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पथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य    

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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विदेह नूतन अंक पद्य १

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(c)२००४-१७.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह पथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह पथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

श्री कपिलेश्वर राउतजीक

आधा दर्जन लघु कथा-

चाहबला

बाबू आब चाहक दोकान छोड़ि दियौ। हम सभ भाँइ आब कमाए-खटाए लगलौं। आब अहाँक उमेरो पचपन-साठि भेल। सभ दिन कि काम-धन्‍धा करिते रहब।

बौआ कहलह तँ बड़ नीक बात, मुदा चाहे दोकानक बदौलत तूँ सभ मनुख बनलह आ आइ शहर जा रूपैआ-पैसा देखै छहक। हम तँ कौहुना अपन रोजगारमे लागल रहै छी। देहकेँ धुनि गुजर-बसर करै छी। कमाएल-खटाएल देह अछि, जेतेक शरीरकेँ चलाएब-फिराएब तेतेक ने देहक खून चालू रहत आ अपनो दुरुस्‍त रहब। तूँ सभ तँ हमरा काहिल बनबैक बात कहै छह। जाबत धरि पैरुख अछि ताबत धरि हम कमेबे-खटेबे करबह। रफिक मियाँकेँ नहि देखलहक, पाँचटा बेटा छै, पाँचो कमासुत, वेचाराकेँ सभ काम-धन्‍धा छोड़ा देलक। काज छुटिते वेचरा लोथ भऽ कऽ मरि गेल। नोकरियोबला केँ तहिना होइ छइ। जहाँ ने कि काजसँ रिटायरमेन्‍ट भेटल कि वेचारा अपनाकेँ कोनो जोकरक नहि बुझऽ लागल। जिबाक बीस बर्ख तँ जीबत पाँच बर्ख। मने झूस भऽ जाइ छइ।

सुखल नून, एकटा मोटगर रोटी आ एक लोटा पानि नेने रमाकान्‍त बाबू बालेसरकेँ पनपियाइ लऽ कऽ गेल छल। आरिपर ठाढ़ भऽ कऽ जोरसँ बजला-

रौ बाले, पनपियाइ कऽ जो।

बालेसर आसा-बाटीमे रहबे करए। झट-दे बरद ठाढ़ कऽ आरिपर आबि, हाथ मुँह धो जलखै करए लागल।

भूखलमे जहिना गुल्‍लैरो मीठ होइ छै तहिना बालेसर हाँइ-हाँइ पाँचे-सात कौरमे रोटी खा गेल आ एक्के नीशामे भरि लोटा पानि सेहो पीब गेल। मुदा आरो पानि पीबैक इच्‍छा रहइ। तैबीच रमाकान्‍त बाबूसँ बालेसर कहलकैन-

मालिक थोड़ेक कालक बाद एक लोटा पानि लऽ कऽ आएब।

रामाकान्‍त बाबू किएक पानि लऽ कऽ जेता! पानि लऽ नहि गेला।

चैत-बैशाखक कर-करौआ रौद, तैपर पछिया हवा चलि रहल छल। एहेन समयमे बालेसर गहुमक खेतकेँ जोति रहल छल। पानिक आशा-बाटी तकैत रहल। मुदा जखन मालिक पानि लऽ कऽ नहि गेलैन तँ खिसिया कऽ हर खोलि देलक।

हर-बरद नेने घरपर पहुँच, बरदकेँ खुट्टापर बान्‍हि हरकेँ गठुल्‍लामे राखि अघोर मने बालेसर अपना घरपर आबि गेल। थोड़ेक सुसतेलाक बाद भरि इच्‍छा पानि पीलक, तहन मन कनी शान्‍त भेलइ। मुदा मनमे तेसरे तरहक उड़ी-बिड़ी धऽ लेलकै।

रमाकान्‍त बाबूक परिवार गामक भगिनमान। सभतूर पढ़ल-लिखल। रमाकान्‍त बाबूक पीत्ती दरभंगा महराजक ओइठाम नोकरी करैत, कियो दिवान तँ कियो पटबारी। रमाकान्‍त बाबू अपने सात भैयारी, सातो भाँइमे दू भाँइ गामपर रहैत छला बाँकी पाँचो भाँइ कियो सरकारी नोकरी तँ कियो प्राइवेट नोकरी करैत। रमाकान्‍त बाबूक मझिला भाए- विनोद आ अपने गामक खेती-बाड़ीक काज देखैत छला। ऊपरसँ निच्‍चाँ परिवारक सभतूर धूर्त नम्‍बर एक, जालफरेबी नम्‍बर एक। कियो सोनाक कंगना लऽ कऽ नदीक कछेरमे बैसल तँ कियो बहुरूपिया रूप धऽ कऽ अपन उल्‍लू सोझ करैत। सिरिफ छोटका भाए जेहने नाम विनोद तेहने काम विनम्र। 

बालेसरक पिताक नाओं रामकिसुन। रामकिसुन अपना जातिक मैनजन छल। शरीर एकदम हट्टा-कट्ठा रहै रामकिसुनक। रहबो किए ने करितै अखड़ाहा परक खेलेलहा देह रहै किने। अपना जवानीमे रमाकान्‍त बाबूक अमलदारीसँ पूर्व हुनके परिवारमे हरवाहि करैत छल। पछाइत जखन रामकिसुन हरबाहि छोड़ि देलक तहन बेटा पकैड़ लेलकै, माने बालेसर हरबाहि करए लागल।

आइ बालेसर जखन तबधल मने घरपर आएल तँ मनमे एकटा संकल्‍प केलक। संकल्‍प ई जे आब अनकर हरबाहि नहि करब। अपन रोजगार करब। अपन काज करब।

बिहान भने रमाकान्‍त बाबू जखन हरबाहि लेल बालेसरकेँ कहलखिन तँ ओ साफ-साफ कहि देलकैन-

आब हम हरबाहि नइ करब। आ ने अहाँक ओइठाम कोनो आने काज करब।

रमाकान्‍त बाबू पुछलखिन-

किए ने हरबाहि करमे? आ हमर जे कर्जा-बर्जा अछि से पहिने दऽ दे। बापे तेतेक खेने छौ से कहल ने जाए।

बालेसर ने आव देखलक आ ताव, तर-दे बाजल-

हिसाब कऽ लिअ।

ठीक छै, घरपर आ हिसाब कऽ ले।

ई कहैत रमाकान्‍त बाबू अपना घरपर चलि गेला।

ऐ घटनाकेँ आइ मास-दू-मास बीति गेल। तैबीच रूपौलीमे कोनो महतोक घरमे डकैती भेलइ। डकैत घरवारीकेँ मारबो-पीटबो केलकै आ लाखो रूपैआक समान सेहो लूटलकै।

रमाकान्‍त बाबू जालफरेबी लोक तँ छथिए। ब्‍लॉकक प्रमुख सेहो छैथ। दरोगासँ मिल कऽ बालेसरक पिताकेँ डकैती केसमे फँसा देलक।

रामकिसुनक घरपर पुलिस सभ दौर-बरहा करए लगल। आब रामकिसुन बोन-झाड़मे नुकाएल फिरए। घरक सभ समांग सबहक मुँहपर फुफरी उड़ए लगलै।

अन्‍तमे रामकिसुन रमाकान्‍त बाबूक पएर-दाढ़ी पकैड़ केससँ उबारैक आग्रह-बात करए लगल। बालेसरो हारल नटुआ जकाँ फेर रमाकान्‍त बाबूक हरबाहि करए लगल।

ओही समयमे पाहीपट्टीक एकटा मालिकक जमीन छेलइ। जइ जमीनक सटले रामकिसुनक घर सेहो छेलइ। ओ पाँचो बीघा जमीन मालिक बेचैक सूरसार करए लगला। रमाकान्‍त बाबू पाँचो बीघाक गप कऽ लेलैन। लिखबै बेरमे रमाकान्‍त बाबू ओइ पाँच बीघाक अलाबे रामकिसुनक जे पाँच कट्ठा जमीन सहित घराड़ी छेलै तेकरो खाता-खेसरा आ रकबा चढ़ा लेलैन।

दखल-कब्‍जा बेरमे बालेसर रोकलक तैपर रमाकान्‍त बाबू बजला- 

रौ बाले, चूप रह। ई जमीन मालिकक छेलै ओ हमरा लिखि देने अछि। हे देखही दस्‍ताबेज।

बालेसर मुर्ख तँए अनकासँ दस्‍ताबेज देखा चूप भऽ गेल। चुपे नहि भेल बल्‍कि बौक भऽ अँगना चलि आएल। किछु फुरबे ने करइ।

रामकिसुनकेँ तीन लड़का। जेठकाक नाओं- बालेसर, मझिला- राजशेखर आ छोटका- चन्‍द्रशेखर। बोनि-बुत्ता करि कऽ कोनो धरानी सभ समांगक गुजर-बसर चलैत रहइ।

बालेसर नून-तेलक दोकान खोलने छल मुदा दोकान चलबै छेलै राजशेखर। समय बीतैत गेलइ। मुदा जखन समय खराप होइ छै तँ बारहोरंगक बसात बहए लगिते छै, सएह भेलै बालेसरकेँ। वेचाराकेँ तेतेक ने दोकानक उधारी लागि गेलै जे अन्‍तमे नून-तेलक दोकान छोड़ए पड़लै। पूजीक अभाव भेने वेचारा चाहक दोकान खोललक। कम पूजीमे चाहक दोकान नीक होइते छइ। चाहक दोकान खूब चललै। समय आब बोलसरक आपस एलइ।

बालेसरकेँ तीन लड़का। जेठका लड़काक नाओं- चन्‍द्रमोहन, मझिलाक- कृष्‍णमोहन आ छोटका नाओं छेलै- इन्‍द्रमोहन। तीनू भाँइ पढ़ि-लिख कऽ दिल्‍लीमे नोकरी करैले चलि गेल। नोकरियो नीक ठाम लगलै। एक एकाउण्‍टेंट, दोसर संचार विभागमे आ तेसर कृषि विभागमे तृतीय श्रेणीक काज करए लगल।

बालेसरक मझिला भाए- राजशेखरकेँ सेहो दू लड़का। पहिल उमाकानत आ दोसर कृष्‍णकान्‍त। उमाकान्‍त एगारहवी केलाक बाद बम्‍बइ चलि गेल आ कोनो सेठक ओइठाम ड्राइवरी करए लागल। आ छोटका लड़का चन्‍द्रशेखरकेँ एक लड़का जेकर नओं छेलै लालमोहन जे पढ़लक-लिखलक नहि। जहन पन्‍द्रह बर्खक भेल तँ भागि कऽ मामा गाम चलि गेल। आ एक गोरेक संगे लुधियाना जा रहए लगल। लुधियानामे ओ कोनो किराना दोकानमे काज करए लगल।

परिवारमे चारू दिससँ आमदनी भेने बालेसर तीनू भाँइक मन हरदम खुशीए-खुशी रहए लगलै। जहिना अदरा नक्षत्रमे झम-झमौआ बरखा भेने, अगहनमे नीक उपजा भेने किसानक मन हर्खित होइ छै तहिना बालेसरोक परिवारमे सबहक मन हर्खित रहए लगलै।

किछु दिनक बाद रामकिसुनक मृत्‍यु भऽ गेलैन।

बालेसर अपन पिताक श्राद्ध-कर्म नीक जकाँ केलक। रसगुल्‍ला-लालमोहनक भोज केलक। घरो-दुआर नीक बना लेलक। ट्रेकटर सेहो खदीर लेलक। शानसँ गुजर-बसर कऽ रहल अछि। 

बालेसर मुदा चाहक दोकान करिते रहल। धिया-पुता सभ जहन गाम आबै तँ चाहक दोकान चलबैत पिताकेँ देख मन झूस भऽ जाइ।

बालेसरक परिवारक उन्नैत देख रमाकान्‍तक परिवार गलल जाइ। दुष्‍ट बुधिक लोक छलाहे।

एमहर उमाकान्‍तक जेतए धनकुटिया मशील चलैत रहै, तेतइ छेलै एकटा आमक गाछ। बालेसरे ओकरा रोपने छल आ अपनेसँ गाछक सेवा सेहो केने छल। मुदा ओ गाछ कब्‍जामे छेलै रमाकान्‍त बाबूकेँ, ओकर फल वएह खाइ छला।  संयोगसँ एक दिन एकटा आम दुआरे झंझट भेलै, माने रक्का-टोकी भेलइ। एक दिन उमाकान्‍त ओही आमक गाछपर दाबा ठोकि देलकै। झंझट उठलै। केस-फौदारी भेलइ। कोर्ट-कचहरीक आबा-जाही शुरू भेल। रमाकान्‍त बाबू बजैथ-

चाहक दोकानबला कि हमरासँ केस लड़त।

उमाकान्‍तक पिता- राजशेखर अलगसँ कोर्टमे जमीन-जत्‍था सम्‍बन्‍धी एकटा मोकदमा कऽ देलक, जइमे बाप-दादाक अरजलहा जमीन जे रमाकान्‍त बाबू लिखा नेने छला तैपर मुकदमा चलए लगल।

रमाकान्‍त बाबूकेँ अपन केलहा पाप सभ भूत भऽ आगाँमे नाचए लगलैन। सबूतक जखन देख-भाल मजिस्‍ट्रेटक कोर्टमे होमए लागल तँ मजिस्‍ट्रेट रमाकान्‍त बाबूसँ कहलकैन-

आपको विवादित जमीन कैसे हाँसील हुआ और जिससे आप जमीन लिखबाये उनको ये विवादित जमीन कैसे प्राप्‍त हुआ, इसका सबूत दाखिल करें।

रमाकान्‍त बाबूकेँ तँ ऊपर-निच्‍चाँ सुझए लगलैन। दिनेमे तरेगन देखा लगलैन।

एमहर बालेसरक समांग सभ चौक-चौराहापर बजैथ-

बहुत धन खेलेँ रे बगरा आ पड़लौ मरदसँ रगरा। जेतेक बेइमानी करि कऽ अरजने छेँ से सभटा आब बेरा-बेरी निकलतौ। नहि तँ एकटा सभ्‍य मनुख जकाँ समाजमे रह। हम तँ कौहुना अपन रोजगार इमानदारी पूर्वक करैत चाहे दोकानसँ आगाँ बढ़लौं। अपनापर हमरा अपन कर्मक बिसवास अछि। ठकि-फुसला कऽ तँ नहि ने। कमाइबला खेतइ आ लूटैबला जेल जेतइ।

यएह सभ बात आइ बालेसर अपन चाहक दोकानपर चन्‍द्रमोहनकेँ कहि रहल छला।

शब्‍द संख्‍या : 1279


 

 

 


 

गामे बीरान भऽ गेल

किसुन देव दुआर परहक चौकीपर असमंजस भेल बैसल छला। तेकर कारण छेलै जखन तीस-पैंतीस बर्खक उमेर छेलैन, माने आइसँ साठि बर्ख पूर्व- जहन जुआनी चढ़ल छेलैन, तेहेन अवस्‍थामे कमाइ-ले मोरंग चलि गेला। गाममे कहियो कोनो साल रौदी, कोनो साल दाहीमे भूखमरीक समस्‍या उत्‍पन्न भऽ जाइत। मुट्ठी भरि लोकक हाथमे जमीन-जत्‍था, अधिकतर मजदूर तबकाक लोक। बोइन-बुत्तापर जीनिहारकेँ विकट समय रहने कएक साँझ उपासे रहऽ पड़ै छेलैन।

अही सभ बातक सोच आइ किसुन देव भायकेँ भेल छेलैन। हाथमे चाहक कप देना पत्नीकेँ एक घन्‍टा भऽ गेल छेलैन। चाह पानि-पानि भऽ गेल छल। तखने राम सेवक चाह पीबैले किसुन देव भाइक घरे लगक चाहक दोकानपर जाइ छला।

राम सेवक किसुन देव दिस तकैत पुछलखिन-

भाय एना किए मन झूस अछि। की केकरोसँ झगड़-झंझट भेल हेन, मुँह किए तुरुछ केने छी?”

समाजिक रिस्‍तामे किसुन देव आ राम सेवकक बीच भाय-भाय चलैत रहैन।

किसुन देव बजला-

नहि भाय, कोनो बात नहि अछि, पैछला जिनगीक बात सभ मोन पड़ि गेल हेन। आबह-आबह बैसह, केतए जाइ छह। चाह पीब लएह, तैबीच किछु गपो-सप्‍प हेतइ।

राम सेवक ससैर कऽ किसुन देव लग जा चौकीए-पर बैसला। आ किसुन देव पत्नीकेँ हाक देलखिन-

यइ सुलोचनाक माय, कनी एमहर आउ, नहि तँ एक गिलास चाह आरो बनौने आउ।

अपना हाथक सरेलहा चाह किसुन देव एके घोंटमे पीब लेला। आ बजला-

राम सेवक भाय, की कहब आब तँ हमर उमेर अस्‍सी-पचासीक लगभग भऽ गेल। पाँचटा बेटा अछि। सबहक बिआह-दुरागमन भऽ गेलै, सभ बेटा धिया-पुता आ कनियाँ लऽ कऽ दिल्‍लीमे जमीन लऽ घर बना ओतै रहैत अछि।

राम सेवक कहलकैन-

भाय साहैब, से तँ नीके ने अछि, अपन कमाइए आ धिया-पुताक गूजर-बसर करैए। अहाँकेँ कोनो तरहक जवाबदेहियो तँ नइ अछि।

बिच्‍चेमे टोन दैत किसुन देव कहलकैन-

नइ हौ सेवक भाय, से बात नै छइ। हम दुनू परानी बुढ़ा-बुढ़ी की कऽ सकै छी। कियो एक लोटा पैनो देनिहार नइ अछि। गाममे की रोजगारक आब कमी छइ। पहिने ने रोजगारक कोनो साधन नहि छेलै, लोक ढाका, बंगाल, मोरंग, दिनाजपुर, सिल्‍लीगुरी जा कऽ धन रोपनी, मरूआ रोपनी आकि पटुआ झाड़ै छल, आ केते गोरे बहलमानी सेहो करै छल। चन्‍द किसिमक रोजगार करै छल।

हमहीं एक दिन बिराटनगरसँ पाँचटा बहलमानक संग कटही गाड़ी लऽ कऽ जंगल लकड़ी आनैले जाइत रही। तीन दिनका रस्‍ता छेलै, रातिमे बाघक दुआरे गाड़ीकेँ गोल कऽ कऽ राखि दिऐ, बीचमे बरदकेँ बान्‍ही आ काते-कात चारू कोणपर लकड़ीए-केँ घूर कऽ दिऐ आ एक गोरे सिरपैह लऽ कऽ खड़ा पहरा दिऐ आ बैली सभ सुती। बिहान भने गाड़ी जोति कऽ विदा होइ। एक दिन लकड़ीसँ लादल गाड़ी छल। जंगलमे एकटा बाघ घात लगौने छल, डेरासँ दस लग्‍गा गाड़ी जोइत कऽ आगाँ गेल हएब आकि ऐगला गाड़ीक एकटा बरदक ऊपर बाघ झपटलक आ घिचने-तिरने घोर जंगल दिस लऽ गेल। कोनो तरहेँ बिराटनगर एलौं।

राम सेवक पुछलकैन-

ऐँ यौ भाय, तहन तँ प्राण उड़ि गेल हएत, डर नहि भेल जंगलसँ बहराइत?”

किसुन देव कहलकैन-

डर कहूँ नै हुअए, हिम्‍मते ने कठिन-सँ-कठिन काजकेँ हल्‍लुक बना दइ छइ। हमरा सभकेँ तँ रेहल-खेहल रहए, एहेन-एहेन घटना सभसँ।

राम सेवक कहलकैन-

यौ भाय साहैब, हम जौं रहितौं तँ एक तँ प्राणे उड़ि जाइत आ जँ बँचियो जइतौं तँ नानी ने मरिहें जे फेर जंगल दिसक रस्‍ता दोहरा कऽ धरितौं!”

हे सुनू एक बेरका घटना कहै छी। किसुन देव मुँहपर हाथ फेरैत बजला-

सिल्‍लीगुरीमे पटुआ झाड़ैत रही,भरि जाँघमे जोंक धऽ लेलक। से की कहब तमाकुल चुना कऽ रखने रही, हँसूआ सेहो रखने रहैत छेलौं। ऊपरमे आबि हँसूआसँ सभ जोंककेँ खड़ैर दिऐ आ चुनेलहा तमाकुल सबहक मुँहपर दऽ दिऐ। कियो सुइया-डोरा सेहो रखने रहैत छल, सुइएसँ गाँथि कऽ डोरामे धऽ लटका दिऐ आ डॉंरमे खोंसि लिअए। जोंक सभ पानिमे दहलाए लगए तहन पटुआ झाड़ी।

राम सेवक कहलकैन-

यौ भाय, तहन तँ बड़ जीबटगर काज करी।

किसुन देव भाय फेर कहलखिन-

तोरा एतबेमे अचम्‍भा लागि गेलह। हे सुनह- गाम आबी तँ सत-सत कट्ठा खेतमे हम आ हमर भजार अच्‍छेलाल मिल कऽ राति-के कोदारिसँ तामि दिऐ। दू-दू कट्ठा खेतमे असगरे धान-मरूआ रोपि ली। तब ने अस्‍सी बर्खक उमेरमे दुरुस्‍त छी। मरूआ सनक निरोग अन्नकेँ लेाक त्‍यागि देलक।

बिच्‍चेमे राम सेवक पुछि देलकैन-

अच्‍छेलाल के छल?”

नै चिन्‍हलहक, पितमराक बाप छल। ओकरा तेतेक तागत छेलै जे सात मनक पटुआ सोनक गठियाकेँ बिराटनगरमे असगरे उठा कऽ गोदाममे राखि दइ। एक दिन गोदामक चौकीदार देखलकै, ओ जा कऽ नेपालक थानामे कहि देलकै, वेचाराकेँ पकैड़ कऽ जेलमे दऽ देलकै। तहिना खाइयोमे छल, एक किलो चौरक भात कल्‍लौमे आ सातटा मरूआ रोटी जलखैमे खाइ छल। एक किलो राहैरक उसना तँ ओकर बामा-दहिना हाथक खेल छल। केतेक कहब बितलाहा गप-सप्‍प। अखुनका धिया-पुताकेँ देखै छिऐ जे दबाइयेपर खेपैए। झरो फिरैले साइकिल वा मोटरे साइकिलसँ जाइत अछि। बीसो किलो गहुमक मोटरी लऽ कऽ पिसबैले नइ जा होइ छै, ओहूले जने चाही। काजसँ देह चोरबैत रहतह। 

राम सेवक बाजल-

भाय साहैब,  आब तँ गाम-घरमे लोके माने जुआन-जहान कहाँ अछि। खेत सभ परती पड़ल रहैत अछि। नहि तँ गाछ-बिरीछ लगौल अछि। गाम जेना सून भऽ गेल हेन।

किसुन देव भाय बजला-

यौ सेवक भाय, हमरा तँ बुझना जाइत अछि जेना गाम उनैट गेल हेन आकि गाम सुनैट गेल हेन से बुझने ने जाइत अछि। कान तँ सोन नहि, आ सोन तँ कान नहि।

गाममे देखबहक जे पहिने कच्‍ची सड़क छल से आब पक्कीकरण भऽ गेल। जैठाम गाममे सबहक दुआरपर, केकरो एक पल्‍ला तँ केकरो जोड़ भरि बरद छल भैंस छेलै, गाए छेलै तैठाम आब देखबहक जे दस हजार लोकक बस्‍तीमे पाँच जोड़ा बरद नै भेटत। जहिना बड़का माछ छोटका माछकेँ खा जाइत अछि तहिना खेतीक उपकरण भेने भऽ गेल। आब ट्रेक्‍टर भेने जमीनक जोत-कोर, अन्नक दौनी, फसिलक कमठान इत्‍यादि सभ तरहक काज हल्‍लुक भऽ गेल हेन। तहिना अन्नक फसिलक बीआ-बैल भेने, सुख-सुविधा तँ भऽ गेलै मुदा लोक गामे छोड़ि कऽ पड़ा गेल हेन तखन खेती तँ बीरान हेबे करत।

हँ से तँ भाइये गेल हेन। –राम सेवक बाजल।

तैपर किसुन देव बाजल-

यौ भाय, एम.बी.बी.एस. डाक्‍टरकेँ देखबै जे मनुखक खून-पैखानाक जॉंच करत। हमरे पोती डोली दिल्‍लीसँ गाम आएल छल, दसमीमे पढ़ैत अछि। एक दिन दलानपर बैसल रही, तखने गाए गोबर केलक, पोतीसँ कहलिऐ गइ डोली गोबर कनी कोदारिसँ हटा दहिन तँ। मुदा पोती हमरापर ऑंखि गुड़रैत अँगना दिस चलि गेल। से कहू तँ कोदारियोसँ गोबर उठबैमे घिरना भेलइ!”

बिच्‍चेमे राम सेवक किछु बाजए लागल मुदा किसुन देव रोकैत फेर बाजल-

यौ भाय, गोबर तँ ओहन वस्‍तु अछि जइसँ पूजाक ठाँउ नीपल जाइत अछि। खेतमे दियौ तँ उर्बरा शक्‍ति बढ़त, भानस कऽ सकैत छी, गोबरक छौरसँ माल-जालक थैरकेँ साफ कऽ सकै छी। कोनो फिनाइल वा अन्‍य दबाइक जरूरत नइ पड़त। बरतन-बासन साफ कऽ सकै छी। से कहू भाय, देहात सनक शुद्ध कोनो वस्‍तु शहरमे भेटते। तेहेन गामकेँ त्‍यागि कऽ लोक परदेशमे बास करैत अछि। शहरमे जेकरा लेल रूपैआ लगै छै से गाम-घरमे मंगनियेँमे भेट जाइ छइ।

थोड़ेकाल चुप भऽ कऽ किसुन देव फेर बाजल- 

आब कि ओ गाम रहलै जे सभ वस्‍तु लेल लोक कलहन्‍त छल। आब तँ गली-गलीमे पक्की सड़क छै, घरे-घर टी.बी. छै, मोटर साइकिलकेँ के पुछैए चरिचक्किया गाड़ी केतेको भऽ गेल अछि गाम-घरमे। स्‍कूल छै, अस्‍पताल छै, बिजली छै मुदा जुआन-जहान लोकक अभावमे गाम बीरान भऽ गेल अछि, एकदम्‍म सुनसान जकाँ।

राम सेवक अपन मुड़ी डोलबैत किसुन देव दिस तकैत रहल। मुदा किछु बाजल नहि।

शब्‍द संख्‍या : 1162

 


 

 

 


 

तीलकेँ तार

लाल काकी साँझ दइले दीप नेस कऽ तुलसी चौरा लग जाइ छेली। अँगनामे गहुमक बोझ जह-पटार राखल छेलइ। दोगे-दोग लाल काकी तुलसी चौरा लग पहुँचली। तखने पछिया रमकल। लाल काकीक नजैर रहैन तुलसी चौरापर। हवा आ गर्मीसँ गहुमक बोझ हरनाठ भेले छल, कखैन-ने-कखैन एकटा बोझमे दीपसँ आगि लपैक लेलकै। तखन लाल काकी किछु ने बुझि सकली। जखन बोझसँ धुआँ निकलए लगल कि मझिली पुतोहु हल्‍ला केलखिन-

आगि लागि गेलइ।

घरक सटले दऽ कऽ पक्की सड़क छेलै, लोकक आवाजाही तँ छेलैहे। कियो बगलक गाम कछुबी-दे बाजल- नवटोलियामे आगि लागल छइ।

ओतुक्का लोक दौड़ल। कियो कछुबीकेँ तँ कियो तमुरिया दिस गेल। ओ बाजल-

नवटोलिया सुड्डाह भऽ गेल!”

आब तँ नवटोलियाक जेतेक कुटमैती लागिमे छेलै ओ सभ दौड़ल। जहिना कोनो नीक बात होइ कि अधला बात आकि कोनो समदिया एक दोसरक संग बात-चीत कहैमे किछु तिलिया-फुलिया लगा दैत अछि, आ किछु बातकेँ घटा-बढ़ा कऽ कहैत अछि, तहिना भऽ गेल।

जहन देखए गेल तँ मात्र एकटा गहुमक बोझक किछु अंश झरकल छल।

तैबीच सुन्‍दरी पुतोहु बजली-

यै लाल काकी, देखियौ लोकक किरदानी! एतेक ने तीलकेँ तार बना कऽ बाजल जे कर-कुटुम तकक लोक पहुँच गेल।

लाल काकी बजली-

यै कनियाँ, अहिना लोक सभकेँ बजैमे कोनो कि टका-पैसा खर्चा होइ छै, गपकेँ छिलैन करैत-करैत केकरोसँ केकरो मुहोँ-ठुठी करा देतह। केकरो अपना बातसँ झूका देतह वा होशे उड़ा देतह। सही बात बुझत नहि, आ तीलकेँ तार बना उड़बैत रहत।

शब्‍द संख्‍या : 227
 

 


 

एक चुनौटी तमाकुल

महान क्रान्‍तिकारी जुझारू समाज सेवी कम्‍युनिष्‍ट नेता शुभंकर बाबू। अंग्रेजक शासन अन्‍तिम अवस्‍थामे पहुँच गेल छल, गाम-घरसँ लऽ कऽ शहर तकमे गाँधी बाबाक पूर्ण अजादीक घोषणा भऽ चुकल छल। जँहि-पटार क्रान्‍तिकारी सभ रेलक पटरी, टीलीफोनक तार, सरकारी कागजातसँ लऽ कऽ भवन आ थाना तकमे तोड़-फोड़ केलक, आगि लगा-लगा जारलक। क्रुर अंग्रेजक हाकिम आ पलटन सभ सेहो क्रान्‍तिकारी सभकेँ पकैड़-पकैड़ केतेकेँ गाछमे टाँगि फँसरीपर चढ़ा दैत तँ केतेकोकेँ कालापानीमे भेज दैत छल। केतेक माए-बहिनकेँ माँगक सिनूर घुअ पड़लै। केतेक भायकेँ शहीद हुअ पड़लै। केतेककेँ जेलमे सड़ा देल गेलइ। केतेको लोक ललका मुरेठा देख घरमे ढुकल रहैत छल।

शुभंकर बाबू सेहो कएक बेर जेल गेला। नमक सत्‍याग्रहमे भाग लेलैन अंग्रेजकेँ भगबैमे जहॉं तक जे बुधि छेलैन ओ गुलामीसँ मुक्‍तिक लेल लगौलैन। भंझारपुररेलक पटरी उखाड़ैमे हिनको जेलमे ठुसि देलकैन। जाबत जीला ताबत धरि कहियो लोभ-लालच, घूस-पेंच आदिसँ दूर रहला। साधारण भेष-भूषा छेलैन शुभंकर बाबूक।

शुभंकर बाबूकेँ एकटा बेटा दिवाकर। पढ़ैमे तेजगर तँ नहि, मुदा जहिना गाइक नॉंगैर पकैड़ वेतरणी पार होइत अछि तहिना दिवाकर दसमी तक पढ़लक आ ब्‍लौकमे किरानीक नोकरी भेट गेलैन, सेहो स्‍वतंत्रता सेनानी शुभंकर बाबूक लड़का छथिन तँए। वेचारे शुभंकर बाबू तँ आब ऐ दुनियाँमे नइ छैथ मुदा हुनक कृत अखनो गाम, जिला आ राज्‍य तकमे छैन्‍हें।

हमरा एकटा वोरिंगक जरूरत भेल। ब्‍लौकसँ सत्तैर प्रतिशत छूटपर भेटैत रहइ। हमहूँ दरखास देलिऐ आ बाँकी रूपैओ जमा कऽ देलिऐ। दिवाकर बाबूक प्रमोशन भेलैन। हुनका नाजीर आ बड़ा बाबूक काज देल गेलैन।

हम वोरिंग उठबैले गेलौं। नाजीरकेँ माने दिवाकर बाबूकेँ कहलयैन-

सर, हमर जे वोरिंग उठबैक आदेशबला कागज छै, ओ देल जाए।

दिवाकर बाबू कहलैन-

जाबत किछु खर्चा-वर्चा नै करब ताबत कोना कागज देब।

पुछलयैन-

सर, हम तँ सभ रूपैआ आ जमीनक कागजात जमा कऽ देने छी। तहन फेर कोन खर्च-बर्च?”

दिवाकर बाबू बजला-

से नहि बुझलिऐ, ऑफिसमे चन्‍द तरहक ने खर्च-बर्च छै किने, तइमे किछु पैसा लगबे करत।

ताबत एक गोरे सेहो नाजीर लग काज करेबाक लेल आएल। हुनको यएह बात कहलखिन।

हम बाहर आबि वेवेकसँ सभ बात कहलिऐ ओ कहलैन-

यौ बाबू, हिनक हालत मैत पुछू। आश्‍चर्यक बात छै जे हिनक पिता श्री शुभंकर बाबू गरीब लोकक लेल, देशकेँ अजाद करक लेल कोन-कोन यातना ने सहलैन। मुदा हिनका तइ सबहक एको रती लाज-विचार नइ छैन। जाउ किछु एमहर-ओमहर करि कऽ काज करा लिअ।

हम दिवाकर बाबूक कुरसी लग फेर गेलौं आ कहलयैन- 

सर, हमर काज कऽ दिअ ने।

दिवाकर बाबू बजला-

लाउ दू साए रूपैआआ हे लिअ कागज।

हम कहलयैन-

सर, हम गरीब छी। सभ पाइ खर्चा भऽ गेल। हमरा लग आब रूपैआ नइ अछि।

दिवाकर बाबू बजला-

गरीबकेँ तँ भगवानो सहायता नहि करै छथिन। अहीं कहू तॅं कोनो भगवान आकि इष्‍टदेवता बिना चढ़ौआ लेने केकरो काज करै छथिन? तहन हम मनुख भऽ कऽ कोना छुच्‍छे कऽ देब..!”

हम कहलयैन-

सर अहाँक पिताश्री तँ महान स्‍वतंत्रता सेनानी छला। गरीबेक हितक लेल ने जहल गेला। माहूर खेलैन। एते तक जे स्‍वतंत्रता सेनानीबला पेंशनो नै लेलखिन आ सरकारीए कोषमे जमा करक लेल कहलखिन। ओ एहेन तियागी छला। आ अहाँ...।

तैपर दिवाकर बाबू बजला-

तँए ने, पाँच बीघा जे जमीन छेलैन तइमे सँ लोके सबहक सेवा करैत-करैत तीन बीघा जमीन बेच लेलैन। बेसी गप-सप्‍प नहि करू। लाउ एके साए रूपैआ आ कागज लिअ।

हम कहलयैन-

दिवाकर बाबू, हमरा लग तँ एकोटा टाका नइए, तहन हम केतए-सँ दिअ।

दिवाकर बाबू आँखि गुर्ड़ैत कहलैन-

पचासोटा टाका लाउ, नहि तँ पचीसोटा टाका दिअ।

हम कहलयैन-

सेहो नइ अछि।

फेर दिवाकर बाबू दराजसँ तमाकुलक डिब्‍बी निकालि कऽ दैत कहलैन-

तँ जाउ, दोकानसँ एक चुनौटी तमाकुले नेने आउ। हम ताबत कागज तैयार कऽ दइ छी।

हम सोचलौं आब की करी की नहि, चुनौटी लेलौ आ पाँच रूपैआक तमाकुल लेल विदा भेलौं।

हमरा परोछ भेलाक बाद दोसर किरानीसँ दिवाकर बजला-

एहेन बुड़ि लोककेँ नहि देखलौं। पाँचोटा टाका लऽ नहि आएत ब्‍लौक! फोकटेमे काज कराएत!”

हम जाबत तमाकुल लऽ कऽ एलौं ताबत कागज तैयार छल। हाथमे कागज दैत दिवाकर कहलैन-

ई देब घर छिऐ, बिना देने काज नै ससरत।

कागज लऽ कऽ माल गोदाम दिस जाइत रही कि हमरा पंचायतक ग्रामसेवक जदूवीर पासवान भेट गेला। हुनका सभ बात कहलयैन।

सेवकजी कहलैन-

दिवाकर बाबूकेँ आदते एहने छैन। जहन हमरो सभकेँ कहता जे तूँ सभ बड़ माल मारैत छह, चलह चाह-पान कराबह। केकरो बिना किछु नेने काजे ने करै छथिन। तूँ तमाकुल देलहक ओकरा की करता तँ पन्नीमे झाड़ि कऽ राखि लेता आ दोसर जे कियो काज करबए लेल औत, तँ ओकरा फेर ओ चुनौटी धरा देथिन जे एक चुनौटी तमाकुल नेने आबह।

कियो देखनिहार-सुननिहार नहि अछि एहेन चूप्‍पा चोर सभकेँ। -हम कहलयैन।

तैपर सेवकजी बजला-

नाजीरक पिते ने तेहेन त्‍याग-तपस्‍या केने छैन जे दिवाकरक मुहेँ देख छोड़ि दइ छइ। जहिना कियो बाप-दादाक कृतसँ उद्धार होइत चलैत अछि तँ कियो अपना बदौलत बाप-दादाक काजकेँ उद्धार करैत अछि। कियो हारि कऽ जीतैत अछि तँ कियो जीतला बाद हारैत अछि। जेकर ओजने एक चुनौटी तमाकुल, तेकरासँ की उमीद कऽ सकै छह।

शब्‍द संख्‍या : 794
 

 


 

आब कहिया चेतब

25 अप्रैल 2015 इस्‍वीक घटना छी। कियो स्‍नान करैत छल, कियो स्‍नान करि कऽ खेनाइ खा रहल छल, कियो अराम कऽ रहल छल। कियो ट्रेक्‍टरसँ खेत जोता रहल छल जे रौदीमे जोतलाहा खेतक दुभि मरि जाएत आ खेत निरोग रहत। समय पहिल दिनुका सबा बारह बजे आ दोसर दिनुका साढ़े एगारह बजेक लगभग छिऐ। एकाएक धरती डोलए लगलै। अफरा-तफरी मचि गेल। के धनीक, के गरीब सभ एकरंगाह भऽ गेल, जेलक खेनाइ बेरुका समय जकाँ सभ कियो घरसँ निकैल फलि जगहमे चलि गेल। घरसँ निकलैमे आ अफरा-तफरी भेने केतेक गोरेकेँ टाँग-हाथ टुटल। केतेक घर-दुआर तहन-नहँस भेल। कोन दैंत-दानो छेलै जे देवालयकेँ सेहो नइ बकसलक। केतेकेँ छातीक धड़कन बढ़ि गेल। अस्‍पतालमे रोगीकेँ रखैक जगह नइ रहलै। एके अछियापर दस-दसटा मुर्दाक डाह-संस्‍कार भेल। केतेक गोरे तँ मकानक मलबाकेँ तरेमे रहि गेल। जेकरा मशीनसँ धरतीए-मे पचा देल गेलइ। 

बाबाक नाम छेलैन छोटे लाल दास, लोक हुनका पारखी बाबा कहैत छेलैन। उमेर करीब 85-90 बर्खक छेलैन। पत्नी सुशीला जीबते छेलैन। बबो स्‍नान करि कऽ भोजनपर बैसले छला। दू कर भात-दालि खेने हेता कि नहि, पत्नी सुशीला कलपर सँ पानि आनए गेल छेली कि तखने धरती डोलए आ कुदकए लगलै। घर लगक पोखैरक पानि उछैल कऽ महार टपि गेल।

पत्नी सुशीला बपहारि काटैत बजली-

ई की भेलै..!”

कहैत सुशीला कलेपर धँइ भटका खसली आ अचेत भऽ गेली। बबो ताबत कुदि-फानि कऽ, फलि ऑंगन छेलैन, चल गेला। दू-तीन मिनट तक कनी-मनी धरती डोलिते रहलै। केकरो किछु फुरेबे ने करै जे की करी। धरती उठतै कि आ बैसते आकि धँसतै।

बाबा हल्‍ला केलैन-

दौरे जाइ जा हौ..!”

किछु गोरे आएल आ सुशीलाकेँ उठा-पुठा कऽ दलानपर जे भागवत करौलहा मरबा छेलै, तेते बैसा कऽ पानिक छीचा देबए लागल। ताबत डाक्‍टरोकेँ बजा कऽ आनल गेल। दवाइ-दारू कएल गेल। बड़ी कालक बाद सुशीला ठीक भेली।

साँझक समय छेलै, बहुत गोरे मरबापर बैसल छल तखने सजन, बाबासँ पुछलकैन-

अँए यौ बाबा, एना किए भेलै। ई की छेलै। हम तँ बौक भऽ गेल छेलौं।  जहाँ कि देह डोलए लागल कि अँगनासँ भगलौं। रोडोपर जेना कियो उठा कऽ पटैक देलक तहिना बुझि पड़ल।

पारखी बाबा, कहलखिन-

बौआ, ई भुमकम छेलै। तूँ सभ ने पहिल बेर भुमकम देखलहक। हम तँ छोटका-मोटका छोड़ि तीनटा बड़का भुमकम देखलिऐ हेन। पैंतीस इस्‍वीक भुमकम सभसँ जोरगर छेलै। केतेक ठाम बड़का-बड़का दरारि फाटि गेलै, केतेक घर-दुआर नास भेल, केतेक जान-मालक नोकसान भेल तेकर कोन ठेकान। सतासीक बाढ़ि आ अठासीक भुमकम नामी अछि। ओहू बेरका कम नै छेलै अदहा भारतकेँ पुरबसँ पच्‍छिम तक आ उत्तरमे नेपालकेँ सेहो डोला देलकै। अठासीक भुमकमक केन्‍द्र छेलै मधुबनी आ सीतामढ़ीक बीचमे आ ऐ बेरुका केन्‍द्र छेलै नेपालमे काठमाण्‍डूक नजदीक, तँए ओतए बेसी छति भेलै। जेकर केन्‍द्र जेतए रहैत अछि तेतए बेसी छति आ दूरबलाकेँ कम असर पड़ै छइ।

एना किए छै बाबा?” –सजन पुछलकैन।

ताबत पण्डित काका टीप देलखिन-

रौ सजन, धरती तरमे कौछु छै, ओकरापर जहन पापी सबहक भार पड़ै छै ने तहन ओ देहकेँ डोलबए लगैत अछि तहिन भुमकम होइ छइ।

सजन पुछलकैन-

अँए यौ पण्‍डित काका, केतेकटा कौछु छै जे पूरा धरतीए-केँ डोला दइ छइ?”

पण्‍डित काकाकेँ किछु फुरबे ने करैन। तैबीच भुलचन बाजल-

नइ यौ पण्‍डित का, शेषनागपर ई धरती अछि। ऐ धरतीपर जहन बेसी पाप, अत्‍याचार, व्‍यभिचार, अपहरण आ हत्‍या हुअ लगैत अछि तहन शेषनाग अपन फनकेँ डोला हल्‍लूक करैत अछि।

जेकरा जे जेना बुझल छेलै से तेना अपन-अपन तर्क दैत छल। पारखी बाबाकेँ जहन सबहक गप सुनि-सुनि कऽ मन घोर भऽ गेलैन तँ गप हँकनिहारकेँ पुछलखिन-

जापानमे किए दसे दिनपर भुमकम होइ छइ?”

सभ चुप भऽ गेल। कियो ने किछु बाजए।

बाबा बजला-

ई बात नहि छइ। प्रकृतिमे माने ब्रह्माण्‍डमे जेतेक वस्‍तु-जात आकि पदार्थ अछि सभकेँ अपन-अपन गुण-अवगुण छइ। पृथ्‍वीकेँ सेहो अपन गुण-अवगुण छइ। पृथ्‍वी अपना पेटमे असंख्‍य वस्‍तु सभकेँ रखने अछि। ठंढ-गर्म तँ सभ वस्‍तु होइते अछि किने। सभकेँ अपन गति छै किने। धरतियोकेँ अपन गति अछि। ओकरो पेटमे जखन गैस वा पदार्थमे गर्मी होइ छै तँ केतौ ज्‍वालामुखी बनि, तँ केतौ परत-पर-परत चढ़ि गेल तँ केतौ धरतीए घँसि गेल, तँ केतौ झील बनि गेल तखनेने भुमकम होइ छइ। जहिना लक्ष्‍मण रेखा टपला बाद सीता हरन भेलै तहिना अधिक कोनो वस्‍तुमे भेलाक बाद उग्र रूप भाइये जाइ छइ।

सजन पुछलकैन-

ऑंइ यौ बाबा, तहिन तँ बाइढ़ोमे अहिना होइत हेतइ?”

बाबा बजला-

हँ, प्रकृतिमे पाँचटा जे तत्‍व अछि जेना अकास, सूर्य, हवा, जल आ धरती एही पाँचो तत्‍वसँ बनल ई शरीर अछि आ अही पाँचोक नजैर सभ मनुखपर बराबर अछि। यएह ने देवता भेल, जेकरामे कोनो भेद-भाव नइ होइ। अकासमे जेकरा जेतेक उड़बाक होइ उड़ि सकैए। सुरुजक नजैर सभपर बराबर पड़ैत अछि। मौसमक हिसाबसँ अपन गुण-अवगुण छइ। बैशाख-जेठमे गर्मी जन-मारुख होइए आ वएह गर्मीक जाड़मे संजीवनी बुटीक काज करैत अछि़। तहिना जलोकेँ छै, सबहक लेल बराबर बरसैत अछि। मुदा वएह जल कहियो प्रलयकारी बाढ़ि सेहो आनि दैत अछि तँ कहियो पियासक लेल तरसबैत सेहो अछि। तहिना हवोकेँ छै, सबहक लेल बराबर। कहियो मारुख तँ कहियो शीतलता सेहो दैत अछि। तहिनाने धरतियोक अछि। धरतीकेँ धरती माता कहि कऽ लेाक पुकारैत अछि, जहिना माए अपन धिया-पुताकेँ केतबो कष्‍ट सहि कऽ पालन-पोषन करैत अछि तहिना ने धरती सेहो करैत अछि।

ताबत सुशीला चाह नेने एलखिन। सभ कियो चाह पीबए लगला। चाह पीब, कियो तमाकुल तँ कियो बीड़ी पीबैत गप-सप्‍प करए लगला। भुलचुन बाजल-

अँए यौ बाबा, हम सभ जे एतेक पुजा-पाठ करै छी से देवता सभ किए ने कष्‍टक बेरमे सहायता करैत अछि?”

बाबा बजला-

रौ भुलचुन, लोकक चालि बुझबीहीन तँ देहमे आगि लगि जेतौ। चलाकक काज छिऐ। अपन स्‍वार्थक लेल मनुखकेँ बँटैत-बँटैत लोक आत्‍मोकेँ बॉंटि नेने अछि। भगवान आ धरतीकेँ के पुछैए।

तैबीच सजन बाजल-

तहिन केना कऽ जीब?”

बाबा कहलखिन-

बौआ, बारुदक ढेरपर छह। कखन छह कखन नहि, तेकर कोन ठेकान। बाढ़ि, रौदी, भुमकम, अगिलग्‍गी, आतंकवादीक आक्रमण, सुनामी आ पैलोनक आक्रमण, ऐ सभकेँ पछाड़ैत सही रस्‍ता बना अपनाकेँ ठाढ़ केने जे जीब लेता वएह पूजणीय भेला। हुनके समाजमे पूजल जाइत अछि। मृत्‍युए-क नाम छै ने सत्‍यम, शिवम, सुन्‍दरम्। आब मशीनी युग आबि गेल हेन। जहिना घन्‍टोक काज सकेण्‍डमे होइत अछि, तहिना आफदो देखते-देखते प्रलय मचा दइ छइ। तँए आबो चेतइ जाइ जा। मनुख बनि आएल छह, मनुख जकाँ आचरण बना जीबह। केतेक की कहबह। बड़ ओझरी सभ छै ओझरीकेँ सोझरबैत चलैत रहह।

शब्‍द संख्‍या : 997


 

 

 


 

विघटनकारी तत्त्व

जीवन बाबाकेँ सिरिफ पाँच कट्ठा बाड़ी-झाड़ी छल। जे एक्के दिनक बर्खामे एक मरद करीब पानि लागि गेल। तेकर कारण छल, चारूकात वस्‍ती रहने पानिक निकास नहि। जीवन बाबा एकटा दर्खास्‍त एस.डी.ओ. आ जे.ई.केँ देलखिन जे हमर सबहक पनरह बीघाक प्‍लॉट जे झीलनूमा बनि गेल हेन, तेकर निदान कएल जाए।

जीवन बाबाक जिनगी सभ दिन संघर्षमे बीतल। जइ समैमे छात्रक जिनगीमे छला तहू समैमे बाबा गाइक सेवा आ खेती-बाड़ीमे तरकारी-फरकारी उपजबैथ। वएह सोन सन चौमासमे करीब सत्तैर घौड़ केरा, पनरहटा अनरनेवाक गाछ, पाँचटा सीमक गाछक संग करैला, सरीफा, धात्रीम आ अनारसक करीब एक साए गाछ आ तैसंग कट्ठा भरिक घेरा गाछक जड़िमे दू हाथ-तीन हाथ पानि लागि गेलैन। रंग-बिरंगक जे फल-फलहरीसँ लऽ कऽ तरकारी-फरकारी तक छल ओ सुड्डाह भऽ गेलैन। यएह दुर्दशा फलक देख बाबा दरखास्‍त देने छेलखिन।

1960-65 इस्‍वीक अमलमे पुरना मुखिया छला। ओ दछिनवाहि टोल आ मुसहरीक बीचमे एकटा पाइप देने छेलखिन पानिक निकास लेल। गामक जे गोठ टोल अछि जइमे करीब पचास घर मुसलमान, अस्‍सी घर मुसहर, सत्तैर घर धानूक, चालीस घर व्रह्मणक बास अछि ओइ सबहक घर आ चौमासक पानि ओही पनरह बीघाक गोरहा खेतमे अबै छल आ पाइप देने पोखैर होइत दछिनबरिया बाघ दिस चल जाइत छल। जइसँ धान, गहुम, मौसरी, खेसारी, सेरसो, तीसीक संग रंग-बिरंगक तरकारी-फरकारी सभ उपजैत छल।

दस साल पहिनौं पंचायतसँ पुलियाक निर्माण भेल छेलइ। आर.डब्‍ल्‍यू.डी. सड़कसँ एकटा सड़क मूख्‍य मंत्रीक योजनासँ मंजूर भेल। ओ सड़क धनुकटोलीसँ दछिनवाहि टोल होइत मुसहरी होइत मुसलमानक टोलमे जा कऽ खतम होइत अछि। जखन सड़कपर मिट्टीकारण होइत छल तखने पानिक निकासी लेल गप-सप्‍प चललै। ठीकेदारकेँ एकटा पूल देबाक छेलै पानिक निकासी लेल। ओ वेचाराकेँ कियो अपना घरक आकि खेतक ऑंगामे पूल बनबैये ने देलक।

वेचारा ठीकेदार हारि-थाकि कऽ गोठक पुबरिया चौरमे जा कऽ एकटा पूल बना देलकै जेकर कोनो उपयोग नहि। कहबी ठीके छै- लोल केतौ घोघ केतौ। सएह पइर।

सरकारियो ऐमला-फमिला कि कम पेंच-पाँच लगबै छइ। कियो अपना सीर अपजश लेबहि ने चाहत, ग्रामसेवकसँ लऽ कऽ बी.डी.ओ; जे.ई. आ कलक्‍टर तक ओ ओकरा लिखत तँ ओ ओकरा लिखत। ताबे समैये बीत गेल। सएह भेलै जीवन बाबाक दरखास्‍तक। एस.डी.ओ. लिखलक बी.डी.ओ.केँ आ बी.डी.ओ. लिखलक जे.ई.केँ।

जे.ई. जहन सहर-जमीनपर मोआइना करए एला तँ दछिनवारि टोलक विघटनकारी तत्त्व सभ जलखै-चाह-पान करा तेसरसँ कहबा देलक जे ऐठाम पुलक जरूरते ने अछि। जहन ओहू टोलक लोकक जमीन ओइ पनरह-बीस बीघाक पलॉटमे। तेतबे नहि ओही टोलक एकटा प्रोफेसर साहैबक आँगनमे पानि भरि छाबा लागल। आश्‍चर्य तँ ई जे ओहो कहलखिन जे ऐठाम पुलक जरूरत नइ छइ।

जहन ढलाइ पूरा भऽ गेलै तहन फेर जे.ई. साहैब सड़कक मोआइनामे एला। संयोगसँ आइ गौंआँ सभ उनटल जे.ई. साहैबपर।

जीवन बाबाक तँ सभ किछु दहाइये गेल छेलैन। मन बिखाएल रहबे करैन। जे.ई.केँ देखते बजला-

रौ, घुरना इहे छियो इन्‍जीनियर, पकड़! ला रासा बान्‍ह तँ आ काँच-करचीसँ देह ततारि दहीन।

जे.ई.केँ तँ होशे उड़ि गेलइ। तखने जोखियाक पाँच बर्खक बेटा बाड़ीमे कलपर चलि गेल। ओ ओंघरा-पोंघरा कऽ भरि डाँर पानिमे चलि गेलइ। हल्‍ला भेलइ।

जे.ई.केँ आब तँ किछु फुरबे ने करइ। बच्‍चा ताबे कनियेँ पानि पीने छल। जे.ई. बाजल-

अहाँ सभ धीरज धरू। हमरा जाए दिअ। कोनो-ने-कोनो निदान भऽ जाएत।

तैपर किसुन सदाय बाजल-

नहि, नइ जाए दियौ यौ जीवन बाबा।हमर जे घर खसि पड़ल हेन दाबा लागल अखनो पानि अछि, से की हेतइ।

रहमान, जे कुजरटोलीक छल, तखने ओहो हहासल-पियासल दौड़ल आएल। अबिते बाजल-

चलू तँ देखियौ तँ हमरा ऑंगनमे भरि ठेहुन पानि लागल अछि। साँप-कीड़ा सभ अँगने-घरे सहसह करैए।

मुदा दछिनवाहि टोलक लोक कियो ने किछु बजैत। सबहक मन रहइ- धू: कनी-मनी क्षतिये ने भेल। बेसीसँ बेसी ऐबेर उपजा नै हएत। मुदा विरोधी सबहक तँ घर-दुआर खसतै ने। जान-मालक क्षति हेतइ ने। बड़ जे संघर्षशील सभ छला तँ आब बुझौत। हमरा सभकेँ कोन अछि धिया-पुता सभ बम्‍बई-दिल्‍लीमे मारे कमाइए। गुजर-बसरमे कहियो कनिक्को दिक्कत थोड़े हएत।

जे.ई.सँ जीवन बाबा पुछलखिन-

कहू तँ एक महिना हमरा दरखास्‍त देना भऽ गेल। ताबे सड़कपर माटिये पड़ि रहल छल। आब तँ गिट्टी-गाट्टी दऽ कऽ सिमेन्‍टसँ ढलाइयो भऽ गेल। कहू तँ दरखास्‍त जे देने रही से कहियो हमरा सूचनो देलौं जे अहाँ चुपे-चाप जाँच करि कऽ चलियो गेलौं। देखू तँ हमर फसिल सबहक दशा।

जे.ई. बाजल-

ई हमरासँ गलती भेल। आब एना नै हेतइ।

जीवन बाबा कहलखिन-

तँ बाजू जे पूल वा पुलिया कहिया बनतै आ हमरा सबहक घर-अँगनाक पानि कहिया निकलत?”

जे.ई. बजला-

चारिसँ पाँच दिनमे पानिक निकासी भऽ जेतइ।

ठीक छै जाउ, मोन राखब। नहि तँ सभ गुण्‍डइ निकैल जाएत।”- जीवन बाबा कहलखिन।

जे.ई. साहैब तँ चलि गेला। 10 दिन समैयो बीत गेल मुदा कोनो तरहक कारगुजारी नहि।

विघटनकारीलोक तँ अहिना सोचिते अछि जे किछु गमेलोसँ जँ अनकर क्षति होइ तँ ओहन सोचबला लोकक मुँह मलिन नइ होइत अछि। ओकरा खुशीए होइ छइ। सरकारियो तंत्रकेँ तँ वएह गति अछि। ऊहो कि आम जनताकेँ खुशहाल थोड़े देखए चाहैत अछि। कुर्सी भेटलै सभ किछु बिसैर गेल।

शब्‍द संख्‍या : 777

 

 

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