प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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आशीष अनचिन्हार

(मैथिली गजल विशेषज्ञ, मैथिली वेब पत्रकारिता विशेषज्ञ, ब्लॉगर, शोधकर्ता, आलोचक, संपादक संपर्क- 8134849022)

किछु लीखि देलासँ, किछुओ लीखि देलासँ गजल नहि होइत छै

मैथिली साहित्य केर मुख्यधारामे लेखन करबाक अपन एक निश्चित फर्मा छै आ ई फर्मा लेखनक नियमसँ अलग छै। उक्त मुख्यधारामे जे पाइ बला छथि, जिनकर सारक साढ़ूक सरबेटी कलक्टर छथिन, जे प्रभावशाली लोक लग उठक-बैठक करै छथि, जे साहित्यिक नियमसँ अलग भऽ हँमे हँ मिलाबै छथि से सभ लेखक छथि। मुख्यधाराक एहने एक लेखक छथि कमलेश प्रेमेन्द्र। हिनक बहुत रास विधाक बहुत रास पोथी प्रकाशित भेल छनि जाहिमेसँ दू पोथीपर स्पष्टतः गजल विधाक संबंध छै। ई दू पोथीक नाम छै-

1. समय बदललै से ठीके की (गजल-संग्रह)

2. नहि छोड़ी अपन अधिकार (बाल गजल- संग्रह)

जँ एहि दू पोथीक बात करी तऽ हम जतेक धरि बूझि सकलहुँ अछि ई दूनू पोथीक रचना गजल विधाक नहि अछि। एहि दूनू पोथीक रचना कविता ओ गीत जे कहि सकी से अछि, गजल तऽ किन्नहुँ नहि अछि। कोनो रचनाकेँ गजल हेबाक लेल जे बहर-काफियाक जे अनिवार्यता छै से एहि पोथीक रचनामे नहिए टा अछि। बहरक बात छोड़ू, काफियो केर अकाल छै। मुदा बात तऽ वएह छै जे मुख्यधाराक साहित्य लेल साहित्य केर नियम नहि, भौतिक जगत केर नियम चलैत छै ताहिमे जँ हिनकर उपरोक्त दूनू पोथीकेँ जँ पुरस्कार भेटियो सकैए, कोनो भारी बात नहि। सरकारी अकामदीसँ लऽ कऽ प्राइभेट संस्थाक मुखिया सभ साहित्यिक तौरपर नहि भौतिके नियमपर चलैत छथि।

मैथिलीमे एकै लेखक अनेक विधामे रचना करै छथि तकर उद्येश्य एकै रहै छै जे नै एहिमे तँ ओहिमे पुरस्कार भेटि जाए। मैथिलीमे बाल साहित्य आ अनुवाद एहि पुरस्कारी विधाक लिस्टमेसँ सभसँ ऊपर अछि। कमलेशजीक जे कथित बाल गजल संग्रह आएल अछि जे वस्तुतः गीत वा कविता अछि से अही पुरस्कारक लोभसँ आएल अछि।

हम पहिनेहो कहने छी, बेर-बेर कहैत छी जे व्यक्तिगत तौरपर हमरा कोनो आजाद कि बरबाद रचनासँ दिक्कत नै अछि। एकटा पाठक तौरपर हम ओकरो सभकेँ पढ़ैत छी। हमरा दिक्कत तखन होइए जखन कि कोनो विधाक नामपर भ्रम पसारल जाइत छै। अपन कमजोरीकेँ नुकेबाक लेल विधाक नियम संगे मजाक कएल जाइत छै। उपरमे दूनू पोथी केर नाम हम गनेलहुँ से ताहिमे अपन कमजोरी नुकेबाक लेल भ्रम पसारल गेल छै्। आब पचास-सए रचना छै तँ कोने ने कोनो रचना कथ्य हिसाबें नीक हेबे करतै, किछु पाँति नीक लगबे करतै मुदा तकर नाम गजले टा किएक? कविता राखि लिअ नाम जखन नियम केर पालन करिते नै छी तखन ओ गजल कोना? नमहर-नमहर भूमिका लिखल जाइए मुदा जँ एकौ पाँति ओहिमे अपन कमजोरीक बारेमे लीखि देल जाए तँ एहन थोड़े छै जे कोनो पाठक कि कोनो आलोचक लेखककेँ फाँसी लगा देतै। मुदा जँ ई सभ अहिना भ्रम पसारैत रहता तँ कोनो ने कोनो आलोचक हिनका सभकेँ नपैत रहत, आ अहिना बेकार कहैत रहत। लेखक अपन कमजोरीकेँ सार्वजनिक करैत रचना लीखथि ई बेसी इमानदार ओ साहसी काज हेतै।

एहि लेखक केर अनेक पोथी छनि आ उम्मेद करैत छी जे आन विधाक विद्वान सभ एकर समीक्षा करताह, हम मात्र गजल विधासँ संबंध छी तँइ हम ई दू पाँति लिखबाक लेल बाध्य भेलहुँ। अंतमे एकटा आर बात एखने कमलेशजीक 18 पोथी एकै संगे लोकार्पण भेलनि आ ताहि लेल किछु लोक व्यंग्य करैत पोस्ट सभ लिखलाह हम एहि व्यंग्यक विरोध करैत छी। 18 कि 180पोथीक लोकार्पण हेबाक चाही। आ जँ ओहि पोथी सभमे कमजोरी छै तकरा अलगसँ रेखांकित करबाक चाही। वर्तमानमे हिनक जे पोथीक संख्या छनि से बढ़नि मुदा ओहि सभमेसँ ई दू पोथी गजलक नहि छनि से हम दर्ज कऽ रहल छी।

 

 

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