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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१७. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 

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रबीन्‍द्र नारायण मिश्र

 

पहिल नौकरी

दड़िभंगामे हम पाँच सालसँ किछु बेसीए दिन रहलौं। तीन साल तँ सी.एम.कौलेजमे पढ़ैत विद्यार्थी रही। ओइ समय विज्ञान, कला, वाणिज्‍य सभ संकाय मिला कऽ एक्के कौलेज छल। सी.एम.कौलेज-दड़िभंगासँ हम बी.एस-सी. (भौतिकी प्रतिष्‍ठा) पास केलौं। बी.एस-सी केला बाद आगू की करी ई समस्‍या छल। पीक्षाफल बिलमसँ एबाक कारणे एम.एस-सी.क नामांकन सेहो बन्‍द भऽ गेल रहइ। ओहुना ओइ समैमे पढ़ाइ-लिखाइक क्षेत्रमे सम्‍पूर्ण बिहारमे अराजकता छल। परीक्षामे नकल करब तथा नकल कराएब दुनू गौरवक गप छल। विद्यार्थी सबहक अभिभावक सभ पुर्जी पहुँचबैले जान लगौने रहैथ। ऐ परिस्‍थितिमे बिहारक तेतेक बदनामी भऽ गेल छल जे सहियो विद्यार्थीक योग्‍यतापर प्रश्‍न चिन्‍ह लागि जाइत छल।

ओइ समयमे डाक-तार विभागमे दूरभाष निरीक्षकक पदक रिक्तिक विज्ञापन निकलल रहइ। हम मधुबनी पोस्‍ट ऑफिसमे आवेदन-पत्रक लेल एकटा आग्रह पोस्‍ट कार्डपर लिखि खसा देलिऐ। किछुए दिनमे आवेदन-पत्र प्राप्‍त भेल।

आवेदन-पत्र प्राप्‍त होइते भरि कऽ आइ.एस-सी.क अंक-पत्रक संग पठा देलिऐ।

आइ.एस-सी.क प्राप्‍तांकक आधारपर ओइ पदपर चयन हेबाक रहइ। हमरा आइ.एस-सी. परीक्षामे बहुत नीक प्राप्‍तांक छल। किछुए मासक बाद हमरा पटना टेलीफोन विभागसँ दूरभाष निरीक्षकक पदक हेतु नियुक्‍ति-पत्र भेटल।

नियुक्‍ति-पत्र भेटलाक बाद असमंजसक स्‍थिति बनि गेल, कारण हम बहुत महात्‍वाकांक्षी रही। पैघ पदपर जेबाक इच्‍छा रहए, तइ हेतु तैयारीक कार्यक्रम छल, मुदा हाथमे आएल लक्ष्‍मीकेँ लात मारब नीक नहि, ई बात केतेको गोटे कहैथ। अछताइत-पछताइत ओइ नियुक्‍तिकेँ स्‍वीकार करैत अगस्‍त १९६३मे राँची प्रशिक्षण हेतु चल गेलौं। 

राँची टेलीफोन एक्‍सचेंजक भूतलपर प्रशिक्षणक बेवस्‍था छल। ओइ प्रशिक्षणमे कएटा नीक-नीक विद्यार्थी सभ छला। कए गोटा एम.एस-सी. सेहो केने रहैथ। सरकारी नौकरीक बात छेलइ। सभ आँखि मूनि कऽ पकैड़ लेलक।

राँचीमे छह मासक प्रशिक्षणक बाद हमर तीन मासक बेवहारिक प्रशिक्षण-लहेरियासराय टेलीफोन एक्‍सचेंजमे भेल। ओइ क्रममे बलभद्रपुर, लहेरियासरायमे एकटा विद्यार्थीक संग डेरा रहए। एक दिन ओ विद्यार्थी गाम चलि गेला आ हमरा कोठरीक कुंजी नहि रहए। लातसँ तेतेक जोरसँ केबाड़मे धक्का मारलिऐ जे टुटि गेल। बादमे मकान मालिक नाराजगी व्‍यक्‍त केलाह, मुदा बात जेना-तेना शान्‍त भऽ गेल।

ओइ प्रशिक्षणक दौरान फगुआमे हम गाम एलौं आ २-३ दिन फाजिल रहि गेलौं। फोन विभागमे झाजी इन्‍जीनियरिंगक सुपरवाइजर रहैथ। वएह हमर हाकिम छला। हमरा डराबए लगला। की जे प्रशिक्षण अधूरा रहि गेल, ब्रेक लागि गेल। मुदा असलमे किछु नहि भेल। हमर प्रशिक्षण समयसँ पूरा भेल आ हम जमशेदपुरमे ३ मई १९७४ क पदभार ग्रहण कएल। ओहीठाम एकटा आर संगी पदभार ग्रहण केलैथ। सरकारी काज करबाक हमरा किछु अनुभव नहि छल। एसडीओ फोन्‍स बड़ा करगर अधिकारी रहैथ। अपन डाँटसँ अधीनस्‍थ सबहक सीटीपीटी गुम केने रहैत छला।

जमशेदपुर ओइ समयमे बिहारक सुव्‍यवस्‍थित एवम्‍ साफ-सुथरा शहरमे मानल जाइत छल। छुट्टीक दिन शहरमे केतौ-केतौ घुमबाक कार्यक्रम बरबैर बनबैत रही। साक्‍ची ओ विष्‍टुपुरमे तरह-तरहक दोकान सभ छेलइ। जुबली पार्कमे घुमब आनन्‍ददायी छल। ओइ पार्कमे टहलबसँ हम आनन्‍दक अनुभव करैत रही। एक दिन मौका पाबि कऽ हम टाटा स्‍टीलक अन्‍दरसँ देखबाक अवसर सेहो प्राप्‍त कएल। अति उच्‍च तापक्रमपर लोहाकेँ गला कऽ द्रव्‍य रूपेमे एकठाम-सँ-दोसरठाम जाइत देखलौं। भयानक रूपसँ लाल रहैत छल ओ तरल लोहा।

हमर रूमेट सिगरेट पीबैत छला। शुरूक एक मास तँ कहुना कऽ हुनका संग बितौल मुदा आगाँ बहुत दिन धरि हुनका संग चलब सम्‍भव नहि बुझाएल। एक दिन हम हुनका स्‍पष्‍ट कहलिऐन जे या तँ अहाँ सिगरेट छोड़ू नहि तँ अहॉंकेँ हम छोड़ि अलग डेरा लऽ लेब। ओ सिगरेट नहि, छोड़ि सकला आ हम अलग डेरा लऽ लेलौं। 

जमशेदपुरमे रहैत केन्‍द्रीय सिभिल सर्भिसेजक (संघ लोक सेवा आयोगक) परीक्षा हेतु छुट्टीक काज छल।  अधिकारीगण छुट्टी मना कऽ देला। अन्‍तमे हम बिना अनुमतियेक ओतए-सँ घसैक गेलौं आ करीब एक मासक बाद परीक्षा दऽ कऽ आपस एलौं।

एसडीओ फोन्‍सकेँ मोटर साइकिलपर अबैत देखलयैन, हुनका देखते देबाल फानि कऽ एकटा दोकानपर बैस गेलौं। मोनमे तरह-तरह केर आशंका रहए। हम बाटे तकैत रही कि हुनकर बुलाबा आबि गेल आ तरह-तरह केर उपदेश ओ देलाह।

एवम्‍-प्रकारेण लगभग आठ मास धरि ओतए नौकरी केलौं, पछाइत बाबूजीक प्रयाससँ हमर स्‍थानान्‍तरण जमशेदपुरसँ डीइटी दड़िभंगाक अधीन भऽ गेल। मुदा एसडीओ फोन्‍स कार्यमुक्‍त करैमे नाकर-नुकुर करैत छला। हम जल्‍दीसँ जल्‍दी दड़िभंगा आबि कार्यभार ग्रहण करए चाही। हमर सहकर्मीक सेहो स्‍थानान्‍तरण दड़िभंगे भेल रहैन। ओ पहिने कार्यमुक्‍त भऽ ओतए पहुँच गेल छला। हमरा लटकौने छेलैथ।

प्रात:काल भोरे-भोर हम डीइटीक डेरापर पहुँचलौं। ओहीठाम लेखाधिकारी सेहो रहैत छला। हम हुनका सभटा बात कहलयैन। ओ बहुत सहृदय बेकती छला। हमरासँ पुछलैन जे आखिर अहाँक बदली केना भेल। तँ कहलयैन जे बाबूजी पटना जा कऽ किछु प्रयास केलैन जइसँ हमर स्‍थानान्‍तरण दड़िभंगा डिवीजन भेल अछि। हमरा दड़िभंगा जाएब बहुत जरूरी अछि। आदि-आदि। सभ बात सुनि ओ आश्वासन देला जे अहाँक आइ अबस्‍स कार्यमुक्‍ति कए देल जाएत। भेबो कएल सएह।

कार्यालय खुजिते ओ एसडीओ फोन्‍सकेँ फोनपर आदेश देलखिन जइसँ ओ तिलमिला गेला। मुदा हमरा ओइ दिन ओइठामसँ कार्यमुक्‍त कए देल गेल।

साँझमे बससँ दड़िभंगा विदा भेलौं। दड़िभंगा पहुँचलापर पता लागल जे दुइएटा जगह खाली छइ। एकटा जयनगरमे आ दोसर सुपौलमे। जयनगरक खाली पदपर हमर संगी अपन जोगार लगा लेलैन। आब रहि गेल सुपौल। कोनो दोसर उपाय नहि देख हम सुपौलक रस्‍ता पकड़लौं। सहरसा वोट सुपौल ट्रेनसँ जाएब ओइ समयमे बेस टेढ़ काज छल। तथापि ओतए पहुँच कार्यभार ग्रहण कएल।

छोट-छीन टेलीफोन एक्‍सचेंज छल जइमे किछु ऑपरेटर, एकटा मेकेनिक पहिनेसँ कार्यरत छल। हम ओतए वरिष्‍ठतम बेकती छेलौं। सहरसामे उच्‍च अधिकारी बैसैत छला। फोन द्वारा तरह-तरह केर आदेश पठबैत रहै छेलखिन।

सुपौल छोट-छीन नीक शहर बुझाएल। ओइठामक माड़वाड़ी बासाक उत्तम ओ स्‍वादिष्‍ट भोजनक स्‍मरण कए अखनो जीहमे पानि आबि जाइत अछि। ओइठाम रेलबे स्‍टेशनक ठीक सामने लाल कोठीक एकटा कोठरीमे हम आ पोस्‍टमास्‍टर डेरा लेने रही। पोस्‍ट मास्‍टर बहुत कर्मठ छला। भोरे जाथि तँ देर राति थाकल-झमारल अबैथ। हुनका संगे तेकर बाद हँसी-ठठा होइत छल।

ओही डेरामे रहैत हमरा पोसुआ कुकुर काटि लेलक आ दोसरे दिन ओ कुकुर मरि गेल। आब तँ बड़ चिन्‍तामे पड़ि गेलौं। कुकुरक नमगर-नमगर चौदहटा सूई पेटक अँतरीमे लगबए पड़ल। एक दिन सुई लगबिते काल एकटा घटक आबि गेला। सूई लगबैत देख लेला से चिन्‍तामे पड़ि गेलौं। ओना, कोनो कारणसँ ओ कथा नहि पटल। किछु दिन बाद हमर ससुर अपन अनुज ओ एकटा आर बेकतीक संग विवाहक क्रममे हमरासँ गप करए टेलीफोन एक्‍सचेंज- सुपौल आएल रहैथ। हुनका सभकेँ यथासम्‍भव स्‍वागत कएल। विवाहक आहटसँ मोनमे प्रसन्नता छल। जे जे पुछला, सभ उत्तर देलिऐन।

साँझमे हमर पितिया ससुर डेरापर सेहो एला। डेराक हालत तँ वर्णन जोग नहियेँ छल। ऊपरसँ हमरा गंजी मोइल छल से बात हमर ससुरकेँ पता लगलैन। ओ चिन्‍तामे पड़ि गेला, कारण ओ स्‍वयं साफ-सुथरा रहैत छला।

सुपौलक दही आ पेरा बड़ नामी छल। अति स्‍वादिष्‍ट पेरा खेबाक स्‍मरण होइते अखनौं मुँहमे पानि आबि जाइत अछि।

किछु दिनक बाद हमर स्‍थानान्‍तरण सुपौलसँ दड़िभंगा डीइटी ऑफिसमे पीआइक पदपर भऽ गेल। ३ जून १९७४ क हम डीइटी दड़िभंगाक कार्यालयमे पदभार ग्रहण कए जखन गाम पहुँचलौं तँ दरबज्‍जापर अलगे प्रकारक गहमा-गहमी पसरल छल। हमर संगी एवम्‍ मित्र- लाल बच्‍चा (स्‍व. प्रो. विष्‍णु कान्‍त मिश्र) कहला जे हमर बिआह ठीक भऽ गेल अछि। क्रमश: सभटा जानकारी भेटल। प्रात भेने माने ४ जून १९७५ केँ हमर बिआह छल। कोनो जानकारी नहि हेबाक कारण हम ओही दिन कार्यालय जा एकाएक विवाहक हेतु छुट्टीक आवेदन देलिऐ आ तखन रातिमे आठ बजे दड़िभंगासँ गाम एलौं...।

कार्यालयमे ई समाचार बिजलौका जकाँ पसैर गेल। चारूकातसँ वधाइ दैत सहकर्मी लोकनि हमर आनन्‍दकेँ कएक गुना बढ़ा देला।

गाम पहुँचते विवाहक तैयारीमे लागि गेलौं। गाड़ी सभ लागल छल। बिरयाती तैयार छल आ बरक प्रतीक्षा छल। बरकेँ अबिते धराधर विध सभ पूरा कएल गेल।

हमर पितिया ससुर हथधरीक हेतु आएल रहैथ। ओ बिच्‍चे दरबज्‍जापर धोती-कुर्ता पहिरने हमर प्रतीक्षामे बैसल रहैथ। आर-आर लोक सभ दरबज्‍जापर मुस्‍तैद छला। हमर मित्रगण सभ सेहो मौजूद छल।

हथधरी भेल। बरियाती सभ चटपट गाड़ीमे बैसल। कुल १९ गोट बरियाती छल जे ओइ समयक हिसाबे बेसीए छल। नहि तँ पहिने पाँचटा-सातटा बरियाती पर्याप्‍त होइत छेलइ। बरियातीक संख्‍या लऽ कऽ जे अपना समाजमे रेबाज बदलल अछि से दुर्भाग्‍यपूर्ण, कारण सैकड़ोक तादादमे गाम-गामसँ बरियातीकेँ लादि कऽ कन्‍याक पिताक माथपर पटैक देब कोनो वुद्धिमानी नहि कहल जा सकैत अछि। व्‍यर्थक परेशानीक अलाबा आर्थिक क्षति सेहो होइत अछि, जेकर कोनो केकरो लाभ नहि।

..ओइ समयमे सीमित संख्‍यामे बरियाती जाइत छल तँ ओकर शोभे अलग रहै छेलइ। एक-एक बेकतीपर पर्याप्‍त धियान देल जाइत छल। बरियाती सबहक बेकतीगत परिचय होइत छल। आब तँ ढाकक ढाक बरियाती जाइ छैथ आ दुपहरिये-रातियेमे खुआ-पिआ कऽ विदा कए देल जाइत छैन।

हमरा लोकनि दस बज रातिमे पण्‍डौल डीह टोल पहुँचलौं। गीत-नादक मनोरम वातावरणमे विवाहक प्रक्रिया सम्‍पन्न भेल। ऐसँ जीवन संगिनीक रूपमे आशा मिश्र भेटली जे ओइ समयमे मात्र १७ बर्खक छेली आ हमर उमेर २२ बर्ख छल। अद्यतन हमरा जिनगीमे ओ संगे सुख-दुखक सहभागी छैथ जइसँ हम नाना प्रकारक झंझावातसँ उवैर जीवनक ऐ पड़ावपर ठाढ़ छी।

लगभग दस दिनक अवकाश समाप्‍तिपर छल। विवाहोपरान्‍त हम गाम आएल रही। माय केतेक प्रसन्न भेल रहैथ तेकर वर्णन करब असम्‍भव अछि। हमर पितिआइन सभ सेहो उत्‍सुकतावश कनियाँ ओ ओकर परिवारक विषयमे पुछैत रहली...।

प्रात भेने कार्यालय गेलौं तँ सभ कियो हमरा उत्‍सुकतासँ हाल-चाल पुछैत, फाटो सभ देखैथ। ऐ तरहेँ केतेको दिन बीति गेल।

एक दिन कार्यालयसँ झटैक कऽ दड़िभंगा बस स्‍टेण्‍डपर बस पकड़ए जाइत रही कि पाछूसँ अबाज सुनबामे आएल-

मिसरजी! सासुर जा रहल छी की?”

डेगक गतिक अनुमान कए ओ हमर सासुरक यात्राक अन्‍दाज लगा लेला जे एकदम सही छल। दड़िभंगा कार्यालय लगमे रहबाक कारण ओइठामसँ पण्‍डौल जाएब असान रहै छल। छुट्टी नहि लेबए पड़ैत छल।

डीइटी दड़िभंगा कार्यालयमे हम करीब दू साल काज केलौं। काज तँ कोनो खास नहि छल। पुरान टेलीफोनक बकाया असूली करक रहै छेलइ। जइ लेल हमरा लगभग पूरा उत्तर बिहार मुफ्त भ्रमण करबाक हेतु पास भेटल छल। ओना, ओइ पासक उपयोग कियो आन करैत छल आ हम अपन समय अपन समय प्रतियोगिता परीक्षा सबहक तैयारीमे लगबैत छेलौं।

पढ़ाइ-लिखाइ कखनो व्‍यर्थ नहि जाइत छइ। सन्‍ १९९७ क केन्‍द्रीय सचिवालय सेवा हेतु आयोजित संघ लोक सेवा आयोगक एसीसटेन्‍ट ग्रेडक परीक्षा हम पहिले प्रयासमे पास कऽ लेलौं। किछु दिनमे नियुक्‍ति-पत्र सेहो आबि गेल।

नियुक्‍ति-पत्र हाथमे अबिते मनमे उठल- कार्यालय, काज, स्‍थान सभ परिवर्तन भऽ जाएत। ई सोचि मोन आगू-पाछू करए लागल। अन्‍ततोगत्‍वा निर्णय कएल जे दिल्‍लीए जेबाक चाही। ओइठाम अपना तँ जे हएत से हएत मुदा बच्‍चा सभकेँ पढ़ै-लिखैक बेहतर अवसर भेटत। आदि-आदि।

सोच-विचारक बाद हम दड़िभंगाक दूरभाष निरीक्षकक पद छोड़ि दिल्ली स्‍थित केन्‍द्रीय सचिवालय सेवाक सहायकक पदभार ग्रहण करबाक निर्णय कएल। ई निर्णय केतेक सही रहल, केतेक नहि तेकर विचार-विमर्शक आब समय नहि रहल। जे भेल से नीके भेल। गते न सोचामि कृतं न मन्‍येत। सही कहल गेल अछि जे विवाह भावी जीवनक दिशा दसा तय करैत अछि। यद्यपि हमरा लोकनिक विवाह अभिभावक गण तय केने रहैथ, मुदा हम आब निश्चय कहि सकैत छी जे ओ सभ बहुत वुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय केने छला। जीवन भरिमे हर समय हमर श्रीमती हमर संगे नहि देलैन अपितु जीवन मार्गकेँ अपेक्षाकृत सुगम सेहो करैत रहली। हुनकर रचनात्‍मक सोच एवम्‍ शान्‍त मस्‍तिष्‍कक लाभ हमरा भरपूर भेटैत रहल अछि। आ से घरोमे आ ऑफिसोमे। केतेको जटिल समस्‍या सभपर हुनकर राय बहुत कारगर होइत रहल अछि। बहुत सन्‍तोष पूर्वक सीमित आमदनीमे इमनदारीपूर्ण जिनगी केना जीबी तेकर ओ उदाहरण छैथ।

हमर सासुर पण्‍डौल डीह टोल रेलबे लाइनसँ थोड़बे दूरपर अछि। घरे बैसल अबैत-जाइत ट्रेन देखाइत रहैत अछि। जखन हम सभ दिल्‍लीसँ पण्‍डौल आबी तँ रेलक आगमनक सूचना घरे बैसल हमर सासुरमे भेट जाइक। भवानीपुरक महादेव मन्‍दिर सामने देखाइत रहैत अछि। केतेको गोटे नियमित भवानीपुर जाइत रहै छैथ आ महादेवक जलढरी करै छैथ, घुमै-फिरै छैथ। असलमे गाम-घरमे लोकक जीबाक अन्‍दाज अखनो अध्‍यात्‍मिकतासँ जुड़ल अछि। कोनो-ने-कोनो रूपे लोक उपवास, पूजा-पाठमे लगले रहै छैथ। शिवरातिकेँ भवानीपुरमे जबरदस्‍त मेला लगैत अछि। स्‍थानीय आकाशवाणीसँ सद्य: प्रशारण सेहो होइत अछि।

पण्‍डौल डीह बहुत ऊँचमे बसल अछि। टोलक सामनेक जमीन सेहो घराड़ीमे उपयोग कएल जा सकैत अछि। एहेन अइल-फइल ओ ऊँच घराड़ी मिथिाक कम गाममे देखल जाइत अछि।

पण्‍डौलमे आदम-जमानासँ रेलबे टीशन अछि। मुदा रेलबे टीशनसँ डीहटोल एबामे बहुत समय ओ संघर्ष रहैत अछि। पण्‍डौल बजार केतेक पुरान अछि से कहब कठिन। आवश्‍यकताक सभ वस्‍तु ओतए भेट जाइत अछि। उत्तम कोटिक धोती ओइ बजारसँ आनि हम वर्षोसँ पहिरैत छी।

पण्‍डौल डीह ओ भवानीपुरक बीचक एकपेरिया रस्‍तामे डरसामा डीह अबैत अछि। कहल जाइत अछि जे पाण्‍डव गुप्‍त बासमे ऐठाम रहल रहैथ।

निश्चित रूपसँ कहल जा सकैत अछि जे मनुखक जीवनमे विवाह एकटा निर्णायक बिन्‍दु होइत अछि। आइ-काल्‍हि तँ तरह-तरह केर लोक परिचय आ की की मिलान करैत अछि, तथापि विवाह विच्‍छेदक संख्‍यामे निरन्‍तर बढ़ोत्तरी भऽ रहल अछि। हम तँ किछु नहि देखलिऐ, मात्र कन्‍याँक एकटा छोट-छीन फोटो हमरा सासुरसँ आएल छल, ओहो विवाह तय भेलाक बाद। ई नहि कहल जा सकैत अछि जे आधुनिकतासँ प्रभावित वर्तमान विवाह सम्‍बन्‍धमे सभ किछु गड़बड़ीए अछि, मुदा ई बात तँ तय अछि जे केहनो नीक-सँ-नीक विवाहकेँ सफलतापूर्वक आगू चलेबाक हेतु दुनू पक्षकेँ समझदारी आ समझौता जरूरी अछि, अन्‍यथा संकट उत्‍पन्न हएब भारी बात नहि।

हमर ससुर (स्‍व. गणेश झा) ऐ बातसँ चिन्‍तित भऽ गेल रहैथ जे हम दड़िभंगाक नौकरी छोड़ि कए दिल्‍ली जा रहल छी मुदा किछुए दिनक बाद हम परिवारकेँ संगे लऽ अनलौं। जइसँ हुनका अतिशय प्रसन्नता भेलैन।

हमर गाम अड़ेर डीह। अड़रे डीह चौदह टोलक गाम अछि। पहिने एक्के पंचायतमे सभटा टोल छल। अड़ेर पुवाहि टोल, अड़ेर डीह टोल, विष्‍णुपुर, जमुआरी होइत विचरवाना तक एक्के पंचायत छल- अड़ेर। ओकर मुखिया बहुत दिन तक स्‍व. मार्कण्‍डेय भण्‍डारी छला। आ हमर पिताजी सरपंच रहैथ। ओइ समय ग्राम पंचायतकेँ आइ-काल्‍हि जकाँ अधिकार नइ रहै तथापि मुखिया-सरपंचक नाम तँ पंचायतमे विख्‍यात भाइए जाइत छल। पंचायतक चुनाव ओहू समयमे गहमा-गहमीसँ भरल होइत छल। हम सभ स्‍कूलमे पढ़ैत रही तँ चुनाव भेल रहइ।  स्‍व. मार्कण्‍डेय भण्‍डारीजी मुखियाक चुनाव जीतल रहैथ। सप्‍पत ग्रहण समारोहक क्रममे आयोजित उत्‍सवक प्रसंग अखनो मनसँ मेटाएल नहि। ई मोन बड़ा विचित्र चीज अछि किने। कहि नहि एकर कन्‍तोरमे केतेक खल होइत छै जे तरह-तरह केर गप-सप्‍प सालो-साल चौपेतल रहैत अछि।

ओइ समयमे स्‍व. मार्कण्‍डेय भण्‍डारीजीक इलाकामे फूक चलैत छल। अड़ेरक सिनुआरा टोलमे हुनकर घर अछि। सभ तरहेँ सम्‍पन्नताक संग समाजिक मान-सम्‍मान हुनका भरपूर भेटल छेलैन। साँझकेँ जे अड़ेरक सड़कपर दल-बलक संगे हुनका टहलैत देखिऐन। ओह..!

अड़ेर डीह टोल माने हमर गामक इतिहास बहुत परान लगैत अछि। गाममे आब जनसंख्‍याक अनुपातमे आवासीय जमीन सीमित अछि। तँए घरेपर घरक दृश्‍य अछि। लोक सभ अगल-बगलमे घर बना रहल छैथ। कलममे सेहो बास भऽ गेल अछि। सभसँ चमत्‍कारी विकास तँ चौकक आसपास भेल अछि। चौकक कातेकाते करीब-करीब दू साए दोकान खुजि गेल अछि। तरह-तरह केर थौक आपूर्ति करएबला दोकान सभ सेहो खुजि गेल अछि।

असलमे अड़ेर चौकसँ चारूकात रोड बनि गेल अछि। तँए इलाकाक लोक क्रय-बिक्रयक लेल ओइठाम पहुँचै छैथ।

अड़ेरमे स्‍टेट बैंक ऑफ इण्‍डियाक शाखा अछि, ओकरे एटीएम सेहो अछि। थाना अछि, पोस्‍ट ऑफिस अछि, सरकारी डिसपेंसरी अछि। प्राइमरी स्‍कूल, मिडिल स्‍कूल तथा हाइ सकूल अछि। संगे एकटा संस्‍कृत विद्यालय सेहो अछि जेतए सुनै छी जे विद्यार्थी सभ नदारदर छैथ मुदा सार्टिफिकेट भेट जाइत छैन।

गाममे तीनटा पोखैर कहि नहि कहियासँ अछि। ओकर अतिरिक्‍त गामक बाहर नवका पोखैर, कुट्टी लगक पोखै सेहो अछि। गामक बीचमे पोखैर हेबाक कारण बासक जगहक दिक्कत छइ।

हम सभ जखन बच्‍चा रही तँ गाममे हाइ स्‍कूल नहि रहइ। गामक विद्यार्थी सभ पढ़बाक हेतु एकतारा, लोहा वा रहिका जाइत रहैथ। एकाघ-टा विद्यार्थी मधुबनी किंवा बेनीपट्टी सेहो जाइत छला।

कहल जाइत अछि जे एकबेर अंग्रेज सभ गामक बाटे जाइत काल पहलमान सभकेँ सौरो करैत जे देखलकै आ ठिठैक गेल। पुछलकै जे ई सभ डकैत छिऐ की? तँ कियो कहलकै जे नहि सरकार! ई सभ पहलमान छैथ, सुखी सम्‍पन्न छैथ आ खेती-बारी करि कऽ प्रतिष्‍ठा पूर्वक जीबैत छैथ।

अड़ेरमे कमला नदीसँ जोड़ल नाला अछि जइमे पानि तखने अबैत अछि, जखन कि कमलामे बाढ़ि आबि जाइत अछि। कृषि काजमे ऐ नालाक योगदान नगण्य अछि। स्‍थानीय किसान सभ भगवानक कृपापर निर्भर छैथ।

चिकित्‍साक मामलामे हमर गाम पिछड़ल अछि। केतौ-केतौसँ इलाज-बात होइए। पहिने दड़िभंगामे इलाजक नीक बेवस्‍था छल। पैसा खर्च केलापर लोककेँ औरुदा रहलापर जान बँचि जाइत छल, मुदा आब तँ भगवाने मालिक। बेमरी किछु, इलाज कथुक। हमर एकटा परिचितकेँ तेतेक करगर एन्‍टीवायोटिक देल गेल जे हुनकर दुनू किडनी फेल भऽ गेलैन। आब डयलिसिस करा कऽ कहुना जीबि रहला अछि। जेतेक दिन ससैर जाइथ।

हमर गामक ब्रह्मस्‍थानमे सालमे एकबेर नवाह अबस्‍स होइत अछि। ओइठाम युवक सभ भव्‍य मन्‍दिरक निर्माण केलैथ। पहिने काली पूजामे मूर्तिक स्‍थापना होइत छल जे पूजाक बाद भँसा देल जाइत छल। आब होइठाम स्‍थायी रूपसँ माँ कालीक भव्‍य मूर्ति स्‍थापित भऽ चूकल छैथ। सालमे दियावातीक रातिमे भव्‍य आयोजन होइत अछि जइमे अड़ेर चौकसँ काली मन्‍दिर धरि नाना प्रकारक बल्‍ब सभ जगमग करैत रहैत अछि। काली पूजामे नाच-गानक अतिरिक्‍त तरह-तरह केर मनोरंजनक बेवस्‍था रहैत अछि। पहने हमरा गाममे काली पूजाक रेबाज नहि छल। लगभग ४५ सालपूर्व किछु युवक सभ एकरा प्रारम्‍भ केलैन जे तखनसँ एकटा परिपाटी भऽ गेल अछि। काली मन्‍दिरमे माइकसँ लगातार घोषणा होइत रहैत अछि जे फल्‍लाँ ठामसँ नाच-गान करए-बला/करए-वाली आएल छैथ, अबस्‍स देखब...। आदि-आदि।

सुनबमे आएल जे परुकाँ आयोजनक क्रममे किछु झंझट भऽ गेल। पता नहि, आगाँ ऐ क्रार्यक्रमक की रूपरेखा रहत।

अड़ेर बहुत साविक गाम अछि। मधुबनीसँ बेनीपट्टी जेबाक क्रममे ई गाम अबैत अछि। कहियासँ ई पक्का रोड बनल अछि से पता नहि। आब ओही रोडकेँ थोड़ेक चौड़गर सेहो कऽ देल गेल अछि। सीतामढ़ीक हेतु दड़िभंगा-पटनासँ जाइबला बस सभ हमरे गाम दऽ कऽ जाइत-अबैत अछि। कुल मिला कऽ देखल जाए तँ हमर गाम छोट-छीन शहरक रूप धऽ नेने अछि।

गाममे पढ़ल-लिखल लोकक कमी नहि, देशमे सर्वत्र हमरा गामक लोक भेट जेता। दिल्‍ली ओ मुम्‍बइमे तँ भरल छैथ। एकर माने गामक जनसंख्‍यामे कमी आबि गेल सेहो बात नहि आखिर मिथिलाक भूमि थिक किने।

हमरा लोकनि सोदरपुरिये मनिक मूलकक साण्‍डिल्‍य गोत्रीय मैथिली व्राह्मण छी। ७ पुस्‍त पूर्वसँ हमरा लोकनिक पूर्वजक विवाह अड़रे डीह गाममे भेलैन आ हुनका ससुर गामेमे बसा देलखिन। पर्याप्‍त जमीन-जत्‍था देलखिन। क्रमश: ओ सभ उद्यमसँ प्रचूर धन-सम्‍पैत अर्जित कए इलाकाक प्रतिष्‍ठित धनीकमे मानल जाइत छला।

क्रमश: परिवारक विकास हेइत गेल। जनसंख्‍या बढ़ैत गेल आ ओही क्रममे परिवारिक सिरफुटौऐल सेहो बढ़ल। हम बच्‍चा रही तँ कए बेर कएक गोटाक आपसी मारि-पीटिमे कपार फुटैत देखिऐन। मोकदमावाजी तँ चलबे कएल।

हमरा सबहक परबाबा तीन भाँइ रहैथ। गुमनी मिश्र, माना मिश्र ओ तुफानी मिश्र। माना मिश्रक पुत्र स्‍व. कमर मिश्र संस्‍कृतक प्रकाण्‍ड विद्वान छला। सुनैमे अबैत अछि जे दड़िभंगा महाराज हुनका अपन राज पण्‍डित बनबाक आग्रह केलखिन जे ओ अस्‍वीकार कऽ देलाह। ओ स्‍वयं एकटा पाठशाला चलबैत रहैथ। ओइ पाठशालामे सैकड़ो विद्यार्थीकेँ नि:शुल्‍क भोजन आ आवासक संग विद्या दान देल जाइत छल। हुनकासँ पढ़ल सैकड़ो विद्यार्थी मिथिलांचलमे हुनकर गुणगान करैत छला।

ओइ समयमे अड़ेरमे नामी पहलमान भेल रहैथ स्‍व. बच्‍चा झा। हुनकर शक्‍तिसँ दड़िभंगा महाराज प्रभावित रहैथ। सुनबामे आएल जे ओ लोहाक हथकड़ीकेँ जोर लगा कए तोरि देने छला।

हमरा गाममे पूर्वकालमे मूलत: कृषि आधारित लोक छला। अधिकांश लोककेँ जमीन-जत्‍था रहइ। गाम खुशहाल छल। दुपहरियाक समयमे बरबैर अल्‍हा-रूदलक गीतमय कविता पाठक आयोजन ढोलकक तालपर होइते रहै छल। ऐ तरहक आयोजन आम छल। मुदा आब समय-साल बदलल अछि। शिक्षा दिस लोकक रूझान बढ़ल अछि। लोक अपन छोट-छोट बच्‍चाकेँ पढ़ाइक लेल मधुबनी पठा रहल छैथ। पब्‍लिक स्‍कूलक चला-चलती बढ़ल अछि। शिक्षा ओ चिकित्‍साक समस्‍या हमरे गाम तक सीमित नहि अछि। ओ तँ पूरा बिहारक समस्‍या अछिए। तथापि लोक प्रयासरत अछि। आशा अछि, कालान्‍तरमे हमरो गाममे चिकित्‍साक बेहतर बेवस्‍था भऽ सकत जइसँ स्‍थानीय लोककेँ पटना/दिल्‍ली नहि दौड़ए पड़तैन।

गाममे आब धनीक लोकक भरमार भऽ गेल अछि। केतेको बेकतीकेँ आर्थिक विकास बहुत भेल। गाममे जबार हएब आम बात भऽ गेल अछि। गाम लऽ कऽ भोज तँ होइते रहैत अछि। लोक सभ कहैत रहै छैथ जे ओ सभ भोज खाइत-खाइत तंग भऽ गेल छैथ। केतेको गोटाकेँ ब्‍लड-सूगर बढ़ि जाइत छैन। रसगुल्‍ला-छेनाक बिना तँ कोनो भोज होइते ने अछि।

पुरना जमानामे किलोक किलो भोजन चट केनिहार लोक सबहक खिस्‍सा सुनैत रहै छेलौं मुदा आइयो-काल्‍हि एहेन एकाध बेकती हमरा गाममे मौजूद छैथ। जँ अपनेकेँ धैर्य जवाब नहि दऽ दिए तँ हुनकर भोजनक क्रममे कदमताल देख सकैत छी। हुनका द्वारा खएल गेल रसगुल्‍लाक गिनतीक हेतु जन लगबए पड़ि सकैत अछि। भोजनोपरान्‍त लदबद चलैत अपन घर आपस जाइत हुनका देख छगुन्‍तामे पड़ि जाएब। आखिर ओ केना जीब रहल छैथ? आश्चर्य..!

एतेक भोज होइत रहैत अछि, मुदा सभजाना भोजमे अखनो स्‍त्रीगणकेँ शामिल नहि कएल जाइत अछि। जँ बेवस्‍थापक नीक छैथ तँ घरे-घर खएक (पारस) पहुँचा दइ छथिन, मुदा ओहो दुपहर रातिमे जखन कि कियो स्‍त्रीगण भोजनक वस्‍तु प्रतीक्षा मजबुरियेमे कए सकैत अछि।  

हम गाहे-वगाहे ऐ बेवस्‍थामे सुधारक चर्च करै छी, मुदा ग्रामीण बेवस्‍थामे सुधारक गुनाजाइश सहज नहि होइत अछि। देखै छी, आगाँ की होइत अछि।

हमरा गाममे हाइ स्‍कूलक स्‍थापना हेतु इलाकाक गणमान्‍य लोक सभ प्रयास केलाह। ओइमे हमर बाबूजी सेहो अत्‍यन्‍त सक्रिय रहैथ। स्‍व. बच्‍चा झाक परिवारक लोक बहुत रास योगदान देलैथ। स्‍थानीय लोक सभ सेहो योगदान केलखिन जइसँ हाइ स्‍कूलक नाओं- बच्‍चा झा जनता उच्‍च विद्यालय- अड़ेर पड़ल। किछु दिन धरि ओ विद्यालय पंचायत भवनमे चलैत छल। क्रमश: विद्यालयक अपन पक्का मकान एवम्‍ आन-आन सुविधा भेल।

गेनखेलीक हेतु हमर गाम प्रसिद्ध छल। अंग्रेजी हुकुमतक लोक सभ हमरा गामक लोक सबहक गेनखलीमे अभिरुचि देख दंग रहैथ। हमर बाबूजी सेहो ऐमे माहिर रहैथ। केतेको मेडल हुनका भेटल छल। गेनखेलीसँ प्रभावित भऽ अंग्रेज अधिकारी सभ हमरा गामक कएक गोटाकेँ छोट-मोट नौकरी धरा देलखिन। अड़ेरक फुटबॉल टीमसँ बड़का-बड़का शहरक टीम सभ घबड़ाइत छला।

हम सभ जखन बच्‍चा रही तखनो विष्‍णुपुरक मैदानक गेनखेलीमे बाबूजीकेँ भाग लैत देखिऐन। कए दिन हुनका पैरमे चोट लागि जाइन। चोट सबहक देशी इलाज होइत छल।

आब समय-साल बदलल अछि। गामोमे लोकक आपसी सम्‍पर्क क्षीण भऽ गेल अछि। फगुआ सन पाबैनमे लोक अपन दरबज्‍जा ओगरने रहैत अछि। तथापि गाम तँ गामे अछि। आशा करै छी जे कालान्‍तरमे क्रमश: हमरा गाममे आर सभ सुविधा हएत जेकर कल्‍पना सुखद जीवनक हेतु कएल जाइत अछि। जइ प्रकारक चौहद्दी हमर गामक अछि तइमे एकरा विकासक शिखर तक पहुँचनाइ एक सफल स्वपन्न भऽ सकैत अछि, वशर्ते गामक युवा शक्‍ति रचनात्‍मक रूख धरैत सही दिशामे अग्रसर होइथ।

तिथि : 15 अगस्‍त २०१७, शब्‍द संख्‍या : ३४४०

 

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