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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक  

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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प्रदीप पुष्प

२ टा रुबाइ आ २ टा गजल

रुबाइ

कोनो परीकेर नगरमे रहितौं हम
खा दूध रोटी चट निनियाँ गबितौं हम
माँ चूमितय माथ लगा टीका काजर
मन होइए फेर सँ नेना बनितौं हम

छै बियाह आइये ओकर से बिसरा देलियै
नोर पोछि लेलियै आ दाढ़ी कटबा लेलियै
लग्न जा रहल छलै आ बरियाती भुतिया रहल
नाम पूछि दुल्हिनक हम रस्ता देखा एलियै


गजल


भाला बरछी तीर तलवार ककरा लेल
ई व्यर्थक रणकेर ललकार ककरा लेल


सब दिन भरि वसुधा कुटुम्बे रहल पहिने सँ
ई खुनिआँ परमाणु हथियार ककरा लेल


नोरक छै सबठाम बिक्री नगरमे आइ
तखनो ई मुस्कीक परचार ककरा लेल


लागल जकरा भूख भातक तकर सोझामे
मेवा मिसरी केर जयकार ककरा लेल


बस्ती डेरा जाइ जे मात्र हरहाड़ो सँ
तै ठाँ विषधर केर फुफकार ककरा लेल


जा धरि रहलै प्राण फुटहो अभावे भेल
मुइला उत्तर भोज जयवार ककरा लेल

(२२ २२ २१२ २१२ २२१)

पाखड़ि त'रक मचान मोन पड़ि गेल
खपड़ा बला दलान मोन पड़ि गेल


तोहर हमर पिरीत भेल अनघोल
मारिक पड़ल निशान मोन पड़ि गेल


डग डग करय बदन त' लोकसब बाजै
भादव बहय बलान मोन पड़ि गेल


भूखल दिवस कनैत फेर बीतल त'
गामक अपन नवान्न मोन पड़ि गेल


तोरे भ' जीवनो कटैत ई 'पुष्प'
जातिक मुदा सिमान मोन पड़ि गेल


(2212 121 21 221 सब पाँतिमे,
तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतमे दीर्घकेँ ह्रस्व मानबाक छूट लेल गेल अछि।पुरान गजल।)

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