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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक  

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संतोष कुमार राय 'बटोही'

मंगरौना (धारावाहिक उपन्यास)

(पाँचम खेप)

कोलकाताक बंगाली मानुस केँ दाद देवाक चाही जे अखनो धरि बंगाल मे मनुख बाँचल छै।संतोषक परिवारक बर्बादी मे कोलकाताक सेहो करिश्मा रहल छै। 1992 मे ओ अपन माए संग कोलकाता गेल छलाथि। कोलकाता कालीघाट मे रहल छलाथि। ओही समय मे दोसरा वा तीसरा मे गामक विद्यालय मे ओ पढ़ैत छलाह अछि। गाम सँ शहर जेवाक कारण छलन्हि - परिवारक गरीबी। 'व्यासजी' कमैत नहि छलथिहीन। 

1993 मे गाम वापिस भेल छल ओ। 'मंगरौना'

गाम ओह गाम छल जकर नाम बिकैत छेलैह। बिहार मे स्वर्गीय जगन्नाथ मिश्र मुख्यमंत्री छलाह । मंगरौना कांग्रेस केँँ झंडा केर नीचा खड़ा छल। झंझारपुर विधानसभा सीट सँ स्वर्गीय उमाकांत राय चुनाव मे ठाड़ भेलाथि। अमातक पहिल आदमी ओ छलाह जे विधानसभा लेल ठाड़ छलाथि। पूरा अमात जाति मे गौरव केर गप्प छेलैह। परञ्च भगवान जनतिन्ह जे ओ चुनाव मे बैस गेलथिन्ह। शिवा चौक दिस जगन्नाथ जी सँ नेताजी केँ की गप्प भेलन्हि ?

राजनीति जमीन पर मंगरौना केँ इ हार छल। जातिक छवि केँ बंटाधार लागि गेलै। फेर जिनगीभरि नेताजी केँ ऊपर उठवाक मौका नहि भेटलन्हि। मंगरौना केँ थू-थू भेलै। हम विश्वास हारि गेदहुँ अछि। मंगरौना अपन इतिहास माटि पलित कs लेलक। मंगरौना नाम पर लोक धूर-छिया करs लगलै। 

2021 केँ पंचायत चुनाव मे श्री रामानंद जी केँ जिला परिषद्  सीट संख्या -46 सँ विजय हेनै 'मंगरौना' केँ इतिहास केँ पुनर्जीवित केनै भेलैह। राजनीति मे मंगरौना पछुएल छल। इ हिनकर चारिम प्रयास छलन्हि।

मंगरौना मे किछु भs सकैत अछि। एकटा नवयुवक रिक्शा पर मूरैय के महादेव बाबा जँका रूप लकs भरि गाम सँ महादेव बाबा केँ नाम पर चंदा वसुल लैत छथि। हुनका कियो किछु कहनिहार नहि। दानी लोकनि दानों दति छन्हि। ओ नवयुवक लाउडस्पीकर मे सस्वर मे मूरैय वाला भोला बाबा केँ उत्पत्ति केँ वर्णन करैत छथिन्ह।

"सुनलियौ मंजू, तोरा गाम मे महादेव उखड़थिन्हहें।"

"नहि गै, के कहलथुहुन तोरा।"

" झबरी केँ माए बजैत छलथिहिन।"

" हँ, एकटा छौरा, झूठ-मूठ केँँ मूरैय केँ महादेव बाबा बना कs लोक सभ केँ ठगि रहल छै। आस्था केँ नाम पर ठगि रहल छै। लोक सेहो ठगा रहल छथि।"

लक्ष्मीनारायण केँ मर्डर मे कतेक लोक बर्बाद भs गेलै। इ छथि - 'लालबत्ती देवी'। ओई मर्डर कांड मे हिनकर सभटा गहना गनौलीक कोतवाल ठगि लेलकिहिन। लक्ष्मीनारायण केँ मर्डर मे उपयोग केल गेल पंचकमियाँ, फरसा भाला वगैरह सतनजीव काका केँ द देलकन्हि जे जो तू घर मे मचान पर नुका दिहै। ओ इ गप्प सँ अनजान जे एकर की परिणाम हेतै। झंझारपुर पुलिस केँ रेड गाम मे पड़s लगलै। चारू दिस सभ भागि गेलाह। ओइह हथियार केँ चबहच्चा पोखरि मे कटहर गाछ लग नीचा पानि मे छुपौल गेल । 

लालबत्ती देवी बथान पर ठाड़ बाछी केँ लकs अपन नैहर घंघोर जाएत छलीह। माथ पर मोटा मे दस-बारह टा गहना छलैक। गनौली मिडिल स्कूल पर किछु चीजक चुनाव छेलैक। कोतवाल एक गोट नवकनिया केँ जैत देखि कs हुनका लग जाकs हुनका डरा-धमका कs ओ सभटा गहना छिन लेलकैन्ह। इ घटना व्यासजी केँ परिवार मे कलह पैदा केलकन्हि। आओर परिवार बर्बाद भs गेलैक। लालबत्ती केँ जिनगी भरि गहना लेल मन लगले रहि गेलन्हि अछि। परञ्च बूढ़ाढ़ी में नाक मे नथ आओर गला मे चेन खरीद कs संतोष हुनकर गहना पहिरवाक सपना पूरा केलथिहिन।

लक्ष्मीनारायण के मर्डर मे मोदी लाल लगभग तीन साल झंझारपुर जेल मे बितौलथि । परिणाम मे हिनका किछु नहि केल भेलन्हि अछि। परिवार बरबाद भs गेलन्हि हुनकर। इ घटना मंगरौनाक व्यथाक घटना छियैय। स्वर्गीय  मोदी लाल राय दोसर लेल बेमतलब केँ जेल खटलाथि। परञ्च जेकरा लेल ओ जेल गेलाथि आओर परिवारक विकास अवरूद्ध भेलन्हि  ओ लोकनिक संतान तानाशाही हुनकर संतान केँ प्रति केलन्हि। इ मंगरौना छियैय।

श्री राजेन्द्र राय हार नहि मानलकिन्ह। 1984 (काल्पनिक) मे सूद पर लेल टाकाक सूद मूरि जोड़ि कs केतक गामक पंच मे हुनका कहलकिन्ह, परञ्च ओ पंचक फैसला नहि मानलकिन्ह। तकर भूगतान हुनका बाद मे सामाजिक बहिष्कार रूप मे भेलन्हि।

व्यास जीक विषय कीर्तन मे करेकमान लोकनि भवानीपुर मे सुनि रहल छथिन्ह। विषय छन्हि - 'होलिका केँ दहन'। ओ कहति छथिन्ह सबको बहिन होलिका सन होई जे अपन भैय्या केँ आदेश पर आगि मे जरै लेल तैयार भs जाएत छथिन्ह -

" बहिन हो, तो होलिका जैसन ,जो भाई हरिण्यकशिपु  के एक आदेश पर आग में जल गयी।" 

होलिका केँ वरदान केँ की भेलन्हि ? असत्यक संग देनै केँ कारने  वरदान बुढ़ियाफुंसि भs गेलन्हि। 

'31 ए सतीश मुखर्जी रोड' कतेक केँ जिनगी सँवारलकै अछि। अइ बासा मे मंगरौना केँ संग आनो गामक लोकनि गुजर-बसर केने छथि। इ बासा अइ रूपे ऐतिहासिक अछि। 'कालीघाट' हरैलो-भुतलैहो आबि - जा सकैत अछि। बिहारी लेल इ प्रसिद्ध जगह अछि जेना दिल्ली केँ शकुरपुर मे बिहारी चौक।

इ बासा दोसरक लेल वरदान साबित भेलन्हि, परञ्च हमरा लेल अभिशाप ! इ ककरो जिनगी केँ उठान देलकैन्ह,  हमर जिनगी के बेपटरी केलक। पटना मे साइंस रैख कs पढ़वाक इच्छा केँ इ बासा खा गेल। परिवार मे आगि लगौनिहार सभहक करेज शीतल भेलन्हि। हम नीक छात्र रहितौंह नहि पढ़ि पैलहुँ। 'घरक भेदिया लंका डाह' इ हमर जिनगी मे घुन लगौलक अछि।

जिनगी बड़ि खेल खेलैत छै वा लोक जिनगी के खेल बना देत छै। आइ हम इंजीनियर रहितहुँ , परञ्च हम गाम ओगरने छी।  चारि भैय्यारी रहितहुँ हमर परिवरिश अनाथ जँका भेल।  आँखिक नोर बहैत रहि गेल । ख्वाब ख्वाबे बनि कs रहि गेल। 

मधुबनी मे आर के कॉलेज मे केमेस्ट्री सँ बी एससी दाखिला लs कs जयपुर भागs पड़लन्हि संतोष केँ। संतोष केँ जिनगी नरक बनाबै मे हुनकर भौजाई केँ हाथ रहलन्हि । शिक्षा केँ बड़ि जरूरत पड़ैत छै। निरक्षर आओर नासमझ लोकनि नीक विद्यार्थी केँ जिनगी नरक बना दैत छै। 

( धारावाहिक उपन्यास 'मंगरौना' केर  बाकी अंश अगिला खेप मे )

-संतोष कुमार राय 'बटोही', ग्राम-मंगरौना, पोस्ट- गोनौली, थाना- अंधराठाढ़ी, जिला- मधुबनी, बिहार-847401. मोबाईल नंबर- 6204644978

 

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