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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक  गद्य

विदेह

 

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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मिथिलेश सिन्हा "दाथवासी" (मिसिदा)

बीहनि कथा

पियार

''की गै, की हाल छौ ?''

''मर टटिवा, आई फुरैलौ यै, जहिया कहलियौ, अप्पन बाबू कें हम्मर बाबू लग भेजहीं तखन त' बकोड़ लागि गेलौ.....आई, पूछै से केना ?''

''आंय गै, हम्मर बाबू जेतौ तोहर बाबू लग ? नहि, नहि.... हम लड़का बाला छी, हम कोना क' बाबू के तोहर बाबू लग भेजियौ ?

अप्पन बाबू के हम्मर बाबू लग भेज, हम बाति सम्हारि लेबौ !''

''आहि....आहि..... आंय रौ, हम गेल छलियौ तोरा लग कहै लेल,जे हम तोरा सं पियार करैत छियौ ?''

''एह, ई जेना किछुए ने केलकै.... आंय गै, मनोजवा केर वियाह मे एतेक निहारि निहारि किएक देखि कें हँसैत रहैं ?''

''अच्छा.... ओहि दिन ? रौ, ओहि दिन, तोहर पैजामा केर डोरी निच्चा लटकैत रहौ तैं.''

''हे गै, एतेक ने बोन, ओहि दिन तों आम'क बारी मे नै कहने छलैं कि हम तोरा नीक लागै छियौ ?''

''आंय रे, मनसूक्खा, नीक लागै केर मतलब भेलै कि हम तोरा सं पियार करै लगलियौह ?''

''ठिक्के छै तोरा हमरा सं पियार नहि छौ, तखन हम जाइत छियौ !'' कहि राजेश चल'लागल.

''ऐ, राजेश केमहर जाता है , ई पियार का खेल खेला के हमको बुड़बक बनाता है, बूझि लो, हम तोहर पाँछा कहियो छोड़ेंगे....पियार मे नाटक करै छैं ?'' कहि कान' लागल.

''हेह तोरा की बूझि पड़ता है कि तोरा हम नहि बुझता है, हम तोहर बिनु रहि सकता है..... हम तोरा बहुत पियार करता है जी.....?

बजैत राजेश ओकर हाथ पकड़ि लेलक.

-"मिसिदा"

(मिथिलेश सिन्हा "दाथवासी")

मोहल्ला/पोस्ट : लक्ष्मीसागर, जिला : दड़िभंगा.

 

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