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पथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य    

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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विदेह नूतन अंक पद्य १

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(c)२००४-१७.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह पथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह पथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

जगदीश चन्द्र ठाकुर 'अनिल'

४ टा गजल

         (1)

कहलक जामुन आम साढ़ू

नै जा सकलौं  गाम साढ़ू

 

सभ रस्तापर थाल-कादो

सभ रस्तापर जाम साढ़ू

 

किरदानी छै छोट ओकर

जक्कर बड़का नाम साढ़ू

 

बाहर सभठाँ भेल आदर

घरमे छी बदलाम साढ़ू

 

 

सबहक माथक पाग छलियै

बनलौं आब खराम साढ़ू

 

सोची कत्ते  भेल रावण

एके भेला  राम साढ़ू

( मात्रा-क्रम : 2222-2122 )

      (2)

सेवक छी हम राजा छी हम

बौआ बाबू  बाबा छी हम

 

ककरो खातिर छी गिरिजाघर

काशी छी हम काबा छी हम

 

कोनोठाँ  पाछाँ छी जगमे

आ कोनोठाँ आगाँ छी हम

 

कहुना बांचल छी हमहूँ सभ

अरिपन पुरहर लाबा छी हम

 

सबहक घरमे हमरे चलती

चकला बेलन आंटा छी हम

 

हमरे खातिर हल्ला-गुल्ला

गहना-गुडिया कपडा छी हम

 

हम्मर दुःख जहिना के तहिना

माँ सीताके मिथिला छी हम

 ( मात्रा-क्रम : 2222-2222 )     

           

 

 

              (3)

बाजब ककरोसँ  सिखलौं

कानब ककरोसँ सिखलौं

 

सिखलौं ककरोसँ झगडा

मारब ककरोसँ सिखलौं

 

सिखलौं ककरोसं छीनब

मांगब ककरोसँ सिखलौं

 

फेकब ककरोसँ सीखल

राखब ककरोसँ सिखलौं

 

सोचब देखब क’रब की

ठानब ककरोसँ सिखलौं

 

हम के छी आ अ’हाँ के

जानब ककरोसँ सिखलौं

 

हम भवसागरसँ निकलब

फानब ककरोसं सिखलौं

( मात्रा-क्रम : 2222-122 )

      (4)

सत्यक पूजा घर-घर रहितै

दुनिया कत्ते  सुन्दर रहितै

 

सबहक हिरदय रहितै नमहर

वाणी सबहक मिठगर रहितै

 

ककरो कीयो दुःख नै दीतै

सभकें सभले’ आदर रहितै

 

माथापर उघने चल अबितौं

मोटा कतबो भरिगर रहितै

 

एत्ते दुःख दीतै नै मनसा

यदि अपनो ओ थितगर रहितै

 

एके सुरमे बजितै सभक्यो

भारत सबहक ऊपर रहितै

( मात्रा-क्रम : 2222-2222 )

 

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