प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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राम शंकर झा"मैथिल"
नदी



ई नदी जें पियासल

रहि गेल

नहिं जानि कतेको

वरख सँ

आ कि हजारों वरख सँ

लोक वेद सअर समांग

गाछी वृक्षी
किड़ा मकोड़ा पिलुआ

चिंराई चुनमुनी

आ कि ई कहु

ककर नहिं कंठ जूरेलक

ई नदी जें....!

कोअन खेत कोअन खारिहान

नहिं पाटल

आ कि नहिं निपाएल

चाहे भीठाह आ कि धनहा

कतहु करीन लागल

कतहु दमकल

ई नदी जें....!

ककर कोख नहिं भरलक

पुरनी पोखैर

आ कि डबरी चअर चांचर

के नहिं नेहाएल

के नहिं सोनाएल

एकर धार मे

आ एकर किछेर मे

पहर दु पहर के कहेआ

भरि भरि दिअन

हरवाह चरवाह गिरहथ

सङ्ग बरद महिंस

ई नदी जें....!

सुरकिया परअर सुरकिया

डुबकी पअर डुबकी

के नहिं चुभकैत रहल

मनसा मौउगी

आ कि नैना भुटका

छिछीआइत बौआइत

आ कि घाम सँ

तअर बतर

के नहिं अपन नुआँ

आ कि धोती

खिचलक

ई नदी जें....!

कट्ठा मे मअन सपे

के कहाअ

तीन तीन मअन

रामहिं जी राम

जोखैत गाअमक

गाअम

भरळ बखारी

उमरल कोठी

एहि नदी कें सुन्नर

पैईन सँ

सगरों पाटल खेत

निपाएळ खरिहान

मुदा

ई नदी जें...

सब वरख लबालब

भरैत चअर चांचर

पोखैर मोईन डाबर

जाहि मे उमरळ

पुरैनक पाअत

गोहे गोह खिलल

कमलक फूल

कतौह लौढ़ा मरुऐन

कतौह निकालय सोन

सँन माखन

मुदा ई नदी जें...!

गाअमक गाअम

भोज जवार

सब कें आगू चतरल

पुरैनक पाअत

मुरन विआह

चाहे होय उननायन

चाहे होय पाबैन

ज्यों हरियर सोन

सँन खेत

सङ्गहिं भरल

बोझक बोझ खरियान

चौकल पुआरक टाअळ

मुदा ई नदी जें....!

दलान भरळ

महिंस बरद गाय सँ

थाअन भरळ

दुग्ध सँ उमरल

भरल बाल्टी डोळ

मटकुरि कसतारा

छाँछ तौउला

जोरअन दैत मिथिलानी

जन्मैत

कठगर सोहनगर

दही सङ्ग मठ्ठा

गिरहथ जौउन

एकहिं आरि बैसि

करैथ कलौउ बेरहठ

जलपान

मुदा ई नदी जें...!

जतह बढ़ हुलांस

गाबैत बटगबनी

समदौन

सङ्गहिं मचान सँ

मल्हार

आएल बलान तअ

भरल दलान

मुदा स्वर्ग सँ पैघ

ई मधुमास संन

दिन राति

कतह पायब कतह

पायब

ई नदी जें पियासल

रहि गेल..!!

राम शंकर झा"मैथिल"

उघरा, दरभंगा l



नदी :

......

ई नदी जें पियासल

रहि गेल

नहिं जानि कतेको

वरख सँ

आ कि हजारों वरख सँ

लोक वेद सअर समांग

गाछी वृक्षी

किड़ा मकोड़ा पिलुआ

चिंराई चुनमुनी

आ कि ई कहु

ककर नहिं कंठ जूरेलक

ई नदी जें....!

कोअन खेत कोअन खारिहान

नहिं पाटल

आ कि नहिं निपाएल

चाहे भीठाह आ कि धनहा

कतहु करीन लागल

कतहु दमकल

ई नदी जें....!

ककर कोख नहिं भरलक

पुरनी पोखैर

आ कि डबरी चअर चांचर

के नहिं नेहाएल

के नहिं सोनाएल

एकर धार मे

आ एकर किछेर मे

पहर दु पहर के कहेआ

भरि भरि दिअन

हरवाह चरवाह गिरहथ

सङ्ग बरद महिंस

ई नदी जें....!

सुरकिया परअर सुरकिया

डुबकी पअर डुबकी

के नहिं चुभकैत रहल

मनसा मौउगी

आ कि नैना भुटका

छिछीआइत बौआइत

आ कि घाम सँ

तअर बतर

के नहिं अपन नुआँ

आ कि धोती

खिचलक

ई नदी जें....!

कट्ठा मे मअन सपे

के कहाअ

तीन तीन मअन

रामहिं जी राम

जोखैत गाअमक

गाअम

भरळ बखारी

उमरल कोठी

एहि नदी कें सुन्नर

पैईन सँ

सगरों पाटल खेत

निपाएळ खरिहान

मुदा

ई नदी जें...

सब वरख लबालब

भरैत चअर चांचर

पोखैर मोईन डाबर

जाहि मे उमरळ

पुरैनक पाअत

गोहे गोह खिलल

कमलक फूल

कतौह लौढ़ा मरुऐन

कतौह निकालय सोन

सँन माखन

मुदा ई नदी जें...!

गाअमक गाअम

भोज जवार

सब कें आगू चतरल

पुरैनक पाअत

मुरन विआह

चाहे होय उननायन

चाहे होय पाबैन

ज्यों हरियर सोन

सँन खेत

सङ्गहिं भरल

बोझक बोझ खरियान

चौकल पुआरक टाअळ

मुदा ई नदी जें....!

दलान भरळ

महिंस बरद गाय सँ

थाअन भरळ

दुग्ध सँ उमरल

भरल बाल्टी डोळ

मटकुरि कसतारा

छाँछ तौउला

जोरअन दैत मिथिलानी

जन्मैत

कठगर सोहनगर

दही सङ्ग मठ्ठा

गिरहथ जौउन

एकहिं आरि बैसि

करैथ कलौउ बेरहठ

जलपान

मुदा ई नदी जें...!

जतह बढ़ हुलांस

गाबैत बटगबनी

समदौन

सङ्गहिं मचान सँ

मल्हार

आएल बलान तअ

भरल दलान

मुदा स्वर्ग सँ पैघ

ई मधुमास संन

दिन राति

कतह पायब कतह

पायब

ई नदी जें पियासल

रहि गेल..!!

-राम शंकर झा"मैथिल", उघरा, दरभंगा

 

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