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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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रामदेव प्रसाद मण्डल ’झारुदार’

 

झारू-

देख-देख दुनियाँ केरि रीति

असगर दुख हम करब केतेक।

शिक्षा तँ असमान छुबैत अछि

पुरी पाताल धँसि गेल विवेक।।

गीत-

माए-बाप भऽ गेल नीम करैला

कनियाँ तँ वर मीठ छइ।-2

देखू यौ बाबू आबि गेल आगू

केहेन जमाना ढीठ छइ।-2

 

इलम छै नहि काम काजकेँ

बुझै नहि किछु लोक लाजकेँ।-2

जौं बुढ़िया बेवहार बुझबै

टुटै-ले ओकर पीठ छइ।-2

देखू यौ बाबू...।

 

जबसँ गेलै दिल्‍ली दुल्‍हा

फेर नहि फुकलक घुरि ओ चुल्‍हा।-2

बुढ़ियासँ सभ हटल करबै

अपना धेने सीट छइ।-2

देखू यौ बाबू...।

 

लक्सक खुशबू तन गमकै छै

साड़ी सीतारा सोन चमकै छइ।-2

फाटल-पुराणमे बुढ़िया जीबै

कनियाँ झाड़ै जीट छइ।-2

देखू यौ बाबू...।

 

हरदम ककही हाथ रहै छै

माथसँ आँवला तेल बहै छइ।-2

अलता-टिकुली-रीबन चोटी

ठोरक लिपीस्‍टिक हीट छइ।-2

देखू यौ बाबू...।

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झारू-

बेवहारे पहिचान कराबै

बेकती और इंसान केर।-2

कियो देखाबै रूप दानवी

केकरो गुण भगवान केर।-2

प्राती-

उठू जागू बेटोही भिनुसर भेल

छुपि गेल निशाँ आब जागू ने।

बहि रहल पवन अमृत धारा

निज तनमे एकरा लगाबू ने।।

 

आलस बिसतर खटिया छोड़ू

नित्त क्रियामे तनकेँ जोड़ू।-2

दिशा दतमैनक राखू याद

स्‍नान करू तेल मलला बाद।-2

मलि तन पोछू निज गमछासँ

कपड़ा कालादेशक पाबू ने।-2

उठू जागू...।

 

मन्ने-मन्न हरिक धियान धरू

माए-बाबूकेँ प्रणाम करू।-2

आशिष लिअ सत्त सेवा केर

बोलीमे बाँटू मेबा केर।-2

निजसँ जानू पर पीड़ाकेँ

दुखियाकेँ गला लगाबू ने।-2

उठू जागू...। q

 

झारू-

साधुवाद हे देशक धरती

साधुवाद हे सभ जनता।

साधुवाद हे ताज देशक

साधुवाद हे सम्‍प्रभुता।।

गीत-

हमरा देशक धरती महान छै गइ बहिना।

तँए सोनासँ भरल भण्‍डार छै की ओहिना।।

केतौ लोहा केतौ ताम्‍बा भरल छइ।-2

केतौ चानी केतौ हीरा गड़ल छइ।-2

केतौ कोयलाक भण्‍डार छै गइ बहिना

तँए सोनासँ भरल भण्‍डार छै की ओहिना।-2

 

जेतए छै किमती आनि जानसँ।

झूकै नहि ई बस टुटै शानसँ।-2

राष्‍ट्र हित लऽ सेफ छै प्राण गइ बहिना

तँए सोनासँ भरल भण्‍डार छै की ओहिना।

 

सेवा केर जेतए परम्‍परा छइ।

सभ मानव लेने हाथ खड़ा छइ।-2

घर आएल मेहमान लगै भगवान गइ बहिना।

तँए सोनासँभरल भण्‍डार छै की ओहिना।-2

 

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