
मयंक कुमार झा
एआई युग मे मैथिली
गत वर्ष सन्तान प्राप्त भेल। जखन बालकक प्रथम स्वर बहरयाल , तखन ई भावना मोनमे भेल जे ई बालक जखन बाजय लगताह तऽ अपन मातृभाषा कतय सऽ सिखताह? हम आ हमर धर्म- पत्नी तऽ बेसी समय हिन्दीये, किन्तु कखनो किछु बेसी क्रोध वा प्रेम भेला पर अंग्रेजी वा हिंग्लिशक प्रयोग करैत छी। बालकक बाबा- बाबी सभ लगमे नहि रहैत छथिन तऽ बालक मातृभाषा कोना सीखत? हमसभ ताहि पर प्रवासी मैथिल, नेनाकेँ जे निकट भविष्यमे बन्धु- बान्धवी होएतन्हि से सभ मैथिलीभाषी होएताह तकरो संभावना शून्यप्राय:। ओना मिथिला क्षेत्रमे रहनिहार नव पीढ़ीक बालक- बालिका सभ कतेक मैथिली बाजत आ सीखत तकरो संभावना सेहो क्षीण बुझना जाइत अछि। एकटा जीवन्त भाषाक रूपमे मैथिलीक अस्तित्व संकटमे अछि से तऽ प्रत्यक्ष, किन्तु एकरा केना संरक्षित कयल जा सकैत अछि ताहि प्रश्नक उत्तरमे दू टा मूलमंत्र होबय जा रहल अछि- सोशल मीडिया आ एआई( AI)।यदि भाषाकेँ जीवित आ जीवन्त रखबाक अछि तऽ एहि दुनू क्षेत्रमे आन्दोलन आनय पड़त ।

सोशल मीडिया सँ तऽ आब सभ अवगत छैक आ कतेकोक लत्ते लागल छैक फेसबुक, इन्सटा, X ( पूर्वक ट्वीटर ,) यूट्यूबक आदि। ई नव- मीडियाक तकनीक अछि जे लोकसभकेँ आनलाइन एक दोसरसँ जोड़यमे आ विचार, विषय-वस्तुक आदान- प्रदान करबाक लेल प्लेटफार्म प्रदान करैत अछि। आधुनिक जीवनक सोशल मीडिया एक टा अभिन्न अंग भऽ चुकल अछि।
किन्तु (AI) अर्थात् कृत्रिम बुद्धिमता एकटा जटिल आ एखनहुँ बड़ द्रुत गतिसँ विकसित होइत क्षेत्र अछि। किएक तऽ लोकसभ एकरा नीक जकाँ नहि बुझैत अछि ताहि लेल एआई सम्बन्धित बहुत रास भ्रान्ति आ भय सेहो छैक लोकसभमे आ वस्तुत: एकर परिनति की होएत से एहि क्षेत्रक विशेषज्ञ लोकनि सेहो सटीक रूपें कहबामे असक्षम छथि। किन्तु भाषाक संरक्षणक काजमे एआई एकटा सशक्त आ सहायक उपकरण भऽ सकैत अछि से दृढ़ धारणा अछि। एतय ई स्पष्ट कहनाइ आवश्यक जे हम कोनो तरहसँ एआई सम्बन्धित विशेषज्ञ नहि छी आ नहि एहि विषयक कोनो डिग्री- डिप्लोमा अछि। तथापि जतेक सामान्यत: बूझल- जानल होइत अछि ताहि आधार पर एकटा मार्ग चित्र आँकबाक प्रयास करब। यद्यपि एआई केर परिभाषित केनाइ आ एकर विस्तृत विवरण देनाई एहि आलेखक परिधिसँ बाहर अछि, तइयो एकटा परिभाषा देनाइ अनिवार्य। एआई ( Artificial Intelligence ) अर्थात् कृत्रिम बुद्धिमता, कम्प्यूटर विज्ञान/ साफ्टवेयर अभियांत्रिकीक एक टा शाखा अछि जे कम्प्यूटरसँ मनुक्ख तुल्य बौद्धिक कार्य करेबाक प्रयास कर'बैत अछि । एकर बहुत रास प्रयोग छैक,इंटरनेट पर तकनाई, सोशल मीडिया आ विपणन वेवसाइट पर अनुशंसा केनाइ , स्वत: चालित वाहन चलेनाई आदि । एकर अतिरिक्त एआईक प्रयोग लेंगवेज माॅडल्स (language models) द्वारा लेखनी आ रचनात्मक,साहित्यिक आ कलात्मक कार्य लेल सेहो होइत अछि। सोशल मीडिया आ एआईक संयुक्त प्रयोगसँ बहुत एहन पदक्षेप लेल जा सकैछ जाहिसँ भाषाक मात्र संरक्षणे नहि अपितु विकास आ विस्तार सेहो कयल जा सकैत अछि।
डिजिटल कन्टेन्ट ( सामग्री ) युवा ,किशोर आ नेना सभमे सर्वाधिक लोकप्रिय अछि। लघु विडियो, रील्स, शाॅट्स आदि विधा मे रोचक विषय- वस्तु बननाई मैथिलीमे आरम्भ भऽ चुकल अछि। एआईक प्रयोगसँ एकरा आओर सरल, सुलभ बनाओल जा सकैत अछि। आन भाषाभाषी लोकनि लेल सब- टाइटल्स सेहो देल जा सकैछ।आन- आन भाषामे बनल लोकप्रिय सामग्री मैथिलीमे सहजतासँ अनुवाद कऽ एकरा मैथिल श्रोता, दर्शक सभक सम्मुख प्रस्तुत कयल जा सकैत अछि। एआई द्वारा नेना सभ लेल धार्मिक, लौकिक आ स्थानीय गीत, लोरी, खिस्सा- पिहानी आ रुचिगर कन्टेन्ट एनिमेशन सहित बनाय एकर प्रचार- प्रसार सोशल मीडिया द्वारा सहजहि कयल जा सकैत अछि। Maithili.ai नामक एक टा वेबसाइट अछियो जाहि पर मिथिला चित्रकला आधारित एआई कृत पौराणिक कथाक चित्रण उपलब्ध अछि। दुर्भाग्यवश एहिमे मैथिली भाषाक सामग्री उपलब्ध नहि अछि। उपरोक्त सकल कार्यकलाप एआईक सहायतासँ अत्यन्त सहज रूपेँ कयल जा सकैत अछि।
मैथिलीक लिखित प्रयोगमे सेहो ए०आईकेँ विशेष रूपसँ सम्मिलित करेबाक चाही। मैथिली भाषाक वर्तनी, व्याकरणक शुद्धिकरण एआई माध्यमसँ कयल जा सकैत अछि। हमरा एहि आलेख लिखबाक क्रममे बेस कठिनाई भेल, कारण की देवनागरीमे टाइप करबाक लूरि नहि अछि,तेँ प्रयास कयलहुँ जे रोमन मे लिखि ट्राँसलिटरेट ( transliterate) कयल जाय।किन्तु से सुविधा हिन्दी भाषा लेल उपलब्ध अछि किन्तु मैथिलीक लेल नहि। रोमनमे टाइप कयलासँ स्वत: हिन्दी शब्दकोषक शब्द सभ तऽ प्रकट भऽ जाइछ, किन्तु मैथिली शब्द, विशेष कऽ मैथिलीक जटिल क्रियापद सभ नहि अबैत अछि। मैथिलीमे एहन एआई 'टूल 'क आविष्कार अति शीघ्र होए तकर प्रतीक्षा । ओना एहि संदर्भमे CIIL मैसूर ( सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेज़ ) द्वारा बनायल टूल अनुलेखिका उल्लेखनीय अछि। एहि पर डिक्टेशन (Dictation) दय वा ध्वनि ( ऑडियो ) फाइल अपलोड कयलासँ लिखित शब्द स्वत: आबि जाइछ। संगहि आनो टूल्सक आवश्यकता अछि जे सहजतासँ आन भाषा सभसँ मैथिलीमे अनुवाद आ तकर उलट सेहो कऽ पाबय। एआईमे एकर उपाय बड़ सरल आ सहज अछि। सर्वम (Sarvam) एआई नामक एकटा भारतीय कंपनी छैक जे ई काजमे यथेष्ट दक्षता प्राप्त कऽ चुकल अछि। सर्वम द्वारा बनाओल बुलबुल ए०आई माॅडल, लिखित शब्दकेँ मौखिक शब्दमे स्वत: परिवर्तित कऽ दैत अछि ।संगहि एकर टूल्स सभ अनुवाद, लिखितसँ मौखिक, आ मौखिकसँ लिखितमे परिवर्त्तन करबाक सुविधा सेहो उपलब्ध कराबैत अछि। मैथिली भाषाक लेल एखन धरि सभटा सुविधा उपलब्ध नहि अछि, किन्तु आशा जे भविष्यमे शीघ्रहिं उपरोक्त सभटा प्रावधान मैथिली लेल सेहो उपलब्ध भऽ जायत।
मिथिलाक्षर/तिरहुता लिपि तऽ मृत्प्राय भऽ चुकल अछि। एआई किन्तु एकर पुनरुत्थानक एक टा प्रशस्त मार्ग भऽ सकैत अछि। ' चैट जीपीटी' तिरहुता लिपिक सपोर्ट करैत अछि यद्यपि एकर प्रयोगमे कनी अशुद्धि सेहो देखल गेल। यदि बेसी संख्यामे लोकसभ एकर प्रयोग करताह तऽ शुद्धता स्वत: बढ़ि जयबाक चाही। फीडबैक आ प्रशिक्षण सऽ चैट जीपीटी वा अन्य कोनो एआई माॅडलक शुद्धता बढ़ायल जा सकैत अछि। जन साधारणमे मिथिलाक्षरक प्रचार- प्रसार सोशल मिडीया द्वारा रचनात्मक तरीकासँ सेहो कयल जा सकैत अछि। एहन सोशल मीडिया हैण्डल बनायल जाय जाहि पर व्यवस्थित आ आकर्षक रूपसँ मिथिलाक्षरक शिक्षण होए।जखन नव पीढ़ीक युवक- युवती लोकनि ए०आईक माध्यमसँ विदेशी भाषा सभ सीख सकैत छथि तऽ हमरा विश्वास अछि जे निज मातृभाषाक मौलिक लिपि सिखबामे सेहो ओ लोकनि रुचि देखेताह।
सोशल मीडिया पर एकटा नव विधा बड़ लोकप्रिय भऽ रहल अछि- पाॅडकास्ट! एहिमे कोनो वक्ता, एकसरि वा दू या अधिक लोकसभ कोनो विषय पर चर्चा करैत छथि वा वक्तव्य दैत छथि। एहि विधाक आरंभ तऽ ऑडियो रूपमे भेल रहय किन्तु आइ काल्हि विडियो रूप बेसी लोकप्रिय भऽ चुकल अछि। पाॅडकास्टक माध्यमसँ विभिन्न विषयक विशेषज्ञ लोकनिकेँ बजा कऽ मैथिली भाषामे चर्चा कयल जा सकैछ- साहित्य, धर्म, समाजशास्त्र, विज्ञान, चिकित्सा, कृषि, संगीत, कला, राजनीति आदि। एकर विषय- वस्तुकेँ रोचक बनयबाक लेल एआई कृत, ऑडियो- विजुवल ( दृश्य- श्रव्य ) ,विषय- वस्तु सेहो जोड़ल जा सकैत अछि।
मैथिलीक साहित्यिक आ सामाजिक जीवनक एकटा पैघ विशिष्टता थिक- व्यंग्य।मैथिली भाषामे कहबी आ फकड़ा केर महत्वपूर्ण स्थान छैक। इएह आजुक सोशल मीडियामे ' ,मीम' क रूपेँ प्रचलित अछि। एआईक माध्यमसँ मैथिलीक फकड़ाकेँ सदृश्य, विडियो स्वरूप दऽ लोकप्रिय बनायल जा सकैत अछि। संगहि देशज,ठेंठ भाषामे नव- नव 'मीम' रचना कऽ लोक संस्कृति आ अनौपचारिक भाषाक प्रयोगकेँ आओर बेसी रुचिगर बनाओल जा सकैत अछि। एहन ' मीम' बनयबामे मिथिला चित्रकलाक भंगिमा के सेहो आनल जा सकैछ एआई द्वारा |
मैथिली साहित्यक इतिहास समृद्ध आ विविध अछि। दुर्भाग्यवश कतेको एहन पुरान ग्रन्थ वा हस्तलिखित पाण्डुलिपि होएत जे या तऽ अप्रकाशित रहि गेल अछि या सम्प्रतिमे प्रकाशित प्रति अनुपलब्ध भऽ गेल अछि। एहि विशाल भंडारकेँ डिजिटाइज कयनाइ अनिवार्य। एआई एहि सम्पूर्ण प्रक्रियामे बड़ सहायक भऽ सकैत अछि। एआई तकनीक द्वारा स्केन कयल गेल ग्रन्थ सभकेँ शुद्धतापूर्वक "टेक्स्ट" रूपमे परिवर्तित कयल जा सकैत अछि आ एकर डिजिटल अभिलेखागार (Archive )बनाओल जा सकैत अछि। एहन अभिलेखागार सार्वजनिक होएबाक चाही आ एहिसँ मैथिली भाषा आ मिथिला संबंधी अन्य विषय पर शोधकार्य करयमे सेहो बड़ सुविधा भऽ जायत।भाषीणी ए०आई सेल्यूशन्स नामक कंपनी एहि क्षेत्रमे काज कऽ रहल अछि। मैथिली शिक्षाक क्षेत्रमे सेहो ए०आईक महत्वपूर्ण योगदान भऽ सकैत अछि- विशेष कऽ नेना- भुटका आ अप्रवासी मैथिल सब लेल एआई प्रयोग कऽ पाठ्यक्रम वा लघु कोर्स प्रकल्पित कयल जा सकैत अछि। एआई चैटबाॅट या एआई कृत शिक्षक/ शिक्षिकाक प्रयोगसँ दक्षताक विभिन्न स्तर पर मैथिली भाषाकेँ सिखायल जा सकैत अछि।
मैथिली भाषामे वैज्ञानिक विषय- वस्तु पर आलेख लिखवामे एआई सहायक भऽ सकैत अछि। एतय ई कहनाइ आवश्यक जे एआई माॅडल सभ उपलब्ध डाटा पर आधारित भऽ प्रशिक्षित होइत अछि। अर्थात् जतेक बेसी मैथिलीमे विषय- वस्तु आ सामग्रीक रचना होएत एआई माॅडल सभ ओतबहि सटीक आ दक्ष होइत जायत। विकीपीडीया, जे आजुक दिनमे ऑनलाइन उपलब्ध आलेख सभक सभसँ पैघ भंडार अछि, ताहि पर मैथिली भाषामे योगदान देनाइ सेहो आवश्यक अछि।ऑनलाइन माध्यमसँ आ एआईक सहयोगसँ देशी भाषाक संग विभिन्न प्रकारक बोली केर नमूना सभकेँ रिकार्डिंग कय एआई माॅडलक प्रशिक्षण प्रदान कराबय पड़त।जतेक बेसी सामग्री आ डाटा उपलब्ध होएत एआई माॅडल सभ ओतबहि शुद्ध, सक्षम, आ दक्ष होएत। एहि परिकल्पनाकेँ यथार्थ पर आनय लेल मैथिलीमे डिजीटल आ एआईक क्रान्ति आनय पड़त। जतेको विश्वविद्यालय सभमे मैथिलीक पठन- पाठन होइत अछि ताहि सभमे एआई शोध केन्द्रक स्थापना करय पड़त। संगहि भाषा- शास्त्रमे शोध करय वला संस्थान सभकेँ सेहो महत्वपूर्ण भूमिका रहत। सरकार दिससँ एआई सम्बन्धित नीति सभ आ नव राष्ट्रीय शिक्षा नीतिमे मातृभाषाक प्रयोगकेँ लय सामनजस्य आ समन्वय बुझना जाइत अछि। सरकार आ विश्वविद्यालयक त्रंत्रक अतिरिक्त, गैर- सरकारी संस्था, एन०जी०ओ आ सामाजिक संस्थान सभकेँ सेहो योगदान देबय पड़तैक।
प्रवासी मैथिल लोकनि कतेको साफ्टवेयर इंजिनीयर सभ सफलतापूर्वक प्रौद्योगिकी क्षेत्रमे कुशलता संग योगदान दऽ रहल छथि। एहि सभमे कतेको रास मैथिली अनुरागी होयताह जिनकर योगदानसँ एक टा अनौपचारिक अपितु प्रभावशाली व्यवस्था बनाओल जा सकैत अछि। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रमे ओहुना बहुत रास महत्वपूर्ण परियोजना सभ विकेन्द्रीकृत ( Decentralized ) आ Crowd Sourced अर्थात् - सामुहिक आ एच्छिक प्रयाससँ पूर्ण कयल जा सकैत अछि। आशा अछि मैथिली भाषी लोकनि एहि प्रणालीक प्रयोग कुशलतापूर्वक करताह। नव- पीढ़ी मैथिली भाषाक अस्तित्वक मात्र रक्षे टा नहि करत अपितु एहि भाषाक जे- जे अधिकारसँ वंचित कय कऽ राखल गेल अछि तकर सभक सुदि जोड़ि भरपाई करैत एआईक प्रयोगसँ।
-मयंक कुमार झा, पिता- सत्येंद्र कुमार झा, निवास- बोरिंग रोड, पटना, ग्राम- बक्सी टोल, हरिपुर, मधुबनी; भारतीय पुलिस सेवा, असम मे कार्यरत
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