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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक 

विदेह

 

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-२०२१.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 

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 जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल सम्पर्क -8789616115

आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्म-कथा )

11. चरैवेति-चरैवेति-एक 

 

चारि बीघा वला परिवारक दुःख-सुखसं परिचित छलहुँ | विवाह भेलाक बाद पचास बीघावला परिवारक  दुःख-सुखसं परिचय होम’ लागल |

मधुश्रावणीमे हम एक दिन लेल सासुर जा सकलहुँ | वापस ढोली गेलहुँ त किछुए दिनक बाद सूचना भेटल जे हमर जेठसारि कलकत्ताक एकटा अस्पतालमे अंतिम सांस लेलनि | तीनटा पुत्र बारह बरखसं उपरक छलखिन | एकटा पुत्री तीन सालक आ एकटा छओ मासक छलखिन | किछुए  मास पहिने गेल छलीह कलकत्ता | दांतक पीड़ा भेलनि | ऑपरेशनक बाद खाँसी भेलनि |ब्लीडिंग भेलनि | नहि बचि सकलीह | अपने गाममे सासुक सेवामे लागल रहलीह आ चारिटा दियर आ दूटा पुत्रक पढाई-लिखाई कलकत्तामे चलैत रहलनि तकर प्रबन्धमे हिनक प्रशंसनीय भूमिकाक चर्चा हुनकासं भेंटक उत्कंठा जगबैत छल, मुदा आब तकर कोनो संभावना नहि रहि गेल छल | आब यैह इच्छा रहि गेल जे साढ़ू कोना  प्रबन्ध क’ रहल छथि, से देखी  |

हम सभ अंतिम वर्षमे गेलहुँ त आल इन्डिया टूर प्रोग्राम कॉलेज दिससं तैयार कएल गेलै | डेढ़ मासक प्रोग्राम छलै | एकटा बोगी सुरक्षित रह्तै, ट्रेन आ बसक माध्यमसं यात्रा पूर्ण हेबाक छलै | हम एहि यात्राकें नहि छोड़’ चाहैत छलहुँ | समस्या छलै जे छात्रकें अपना दिससं चारि सै टाका अग्रिम जमा कर’ पडैत छलै |

हम एकटा अनुशासन अपनाले’ बनौने रही जे ससुरसं कोनो मांग नहि करबनि आ ने कोनो अपेक्षा करब |

एकदिन ओ अपने कहलनि, ठाकुर हिनकाले’ एकटा साइकिल लेबाक अछि, तें  दरभंगा चलब | हम पुछलियनि कोन साइकिल लेबाक विचार छनि, त कहलनि सेन रेले |ओहि समयमे यैह सभसं नीक साइकिल होइत छलै | पुछलियनि कते दामक  छै, कहलनि चारि सै | हम चुप्प भ’ गेलहुँ, पुछलनि त कहलियनि जे साइकिलक बदला हमरा दोसर चीज बेशी उपयुक्त लगैए | कहलियनि जे आल इण्डिया टूर प्रोग्राम लेल एतबे राशि जमा करबाक छै | कहलनि हमरा कोनो आपत्ति नै अछि | हमर समस्याक निदान भ’ गेल |

समस्तीपुर जंक्शनसं यात्रा आरम्भ भेल 12.04.1972  क’ बुध दिन  | हम साढ़ूकें पत्र द्वारा सुचित क’ देने छलियनि | सबेरे हावड़ा जंक्शन गाड़ी पहुँचलै | साढ़ू उपस्थित छलाह |पहिल भेंट छल तथापि  असौकर्य नहि भेल | दुनू गोटे जलखै केलहुं | संक्षिप्त गप-शप भेल | हम कहलियनि कोन नम्बरक  बस अथवा ट्रामसं पहुंचब, से  बता दिय’, हम साँझमे डेरापर आबि जाएब |

पूर्व निर्धारित कार्यक्रमक अनुसार दिनभरि सबहक संग घुमैत रहलहुं | बोटैनिकल गार्डन, चिड़ियाखाना, अजाएब-घर,विक्टोरिया मेमोरियल, धर्मतल्ला होइत साँझमे साढ़ूक डेरा पहुंचि गेलहुँ |

एकटा कोठलीमे साढ़ूक गृहस्थीक सभ सामान छलनि |

यैह हिनक तपस्या-स्थल छलनि |

एतहि रहि चारिटा अनुज आ बादमे तीनटा पुत्रक शिक्षाक संग अपन नोकरीक प्रबन्धन  करैत आबि रहल छलाह | भोजन अपने बनबैत छलाह | भोजन बनबैत काल बच्चाकें  पढाइमे मदति सेहो करैत छलाह | ओहि समयमे एकटा बालक संगे छलखिन | रूममे दूटा चौकी छलै | भोजनक बाद एकटा चौकीक उपर दोसर चौकी राखिक’ नीचांमे ओछाइन भेल | ओहिपर फ़ैलसं हम दुनू साढ़ू बड़ी राति धरि गप-शप करैत रहलहुं | साढ़ू अपन पारिवारिक जीवनक कथा कहैत-कहैत पत्नीक योगदानक चर्च करैत भावुक भ’ जाइत छलाह | ककरो संग अपन दुःख-सुख बँटलासं मोन किछु हल्लुक होइत छैक |

हमरा बहुत किछु बूझल छल तथापि हुनका मूँहें सूनि नीक लागल | बडकी दाइक तपस्याक परिणाम कते दिन बाद आएत, से सोचैत रहलहुं |

दोसर दिन साढ़ूक अनुज बिन्दु जीक संग किछु महत्वपूर्ण स्थान जेना कलकत्ता यूनिवर्सिटी इंडस्ट्रियल एंड टेक्नोलॉजिकल म्यूजियम, कालीघाट, प्लानाटोरियम आदि  देखि एलहुं | साँझमे साढ़ू हबर-हबर भोजन बनाक’ हमरा  भोजन करा देलनि | बिन्दुजी  हमरा हावड़ा जंक्शन पहुंचा देलनि | राति सबा आठ बजे पुरीक लेल प्रस्थान करै गेलहुँ |

राति बर्थपर  पडल-पडल बड़ी काल धरि सोचैत रहलहुं साढ़ू, बडकी दाइ, दू टा अबोध पुत्री  आ तीन टा पुत्रक भविष्यक विषयमे |

एक पीढ़ीक तपस्याक फल दोसर पीढ़ीकें प्राप्त होइत छैक | लगभग पचास साल भ’ गेलै | आइ बडकी दाइ आ साढ़ूक तपस्या आ आशीर्वादक प्रमाण बनल छथि सम्मानित सेवासं भारमुक्त भेल हुनक  दू टा पुत्र आ जर्मनी, अमेरिका, बंगलोर, जमशेदपुरमे हिनका सबहक  इंजीनियर, डॉक्टर पुत्र, पुत्री, पुत्रवधू आ जमाए  लोकनि |

अपन पूर्वजक प्रति सम्मान व्यक्त करबाक संस्कृति अनमोल अछि | हम सभ आइ जाहि ठाम छी ओहिठाम पहुचबामे हमर पूर्वज लोकनिक की योगदान रहल छनि, से जानबाक चाही |

सबेरे हम सभ पुरी पहुँचलहुँ |

सभ गोटे बंगालक खाड़ीमे  ज्वार-भाटाक आनन्द लैत फेर चापा कलपर स्नान क’ क’ भगवान् जगन्नाथक दर्शन करबाक लेल मन्दिर जाइ गेलहुँ |

ज्वार-भाटाक आनन्द लोककें पानिमे उतरबाक लेल आकर्षित करैत छैक | पानिक प्रवल प्रवाह कखनो  लोककें ऊपर ल’ जाक’छोडि अबैत अछि त कखनो नेने-नेने बीचमे पहुंचा दैत अछि जत’सं लोक घुरियो सकैए, नहियों घुरि सकैए | दू साल पहिने हमर परिचित  एकटा पति-पत्नी विवाहक बाद यात्रापर गेल छलाह | ज्वार-भाटा आकर्षित केलकनि | पानिमे उतरै गेलाह | थोड़े काल आनन्दमे रहलाह | किछुए कालमे आनन्द शोकमे परिवर्तित भ’ गेलनि  | दुनू गोटेकें पानिक प्रवल प्रवाह झिकने चल गेलनि मुदा वापस एके गोटेकें केलकनि | कनियाँ कनैत रहि गेलीह, पति वापस नै एलखिन |

एहेन दुर्घटना कम होइछै, मुदा होइछै |

तें हमरा दूरेसं ज्वार-भाटाक आनन्द लेब ठीक लगैए | बत्तीस बरखक बाद फेर पुरी जेबाक अवसर आएल त होटलमे स्नान क’क’ आरती देख’ मन्दिर गेलहुँ | बादमे दूरेसं ज्वार-भाटाक आनन्द लै गेलहुँ |

शास्त्रमे द्रष्टा बनिक’ संसारक सौन्दर्य  देखबाक सन्देश अछि | मुदा, लोक डूबिक’ आनन्द लेबाक चक्करमे बहुत किछु गमा बैसैत अछि |

भोजनक बाद गाड़ी वाल्टेर लेल प्रस्थान केलक |

दोसर दिन भोरे वाल्टेर (आन्ध्र प्रदेश) पहुंचै गेलहुँ |

स्नान-जलखैक बाद सिटी भ्रमण कय विशाखापत्तनमक बंदरगाह  देखि अबै

गेलहुँ | एकटा मन्दिर सेहो देखि एलहुं |

साढ़े चारि बजे साँझमे गाड़ी मद्रास लेल प्रस्थान केलक |

सभ स्टेशनपर लोकक भीड़ अपन लोकप्रिय अभिनेत्री जय ललिताक स्वागत पुष्प-बृष्टिसं क’ रहल छल | सामान्य कद-काठीक अभिनेत्री हाथ जोडि अपन प्रशंसक सबहक अभिवादन स्वीकार क’ रहल छलीह | यैह लोकप्रिय अभिनेत्री बादमे तामिल  नाडूक लोकप्रिय मुख्य मन्त्री सेहो भेलीह |

मद्रास सेंट्रल 2.30  बजे दूपहरमे पहुंचल रही | मूर मार्केट, पेरिस कार्नर, चाइना मार्केट आ जेमिनी स्टूडियो घूमि अबैत गेलहुँ | एक ठाम एकटा धूप चश्माक दाम पुछलियै, कहलक पचास रुपया | बढ़’ लगलौं त बिना नेने जाए नै देब’ चाहैत छल | कहलियै पाँच रुपया से ज्यादा नहीं देंगे | तुरत द’ देलक | तैयो भेल जे ठका गेलहुँ | एहने सन अनुभव बहुत गोटेकें भेलनि | फेर कतहु कोनो वस्तुक दाम नै पुछलियै |

राति 8 बजे गाड़ी मद्रास सेंट्रलसं प्रस्थान करैत दोसर दिन सबेरे पाँच बजे इरोड जंक्शन पहुंचल | इरोडसं 6.30  बजे प्रस्थान क’ क’ साढ़े बारह बजे दूपहरमे तिरुचिरापल्ली पहुचै गेलहुँ | ओहि ठाम एकटा मन्दिर देख जाइ गेलहुँ | रातिमे साढ़े बारह बजे प्रस्थान क’ क’ दोसर दिन साढ़े बारह बजे दूपहरमे रामेश्वरम पहुँचै गेलहुँ |

हिन्द महासागरमे स्नान कय  पाँच बजे बाइस टा कुण्डमे सेहो स्नान करै गेलहुँ |

महासागर देखि मोन पडल कतेक कथा जे नान्हिटासं सुनैत आबि रहल छलहुँ |  दस हजार साल पहिने भेल सीता-हरणक कथा, हनुमानजी द्वारा समुद्र फानिक’ विभीषणक सहयोगसं सीता माताक  पता लगयबाक कथा, लंका दहनक कथा, बानर सेनाक सहयोगसं एहि महासागरपर बनल सेतुक कथा, ओइपार  कतेक दिन तक चलल युद्धक कथा, राम द्वारा रावणक संहारक कथा |

आब विचार करैत छी त लगैत अछि जे रावण आइ कोरोनाक रूपमे आबि चुकल अछि जे सम्पूर्ण विश्वकें आतंकित केने अछि | ओहि समय दस टा  मुंह ल’क’ आएल छल, एखन  हजारो-लाखो  मुंह ल’क’ उपस्थित अछि | ओ रावण देखाइ दैत छल, तें ओकरा हनुमानजी आ अंगद सेहो लुलुआ लेलखिन, एखन त ओ देखाइए नै दैत अछि | एहेन स्थितिमे ओकर नाभि कत’ छै,से  के कहत ? ओइ बेर त बेर-बेर गरदनि काइटक’ भगवान अपने परेशान भ’ गेल छलाह |

संयोग देखियौ ओम्हर अयोध्यामे रामक आगमनक हल्ला भेलै, एम्हर अदृश्य भेषमे रावण सौंसे दुनियामे त्राहि-त्राहि मचा देलक |

युद्ध चलि रहल अछि |

रामक सेनामे लाखो प्रतिभाशाली विशेषग्य- चिकित्सकक टीम दिन-राति पुल तैयार करबामे लागल अछि | किछु लोक रावणक ख़ुफ़ियाक रूपमे काज क’ रहल छथि | पुल बनबामे देरी करबा रहल छथि | कुर्सी पयबाक, कुर्सी बचयबाक अथवा कुर्सी हथियेबाक  प्रोजेक्टपर सेहो काज संगहि चलि रहल अछि | किछु गोटे रंग-विरंगक डहकन तैयार क’ रहल छथि |

काज बहुत भेलैए | करोडो लोककें दुनू  खोराक टीका पड़लनि |  जान बचयबाक लेल सुझाव देल गेल छनि जे घरेमे रहू | एकटासं काज नै चालत, दू टा मास्क लगाक’ रहू | बेर-बेर हाथ धोइत रहू | दूनू डोज लेलाक बादो संक्रमण हो त चिन्ता नहि करब | डॉक्टरसं संपर्क क’ क’ सभटा दबाइ ल’ लिय’ आ जांच सेहो  करबा लेब | सभटा प्रोटोकाल सुनिश्चित राखब त मरब नै | शेष लोक सभ ले’ सेहो अभियान शुरू भ’ चुकल अछि |

हमहूँ दुनू गोटे 12  अप्रैलक’ दोसर डोज लेलहुं | चारिम दिन माने 15 क’ हम भरि राति बोखारमे रहलहुं | बोखार 102 तक रहल | पानिक पट्टी मात्रसं ठीक भ’ गेल, मुदा फेर दस दिनक बाद बोखार आएल | डॉक्टरसं सम्पर्क केलहुँ | डॉक्टर साहेब सभटा दबाइ लीखि देलनि जे  अखबारमे प्रकाशित कएल गेल छलै | कोरोना वला तीनू नै भेटल | यैह दबाइ भेटल :

1.पेरासिटामोल 650

2.अज़िथ्रोमायसिन 500

3.विटामिन सी

दू दिनक बाद आब बोखार नहि अछि | अज़िथ्रोमायसिन तीन दिन ल’ चुकल छी | पाँच दिनक सुझाव छल, तें दू दिन और लइए लेब, से सोचैत छी | हिनका पेरासिटामोलसं काज चलि गेलनि |

परसू रातिमे नाक जाम भ’ गेल | राति भरि निन्न नहि भेल | चिन्ता  भेल, मुदा सरिसोक तेलक प्रयोगसं लाभ भेल | ऐसं नै होइत तखन फेर डॉक्टर- अस्पताल-सिलिंडर की-की कर’ पडैत आ की-की  होइत से के जानय !

एम्हर तरह-तरहक प्रयोग व्यक्तिगत स्तरपर सेहो लोक क’ रहल अछि |

हमर मित्र सुधाकान्तजी सुचित केलनि अछि जे शहरक अस्पताल सभमे ओक्सिजनक कमी सूनि एक गोटे,  जिनकर ओक्सिजन स्तर कम भ’ रहल छलनि, गाम आबि गेलाह आ एकटा पीपड़क गाछक  जड़ि  लग साफ़ क’क’ ओतहि सात दिनसं  रहै  छथि आ एकदम स्वस्थ छथि |

एमहर नारद जी द्वारा कतहु  ईहो प्रसारित कएल गेल अछि  जे जहिया आ जखने  ई रावण कोनो चुनावक रैलीमे चलि गेल अथवा गाम दिस गेल, ओही क्षण ई जरिक’ भस्म भ’ जाएत,कारण एहि बेर ब्रह्माजीसं वरदान मंगैत काल अही  दुनू ठाम अपन सुरक्षाक आश्वासन मांगब बिसरि गेल | तें देखै नै छिऐ जे गाममे मूडन, उपनयन, एकादशीक यग्य, विवाहक भोज-भात आदि अबाधित चलि रहल अछि आ पटना,दिल्ली, मुंबई और जहां-तहांसं आबि लोक एहिमे सम्मिलित भ’ क’ अपन योगदान दैत अयशसं बचि रहल छथि |

शहरमे  प्रति दिन आत्मा सभ देह छोडैत जा रहल छथि |

कुमार गगनकें नहि बचा सकलियनि |

मनोज मनुज नहि बचि सकलाह |

अदभुत लेखक नरेन्द्र कोहली नै रहलाह |

अदभुत गीतकार-गजलकार कुँवर बेचैन चल गेलाह |

कतेक घरक खाम्ह खसि पडल | कतेक घरक दीप मिझा गेल |

लोक आतंकित अछि | किनकर कहिया आ कखन नंबर आबि जेतनि, से निश्चित नहि अछि |

एखन क्यो खोंखी करैत अछि, त डेरा जाइ छी | क्यो छीकै छै, त डर भ’ जाइए |

आपातकालमे लिखल गेल दुष्यंत कुमार जीक ई शेर मोन पड़ि रहल अछि :

‘सैर करने के लिए सड़कों पे निकल जाते थे

अब तो आकाश से पथराव का डर होता है’

नीरज जी सेहो कहने छथि :

‘ मित्रो हर पल को जिओ अंतिम पल ही मान

 अंतिम पल है कौन-सा कौन सका है जान’

एकटा स्वामी जी कहैत छलाह, जतेक  पवित्र आत्मा सभ एखन  जा रहल छथि, से किछुए सालक  बाद वापस आबि जेताह आ हिनके सभसं हैत सतयुगक स्थापना |

स्वामी जीक बातसं मरबाक डर कम भेल अछि |

(क्रमशः)

पटना /30.04.2021

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