ " वेरी शार्ट स्टोरीज के कथा वर्गीकरण मे फ्लैश फिक्शन श्रेणी में राखल गेल जाहि मे अधिकतम 1000 शब्दकोश कथा रचना निहित छल.

से क्रम 1990 धरि चलल. एकर पछाति फेरो एकर संशोधन परिमार्जनक खगता भेल.आ से परिमार्जन वा संशोधन भ' नव विधान आगमन -1990-1995क बीच भेल .महत्वपूर्ण बात जे ओही 90-95क बीच मैथिलीक तत्कालीन नव पीढ़ीकें मैथिलीमे " बीहनि कथा "(सीड स्टोरी)के खगता आ पूर्तिक संभावना देखएल. पहिने कथा लेखनक शुरुआत संस्कृत, बांग्लाक प्रभावे
भेल छल. तें बड्डे पछुएल.इ सुनि गौरव बोध हएत जे " बीहनि कथा विधा" प्रत्यक्षत: अंग्रेजीक आधुनिक कथा विधाक समक्ष अपनाकें ठाढ़ केलक. ककरो आन भाषा/ विधाक बैशाखीक सहारे नै. से किछु मैथिलकें आंखि आ देह दुनूमे गड़ब शुरू भेलनि.मुदा बीहनि कथा ओइ संघर्ष सं पार पाबि बहुत आगां निकलि गेल.

मैथिलीक किछु साहित्यकार बीहनि कथाकें शब्द संख्या द्वारा निरूपण आधारकें विरूद्ध नकारात्मक स्वरें सुगबुगेला.एत' अंग्रेजीक आधुनिक कथा विधाकें फरिछबैत वर्गीकरणक बानगी प्रस्तुत ऐछ! गद्य लेखन नोबेल सं शुरू भ' शार्ट स्टोरी होइत सीड स्टोरी पर आबि ठमकल.1896 सं गति पकड़ल शार्ट स्टोरी 1929 धरि बढ़ैत कछमछए लागल.1930 मे अंग्रेजी साहित्यकारकें शार्ट स्टोरीजक विकल्पक खगता - पूर्ति स्वरूप 1931 मे जनमल नव विधा जे फ्लैश फिक्शन कहएल.ओकरे पर्याय के रूपमे" वेरी शार्ट स्टोरीजकें परिभाषित कएल जाइत रहल. महत्वपूर्ण बात जे कथा विधाक स्वरूपमे जे कालान्तरे परिवर्तन होइत रहल ओकर मूलाधार शब्दे मात्र छल. यथा- 1000 सं1500 शब्द धरिक कथा शार्ट स्टोरीजक अन्तर्गत राखल गेल( अपवाद स्वरूप शार्ट स्टोरी 3500 शब्द धरि लिखएल ऐछ!) 1000 वा ओइ सं कम शब्द धरिक कथा फ्लैश फिक्शन वा वेरी शार्ट स्टोरी कहएल. इ कथा विकासक क्रमे आगां बढ़ैत 750 शब्द धरिक कथा सृजन होम' लगलै जकरा सडेन फिक्शन संज्ञा देल गेल. कालान्तरे आगू जा 280 शब्द धरिक कथा लिखल जए लागल जे ट्वीटरेचर नामे जानल गेल.आओर संशोधन होइत माइक्रो फिक्शन वा क्षीणकाय बला कथा विधा सोझां आयल. जाहिमे आधिकतम 100 शब्दक पूर्ण कथा लिखबाक प्रावधान छै. एकरे अन्तर्गत मैथिलीक बीहनि कथा विधा ( सीड स्टोरी) विद्यमान ऐछ! आ कही मानक ताकें पालन करैत आधुनिक कथाक विश्व पटल पर बैसबाक प्रयास मे लागल ऐछ.
1993-95 मे ब्रायन एल्डिस " मिनी सागा "नामे कथा लेखन- प्रकाशन सोझां अनलनि . जाहिमे पूर्ण 50 शब्दमे लिखबाक बन्धन छलै.49 शब्द आ कि 51 शब्द स्वीकार नै छल. ओही कठोर नियमक चलते लोकप्रिय नै भेलै. अही संग फिफ्टी फाइवर आ सिक्सटी नाइनर कथा विधा सेहो उपकलै.ब्रूस हॉलैण्ड राजर्सक 365 सिक्सटी नाइनर कथाक संग्रह चर्चित रहल. एखन धरिक अद्यतन कथा विधा सिक्स वर्ड स्टोरीज छै.जकर जन्मदाता अर्नेस्ट हेमिंग्वेकें मानल जाइछ. हुनक छ: आखरक पहिल कथा 1992 मे प्रायोगिक तौर पर छपिकें सोझां आयल. ओकर मैथिली भाषान्तर नीचा पढ़ू---
" बिकाऊ ऐछ बेबी शूज, बिनु पहिरल."

आब चली बीहनि कथा ( Seed Story) पर. बीसम सदीक अन्तिम दशक! मैथिली कथा साहित्यमे एकटा नव कथा विधाक धमक भेल.ओ विधा छल- " बीहनि कथा "(Seed Story) . ओ एहेन समय छल जहन विश्व कथा समुदायमे सेहो एहेन कथा विधाक खगता आ पूर्ति लेल सीड स्टोरीक प्रादुर्भाव भेल.इ काज सर्वप्रथम 1993 मे अमेरिका मे भेल.एकर शुरुआत " Stories Bite" नामक पत्रिका द्वारा भेल.इ पत्रिका ऐ कथा विधाकें परिभाषित करैत " Seed Stories नामे बानगी वा प्रयोग स्वरूप किछु रचना प्रकाशित आ परिभाषित केलक. एकरा परिभाषित करैत ओहि मे लिखलक- " Seed stories are stone of knowledge, Idea and action. It's Called of small Moment stories. "
अर्थात-
एकर प्रारम्भिक अवस्थामे लोककें परिचित/ प्रेरित करबा लेल संपूर्ण U. S. A मे रेडियो पर प्रसारण आ टी. वी रिले अनिवार्य क' देल गेल छल.
इ महज एकटा सुखद संयोग छल जे कथा विकासक क्रममे विश्व साहित्य पटल पर जाहि आधुनिक कथाक खगता बुझल गेल ओही समकाल भारतीय साहित्यक मैथिली कथा साहित्य मध्य सेहो एहेन कथा विधाक बीजारोपणक खगता आ पूर्तिकें अकानलनि. जे संपूर्ण भारतीय कथा साहित्यक एकटा परिवर्तनकामी आ क्रान्तिकारी डेग छल. ध्यातव्य जे पहिने जे मैथिली कथा साहित्य भारतीय कथा साहित्यक क्रममे पांतिसं बाहर छल, उएह बीसम सदीक अन्तिम दशक मध्य विश्व कथा परिदृश्यक समकक्ष भ' कान्ह उठेलक.आ वर्ष 1995 सं उठैत- बैसैत,ठोकाइत- पिटाइत पूर्ण परिष्कृत रूपमे आविष्कार स्थापित भ' गेल.आब टघरल- सरल नै वरन् दौगैत मोकाम दिस बढ़ि रहल. .....!

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।