logo logo  

वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

Home ]

India Flag Nepal Flag

(c)2004-2018. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

डॉ. शिवकुमार प्रसाद

किछु कवित

 

शहर ओ गेल

शहर ओ गेल मनुक्‍ख बनए लेल

गाममे रहि‍ बन-मानुख छल

शहरक पाथर केर जंगलमे

ऊहो आबि आइ पथरा गेल।

शहरक पाथर केर...।

 

गाममे छल भाए-बहि‍न सभ

कियो बाबू कियो काका छल

भैया-भौजी बेटी-भतीजी

नै कियो बि‍नु नाता छल।

शहरमे जाइते रिश्‍ता-नाता

सभटा मटि‍या-मेट भऽ गेल

शहरक पाथर केर....।

 

पथराएल शहरी पाथरमे

कनिको मानवता नै बाँचल

चारि बर्खसँ चालीस बर्ख केर

बुच्ची, जननी बलि चढ़ि‍ गेल

शहरक पाथर केर...।

 

बाट-बटोही देखतो आन्‍हर

सुनितो रूदन बहि‍र भऽ गेल

पशुतो एहेन कुकर्म सुनि-सुनि

चुड़ुक पानिमे डुमि मरि गेल

शहरक पाथर केर जंगलमे

सभकेँ सभ आइ पथरा गेल।

 

साँझ

साँझक संगे भागि रहल अछि

चिड़ै-चुनमुन बाँसपर

बरद-गाए केर जेबर तहिना

दौड़ि रहल अछि बाटपर।

 

गौधूलिसँ पाटि रहल छै

नभ-ऑंगन घर-गामकेँ

बछा-बाछी चिकरि रहल छै

टोलक-टोल बथानपर।

 

सुरुज सिनुरिया अलोपित भेल

धूरा केर एहि मेघमे

बेटी-बहुरिया दीप नेसने

साँझ देथि ऑंगन-दुआरपर।

 

बाट-बटोहिक डेग भेल नमहर

गाछी-बिरछी भेलै भियौन

नेना-भुटकाक दीठि उतारथि

दाइ-माइ ओसारपर।

 

आ गइ निनिया बाट तकैत छौ

हमर बौआ ओछैनपर

कथा-पिहानी घुमि रहल छै

बौआ केर लिलारपर।  

 

ढोलक बोखार

सुनलक ढोलिया टिक भेल ठाढ़

गुणमन्ती भेल गामक भार

गाम-गाममे गुणमन्तीकेँ

छुटि रहल अछि आब बोखार

सुनलक ढोलिया...।

 

अगड़ा-पिछड़ा फेंटम-फेंट

बाप-दइयासँ होइ छै भेँट

पॉंच बर्खसँ नीनक मातल

घुमि रहल कुरयाबैत पेट

कोना हएत आब नैया पार

सुनलक ढोलिया...।

 

दूरक ढोल सोहनगर छेलै

लगक ढोल छेलै भेल बेकार

दंगलक डगर सुनिते मातर

गुणमन्तीकेँ चढ़ल बोखार

सुनलक ढोलिया टिक भेल ठाढ़। q

 

खेबैया

सबहक नाहकेँ भेटल खेबैया

बि‍नु खेबैया हमरे नाह अछि

देखू पार आब केना लगैत अछि‍

बि‍नु खेबैया हमरे नाह अछि।

 

किनको टाका पार लगौतन्‍हि‍

किनको नेता पार लगौतन्‍हि‍

अपन-अपन बाँस भि‍रौने

बहुतो पार उतरलौ जाइ छथि

बि‍नु खेबैया हमरे नाह अछि‍।

 

दूर-दूर धरि नजरि खिरौने

ताकि रहल छी आँकि रहल छी

किनका पछुऔने पार लगत आव

कियो संगी नै भेटि‍ रहल अछि‍

बि‍नु खेबैया हमरे नाह अछि‍।

 

किनको बड़का पैघ हबेली

किनको बड़का पागक डौड़ही

किनको सार किनको छनि साढ़ू

धोती जि‍नक अकास सुखाइत अछि‍

बि‍नु खेबैया हमरे नाह अछि‍।

 

माय हमर नव-कुम्‍भ नहेली

माय हमर नव कुम्‍भ नहेली

नै हुनका मन पापक गेठरी

नै हुनका मन बाँझक धोकरी

नेना-भुटुकाक साँस हास संग

जि‍नगी भरि ओ खूब नहेली

माय हमर नव कुम्‍भ नहेली।

 

नै कहि‍यो ओ चानन केली

नै कहि‍यो संन्‍यासि‍न भेली

गिरहस्‍थीकें स्‍वर्ग बूझि‍ ओ

कर्मक संग प्रभु कें गुण गेली

माय हमर नव कुम्‍भ नहेली।

 

नै ओ विदुषी नै ओ सुन्नरि

नै आडम्‍वरी नै कनसोही

बाट-बटोही सभ जन हि‍नका

मनुक्‍ख रूपमे भेटल सि‍नेही

माय हमर नव कुम्‍भ नहेली।

 

मनक प्रयागमे त्रि‍वि‍ध तापकेँ

कर्मक हुलासमे अपन गर्वकेँ

अपन मनोरथ परक सुख लेल

आजीवन ओ डुमौने रहली

माय हमर नव कुम्‍भ नहेली।  

 

छठि पाबैन

सबहक केरा सबहक नारियल

सबहक ठकुआ एक्केरंग

सबहक मनमे भक्ति-भावना

ठकुए सन छै एक्केरंग

सबहक ठकुआ एक्केरंग।

 

बाँसक पथिया बाँसक कोनिया

माटिक दिया एक्केरंग

मोट हौउ वा हौउ ओ पातर

सबहक मुड़ै एक्केरंग

सबहक ठकुआ...।

 

अल्हुआ-सुथनी, हरदी-आदी

सेब-समतोला एक्केरंग

नवका साड़ी नवका धोती

भुवन भाष्कर एक्केरंग

सबहक ठकुआ...।

 

पोखरि हो कि कछेर धार केर

आँगनक पोखरि एक्केरंग

सभठाम पानिमे ठाढ पबनैतिन

सबहक व्रत छन्हि एक्केरंग

सबहक ठकुआ...।

 

सबहक अँगना गोबरे नीपल

नेना-भुटका एक्केरंग

सभकेँ छठि परमेशरी देथिन

अभिलाषित वर एक्केरंग

सबहक ठकुआ एक्केरंग।

 

ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।