logo logo  

वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

Home ]

India Flag Nepal Flag

(c)2004-2018. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

 

जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’

४ टा गजल

               (1)

हुनका सोझाँ लिबल ने भेल

‘प्रेम करैछी’ कहल ने भेल

 

हमरा मोनक चैन चोरेलौं

मुदा अहाँकें जहल ने भेल

 

छलै अशरफी ओत्तै गाडल

हमरा जैठाँ रहल ने भेल

 

केश माथमे जते,तते दुःख

गन’ चाहलौं गनल ने भेल

 

 

ठोहि पाड़िक’कियो कनै छल

घ’र बंद क’ पडल ने भेल

 

नोरहिसं लिखने छलीह ओ

चिट्ठी हमरा पढल ने भेल

 

बिना बहरके पद्य ‘अनिल’

कविता भेलै गजल ने भेल

 

(सरल वार्णिक बहर/वर्ण-11 )

         (2)

युद्ध करू जुनि शोक करू

हे अर्जुन जुनि सोच करू

 

 

धर्मक्षेत्र   कुरुक्षेत्रमे   छी

पापक  तीब्र  विरोध  करू

 

मित्र कियो नै शत्रु कियो नै

बुझियौ  और  संतोष  करू

 

जीतू भोगू सुख धरतीक

अथवा स्वर्गक भोग करू

 

अहाँ आतमा अविनाशी छी

तन आ मोनक योग करू

 

सत्य और शांतिक जय हो

नूतन नित्य प्रयोग करू

 

जय हो जय हो पवित्रता  

आउ एखन उद्घोष  करू

 

(सरल वार्णिक बहर/वर्ण-10 )

 

                 (3)

वेद-पुराणक महिमा सभटा बूझल अछि

मुदा लोक हमरे करतबसं  रूसल अछि

 

राति आ दिन ओझराएल रहै छी हम जैमे

इहो जाल त अपनहि हाथक बूनल अछि

 

भूमि-भवन गहना-गुडिया एफ डी सभटा

सोचि रहल छी की अरजल की लूटल अछि

 

 

ह्रदय कहैए ई अन्हार हटतै एकदिन

सपता-विपताकेर कथा सभ सूनल अछि

 

जे जागल अछि ओकरा खातिर भरि दुनिया

‘अनिल’ ओकर की जे सपनेमे डूबल अछि    

 

(सरल वार्णिक बहर/वर्ण-17)

                (4)

रावणकेर संहार  केलौं  अपने मनमे

रामक हम दर्शन कयने  छी जीवनमे

 

पढबा-लिखबामे  आनंद  अबैत  रहल

मोन रमल नै कतौ और किछु अर्जनमे

 

दूर रहैत एलौं सभदिन चौका-छक्कासं                  

लागल  रहलौं  शब्दक सागर-मंथनमे

माए बाबू दादी दादा नानी नाना मामी मामा  

सभ क्यो छथि  हमरा संगे शुभ  चिंतनमे

 

कोना  बिसरबै  राति   दिसंबर  सोलहके

शाप  सुनै  छी निरभयाक  ओइ  क्रंदनमे

(सरल वार्णिक बहर/वर्ण-16)

 

ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।