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पथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य    

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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विदेह नूतन अंक पद्य १

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अमरनाथ मिश्र

जुड़िशीतल-गीत
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जुड़िशीतलमे सभकेँ जुड़ा दियौन यौ-२
जुड़िशीतलमे सभकेँ।।
साल नव मैथिलीक शुभागमन भेलै,
नव-नव अन्न-पानि आँगन-दलान भेलै,
शीतल सतुआक सतुआनि करा दियौ यौ,
जुड़िशीतलमे सभकेँ।।
टटका आ बसियाकेँ अजगुत विधान एलै,
फेँटि-फेँटि घाइठक बड़-बड़ी खोंटैल गेलै,
आमक टिकुलासँ चटनी बनबा दियौन यौ,
जुड़िशीतलमे सभकेँ।।
पौखरि-इनार गाम-घरक सफाई भेलै,
तुरिया-भजारमे थाल-कादो लेपाइ भेलै,
प्रेम चासैत, समारैत, गजारि दियौ यौ,
जुड़िशीतलमे सभकेँ।।
बाँसक दुइ खुट्टा पर बल्ली लटका दियौ,
तुलसी - चौड़ामे पानि सल्ला बना दियौ,
देव-पितर केर प्यासकेँ मिंझा दियौन यौ,
जुड़िशीतलमे सभकेँ जुड़ा दियौन यौ,
जुड़िशीतलमे सभकेँ।।
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जुड़िशीतलक अनंत शुभकामनाक संग
अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि

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