प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
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प्रमोद झा  'गोकुल'

शाहीन बाग

भारत सरकार मुर्दाबाद! नागरिकता कानून वापस लो!!!
आदि शासन बिरोधी नारा लगबैत जनी जैत आ बाल बुदरुकक संग संगोर करैक लेल अबदुल्ला पहुँचल मंजूर अलीक दलान पर ।ओत ओ सब आर जोर जोर सँ प्रधानमंत्री आ गृहमंत्रीक विरोध मे चिचिया लागल सोर सराबा सुनि मंजूर अली आ ओकर पत्नी अपन छोट छोट छोट बच्चाक संग धरफरा के बाहर निकलल आ अकचका के ओ अबदुल्ला सँ पूछि बैसल---कथीक हुजूम छियै ई भाइजान!
-अरे , तोरा कुछो नै बूझल छह ?अबदुल्ला बाजल ।
-न्न, हमरा ते नै बूझल अछि! अबैत बाजल मंजूर ।
-नै बूझल छह ते सुनह!
-हँ हँ कहह !
-यैह जे शाहीन बाग मे बड़का धरना प्रदर्शन भय रहल छै,ओइमे कतेको पाटीक बड़का बड़का नेता आ अपना आरूक लीडरक संग मुल्ला मौलबी सेहो सिरकत कय रहल छै ।जनाना आ बुदरूक सब के तिरंगा संगेँ बुलौलकैहे ,तेँ सब जा रहल छै ओत्तै ।एकटा तूँ जे अकान बनल छह ।धू मरदे••••
-बात के बतंगर किएक बनबैत छह? हमहूँ ते सएह पूछै छिअह जे कथीक धरना प्रदर्शन भय रहल छै?
-नीक नहैंतते अपना आरुक लीडरे बतौतह ,ओना हमरा इएह बूझल अछि जे सरकार एगो नागरिकता कानून पास केलकैहे ,जकरा मुताबिक बाहरी हिन्दू सिख इसाइ आ पारसी सब जे एत' आबि चुकल छै आ जे आब'बला छै तकरा सब के सादर नागरिकता भेटतै मुदा अपन मोहमडन के नै ।बाहरी जतेक अपन बिरादरिक लोक रोजी रोटीक टोह में एत'आयल छै ओकरा सब के खदेर के बैला देतै ।आब तोहीं कहह की ई उचित भेलै?
-अनुचित की भेलै से कहह ने! ऐँ हौ! पाकिस्तान बँगला देश आ अफगानिस्तान आदि जगह से जे अपन बिरादरिक लोक एत एलै से की करैले? एकरा सबके अपन देश मे कोनो दिक्कत नै छलै तखन जे एत एलै से मात्र दंगा फसादे मचबैले ने!सरकार आ देश जखन एकरा सब से आजिज भय गेलैए तखन ओकरा ऐ तरहक निर्णय लेबय पड़लै ,से ते बुझहक! दोसर बात हिन्दू सिख इसाइ आ पारसी के ओतुक्का सरकार आ लोक दुर्दशा कयके राखि देलकै ।इज्जत आबरू धर्म आ धन सब दाव पर लागि गेलै ओकरा सबहक ।ने ओ सब ओत' सोतंत्र भय के जिबिये सकैये आ ने भरिये सकैये ।
एतबा सुनैत देरी अबदुल्ला आगि बबूला भय गेल ।ओ मंजूर अली के गरियबैत बाजल- साला तूँ हिन्दूक संग पूरि काफिर जकाँ बात करै छेँ!
-काफिर तूँ कि हम ?मंजूर अली बाजल ।
- तूँ साला मादर चो••••••••!
-खबरदार! मूह सम्हारि के बाज नै ते •••••
-नै ते की?
-रे चोट्टा! हमरा लेल पैहने देश आ एतूक्का अनमोल भारतीय संस्कृति आ सभ्यता ,तखन मजहब ।भारतक खूजल आसमानक नीचाँ रहि हमरा सब बेरोक टोक अपन धार्मिक अनुष्ठान करैत निर्भय जीबि रहल छी ।कहाँ केओ हमरा सब के प्रताड़ित करैये प्रत्युत सब एक दोसराक सुख दुःख नीक बेजाय मे जाति धर्म बिसरि सहभागी बनि हिल मिल के आनन्द पुर्बक रहि रहल छी तखन ई बेसुराह सुर किएक?
-नत होइत अबदुल्ला बाजल- भाइ जान! तों ठीके कहै छह,हमहीं भटकि गेल छलौं नेतबा सबहक झाँसा मे आबि के ।माफ कय दैह हमरा! ठीके एहन सुख शान्ति कोनो मुस्लिम देश मे कहाँ छै ?बिना भेद भाव के संविधान हमरा सब के सबटा अधिकार दैत अछि ।

--प्रमोद झा "गोकुल", दीप,मधुवनी (विहार), फोन+९८७१७७९८५१

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