प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

 

गजेन्द्र ठाकुर

वजन प्रबंधन - एकटा व्यक्तिगत प्रयोग एवं अनुभव

 

ई कथा २००० ई. मे शुरू होइत अछि, ओइ सालक उत्तरार्धमे, जखन हम १०० किलोक नै ७८-८० किलोक छलौं। फेर हम एक सालसँ बेसी छुट्टीपर छलौं, एकटा संदिग्ध-स्थितिक सड़क-दुर्घटनाक बाद, जखन सरकारी काजसँ घुरैत काल नव-सहस्राब्दी शुरू हेबासँ पहिने ओइ दुर्घटनामे हमर "जांघक-हड्डी" दू भाग मे टूटि गेल। दुर्घटनाक राति ब्लड प्रेशर ६०-४० भेलाक बाद डॉक्टर ऑक्सीजन इमरजेंसी घोषित केलन्हि  २ बजे राति मे। बादमे आन तरहक भयावह परिस्थिति अबैत गेल, जेना ए.आर.डी.एस. डायगनोस भेनाइ आ तकरा लेल १५ दिन धरि वेंटिलेटरक हमरा ऊपर प्रयोग। फेर एक साल मे तीन बेर ऑपरेशन भेल आ फेर डेढ़ साल बाद बैसाखीसँ बेंतपर आबि सकलौं। फेर आयल १५ अगस्त, ओइ साल रक्षाबंधन सेहो अही दिन छल, आ ओही दिन हम फेरसँ गाड़ी चलाबय लगलौं।

आ ऐ समयावधिमे हमर ओजन ८०सँ बढ़ि कऽ १०० किलो भऽ गेल, माछ-भात खाइ आ सुतय कऽ अलाबे कोनो शारीरिक श्रम नै हेबाक कारण। आ ई बढ़लाहा ओजन अगिला १८ बर्ख धरि ओतबे बनल रहल। ओना हम कहि दी जे आब हम फेर ८० किलोक भऽ गेल छी। ओजन कम हेबाक एकटा कथा अछि। हमर स्थानांतरण ६ मास लेल दोसर विभागमे कोनो आवश्यक काज लेल कएल गेल छल। ओइ विभागमे हमर सभ सहयोगी आ अधीनस्थ सेहो अर्धसैनिक बलक छलाह। हम १०० मीटरक दूरी सेहो दौगि नै सकैत छलौं, आ ओ सभ हमरा वजन कम करय लेल दौगय लेल कहैत छलाह, आ एक दिन जखन हमर समय आबि गेल तँ हम हुनका सभकेँ कहलियनि जे तीन मासमे हम हम अपन ओजन फेरसँ ८० किलो कऽ लेब। हम जे ई कहलियनि तकर पाछू एकटा ठोस आधार छल।

पछिला १८ साल मे हम विभिन्न प्रकारेँ प्रयास केलौं जइमे जलखै छोड़नाइ, दिनमे मात्र खीरा खा कऽ रहनाइ, मुदा हम लगभग पूर्ण रूपसँ ओजन घटेबामे विफल रहलौं। तखन हमर अनचोक्के ३ मासमे ओजन कम करबाक विश्वास कतऽ सँ आयल? तकर पाछू की रहस्य छल? एतय आब हमरा लग एकटा उदाहरण छल, हमर बेटा क लंबाइ ६ फीट ३ इंच छन्हि, आ हुनकर एन.डी.ए. मे उम्र-लम्बाइ-वजनक अनुपातक अनुसार अपन ओजन १०० सँ घटा कऽ ६७ किलो करबाक छलन्हि। आब अहाँ सभ बुझि गेल हएब जे हुनकर ओजन सेहो १०० किलो छलन्हि। हमरा हुनकर भावी असफलताक पक्का विश्वास छल, ओ फेल भेलाह मुदा ओ अपन वजन ६७ नै कऽ सकलाह मुदा ७१ किलो धरि अवश्ये आनि लेलन्हि। ई हमरा लेल एकटा पैघ आघात छल। हम हुनका सँ किछु रहस्य सिखलौं आ तीन मास मे हमर ओजन ८० किलो भऽ गेल। हम एतय सेहो इएह रहस्य सझिया कऽ रहल छी।

रहस्योद्घाटन

तीन मासमे हम पूरा दिन मात्र पानि आ ब्लैक कॉफी (बिनु चीनी आ दूधक) सँ काटि लेलौं। साँझमे संशोधित-कीटो-डाइट क आधार पर हम मात्र एक घंटा (८-९ क बीच रातिमे) क मध्य कोनो कार्बोहाइड्रेट, भात आ चिक्कसक सोहारी-रोटीक सेवन नै केलौं। हमरा लेल निर्धारित छल जे चर्बी (चिकन, माछ, पनीर) आ फल मे मात्र तरबूज खाइ। एक मासक बाद हमर ओजन ८६ किलो भऽ गेल।

अगिला शॉक

अगिला शॉक लेल तैयार रहू। रस्ता सेहो ओतेक आसान नै अछि। वजन घटैक ई प्रक्रिया बंद भऽ गेल। आ ऐ वजन नै घटबाक चक्रक अंत एक महीना चलल। मुदा हमर टारगेट तीन मासक छल। एहन होइत अछि जे शरीरक जल आदिक घटनाइ सहज अछि, तेँ ८६ किलो धरिक बाट सहज अछि, तकरा बाद शरीरक जिद्दी तत्वकेँ कम करय पड़त। आ तखने कठिन बाट शुरू होइत अछि। संशोधित कीटो-डाइटक प्रराम्भक दू मासक बाद फेर वजन घटब शुरू भऽ गेल। संगहि कहि दी जे ऐ कालावधिमे हम साँझमे भोजन करबासँ पहिने एक घंटा दौगैत छलौं। ई दौगनाइ १०० मीटरसँ बढ़ि कऽ २ किलोमीटर भऽ गेल (हमर पार्क पहाड़ी जेकाँ अछि, तइ लेल ई अहाँक पार्कक हिसाबे ३ किलोमीटरक बराबर भेल)। हम दोसर महलापर रहैत छी। पहिने जँ गाड़ीमे किछु छुटि जाइ छल आ ओइ दिन शुक्र दिन रहैत छल तँ हम सोम दिनक प्रतीक्षा करैत छलौं आ ओही दिन ओ छुटलाहा बौस्तु अनैत छलौं, कारण दोसर मंजिल पर चढ़ैत काल हमर दम फुलऽ लगैत छल। आब तँ हम दिनमे चारि बेर ऊपर-नीचाँ जाइत-अबैत छी।

वैज्ञानिक आधार

ऐ अवधिमे कीटोसँ भेल म्ऋत्युक विषयमे सेहो सुनलौं। से जिनका को-मॉर्बिडिटी छनि हुनका डॉक्टरसँ सलाह लेबय पड़तनि।

ऐ संबंधमे हम दूटा सलाह देबय चाहब जे हम पैघ-पैघ डॉक्टरसँ सुनने छी। पहिल छथि आइ.एल.बी.एस. केर निदेशक सरीन साहब। दूरदर्शनमे हुनका कहैत सुनने रही जे ५० वर्षक उमेरक बाद लीवरकेँ स्वस्थ रखबाक लेल दिनमे मात्र एक बेर भोजन करबाक चाही। संगे-संग ओ ईहो कहलनि जे कॉफी इंडस्ट्री मे हुनकर कोनो हिस्सेदारी नै छन्हि मुदा जँ बिना दूध आ चीनीक कतबो बेर ब्लैक कॉफी पीबी तँ ई लिवर लेल फायदेमंद अछि। आ ओ घी (!) खएबाक सलाह सेहो देलनि किएक तँ लीवर-निवसित नीक बैक्टीरिया लेल घी लाभकारी होइत अछि!

संगे-संग ऑल इंडिया रेडियोक एफ.एम. मे सुनलौं एकटा डॉक्टर (जिनकर नाम हमरा मोन नहिं अछि) साहेबकेँ जे कीटोक विषयमे कहलनि जे कीटो डाइटक दौरान कार्बोहाइड्रेट नै खयलासँ ऊर्जा सेहो शरीरक वसा घमैत अछि, आ ऐसँ फैटी लीवरक समस्या सेहो खतम भऽ जाइत अछि। ओ को-मोर्बिडिटी केर मरीज सभसँ मेडिकल सलाहक संग कीटो डाइट करबाक सलाह देलनि आ तीन माससँ बेसी कीटो-डायटिंग नै करय लेल कहलन्हि।

 

आइ-काल्हि

आइयो हम दिन मे कतेको बेर मात्र ब्लैक कॉफी (बिना चीनी आ दूधक) पीबैत छी्। दिनमे पानि छोड़ि किछु नहि खाइत छी आ नहिये पिबैत छी। दिनमे हम एक घंटा बैडमिंटन खेलाइत छी आ ओइ लड़का सभकेँ सेहो हरा दै छी जे हमरासँ २० बर्ख छोट छथि। रातिमे भात (घी केर संग), रोटी, माँछ आदि खाइत छी।

सप्ताहमे एक बेर चीट-डे सेहो होइत छैक, जइमे हम दूध-चीनीक संग चाह, कॉफी, पिज्जा आदि खाइत-पिबैत छी. आ हम पहिने कहि चुकल छी जे हमर वजन दू साल पहिने ८० किलो छल, जे आइयो बरकरार अछि।

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।