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पथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य    

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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विदेह नूतन अंक पद्य १

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नन्द विलास राय

 

अछैत पुत्र निपुत्र

पेट पीठमे सटल

कपड़ा ठाम-ठाम फटल

केश-दाढ़ी बढ़ल

डॉंर सेहो झुकल

गाल पचकल

ऑंखि धँसल

बिनु ठेंग

नइ होइत रहैन चलल

छातीक हार

झक-झक देखाइत

देह कँपैत

दमाक रोगी जकॉं हँफैत

अँगने-अँगने भीख मंगैत

मुहसँ कहैत

मलिकाइन किछ दअ

दियौ निपुतराहाकेँ

मास-दू मासपर अबैत

आ यएह बात बजैत...।

 

हम जलखै खा, खेलौं पान

आ जाइत रही दलान

तखने ओ देढ़ियापर आएल

आ देलक अवाज

मलिकाइन किछु दअ दियौ

निपुतराहाकेँ।

 

तैपर हमर पत्नी बजली

ऐ भिखमंगाकेँ कनिक्को

नहि होइ छै लाज

से नहि होइ छै

जे करतै केकरो कोनो काज।

 

पत्नीक बात सुनि

हम भिखमंगा दिस ताकि

देखलौं ओकर काया

ओकर देह-दशा देख

लागल हमरा बड़ माया।

 

हमरा मनमे भेल

किए नहि सुनिऐ

भिखमंगाक बेथा

अपनाकेँ निपुतराहा

किए कहैत अछि

की छै ओकर जीवनक कथा।

 

की वास्तवमे नै छै ओकरा बेटा

आकि छै ऐमे कोनो राज?

 

हम ओकरा दलानपर लऽ गेलौं

बड़ आदरसँ जलखै करेलौं

पछाइत ओकरासँ पुछलिऐ

बाबा, अहॉं अपनाकेँ किए

कहै छी निपुतराहा

की नइ अछि अहॉंकेँ बेटा?

 

हमर बात सुनि

ओकरा ऑंखिसँ

गिरए लगल दहो-बहो नोर।

 

बाबा जुनि कानू

कनलासँ नहि हएत

समस्याक निदान

ई कहैत आरो

देलिऐ बोल-भरोष

हमरा बातसँ भेलै

ओकरा बड़ संतोष।

 

बौआ चारि बेटा रामकेँ

एको नहि काम-केँ

बौआ रहमर नाम

छी राम परसाद

आ घर अछि लदनियॉं

जहिये पत्नी मरल हमर

तहिये अन्हार भऽ गेल

हमर सौंसे दुनियॉं

बौआ हमरो छल

चारिटा

जमीन-जत्था बेच

सभकेँ पढ़ेलौं

पढ़ा-लिखा कऽ

मनुख बनेलौं

चारू बेटा नौकरी करैए

सभ अपन परिवारक संग

बाहरे रहैए

मुदा हमरा कियो ने देखैए

मान दिन पहिने ओ

भगवानक घर चल गेली

मुदा हमरा भीख मांगऽ

लेल छोड़ि गेली।

 

बौआ, जेठका बेटा

अपन सासुक मृत्युपर

केलक रसगुल्ला-लालमोहनक भोज

मुदा माए-बापक नहि

कहियो केलक खोज।

 

दोसर बेटा सारिक बिआहमे

लाख टाक खर्च करि

केलक कन्यादान

मुदा ओहो नहि कहियो देलक

हमरा सभपर धियान

तेसर बेटा अपना सारकेँ

पूनामे एमबीए पढ़बै छै

सुनै छिऐ दस हजार टका

मासे-मास पठबै छै

सभसँ छोटका बेटा अछि

पत्नीक बड़का भक्त

हमरा जे चिट्टियो लिखैत

सेहो ने भेटलै वक्त।

सासु-ससुरकेँ संगे राखि

करैत अछि पतिपाल

एम्हर बाप भीख मंगै छै

तेकर नहि छै कनिक्को खियाल।

 

हम पुछलिऐ

की अहॉंकेँ नै अछि बेटी

तैपर ओ बाजल

बेटी अछि

वएह तँ केलक

माइक क्रिया-कर्म

भगवान नीक करथुन ओकरा

ओकरे भेलै सभसँ

पैघ धर्म।

 

फेर पुछलिऐ-

बेटीए ओइठाम किए

चलि जा रहै छी

गामे-गाम भीख किए

टहैल-टहैल मंगै छी?

 

तैपर ओ बाजल-

बेटीक दुआरिपर रहबकेँ

हम कखनो नै बुझै छी नीक

तइसँ बढ़ियॉं गुजर करै छी

मांगि-चॉंगि भीख। 

ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।