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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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डॉ. अर्पणा

रमेश्वर चरित मिथिला रामायणमे कौशल्या

 

कौशल्या एक आदर्श राजमहिषी तथा जननीक रूपमे चित्रित भेल छथि। कौशल्या हेतु रामलक्ष्मणभरत तथा शत्रुघ्नमे कोनोटा अन्तर नहि बुझल जाइछ। राम हुनके पुत्र थिक। ओ सौतिनि लोकनिकेँ छोट बहिनिक दृष्टियेँ देखैत छथि।

हिनक सर्वप्रथम उल्लेख वाल्मीकि रामायणमे पुत्र-प्रेमक आकांक्षिणीक रूपमे भेटैत अछि। वाल्मीकिक परम्परामे रचित काव्य एवं नाटक सभमे कौशल्या सर्वत्र अग्र महिषीक रूपमे चित्रित छथिमात्र आनन्द रामायणमे दशरथ एवं कौशल्याक विवाहक वर्णन विस्तारसँ भेल अछि। गुण भद्रकृत उत्तर-पुराणमे कौशल्याक मायक नाम सुवाला तथा पुष्पदत्त पड़मचरित’ मे कौशल्याक दोसर नाम अपराजिता देल गेल अछि। राम कथामे अवतारक प्रभावक फलस्वरूप पुराणमे कश्यप आ अदितिकेँ दशरथ आ कौशल्याक रूपमे अवतारक वर्णन भेल अछि।[i]

लालदास रामक वन गमनक समयमे कौशल्याक मातृ हृदयक सफल चित्रण कयलनि अछि-

हम नहि विपिन जाय सतदेव।

अहा अपयश जग मे बरुलेव।।

नृपतिक हाथ देव वरु प्राण।

त्यागव नहि अहँ सन सन्तान।।

मुदा रामक वन गमनक उपरान्त भरतकेँ अयोध्या पहुँचलापर कौशल्याक मतृत्व ओ पत्नीत्वमे अत्यधिक संघर्षक स्थिति देखि पड़ैत अछि। रामक वन गमनक काल कौशल्याक मातृत्व उमड़ि पड़ैछ।

कौशल्या मूर्छित खसलीह।

शोकाकुल कानय लगलीह।।

व्याकुल पीटथि हृदय कपार।

कहथि कतय छथि प्राणाधार।।

एक बेरि सुतमुख देथु देखाय।

तखन प्राण तन रहिओ कि जाय।।[ii]

राम वनसँ आपस नहि अयलाह से समाचार सुनि कौशल्या शोकाकुल भऽ उठैछ।

कौशल्या सुनलनि परिणाम।

फिरि नहि अयला वन सौं राम।।

लगली पीटय हृदय कपार।

हाय वत्स की कयल विचार।

हमरा त्यागल ककर भरोस।

मरब आइ करितहि आक्रोश।।

हायबध दैलहु बड़ धन्ध।

कयल देल हमर दुहू दृग अन्ध।

अह बिनु हमर रहत नहि प्राण।

लगयिछ ऑंगन भवन भयान।।

स्त्रीधर्मक रक्षा करैत कौशल्या राजा दशरथसँ कहि उठैत छथि जे रामक वन गमनमे विधिक विधान अछि अपनेक कोन दोष नहि। कविक शब्दमे-

अछि चिन्ता सौं चित्त अचयन।

तैं कहलहु हम अनुचित वचन।।

चलयित कहलनि राम बुझाय।

किछु जनि कही पिता का माय।।

हमर सिनेहो अनुचित बात।

कहब तँ बड़ दु:ख पओता तात।।

एहि प्रकारक कहि बारम्बार।

वनगेला रघुनाथ उदार।।

से सुत ममते गेलहुँ भुलाय।

कहलहुँ पति रूषि वचन बजाय।।

कयो नहि हमर सनि अछि अधलाहि।

पतिकॉ कटु कहयित नहि आहि।।

सुन प्रणेश अहूँक नहि दोष।

कयल विधाता ई सभ रोष।

एहि प्रकारेँ देखैत छी जे लालदास कौशल्याक पत्नीत्वक मर्यादाकेँ संरक्षित कयलनि अदि मुदा हुनक विविध उत्कट वचन नारीत्वक मर्यादायक अनुकूल बुझना जाइछ।

राजा दशरथक मृत्युक पश्चात कौशल्याक कारूणिक दशा द्रवित भऽ उठैछ-

पति संग हमहु अनल समाय।

रहब सुखी भल सुरपुर जाय।।

सुनिसुनि कौशल्याक विलाप।

सभजनकेँ बाढ़ल बड़ताप।।

मनमे सभकेँ भेल सन्देह।

हिना प्राण रहत नहि देह।। अर्ते

कौशल्या कॉ दुखित ओहि देखल सकल समाज।

अन्त:पुर लय जाय पुनि बोधल कति ऋषि राज।।[iii]

नारी जीवनक पैघ उद्देश्य कुशलकरय वाली आ कुशल मानावय वाली जाधरि नारी सभक कुशल करब, कुशलक कामनाभावना नहि नहि राखत ताधरि ओ पूर्ण नहि कहा सकैत अछि। कौशल्या सातो गुण प्रधान नारी छलीह। मातृत्वक गम्भीरता, विश्वासक अडिगता, ममता तथा कुशल भावनापर कोना बाधा नहि आवय देलनि। जखन कैकई रामकेँ वन पठेवाक आदेश कौशल्या सुनलनि तँ मातृत्व आ कल्याणक भावनाक संघर्षमे हुनक अवस्थाक वर्णन गौस्वामीजी मात्र एक पांतिमे सुन्दर ढंगसँ कयलनि अछि-

सुनि प्रसंग रहि मूक जिमि वरनि नही जाई।

कौशल्याक अवस्था गीताक साम्ययोगकेँ स्मरण करबैत अछि। कौशल्याक व्यापक रूपक दर्शनक प्रसंग मानसकार लिखैत छथि-

व्यापक ब्रह्मा निरंजन निर्गुन विगत विनोद।

सो अज प्रेम भगति वस, कौशल्या को गोद।।[iv]

प्रभुक व्यापक रूपक दर्शन होइत अछि साधककेँ-

देखरावा मातहि निज अद्भुत रूप अखंड।

रोमरोम प्रतिलागे कोटि कोटि ब्रह्मांड।।[v]

एहि व्यापक रूपक दर्शन रामायणमे मात्र कौशल्याजीकेँ भेलनि।

सम्पर्क-

बालूघाट, बॉंध रोड, मुजफ्फरपुर


 


[i]रामचरित मानस (अयोध्याकाण्ड)

[ii]रमेश्वरचरित मिथिला रामायण (बालकाण्ड)

[iii]रमेश्वरचरित मिथिला रामायण (सा.अ.) पृ.- 166

[iv]रमेश्वरचरित मिथिला रामायण (अयोध्याकाण्ड)

[v]रमेश्वरचरित मिथिला रामायण (अरण्यकाण्ड) पृ.- 133

 

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