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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक  

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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बिनय भूषण-संपर्क-7003286056

दू टा कविता- 1.आइ पिरथी दिवस अछि 2.आखिर एना कियैक लागि रहल अछि

1

आइ पिरथी दिवस अछि

 

ग्लोबक कोन - कोनमे

भऽ रहल अछि

 माय धरती के जयजयकार 

पिरथीक संरक्षणक लेल

ठाम - ठाम भऽ रहल अछि जुटान

गणपति सभ मना रहल छथि

पिरथी - दिवस के उत्सव

समस्त लक्ष्मीपतिक भीजल ठोरसँ

निकसि रहल अछि

ओजपूर्ण वक्तव्य

धरतीकेँ हरियर कचोर बनेबाक लेल

पिछला वर्ख जकाँ

पुनः दोहराओल जाइत अछि संकल्प

गणपति सभ पिरथीकेँ बचेबाक लेल

सिरजैत अछि असंख्य विधान

धरतीक मुस्कानकेँ अक्षुण्ण रखबाक लेल

जंगलकेँ बचा कऽ रखबाक

लेल जाइत अछि सपथ

सदानीरा नदी

जे मिझबैत अछि पिरथीक पियास

तकर अस्तित्वक  संरक्षणक लेल 

बनाओल जाइत अछि कानून

आब एहि ब्रह्मांडक कोनो देश

नहि करत एक्कोटा परमाणु - परीक्षण

टी० वी० पर मचैत छैक अनघोल

पीचरोड पर आब

कम भऽ जेतैक धूइयां वला गाड़ी

आब चिमनीसँ बहरेतैक

प्रदूषणकारी धूइयां बहुत कम

आब किसानीक लेल

बचाओल जयतैक धरती

गाय - भैंस आ बरदक पालनकेँ

कयल जयतैक उत्साहित

रासायनिक खादसँ बाँझ होइत

धरतीकेँ बचेबाक लेल

गोबरक खादसँ

बढ़ाओल जेतैक धरतीक ताकति

लागि रहल छैक जेना

पिरथीक समस्त समस्याक

आइये भऽ जेतैक समाधान ।

 

मुदा किछुए दिनक पश्चात 

समस्त गणपति आ लक्ष्मीपति

अर्थयुद्धक दौड़मे

एक दोसराकेँ पछाड़बाक लेल

लगब' लगबैत अछि सरपट दौड़

न'केँ निन्यानवे करबाक

 नव - नव तकनीकक

होम' लगैत अछि आविष्कार

स्वयंकेँ सर्वश्रेष्ठ साबित करबाक लेल

कर' लगैत अछि प्रकृतिक दोहन

काटल जाइत अछि हरियर - हरियर गाछ

अन्धाधुन्ध लगाओल जाइत अछि फैक्ट्री

देश आ देशक बीच

अपन प्रभुत्वकेँ बढ़ेबाक लेल

होम' लगैत अछि हथियारबन्दीक होड़

असंख्य गाड़ी

दौड़' लगैत अछि वाट पर

गरम होब' लगैत अछि हवा

पटपटाब' लगैत अछि पिरथीक काया

औनाब' लगैत अछि पिरथीक सन्तान

पिरथीक आँखिसँ

बह' लगैत अछि

कोशी कमला बलान

हवामे गुंज' लगैत अछि

पिरथीक क्रन्दनक कारुणिक स्वर ।

 

अपन सन्तानक समस्त दुखकेँ

दूर करबाक लेल

रोगाह काया रहितो

पिरथी सिरज' चाहैत अछि जीवन 

उच्च तापक्रमक बोखारसँ पीड़ित रहितो

अपन घबाह वक्ष पर पिरथी

रोपि लैत अछि असंख्य गाछ

लुटब' लगैत अछि

असंख्य स्वादिष्ट फल

विपरीत परिस्थिति रहितो

अपन काया पर पिरथी

सिरजैत अछि हरियरी

गम्हरैत धानक शीशमे

भरैत अछि जीवन रस पिरथी

गहुँमक सोनुहला शीशमे पिरथी

भरैत अछि जीवनक सुगंध 

चाहैत अछि पिरथी जे

ओ मुक्त हस्तसँ परसय

सुख - समृद्धिक समस्त सनेस

दूर करय जीवक समस्त क्लेश

पिरथीक वक्ष पर जे मनुक्ख

लगौनय जा रहल अछि

पजेबा, बालु आ सीमेंटक जंगल

ओहि जंगलमे

संताप आ खतराक अदंककेँ

अपन हियामे जोगने

कछमछाइत जीबि रहल अछि लोक

पिरथीक आँखिसँ

बह' लगैत अछि ममताक नोर

पता नहि कियैक

आइ जखन सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड

मना रहल अछि पिरथीक पावनि

हमर कानसँ टकरा' रहल अछि

पिरथीक कर्णभेदी झौहरि ।

 

2

आखिर एना कियैक लागि रहल अछि

 

एखन पूव क्षितिजसँ

हुलकि रहल छथि बालारुण सूर्य

निशाक घोर तिमिरकेँ

ललकारि रहल छथि बाल - दिवाकर

फूला गेल अछि राजीव

पंकजक मुस्किआइत पाँखिक प्रतिबिंबसँ

आह्लादित भऽ गेल अछि

सरोवरक निर्मल तल

पोखरिक महार पर ठाढ़ पाकरिक गाछ पर

चुनमुना' रहल अछि चिड़ैं

हरियर - हरियर दूभि पर

चमकि रहल अछि मोती

हम घरसँ बहरयबाक क' रहल छी प्रयास

आँखिक आगू देखाइत अछि अन्हार

हम जंगलासँ हुलकि - हुलकि

जोह' लगैत छी कोनो इजोतक अाश

चारूकात देखाइत अछि अन्हार

अन्हार अन्हारे - अन्हार

हमर हृदयमे पैसल अदंकक नागफेनी

क' दैत अछि लोहुलोहान हमर आत्माकेँ

हम डेराइत - डेराइत

घरसँ बहरेबाक लेल

संगोर' लगै छी धैर्य आ साहसक अमृत

सुरूज तँ प्रारंभहिसँ

अपन ज्योति आ धाहसँ

अपन अजस्र ऊर्जाक स्रोतसँ

करैत रहल अछि सदिखन

आवेशित हमर आत्माकेँ

हमर जिजीविषाकेँ

सदिखन करैत रहल अछि उद्वेलित सुरूज

सुरूजे तँ परसैत रहल हमरा लेल

समस्त जीव - जगत लेल जीवन अमृत

पता नहि कियैक आइ

हमर आँखिक आगू

देखा' रहल अछि

भय आ अदंकक हवा

हमर जीवन - संघर्ष आ साहस

हमर अक्खड़पन

 आ अपराजित होयबाक अटल संकल्प 

तिलमिला' रहल अछि आइ  ।

 

जीवन जीवाक लेल

जरूरी अछि रोटी

रोटीक लेल जरूरी अछि श्रम

श्रम करबाक लेल जरूरी अछि शक्ति

शक्तिक लेल जरूरी अछि रोटी

रोटीक लेल जरूरी अछि अन्न

अन्नक लेल जरूरी अछि श्रम

श्रमक लेल जरूरी अछि ताकति आ आरोग्य

आरोग्यक लेल जरूरी अछि स्वच्छ हवा

स्वच्छ पानि आ स्वच्छ माटि

हमर कानसँ टकराइत अछि बेरि - बेरि

जे हवामे मिझरा' गेल अछि कोरोनाक जहर

सुनैत छियैक जे इ कोरोना

ल' लैत अछि मनुक्खक प्राण

हम अपना अापकेँ

अपन घरमे बन्न करबाक लैत छी निर्णय

सोच' लगै छी जे

किछु दिन धरि भूखल रहबाक करी अभ्यास

सुरूज जे हमरा जीयत रखबाक लेल

एहि पिरथी पर अस्तित्वक संरक्षण लेल

जरैत छथि स्वयं अजस्र धाहमे

अपन धाहसँ सिरजैत अछि 

जीवन एहि पिरथी पर 

दैत रहल छथि साहसक सनेश

एहि पिरथीक समस्त जीवकेँ

पता नहि कियैक

आइ भोरे भोर ओ कहि रहल छथि हमरा

घरेमे रहू ,जुनि बहराउ कोनो आन ठाम ।

 

 

पेटमे धधकैत भूखक आगिकेँ मिझेबाक लेल

आवश्यक अछि रोटीक जोगार

हमर घरक पछुआरमे

एकटा मैदानमे

फुदकैत किछु खजन चिड़ैया

हमर झुर्रियायल चेहरा देखि

हमरा पर ठठा'केँ हँसल छलीह

चरी करैत - करैत मुँह दुसने छलीह हमरा

हमरा विस्मय भेल छल ओहि खजन चिड़ैयाँ पर

हम तँ एकरासँ करैत छी आत्मिक प्रेम

कतेको बेरि जखन ओ

लुब - लुब करैत हमर छरियायल दानाकेँ खाइत

होइत छलीह अत्यंत प्रसन्न

ओकर आँखिमे चमकैत छलैक कृतज्ञताक इजोत

शायद ओ हमर अकर्मण्यता आ विवशताक

उड़ा' रहल छलीह मजाक

हमर अन्तरमे जन्मैत विस्मयक औंकुरी

सुखा' जाइत अछि अनायास

हम सोच' लगै छी अपन नियति

नाप' लगै छी जीवन आ मृत्युक बीचक दूरी

देख' लगै छी मनुक्खताइ आ

 सामाजिकताक बदलल परिदृश्य 

आँखिक आगु अत्यंत निर्मम मुद्रामे ठाढ़

देखाइत अछि यमराज

डोल' लगैत अछि हमर आत्मविश्वासक कैलाश

हमर मोन कहियो नञि सोचनय छल जे

हमर आँखिक आगू ठाढ़ होयताह यमराज

आइ अनायास सोचि रहल अछि मोन

जे हम आबि गेल छी मृत्युक लगीच

मृत्यु - भूखसँ मृत्यु

मृत्यु - कोरोनासँ मृत्यु ।

 

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