
(मैथिली गजल विशेषज्ञ, मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषज्ञ, ब्लॉगर, शोधकर्ता, आलोचक, संपादक। संपर्क- 8134849022)
दू टा गजल
1
नाम हुनका लग लिखा गेल हमरो
आब की हेतै बुझा गेल हमरो
दाम अपने हम लगेलहुँ अते कम
जे अपन जीवन लिया गेल हमरो
भेल छल शुरुए शुरूमे तते जे
अंतमे सप्पत खुआ गेल हमरो
रंग हुनकर देखि दुनियों कहल आ
बेरपर कहबी फुरा गेल हमरो
के रहत के नै रहत से कहत के
आइ देखू भोज खा गेल हमरो
सभ पाँतिमे 2122-2122-122 मात्राक्रम अछि।
2
छै अमीरक दिक्कत हीरा सोन दिक्कत
आ गरीबक दिक्कत माँड़े नोन दिक्कत
कोना पुरतै सिंदूर सभ इच्छा लेल
रहतै किछु इच्छा कुमारि तँ कोन दिक्कत
हमहूँ मानि लेलहुँ ओहो मानि लेलक
अइ दुनियाँमे देह दिक्कत मोन दिक्कत
किनको खातिर ई कर्जो भेलै तगमा
किनको खातिर सबूत बला लोन दिक्कत
बिना जनने बिना बुझने उल्टा प्रभाव छै
तांत्रिक सभ लग जोग दिक्कत टोन दिक्कत
सभ पाँतिमे 222-222-222-22 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक
छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि।
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