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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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आनन्द दास

चिठ्ठी

अहां स्कूल पहुंचते, तेसर लाइनमे बैसि जायब।

मास्सेबके नज़रि अछि, हमरे-अहां पर,

अंत्याक्षरीमे, अहां गीत गाएब, हम बस्ता बजायब।

अहां हमरा काजर आ हम अहांके नजरि लिखब।

लिखै छी हम चिठ्ठी, अहूं जवाब लिखब।

स्कूलक चारके तेसर बत्तीमे, खोइन्स जायब।

नजरि झुका मुस्का देब,

इशारा जानि, अहांक चिठ्ठी हम दौड़ि ल' आयब।

अहां हमरा जामुन आ हम अहांके गुलाब लिखब।

लिखै छी हम चिठ्ठी, अहूं जवाब लिखब।

 

टीसन पढ़ै लेल आयब, त' सीधे अंगना आबि जायब।

बाहर, सखी सब अहांके किरिया खुवायत,

कहत भौजी छथिन, मुदा अहां नै ल जायब।

अहां हमरा सत्तु आ हम अहांके सतुआईन लिखब।

लिखै छी हम चिठ्ठी, अहूं जवाब लिखब।

 

(एकटा बात; अहां जखन प्रेममे होइ छी, दोसरे लोकमे रहै छी, दुनियाके सब भेद-भाव, ऊंच-नीच, जाति-पातिसँ ऊपर बुझैत छीयै, प्रेमक अलावा सब चीज़, गैर-जरूरी होइत अछि।)

 

जुनि डरु लोक सब स'...,

प्रेमक पवित्रताके ज्ञान नै केकरो, लोक त' अगियाबताह भ' अनेरो नाचत।

प्रेम त' होइत अछि, जाति-पाति स' ऊपर,

अपन प्रेम पवित्र हेतै, पायल जकां छन-छन बाजत।

अहां हमरा प्राण प्रिये आ हम अहांके प्राणेश्वरी लिखब।

लिखै छी हम चिठ्ठी, अहूं जवाब लिखब।

हे…, हम अहांक मोनक सबटा बात बुझै छी, ज्यादा नै बौआऊ, धरातलेपर रहु ;

प्रेमक आनंद लिय, प्रेममे जिबु, उन्मुक्त गगनमे घुमू।

प्रेमक ई त' उमरे अछि, प्रेम अनंत अछि,

प्रेमक अंत नहि करु, सावनक फुहारमे मोर बनि झुमु।

अहां हमरा राधा आ हम अहांके कृष्ण लिखब।

लिखै छी हम मोनमे चिठ्ठी, अहूं मोनेमे जवाब बुझब।

लिय… लिख देलौं हम चिठ्ठी, आब… अहूं जवाब लिखब।

 

-       -आनन्द दास, "बाबाअंगना", नवानी, 25.04.2020

 

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