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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक  

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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निर्मला कर्ण- राँची,झारखण्ड

केदारनाथ चौधरी व्यक्तित्व एवं कृतित्व

केदारनाथ चौधरी जी मैथिली भाषाक प्रसिद्ध उपन्यासकार छथि । हिनका मैथिली उपन्यास जगत के श्लाका पुरुष कहल जाइत छनि l ई अपन कृति क आधार लोकभाषा के बनौलनि l यैह कारण अछि जे हिनक उपन्यास के पात्र आत्मा में बसि जाइत अछि । हिनक उपन्यास नव पीढ़ी के सेहो आकर्षित करैत अछि। केदारबाबू अपन रोचक उपन्यासक लेल प्रसिद्ध छथि l हिनक उपन्यास एक बेर पढ़नाई प्रारम्भ केला उपरांत बिना समाप्त केने छोड़नाई असंभव होइत अछि पाठक केँ l
केदारनाथ चौधरी जीक जन्म 3 जनवरी 1936 . केँ नेहरा,जिला दरभंगा में भेल। 1958 .मे अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर, 1959 .मे लॉ केलथि ।अपन पूरा जीवन केदार बाबू प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य केलथि l 1969 .मे अपने पुनः कैलिफोर्निया वि.वि.सँs अर्थस्थास्त्र मे स्नातकोत्तर,1971 .मे सैन फ्रांसिस्को वि.वि.सँ एम.बी.. केलहुँ l एकर पश्चात् 1978 में भारत आगमन भेलनि । सन् 1981-86 के मध्य तेहरान आ प्रैंकफर्ट में रहलथि । फेर मुम्बई,पुणे होइत 2000 सँ लहेरियासराय में निवास भेलनि ।
.केदारनाथ चौधरी लगभग सत्तर वर्षक उम्र में लेखन प्रारम्भ केलथि l हिनक साहित्य जगत में पदार्पण 2004 में प्रकाशित उपन्यास "चमेली रानी" s भेलनि।

हिनक लिखल चमेलीरानी,आयना,माहुर,हीना,करार, आवारा नहितन पढ़वाक सौभाग्य भेटल l हिनक उपन्यासक विशेषता शुद्ध मैथिली भाषाक प्रयोग एवं रोचकता,सँगहि भाषा में प्रवाह अछि l हिनक उपन्यास पढ़वा काल बुझना जाइत अछि जेना मिथिलांचल में भ्रमण कs रहल छी l वैह वातावरण,वैह संस्कृति,वैह मिथिलांचलक बात व्यवहार,आँखिक समक्ष आबि जाइत अछि l हिनक उपन्यास पर हिनक विचारधाराक छाप स्पष्ट बुझाएत l सब चरित्रक बीच बुझाएत जेना केदार बाबू अपने होथि l मैथिली भाषाक प्रचार-प्रसार हेतु भागीरथ प्रयास केलथि केदार बाबू l मैथिली फिल्म "ममता गाबय गीत" के निर्माण ओकर एकटा स्तम्भ रहल l "ममता गाबय गीत" के निर्माण सन् 1966 में भेल जेकर मदनमोहन दास आ उदयभानु सिंहक संग सह निर्माता छलाह केदार बाबू l
हिनक उपन्यास "आवारा नहितन" एक तरह सs प्रस्तावना अछि फिल्म "ममता गाबय गीत" के l "ममता गाबय गीत" के निर्माण कोना भेल वैह पूरा कथा पुस्तक में अत्यंत रोचक ढँग सँs वर्णित भेल अछि l किनका सँs संवाद-विचार कs हिनक मैथिली के प्रति स्नेह-भाव बढ़लनि,किनका द्वारा हिनक भाषा प्रेम में उन्नति भेलनि तेकर विशद वर्णन "आवारा नहितन" में भेल अछि l
वर्ष 2016 के लेल मैथिली भाषा'क सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार 'प्रबोध साहित्य सम्मान" हिनका भेटलनि l शांति निकेतन के प्रोफेसर डॉ. उदय नारायण सिंह नचिकेता जीक अध्यक्षता में गठित दस सदस्यीय निर्णायक मन्डली हिनक नामक चयन केने रहथिन। मैथिली आंदोलन के अग्रणी नेता प्रबोध नारायण सिंह के नाम पर ई सम्मान 2004 सँ देल जाइत अछि l वर्ष 2016 में केदारनाथ चौधरी जी के हुनक रचना "आवारा नहितन" के लेल "केदार सम्मान" सँs पुरस्कृत कएल गेलनि l
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केदार सम्मान" प्रगतिशील हिंदी कविता के शीर्षस्थ कवि केदारनाथ अग्रवाल जीक स्मृति में केदार शोध पीठ के द्वारा देल जाइत अछि l ई सम्मान प्रति वर्ष भेटय बला एक प्रमुख साहित्यिक सम्मान अछि l ई साहित्य सम्मान सृजनक उत्कृष्टता केँ रेखांकित करवा हेतु केदारनाथ अग्रवाल जी क परम्परा में लोकतांत्रिक, प्रगतिशील, आधुनिक, विवेकसम्मत, वैज्ञानिक चिंतन के पक्षधर, सृजनकार के प्रदान कएल जाइत अछि l
केदारबाबू अपन उपन्यासक द्वारा सदिखन स्मृति में रहताह l हिनक उपन्यासक सृजन नव पीढ़ी के दृष्टिगत राखि कएल गेल अछि l केदारबाबू अपन उपन्यासक द्वारा मैथिली साहित्य के नव दिशा देलनि l यैह कारण अछि जे "प्रबोध सम्मान" सँs सम्मानित हिनक कृतिक पुन: प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट सँs s रहल अछि l ई मैथिली साहित्य एवं सम्पूर्ण मिथिलाञ्चलक हेतु गौरवक विषय अछि l

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