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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक  गद्य

विदेह

 

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

१. डॉ. बचेश्वर झा- मिथिलाक विभूति आयाची मिश्र २. नारायण यादव-गिफ्ट ३.आशीष अनचिन्हार- हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-३

डॉ. बचेश्वर झा

मिथिलाक विभूति आयाची मिश्र

मिथिलाक भूमि एहन अछि जाहिठाम अदौसँ माँ मैथिलीक कोखिसँ विद्या भास्कर लोकनि जन्म ग्रहण करैत रहलाह अछि।

एहि सरिसबक माटिमे माँ मैथिलीक कोखिसँ एक एहन सूर्यक उदय भेल जे जन्म-ग्रहण करितहि अपन रश्मिसँ मिथिला, मैथिल आ मैथिलीक क्षेत्रकेँ आलोकित कएल। विद्याध्ययन कऽ कौलिक मर्यादाक रक्षा कएलन्हि। एहन प्रात: स्मरणीय संतोषी, तपस्वी, निर्लोभी एवम् निरासक्त व्यक्ति भवनाथ मिश्र छलाह। हिनकासँ पूर्व आ पछातियो अनेक सरस्वतीक वरद पुत्र लोकनिक नाम लेल जा सकैछ जे मिथिलाक रहितहु मिथिलेत्तर प्रान्तोमे अपन नामोज्वल कएने छलाह ओ लोकनि थिकाह- गौत्तम, कणाद, याज्ञवल्क्य, उदयनाचार्य, पक्षधर, मण्डन मिश्र, वाचस्पति, जय कृष्णा, त्रीलोचन, हरि मिश्र, गंगेश, विद्यापति, चन्दा झा, भारती, गार्गी, लक्ष्मीनाथ प्रभृति। एहूमे अधिकांश सरिवसक माटिमे उत्पन्न भेनिहार छलाह। तप: पूत, परम ज्ञानी, शास्त्रानुसार चलनिहार एवम् नवन्यायक निष्णात भवनाथ मिश्र आजीवन ककरोसँ किछु याचना नहि कयल तेँ ई अयाचीक नामसँ बहु चर्चित भऽ गेलाह। अपन उपनाम अयाची सँ जगत विख्यात भेलाह। अभाव ओ असंतोषकेँ अपना लग कहियो फटके नहि देलन्हि। मात्र सवा कट्ठा बाड़ी जगह खेत ओ खरिहानक काज करैत छलन्हि। एहीसँ जीविका चलैत छलन्हि। दुर्वासा दूभिक रस खाय रहैत छलाह। तेँ अयाची साग-पात खाय काया ठाढ़ रखने छलाह। भव नाथक अयाचीटेक तोड़बा लए दैविक आ लौकिक प्रलोभवन सभ आएल मुदा ई टस-सँ-मस नहि भेलाह।

एहि तरह संकल्पक पालनमे हिनक धर्म पत्नी भवानीक सेहो सराहनीय सहयोग रहल। एहन आस्तिक दम्पतिक कोखिसँ अद्भुत संस्कारी पुत्रक जन्म भेल कहबी छैक बाढ़े पूत पिता के धर्मेबालकक नाम शंकर मिश्र राखल गेल। शंकर शंकरे समान छल। त्यागसँ अमरत्वक प्राप्ति होइछ। असली सुख त्यागेसँ भेटैछ। त्यागी लोकक तुलना ककरोसँ नहि कएल जा सकैछ। अयाची द्वारा सांसारिक सुखक त्याग एक प्रेरणा पुंजक रूपमे अछि। वास्तविक ओ विशिष्ट आनन्दक अनुभूति त्यागीकेँ होइछ। बिना संकोच कहल जा सकैछ जे अयाची पारखी छलाह तेँ ने ओ त्याग मय जीवन जीबाक आदर्श उपस्थित कएल। एहि सन्दर्भमे कविक उक्ति अछि-

धन्य-धन्य मातृभूमि, सकल ज्ञान-गुणक खान

कतहु सबा कट्ठा मात्र बाड़ीक साग-पात,

औखन चमकैत अछि अयाचीक स्वाभिमान।।

पूजा-पाठमे लीन रहनिहार अयाची पलखति भेलापर विद्या विलासमे लीन होथि। हुनक ख्याति सर्वत्र पसरि गेल छल। जखन दूर-दूरसँ जिज्ञासू छात्र लोकनि शंकाक समाधानार्थ हिनका लग अबैत छल तँ ई अपन बालककेँ भिड़ा देथि। आगन्तुक छात्रकेँ झुझुआइत देखि अयाची बुझि जाथि जे बालक शंकरक वयस कम तेँ ई लोकनि अपन अपमान बूझैत छथि तखन ओ कहि देथिन्ह जे शंकरक वयस नहि देखू।

बालक शंकरक प्रखड़ विद्वताक थाह पाबि ओ लोकनि स्वीकारैत छलाह जे मिथिलाक जतेक नाम सुनल ताहिसँ बेसी एहिठामक विशेषता अछि। अयाची पुत्र शंकरक संस्कार देखि मुक्त कण्ठसँ हिनक भाग्यक भूरि-भूरि प्रशंसा करथि। भवनाथ जौं महादेव तौं भवानी सद्य: पार्वती प्रतीक छलीह। निर्धन पतिक अनुगामिनी, सती साध्वी ओ परम सहिष्णु छलीह। टकुरीसँ सूत काटि वस्त्र अपन आ पतिक हेतु ओरिआउन कऽ लैत छलीह। अभावी घर रहितो आतिथ्य भावमे अग्रगणी छलीह। जनश्रुति अछि एक समय अतिथि-सत्कारक हेतु घरमे ओरिआउन नहि भेलापर लोटा बन्धकी राखि भोजन सामग्री जुटाए बाड़ीसँ खम्हारू उपाड़ैत छलीह कि एक तमघैल स्वर्ण मुद्रा प्राप्त भेलन्हि। भवानी पुलकित भऽ गेलीह जे आब दरिद्रीक अन्त भऽ जाएत। मुदा अयाची लोहि स्वर्ण मुद्राक तमघैलकेँ अपन पुत्र शंकरक द्वारा राजाक कोषमे जमा करा देलन्हि किएक तँ माटिक धन राजकोष थिक। एहिपर हुनक पत्नी विचलित रहि गेलीह। एकरा दैवी प्रलोभन कहि सकैत छी।

मिथिलाक सभ्यता ओ संस्कृति संसारक सभ्यता ओ संस्कृतिसँ श्रेष्ठ अछि। विभिन्न ठामक विद्वान एहिठाम वर्षे रहि अपन ज्ञान पिपासाकेँ शान्त करैत छलाह। एहिठामसँ सभ्य ओ सुसंस्कृत भऽ जाइत छलाह। अपन संस्कारक परिचय लग-भग पाँचे वर्षक अवस्थामे अयाची पुत्र शंकर मिथिलेशकेँ जखन देल तँ ओ अवाक् रहि गेलाह आ अयाचीक तपश्ययाक प्रसादात् बालक बुझि नतमस्तक भऽ अभिनन्दन कएलन्हि- शकरक उक्ति :

वालोहं जगदानन्द, नमे बाला सरस्वती,

अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णेयाम जगत्रयम्।

भवनाथ ओ भवानी दुहुक कर्म-कमलसँ धर्मक जे पराग झड़ल ताहिसँ मिथिलाक माटि अपलखित अछि।

अयाचीक निर्लोभता प्रस्ट प्रमाण तखन भेटैछ जखन मिथिलेश बालक शंकरक संस्कारसँ संतुष्ट भऽ अपन वेश कीमती रत्नक माला दर्गनि उतारि शंकरक गरामे पहिरा देल आ एक मोटरी स्वर्ण मुद्राक संग स्वयं हाथीपर बालक शंकरकेँ अयाचीक डीहक माटि माथमे लगएबाक हेतु नेने एलाह। मिथिलो चित ढंगसँ तत्कालीन महाराजक सम्मान कएल। महाराज हिनक दैन्य दशा देखि खोरिस हेतु प्रर्याप्त धन प्रदान करबाक ईच्छा प्रगट कएल तँ अयाची करवद्ध कहल- 

अपने हमर टेककेँ नहि तोड़ू। हमरा कोनो वस्तुक प्रयोजन नहि अछि। ई व्रत निमहि जाय इएह हमर आकंक्षा।

मिथिलेश हुनक चरण रज लऽ अपना कए धन्य मानल। बादमे भवानी बालक शंकरक कमाइ पुरस्कारसँ भिज्ञ करोलन्हि तँ प्रसन्न भेला जे आब दरिद्रता भागि जाएत मुदा तत्क्षणहि बालक शंकरक जन्मक समय मरनी चमैनकेँ निछाउर किछु नहि देने छलीह से मोन पड़ि गेलन्हि।

ताहि समय सहर्ष कहल जे ई सभटा रत्न स्वर्ण मरनीकेँ बाजा कए देल जाय। दुनू प्राणीक मतैक्यसँ मरनी डरीनकेँ दऽ देल गेल। ओहो एहि प्राप्त धनकेँ धर्म काज बुझि पैघ पोखरि खुनाए देलक। जे मधुबनी जिलान्तर्गत विद्यमान अछि, मुदा काल-क्रमे ई पोखरि विकृत ओ भथन भऽ गेल अछि जे औखन चमनिया-डावर नामसँ जानल जाइछ।

एखनहुँ ई श्लोक अयाची मिश्र पुत्र शंकर आ पक्षधर मिश्रक प्रति अछि-

शंकर वाचस्पतियो:

शंकर वाचस्पति सदृशी,

पक्षधर प्रति पक्षी भूतो

न भवति।

अर्थात् शंकर ओ वाचस्पति तँ महादेव आ वृहस्पतिये छलाह। कहल जाइछ जे अयाचीक शंकर पक्षधर मिश्रक बाद भेल छलाह। ईहो अनुमान अछि जे मिश्र उपाधि- ओहि समयमे विद्वान लोकनिक होइत छल। खेदक विषय अछि जे एहन उद्भट न्यायक पण्डित अयाचीक कीर्त्ति गाथाक कोनोटा प्रमाणिक पोथी- आ हिनक जन्म सम्बन्धी ई. सनक परिचय- ठोस रूपमे नहि प्राप्त अछि।

अयाचीक निर्माउल भूमि सरिसब अद्यावधि म.म. सर गंगा नाथ झा एवम् हुनक पुत्र लोकनि सन विभूतिक जन्म देने अछि। कवि सेहो अयाचीक डीहक माटि माथमे लगबैत कहि उठैत छथि-

हे डीह!अमर कीर्त्तिक निधान

जकरा कण-कणमे स्वाभिमान।

थिक विप्र अयाचीक वर्त्तमान

से माटि थिक चन्दन समान।

सबा कट्ठा बाड़ीक साग

रखने छल अयाचीक पाग।।

अन्तमे श्रद्धा सुमन चढ़बैत एहि मिथिलाक विभूतिकेँ नमन करैत छी।

                 

नारायण यादव

 

गिफ्ट

ब्रह्मानन्द काकाक उमर ढलल जा रहल छल। बियाह भेला बहुतो दिन भय गेल छलैक। कोनो बाल बच्चा नहि भय रहल छल। कतेको बेर डॉक्टरसँ देखा चुकल छलाह। एतेक रास धन-सम्पतिक उपभोग के करत? ताहि सोचमे पड़ल रहैत छलाह ब्रह्मानन्द काका। बहुतो ओझा-बैद्यसँ सेहो आशीर्वाद लय चुकल छलाह। हिनक पत्नी सेहो बहुतो देवी-देवताकेँ कबुला-पाती कय चुकल छलीह। स्त्रीगणक विचारसँ कतेक धामीक हाथे कायल छलाह। सासु ननद सभ ओकरा पत्नीकेँ बड़ उपराग दैत कहैत छल जे ई मौगी अभागिन अछि, बाँझ अछि तेँ बाल-बच्चा नहि भय रहल छन्हि। दुनू पक्षसँ माने लड़का आ लड़की पक्षक स्त्रीगण बहुतो देवी-देवताकेँ कबुला पाती केयने छल। भगवानक महिमाकेँ कियो नहि जानि सकैत अछि। मखना सन मुसहरकेँ सत्ता सोरे धिया-पुता छैक। सुभेश्वर मण्डलकें जेकरा ने रहैक लेल घर छै आ ने घराड़ी सरकारी जमीन यानि गैरमजरूआ जमीनमे घर बनेने अछि। राति खाइत अछि तँ दिन लय झखैत अछि आ दिन खाईत अछि तँ रातिक लेल चिन्ता लागल रहैत छन्हि। शुभेश्वर मण्डल ब्रह्मानन्द काकाक लगुआ जन अछि।

ब्रह्मानन्द काका हरबाही कय जे चारि सेर धान भेटै छलै ताहिसँ सभ बाल बच्चाक भोजन साजन चलैत छैक। शुभेश्वर मण्डल मिहनतिया जन अछि। ब्रह्मानन्द काकाक दू बिगहा खेत बटाई करैत छल। 25-30 मन धान सालमे बटैया खेतसँ आ धन-कटनी कय 10-20 मन धान कमा लैत छल। ओहि धानसँ सालभरिक लत्ता-कपड़ा, तेल, साबुन आदिक व्यवस्था भय जाइत छलैन्ह। अधिक खर्चक लेल गिरहत मदद करबा लेल तैयार रहिते छन्हि। व्रह्मानन्द काका शुभेश्वर मण्डलकेँ बड़ मानैत छथि।

ब्रह्मानन्द काकाकेँ उदास देखि शुभेश्वर मण्डल सेहो चिन्तित रहैत छल। मण्डलजीक धिया-पुता भरि दिन ब्रह्मानन्द काकाक अँगना घरमे टहल-टिकोरा करैत रहैत अछि। मालिक ओकरा धियापुताकेँ बड़ मानैत छथि। कहियो-कहियो पैंट-शर्टक व्यवस्था सेहो कय दैत छथि। मण्डलोजी भगवानसँ गोहार लगबैत रहैत अछि। जे हमरा गिरहतकेँ बाल-बच्चा होइन्ह।

किछु दिनक पश्चात् ब्रह्मानन्द काकाक शुभचिन्तकक प्रार्थना भगवान सुनलैन्ह। व्रह्मानन्द काकाक पत्नी (लाल काकी) गर्भवती भेलीह।

ई शुभ समाचार सुनि सभ शुभचिन्तकक मन प्रफुलित भय गेलैन्ह। चारू तरफसँ शुभकामनाक संदेश आबय लागल। समय बितैत गेल। महिला डॉक्टरक संरक्षणमे लाल काकी रहय लगलीह। समयपर बच्चाक जन्म भेल। जच्चा-बच्चा सही सालामत रहल। घरमे खुशहाली आबि गेल। सासु-ननदिक उलहन-उपराग बन्द भय गेल। बच्चाक छठिहारमे हित-अपेक्षित आमंत्रित भेलाह। खूब नीक जकाँ भोज भात भेल। बच्चाकेँ ढेर रास उपहार भेटलैक। रातिमे सभ रश्म पूरा कय बच्चाक नाम भोला राखल गेल।

क्रमहि भोला किशोरावस्थामे पदार्पण कयलक। भोला बड़ संस्कारी बच्चा निकलल।

एक समयक बात छल। भोला बीमार भेल। व्रह्मानन्द काका आ लालकाकी ओकरा नीक डॉक्टर लग इलाजक हेतु लय गेलाह। डॉक्टर साहेब सभ तरहक जॉंच लिखलक। पौथोलजिक जॉंच रिपोर्ट आयल। डॉक्टर साहेब रिपोर्ट देखलैन। जॉंचमे ई ज्ञात भेल कि दिलमे सहस्त्र छेद अछि। डॉक्टर साहेब कहलैन जे एकर दिल वदलऽ पड़त। किछु दिन ठीक रहत, तकर बाद भोलाकेँ दिक्कत होमय लागत।

व्रह्मानन्द काका आ लाल काकी खूब कनलैथ। लालकाकी मनहि मन निश्चय कयलक जे हम अपन कलेजा दय बेटाक जान बचायब।

दबाई लिखल गेल। दबाई चलऽ लागल। भोला पूर्वक स्थितिमे आबि गेल। डॉक्टर साहेबक सलाह छलैन्ह जे चारि-पाँच वर्ष धरि ठीक रहत। तकर बाद दिल बदलबा देबैक। चारि-पाँच वर्षक बाद जखन भेालाक उम्र सत्रह वर्षक छलैक तखन मायकेँ कहलैन जे माय हमरा उठारहम जन्म दिनपर कोन तरहक गिफ्ट देबही।

लाल काकी बजलीह-

बौआ, तोहर अठारहम जन्म दिनपर जे गिफ्ट देबऽ से आलमारीमे राखल रहतऽ। तौ लयलीह।

भोला जिज्ञासा कयलैन्ह-

माय हमरा कहि दे जे की देमे।

लाल काकी बजलीह-

बेटा, आई धरि गिफ्ट कियो नहि देने हेतैक से तोरा देबह। अखन गिफ्टक नाम कहलासँ मजा किरकिरा भय जेतह।

भोला चुप भऽ गेलाह। समय बितैत गेल। जहिया भोलाक अठारहम साल पुरितै, ताहिसँ किछु दिन पूर्वे ओ बीमार भऽ गेलाह। माय-बापक एकलौता सन्तान। सभक ऑंखिक तारा।

फेर ओकर माय-बाप भोलाकेँ पूर्वक डॉक्टर लग लय गेलाह। ओ डाक्टर साहेब भोलाकेँ पहचैन गेलाह। ओ हुनका अभिभावककेँ दिल प्रत्यारोपणक सलाह जे पूर्बहिमे देने छल पुन: दोहरौलैथ। भोला माय अपन दिल देबाक लेल तैयार भेलीह। ऑपरेशनक तैयारी हेतु माय-बाप घर अयलाह। ऑपरेशनक फीसक व्यवस्था कयल गेल। भोलाक माय एकटा पत्र लिखि एकटा डिब्बामे बन्द कय आलमारीमे राखि देलक।

ऑपरेशन करयबाक हेतु भोलाक माय-बाबू डॉक्टर ओतय पहुँचलाह। भोलाक दिल निकालि, ओकर मायक हृदयमे आ मायक दिल भोलाक हृदयमे प्रत्यारोपित कयल गेल। माय-बेटा दुनू दुरुस्त छलाह। भोलाक स्वास्थ्य दिनानुदिन ठीक होमय लगलैक। ओ भोला मायक स्वास्थ्य दिनानुदिन छीन होयम लगलैक। जहिया भोलाक जन्म दिन छल ताहिसँ 25-30 दिन पहिनहि भोलाक माय स्वर्गवासी भय गेलीह।

श्राद्ध कर्म नीक जकाँ सम्पादित भेल। भोलाक जन्म दिन खूब धूम-धामसँ मनाओल गेल। भोलाकेँ अपन मायक द्वारा देल गिफ्टक बात मन परलैन्ह। ओ आलमीराकेँ खोललैन्ह। तँ देखलक जे एकटा डिब्बापर लिखल छैक जे हैपी बर्थ डे टू यू बेटा। भोला डिब्बा खोललैन्ह। डिब्बामे एकटा पत्र लिखि राखल छल। भोला मोरल पत्रकेँ पसारि पढ़य लगलाह। पत्रमे लिखल छल-

बेटा, हमर जिगरक टूकड़ा यदि तोँ एहि पत्रकेँ पढ़ि रहल छह तँ तू बिल्कुल ठीक भय जेबह। तोरा याद होयतह जे जखन तौं बीमार भेल छलह तखन हम तोरा डॉक्टर साहेबक पास लऽ गेल रही। डाक्टर साहेब बजलाह जे एकरा दिलमे बहुत रास छेद छैक। दवाई सँ ई ठीक नहि होयत, ओहि दिन हम बहुत कनलहुँ। आ निर्णय लेलहु जे बेटाकेँ हम अपन दिल दय ओकरा जीवन प्रदान करब। तोरा इहो याद हेतह जे एक दिन तूँ बाजल छलह जे मॉं हमरा अपन 18म जन्म दिनपर कोन प्रकारक गिफ्ट देबही, से बेटा हम तोहरा गिफ्टक रूपमे अपन दिल दय रहल छीह। एकरा सम्हारि कऽ रखियह। हैपी बर्थ डे टू यू बेटा।

    ३.

आशीष अनचिन्हार

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-3

 

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------


 

1


 

"सूरज" फिल्म केर ई नज्म जे कि मो. रफीजी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि हसरत जयपुरी। संगीतकार छथि शंकर जयकिशन। ई फिल्म 1966 मे रिलीज भेलै। एहिमे राजेंद्र कुमार, वैजयन्तीमाला आदि कलाकार छलथि।


 

बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है
 

हवाओं रागिनी गाओ मेरा महबूब आया है


 

ओ लाली फूल की मेंहँदी लगा इन गोरे हाथों में

उतर आ ऐ घटा काजल, लगा इन प्यारी आँखों में

सितारों माँग भर जाओ मेरा महबूब आया है


 

नज़ारों हर तरफ़ अब तान दो इक नूर की चादर

बडा शर्मीला दिलबर है, चला जाये न शरमा कर

ज़रा तुम दिल को बहलाओ मेरा महबूब आया है


 

सजाई है जवाँ कलियों ने अब ये सेज उल्फ़त की

इन्हें मालूम था आएगी इक दिन ऋतु मुहब्बत की

फ़िज़ाओं रंग बिखराओ मेरा महबूब आया है


 

एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 1222 1222 1222 1222 अछि। पहिल अंतरामे "मेंहँदी" शब्दमे मात्राक्रम गलत अछि हमरा हिसाबें मुदा उर्दूमे "शब्दक बीच बला "ह" केर उच्चारण पहिल शब्दमे मीलि क' ओकरा दीर्घ बना दैत छै जेना कि "लहरि" केर उच्चारण "लैर" सन आदि,  "मेंहँदी" केर उच्चारण तेहने भ' सकैए (पक्का पता नै) ओनाहुतो ई नज्म छै आ ताहूमे फिल्मक लेल लिखल गेल। शाइर एकरा गजल घोषित नै केने छथि। एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि।


 

2


 

"आप आये बहार आई" फिल्म केर ई नज्म जे कि मो. रफीजी ओ लता मंगेशकरजी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि आनन्द बक्षी। संगीतकार छथि लक्ष्मीकांत प्यारेलाल। ई फिल्म 1971 मे रिलीज भेलै। एहिमे राजेंद्र कुमार, साधना आदि कलाकार छलथि।


 

दिल शाद था कि फूल खिलेंगे बहार में

मारा गया ग़रीब इसी इंतज़ार में


 

मुझे तेरी मुहब्बत का सहारा मिल गया होता

अगर तूफ़ाँ नहीं आता किनारा मिल गया होता


 

न था मंज़ूर क़िस्मत को न थी मर्ज़ी बहारों की

नहीं तो इस गुलिस्ताँ में कमी थी क्या नज़ारों की

मेरी नज़रों को भी कोई नज़ारा मिल गया होता


 

ख़ुशी से अपनी आँखों को मै अश्को से भिगो लेता

मेरे बदलें तू हँस लेती तेरे बदलें मैं रो लेता

मुझे ऐ काश तेरा दर्द सारा मिल गया होता


 

मिली है चाँदनी जिनको ये उनकी अपनी क़िस्मत है

मुझे अपने मुक़द्दर से फ़क़त इतनी शिकायत है

मुझे टूटा हुआ कोई सितारा मिल गया होता


 

एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 1222 1222 1222 1222 अछि। बहुत काल शाइर गजल वा नज्मसँ पहिने माहौल बनेबाक लेल एकटा आन शेर दैत छै ओना ई अनिवार्य नै छै। एहि नज्मसँ पहिने एकटा शेर "दिल शाद था कि फूल खिलेंगे बहार में मारा गया ग़रीब इसी इंतज़ार में" (एहू शेरमे बहर छै) माहौल बनेबाक लेल देल गेल छै।  एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि।


 

3


 

"दो बदन" फिल्म केर ई नज्म जे कि मो. रफीजी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि शकील बदायूँनी। संगीतकार छथि रवि। ई फिल्म 1966 मे रिलीज भेलै। एहिमे मनोज कुमार, आशा पारेख आदि कलाकार छलथि।


 

भरी दुनियाँ में आख़िर दिल को समझाने कहाँ जाएं

मुहब्बत हो गई जिनको वो दीवाने कहाँ जाएं


 

लगे हैं शम्मा पर पहरे ज़माने की निगाहों के

जिन्हें जलने की हसरत है वो परवाने कहाँ जाएं


 

सुनाना भी जिन्हें मुश्किल छुपाना भी जिन्हें मुश्किल

ज़रा तू ही बता ऐ दिल वो अफ़साने कहाँ जाएं


 

नजर में उलझने, दिल में है आलम बेकरारी का

समझ में कुछ नहीं आता सुकूँ पाने कहाँ जाएँ


 

एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 1222 1222 1222 1222 अछि। एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि।

 

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