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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक  

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-२०२१.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन।

 

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नन्द विलास राय

करौना

रामू कक्काकजमाए विनीतजी दिल्लीक एकटा प्राइवेट कम्पनीमे नौकरी करै छथिन। नीक पाइयक आमदनी छैन। विनीतजी तेज-तर्रार लोक। पाँच-सात बर्खसँ दिल्लीमे रहै छैथ। दू बर्ख पहिने रामू कक्काक बेटी रीतासँ बिआह भेलैन। बिआहक बाद छह मास धरि रीता सासु-ससुरक संग सासुरेमे रहली मुदा छह मासक बाद जखन विनीतजीक नौकरीमे तरक्की भेलैन तँ दरमाहा सेहो बढ़लैन। कम्पनी तरफसँ क्वाटर सेहो भेटलैन तँ ओ अपन पत्नी रीताकेँ दिल्ली लऽ गेला।

भगवानक कृपासँ रीताक पएर भारी भेलइ। पहिल बच्चा तँए सावधानी बरतब जरूरी, तँए जखने रीताक पएर भारी भेलै विनीत जी महिला डॉक्टरसँ रीतकोँ देखा सलाह लेलैथ। महिला डॉक्टर मासे-मासे रीताकेँ सम्पर्क करए लेल कहलखिन।

जखन पाँचम मास चढ़लै तँ रामू काका आ सीतीया काकी सेहो बेटी-जमाए ओतए दिल्ली गेलैथ। रामू काका आ सीतीया काकीकेँ लऽ कऽ एकेटा सन्तान आ ओ रीता। तँए जखने बेटीक पएर भारी हएब सीतीया काकी सुनली तखनेसँ बेटी ओतए दिल्ली जेबा लेल आफन तोड़ए लगली। मुदा जेती केना, माने दुआरिपर एकटा बाछी छैन, तेकरा छोड़ि कऽ केना जेती?पाँच दिन पहिने ओ बाछीकेँ एक गोरेकेँ पोसिंया दऽ देली आ छठम दिन रामू काका सीतीया काकी दिल्लीक लेल बस पकैड़ लेली। दिल्ली पहुँचलापर बेटी रीता आ जमाए विनीतजी बड़ खुश भेला। रामू कक्काक विचार रहैन जे बेटीक हाल-चाल बुझि एक सप्ताहक भीतर गाम वापस भऽ जाएब। मुदा से भेलैन नहि। एक्के ठीन जमाए कहलकैन-

अखन जाएब केना नीक?भगवानक कृपासँ हमरा कोनो चिजीक अभाव नै अछि डेरो फइल-ऐल अछिए। सुतै-बैसैमे कोनो दिक्कत नहियेँ अछि। क्वाटरमे तीनटा बेड रूम, एकटा किचेन, एकटा ड्रांइगरूप आ लेटरीन-बाथरूम सभरूममेएटाएच अछिए।

माने जाबे धरि रीताकेँ सुहिरदे पूर्वक बच्चा नै जनैम जाइ छै ताबे धरि दुनू गोरे यानी रामू काका आ सीतीया काकीकेँ दिल्लीएमे रहए पड़तैन।की करितैथरामू काका आ सीतीया काकी बेटी-जमाइक बात मानए पड़लैन। गामोपर कोनो काज नहियेँ छेलैन। खेतीयो-पथारी नहियेँ जकाँ छैन। बालो-बच्चाक नाओंपर एक्केटा सन्तान रीतेटा। रामू काका कहलखिन-

पाहुन, हम सभ अहाँक बात मानि एतए रहब मुदा हमरा डेरामे बैसल नीक नहि लागत तँए कोनो छोट-छीन नौकरी लगा दिअ।

जमाए बाबू कहलकैन-

ठीक छै, जँ अपनेक सएह मन अछि तँ तेकरो जोगार भऽ जेतै, ओना हम कहब जे अपने डेरेपर रहू। कवि छीहे, डेरेपर बैस कऽ कविताक रचना करैत रहू। दिल्लीयोमे कवि गोष्ठी होइत रहै छै ओइमे भाग लिअ।

तैप्र रामू काका कहलखिन-

डेरामे बैसल-बैसल मन उबिया जाइत अछि। तँए कोनो नोकरी करब तँ मनो लगल रहत आ दूटा पाइ सेहो हएत।

विनीतजी एकटा कम्पनीमे रामू काकाकेँ दरवानक काज धरा देलकैन। सीतीया काकी बेटीक भानस-भात आ कपड़ा-लत्ता धोइमे मदैत करए लगलखिन।

जखन रीताक पएर भारी भेना सात मास भऽ गेलै तखन करोना बेमारीक कारण पूरा देशमे लॉक-डॉन लागू भेल। सभ कल-कारखाना, दोकान-दौरी, कारवार सभ बन्न भऽ गेल। खाली दवाइ देाकान, फल, किराना आ सब्जीक देाकान सभ खुजैत रहए। तहूमे दबाइ दोकानक अलावे किरानी, फल आ सब्जीक दोकान समयसँ खुलए आ समयसँ बन्न भऽ जाए।

रामू कक्काक नौकरी सेहो छुटि गेलैन किए तँ कम्पनीए बन्न भऽ गेलइ।

विनीतजी मासे-मास रीताकेँ महिला डॉक्टरसँ देखबिते छला। दिल्लीमे करोना वायरसक प्रकोप बेसी बढ़ि गेल। डॉक्टरो सभ करोना,ख वायरससँ संक्रमित होमए लगला। केतेक डॉक्टर तँ अपन प्राइवेट क्लिनिक बन्न कऽ देलैन। हँ, करोना वायरसक संक्रमण बढ़लासँ खानगी नरसिंग होमक मालिक चानी काटैए। पाँच लाखसँ लऽ कऽ दस लाख टका लऽ कऽ करोना वायरससँ संक्रमित बेकतीकेँ इलाज करैए। बुझू जे करोना वायरसक नाओंपर लूटम-लूट होइए।

रीताक नवम् मास चलि रहल छेलइ। विनीतजी रीताकेँ लऽ कऽ डॉक्टर (जइ डॉक्टरसँ देखबैत छला) ओतए पहुँचला। संगमे रामू काका आ सीतीया काकी सेहो छेली। डॉक्टर कहलकैन-

रीताकेँ करोनाक जाँच करबए पड़त।

विनीतजी पुछलखिन-

जाँच केतए हएत?”

तैपर डॉक्टर प्राइवेट जाँचघरक पता आ स्लिप देलखिन। विनीतजी रीताकेँ लऽ कऽ डॉक्टर साहैबक बतौल जाँचघर गेला। ओतए रीताक कण्ठ लगसँ पाइपसँ सेम्पल लेल गेल। जाँच घरक डॉटर विनीतजीकेँ फोन नम्बर सेहो लेलखिन। विनीतजी पुछलखिन जाँच रिपोर्ट कखन भेटत।

तैप्र जाँच घरक डॉक्टर कहलकैन-

रिपोर्ट तैयार भऽ जाएत तँ फोनसँ अहाँकेँ खबैर कऽ देब।

विनीतजी सेम्पल दऽ सभतूर डेरा आबि गेला। डेरामे मोबाइल चार्जमे लगा कऽ बजार दिस गेला।रामू काका एकटा कविता लिख रहल छला तखने विनीतजीक मोबाइलमे घन्टी बजल। रामू काका चार्जमे सँ मोबाइल निकालि कऽ हरियरका बटन टिपैत बजला-

हेलो, के बजै छिऐ?”

ओम्हरसँ अवाज आएल-

हम खन्ना जाँच घर का डॉक्टर बोल रहे हैं। आपकी पत्नी का जाँच रिपोर्ट पोजेटीव आया है।

तैपर रामू काका कहलखिन-

रीताहमारी बेटी है।

तैपर मोबाइलमे सँ अवाज आएल-

देखिए, आपकी बेटी को अविलम्ब मलहोत्रा नरसिंह होममे भर्ती करना पड़ेगा। लगभग पाँच लाख रूपये का प्रबन्ध कीजिए। देखिये आपकी बेटी को बच्चा होनेवाला है। मामला सीरियस है। जल्दी कीजिये। अगर और बेहतर इलाज चाहते हैं तो सात-आठ लाख रूपैआ का बेवस्था कीजिये, दिल्ली का ए-वन नरसिंग होममे भर्ती करबा देंगे। गारंटी के साथ इलाज होगा।

रामू काका कहलखिन-

अच्छा गारजियन आते हैं तो कहते हैं।

रामू कक्काक आँखिसँ दहो-बहो नोर जाए लगलैन। कनेक कालक बाद सीतीया काकी चाह नेने रामू काका लग एली तँ पतिकेँ कनैत देख पुछलखिन-

मर्र!ई की भऽ गेल।कनइ किए छिऐ?”

मुदा रामू काका किछु ने बजला। ओ सोचए लगला जे जखन रीताक माएकेँ कहबैन तँ ओ आर दुखी हेती आ जोर-जोरसँ कानए लगती। रीताकेँ मालूम हएत तँ ऊहो दुखी हेती। तँए रामू काका सीतीया काकीकेँ किछु ने बतौलखिन। तखने विनीतजी बजारसँ सब्जी आ किरानी समान लऽ कऽ डेरा पहुँचला। ससुरकेँ आँखिमे नोर देख पुछलखिन-

की बात छिऐबाबूजी, अपनेक आँखिमे नोर देखै छी..!”

रामू काका विनीतजी केँ मोबाइलपर भेल सभ बात बता देलकैन। विनीतजी सोचए लगला रीतामे तँ करोना बेमारीक कोनो लक्षण नै छल। फेर रिपोर्ट पॉजिटीव केना आएल?

विनीतजी सोचमे पड़ि गेला। तखने मोबाइलक घन्टी बाजल। विनीतजी फोन रिसिव करैत बजला-

आप रीता का पति बोल रहे हैं?”

विनीतजी कहलखिन-

हँ, हम रीता का हसबेन्ड बोल रहे हैं। आप..?”

बिच्चेमे अबाज आएल-

हम खन्ना जाँच घरसँ बोल रहे हैं। आपकी पत्नी का रिपोर्ट पॉजेटीव है। कम-सँ-कम पाँच लाख का प्रबन्ध कीजिए। मलहोत्रा नरसिंग होममे भर्ती करा देते हैं। अगर उससे भी बेहतर इलाज चाहते हैं तो सात-आठ लाख का बेवस्था कीजिए। समझे, देखिये मामला सीरियस है जल्दी कीजिये।

विनीतजी कहलखिन-

ठीक है। हम रिपोर्ट लेने आ रहे हैं वहीं बात होगी।

ई कहि विनीतजी फोन काटि देलखिन।

विनीतजी अपने दिल्लीक फेरल लेाक। एम.ए. पास केला बाद दिल्लीए आबि गेल छला। किछु दिन सरकारी नौकरीक लेल प्रयास केलैथ मुदा सरकारी नौकरी नइ भेटलैन तँ प्राइवेट कम्पनीमे काज करए लगला। प्राइवेट नरसिंग होम सभमे केना मुल्लाकेँ फँसौल जाइ छै आ नीक इलाजक नाओंपर केना लूटल जाइ छै, सभ बात विनीतजीकेँ बुझल। तँए ओ जाँच रिपोर्ट पॉजिटीव सुनला पछाइतो घबड़ेला नहि। टेम्पू केलैथ आ रिपोर्ट आनए विदा भऽ गेला।

रामू काका कहलखिन-

हमहूँ संग चलै छी।

तैपर विनीतजी कहलखिन-

नइ, अपने नइ जाउ। हम रिपोर्ट नेने अबै छी। ताबे अपने सभ तैयार रहब आ रीताकेँ सेहो तैयार राखब। हम ओम्हरेसँ गाड़ी नेने आएब। रीताकेँ जय प्रकाश नारायण अस्पतालमे भर्ती कराएब।

ई कहैत विनीतजीचलि गेला।

खन्ना जाँच घरक डॉक्टर विनीतजीकेँ बड़ उन्टा-सीधा समझौलकैन। डॉक्टर कहलकैन-

देखिये आपकी पत्नी को दस-पनरह दिन के भीतर बच्चा होनेवाला है। इसलिऐ किसी अच्छा नरसिंग होममे भर्ती कराना जरूरी है ताकि करोना का अच्छा इलाज हो सके। अभी मलहोत्रा नरसिंग होम में अच्छा इलाज हो रहा है। बेवथा भी ठीक है। पाँच लाख रूपये लगेंगे।

तैपर विनीतजी कहलखिन-

मैं साधाराण आदमी हूँ। मेरी हैसियत किसी प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने का नहीं है। मैं किसी सरकारी अस्पताल में इलाज कराऊँगा।

डॉक्टर कहलकैन-

आप कम से कम कितना खर्च कर सकते हैं। मैं कुछ छूट भी करबा दूँगा।

विनीतजी कहलखिन-

मेरे लिए अभी करौना वायरस के चलते लॉक-डॉनमे परिवार चलाना भी मुश्किल है। लाइये रिपोर्ट दे दीजिए।

डॉक्टर रिपोर्ट दैत कहलकैन-

मेरा काम अपको अच्छा रास्ता दिखलाना था। आगे आप जाने और आपका काम।

तैपर विनीतजी कहलकैन-

सलाह के लिए धन्यवाद।

रिपोर्ट लऽ विनीतजी विदा भऽ गेला। डॉक्टर विनीतजीकेँ जाइत देखैत रहि गेला। ओ सोचए लगला, मुल्ला फँसा नहीं।

विनीतजी एकटा बोलेरो गाड़ीबलाकेँ फोन कऽ बजौलैथ आ डेरापर एला। डेरापर सभ गोरे तैयार रहबे करैथ। गाछ़ीमे रीताकेँ बैसा रामू काका अ सीतीय काकीक संगे विनीतजी जय प्रकाश नारायण अस्पताल पहुँचला। ओतए रीताकेँ भर्ती कऽ देलखिन। अस्पतालक डॉक्टर विनीतजीकेँ कहलकैन-

करोना से घवड़ाने की आवश्यकता नहीं है। वैसे आपकी पत्नी को दस-पन्द्रह दिनों के भीतर डिलेभरी होनेबला है। खून चढ़ाना पड़ेगा।

विनीतजी डॉक्टरकेँ कहलकैन-

सर मेरा खून ले लीजिये। मेरे खून का ग्रूप और मेरी पत्नी का खून का ग्रूप सेम है।

तैपर डॉक्टर कहलकैन-

आप तो अपने दुबले-पतले है। आपके शरीर से खून नहीं निकाला जा सकता है।

रामू काका कहलखिन-

सर हमर खून लऽ लिअ।रीताक हम पिता छिऐ।

डॉक्टर शायद मैथिले छला। ओ बजला-

नहि, अपनेक उमेर बेसी भऽ गेल अछि। तँए अपनेक खून काज नइ करत। कोनो जवान बेकतीक खून चाही। दू तीन दिनक भीतर खूनक प्रबन्ध करू।

रीताकेँ भर्ती कऽ सभ गोरे डेरा आबि गेला। विनीतजी अपना मित्र-मण्डली आ सगा-सम्बन्धी जे दिल्लीमे छला सभकेँ खून देबा लेल आग्रह केलखिन, मुदा कियो तैयार नइ भेलैन। विपीतजी खूनक लेल चिन्तित भऽ गेला। ओ रामू काकाकेँ कहलखिन-

बाबूजी खूनक बेवस्था तँ भइये ने रहल अछि। केना हएत। अपनेकेँ कियो चिन्ह-पहचीनक लोक दिल्लीमे छैथ तँ प्रयास करियौ।

तैपर रामू काका कहलखिन-

अछि तँ केतेको सर-कुटुम, मुदा रक्तदान करता कि नहिसे नइ जानि।

विनीतजी कहलखिन-

प्रयास कएल जाउ ने।

रामू काका अपन सर-कुटुम, गौंआँ-घरूआ आ अड़ोसी-पड़ोसीकेँ फोनोसँ आ भेँटो करि कऽ कहलखिन। मुदा कियो तैयार भेलैन।

 

दिल्लीमे एकटा संगठन अछि, नाओं छिऐ- सुच्चा मैथिल। मुख्य रूपसँ ओ संगठभ्न मैथिली भाषाक साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी लोकनिक संगठन छी। रामू काकाकेँ कवि सम्मेलनमे ओइ संगठनक अध्यक्ष अस सचिवसँ परिचय भेलैन। रामू कक्काक कविता सुनि संगठनक अध्यक्ष, सचिव प्रभावित भेल छला। रामूओ काकाकेँ ओइ सुच्चा मैथिल संगठनक सदस्य बनौल गेलैन। बरबरि संगठनक अध्यक्ष, सचिवसँ रामू काकाकेँ सम्पर्क मोबाइल द्वारा होइ छेलैन।

रीताकेँ अस्पतालमे भर्ती केलाक पाँचम दिनक गप छिऐ। रामू काका आ विनीतजी रीताक लेल खूनक बेवस्थापर गप करै छला कि रामू कक्काक मोबाइलक घन्टी बाजल। रामू काका मोबाइलक रिसिभ करैत बजला-

हेल्लो, हम रामू बजै छी।

ओम्हरसँ अवाज आएल-

हम सुच्चा मैथिली संगठनक अध्यक्ष बजै छी। की हाल-चाल अछि कविजी?”

तैपर रामू काका बजला-

प्रणामअध्यक्षजी, हमर हाल-चाल ठीक नइ अछि। बेटीकेँ बच्चा होमए बला अछि। खूनक बेगरता अछि। अखैन धरि खूनक बेवस्था नइ भऽ सकल अछि।

अध्यक्षजी बजला-

केतेक खून चाही। जेतेक खूनक बेगरता हएत भऽ जेतै, अहाँ चिन्ता जुनि करू। रातिमे दस बजे हमरा फोन करब।

दस बजे रातिमे रामू काका अध्यक्षजीकेँ फोन केलकैन। अध्यक्षजी कहलकैन-

काल्हि ती गोरे अहाँक डेरापर जएत। अहाँ तीनू गोरेकेँ अस्पताल लऽ जाएब आ जेतेक खूनक बेगरता हएत ओ सभ देता।

सएह भेल। जेतेक खूनक अवश्यकता छल ओतेक खून एके गोरे दऽ देलकैन।

रीताकेँ खून चढ़ौल गेल। दसम दिन रीता एकटा लड़ाक जन्म देलक।

 

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