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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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                      जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’

                                 

टा गजल

1

घूमि एलौं हम जहाँ-तहाँ ऐ दुनियामे 

कियो ने भेटल अहाँ जकाँ ऐ दुनियामे


 

सूर्यक चारू कात घुमथि धरती मैया

छनि जननीकें चैन कहाँ ऐ दुनियामे 


 

पाप थीक अनकामे ताकब दोखहिटा

सबसं बड़का धर्म क्षमा ऐ दुनियामे


 

जतेक सिकन्दर एला खाली हाथ गेला 

अंतमे टूटै सभक निशा ऐ दुनियामे


 

ओ सम्पति जे मुइलो पर जायत संगे 

जतेक मोन हो करू जमा ऐ दुनियामे


 

चलू-चलू ऐ दुनियासं हंसिते-हंसिते

जुनि ककरोसं करू घृणा ऐ दुनियामे 


 

(सरल वार्णिक बहर/ वर्ण -15)


 

   गजल 2


 

काहि  कटै  छी  तोरे ले'

गीत     गबै  छी  तोरे ले'


 

माटि हवा आ जल बनलौं 

आगि   बनै  छी  तोरे ले'


 

चानक  चोरी  केलौं  हम

भोर  अनै  छी    तोरे ले'


 

रौद  बहुत  छै  दुनियामे

छाँह   तकै  छी   तोरे ले'


 

बात हमर ई बूझत के 

हम  कुहरै  छी    तोरे ले'


 

(मात्रा-क्रम : 21122- 222)

 

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