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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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मिन्नी मिश्र

 

के समाहरत इ गृहस्थीक भार!

 

अपन नव विवाहिता, मास्टरनी कनिया संग,नवका मकान में घुसिते विद्वान प्रोफेसर पति, गर्व सं बजलथि, " सुनु , प्रिय, एहि महल में अहांक सुख भोगक सबटा समान --कपड़ा, गहना , फ्रीज़, एसी ..

आदि -आदि, हम कीनि क भरि देने छी । आब अहां अपन इ गृहस्थी के सम्हारि क राखू ।

 

मुदा, एहि गृहस्थीक भार सं हमरा फ्री क देब ... बहुत रास रिसर्च वर्कक काज अधुरे पड़ल अछि । सभके प्रकाशन हेतु , हमरा... यथाशीघ्र प्रेस पठेबाक अछि ।"

 

नवकी कनिया, मुस्कुराइत बजलिह, " बुझलौं, हमरो वहए मोन होइए जे अहांके होइत अछि ।"

 

कोयल सन मीठी आवाज के सुनि प्रोफेसर साहब , लजाइत, सकुचाइत बजलाह," कने बता ने दिय, जे कि मोन होइत अछि?"

 

" , सुनिए लिय, इहे होइए जे भरिदिन हम अहीं जेना खाली पढिते टा रही ।" 

 

कनिया के मनसा सुनिते देरी , पति देव कपार ठोकैत बुदबुदेला, " सब कोई सुनै जाउ, प्रोफेसर फेल भऽ गेल आ मास्टरनी पास।"

 

मिन्नी मिश्र / पटन

 

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