logo   

वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक  

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

Home ]

 

India Flag Nepal Flag

(c)२०००-२०२२.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन।

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

राज किशोर मिश्र, रिटायर्ड चीफ जेनरल मैनेजर (ई), बी.एस.एन.एल.(मुख्यालय), दिल्ली,गाम- अरेर डीह, पो. अरेर हाट, मधुबनी

धा न

डुमरि क फूल सन भेल, मेघ,
बनि पा हुन, आएल जेठ -मा स,
बरसल त' एके अछा र, मुदा
शुष्क खेत मे आएल साँ स।

श्रा न्त भेल गा म, मे बढ़ि गेल,
हा ल सँ हलचल खूब जो र,
हर -बड़द वा ट्रेक्टर लए,

कृषक -गण चलला , भो रे -भो र।

खेत चा सल गेल, तखन
खसा ओल गेल धा नक बी आ,
समा रला के बा द खतम भेल,
बी आ बा ओग करक'क्रि या ।

बी आ, मा टि क सा हचर्य सँ,
पा दप बनि बा हर आएल,
जेना छल, अँकुरा एल भवि ष्य
वर्त्तमा न बनए लेल, अगुता एल।

ओहि छो ट -छि न बी आक गा छ

मे पुष्ट धा न नुका एल छल,
ओकर दि व्य सुन्दरता सँ,
मा टि क हृदय जुड़ा एल छल।

खेत जनै ,नमहर भ' क'

चलि जा एत छो ड़ि , बी आ हमरा ,
जहि ना , फूल के दो स बना

छो ड़ि , उड़ल जा इत अछि भमरा ।

भवि ष्य क' बि छो ह के सो चि -सो चि ,

बि धुआएल छल,खेतक'मा टि ,
मुदा , ओकर सुंदर जी वन लेल
शक्ति -सम्पदा , देलक 'साँ ठि ।

नभ मे बा दरि , घुमड़ि -घुमड़ि

गर्जन कए पठबैत छल समा द,
जल -सनेस हम लएलहुँ अछि ,
छी पठा रहल, कि छु का लक बा द।

नृत्य करैत पा बस चलि आएल,
अहर्नि श बरस' ला गल पयो द,
सभक खेत मे एक रंग सँ,
परसए बरखा , पा नि क' मो द।

रो पा गेल सभ खेत धा न सँ,
सँ

उपरा ड़ि , गहीं रका , चओर -चाँ चर,
हरि अरी क नूआ पहि र बा ध सभ,
का ढ़ि लेलक हरि अर आँचर।

लि बल, शनैः -शनैः , सी स,

लगचि आए गेल, धा नक 'पा कब,
रुखि बदलल, बा ध -बो नक,
देखा इत धा न, जेम्हरे ता कब।

कतेक वि लक्षण, खेत लगैत छलै,

पसरल, पा कल धा न,

बरसि रहल, सबतरि , श्री -शो भा ,

बा ध-बो न, खरि हा न।

धा न कटल, दरबज्जा आएल,

को ठी , भरल बखा री
सभहक मो न हर्षि त छलै,
लै

बा ल -वृद्ध, नर -ना री ।

धा न पा बि कतेको धनि क
देखबै छथि , धन क' अभि मा न,

धा ने सँ ओ दैत छथि ,

नमहर चा स -प्रमा ण।

तुलसी फूलक 'चा उर के
जतए ,बनैत अछि भा त,
गम -गम करए लगैत अछि ,
परसा ओल जखने पा त।

भा त -दा लि -तरका री ,
आओर, चूड़ा -दही -ची नी ,
ई भो जन सभ, सब सँ बेसी
धा ने के अछि ऋणी ।

भ' जा इत अछि , अमृत -भो जन

जखन बनैत अछि खी र,
खी र खा ए, पुरुषा र्थ देखा बथि ,

कतेको भो जन -वी र।

झटृा सँ छा रल जा इछ, चा र,
आ, शय्या कतहु बनैछ, पो आर,
बनैत अछि भो जन पशुक 'लेल,
धा नक पो आर, धा नेक ना र।

चा उर, दूर्वा क्षत क' अंग भए,

बनि जा इत अछि मंत्र द्वा रा आशी ष,
आशी र्वा द पबैत छथि ओ सभ

पड़ैत अछि जि नकर -जि नकर शी श।

हो इछ खों छि मे दूभि -धा न,

आशी र्वा द -प्रती क ,
बेटी के सौ भा ग्य बढ़ओ,
हो उक सभटा नी क।

धा न जी वन -आधा र अछि ,

धा ने सँ धन -धा न्य,
धा न सँ बनि जा इत छथि ,
सा मा न्य सँ गण्यमा न्य।

अर्थतंत्र मे धा न के,
नमहर छै यो गदा न,
बजा रक सूचकां क मे,
धा नक मा न, प्रधा न।

दा ना अछि त' धा न अछि ,
नहि त' अछि ई खखड़ी ,
सुंदर फूल लगैत छै केहन,
उजड़ि जा ए जँ पँखुड़ी ?

अछि धा नक स्वा गत, सभ दो आरि ,

धनि क, किं वा हो नि र्धन,
भो जनक मुख्य आधा र छै,
ई सुंदर अन्न, तंडुल -कण।

खेत जनैत अछि , धा न कतेक
हो इत छै ओकरा , प्रि यगर,
कटनी के बा द, सजल शो भा
सँ ही न, हो इत अछि एसगर।

जी वन -धन -आशी र्वचन,
सभ सँ जुड़ल अछि धा न,
एहि ना थो ड़े भेटल छै,
ओकरा , ओहन सम्मा न ?

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।