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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक

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मैथिली साहित्य आन्दोलन

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शिवशंकर श्रीनिवास- संपर्क-9470883301

चमेली रानी

'चमेली रानी' केदार नाथ चौधरीक चर्चित उपन्यास थिक। एकर प्रकाशन 2004 . मे भेल।

एहि उपन्यासमे उपन्यासकार कहैत छथि जे एहि देशक राज-सत्ता एहिठामक जनताकेँ लूटि रहल अछि, दोसर दिस जे एहि ठाम विभिन्न डकैतक गुट अछि ओहो जनताकेँ लूटि रहएलैए। एहि स्वतंत्र देशक जनता राजनीति केनिहार व्यक्ति द्वारा कोना ठकल जाइए आ लुटाइए आ दोसर दिस विभिन्न डकैत द्वारा कोना लूटल जाइए। ओहिमे राजनीति केनिहारमे कतेक भिन्नता ओ समानता अछि, अहिकेँ बहुत कौशलसँ देखबैत सम्मुख 'बिहार' राज्यकेँ रखैत कथा कहैत छथि जे बहुत बेबाक ढंगसँ कहल गेल अछि। जाहि कहबमे कोनो पर्दा नहि राखल गेल अछि जे ईहो प्रश्न उठबैत अछि जे की एना कहल जेबाक चाही? उक्त प्रश्न-स्थलकेँ हम आगू उठा ओहिपर विवेचन करब। संप्रति एकर कथापर ध्यान दी।

कथा कीर्तमुखक परिवार वर्णनसँ प्रारंभ होइत अछि। कीर्तमुखक पत्नी छलि शनीचरी। अंग्रेज हाकिम डन्सफोर्डक रखैलक बेटी छलै सुनयना, ओकर बेटी छलै शनीचरी। ओहि शनीचरीकेँ चिनगारीजी माने सोस्लिस्ट पार्टीक सदस्य जे बादमे नेता आ मंत्री भेलाह अपन प्रिय मोदियाइनक ओहिठाम ओकरा आनि रखलनि ओ मोदियाइन शनीचरीकेँ चिनगारीजीक लेल जुगता कऽ रखबाक लेल गंगा कातसँ आनि कीर्तमुखकेँ बियाहि देलकै जकरामे पुरुषत्वक अभाव रहै। जखन चिनगारी मंत्री बनि मोदियाइन लग एलाह तँ ओ मोदियाइन स्पष्ट कहलकनि-"गंगा कातसँ एकटा मनुक्खकेँ आनि जकर नाम छै कीर्तमुख, शनीचरीक बियाह करा देलियै। आखिर समाजसँ, लोक-लाजसँ अहाँक रक्षा करब आवश्यक छल। कीर्तमुखकेँ सहवास करबाक लूड़ि नहि छैक। सनीचरीसँ बच्चा अहाँ जन्माउ आओर बाप रहत कीर्तमुख।" चिनगारीजी बेसी दिन नहि टीकि सकलाह। रोगी भऽ मरि गेलाह आ शनीचरी आजाद भऽ गेलि। मोदियाइनक आमदनी बढ़ि गेलै। एहि क्रममे ओकरा पाँच टा बेटा भेलै-युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, सहदेव आ नकुल। नकुलक जन्मकाल शनीचरी मरि गेलि। हम्मर मोदियाइनक एक मात्र बेटी 'चमेली' हाइवेपर फैलसँ घर बनेलक। ओकर धर्मपिता नामी डकैत भुखन सिंहक अभिभावकत्व ओकरा भेटल छलै। ओ पढ़लि-लिखलि छलि। फटाफट अंग्रेजी बजै वाली, तेजतर्रार आ मुँहफट। ओकरे इशारापर भूखन सिंहक गैंग नचैत छल। अही चमेली रानीक नेतृत्वमे उक्त उपन्यासक कथा आगू बढ़ैत अछि।

इमहर गुलाब मिसिर राज्यक मुख्यमंत्री छथि। एकटा अनाथालयमे पलल बच्चा कोना सहारा पाबि ऊँच कुल-मूल संग भ्रष्ट रस्तासँ शिक्षाक डिग्री पाबि एकाएक राजनीतिक दलक नेता भऽ मुख्यमंत्री कुर्सी पाबि शासन करैत अछि ओकर आश्चर्यजनक कथामे आएल अछि।

उपन्यास चमेली रानी गिरह द्वारा संपूर्ण राज्यमे जाल बिछा पूँजीपतिकेँ लूटल जाइत अछि ओकर वर्णन बहुत रोचक ढंगसँ कएल गेल अछि, एहि गिरोहमे स्त्री-पुरुष दूनू अछि। दूनू भेष बदलि जाहि रूपे मालदार यात्री ओ मालदार भ्रष्ट नेताकेँ लुटैत अछि ओ अद्भुत नाटकीय ढंगसँ कथाकेँ पुष्ट करैत, रोचकता भरैत आगू बढ़ैत अछि।

डकैतक गिरह अपन डकैती क्रममे कतेको हिंसा ओ क्रूरतम काजकेँ अंजाम दैत आगू बढ़ैत अछि किंतु आश्चर्य तखन लगैत अछि जे गिरहक नायिका एहन व्यक्तिक चुनाव अपन पतिक रूपमे करैत अछि जकरा लग संवेदना छैक। अर्जुन पहिले दिन चमेली रानीक आह्वानपर ओहि गिरोहमे सम्मलित भऽ ट्रेनमे डकैती करैत अछि, ओहि लूटक क्रममे एकटा सोहागिन स्त्रीक विनती कएलापर जे मंगलसूत्र ओकर सोहागक निशानी छियैक, एकरा नहि छिनय। अर्जुन ओहि स्त्रीक संवेदनासँ संवेदित भऽ ओकर मंगलसूत्र नहि छीनैत छैक। ई बात चमेली रानी बुझैत अछि।  ओ दूर रहैत सभक कार्य पता रखैत अछि। ओना ओ अर्जुनकेँ कहैत अछि जे एहि तरहक कमजोर व्यक्ति हिंसा नहि कऽ सकैत अछि आ तें ओकरा आगू कोनो तरहे केकरो हत्या करबाक भार नहि देल जाएत, कारण डकैतकेँ कोनो तरहक संवेदना नहि राखक चाही। किंतु विवाह करैत अछि ओही अर्जुनसँ।

संपूर्ण उपन्यासमे देखाओल गेलैए जे डकैत गिरोहक बीच एक-दोसरक प्रति वएह स्नेह-प्रेम छैक जे कोनो परिवारमे एक-दोसराक बीच रहैत छैक। अपन नायक प्रति, मित्रक प्रति ओ अपन कार्य प्रति अद्भुत-अद्भुत निष्ठा ओ प्रेम छैक। ओहि गिरहक बीच कोनो तरहक विश्वासघातक जगह नहि छैक। पन्ना, दोसर गिरहक सरदार, कोनो हालतिमे भूखन सिमहक अधलाह नहि करत।  किएक तँ ओ ओकर मित्र थिक। भले ओकर गिरहो फूटै छै। किंतु राजनीतिमे ककरो प्रति कोनो संवेदना नहि छैक। ओहिठाम मात्र कुर्सी महत्वपूर्ण छैक आ महत्वपूर्ण छैक ओकर कोनो लाभ अंश।

उपन्यासमे आएल अछि- "राजनीतिक सवसँ विशिष्ट गून थिक धूर्तता"। आ धूर्तता गुलाब मिसिरमे भरल अछि। जे भूखन सिंह ओकर गिरह द्वारा कतेको बेर गुलाब मिसिरक सहायक भेल छल आ जखन अहमदुल्ला खांक संपूर्ण खजाना लूटल जाइए। अहमदुल्ला जे देश विरोधी छल, जनताकेँ शोषण करैत छल। ओकर खजानाकेँ जखन चमेली रानीक गिरोह लूटि लैत अछि आ  नांगटनाथकेँ ट्रेनमे लुटि हत्या कऽ दैत अछि तखन गुलाब मिसिरक क्रोध असमान छूबए लगैत अछि, आ ओ कोनो हालतिमे भूखन सिंहकेँ मारि देबए चाहैत छथि आ एहि लेल दोसर गिरोहक सरदार पन्नासँ भेट करैत अछि आ ओकरा  आदेश करैत छथि जे भूखन सिंहकेँ मारि देथि। किंतु पन्ना नहि मानैत अछि, ओक कहैत अछि- "गलत, भूखन सिंह मेरा बड़ा भाइ जैसा है। भूकन भाइ का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। तुम्हारा इन्टेलिजेन्स गोबर टीम है। तुम्हारे कहने से मैं अपने देवता समान भाइ की हत्या नहीं कर सकता"। राजसत्तापर बैसल लोककेँ सतत कोनो गतिविधिसँ ओकरा पहिने राजसत्तेपर खतरा बुझाइत छैक। चमेली रानी द्वारा हुनक सहयोगीपर हमलाकेँ ओ अपन कुर्सीपर अबैत खतरा बुझै छथि आ हुनका अर्थात गुलाब मिसिरकेँ पन्नाकेँ किछु कहबाक साहस नहि होइत छनि किंतु पन्नाक बाडीगार्ड ध्रुवा केर बेटीक अपहरण करबा ध्रुवासँ कहैत छथि जे जँ ओ छलसँ जहर दऽ भूखन सिंहकेँ नहि मारत तँ ओकर बेटीकेँ मारि देल जेतै। आ पन्नासँ जखन भूखन सिंह भेट करए अबैत अछि तँ ध्रुवा ओकर शराबमे जहर मिला दैत छैक। भूखन सिंह तुरंत बूझि जाइए आ ब्रजनाथकेँ कहि कहि ओतएसँ विदा होइए। ओकर बाडीगार्ड ब्रजनाथ ओकरा बाद पहुँचि उतारैत अछि आ भूखन सिंह अपन इच्छाइ टेप कऽ ब्रजनाथकेँ दैत कहैत छैक जे ई टेप ओ टेप चमेली रानीकेँ सुना दैक। पन्ना आश्चर्यचकित भऽ ध्रुवासँ सभटा बात बुझि ओकर हत्या कऽ दैत अछि।

चमेली रानी अपन धर्मपिताक हत्यासँ बहुत हताश होइत अछि किंतु पन्नाक अभिभावकत्वमे आगा बढ़ैत अछि आ ततबा समधानि कऽ आगू बढ़ैत अछि जे धूर्ताताकेँ धूर्ततासँ कटैत संपूर्ण प्रदेशमे पन्नाक निर्देशनमे जाल बिछा गुलाब मिसिरक सत्तापर चुनावक माध्यमे पहुँचि जाइत अछि। उपन्यासक कथामे गुलाब मिसिरक अपहरण होइत अछि, ओ अज्ञातमे चल जाइत छथि ,ओहि अज्ञातक पर्दासँ बहराइ नहि छथि तकर कारण स्पष्ट नहि होइत अछि। हमरा जनैत खुजल मैदानमे गुलाब मिसिरकेँ पदच्युत करबासँ पाठक लग पारदर्शी संवाद पहुँचैत से नहि भऽ पबैत अछि। ओ चमेली रानी जनताक शोषण विरुद्ध अपन गतिकेँ रखैत राजनीतिसँ राजनीतिक धूर्तता कए कऽ विजय प्राप्त करैत अछि जे स्प्षट कहैत अछि जे राजनीतिमे केकरो धूर्तता बिना परास्त नहि कएल जा सकैए। उपन्यासक उक्त दृष्टि हमरा जनैत लोकपक्षीय नहि भऽ पबैए कारण कोनो चक्रचालि वा षड्यंत्र लोकहितमे नहि भऽ सकैए चाहे उपरसँ ओ जे लागए तँइ उक्त उपन्यास यथास्थितिक परिचय तँ दैत अछि किंतु पाठककेँ निर्विकार-पथक प्रेरणा देबामे पाछू रहि जाइत अछि।

मैथिली भाषामे कोनो दैनिक पत्र-पत्रिका बेसी दिन टिकल भले किछु-किछु दिनपर पुनः-पुनः नव दैनिक पत्र बहराइत रहलैए। उक्त पत्र सभ निश्चित रूपसँ भाषा प्रेमक प्रतीक थिक, किंतु ओकर बंद होएब स्पष्ट कहैत अछि जे मिथिला भूमिपर एखन तक भाषाक लेल लोक जागरण नहि भेलैए।

एहि उपन्यासमे मैथिलीक दैनिक 'स्वयं प्रकाशक'क लोकप्रियताक चर्चा कएल गेल अछि जे संपूर्ण रूप एहि उपन्यासक कल्पना संसारक प्रकाशन अछि। 'स्वयं प्रकाशक'क लोकप्रियताक कारण  अछि जे ओहिमे नव-नव, एहन-एहन समाचार छपैत अछि जे  लोकमे ओकरा पढ़बाक उत्सुकता बढ़ि जाइत छै। ओकर लोकप्रियताक उदाहरण इएह छैक जे हिंदी दैनिक पत्र सभ ओहि पत्रसँ ईर्ष्या करऽ लगैत छैक।  अर्थाप मैथिली दैनिक 'स्वयं प्रकाशक'क लोकप्रियताकेँ देखबैत उपन्यासकार कहैत छथि जे मैथिली दैनिक एहि मिथिला भूमिपर लोकप्रिय भऽ सकैए जँ ओकरा राजनीतिक दृष्टिसँ चलाओल जाए। उपन्यासमे आएल विभिन्न प्रसंग वर्तमान समाजक मनोदशा के जेना कहैत अछि जे वर्तमान समयमे समाजकेँ लाभ स्थिति देखा ओकरा जिम्हर चाही तिम्हर कऽ सकैत छी, मात्र जनता बूझए जे ओकर तारणहार के अछि। एक बेर यदि जनता तारणहार बुझि गेल तँ अहाँकेँ छोड़त नहि। जेना पहिने गुलाब मिसिरकेँ बुझै छल बादमे चमेली रानीकेँ बूझए लागल।

उक्त सभ बात अपन कथा प्रसंगसँ कहैत उपन्यास आजुक भ्रष्ट शासन तंत्र ओ जनताक कोमल मानसिकतापर ओकर प्रभावकेँ स्पष्ट रूपे स्पष्ट करैत आजुक समयक भयावहतासँ परिचय करबैत छथि जे महत्वपूर्ण अछि।

गुलाब मिसिर अनाथालयसँ सुपथपर आगू अबैत तँ निश्चित रूपसँ पाठककेँ नव सनेस भेटितैक मुदा से नहि भऽ पबैत अछि तकर कारणो स्पष्ट अछि जे एहि उपन्यासक मुख्य उद्येश्य आजुक समयक भ्रष्ट स्थितिकेँ अनबाक अछि जाहिमे उपन्यासकेँ बहुत हद तक सफल कहबाक चाही। 

असमदुल्ला खांक अजीब दृश्य जाहि अश्लीलता परिदृश्यमे देखाओल गेलैए ओ हमरा जनैत उपयुक्त नहि अछि। ओना हम मानै छी जे कोनो दृश्य ओ शब्द यदि उपन्यासक कथाक लेल आवश्यक अछि तँ ओ अश्लील किएक ने रहए ओकर प्रयोग हेय नहि थिक से उपन्यास अहमदुल्ला ओ रजियाक बीचक अश्लील दृश्य निष्प्रयोजक लगैत अछि। उपन्यासकार मैथिलीमे उपन्यास कहैत एहि आएल विभिन्न पात्रक भाषाक प्रयोग कएल गेल अछि। हमरा जनैत उपन्यासकार सभ बात हमरा अपन भाषामे कहि रहला अछि तँइ पानक संवाद कहलासँ की लाभ? हमरा जनैत उक्त विषय हमरा अनावश्यक लगैए।

 

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