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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक स्त्री कोना

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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विद्या रश्मि

गलतीक बोध ( संस्मरण)

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बात ओहि समय के छियै जखैन हम आठवां में छलौ आ गरमी छुट्टी में हास्टल स गाम आयल रहौ।सांझ क खेला क आयले रही कि ब्राह्मण टोला स दामोदर कका ऐलखिन आ लालपीसी के कहलखिन जे लालबहिन आई राइत में आयब हमरा अंगना आई हमर बड़की बेटी लालदाई के बियाह छियै राइत में।लालदाई हमरे उमर के रहै आ छोट में जखैन गाम में पढ़ै छलौ त एके क्लास में रहौ। लालपीसी आश्चर्य स पुछलकै जे अखन दूपहरिये में त लालदाई के आम क गाछी में देखने रहियै आ अहुं के त खेत दिस जाईत देखने रहौं त कत चारि घंटा में वर भेट गेल? कहलखिन जे नै राजे कथा लगेने रहियै  लड़का बर सम्पन्न छलै  घर दुआर सेहो नीक छलै लेकिन बर के माय बहुत पाई मंगै छैलै तै छोड़िए देने छलियै ई कथा लेकिन ओहि लड़का के आई राति में हमर छोटका भाय रामबाबू पकैड़ के आनतै आ चोरौका बियाह हेतै । लालपीसी आश्चर्य भ कहलकै अखने किया करै छियै बियाह अखैन त अठमें में अछि आ चोरौका बियाह किया करै छियै। दामोदर कका ज़बाब देलखिन जे चोरौका बियाह नै करबै त पाई कत स गिनेबै दहेज के आ अखैन नीक लड़का फंसेने छै रमबबूआ ई कहि हरबरैलै चलि गेलखिन ओत स।हम आश्चर्य स लालपीसी के पुछलियै जे चोरौका बियाह की होई छै त लालपीसी दुखी भ कहलकै जे राति में चलिहें बियाह देखै लै त देखिहै।बांकि के चारि घंटा तक हमरा लै बहुत मुश्किल भ गेल बितेनाई कियकि लालदाई संगी जकां छलै हमर आ एक्का अगले तरह के बियाह। लेकिन जखैन राति में मां आ लालपीसी संगे दामोदर कका के अंगना गेलौ बियाह देखै लै त ओत के दृश्य देख क अचंभित रैह गेलौ। बियाह बला के वर जबरदस्ती एते शराब पिया देने रहथिन ई सब जे उ नीचा भूईंया में उंघरायल आ धोती खाली डांर में लपटायल रहैन्ह और नशा के हालत में भरि अंगना के लोक के  गारि पढ़ै छलैथ।आ लालदाइ बियौहतलि सारि पहिरने कोबर घर के कोना में डरे डबडबायल आंखि ठार।आ भरि अंगना के लोक जल्दी जल्दी बियाह के ओरियान करै में लागल रहै किया कि अगर बर के होश आइब जैतै त भाइग जेतै।हम ओते पैघ त रहौं नै लेकिन तैयो बहुत डर भ गेल पता नै ई केहन बियाह  होई छै।हम लालपीसी के अक्कछ कर लगलीयै जे अंगना चल हमरा नै नीक लागैया तखन कनीये काल बाद हम सब अंगना चलि एलौं।भरि रात्रि ठीक स नींद नहि भेल  जहां आंखि लागय कि सपना में बियाह बला अंगना के दृश्य देखाय लागै आ हड़बड़ा कर उठि जाई छलौ।भोरे कमनिहरि कहलक जे राति में जे बियाह भेलै ओहि में त बाद में वर के कनि होश एलै त भाग लगलै तखैन सब डरा धमका क कहुना बियाह करेलकै।भोर में दामोदर कका ऐलखिन तो बड खुश भ क कहै छथिन जे लालबहीन लालदाई के बियाह सम्पन्न भ गेल।आब हमर आधा मन हल्का भ गेल तीन चारि बरख के बाद अपन छोटकी बेटी फूलदाई के सेहो अहिना क क लेबै  बियाह।हमरा बहुत आश्चर्य लागल जे हिनका अपने बेटी के ओ तकलीफ भरल‌ चेहरा पर नजैरि नै गेलैन जे ई अखनो एते खुश छथिन। लेकिन बाद में कका बुझलखिन जे हुनका स  केहन बड़का गलती भ गेलैन जेकरा सुधारनाई  बहुत मुश्किल छै।जखैन चतुर्थी तक तो कहुंना पकरि धकरि के रहलैन बर  लेकिन ओकर  पराते चुपे चापे भागि गेलैन्ह आधा रात्रि में। बर अपन गाम स कतौ और जा के नुका गेलैन। आ लालदाई त गुम्मी लाईद लेलकै। नै किछ बाजै ने भूकै कतौ चुपचाप बैसल रहय। पढ़ाई सेहो छोड़िए देलकै। एकदम मुरझा गेलै।आब त दामोदर कका के बेटी के हालत देखल नै जानि।कतेको बेर बर के माय स भेंट करथिन्ह जे कहुना बर के खबर पता चलनि लेकिन किच्छ नै पता चलैनि। बहुतों बेर भेंट केला पर बर के माय  हुनकर हैसियत से बहुत बेसी दहेज ल क ई बियाह के मानलखिन आ अपन बेटा के सासुर जाय देलखिन्ह आ फेर  दुरागमन भेलै। ई सब खबरि जखैन गाम अबियै छुट्टी में त लोक सब दैत रहै छलै। पांच छःसाल बीत गेलै अहि बात के । फेर एक बेर गाम गेल छलौ  छुट्टीये में त एक दिन भोरे दामोदर कका हरबरायले एलैथ आ लालपीसी के कहलखिन जे उतरबायर गाम जाई छी फूलदाई के कथा ठीक करै लै।हम त  आश्चर्य स तकलियैन‌ कका  दिश किया की आब हमहु पैग भ गेल रहौ आ लालदाई के चोरौका बियाह के मतलब बुद्धि गेल रहौं। लेकिन ओहि दिन कका के चेहरा में तकलीफ देखाई दैत  छलैन कह लगला नै बुच्ची ऐ बेर फेर स उ गलती नै करबै ए बेर देख सुनि क करबै। ई लड़का बला कहलकै या जे सोनदाई के पढ़ देतै आगू। गरीब परिवार छै लेकिन की करियै  तिलक नै द सकै छियै किया की लालदाई के सासु के पाई दै लै  सबटा बेच देलियै आ बिना टाका के संभव नै छै सर्वगुणसंपन्न लड़का आ ई लड़का बला बिना तिलके(टाका) के बियाह करै लेल तैयार छै। कका त चलि गेलैथ लेकिन हम बहुत किछ सोचै पर मजबूर भ गेलौ। जेना  दामोदर कका बड़की बेटी के धनवान आ सम्पन्न  लेकिन लालची, संवेदनहीन लोक के घर में बियाह क क खुश छैथ वा छोटकी बेटी के गरीब आ बुझनुक लोक बला घर में बियाह क क।  कि सबटा गलती दामोदर कका के छैन्ह या  ई गलती करै पर मजबूर कर बला त बेटा के बाप के , जे ई नै बुझै छै जे आदमी बेचै के वस्तु नै होई छै? दामोदर कका सन लोक त मानि गेलैथ अपन गलती आ सुधारै के कोशिश केलखिन,लेकिन पाई लै बला बेटा के बाप अपन गलती कहिया मानता नहि जानि।

 

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