वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.
Read in your own script
Roman(Eng) ગુજરાતી বাংগ্লা ଓଡ଼ିଆ ਗੁਰਮੁਖੀ తెలుగు தமிழ் ಕನ್ನಡ മലയാളം हिन्दी
१.
सतीश चन्द्र
झा-चुनाव/ भाषा आ राजनीति
२.
नन्द विलास राय-अकाल
१
सतीश चन्द्र
झा
राम जानकी नगर
मधुबनी
चुनाव
छल केहन हवा आयल उदंड।
तृष्णाक आगि पसरल प्रचंड।
सभ जाति धर्म केँ फेर बाँटि
क’ देलक समाजक खंड- खंड।
सत्ता सुख,धन बल मान लेल।
निज स्वार्थ धर्म सम्मान लेल।
विष घृणा द्वेष सगरो द’ क’
सभ भोट समटि क ससरि गेल।
उन्मादक तेज हवा उठलै।
उधियाक’ ककरा की भेटलै ?
छुच्छे बातक जल बृष्टि छलै
पोखरि इनार सौसे भरलै।
बड़का कें कहि क’ मधुर बोल।
छोटका लोकक जड़ि गेल टोल।
अछि कतेक तुच्छ मानव एखनहुँ
जीवन कें नहि छै कतौ मोल।
कहियौ ओकरा की हेतै लाज।
नहि भेल गाम मे कतौ काज।
अछि बाट ताकि क’ थाकि गेल
बासठि बरखक जीवित समाज।
अछि राजनीति मे के सुयोग्य।
अस्सी प्रतिशत एखनहुँ अयोग्य।
ओ कोना हमर उद्धार करत
ओकरा लए छै ई देश भोग्य।
जड़ि गेल झड़कि क’ कतेक देह।
मरि गेल हृदस सँ प्रेम स्नेह।
देलक की हमरा प्रजातंत्रा ?
दुख विपदा अछि ओहिना सदेह।
जनमत अधिकारक मोल भाव।
घर घर छिड़ियायल बैर भाव।
सभ बेर कतेक बलिदान लेत
अछि रक्त पिपासू ई चुनाव।
भाषा आ राजनीति
अछि घातक आतंकबाद सँ
बढ़ि क‘ ई भाषा के झगड़ा।
कखन कतय ई आगि लगायत
कोना एकर पहिचानब चेहरा।
अछि रहस्यमय राजनीति के
क्रिया कलाप कर्म मन वाणी।
छापि रहल अछि पत्र पत्रिका
प्रतिदिन एकरे एक कहानी।
कखनो बाँटत जाति जाति कें
कखनो सीमा शरहद भारी।
कखनो बात धर्म के कहि क’
लगा देत सौंसे चिनगारी।
कतेक होइत दै चेहरा एकरो
जानि सकल नहि कियो एखन धरि।
सपथ लैत अछि ’सेवा धर्मक’
समटि लेत धन आँजुर भरि भरि।
स्वार्थ कते धरि खसत खाधि मे
कते आओर लज्जित क्षण आयत।
हिन्दी पर लागल कलंक जे
कोना एकर इतिहास मेटायत।
सीखि लेथु सभ भूखल जन- जन
अलग अलग सभ प्रांतक भाषा।
तखने भरतनि पेट आब नहि
रहलै हिन्दी देशक भाषा।
सत्ता पक्ष विपक्ष कान मे
कोना तूर छथि ध’ क’ सूतल।
सीखि रहल अछि आइ मराठी
टैक्सी चालक भय सँ कलबल।
जतय देश मे छै एखनो धरि
लाखो लोकक रोटी सपना।
सड़क कात छतहीन जिन्दगी
कंकर पाथर घास बिझौना।
की मतलब छै ओकरा की छै ?
भाषा,भेष कतय की बान्हल।
बिना परिश्रम सँ औतै नहि
भात दालि थारी मे सानल।
जनहित के कल्याण आब नहि
राजनीति सँ रहलै आशा।
छल प्रपंच के अस्त्र सस्त्र सँ
सत्ता सुख सबकें अभिलाषा।
भले लेथु ई शपथ मंच पर
विश्वक प्रचलित सभ भाषा मे।
नहि बदलत तकदीर देश कें
जन जन ठाढ़ रहत आशा मे।
............
२
नन्द विलास राय-
अकाल
पानि विना घास-पात
सभ जरि गेल
धानक वीया सभ पीयर,
भऽ भऽ मरि गेल।
गाछी-विरछीक सबहक
पात झरि गेल
बाजारमे जिनिस सबहक
दाम चढ़ि गेल।
छोट-पैघ किसान सभ
पिटैत अछि कपार
ओकरा उपर टूटल
दुखक पहाड़
लोक सभमे मचि गेल
बड़का हाहाकार।
खेत सभमे फाटल
नम्हर-नम्हर दरारि
धरतीकेँ रूपकेँ
देलक विगाड़ि।
ताल-तलैया सुखले
रहि गेल,
गोरहो खेत सभ
परते पड़ि गेल।
गाममे नै इज्जत ककरो
बचत आब,
झुण्डक झुण्ड लोक सभ
विदा भेल दिल्ली-पंजाव।
बर्खा नहि भेल
समए भेल विकराल
सभ बजैत अछि
रवि-राइ बुनैले
खेतमे नै अछि हाल
मालोजाल भऽ जएत
जीक जंजाल
पड़ि गेल अकाल।।
