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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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इरा मल्लिक

५ टा गजल आ तीन टा शेर

जमाना देलकै दरद बहुत किनका कहबै

करेजक भेल कत्तेक टुकड़ी किनका कहबै |

किछ बात एहेन जहि सँ हम अनजान छलौं

बड़ी भेद भरल बेदर्द लोग किनका कहबै |

उप्कार में अप्कार तकै जग के रीत पुरान छै

हवन करैत जौं हाथ जरल किनका कहबै |

मुँह आगू जैह मीठ बनै पीठ पाछू उपहासी

मुखौटा लगेने लोक छै फरेबी किनका कहबै |

जे जेतबे नम्हर चोर बात हुनके लम्बा चौड़ा

साधु बनल मुँहचोर रक्षक किनका कहबै |

सज्जन के नै ठौर कतौ दुनियाँ चोर ठकैत के

झूट्ठा बनै पवित्र एतै धर्मात्मा किनका कहबै |

सरल वार्णिक( वर्ण- १८)

 

जिनगी जहिना तहिना कटैत रहलौं

सुख दुख के जउँर ( रस्सी ) सँग बटैत रहलौं |

कान्ह पर छलै घर जिम्मेदारी क बोझ

हँसि हँसिके ओ बोझ सब उघैत ( ढोऐत )रहलौं |

दुख एलै हम कहियो निराश नहिं भेलौं

सुख के मोती हम पानि सँ छटैत रहलौं |

रैन अन्हरिया छलैक तहियो की भेलय

सवर्णिम भोर के आस लए खटैत रहलौं |

बड़ अजगुत दुनियाँ के चलन की कहू

तकै नीको में बेजाय सब सहैत रहलौं |

पिघलैत रहल रसेरस दुख के घड़ी

मेहनैतिये के मोजर छै जनैत रहलौं |

दुनु हाथक भरोस छै मेहनैति के जोर

जीवन में सुख के संगीत गबैत रहलौं |

सरल वार्णिक- ( वर्ण -१६ )

 

प्रीतके मीठे होय छै बोल सेहो हम जानि गेलौं

प्रीतके बोल बड़ा अन्मोल सेहो हम मानि गेलौं |

 

इन्द्रधनुष के सातों रंग सँ प्रीत सजल अछि

मनमा करै मोर किलोल सेहो हम जानि गेलौं|

 

प्रीतक नहिं छै भाषा कोनो एकर कोनो नै बोली

अनहद बाजै प्रीतक ढोल सेहो हम जानि गेलौं|

 

पोथी पढि बनलौं हम ज्ञानी बहुत अभिमानी

प्रीतके ढाई आखर बोल सेहो नहिं जानि पेलौं|

 

प्रीतक रीत विरह के पीड़ा दारुण दुखदायी

करेजा सालै छै अनघोल चुप्पे हम कानि लेलौं|

 

तरसि गेल दरस बिन नैना प्रीत निरमोही

मौन छै व्याकुल नैना बोल सेहो हम मानि गेलौं|

सरल वार्णिक(वर्ण-१८)

 

 

हुनक नैन झरैत नोर हम देखने छी

भरल आँखिक लाल कोर हम देखने छी |

 

नैन चुपचाप रहय बोल किछ नै फुटै

हुनकर बिजुकैत ठोर हम देखने छी |

 

उठैत करेजक दरद कहु के बुझतै

सालैत अो टीस पोरे पोर हम देखने छी |

 

नेहमहल ओ सजेने छलैथ जतन सँ

बिखरै महल खंड थोर हम देखने छी |

 

हुनका के बुझाबै इयैह जिनगी थिकैक

कानबै कनैत चहुँ ओर हम देखने छी |

(वर्ण - 16)

 

जेतबेटा चादरि हो ओतबे पैर पसारल करु,

दुनियाँ के इएह सत थिकैक नै बिसारल करू।

 

आमद होय कम्म खर्च नम्हर कोना गुजर जेतै,

नापि तौलि अपन दुनियाँ नीक सँ सम्हारल करु।

 

बूँदे बूँद सँ घट्ट भरै छै इहो ते सब जनिते छी,

गागर मेँ सागर भरि दियौ मन नै हारल करु।

 

मितव्ययी बनब अहाँ जीवन अहीँक शिष्ट हैत,

जग मेँ झुठक चकाचौँध बहुत छै तारल करु।

 

झूठक जिनगी चहटगर होय छै से जानि लिय,

ऋणियाँ बनि क अपन जिनगी नै गुजारल करु।

वर्ण-( 19)

 

३ टा शेर

अहाँके बाट हियासल कतेक दिन सौँ।

अछि राति इ पियासल कतेक दिन सौँ।

मात्रा क्रमः 1222 1221 1121 212

प्रीतक मीठे होय छै बोल सेहो हम जानि गेलौँ।

बिन बाजन बाजै इहो ढोल सेहो हम मानि गेलौँ।

मात्रा क्रमः 2222 2122 1222 2122

पढ़ि लिखि बनल छलौँ हम कतेक ग्यानी बनल अभिमानी।

प्रीतक ढाई आखरक मोल सेहो नहिँ जानि पेलौँ।

मात्रा क्रमः 2222 2122 1222 2122

 

 

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