
लाल
देव कामत
बदलैत जीवन एक पोथी
श्रीमान जगदीश प्रसाद मंडल कृत सद्यप्रकाशित मैथिली कथा संग्रह 'बदलैत जीवन
' केँ आई एस बी एन ९७८- ९३- ४८४६५- ९६- ० भेटल अछि ,जे पल्लवी प्रकाशन
निर्मली सँ सन् २०२५ मे प्रकाशित भेल अछि। एहि चर्चित पोथीक दाम २९९ टाका
निर्धारित छै, आ पृष्ठ सं०१०५ छैक। श्री मंडल जीक १५३२ कथा संसार केँ ९०
गोट पोथीमे संचयन भेल छन्हि। ऐ कथा संग्रहमे १० गोट नवकथा समाहित कयल गेल
य। हिनक कथा रचना क्रम नित्य आगू बढिये रहल हेन। सृजीत कथाक रहस्य जानै सँ
पूर्व एहन अनुभवी कथाकारके संक्षिप्त परिचय जानि ली। वरेण्य साहित्यकार
श्री जगदीश प्रसाद जीक जन्म ५ जुलाई १९४७ ई०केँ प्रसिद्ध बेरमा नामक गाममे
भेलनि,जे लखनोर प्रखंडके मधुबनी जिला अन्तर्गत मिथिलांचलमे पड़ैत छै। ई
मैथिली साहित्यक एक प्रतिष्ठित आ सशक्त हस्ताक्षर छथि। दू विषय सँ एम ए. आ
ओकालत पढि तरकारी खेती सँ जुड़ि जीवकोपार्जन कयलनि अछि। श्री मंडल जीके लेल
सन् २०००ई० एकटा एहन निठाह डांरि थीकैन जे राहमे बदलाव एलनि । ताहि सँ
पूर्व कौमनिष्ट राजनीतिमे पड़ि समाज सेवा करैत रहल छलाह । समाजमे सामन्ती
प्रथाके विरूद्ध कतेको खेप अदालत केर चक्कर आ जहल जीवन काटने छथि। मुदा
साहित्य कर्मीगण सँ विमर्शक वाद मातृभाषा मैथिलीक सेवा दिश घुमि ,अपन
रचनाधर्मिता सँ अहर्निश योगदान करैत आबि रहलाह हेन। साहित्य सृजनमे हुनक
उल्लेखनीय योगदान मानल जाईछ। एखनधरि १३५ टा सँ बेसी पोथी प्रकाशित भऽ गेल
छैन। हुनक उपन्यास, कहानी संग्रह, नाटक , एकांकी , लेख तथा यात्रा वृत्तांत
, काव्य विधा हम पढि चुकल छी । अपनों पाठक हिनक सरल ओ सुगम मैथिली पढ़ब तँ
बुझाएत जे ई भाषा वैज्ञानिक आ मानकमे सुच्चा मिथिला 'क लोकक कंठ सँ बहराऐल
शैलीकेँ कागत पर हूबहू उतारि मैथिलीक पकठोस आ निशन्न शव्दक संरक्षण कयलनि
अछि।
ऐ सब काज'क लेखा-जोखा रखैवाला संस्था - समिति सब कतेको तरहक पुरस्कार हिनका
देलकनि हय। जेनाकि साहित्य अकादेमी मूल पुरस्कार, टैगोर साहित्य पुरस्कार,
अमर शहीद रामफल मंडल राष्ट्रीय पुरस्कार, यात्री चेतना पुरस्कार विशेष
रूपेँ उल्लेखनीय अछि। एहिक अतिरिक्त हुनका विदेह सम्मान ,कौशिकी साहित्य
सम्मान, वैद्यनाथ मिश्र यात्री सम्मान, कौमुदी सम्मान, बाबू साहेब चौधरी
वैदेह सम्मान, राजकमल चौधरी साहित्य सम्मान, महाकवि पंडित लाल दास गौरव
सम्मान आओर मिथिला शिखर सम्मान आदि सेहो भेटल छन्हि। आई ओ मैथिली
साहित्यकेँ नव उर्जा आ दिशा देमयबाला अग्रणी श्रेणीक एक रचनाकार छथि। अबय
बाला पिढ़िक लेल मार्गदर्शक आ प्रेरणा स्रोत बनल देखमे अबैत छथि। श्री
जगदीश बाबूक लेखनमे गाम समाजक संवेदनशीलता , मानवीय सम्बन्धक गरिमा आ
संघर्षशील जीवनक गहींरपन लौकैत अछि। हिनक दृष्टि सकारात्मक,सोभाव सहज आ सोच
नैका छैन, जाहिसँ विशिष्ट रूपेँ जगजियार भेलाह अछि।
सामाजिक कथा संग्रह " बदलैत जीवन " मेँ कुल १० गोट कथा समाहित छैक ,यथा-:
गाम सँ दुर कथा एक एहन नायक के छी ,जिनक दियादी भरिमे एकमात्र शिक्षित लोक
ओयह भेलाह । से प्रतियोगिता परीक्षामे पास भ' अररिया जिला'क एक प्रखंडक
बीडीओ. पद पर सरकारी नोकरी ज्वाइन करैछ। ऐ प्रगतिक निशानि बनिकेँ नायक
गोपीकृष्ण भगवान आ अध्यात्मके मानैत विसवासू अफसर छथि। हुनक औफिसमे
स्वजातीय चपरासी जनकलाल रहैछ , जिनका १० सालके कार्यालयक अनुभव छैन। ओतय
नियुक्ति दिन मेजबानी ्मे गेल नेपाल सँ हुनक दियाद हरिमोहन बाबा खुशी
पूर्वक आशिर्वाद देमय आयल रहैछ। दोसर कथा ' स्मृति शेष ' मे वैरियाही
निवासी स्वयं लेखककेँ दू - दू चिन्हारे आत्मीय संगीक निधनके खबेर पछाति
मानस पटल पर स्मृतिक चेन्हासी दुखित करैत छैन। विशुनपुर क' रविशंकर तेसरेँ
साल मरि गेलाह आ जनतब हुनका पुत्र सुधीर सँ आई तमुरिया टीशन पर होई छैन।
हुनका मात्रे एक कठा घरारी रहैन, हुनकर बाबू अपना संग कलकत्ता ल' जाकेँ
इंजीनियरिंग धरिक पढाय - लिखाय करौने छलनि। बेरोज़गारी दुर करय ले बंगाल
सरकार दू गोट ट्रेक्टर ऋणमे देलकनि। ओतय ट्रक ट्राम आ लरीके कमी नहिं रहैक।
तेँ गामेमे ट्रैक्टर आनि खेत जोताय आ ट्राली सँ समान उघाएके काज कयलकै।
ताहि प्रसादे चौक चौराहा लगक जमीनो कीनलकै। चारि बेटी'क वियाहो करवौलनि।
वादमे ताहि काज मादे जत्था अवश्ये बिकलैक हेन। संगीक जिगेसामे जहन रेलगाड़ी
सँ उतरि दरभंगा मुसाफिर खाना लगीच राधाकांत केर मसियौत भाय गौड़ी नाथक कानब
सुनल तँ बुझा जाए छन्हि जे ओ मरि गेलैक। राधाकांत जीकेँ ५५-६० वयक्रममे
हार्ट एटैक भेलासन्ता लहेरियासरायमे इलाज कराबे लौने रहैछ। तेसर कथा "ककरा
ले केलौं " शिर्षकमे आत्मज्ञानक बोध आखरि क्षणमे हेबाक प्रसंग छैक।
किसानपुरक मकसुदनके गामक सीमानमे दक्षिण सँ मोतीपुर छैक। लडुलाल बजैत छैक
समाजमे २० साल पहिलुका रहन - सहन आब नै रहल। जातियता आ सम्प्रदायिकताके
चलते ककरो पर ककरो भरोस नहिं होईछ। समाजमे गरीबकेँ धनीक सदिखन सताबैत रहैछ।
ऐ वार्ता म इहो गप्प उखड़लैक जे ककरो अपने केलहा फल भेटैत छै। से सुनयमे
आएल पड़ोसी गामक सोभीत पुश्तैनी रूपेँ महाजनी करैत आयल अछि, आब आँखिक आन्हर
भ' गेलैक हेन। से भेंट करय गेलैथ तँ बोली अकानि चिन्हलकैन आ पश्चाताप करैत
हबो ढकार भऽ उठैत छै। चारिम कथा 'बदलैत जीवन' कथामे ८१ वर्षीय रघुबीर बाबा
तीन बजे रतिगरे नीत जगैत छै। कहियो हुनक जीवन निराश नहिं रहलन्हि। पहिलुकबा
जीवन बदलैत, नव जीवन अबैक केर अनुभव रखने छथि। त्रेता युग'क राजा जनक जीक
जे अढ़ाय बीतक लोहाक फार हरमे लागल छलैक से एखनो जोतमे चलि रहल छै,ऐ प्रसंग
सुशील सँ वार्ता होई छैन। मानव दू तरहक विचार अंगेजने य आ मरैत कालधरि
गार्जियन बनल रहय चाहैछ,तँ दोसर लोक रहनो सुभावक होईछ जे पैरूख निघटला सँ
अपन दायित्व श्रवणपुत पर थोपि मानवीय जीवनमे निचेन रहय चाहैत य।
पोथी'क ज्ञान पोथीए मे रहि गेल कथामे जे मुख बात आयल अछि से छी - वयोवृद्ध
रघुनंदन अपन पत्नी द्रौपदी सँ कहि दुआरि पर सँ बहराईते रहैछ तँ बालसंगी
दीनानाथ अबैत देखाईत छन्हि। ओ पोती श्यामाकेँ हाक दऽ कऽ दु कप चाहक ओरियाउन
करय कहैते रहैछ ता लगीच आबि दीनानाथ मनाही करैत छैक। दूनू संगी मैट्रिक
परीक्षा प्रथम श्रेणी सँ आओर बीए.अर्थशास्त्र ऑनर्स सकेण्ड डिविजन सँ संगे
कयने छथि। आ संकल्पित रहय गाम समाजके सेवार्थ जीवन पर्यन्त रहब। मुदा
दिनाजी कनेक होशियार पढैमे अवश्ये छलैक आ चलाकी सँ आगू अफसर बनि १५ दिन सँ
रिटायर भऽ गाममे आयल छथि। हुनक ऐ किरदानी सँ रघुनंदन जी तरेतर जड़ल जाए। ओ
१० कठामे २५ गोट आमक गाछ फेर सँ रोपने छैक। से ५ टा शरही गाछ खूब फड़लैक
हेन। सयह गाछी दिश जेबाक लेल दूनू गोटय पहुँचैत छै। संगी वार्तालाप करै
छन्हि - गामे आब रहब, मुदा कियो समाजक लोक भाव नहिं दै छैक। जहनकि गाम
समाजके लोक लेल दिनानाथक संगीकेँ सबकेओ अतिशय आदर दैत छैन। कियाक तँ ओ नव
तकनीक कृषि- वानकी सँ ग्रामीणक यथेष्ट सदैत मदैत करैत आयल छथि। ओ हुनका सँ
पुछैत छथि ,अहाँ एतुका लोक लेल कोन- कोन उपकार कयलौं अछि जे अहाँक मोजर
होयत। तैपर दीनानाथ 'क कहब भेलनि हम २० गोट पोथी जे लिखलौं, से जहन समाज
पढत ; तहने ने गुण बूझत! पोथी पढि पोथी अपन नाम कमबैलै बनेलौं,ताहि सँ समाज
केँ की?
केना फरिछाएत कथामे परिवारिक अन्तर्कलह केँ विवेक पूर्वक फरिछायल गेलैक
अछि। मुद्रण त्रुटि सँ ' परिछाएत' शव्द शिर्षक के अर्थ ले पाठक केँ मतलब
ताकबामे बोझिल अवश्ये हेतनि। सोमेश्वर काका टहलानी दैत घर पर जुमैत छथि,तँ
दलानक पूरब भागक पड़ोसीक गिला खिधांश अपने परिवार 'क मादे सुनि स्तब्ध रहि
जाई छथि। आंगनमे बेटा जागेसर नव अन्वेषण अनुसारे १० कठा खेतमे संयुक्त
परिवार केर बुतात माफिक धान उपजाबय लेल पुसा विरार १० किलो आनि खसाबय चाहैत
छै। ओकर भाय - सतेसर आ तकर पत्नी मरनी ऐ बात पर खूब अनघोल उठेने रहैछ। ओकर
कहब छै भदई धानमे जली, गदैर आ औंस अशुद्ध सन ई नैका धान छी ,जे एक कठामे
डेढ़ कुन्टल उबजै य। तखन बाबूजी बुझबैत छै देखह गम्हरि चाहे समैया धान अरबा
आ पाबैन तिहार ले ५ कठा खेती सेहो करैत जाह। आ फुलिया पूतौह किछु नै बाजि
अलगे फुलल रहय से,सब कियो मिल्लत सँ समस्याक समाधान पाबि लैत अछि। 'दसमीक
डगर' कथामे रामलोचन भायके ऐबेरक दुर्गा पूजाक तेसर दिन बितलो पर घोर अचरज
बुझाए छैन। ढ़ोल सनातन सँ बजैत आबि रहल छलै। से मोची ढोलहो नहिं देलकै। आओर
सुनयमे एलै जे सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुती ले रण्डी नचाओल जेतैक। अपना
दलान पर बैसि चाह पिबैत ओ पुमुहेँ रस्ता दिश तकैत रहैछ। ता दुर्गा पूजा
कमेटीके प्रमुख बीए.पास नवजवान रघुबीर पर नजैर पड़ैत छै। हुनका ईशारा सँ
बजाबैत दूनू ज्वलन्त प्रश्न समक्ष राखि चिन्ता व्यक्त करैत छथि। प्रमुख जी
समुचित उत्तर दैत बुझेबामे सक्षम होय छैक जे आबक जमानामे ढोल बजाबय बालाक
विचारमे समयके संग परिवर्तन भेलैक हेन। अधलाह पेशा सँ सब मुक्ति चाहैत य।
रहल बात नाच- गानमे स्त्री पात्रक तँ आधुनिक समाज आब कलाकेँ प्रशंसक छथि।
पहिले जातिक पैग वा धनिक लोक अनर्गल प्रलापमे रहि गरीबके सब स्तर पर दोहण -
शोषण करय । आब से जमाना लदि चुकल य।
अपन दोख शिर्षक कथामे मानवकेँ हरदम स्वयं दोखमुक्त रहबाक संदेश देल गेलैक
हेन। हाईस्कूल सँ सेवानिवृत्ति पाबि शिक्षक सुबोध बाबू एहिबेरक दुर्गा
पूजामे आई कलश स्थापन दिन सँ दुर्गा सप्तशतीक सम्पुट पाठ करय ले राम
परीक्षण काका सँ मार्गदर्शन चाहैत य। ओना पछिला तीन बरख सँ ऐ दुवारे
नियारैत रहैक जे शिव मंदिरके पुजारी शंकर देव सर्वत्र बजै जे मास्टर केँ
संस्कृत नहिं अबैत छै,फ्रीमे दरमाहा पबैत य। से मंदिर पर आकि नीज निवास पर
नीक होयत पाठ करनाई? योग्यता क्षमता बुझाबय लेल नहि भगवतीक अराधना लेल अपने
ओहिठाम विधिवत आयोजन कय दोष मुक्त बनूँ,से सर्वोपरि।
यात्रा कथामे दुर्गा पूजा ९ दिनके पछाति दशम दिन, भक्तजनकेँ मुर्ति भसाउन
दिन सँ जीवन यापन सुदृढ़ीकरण दिसके यात्रा आरंभ करय लेल होईछ। काया मजगूत
रहने ने उपार्जन होईत रहतैक। कलश स्थापन दिन सँ तीनदिन महाकाली जीके तीनू
रूपक अराधना होईछ। तकर तीन दिनधरि महालक्ष्मी जीके तीनू रुपके आ अंतिम तीन
दिन तक महासरस्वती जीके तीनू रुपक पूजा विधि पूर्वक होईछ। समापण -विसर्जन
होमादि उपरान्त होइछ। तकर वादे मेला कमेटीक अध्यक्ष आ समिति सदस्यगण केँ यश
ओ चैन होय य। स्थानक पुजेगरी गौरीशंकर जी भोरे सँ तरदूतमे लागि गेलैक।
मंदिर लग बैसकेँ वैदिक कासी भाय आ मनोहरक बीच ऐ धार्मिक विषय पर विस्तार सँ
गप्प - सप्प होइत रहल । ऐ कथामे अधिक उत्साह अछि,जे १३१९ शव्दमे सृजीत कयल
गेल छैक। सबसँ आखरि कथा ऐ पोथिक थीक- गंगासागर जे श्री मंडल जीके १५२०म्
रचना छी। जहिना हिमालयी गंगाकें लोक महादेव क' जटा सँ निकलल बुझैत य, तहिना
बिहारके गंगाजी बहैत हुअ बंगालक खाड़ीमे जा मिलैत छै; वयह जगह पर गंगासागर
केर मेला लगैत छै। लोक तिला संक्रातिमे ओतय जाय डूब लैत पुण्यक भागी बनैछ आ
लोकक समुह सँ बनल समाजकें गंगा बुझि आदर दैत अछि। गोपी तिर्थाटन करय चाहैत
य से संगी बनाबय भजन लाल लग जाए विचार करैत छैक। ओहि गाम किसानपुरक निवासी
हाई स्कूलके रिटायर शिक्षक ओतयके अनुभव रखैत छै,से हुनका सँ जाय वार्तालाप
गोपी करैत छथि। बुझले बात सुनि आनन्दित मोन होई छन्हि। हिन्दू धर्मावलंबी
लोकक मोनक झुकाउ चौथापन उमेरमे बौआइत रहैछ आ तीर्थ यात्री बनय चाहैत छै।
परंच यात्रामे चन्द तरहक कष्ट तँउठाबय पड़ैते छैक।
- लाल देव कामत , नौआबाखर (मधुबनी)
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