प्रमोद झा 'गोकुल'
चैलते रहब
चलैत चलैत
हमर जाँघ
भय रहल अछि लोथ
टटा रहल घुठ्ठी
अकड़ि रहल पुठ्ठी
पयरक पञ्जा
कहि रहल
हम लेलौं थस्स
करू आब बस्स .
घुरि तकै छी पाछाँ
रस्ता निपत्ता
गहींर अति गहींर
खत्ते खत्ता
गुज गुज अन्हार
दैवक प्रहार
बम्मा दैहना
सेहो तैहना
हाय रे कप्पार !
आगाँ पहाड़
दुर्ग अति दुर्ग पथ
भय रहल बेसम्ह्रार
लड़ाइ जे ठनलौं
लड़ब जमि के
बमकि के जीतब
ठसकि जे ठानल
संघर्ष आर पारक
से जेना की ठमकि गेल ?
ठमकल मनुख
ठमकल नदीक वेग
जत्तै ठमकि गेल
तत्तै ठन ठन गोपाल
भय,भय जायत
ग्रास काल
तेँ ऐ
बेहाल हालो मे
हम रुकब नै
प्रवहमान नदीक वेग जकाँ
बढ़ैत रहब,चलैत रहब
वय के ठेंगा देखवैत रहब
लक्ष्य हमर समुद्र
नहिं रोकि सकत क्यो
बरु हो पथ कंटकाकीर्ण
कियेक ने !
तदपि हम बढ़िते रहब
चलिते रहब ! चलिते रहब ••••
- प्रमोद झा 'गोकुल', दीप, मधुवनी (विहार) फोन-9871779851
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