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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक  गद्य

विदेह

 

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१७.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

१.राजदेव मण्‍डल- दूटा बीहैन कथा२.रबीन्‍द्र नारायण मिश्र- २ टा निबन्ध आएकटा यात्रा वृत्तान्त  

 

राजदेव मण्‍डल- दूटा बीहैन कथा

 

भितरिया चोट

चाहक दोकान लग किछु लोक ठाढ़ छल आ किछु बैसल छल। गप्‍पक छरक्का छुटि रहल छेलइ। विषय छेलै- आइ-काल्‍हिक लोक सभटा काज स्‍वार्थेक कारण करै छइ।

मुदा हम ऐ बातपर अड़ल छेलौं जे किछु काज लोक ओहनो करैत अछि जइमे कोनो स्‍वार्थ नइ रहै छइ। जइ काजकेँ उपकार कहल जाइ छइ।

एम.एल.ए.क चुनाउ होइबला छेलइ। चुनाउक समैमे तँ पुलिसकेँ जेना पाँखि लगले रहै छइ।

तखैने ओइठाम एकटा पुलिसिया गाड़ी रूकल। रूकल नहि बल्‍कि रोकए पड़लै। कारण छेलै, एकटा साइकिल सड़केपर ठाढ़ छेलै आ साइकिलबला केतौ चलि गेल छल।

एकटा सिपाही गाड़ीसँ उतैरते बाजल-

केकर साइकिल छियौ रौ? साहैबक गाड़ी रूकल छइ। हटेबें जल्‍दी आकि देखबीही।

मुदा कियो साइकिल हटेबाक लेल नहि आएल। सिपाही पूरा तमसा गेल छल। ओकर रौद्र रूप देख हम जेना भीतरसँ डेरा गेल रहौं। हम तेजीसँ गेलौं आ साइकिलकेँ हटबए लगलौं। कमजोर रहने कनी अस्‍थिरसँ हटबै छेलौं। डरेबर बारम्‍बार हॉर्न बजा रहल छेलइ। सिपाही डण्‍टासँ हमरा पजरामे गोंजी मारैत बाजल-

तोहर खतियानी रोड छियौ। टेर मारैत केना चलैए! देखै नइ छै जे साहैबकेँ लेट होइ छइ!”

हड़बड़ाइत आगू बढ़लौं कि रोडक कातमे साइकिल नेने खसि पड़लौं।

चाहक दोकानपर लोक ठिठिया कऽ हँसि देलक। पुलिसिया गाड़ी हॉर्न दैत चलि गेल।

एक गोरे टिटकारी मारैत बाजल-

की यौ उपकारीजी, की भेल?”

डण्‍टासँ तँ कमे चोट लगल छल मुदा की यौ उपकारीजी सुनिते भितरिया चोट जेना कुहरा देलक। लोक दिस तकलौं तँ लगल जेना नँगटे ठाढ़ छी। लाजे मुड़ी गोंतने विदा भऽ गेलौं।

 

छोटकू दोस

कृष्‍णाष्‍ठीक मेला लगल छल। दू-तीनटा संगीक संगे मेलाक गेट दिस ठाढ़ छेलौं। कृष्‍ण-सुदामाक मित्रतापर चरचा भऽ रहल छल।

एकटा संगी बाजल-

देखियो जे कृष्‍ण आ सुदामाक दोस्‍ती। एगो राजा आ दोसर रंक। दुनूक दोस्‍ती एकटा ऐतिहासिक उदाहरण बनल अछि ऐ जुगमे एहेन दोस्‍ती संभव भऽ सकै छइ।

दोसर संगी बाजल-

नहि यौ, दोस्‍ती बरबैरमे होइ छै, तबे निमाहलो जाइ छै, नहि तँ ओ टुटि जाइए।

हमरा बाजए पड़ल-

केना नहि भऽ सकै छइ। हमर बाबूजी आ जगाधर बाबू दुनूमे केना दोस्‍ती छइ। जगाधर बाबूक परिवारमे तीन-तीनटा इन्‍जीनियर छैन आ हमर बाबू बिलकुल गरीब, तैयो हमरा बाबूसँ हुनक परेम देखियौ।

तखैने बगलमे एकटा कार रूकल।

गजाधर बाबूक संगे एकटा ऑफिसर कारसँ उतरल। हम गजाधर बाबूकेँ देखते पएर छुबि प्रणाम केलिऐन। गजाधर बाबू बजला-

की रौ बाबू ठीक छौ ने?”

कहलयैन-

जी ठीके छथिन।

गजाधर बाबू सँगे आगू बढ़ैत ऑफिसर पुछलकैन-

के छी ई बालक? संस्‍कारी बुझाइत अछि..!”

मुँह घोंकचबैत गजाधर बाबू बजला-

धुर, छोड़ू ने। एकटा छोटकू दोसक बेटा छी।

गप करैत दुनू गोरे आगू बढ़ि गेला।

गपकेँ झाँपैले हम किछु बाजए चाहलौं कि बिच्‍चेमे एकटा संगी चद-दे कहि देलक-

चुप रहू यौ छोटकू दोसक बेटा।

हमर बोलती बन्न भऽ गेल छल।◌

 

 

रबीन्‍द्र नारायण मिश्र- २ टा निबन्ध आएकटा यात्रा वृत्तान्त

 

क्रोध  

मनुख भावुक प्राणी होइत अछि। दैहिक आवश्‍यकताक पूर्तिक संगहि संग ओकर मनोवैज्ञानिक आवश्‍यकताक पूर्ति सेहो आवश्‍यक अछि। जखन कियो केकरो दैहिक वा मानसिक कष्‍ट दैत अछि तँ ओकरा मोनमे क्रोधक प्रादुर्भाव होइत छइ। अतएव क्रोधक हेतु आवश्‍यक थिक जे कियो केकरो कष्‍ट पहुँचबैक संगहि ईहो आवश्‍यक जे कष्‍ट पहुँचेनिहारक पता होइक। अज्ञात बेकती द्वारा उत्‍पन्न कष्‍ट किंवा स्‍वयं अपनेसँ भेल कष्‍टपर क्रोध नहि होइत अछि। उदाहरण स्‍वरूप अगर दाढ़ी बनबए-काल गालक चमरी कटि जाए, खून बहि जाए वा हाथक लोढ़ा धोखासँ पैरपर खसि पड़ए आ पैरक आँगुर थकुचा जाए तँ क्रोध नहि होएत अपितु पश्चाताप होएत जे एना बेसम्‍हार दाढ़ी नहि काटक छल वा लोढ़ाकेँ सम्‍हारि कऽ रखबाक चाही छल। किंतु जँ कियो आन हमरा पाथरसँ मारए किंवा मारबाक उपक्रमो करए तँ तामस धड़ दय भय जाएत।

क्रोधक भोजन थिक विवेक। विवेके रहलासँ मनुख जानवरसँ फराक अछि। मनुख सोचि सकैत अछि। नीक-बेजाए केर विचार कए सकैत अछि। किन्‍तु ई सभ काज विवेकसँ उत्‍पन्न होइत अछि। मुदा जाहि मनुखक विवेक नष्‍ट भऽ जाइत छै ओ बहुत रास अनुचित कथा बजैत अछि एवम्‍ कर्म आ अकर्मक बीच भेदभाव बिसैर जाइत अछि। क्रोध अबिते नीक-सँ-नीक लोककक विवेक मरि जाइत छइ। आकृति बिगैड़ जाइ छै एवम्‍ रक्तचाप बढ़ि जाइ छइ। क्रोधावेगमे मनुख गड़बड़ काज कऽ लैत अछि। अर्थ-अनर्थक भेद बिसैर जाइत अछि आ तँए सोभाविक रूपेँ विनास दिस अग्रसर भऽ जाइत अछि।

क्रोधक प्रवल वेगमे मनुख ईहो नहि सोचि पबैत अछि जे ओकरा जे कष्‍ट पहुँचौलक तेकरा एहेन अभिप्राय रहइ वा नहि। ऐप्रकारक सभसँ नीक दृष्‍टान्‍त चाणक्‍यक ओइ आचरणमे भेटैत अछि जखन किओ कुश गड़ि जेबाक कारणेँ सभ कुशकेँ उखारि ओकरा जरिमे धोर देबए लगला।

केतेक बेर एहेन होइत अछि पाथरसँ चोट लगलासँ लोक पाथरेपर चोट करए लगैत अछि। एहेन क्रोधकेँ जड़क्रोध कहल जाइ अछि। कारण क्रोधीकेँ एतबो अन्‍दाज नहि रहै छै जे ओगलत स्‍थानपर गलत रूपेँ क्रोध कऽ रहल अछि।

क्रोधक जन्‍म कष्‍टसँ होइत अछि। सोभाविक अछि जे जेकरामे सहनशीलता जेतेक बेसी हेतै तेकरा क्रोध तेतेक कम हेतइ। वर्तमान समयमे बढ़ैत महत्‍वाकांक्षा एवम्‍ वैज्ञानिक विकासक कारणेँ पारस्‍परिक टकरावक संभावना सेहो बढ़ि गेल अछि। जखन एक्के वस्‍तुक हेतु कएक गोटे प्रयत्नशील हेता तँ संघर्ष अनिवार्य भऽ जाइ छइ तथा असफल रहनिहार बेकतीकेँ क्रोध होएब सोभाविक।

क्रोधमे लोकक आत्‍मसंयम समाप्‍त भऽ जाइ छइ। ऐ अवस्‍थामे लोक बहुत रास अन्‍ट-सन्‍टबाजि जाइत अछि। परिणामस्‍वरूप पुरान-सँ-पुरान सम्‍बन्‍ध ओ मित्रता नष्‍ट भऽ जाइ छइ। तँए उचित जे तामसमे गुम्‍म भऽ जाइ। जँ कियो तमसाएल अछि तँ ओ अन्‍ट-सन्‍ट बाजि सकैत अछि, जे सुनि हमहूँ उत्तेजित भऽ सकैत छी। परिणामत: मारि-पीट वा एहने कोनो अशुभ काज भऽ सकैत अछि। तँए उचित जे जेतए उत्तेजना होइक तैठामसँ ससैर जाइ जइसँ अनर्गल कथा ओ काज देख हमरो उत्तेजना नहि भऽ जाए।

क्रोधक सीमित ओ संयत प्रयोग लाभकारी भऽ सकैत अछि। मानि लिअ जे कियो गोटे अहाँक टका रखने अछि आ लाख प्रयासक अछैतो ओ टका आपस नहि कए रहल अछि तखन क्रोधक प्रयोग केलासँ भऽ सकैत अछि ओ बेकती टका आपस कए दिए। परन्‍तु एहेन लाभकारी क्रोधकरबामे आत्‍मसंयमक प्रयोजन होइत अछि कारण क्रोध करैत-करैत जँ सीमाल्‍लंघन भऽ गेल, बहुत रास तामस भऽ गेल तँ परिणाम अनिष्‍टकारी भऽ सकैत अछि। टका तँ बुड़िये जाएत संगे ऊपरसँ मारियो लागि सकैत अछि।

क्रोधक प्रयोग प्रतिकारक हेतु सेहो होइत अछि। जँ ट्रेनसँ यात्रा करैत कियो धक्का मारि दैत अछि किंवा ट्रेनसँ धकिया कए निच्‍चाँ खसा दैत अछि तँ ओकरापर कसि कऽ तामस भऽ जाइत अछि। परिणामस्‍वरूप हमहुँ ओकरा कोनो-ने-कोनो दण्‍ड देबए चाहैत छिऐ। यद्यपि ऐ बातक कोनो संभावना नहि रहैत छै जे ओइ आदमीसँ दुबारा कहियो भेँट होएत वा नहि।

क्रोधक प्रयोगयदा-कदा आत्‍मस्‍वार्थ सेहो होइत अछि। कारण जँ कियो बेकती अहाँकेँ कोनो प्रकारक क्षति पहुँचा दैत अछि तँ अहाँक सोभाविक इच्‍छा रहैत अछि जे दुबारा फेर एहने क्षति नहि हो। तँए ओइ बेकतीपर क्रोधक प्रयोग कए घटनाक पुनरावृत्तिकेँ रोकबाक प्रयास कएल जाइत अछि। ऐ प्रकारसँ कएल गेल क्रोधमे आत्‍म रक्षाक भाव बेसी होइत अछि।

क्रोधक शिकार नीक-सँ-नीक लोक भऽ जाइत अछि। कोनो आवश्यक नहि जे अहाँ कोनो गलती केनहि होइ आ तही कारणेँ अहाँकेँ कोपभाजन होमए पड़ल हो। असल बात तँ ई थिक जे क्रोधित मनुखक दृष्‍टिमे जँ अहाँ कोनो प्रकारसँ क्षति पहुँचेबाक चेष्‍टा कएल अछि तँ ओ क्रोधित भऽ जाएत। एहेन परिस्‍थितिमे क्रोधसँ बँचबाक एक मात्र साधन सहनशीलता थिक।

क्रोध दुखक चेतन कारणक साक्षात्‍कार वा परिज्ञानमे होइत अछि। अतएव जेतए कार्य कारणक सम्‍बन्‍धमे त्रुटि होएतैक ओतए क्रोधमे धोखा भऽ सकैत अछि। दोसर बात जे क्रोध केनिहार लोक जेमहरसँ क्रोध अबै छै तेम्‍हरे देखैत अछि। अपना दिस नहि देखैत अछि। क्रोधक ई प्रवल इच्‍छा होइ छै जे जे बेकती ओकरा कष्‍ट देलक अछि ओकर नाश होइक मुदा ओ कखनो ई नहि सोचि सकैत अछि जे ओ जे कऽ रहल अछि से अनुचित छै, किंवा तेकर की परिणाम हेतइ।

कखनो-कखनो लोक क्रोधमे अपने माथ पटकए लगैत अछि। तेकर कारण जे हुनकर ऐ काजसँ हुनक निकट सम्‍बन्‍धी, जिनकासँ ओ क्रुद्ध रहै छैथ, हुनका कष्‍ट होइ छैन। तँए हेतु क्रोधमे जँ कियो अपन माथ पटकए किंवा स्‍वयंकेँ कहुना कष्‍ट दिअए तँ बुझी जे ओ कोनो अपने बेकतीपर कुद्ध अछि।

कोनो बातसँ खौंझाएब क्रोधक एकटा रूप छिऐ। एहेन बेकती मानसिक रूपसँ रोगग्रस्‍त होइ छैथ। ओ सामान्‍यत: छोट-मोट गड़बड़ी भेलासँ खौंझा जाइ छैथ। केतेको बुढ-बुढानुसकेँ अहाँ कोनो गप्‍प कहियौ, सुनिते देरी ओ ठेंगा लऽ कऽ दौग जाएत। ..क्रोधक ई रूप सामान्‍यत: वृद्ध वा रोगीमे देखना जाइत अछि।

चाहे जे हो एतबा तँ निर्विवादे जे क्रोधक परिणाम बिरले नीक होइत अछि। सामान्‍यत: क्रोधमे समस्‍याक समाधान हेबाक बजाय नव-नव समस्‍याक प्रादुर्भाव भऽ जाइत अछि। क्रोधक आवेगमे कएल गेल गलती केतेको-बेर मरण-पर्यन्‍त पश्‍चातापक कारण भऽ जाइत अछि।

अतएव क्रोध सबहक लेल घातक होइत अछि। ऐसँ अध्‍यात्‍मिक प्रगतिमे व्‍यवधान तँ होइते अछि संगे सांसारिक विकास सेहो अवरूद्ध भऽ जाइत अछि। अस्‍तु क्रोध अवश्‍य त्‍याज्‍य थिक।

लेखक-

रबीन्‍द्र नारायण मिश्र

७५८, सेक्‍टर ८

पुष्‍प विहार

नई दिल्‍ली- ११०००१७

दिनांक- २४.०१.१९८८ 

 

 

 

यूरोप यात्रा   

भारत सरकारक प्रशिक्षण कार्यक्रमक अनुसार ३५ गोटेकेँ एक-संग युरोपक पाँच देश घुमबाक कार्यक्रम छल। सभ गोटे सरकारक प्रथम श्रेणीक अधिकारी छला। सभ नेतृत्‍व एकटा महिला अधिकारीक हाथमे छल। सभमे बेकतीमे विदेश देखबाक-घुमबाक आ रहबाक अवसरसँ मनमे अद्भुत प्रसन्नता छल। रहबो किए ने करत युरोपक देश छी किने।

सभ कियो अपन-अपन कागज-पत्तर सरियाबैमे ललगौं। पासपोर्ट सरकारी बनल। वीजा कार्यालयक तरफसँ बनि गेल। टीकट सरकार देलक, तखन करके की रहइ। बस कपड़ा-लत्ता सरियाउ, किछु पाइ बेसी कऽ रखि सकी तँ राखि लिअ आ विदा होउ। ओना, किछु यूरोडालर सरकारक तरफसँ जेब खर्चक हेतु सेहो देल गेल।

फ्रांसक राजधानी पेरिस लौटबाकाल रस्‍तामे छल। सभकेँ इच्‍छा भेलै जे कनिको-मनिको ओकरो देख सकी तँ देख ली। से प्रयासक बाद सम्‍भव भेलइ।

लौटैकालक कार्यक्रममे दिन भरि पेरिस भ्रमण शामिल कएल गेल। पैंतीस आदमीक हुजुम एक्केठामसँ विदेश विदा छल। एकर आनन्‍द सोचल जाए सकैत अछि।

यूरोप भ्रमणक उपरोक्त कार्यक्रम असलमे प्रशिक्षणक अंग छल। अगस्‍त २००९ मे दू सप्‍ताहक हेतु केतेको दिनसँ तैयारी चलि रहल छल। विदेश यात्राक दौरान की करक नहि अछि, आ की करक अछि तेकर सविस्‍तार चर्चा भेल। कोनो एहेन काज नहि करबाक छेलै जइसँ देशक गरिमापर बट्टा लगइ।

आठ बजैत-बजैत सभ कियो इन्‍दिरा गाँधी अन्‍तर्राष्‍ट्रीय हवाइ अड्डापर पहुँच गेल रही। सबहक जेबीमे अपन-अपन टीकट, पासपोर्ट आदि जरूरी कागजात छल। रातिक २ बजे करीब हवाइ जहाजक उड़ान छल।

किछु गोटेकेँ मुम्‍बइसँ आगूक जहाज लेबाक रहैन तँए ओ सभ अलग पहिनहि मुम्‍बइ चल गेल रहैथ। हम दिल्‍लीसँ सीधा फ्रैकफर्ट जाइबला हवाइ जहाजमे जाइबला समूहक संगे रही। दिल्‍ली हवाइ अड्डापर एक-एक-के सभ सहयात्री सभ जमा भऽ गेलौं। सुरक्षा जाँचक बाद हम सभ अन्‍दर इमीग्रेशन काउन्‍टरपर ठप्‍पा लगेलौं। सभकेँ संगमे कोनो प्रतिबन्‍धित सामान नहि लऽ जेबाक हिदायत पहिनहि दऽ देल गेल रहइ। तँए कोनो परेशानी नहि भेल। किछु कालमे बोर्डीग शुरू भऽ गेल आ हम सभ एक-एक-के बेरा-बेरी सभ कियो हवाइ जहाजमे बैस गेलौं।

हमरा लोकनिक प्रशिक्षण स्‍लोवेनियाँ लुबियाना स्‍थित आइ.सी.पी.ई.(Interational centre for public Enterprises) छल। एकर स्‍थापना २४ अप्रैल १९७४ ई.मे तत्‍कालीन यूगोस्‍लावीया सरकार द्वारा भेल।

भारत, नेपाल, श्रीलंका सहित पनरहटा आर देश सभ एकर सदस्‍य छैथ। ऐ संस्‍थाक विकास यात्रामे भारतक गम्‍भीर योगदान अछि। वर्तमानमे आइ.सी.पी.ई. दुनियाँ भरिक लोक हेतु विभिन्न प्रकारक विषय, खास कऽ आर्थिक विषयपर चर्चाक सघन माध्‍यम अछि। ऐ संस्‍थाक स्‍थापनामे संयुक्‍त राष्‍ट्र संघक नाओं (Non Aligned Movement) क बहुत योगदान अछि। भारतक श्री सी सुव्रमन्‍यम एवम्‍ श्री जी पार्थ सारथी बहुत दिन धरि एकर नायक मार्ग दर्शक रहला। यूगोस्‍लावियाक विभाजनक बाद १९९२ ई.मे ऐ संस्‍थाक देख-रेख स्‍लोवेनियाँ सरकारक अधीन आबि गेल।

ऐ संस्‍थाक प्रशासकीय प्रमुख डायरेक्‍टर जेनरल होइत छैथ जे संस्‍थाक एसेम्‍बलीक द्वारा चारि वर्षक हेतु चुनल जाइ छैथ। संम्‍प्रति डॉ. आनन्‍द एन अस्‍थाना ६ अप्रैल २०१५ सँ चारि सालक हेतु ऐ संस्‍थाक डायरेक्‍टर जेनरलक पदपर छैथ।

दिल्‍लीसँ हवाइ जहाज खुजल तँ सोझे जर्मनीक फ्रैकफर्ट हवाइ अड्डापर उतरल। सूर्योदय भऽ गेल छल। मुम्‍बइसँ अबैबला हमर संगी सभ सेहो ओतहि आबि कऽ हमरा लोकनिक प्रतीक्षा करैत छला। ओइमे एक गोटेक सामानमे दारूक बोतल रहैन जे ओ मुम्‍बइ हवाइ अड्डापर कीनने रहैथ। फ्रैकफर्टमे ओ पकड़ल गेला आ हुनका बहुत परेशानी भेलैन। हुनका कहल गेल जे या तँ पीब लिअ, या केकरो दऽ दियौ चाहे फेक दियौ। संगे आगू नहि लऽ जा सकै छी। पता नहि, ओ तेकर की समाधान केलैन।

फ्रैकफर्ट दुनियाँक पहिल हवाइ अड्डा थिक। १६ नवम्‍वर १९०९ ई.मे भेल। जर्मनीक ई वयस्तम हवाइ अड्डा अछि। सन्‍ २००९ मे पाँच कड़ोर ९ लाख ३२ हजार ८४० यात्री ऐठामसँ गुजरल। फ्रैकफर्टक टर्मीनल १A पर हमरा लोकनि स्‍लोवेनियाँक (Lajubljana) हेतु छोट सन हवाइ जहाज पकड़लौं। घन्‍टा भरिमे ई यात्रा संपन्न भेल। रस्‍तामे सभ तरहक जलखै सेहो देल गेल।

यात्रासँ पूर्व हमरा सबहक एकटा संगी मार्गदर्शन करैत निम्नलिखित पहलुपर धियान रखबाक परामर्श देलैन। (ओ केतेको बेर विदेश गेल रहैथ आ विदेशमे २ साल काजो केने रहैथ)

१.      हैण्‍ड वैगेजमे एक सेट कपड़ा राखी ताकि जँ चेकइन वैगेज देरीसँ पहुँचल तँ काज औत।

२.     चेकइन वैगपर अपन नाओं, गन्‍तव्‍य स्‍थानक पता सहित फोन नम्‍बर लिखल जाए। ओइ बैगमे अपन भिजिटिंग कार्ड राखल जाए।

३.      पासपोर्ट, हवाइ जहाजक टिक, विदेशी मुद्रा अपना संगे सुरक्षित स्‍थानपर राखल जाए।

४.     उपरोक्त जरूरी कागजातक तीन फोटो प्रति वैगमे अलग-अलग स्‍थानपर राखल जाए।

५.     नित्‍यप्रति प्रयोगक जरूरी दबाइ अपना संगे राखू।

६.     होटल आदिमे अपन सामानपर धियान राखू, ताकि ओ चोरि ने भऽ जाए।

७.     विदेशमे हमेशा दू वा अधिकक समहूमे रहू ताकि जरूरी भेलापर मदैत भऽ सकए।

८.      विदेशमे कीनल गेल सामानक रसीद संगे राखू, एमीग्रेसन काउन्‍टरपर तेकर काज पड़ि सकैत अछि।

९.      अपना संगे छाता, हल्‍का ऊनी स्‍वेटर, आ कोट राखू।

उपरोक्त प्रशिक्षण ९ अगस्‍तसँ २३ अगस्‍त २००९क दौरान सम्‍पन्न हेबाक रहइ। कार्यक्रम प्रारम्भसँ पूर्वहि हमरा लोकनिकेँ संस्‍थापनक डायरेक्‍टर जेनरलक तरफसँ इमेल भेटल जइमे संस्‍थानक बारेमे प्रारम्‍भिक जानकारीक अलाबा प्रशिक्षण कार्यक्रमक छल। दैनिक कार्यक्रम छल। तहिक अनुसार माने कार्यक्रम दौरान कोनो काजक हेतु श्री अश्विन श्रेष्‍ठ एवम्‍ श्री उरोज जेबरसँ सम्‍पर्क करबाक छल।

९ अगस्त २००९ क लुवियाना हवाइ अड्डापर हमरा लोकनिक स्‍वागत हेतुश्री श्रेष्‍ठजी (जे नेपाली मूलक छला एवम्‍ स्‍लोविनियाँमे बसि गेल रहैथ) आएल रहैथ। दूटा नमगर-नमगर बसमे चढ़ि हमरा लोकनि संस्‍थानक हेतु विदा भेलौं। आधा घन्‍टामे हम सभ संस्‍थान पहुँचलौं जेतए हमरा लोकनिक स्‍वागत डॉ. स्‍टेफन वोगडन सलेज, डायरेक्‍टर जेनरल केलाह। सभ गोटेकेँ होस्‍टल रूमक कुंजी देल गेल। प्रत्‍येक कोठरीमे दू गोटाक जगह छेलइ। मात्र एक्केटा रूप छेलै जइमे एसगरे हमर एकटा संगी रहला।

कार्यक्रमक समन्‍वयक (महिला अधिकारी) केँ सेहो फराक कोठरी देल गेलैन। तेकर पछाइत हमरा लोकनिकेँ चाइनीज रेस्‍टोरेन्‍ट- सांग हाइ, लुवियानामे दिनक भोजन करौल गेल।

छात्रावास साफ-सुथरा छल। कोठरी सभमे ए.सी. नहि रहै कारण ओइठाम ओतेक गर्मी नहि पड़ैत अछि। सभ जरूरी समान ओइ कोठरीमे सुरभ छल।

संस्थानक भूतलपर रवीन्‍द्रनाथ टैगोर हॉलमे नित्य साढ़े सातसँ आठ बजेक बीचमे जलखै देल जाइत छल। जे तेतेक जूश पीबए चाहैथ से भेटैन। भारतीय शाकाहारी भोजन एकटा गुजराती ठेकेदार द्वारा देल जाइत छल। लगैत छल जेना अपने देशमे खा रहल छी। ओही हॉलमे रोजाना रात्रि भोजनक बेवस्‍था सेहो रहैत छल। एवम्‍ दिनुका भोजना आन-आन ठाम।

संस्‍थानक त्रुवार हॉलमे प्रशिक्षण भाषण होइत छल। समयसँ सभ प्रशिक्षणार्थी एवम्‍ व्‍याख्‍याता लोकनि उपस्‍थित भऽ जाइत छला। चाह एवम्‍ कौफीक हेतु दू बेर अवकाश होइत छल। चाह/कौफीक अलावा भरि पोख तरह-तरह केर बिस्‍कुटक बेवस्‍था सेहो छल।

१० अगस्‍त २०१६क संस्‍थानक डी.जी. द्वारा स्‍वागत भाषणक बाद स्‍फोवेनियाँमे भारतीय राजदूत डॉ. भी.एस. शंषद्रि द्वारा भारत स्लोवेनियाँ सम्‍बन्‍धपर संक्षिप्‍त चर्चा कएल गेल। तद्दुपरान्‍त स्‍लोवेनियाँक विदेश मंत्रालयमे डी.जी. श्रीएन्‍ड्रेज वेन्‍डेज द्वारा स्‍लोवेनियाँ एवम्‍ अर्थ संकट विषयपर भाषण भेल। भोजनोपरान्‍त प्रो. जोज ग्रिकर द्वारा Innova tive Cron Border i-Resion Development विषयपर भाषण भेल। 

रातिमे स्‍वागत एवम्‍ रात्रि भोजनक कार्यक्रमक बाद सभ गोटे विश्राम केलौं। भोरे उठि हम सभ आसपासक जगहमे टहलए निकललौं। अकास स्‍वच्‍छ छल। वायुमण्‍डलमे केतौं प्रदूषण नहि। अकासक तारा सभ चकमक देखल जा सकैत छल। हवामे जे ताजगी छल ओकर अनुभव शब्‍दसँ नहि कएल जा सकैत अछि। मुदा ओत्तौ पार्कमे एकटा भिखमंगा सन बेकतीकेँ पुरान-धुरान ओढ़ना ओढ़ने सूतल देखलिऐ। कहबी छै जे गेलौं नेपाल, कपार गेल संगे..!

स्‍लोवेनियाँ बहुत छोट सन देश अछि मुदा आर्थिक दृष्‍टिमे उन्नत देशमे अबैत अछि। ई देश यूरोपियन यूनियनक हिस्‍सा अछि एवम्‍ ओइठामक मुद्रा यूरोडालर अछि। सभ किछुक अछैतो ओत्तौ अभागल लोक पार्कमे अनाथ जकाँ सूतल देखाएल, से देख आश्चर्यमे पड़ि गेलौं।

११ सँ सोलह अगस्‍त २०१६ ई.क बीच स्‍लोवेनियासँ बाहर वियाना, म्‍युनिस्‍क, मेनिस जेबाक कार्यक्रम छल। समस्‍त यात्रामे श्री अश्विन श्रेष्‍ठजी हमरा लोकनिक संगे रहैथ। हुनका संगे एकटा गाइड छल एवम्‍ गाड़ीक ड्रइवर रहए जे अपना-आपमे मनोरंजक छल एवम्‍ बहुत रास जानकारी दैत रहै छल।

९ अगस्‍तक सायंकाल हमरा लोकनि सीटी सेन्‍टर घुमैले गेलौं। सड़कपर काते-काते चलैमे अद्भुत आनन्‍द आबि रहल छल। सड़कक काते-काते साइकिल चलेबाक हेतु अलग पाँति छल। ट्रैफिक कन्‍ट्रोल सिस्‍टममे एहेन बेवस्‍था छल जे पदयात्री सड़क पार करबाक सूचना खीच दबा कऽ दए सकैत छल। अलग जाइबला लोक सभ हमरा लेाकनिक संग बहुत नीक बेवहार करै छला।

ट्रैफिक कन्‍ट्रोलमे सेन्‍सर लागल छेलइ। जइ कार सभमे अनुमतिक चीप छल, तेकरा चेक प्‍वाइन्‍टपर अबिते रस्‍ता खुजि जाइत छल। शेष लोककेँ अपन कागजात देखबए पड़ैत छल। तेकर बादे अहाँक गाड़ी आगू बढ़ि सकैत अछि। जँ सड़कपर यातायात नियमक उल्लंघन करैत पकड़ल जाएब तँ तुरन्‍त सायरन बजि उठैत छल आ ओइसँ उवरक हेतु भारी जुर्माना ३० यूरोडालर अदा करए पड़ैत छल।

सड़कक कातमे किंवा कोनो पार्कमे लघुशंका करब विल्‍कुल मना छल। एमहर-ओमहर जाइत काल परिचय पत्र लटकौने रहैत छेलौं जइसँ असानीसँ पहिचान भऽ सकए। स्‍लोवेनियाँक सरकारमे विषय वस्‍तुकेँ विशेषज्ञ सभकेँ मंत्री, सचिव बनौल जाइत अछि। सरकार बदललापर ओ सभ अपन पुरना काजपर आपस लौट जाइत छैथ। यूरोपियन पुनियनक संभावी सभ राष्‍ट्रमे एके बिन्‍दुपर टैक्‍स लेबाक परम्‍परा अछि। संसदक दू सदन अछि। राष्‍ट्रपति, मंत्रीक अलाबा नगरपालिका होइत अछि। ओइठाम राज्‍य नहि अछि।

शहरमे पीबक पानिक आपूर्तिक उत्तम बेवस्‍था अछि। पद यात्रीक बहुत सम्‍मान कएल जाइत छल। यदि कारसँ चलैत बेकती कोनो पद यात्रीकेँ देखैथ तँ तुरन्‍त गाड़ी रोकि कऽ सड़क पार करबाक आग्रह करैथ।

११ अगस्‍त २००९ ई.क प्रात: ६ बजे बससँ सभ गोटे आस्‍ट्रीयाक राजधानी वियानाक हेतु प्रस्‍थान केलौं। सभ गोटेक आपसी सहमतिसँ ओइ विदेश कार्यक्रमक हम मुनिटर रही। सभसँ पहिने तैयार भऽ आगू आबि कऽ आर लोक सभकेँ शीघ्र चलबाक हेतु प्रेरित करी। समयक प्रति निष्‍ठा ओइठाम बहुत आवश्‍यक छल, अन्‍यथा लोक हँसीक पात्र भऽ जाइत छल।

वियाना आस्‍ट्रीयाक राजधानी थिक। एकर अवादी १.८ करोड़ अछि। वर्लिनक बाद विश्वमे सभसँ अधिक जर्मन भावी लोक ऐठाम रहै छैथ। आस्‍ट्रीयाक पूर्वी भागमे स्‍थित वियाना अनेको अन्‍तर्राष्‍ट्रीय संस्‍थाक मुख्‍यालय अछि। २००१ ई.मे युनेस्‍को एकटा विश्व धरोहर घोषित केलक।

वियानाकेँ संगीतक नगर सेहो कहल जाइत अछि। विश्व प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक- फ्राइड ओहीठाम जन्‍मल छला। वियाना दुनियाँकमे उच्‍च जीवन स्‍तरक हेतु प्रसिद्ध अछि।

२००५ ई.क एक अध्‍ययनक अनुसार दुनियाँक सर्वोत्‍कृष्‍ट रहै जोगर शहरमे एकर नाओं आएल छल। अमेरिकाक सैन फ्रैसिस्‍को एवम्‍ कनाडाक वानकोमेर ऐ टक्करक आन शहर सभमे अछि। प्रति वर्ष ३.७ करोड़ पर्यटक ऐ शहरमे भ्रमण हेतु अबैत रहै छैथ।

सायंकाल ५ बजे आस्‍ट्रीयामे भारतीय राजदूत श्री सौरभ कुमारसँ दूतावासमे हमरा लोकनिक भेँट भेल। सभ गोटेसँ परिचयक बाद जलखैक बेवस्‍था रहइ। वियानक बारेमे आवश्‍यक जानकारी सेहो हुनका माध्‍यमसँ भेलट।

भारत एवम्‍ आस्‍ट्रीयाक पारस्‍परिक सम्‍बन्‍धक चर्चा करैत ओ स्‍पष्‍ट केलैन जे २००० भारतीय ओइ देशमे रहि रहल छैथ। भारत भ्रमण हेतु वीजा देबामे कोनो देरी नहि होइत छल ओ अधिकांश लोककेँ ओही दिन वीजा भेट जाइत छल।

राजदूत महोदय हमरा लोकनि द्वारा पूछल गेल केतेको जिज्ञासाक उत्तर दैत रहला। दूतावासक बाद हमरा लेाकनि नगर भ्रमण हेतु विदा भेलौं। ओइ क्रममे पुरना महल देखलौं जेतए-सँ ८०० साल तक ओइ देशक शासन भेल छल।

प्रधानमंत्री आवास एवम्‍ संसद भवनकेँ एकदम समीपसँ हम सभ देखलौं आ सुरक्षाकेँ जे ताम-झाम अपना देशमे अछि, से ओतए केतौ नहि बुझाएल। शहर एकदम स्‍वच्‍छ, मनोरम। लोकक अवादी बहुत कम। रस्‍तामे तँ मुश्‍किलसँ कियो देखाइत। खेत सभ हरिअर कंचन। बीच-बीचमे केतौ-केतौ गाम सभ, जेहो छोट-छोट मुदा पक्काक घर सभ दर्शनीय दृश्‍य उत्पन्न करैत छल। सभ घरपर सौर ऊर्जाक उत्‍पादनक बेवस्‍था छल। रस्‍ता भरि पवनचक्की द्वारा विद्युत ऊर्जा उत्‍पादनक बेवस्‍था देखाएल। यत्र-तत्र द्वितीय विश्व युद्धक स्‍मृति अवशेष भरल छल।

सड़कपर ३५टा भारतीय हुजुम जखन चलैत छल तँ अभूतपूर्व दृश्‍य भऽ जाइत छल। देशक प्राय: सभ राज्‍यक लोक हमरा सबहक संगे छला। अहिना सड़कपर चलैतकाल वियानाक फूट-पाथपर एकटा पंजाबी दोकान केने छला। हमरा सभकेँ हिन्‍दीमे गप करैत सुनि बहुत प्रसन्न भेला। गप-सप्‍प्‍क क्रममे अपन परेशानी सभ व्‍यक्‍त करैत रहला।

सम्‍पूर्ण यूरोप एक दोसरसँ जुड़ल अछि। सड़कक माध्‍यमसँ पूरा यूरोप घुमि सकैत छी। मल्‍टीपाल इन्‍ट्री वीजा भेटैत छइ। जहिना अपना देशमे एक राज्‍यसँ दोसर राज्‍य जाइ छी तहिना ओतए एक देशसँ दोसर देश घुमि सकै छी। दूरगामी बस सभक ड्राइवरकेँ दूटा यात्राक बीचमे आधा घन्‍टाक कानूनी विश्राम देल जाइत छइ।

आसपासक घर सभमे फलक बगीचा छल। निच्‍चाँमे फल सभक पथार रहैत छल। सड़कक काते-काते हम सभ चली तँ लोक सभ आश्चर्यचकित भऽ देखैत रहै छल। कियो-कियो कहैत जे ओ इण्‍डियाकेँ जनैत अछि किंवा इण्‍डिया गेलो अछि। मुदा सबहक मुखमण्‍डलपर एकटा सत्‍कारक भाव भेटैत छल जेकरा बिसरब असम्‍भव...।

१२ अगस्‍त २००९क हमरा लोकनिक पहिल पड़ाव छल- यूनीडो (United Nations in Destrial Developemant Organization) संयुक्त राष्‍ट्रसंघक अधीन यूनीडो अन्‍तर्राष्‍ट्रीय स्‍तरपर गरीबी निवारण हेतु औद्योगिकरणक विकास हेतु कार्यरत्‍ अछि। जनवरी २०१७ तक भार सहित १६८ देश ऐ संस्‍थाक सदस्‍य छैथ। संस्‍थाक निदेशक द्वारा प्रस्‍तुतिकरणक क्रममे मूलत: निम्नलिखित विषय उभरल-

१.      वर्तमान परिवेशमे सरकार सबहक महत्‍व बढ़ल अछि कारण बाजार आधारित नीति स्‍वयंमे अपूर्ण अछि।

२.     यूनिडो सदस्‍य देश सभकेँ उत्‍साहित कए सकैत अछि मुदा असल काज तँ देश सभकेँ स्‍वयं करक हएत।

३.      वायुमण्‍डल परिवर्तनक खेती-वाड़ीपर जबरदस्‍त प्रभाव अछि।

४.     ऊर्जा उत्‍पादनक ताधैर महत्‍व नहि हएत जाधैर एकर सक्षम उपयोग नहि हएत।

५.     भारतमे अफ्रिकोसँ कम प्रति बेकती उपलब्‍ध अछि। भारतक प्रगति हेतु ऊर्जा उत्‍पादन ओ उपलब्‍धिमे वृद्धि आवश्‍यक अछि।

६.     गरीबी ओ ऊर्जामे अन्‍योन्‍याश्रय सम्‍बन्‍ध अछि।

७.     प्रत्‍येक घरमे सौर ऊर्जा लगौल जाए।

८.      कार्यालय एवम्‍ दोकानक कार्यवधि घटा कऽ ऊर्जा व्‍ययकेँ सीमित कएल जाए।

९.      भारतक किछु राज्‍य जेना महाराष्‍ट्र, जुजरात आन सात राज्‍यसँ बेहतर कऽ रहल अछि।

११ अगस्‍तक दिनुका भोजन एकटा भारतीय भोजनालयमे छल। ओकर संचालक एकटा भारतीय युवक छला जे ओइठाम होटल मैनेजमेन्‍ट करबाक हेतु गेल रहैथ आ पढ़ाइ पूरा कए भोजनालय चलबए लगला। ओ अपन प्रयासमे पूर्ण सफल छला। होटल खूब चलैत छल। उत्तम कोटिक भारतीय भोजनक बेवस्‍था छल। मुदा दोसर दिन एकटा चाइनीज भोजनालयमे खेनाइक बेवस्‍था छल। शाकाहारी लोकक संख्‍या आधा-आधी छल ओइमे ६-७ टा तँ कट्टर शाकाहारी छला।

..एकटा हाँड़ीमे भात राखल रहइ। वैरा कहलकै जे आधा दिस तँ अण्‍डा सहित भात अछि आ आधा बिना अण्‍डाबला।

ई बात सुनि कऽ हम आ हमर एकटा दच्‍छिन भारतीय मित्र कड़ा विरोध कएल, आखिर ऐ बातक कोन गारंटी अछि जे एक्के हाँड़ीमे राखल दू तरहक भात उलैट नहि गेल हएत आ छूतिक तँ बाते छोड़ू।

हम सभ ४-५ गोटे भोजनपर सँ उठि गेलौं। तैपर आयोजनक लोकनिक आग्रह भेल जे हम सभ कमसँ कम जूसे पीब ली। मुदा बादमे ओकर भूगतान लऽ कऽ बिबाद भऽ गेल जे मुश्‍किलसँ समटल।

असलमे शाकाहारी लोकनिकेँ सभटा कष्‍ट बुझा सिवाय भारतीय होटल सभमे। दोसर ठाम तँ शाकारीक सही माने घास-फूस बुझल जाइक। जँ अहाँ छाँति सकब तँ अहाँ जानी। जय हो, शाकाहारी बाबा...।

भोजनक मामलामे सभसँ नीक बेवस्‍था सलोविनयामे छल। ओइठाम भोरक जलखै एवम्‍ रात्रिक भोजन गुजराती होटलसँ व्‍यवस्‍थित छल तँए अति रूचिकर छल। ओत्तौ दिनुका भोजनक हेतु चाइनीज भोजनालयक बेवस्‍था छल जेतए हमरा सन शाकाहारी प्राय: भूखले रहि जाइत छेलौं। ऐ आशामे जे रातिमे सभ सधा लेबइ। बाहर खाएब किंवा पानियोँ पीब बड़ महग रहइ। एकटा कौफीक हेतु तीन यूरोडालर यानी भारतक लगभग २७० रूपैआ होइत छल जे बड़ महग बुझाइत छल।

जखन-कखनो कोनो बैसक वा सरकारी कार्यक्रम होइत छल तँ पानि, चाह, कौफी, बिस्‍कुटक बेवस्‍था तँ रहिते छल। नगर भ्रमणमे सेहो आयोजक द्वारा सीमित मात्रामे पानिक बन्‍द बोतल देल जाइक। ओइसँ बेसी पीब तँ कीनए पड़त। दाम-पुछू नहि। टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।

१२ अगस्‍त २००९क दुपहरियाक भोजनक बाद आइ.ए.ई.ए. (International Atomic Energy Agency) क निदेशक द्वारा भ्रमण छल। ओ भारतीय छला। ओइठाम नौकरीसँ पहिने भारतीय प्रशासकीय सेवाक अधिकारी रहैथ, आ तँए भारतीय परिस्‍थितिसँ पूर्ण अवगत रहैथ। ओ तरह-तरहसँ नाभिकीय ऊर्जाक रचनात्‍मक उपयोगक विषयपर अपन विचार रखैत ऐ बातपर जोड़ दैत रहैथ जे दुनियाँमे जइ प्रकारसँ ऊर्जाक प्रयोजन बढ़ि रहल अछि, तइमे नाभिकीय ऊर्जाक रचनात्‍मक प्रयोग अनिवार्य भऽ गेल अछि।

तेतबे नहि, केतेको प्रकारक चिकित्‍सीय जाँच एवम्‍ उपचारमे सेहो एकर उपयोगिता महत्‍वपूर्ण अछि।

भाषणक बाद प्रश्‍न पुछबाक परिपाटी छल जइसँ बढ़ियाँ बात ई छल जे यू.एन.ओ.क संस्‍थामे रहितेा ओ भारतीय हितक प्रति बहुत संवेदनशील रहैथ।

आइ.ए.ई.ए.क मूल उद्देश्‍य शान्‍ति हेतु आराविक शक्‍तिक प्रयोग थिक। एकर स्‍थापना संयुक्‍त राष्‍ट्र संघक स्‍वायत्‍व संस्‍थाक रूपमे सन्‍ १९५७ ई.मे भेल। वियानाक दर्शनीय स्‍थान सभमे महत्‍वपूर्ण अछि, हसवर्ग साम्राज्‍यक राज महल...।

१२७९ ई.सँ लगातार कोनो-ने-कोनो राजाक शासन केन्‍द्र रहल ई महल संप्रति आस्‍ट्रीयाक राष्‍ट्रपतिक सरकारी आवास अछि। ऐ महलमे नाना प्रकारक म्‍यूजियम केर अलावा आवासीय अपार्टमेन्‍ट सभ अछि। राजमहलक अन्‍दर सार्वजनिक पूजाक स्‍थान अछि जैठाम आम जनता आबि जा सकैत अछि। रबि दिन-के ओइठाम संगीत कार्यक्रम सेहो आयोजित कएल जाइत अछि। राजमहलक अन्‍दर सीसी म्‍यूजियम अछि जे ९ बजेसँ सायं ५.३० बजे तक आम जनता हेतु खुलल रहैत अछि। सीसी म्‍यूजियमक अन्‍दर ऑडियो टूरसँ बहुत रास जानकारी भेटैत अछि। महलक अन्‍दर पुरना खजाना एवम्‍ ओइमे राखल राजमुकुट ओ राजकीय वस्‍वा सभ दर्शनीय थिक।

१३ अगस्‍त २००९ क आठ बजे हम सभ वियानासँ म्‍युनिख (जर्मनी) हेतु बस द्वारा प्रस्‍थान केलौं। लगभग पाँच म्‍युनिख स्‍थित भारतीय कांसुलेट जेनरलक कार्यालय पहुँचलौं। ओइपर फहराइ तिरंगा झण्‍डा फटकियेसँ देखा रहल छल। आपसी परिचयक बाद कांसुलेट जेनरल महोदय भारत-जर्मनीक आपसी सम्‍बन्‍ध एवम्‍ वर्तमान आर्थिक परिवेशमे तेकर महत्‍व एवम्‍ अनतर्राष्‍ट्रीय महत्‍वपर सारगर्भित भाषण देला।

हुनकर कहब रहैन जे जर्मनी संगे भारतक पुरान सम्‍बन्‍ध रहल अछि। जर्मनीमे संस्‍कृत अध्‍ययन एवम्‍ अनुसन्‍धानक अति प्राचीन इतिहास रहल अछि। दुनू देशकेँ जनतांत्रिक शासन पद्धतिक अलावा सांस्‍कृतिक एवम्‍ नैतिक मूल्‍यमे अनुरुपता अछि। संगे ईहो कहल रहैन जे भारतीय द्वारा जर्मनीमे कएल गेल निवेशसँ तुलनात्‍मक दृष्‍टिये अधिकर तर जर्मनकेँ नौकरी भेटल अछि वनस्‍पति भारतमे जर्मन निवेश द्वारा कमतर भारतीयकेँ जीविका भेटल अछि। ओ अतिशय आग्रही एवं सरल सोभावक लोक छला।

कार्यक्रमक बाद चाह-पान चलल आहमरा लोकनि होटलमे रात्रि विश्रामक हेतु चलि गेलौं।

१३-१४ अगस्‍तक रात्रिमे हम सभ म्‍युनिखमे रहलौं। होटल आलोशान छल। लानगृहमे छोट-सँ-पैघ नापक तरह-तरहकेँ तोलिया राखल छल। कोठरीमे मिनीवार छल। पीबैबला घरेमे बैसल पीब सकैत छल, मुदा सबहक पाइ जायकाल चुकता करैक पड़ैत। भोरक जलखैक गुल्‍क नहि देबक रहइ। जलखैक जगह विशाल काय छल आ ओइमे जलखैक सामानक भरमार छल। जे खाउ, जेतेक खाउ। फल खाउ, फलक रस पीबू, अण्‍डा खाउ। ब्रेड सबहक तँ तेतेक किसिम रहै जेकर वर्णन कठिन अछि।

म्‍युनिखक होटल सबहक साज-सज्‍जा वियानासँ बेहतर रहइ। चाहक विन्‍यास सभमे भारतीय दार्जलींगक चाहक पुड़िया सभ सेहो रहइ। लोक सभ सुन्‍दर नमगर ओ स्‍मार्ट छल। बड़का-बड़का मौल सभमे वस्‍तुक भरमार छल। जे चाही लिअ, मुदा दाम भारतसँ बेसिये रहइ।

इलेक्‍ट्रॉनिक सामान सबहक भरमार रहइ, मुदा महग। तखन की लेल जाए? तरह-तरहक चॉकलेट सभ लेलक, सनेस हेतु।  

म्‍युनिखक वीयर हॉलमे हजारो आदमी एकठाम बैस कऽ दारू पीबैत अछि। हमर किछु सहयोगी सभ उत्‍सुकतावस ओकरा देखबाक हेतु रातिमे गेला मुदा लौटला पछाइत अफशोस करैत रहैथ जे बेकारे गेलौं। सम्‍पूर्ण वातारण दुर्गन्‍धसँ भरल छल। हम आ हमर रूमेट ओइ समयकेँ सुतमो उपयोग कऽ प्राय: बेहतर निर्णय लेने रही।

म्‍युनिखमे सालमे एकबेर वार्षिक वीयर उत्‍सव अष्‍ट्रवरलस्‍ट होइत अछि। प्राय: सितम्‍बरक मध्‍यसँ शुरू भऽ अक्‍टुवरक प्रथम सप्‍ताह तक चलैत अछि। ऐमे दुनियाँ भरिसँ ६ करोड़सँ अधिक लोक भाग लइ छैथ। वावेरियन संस्‍कृतिक ई एकटा महत्‍वपूर्ण अंग अछि।

ऐ उत्‍सवमे तरह-तरह केर खेल-धुप, नाना प्रकारक भोजनक अतिरिक्‍त मनोरंजनक अनेकानेक विकल्‍प सुलभ रहैत अछि।

१४ अगस्‍त २००९ ई.क प्रात:काल ९.३० बजेसँ जर्मनीक चैम्‍बर ऑफ कामर्स एण्‍ड इन्‍डस्‍ट्री वयारियाक सभा गृहमे संस्‍थानक अध्‍यक्ष भाषण छल।

उपरोक्‍त संस्‍थाकेँ जर्मनीक ३.३० कम्‍पनी सदस्‍य छल। पेरिसक सी.सी.आई.क आद ई अपना तरहक संस्‍थानमे दोसर स्‍थानपर छल। जर्मनीक एकीकरण एवं तेकर प्रभावक विषयमे ऐ बैसारमे विस्‍तारसँ चर्चा भेल।

पच्‍छिमी जर्मनी अपेक्षाकृत अधिक समृद्ध अछि। पू. जर्मनीक आर्थिक स्‍थिति तखनो खास्‍ता-हाल छल। तँए एकीकरणक बाद पच्‍छिमी जर्मनी दिसुका लोक सभ एकीकरणसँ अप्रसन्नता व्‍यक्‍त करैथ।

जर्मनीकेँ म्‍युनिखमे घुमैत हमरा लोकनि ओलम्‍पिक खेलक स्‍थान देखलौं। म्‍युनिखक टेक्‍नीकल म्‍युजियम देखलौं। ओइमे विद्युत उत्‍पादनक व्‍यवहारिक वर्णन छल। अलग-अलग तलपर नाना प्रकारक वस्‍तु सभ प्रदर्शनीक हेतु राखल छल। वायुयान, रेल, जल-जहाज सहित अनेकानेक वस्‍तुक जर्मनीमे अविष्‍कार एवं प्रयोगक जानकारी लैत, देखैत चकविदरो लागि जाइत छल। निश्चय ओ सभ केतेको क्षेत्रमे हमरा सभसँ बहुत आगू छला। भऽ सकैए जे लोक यूरोपक प्रति अनेकानेक धारणासँ पूर्वाग्रहित हो, परन्‍तु हमरा केतौ रास्‍ता, होटल, चौबटियामे कोनो अभद्र नहि देखाएल। ओइ तुलनामे तँ दिल्‍ली किंवा आसपासक परिस्‍थिति अतिशय चिंताजनक अछि।

ओइठामक लोक सभ कार्यक प्रति निष्‍ठावान एवं परिश्रमी छैथ। तेतबे नहि, व्‍यर्थक बिबादसँ सेहो कोनो मतलब नहि। ओतेक दिनमे मात्र एक दिन वियानामे पुलिसक जत्‍था देखबामे आएल जे कोनो प्रर्दशनकेँ नियंत्रित कए रहल छल। अपना सभ ओइठाम जकाँ यत्र-तत्र सर्वत्र पुलिसिया हुजुम किंवा सुरक्षाक तामझाम केतौ नहि देखबामे आएल।

आस्‍ट्रीयाक प्रधानमंत्रीक घर तक अपरिचित लोक सभ बेरोक-टोकक चल जाइत छल। मंत्री सभ मेट्रोरेलसँ कार्यालय अबैत-जाइत छला।

भोरे-भोर केतेको कार्यालयमे लोक भरल आ कार्यरत भऽ जाइत छला। साइकिल चला कऽ व्‍यायाम करब आम बात छल। साइकिलक हेतु सभठाम अलग रस्‍ता छल। सभसँ बेसी जे आकर्षक बात छल से ई जे लोक सभमे व्‍यर्थक अहंकार नहि छल। सरल एवं सहज रूपेँ लोक बेवहार करैत छल जेकर अनमान देखिए कऽ भऽ सकैत अछि। ओइ सभ शहरमे जनसंख्‍या कम अछि। तँए ओकरा व्‍यवस्‍थित करब किंवा ओकरा लेल बेवस्‍था करब अपेक्षाकृत असान अछि। मुख्‍य शहरकेँ जँ छोड़ि दी तँ बीचक रस्‍ता सभमे मुश्‍किलसँ लोक देखाइत। हँ! सप्‍ताहांतक दृष्‍टि अलग रहैत छल।

शुकक रातिमे वास्‍तवमे माछी जकाँ लोक मन भनाइत रहै छल। शनिक भोरे लगैत जेना पूरा अवादी शहर छोड़ि कऽ केतौ भागि रहल अछि। कियो कारसँ, कियो मिनी बससँ, कियो कारमे ट्राली लटकौने लोकक हुजुम देखाइत छल। सप्‍ताहांत बिताएब हेतु कोनो झील, कोनो रमणीय स्‍थान वा कोनो दोसर शहर जा रहल छल। झीलक आसपास लोक पटोटैन देने रौद सोंखैत रहै छल। समुद्रमे अति तीव्र गतिसँ स्‍वचालित नाह सभसँ लोक सभ जल क्रीड़ा करैत देखाइत। ओकर वेग आ ओइमे सभ लोकक दुस्‍साहस प्रशंसनीय छल। गोराय लोक बड़ मोटाएल देखाइत छल, से देख दुख ओ आश्चर्य होइत छल, जे एतेक सम्‍पन्न परिवेश रहितो ई सभ शारीरिक रूपसँ अक्षम जकाँ रहबाक कारण केतेको सुखसँ वंचित हएत।

यएह सभ देखैत-सुनैत हमरा सबहक समय निकैल जाइत छल।

१५ अगस्‍तक स्‍वतंत्रता दिवस समारोहक अवसरपर हमरा लोकनि पुन: भारतीय कन्‍सुलेट जेनरलक ओइठाम पहुँचलौं, जैठाम झण्‍डोत्तोलन भेल आ भारतक राष्‍ट्रपति महोदयक संदेश पढ़ि कऽ सुनौल गेल। तद्दुपरान्‍त मिष्‍ठान भोजन भेल एवं आपसी गप सभ सेहो भेल। कार्यक्रमक समापनक बाद नगर भ्रमण करैत हम सभ सल्जवर्गक हेतु प्रस्‍थान केलौं।

सल्‍जवर्ग आस्‍ट्रीयाक चारिम सभसँ पैघ शहर अछि। द्वितीय विश्वयुद्धक दौरान ७६०० घर घ्‍वस्‍त भऽ गेल ओ ५५० लोक मारल गेला। शहरक अधिकांश घर घ्‍वस्‍त भऽ गेल। द्वितीय विश्वयुद्धक बाद सल्‍जवर्ग सल्‍जवर्गराज्‍यक राजधानी बनल। विश्व प्रसिद्ध गायक मोजार्टक जन्‍म अही शहरमे भेल छल। २७ जनवरी २००६क मोजार्टक २५० मा जन्‍म समारोह धूम-धामसँ मनौल गेल छल। हम सभ मोजार्टक घर देखए गेलौं। ओइ घरकेँ अद्भुत रूपसँ सुरक्षित राखल गेल अछि। घरमे माजार्ट द्वारा प्रयुक्त किछु वाद्य यंत्र सभ लोकक दर्शनार्थ राखल अछि।

मोजार्टक देहान्‍त मात्र ३५ वर्षक आयुमे भऽ गेल परन्‍तु एतबे कम समयमे ६०० सँ अधिक संगीतक रचना केला आ पाश्चात्‍य कलात्‍मक संगीतपर अमिट छाप छोड़ि गेला।

१५ अगस्‍त २००९ क ८ बजे रातिमे थाकल, झमारल हमरा लोकनि लुवियाना आपस एलौं आ संस्‍थानक छात्रावासमे रात्रिक भोजन करि विश्राम केलौं।

१६ अगस्‍त (२०१६)केँ भोरे सात बजे हम सभ बससँ बेनिस देखबाक हेतु विदा भेलौं। इटलीक  पूर्वोत्तर भागमे ११७ छोट-छोट टापूसँ आच्‍छादित बेनिस शहर पूल द्वारा एक-दोसरसँ जोड़ल अछि। वेनिसक अवादी लगभग ५५ हजार छल।

लुवियानासँ वेनिस जाइत काल १८ किलोमीटरक आवा-जाहीमे लगभग ३००० गुफा सभसँ जुजरए पड़ल। बीचमे बर्ड स्‍थान अछि जेतए द्वितीय विश्वयुद्धक दौरान ११५ सैनिककेँ गाड़ि देल गेल छल। 

असलमे द्वितीय विश्वयुद्ध ओइठामक लोकक मोनमे गड़ि गेल अछि। चाहे, अनचाहे लोक ओइ युद्धसँ जुड़ल घटनाक गप्‍प करए लगैत छल।

दच्‍छिन दिस आल्‍प्‍स पहाड़ी क्षेत्र देखाइत छल। शहरमे प्रवेश हेतु बसकेँ ४०० यूरोडालर आ पार्किंग हेतु ४० यूरोडालर देबए पड़ल। रस्‍तामे मकई, जौ, अंगुरक जबरदस्‍त खेती देखलौं। जेतए तक दृष्‍टि जाइत, हरियर कंचन देखाइत।

वेनिस शहर तँ जेना पानिमे डुबि रहल अछि। एक घरसँ दोसर घर जाइले पूलक सहारा लेमए पड़ैत। जेतए पूल नहि अछि ओतए नाहसँ लोक एकठामसँ दोसरठाम जाइत अछि। जेना अपना सबहक ओतए साइकिल रहैत अछि, तहिना ओइठाम लोक सभ नाह रखैत अछि।

वेनिए-क कलात्‍मकता एवं शिल्‍पकारी अद्भुत अछि। आश्‍चर्य होइत अछि जे ई शहर पानिमे डुबि किएक ने जाइ छइ। मध्‍यकालीन समयमे वैनिस आर्थिक एवं सामुहिक प्रतिनिधिक केन्‍द्र छल। रेशम, मसाला एवं अनाजक प्रचुर मात्रामे व्‍यापार होइत छल। ९ वीं सँ १७वीं शताब्‍दी धरि वेनिस प्रथम अन्‍तर्राष्‍ट्रीय आर्थिक केन्‍द्र छल जइ कारणसँ ई शहर सदिखन आर्थिक रूपसँ समृद्ध रहल।

तेरहम शबदीमे ऐठाम ३७ हजार नाविक ३००० जहाजकेँ चलबैत छला। वेनिस अपन स्‍वतंत्र अवधिक दौरान गणराज्‍य बनल रहल। हलाँकि बेनिसक लोक आमतौरपर रूढिवादी रोमन कैथेलिक रहए मुदा धार्मिक कट्टरता एवं पाखण्‍डक होतए चलन नहि रहए।

१३४८ ई.मे प्‍लेग फैल गेल जइसँ भयंकर मृत्‍यु भेल। १५७५ सँ १५८४ क बीच फेर ई विमारी फैलल जइमे पचास हजार आदमी मारल गेल। १६३० ई.मे फेर प्‍लेग पसरल जइमे बेनिसक एक लाख पचास हजार आदमी मारल गेल। नेपोलियन बोनापार्ट संगे युद्धक बाद वेनिसक स्‍थितिमे कएक बेर उठा-पटक होइत रहल।

वेनिसकेँ महल सभक नीव लकड़ीक बनल अछि। ई लकड़ी सभ सैकड़ो वर्षसँ पानिमे डुमल रहलाक बादो खरापनहि भेल अछि।

वेनिसमे दुपहरक भोजन एकटा भारतीय भोजनालयमे छल। ओहूठाम पहुँचक हेतु हमरा सभकेँ नाहक मदैत लेबए पड़ल रहए। भोजनक पछाइत हमरा लोकनि जहाजमे बैस कऽ मुरानो, वुरानो एवं टार्सोका द्वीप घुमैले निकैल गेलौं। मुरानोमे शीशा बनेबाक पुरान परम्‍परा अछि।

वुरानोमे रंग-विरंगीघर एवं हथकरघाक सामानक प्रचूरता बुझाएल। टार्सोका द्वीपपर ऐतिहासिक एवं कलात्‍क हमत्‍वक केतेको उदाहरणक संग अत्‍याधुनिकताक प्रभाव देखबामे आएल। जहाजपर बैसल अनगिनित संख्‍यामे लोककेँ जल-क्रीड़ा करैत देख, ओइठामक लोक सभकेँ जीबाक अन्‍दाज अद्भुत छल।

ऐ प्रकार घुमि-फिर हम सभ एक बेर फेर ९ बजे रातिमे कवियाना स्‍थित संस्‍थानक छात्रा-वासमे रात्रि विश्रामक हेतु पहुँचलौं।

एवम्‍ प्रकारेण वियाना, झुविख एवम्‍ वेनिस सहित आसपासक प्रमुख स्‍थान देख-सुनि लेलाक बाद १७ अगस्‍तसँ २१ अगस्‍त २००९ तक संस्‍थानमे सार्वजनिक महत्‍वक अनेकानेक विषय सभपर भाषण भेल। जइमे सम्‍बन्‍धित विषयक शीर्षस्‍थ विद्वान सभ भाग लेला। संगहि लुवियानाक नगरपालिका, ब्‍लेड झील एवम्‍ कुन्‍जक भ्रमण सेहो भेल। स्‍लोवेनियाँ स्‍थित विश्व वेपार केन्‍द्र सेहो देखबाक हेतु हमरा लोकनि गेलौं।

२१ अगस्‍त २००९ क प्रशिक्षण कार्यक्रमक समाप्‍तिक संग सभ गोटेकेँ प्रमाण पत्र देल गेल। रातिमे संस्‍थानक डायरेक्‍टर जेनरल द्वारा विदाइ-भोज देल गेल। ओइमे संगीत (ऑकेस्‍ट्रा)क कार्यक्रम सेहो छल। किछु गोटे अपनो गीत गौलैन। अद्भुत महौल छल। केतेक हृदयसँ हमरा लोकनिक विदाइ भेल, तेकर वर्णन करब कठिन।

२२ अगस्‍त २००९क शनि दिनक गप छी। संस्‍थानक क्रिया-कलाप संपन्न भऽ गेल छल। आपसी यात्रा २३ अगस्‍त २००९क छल। तँए ओइ दिनक उपयोग घुमबा किखामे भेल। हम सभ गोटे विश्‍व प्रसिद्ध पाल्‍टोजना गुफा घुमए गेलौं। जमीनक अन्‍दर बनल ई गुफाकेँ पैछला २०० सालक दौरान ३६ करोड़ लोक देख चूकल अछि। ऐ गुफाक यात्रामे डेढ़ घन्‍टा समय लगैत अछि। सुरंगमे बनल रस्‍ता, दीर्घा एवं हॉल सबहक श्रृखला देखैत बनैत छल। गुफाक अन्‍दर घुमबाक हेतु छोट सन रेलपर चढ़लौं जे छुक-छुक करैत हमरा सभकेँ गुफाक आरामसँ भ्रमण करा देलक। उपरोक्‍त भ्रमणक मार्गदर्शन विश्वक अनेकानेक भाषामे उपलब्‍ध छल।

ओइ गुफाकेँ देखला, घुमलाक बाद जे मोनपर छाप पड़ल से अखनो अमिट अछि। कला एवम्‍ पुरषार्थक अद्भुत संगम अछि ओ गुफा..!

२२ अगस्‍त २००९क भोरे हम सभ कवियाना हवाइ अड्डापर रही। ओइठाम वायुयानमे संवार भऽ पेरिक हेतु विदा भेलौं। रस्‍तामे सभ यात्रीकेँ जलखै देल गेल। घन्‍टा भरिक ई लघु यात्रा देखैत-देखैतमे बीत गेल।

फेर हम सभ पेरिस हवाइ अड्डापर उतरलौं। वार-वार हिदायत देल गेल जे अपन समानक सावधानीसँ रक्षा कएल जाए कारण ओइठाम उचक्का सभ तुरंत समान गाएब कऽ दैत अछि।

हवाइ अड्डासँ बाहर निकैलते हमरा लोकनिक बस तैयार रहए। सभ अपन-अपन समान रखलक आ बस द्वारा नगर भ्रमणपर विदा भेल। संगमे एकटा मार्गदर्शक सेहो छल जे जगह-जगह अबैबला प्रमुख-प्रमुख वस्‍तु आ स्‍थान सबहक परिचय करबैत रहल।

फ्रांसक राजधानी पेरिसक इफेल टावर विश्‍व प्रसिद्ध अछि। हमरा लोकनि ओइ टावरपर चढ़लौं आ बेरा-बेरी पेरिस शहरक विभिन्न भागक फोटो टावरपर सँ खिचलौं। टावरक ऊपर तक चढ़बाक हेतु लिप्‍टक बेवस्‍था छै किंवा पएरो सिढ़ीक माध्‍यमसँ ओइपर चढ़ि सकै छी। इलेल टावरक नाओं ओकर निर्माता अभियंताक नाओंपर पड़ल अछि।

११८७-८९ ई.क बीच निर्मित एक इलेल टावरक ऊँचाइ ३२४ मीटर अछि। ऐ टावरपर चढ़ि, घुमि हमरा लोकनिकेँ पेरिस शहरक विहंगम दृष्‍टि भेटल। अद्भुत शहर अछि, जइमे लगभग एक्के रंग ऊँचाइक महल सबहक भरमार अछि। इलेल टावरक निच्‍चाँमे कएटा भारतीय सभ छोट-मोट समान सभ बेचैत भेटला।

परिसक सीन नदीपर ३७ टा पूल पेरिसमे अन्‍दर बनल अछि। ई नदी पेरिसक मुख्‍य वेपारीक जलमार्ग अछि। पेरिस शहरमे प्रयुक्त पानिक आधा भाग अही नदीसँ अबैत अछि। गर्मीक समयमे एतए यात्रीगण विश्राम कए अद्भुत आनन्‍दक अनुभव करै छैथ।

हमर एकटा संगी साल भरि पेरिसमे रहल रहैथ, तैयो केतेको चीज नहि देख पाएल रहैथ। हम सभ तँ मुश्‍किलसँ बारह घन्‍टामे पेरिसकेँ देखए चलल रही। जाहिर छै, केतेक देख सकितौं। तथापि मोटा-मोटी प्रमुख स्‍थान सभ लग बस रोकैत छल आ हमरा लोकनिक गाइड यथा साध्‍य ओइ विषय वस्‍तुक इतिहास एवम्‍ वर्तमानसँ परिचित करबैत छला।

नेपोलियनक घर सेहो हम सभ देखलौं जे आइ-काल्‍हि स्‍मारक भऽ गेल अछि। दिनमे भोजनक हेतु एकटा पाकिस्‍तानी भोजनालयमे बेवस्‍था छल, मोन छह-पाँच करैत रहए जे खाइ आकि नहि खाइ, मुदा भूख बहुत लागि गेल छल। अस्‍तु भोजनमे शामिल भेलौं। पूर्णत: भारतीय शाकाहारी एवम्‍ अति स्‍वादिष्‍ट भोजन कऽ मोनमे जे संतुष्‍टि भेल तेकर वर्णन नहि।

भोजनोपरान्‍त हम सभ पुन: घुमए निकैल गेलौं। पेरिसक मेट्रो देखलौं। दुनियाँक सवोलम मेट्रोमे सँ एक पेरिस मेट्रो रेल मानल जाइत अछि। ३०० कि.मी. लम्‍बा ट्रैकपर करीब-करीब ३०० स्‍टेशनपर ई ठाढ़ होइत अछि।

मेट्रोक अलावा बस, टैक्‍सी एवं नाह द्वारा शहरक यातायातक उत्तम प्रबन्‍ध होइत अछि। शहरमे किरायापर साइकिल देबाक सेहो बेवस्‍था अछि, जइले मामूली शुल्‍क लेल जाइत अछि।

सायंकाल हमरा लोकनि आपस पेरिस हवाइ अड्डापर पहुँच गेल रही। ओइठाम सूर्यास्‍त आठ बजे तक नहि भेल रहए। तखने हम हवाइ जहाजपर अपन देशक हेतु उड़ि गेलौं। अकासमे लटकल सूर्य भगवानकेँ बड़ीकाल तक देखैत रहलौं...।

 

 

 

हिन्‍दू महिलाकेँ सम्‍पैतमे अधिकार  

भारतीय समाज मूलत: पुरुष प्रधान रहल अछि। हजारो-हजार बरखसँ पुरुषकेँ चल एवम्‍ अचल सम्‍पैतपर वर्चस्‍व छल। समयक संगे ऐ स्‍थितिमे परिवर्तन भऽ रहल अछि, महिला सम्पन्न भऽ रहल छैथ।

वैदिक समयमे पुरुष एवम्‍ महिलाकेँ सम्‍पैतपर बराबर अधिकारक चर्च अछि। मुदा मनुस्‍मृतिमे कहल अछि जे पत्नी, चाकर ओ अवयस्‍क युवाकेँ सम्‍पैत नहि देबाक चाही। सम्‍पैतपर अधिकारक मामलामे पत्नी, बेटी वा विधवा कियो पूर्ण अधिकार सम्‍पन्न नहि छल। जँ स्‍त्रीगणकेँ सम्‍पैतपर अधिकार सीमित छल आ जेतए कनी-मनी छेलैहो, सेहो ओकर जीवन-यापन हेतु जीवनकाल तक रहैत छल, तेकर बाद ओ मूल श्रोतकेँ आपस भऽ जाइत छल।

ऐ सबहक मूल उद्देश्‍य समाजमे स्‍त्रीगणपर स्‍वामित्‍व राखब छल। सम्‍पैतमे अधिकार भेलापर स्‍त्रीगणकेँ स्‍वतंत्र आस्‍तित्‍व बोध हएत जे तत्‍कालीन समाजकेँ स्‍वीकार नहि छल।

हिन्‍दू संयुक्त परिवारमे एक पूर्वजसँ जन्‍मल लोक सभ होइत छैथ। ऐमे सबहक पत्नी, अविवाहित बेटी शामिल होइ छैथ। मुदा हिन्‍दू संदायदाता (Coparcenaty) ओइसँ बहुत सीमित होइत अछि। ओइमे बेटा, पौत्र, ओ प्रपौत्र शामिल होइत अछि। २००५ इस्‍वीक संशोधनक बाद बेटी सेहो ऐमे शामिल अछि। स्‍त्री, माय वा विधवा अखनो ऐमे शामिल नहि अछि। बेकती विशेषक हिस्‍सा कोनो सदस्‍यक मृत्‍युसँ बेसी किंवा नव सन्‍तानक जन्‍मसँ कम भऽ सकैत अछि।

संयुक्‍त परिवारक सम्‍पैतक विभाजनक बादे कोनो हिस्‍सेदार अपन हिस्‍सक सम्‍पूर्ण मालिक होइत अछि। संयुक्‍त परिवारक सम्‍पैत हिन्‍दू कानूनक उपज थिक एवम्‍ एकर अधिकारीकेँ संदायदाता कहल जाइत अछि।

सम्‍पैतक उत्तराधिकार कानूनमे बारम्‍बार प्रयुक्‍त कानूनी शब्‍दक सही समझ भेलासँ ऐ कानूनकेँ बुझबामे सुविधा हएत। अस्‍तु संक्षेपमे किछु शब्‍दक व्‍याख्‍या कऽ रहल छी।

१.      उत्ताराधिकारी (Hier) निर्वसीयत सम्‍पैतमे हकदार पुरुष वा स्‍त्रीकेँ उत्तराधिकारी कहल जाइत अछि।

२.     निर्वसीयत (Intestafe) स्‍वअर्जित सम्‍पैत किंवा अन्‍य कोनो प्रकारसँ प्राप्‍त सम्पैत जैपर ओइ बेकतीक पूर्ण अधिकार हो, केँ ओइ बेकतीक मृत्‍युक बाद हस्‍तांतरणक दस्‍ताबेजी बेवस्‍था जेना दान (Gift), इच्‍छा पत्र (Will) नहि केने हो।

३.      संदायदाता सम्‍पैत (Coparcenary Property) पूर्वजसँ प्राप्‍त पैतृक सम्‍पैत जैपर अविभाजित हिन्‍दू परिवारक संदायदाताक हिस्‍सा हो।

४.     दस्‍ताबेजी हस्‍तांतरण (Testamentary Disposition) ऐमे हस्‍तांतरणकर्ताकेँ ओकर जीवन भरि सम्‍पैतपर अधिकार बनल रहैत अछि एवम्‍ ओकर मृत्‍युक बाद ओइ दस्‍ताबेजी बेवस्‍थाक अनुसार सम्‍पैतक हस्‍तांतरण होइत अछि, जेना दानमे देल गेल सम्‍पैत।

सन्‍ १९३७ सँ पूर्व स्‍त्रीगणक सम्‍पैतमे अधिकारक सम्‍बन्‍धमे कोनो स्‍पष्‍ट बेवस्‍था नहि छल। ऐ तरहक विवाद भेलापर स्‍थानीय परम्‍पराक अनुसार मामला तँइ होइत छल। सन्‍ १९३७ मे पहिल बेर हिन्‍दू महिलाक सम्‍पैतमे अधिकार कानूनन लागू भेल। ऐ कानून द्वारा विधवाकेँ ओकर पतिक सम्‍पैतमे सीमित अधिकार देल गेल। सन्‍ १९३८ क संशोधन द्वारा ओइ सीमित अधिकारकेँ आओर क्षीण करैत कृषि भूमिसँ विधवाक अधिकार समाप्‍त कए देल गेल। ऐ कानूनक अनुसार विधवा संयुक्‍त परिवारक सम्‍पैतमे अपन पतिक हिस्‍साक मालिक तँ भऽ जाएत मुदा ओकर मृत्‍युक बाद ई सम्‍पैत ओकर उत्तराधिकारीकेँ नहि हेतैक, अपितु अन्‍तिम पुरुष मालिकवा स्‍त्रीधनक मामलामे अन्‍तिम महिला मालिकक उत्ताधिकारीकेँ हस्‍तान्‍तरित भऽ जाएत।

सन्‍ १९३७क कानून द्वारा सीमित अधिकारक धारणामे हिन्‍दू उत्तराधिकार कानून १९५६ द्वारा समाप्‍त कए देल गेल। सम्‍पैतमे हिन्‍दू महिलाक अधिकारक क्षेत्रमे ई एकटा प्रगति गामी प्रयास छल। ऐ कानूनकेँ लागू भेलापर हिन्‍दू महिलाकेँ ओकर सम्‍पैतमे पूर्ण स्‍वामित्‍व प्राप्‍त भेल। उपरोक्‍त कानूनकेँ धारा १४ द्वारा महिलाक सम्‍पैतमे पूर्ण अधिकारक अयोग्‍यता समाप्‍त कए देल गेल एवम्‍ ओकर सीमित अधिकारकेँ पूर्णत: मालिकाना हकमे बदैल गेल गेल। कानूनमे उपरोक्‍त परिवर्तन भूतप्रभावी भेल। एवम्‍ प्रकारेण हिन्‍दू महिलाक सम्‍पैतमे अधिकारसँ सम्‍बन्‍धित विद्यमान समस्‍त, नियम, कानून ओ परंपराकेँ समाप्‍त कए ई सुनिश्‍चित कएल गेल जे कोनो प्रकारक परंपरा, वा बेवहारिक अवधारणाक कारण सम्‍पैतमे हुनकर अधिकारपर ग्रहण नहि लगौल जा सकत।

हिन्‍दू उत्तराधिकार कानून १५५६ मूलत: हिन्‍दूक निर्वसीयत सम्‍पैतमे उत्तराधिकार तय करबाक हेतु भारतीय संसद द्वारा पारित भेलाक बाद १७ जून १९५६ क राष्‍ट्रपतिक स्‍वीकृतिक बाद लागू भेल। निर्वसीयत सम्‍पैतक माने ओइ सम्‍पैतसँ अछि जेकर मालिक सम्‍पैतमे पूर्ण अधिकारक अछैत कोनो दस्‍ताबेजी हस्‍तान्‍तरण बिना केने स्‍वर्गवासी भऽ जाइत छैथ। एहेन सम्‍पैत उपरोक्‍त कानूनक सूचीमे वर्ग एफमे देल गेल उत्तराधिकारी (माने बेटा, बेटी, विधवा पत्नी, माय एवम्‍ ऐ वर्गमे उल्‍लिखित अन्‍य बेकती) मे बरोबरि-बरोबरि कऽ बाँटल जाएत। वर्गक एकक उत्तराधिकारीक अभावमे वर्ग दू, तेकरो अभावमे क्रमश: मृतकक पुरुष रक्त सम्‍बन्‍धी अन्‍यथा महिला रक्त सम्‍बन्‍धी (Cognate) केँ ओ सम्‍पैतक अधिकार भऽ जाइत अछि।

ऐ तरहेँ हिन्‍दू महिलाकेँ प्राप्‍त सम्‍पैतपर (उपरोक्‍त कानूनक धारा १४क अनुसार) पूर्ण अधिकार भऽ जाइत अछि। एवम्‍ प्रकारेण प्राप्‍त सम्‍पैत महिला द्वारा निर्वसियत रहि गेलापर उपरोक्‍त कानूनक धारा १५ एवम्‍ १६ द्वारा हस्‍तान्‍तरित होइत अछि। जइमे ओकर बेटा एवम्‍ बेटी एवम्‍ पतिकेँ बरोबरि-बरोबरि हक भेटैत अछि।

उपरोक्त कानूनक धारा १४ हिन्‍दू महिलाक सम्‍पैतमे सीमित अधिकारकेँ पूर्ण अधिकारमे परिवर्तित करैत अछि। पतिसँ प्राप्‍त सम्‍पैतकेँ बेचि सकैत अछि आ क्रेताकेँ ओइ सम्‍पैतमे पूर्ण स्‍वामित्‍व प्राप्‍त भऽ जाइत अछि। पहिने ओ सम्‍पैतकेँ मात्र परिवारिक आवश्‍यकता एवम्‍ पतिक धार्मिक अनुष्‍ठानक हेतु बेचि सकैत छल। धारा १४ मे सम्‍पैतक विस्‍तारसँ व्‍याख्‍या भेल अछि। ऐमे उत्तराधिकार, परिवारिक विभाजन उपहार किंवा कोनो प्रकारसँ प्राप्‍त चल एवम्‍ अचल सम्‍पैत शामिल अछि। बिना वसीयतक मृत्‍यु भेलापर ऐ कानून द्वारा बेटाक माय, अतिरिक्‍त विधवा, बेटीकेँ संयुक्‍त परिवारक सम्‍पैतमे अधिकार प्राप्‍त भेल।

यद्यपि १९५६क कानून द्वारा हिन्‍दू महिलाक सम्‍पैतक अधिकारमे निश्चित रूपसँ बढ़ोत्तरी भेल आ ऐ तरहेँ कहल जाए तँ ई एकटा क्रान्‍तिकारी प्रयास छल, मुदा बेटीक मामलामे ई कानून बहुत हितकारी नहि छल। किछु राज्‍य ऐ विषयमे अलग कानून बना कऽ बेटीक अधिकार देलक मुदा ई सर्वव्‍यापी तँ नहियेँ छल।

हिन्‍दू उत्तराधिकार कानून १९५६क पत्रमे संशोधन कएल गेल। उपरोक्‍त संशोधन बिल संसदमे २० दिसम्‍बर २००४ क मानल गेल छल, तँए ऐ तिथिसँ पूर्व भेल बँटवारापर ऐ संशोधनक प्रभाव नहि पड़त।

हिन्‍दू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून २००५क अनुसार बेटीकेँ पिताक सम्‍पैतमे बेटा जकाँ बरोबरिक हिस्‍सा हएत, माइक सम्‍पैतमे सेहो हिस्‍सा हएत। उपरोक्‍त संशोधनसँ निम्‍नलिखित बेवस्‍था भेल-

१.      बेटा जकाँ बेटी संयुक्‍त परिवारक सम्‍पैतक हिस्‍सेदारी हएत।

२.     ओकर अधिकार ओहिना हएत जेना बेटा भेने रहैत।

३.      बेटे जकाँ बेटियोकेँ ओइ सम्‍पैतसँ जुड़ल जिम्‍मेदारी हएत।

४.     बेटोक बरोबरि बेटीक हिस्‍सा तय हएत।

हिन्‍दू उत्तराधिकार कानूनमे २००५क संशोधनक बाद पैतृक। संयुक्‍त परिवारक सम्‍पैतक बँटवारा एवम्‍ ओइमे बेटी सबहक हिस्‍सेदारी लऽ कऽ यत्र-तत्र जबरदस्‍त विवाद प्रारम्‍भ भेल। कारण कानूनसँ अधिकार भेटलाक बाबजूद एकर समाजिक स्‍वीकृतिमे प्रश्‍नचिन्‍ह लागल रहल। नैहरसँ सम्‍बन्‍ध खराप नहि हो, तँए केतेको बेटी अपन अधिकारक बलिदान कए देलैन, मुदा एहनो बहुत रास मामिला उठल, जे बेटी सभ अपन अधिकारक बहाली हेतु न्‍यायालयक शरणमे चलि गेली।

न्‍यायालयमे मामिला जेबाक कएटा कारण छल। कियो कहलक जे सन २००५क कानूनी संशोधनक लाभ ९ सितम्‍बर २००५ क बाद जन्‍मल कन्‍याकेँ भेटतै। केकरो अनुसार ई कानून १९५६ सँ लागू हएत। आदि आदि।

देशक विभिन्न उच्‍च न्‍यायालय उपरोक्‍त विवादस्‍पद विषय सभपर अलग-अलग फैसला देलक। अन्‍ततोगत्‍वा ई मामला भारतक उच्‍चतम न्‍यायालयमे पहुँच गेल।

उच्‍चतम न्‍यायालयक न्‍यायमूर्ति ए.आर.दवे एवम्‍ न्‍यायमूर्ति ए.के. गोयलक संयुक्‍त पीठ १६ अक्‍टूबर २०१५क अपन फैसलामे उत्तराधिकार कानून उपरोक्‍त विवादक पटाक्षेप करैत कर्णटक उच्‍च न्‍यायालयक फैसलाकेँ पलैट देलक। कर्णाटक उच्‍च न्‍यायालय फैसला देने छल जँ पिताक देहान्‍त ९ सितम्‍बर २००५ सँ पहिने भऽ गेल तखनो बेटीकेँ ओकर सम्‍पैतमे बेटाक बरोबरिक हिस्‍सा भेटत।

मुदा उच्‍चतम न्‍यायालय एकरा पूर्णत: निरस्‍त कए देलक। प्रकाश एवम्‍ अन्‍य बनाम फुलवती एवम्‍ अन्‍यक मामलामे उच्‍चतम न्‍यायालय बेवस्‍था देलक जे  उत्तराधिकार कानूनमे २००५क संशोधन भूतप्रभावी नहि अछि। ओ कानूनमे उपरोक्‍त संशोधन लागू हएत वशर्ते ओइ दिन पिता ओ पुत्री दुनू जीबैत रहल हो।

१६ अक्‍टूबर २०१५ केँ उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा प्रकाश एवम्‍ अन्‍य बनाम फुलवती एवम्‍ अन्‍यक मामलाकेँ मूल निर्णय बिन्‍दु छल जे २००५ क सम्‍पैतमे अधिकारक कानूनक संशोधन भूतप्रभावी अछि की नहि? वंशकेँ विभिन्न उच्‍च न्‍यायालय ऐ विषय परस्‍पर विरोधी एवम्‍ भिन्न-भिन्‍न मत व्‍यक्‍त केने छल। ऐ मामलामे फुलवती उत्तराधिकारमे ओकर पिता द्वारा प्राप्‍त संम्‍पैतमे १/७ म हिस्‍साक मांग केने छल। १८ फरवरी १९८८क अन्‍दर पिताक देहान्‍त भऽ गेल।

न्‍यायालयमे विचाराधीन मामलामे संशोधन करैत फुलवती संशोधित कानूनक अनुसार पिताक सम्‍पैतमे हिस्‍साक मांग केलक। कर्णाटक उच्‍च न्‍यायालय निर्णय देलक जे चुकी मामला न्‍यायालयमे विचाराधीन छल, अस्‍तु ऐ कानूनकेँ आगूसँ लागू हेबाक बाबजूद, एकर लाभ फूलवतीकेँ भेटत। उच्‍च न्‍यायालयक ऐ फैसलाक चुनौती उच्‍चम न्‍यायालयमे कएल गेल-

१.      ऐमे फुलवतीकेँ हिस्‍सा मात्र पिताक स्‍वअर्जित सम्‍पैतमे हएत।

२.     फुलवतीक पिताक देहान्‍त २००५ क संशोधित कानून लागू हेबासँ पूर्व १८ फरवरी १९८८ क भऽ गेल, तँए फुलवतीकेँ ऐ कानूनकेँ लागू हेबाक समय पैतृक सम्‍पैत वारिस नहि मानल जा सकैत अछि।

३.      संशोधित कानून ऐ मामलामे लागू नहि हएत। संशोधित कानून लागू हेबासँ पूर्व हिन्‍दू उत्तराधिकार कानूनक धारा ६ केर मुताबिक बेटीकेँ एहेन संम्‍पैतमे अधिकार नहि हएत।

उच्‍चतम्‍ न्‍यायालय अपन फैसलामे स्‍पष्‍ट केलक जे कानूनकेँ प्रथम दृष्‍ट्या पढ़लासँ स्‍पष्‍ट होइत अछि जे ई संशोधन कानून लागू हेबाक तिथिसँ लागू हएत, कारण ऐमे केतौ एहेन संकेत नहि अछि जइसँ एकरा भूतप्रभावी कएल जाए। अतएव संदायदाता सम्‍पैतमे बेटीक हिस्‍सा तखने भेटत जखन कि कानून लागू हेबाक दिन यानी ९ सितम्‍बर २००५ क पिता ओ पुत्री दुनू जीवित हो।

अन्‍य प्रमुख न्‍यायिक फैसलामे उच्‍चतम न्‍यायायल द्वारा सन्‍ २०१२ मे तय गंदूरी कोटेश्‍वरम्‍मा वनाम च्रकी यनादिमे कहल गेल जे-

नव धारा ६ संयुक्‍त परिवारक सम्‍पैतमे ९ सितम्‍बर २००५ वा ओकर बाद पुरुष वा महिलाक अधिकारमे समानता अनलक अछि। ऐ कानून द्वारा बेटीकेँ पक्षमे ठोस केलक एकर बाद बेटी स्‍वयंमे बेटा जकाँ पैतृक सम्‍पैतमे हिस्‍सेदार बनल।

एवम्‍ प्रकारेण ९ सितम्‍बर २००५ सँ बेटी पैतिक सम्‍पैतमे बेटा जकाँ उत्तराधिकारी भेल एवम्‍ ओकरा बराबर हक सेहो बेटल।

उपरोक्‍त मामला नीचला आदालतमे विचारनीय रहिते २००५क संशोधन भेल। नीचला अदालत संशोधित कानूनकेँ लागू करैत बेटीक बेटाक बरबैर हिस्‍सा तय केलक जेकरा उच्‍च न्‍यायालय पलैट देलक। अन्‍ततोगत्‍वा मामला उच्‍चतम न्‍यायालय पहुँचल, जेतए बेटीक जीत भेल एवं बेटीकेँ बेटाक बरोवरि हिस्‍सा भेटल।

सन्‍ २००५क हिन्‍दू उत्तराधिकार कानूनमे संशोधनक बाद परिवारक बेटीकेँ पैतृक सम्‍पैतमे हिस्‍सेदारी तँ भेट गेल मुदा ओइ संशोधनक आधारपर प्राप्‍त अधिकारकेँ केतेको प्रकारसँ पास कए पुत्र लोकनि द्वारा चुनौती देल गेल।

एकटा एहने मामलामे सुजाता शर्मा वनाम मनु गुप्‍ता एवम्‍ अन्‍य,मे दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय दिल्‍ली द्वारा बेवस्‍था देल गेल जे संयुक्‍त परिवारमे जँ बेटी सभसँ पैघ जीवित हिस्‍सेदार अछि तँ ओ कर्ता भऽ सकैत अछि। माननीय न्‍यायालयक कहब जे उपरोक्‍त संशोधित कानून बेटीकेँ ओ सभ कानूनी हक दऽ दैत अछि जे बेटाकेँ पहिनेसँ प्राप्‍त अछि। मा. उच्‍च्‍तम न्‍यायालय त्रिभुवन दस हरि भाई तामबोली वनाम गुजरात राजस्‍व अधिकरण एवम्‍ अन्‍यक मामलामे निर्णय दऽ चूकल अछि जे संयुक्‍त परिवारक वरिष्‍ठतम सदस्‍य कर्ता हएत। अस्‍तु बेटकेँ कर्ता हेबाक क्रममे कोनो भांगठ नहि अछि।

२००५ इस्‍वीक उत्तराधिकार कानूनमे संशोधनक उपरान्‍त यद्यपि बेटीकेँ पैत्रिक सम्‍पैतमे कानूनी अधिकार प्राप्‍त भऽ गेल अछि, मुदा समाजिक स्‍तरपर ओकर पुरजोर विरोध देखबामे अबैत अछि। हालत ओहिना अछि जेना दहेज विरोधी कानूनक अछि। कानूनक अछैत दहेज कोनो-ने-कोनो रूपे समस्‍त भारतमे चलिये रहल अछि। कानून ईहो अछि जे व्‍यस्‍क युवक, युवती स्‍वेच्‍छासँ विवाह कऽ सकै छैथ, मुदा केतेको ठाम एकर विरोध ऐ हद तक होइत अछि जे युगल जोड़ीक हत्‍या तक भऽ जाइत अछि।

कहबाक माने जे कानूनमे बदलाव संगे समाजिक सोचमे परिवर्तन जरूरी अछि। जन जागरण जरूरी ऐ मानेमे महिला तखने अधिकार सम्‍पन्न भऽ सकै छैथ। 

जमीनक किछु समाजमे खास कऽ दिल्‍लीक किंवा आन-आन पैघ शहरक आसपासक क्षेत्रमे बहुत प्रमुखता अछि। जमीन परिवारक प्रतिष्‍ठासँ जुड़ल अछि। जमीनपर पुरुषक वचस्‍व्‍ कम होइ, भाग्‍यक संगे ओहिनो एकर हिस्‍सेदार हो, ई बात लेाककेँ पचि नइ रहल अछि।

जहिना प्रेमी लोकनिक खिलाफ खास पंचायत काज करैत अछि वएह हाल पैतृक सम्‍पैतमे अपन हिस्‍साक मांग केलापर बेटी सबहक भऽ रहल अछि। हुनकर गप छोड़ू, माय, बाप सेहो ओकर संग नहि दइ छैथ। एहन केतेको दृष्‍टान्‍त आएल अछि जे जमीनमे अपन हिस्‍साक मांग करिते बेटीक गाममे प्रवेशो कठिन भऽ जाइत अछि, भाय सभ गप छोड़ि दइ छै आ माय-बापक मुँह लटैक जाइत अछि, जे ओकर बेटी जमीनमे अपन हक मागि कऽ ओकर सबहक नाक कटा रहल अछि।

बेटी अपन हक नहि माँगि सकय तइले केतेको पिता अपन जीबैत अपन सम्‍पैत पोता किंवा पुत्रकेँ हस्‍तान्‍तरित कऽ दइ छैथ। तेतबे नहि, भाय सभ दवाब बना कऽ बेटीसँ बहिनसँ ओइ सम्‍पैतसँ अपन अधिकार छोड़बाक हेतु राजीनामा लिखा लइ छैथ। सारांश जे कानूनसँ प्राप्‍त अधिकारकेँ समान देबए-मे पुरजोर विरोध कऽ रहल अछि। हुनका लोकनिक धारणा अछि जे बेटीक देल गेल दहेज उत्तराधिकारमे प्राप्‍त होमए-बला सम्‍पैतक एवजमे पर्याप्‍त क्षतिपूर्ति अछि। एक सर्वेक अनुसार मात्र १३% बेटी अपन पैत्रिक सम्‍पैतमे अधिकार लऽ पबै छैथ।

सम्‍पूर्ण देशमे लागू २००५ क कानूनसँ पूर्व पाँच राज्‍य (ऑंन्‍ध प्रदेश, कर्णाटक, महाराष्‍ट्र, तामिलनाडू आ केरल)मे बेटीकेँ पैत्रिक सम्‍पैतमे पहिनेसँ अधिकार प्राप्‍त अछि।

परिणामत: बिहार एवम्‍ मध्‍य प्रदेशक तुलनामे आन्‍ध्र प्रदेशमे चारिगुणा अधिक महिलाकेँ उत्तराधिकारमे जमीन सम्‍पैत प्राप्‍त भेल। आन-आन राज्‍य सबहक तँ ई हाल अछि जे ६९% महिलाकेँ एहेन कोनो महिलाक जानकारी नहि छै जे ऐ कानूनसँ लाभान्‍वित होइत पैतृक सम्‍पैतमे हकदार भेल हो। जेकरा केकरो ऐ कानूनक जानकारी छैहो, सेहो जमीन-जायदादमे अपन हक नहि मंगै छैथ।

भारत वर्षमे दुर्गाकरूपमे स्‍त्री शक्‍तिकेँ सम्‍मानित कएल गेल अछि। जगत जननीक रूपमे हुनकर आराधना कएल जाइत अछि। सत्‍य ई अछि जे प्रायेक बेटी काल्‍हि जा कऽ माय बनैत अछि ओहि रूपमे ओ ओहि परिवारक सृजन करैत अछि, पालन करैत अछि, पल प्रतिपल रक्षा करैत अछि।

हमर संस्‍कृति इतिहासक कोन कोनामे जा कऽ पुरुष वर्चस्‍वक प्रधानताक स्‍वीकार करैत स्‍त्रीणकेँ द्वेमदर्जा स्‍वीकार केलक, ई कएटा दुखद एवम्‍ विचारणीय प्रसंग अछि। मुदा देरियेसँ सही, समाज जागि जाएत से उमेद अछि आ कानून द्वारा देल पैतृक सम्‍पैतमे उत्तराधिकारक सहर्ष पालन भऽ सकत। यत्र नारी पुज्‍यन्‍ते, रमन्‍ते तत्र देवता। उक्‍ति तखने सार्थक भऽ सकत।

६/४/२०१७   

 

 

 


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