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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)2004-2018.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

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रबीन्द्र नारायण मिश्र- .नमस्तस्यै- उपन्यासक आरम्भ (आगाँ) २.लघुकथा- सनकल

रबीन्द्र नारायण मिश्र

नमस्तस्यै

उपन्यासक आरम्भ

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समयक चक्र आगा घूमल। घुमैक छलै। हम अपन माएक कोरमे सुरक्षित रही। दूधपीबा बच्चाकेँ आओर चाहबे की करी?दूध आओर दूलार दुनू भेटि रहल छल। मुदा हमरा की पता जे हमर बाप हमरा आबए-सँ पहिनहि प्रस्थान कए चुकल अछि। हमरा की पता जे जँ हम बेटा भए जन्म लितहुँ तँ ओहि राजपाटक उत्तराधिकारी होइतहुँ जे बेटी भेनहि चूकि गेलहुँ। मुदा हमर माएकेँ एकर अखियास रहैक। घरबला गेलै से कष्ट छलैहे, हमरा बेटा नहि भेने दोसर-दोसर कष्ट होमए लगलैक।

क्रमश: दियाद-बादक रुखि बदलए लागल। मसोमातक सामाजिक हैसियत जे हेबाक चाही से भए गेल। असगर हमर माए की-की करितए? हमरा पालथि, हमर बापक असमय निधनक स्मरणमे दिन-राति अपसियॉंत रहथि। गुजर-बसरक व्यवस्था करथि। समाज ओ कानूनसँ मात्र खोरिसक अधिकारिणी छली, से भेटि रहल छलनि। हमर चिन्ता सेहो ओकरा होइत छलैक। केना बढ़ब, के देखत, केना बिआह होएत?

हमरा लए एतेक चिन्ता तखनहिसँ करब जरूरी नहि छलैक। हमरा अखनो से सोचि हँसी लागि जाइत अछि। बिआह कए अपन जिम्मेदारीक इतिश्री करबा हेतु व्याकुल रहबाक कोनो तरहेँ उचित नहि कहल जाए सकैत अछि। आइ-काल्हिक समयबला गप्प नहि रहैक। ओ समय छलैक बालिका बधूक। जतेक कम बएसमे बेटी बिआहल जाएत ततेक प्रतिष्ठा सुरक्षित रहत। लोकक सोच एहने रहैक। ताहिमे एकटा मसोमात कइए की सकैत छली?

एक असामयिक घटना जाहिपर ककरो वश नहि छलैक, जे हमर युवा, स्वस्थ सभ तरहेँ सम्पन्न पिताक हेदावसान कए देलक, ओहि परिवारक भविष्यकेँ उलटि देलक। जँ हमर पिता जीवित रहितथि, तखन ककरो हिम्मत नहि होइतैक जे हमर माएकेँ एना दुरदुरौबति। जे से एकटा उपदेश लए ठाढ़ रहथि। ओकर आर्थिक सामर्थ्यकेँ एना निचोड़िनहि सकैत। मुदा ई सभ तँ आब मात्र कल्पने रहि गेल छल। यर्थाथक धरातलपर ठाढ हम एकटा नान्हिटा बच्चा आओर तकर मसोमात माएकेँ कोनो बहुत विकल्प नहि छलैक।

सभ किछु होइतो गाम गामे होइत छैक। हमर बापक सहोदर तँ भाँगमे मस्तंग रहैत छलाह, मुदा हुनकर पितिऔत सभमे कए गोटाक ध्यान हमरापर रहैत छलैक। एक दिन हमर पित्ती अपन पितिऔत सभसँ गप्प करैत छलाह कि ओ सभ हमर चर्च उठा देलखिन। सभहक बच्चा स्कूल जाइत छलैक। हम असगर घरमे टल्ली मारैत रहैत छलहुँ। पाँचम बर्ख भए गेल छल...।

हमर ककाकेँ माथमे ई बात धँसलैक। आन बच्चा सभक संग हमरो नाम स्कूलमे लिखा देलक। पहिलबेर मास्टरक मुहेँअपन नाम सुनलिऐक-

अपराजिता।

हम कतेक प्रशन्न भेल रही। ओहि दिन स्कूल जाए। मारि बच्चा सभकेँ हँसैत, बजैत देखलिऐक। चटिआ सभकेँ खाइत रहैत देखिऐक। बच्चा सभकेँ खेलाइत, धुपाइत देखिऐक। ततेक नीक लागल जे नित्य भोर होइते माएकेँ स्कूलक तैयारी करए हेतु विवश कए दिऐक। स्कूल हमरा हेतु जबरदस्त आकर्षण भए गेल छल।

नित्य-प्रतिक दिनचर्यामे स्कूल जाएब सभसँ प्रिय लगैत छल। गामक एक छोरपर स्कूल छल। ओहिठाम पाँचमा धरि पढ़ाइ होइत छल। आगा पढ़बाक हेतु गाममे स्कूल नहि छलैक। ताहि हेतु गामसँ बहरायब जरूरी छल। गामसँ पाँच माइल दूर उच्च विद्यालय छलैक। गामक एकाधटा बच्चा ओतए पढ़ैत छल। दूरी ओ कतेको तरहक असुविधाक कारण अधिकांश बच्चाक पढ़ाइ-लिखाइ पाँचमे धरि सीमित भए जाइत छल। तकर  बाद ओ सभ अपन पुश्तैनी व्यवसायमे लागि जाइत छल। एहन परिस्थितिमे हम आगा पढ़ि सकब तकर सम्भावना बहुत कम छल। तकर हमरा कोनो चिन्ता नहि छल। सत कही तँ ज्ञानो नहि छल जे पाँचमाक बादो पढ़ाइ होइत छैक आओर जौं होइत छैक तँ कतए? बहुत आगा सोचि कए होइतैक की? जखन जे हेबाक हेतैक सएह हेतैक। तेँ हमर अभिप्राय वर्तमानमे ओहि स्कूलक नित्य-प्रतिक दिनचर्यामे बान्हल प्रर्याप्त छल।

स्कूलमे कैटा बच्चा सभ हमर दोस्त बनि गेल। ओहिमे अधिकांश आस-पासक गामक छली। तेँ स्कूलक बाद हुनका सभसँ भेँट नहि होइत छल। स्कूल जेबाक एक प्रमुख आकर्षण अपन दोस्त सभसँ भेँट-घॉंट होइत छल।

स्कूल लग पहुँचते जेना चुहचुही बढ़ि जाइत छल। बच्चा सभकेँ फुदकैत-खेलैत देखि हमरो मोन ओहिमे अविलंब मिलि जेबाक हेतु व्यग्र भए जाइत छल। स्कूलपहुँचलहुँ, झोरा फेकलहुँ आओर भागलहुँ बच्चा सभक लग। पता नहि कहॉंसँ एतेक गप्प सभ फुराइत छल। ताबतेमे प्रार्थनाक घन्टी बजैत। बच्चा सभ भागैत प्रार्थना करए। हमर स्वर नीक छल। प्रार्थना करबेबाक हेतु हमरे भार देल गेल छल। हम निधोख सुस्वर सरस्वती बन्दना करी आओर तकर बाद प्रारम्भ होइत छल पढ़ाइ-लिखाइ जे चारि-पाँच घन्टी धरि चलैत रहैत छल। बीचमे खेलक घन्टीमे राजकुमार, हरिनन्दन, अरुण, गरमसिंह एक दिस आओर लड़की सभक एकदिस खेल-धूप होइत छल। 

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४.

एक दिन सौंसे गाममे हल्ला भए गेलै जे अपराजिता हेरा गेल। क्यो कहैक लकरसुँघा आएल रहैक, वएह लए चलि गेलैक। क्यो किछु, क्यो किछु कहैक। जतेक आदमी, ततेक तरहक गप्प। हमर माए तँ छाती पीटैत-पीटैत बेहाल रहैक। हमर पित्तीकेँ दस हजार फज्झैत केलक। मुदा ओ की करितथि?  भाँग पीबएसँ हुनका फुरसति होइतनि तखन ने कोनो आन बातपर ध्यान दीतथि।

भेलै ई जे हम स्कूल हेतु विदा भेलहुँ जरूर मुदा रस्तामे एकटा बबाजी लबनचूस देलक। लबनचूस खाइते हम बेहोश भए गेलहुँ। तकर बाद की भेलैक, किछु मोन नहि अछि। दू दिनक बाद जखन होश आएल तँ देखी जे एकटा कोनो विशाल भवनमे पड़ल छी। चारूकात बन्द कोठरीमे हम राखल गेल रही। ने क्यो आबि सकैत छल आओर ने जा सकैत छल। हमरा ओहि कोठरीमे कोनो चीजक अभाव नहि छल। तरह-तरहक खेलौना, नाना प्रकारक मधुरसँ भरल ओहि कोठरीमे हम असगरे छलहुँ। कखनो काल एकटा बुढ़िया हमर हाल-चाल पुछए अबैत। मुदा हमरा माए मोन पड़ैत, गामक बच्चा मोन पड़ैत, स्कूलक खेल-धूप मोन पड़ैत, ऑंखिसँ नोरक धार बहैत देखि ओहि बुढ़िआकेँ सेहो कना जाइक मुदा ओ बाजैत किछु ने। अपना भरि हमरा बौंसबाकप्रयत्न करैत। किछु-किछु खुआबक प्रयास करैत आओर चलि जाइत।

ओमहर हमर माएक हाल-बेहाल छलैक। जीबाक एक मात्र सहारा हमहीं छलिऐक। ओहो परोक्ष भए गेल छलैक। छाती पीटैत-पीटैत कतेको बेर बेहोश भए गेल। डाक्टर, बैद बजाबए पड़लैक। कहुना-कहुना कए ओकर जान बॉंचल।

हम ओहि कोठरीमे बन्द छटपटाइत रही। ओमहर हमर माए बफारि तोड़ए। मुदा हमरा गामसँ अपहृत केनिहार सभ अपन धन्धामे लागल छल। ओकरा सभकेँ पता रहैक जे हम अपन परिवारक एकमात्र आशा छी। हमर घरक सम्पन्नताक सेहो ओकरा सभकेँ जानकारी भए गेल रहइ। इएह सभ सुनि हमरा अपहृत करबाक योजना बनाओल गेल। कतेको दिन ओ सभ हमर पछोड़ केलक। हमर नित्य-प्रतिक आवागमनक समय, रस्ता सभक रेकी केलक। आओर एक दिन अपन लक्ष्यमे कामयाब एहि मोनेमे रहल जे हमर अपहरण कएलेलक। ओकरा सभकेँ ई अनुमान नहि भए सकलैक जे हमरा बाप नहि छल। ओ सभ नहि बुझि सकल जे बिना बापक बेटी गाछसँ खसल पात जकाँ अछि जे खसत तँ सुखा कए नष्टे होएत आओर किछु नहि। हमर अपहरणकर्ता सभ ढाकीक-ढाकी टाका उगाही करए हेतु योजना बना रहल छल। ताहि हेतु हमर पित्तीकेँ गुमनाम चिट्ठी पठौलक जे तीन दिनक पेसतर ओकरा सभकेँ दू लाख टका देल जाए तखने अपराजिताकेँ छोड़ल जाएत अन्यथा ओकर जीवित लौटबाक कोनो सम्भावना नहि। संगहि एहि मामलाक जानकारी पुलिसकेँ नहि देल जाएत अन्यथा परिणाम घातक होएत। पैसा कखन ओ कतए, ककरा देल जाएत से अलगसँ ओही दिन सूचित कएल जाएत।

ओहि समयमे दू लाख टकाक बड़ महत्व होइत छल। चिट्ठी पढ़ि हमर पित्तीकेँ तँ जेना लकबा मारि देलकै। अबाजे नहि निकलै मुदा हमर मोह तँ रहबे करइ। अपहरणकर्ताक हाथे हमरा मरए तँ नहि दितथि। तखन की करथि से फुरा नहि रहल छलनि।

ओ हमर हालत देखि बुढ़िआकेँ बहुत दुख होइक। ओ स्वयं अपहरणकर्ता सभसँ त्रस्तछल। ओकर हार्दिक इच्छा रहैक जे जेना-तेना हमरा ओहिठामसँ निकालल जाए, मुदा कोनो गरे नहि बैसैत छलैक।

ओहि बुढ़ियाक अपने खिस्सारहैक। ओ स्वयं अपन अतीतसँ ओझराएल, थाकल, झमारल परिस्थितिसँ लाचार छल। नहि चाहिओ कए ओहि दुर्दान्त अपराधीक संगोरमे रहैत छल आओर ओकर सभक कहल करैत छल। की छलैक ओकर मजबूरी ओ किएक एना मजबूर भेल छल? तँ सुनि लिअ।

ओहि बुढ़िआक नाम असलमे छलैक पुष्पा। ओ एकटा पैघ घरक पुतोहु छलि। दियादी झगड़ामे ओकर पतिक हत्या भए गेलैक। हत्या केनहार ओकर पतिक अपने सहोदर छलैक जे आब एहि अपराधी गिरोहक सरगना बनल अछि। भाएक हत्याक जूर्ममे ओकरा आजन्म काराबास भेल। मुदा ओ जहल फानि कए पड़ा गेल आओर से अखन धरि पड़ाएले अछि। पता नहि ककरा-ककरासँ ओकर संगति भेलैक, कतए-कतए गेल। अन्ततोगत्वा ओ लूट-पाटआओरहत्याक कतेको मामलामे फँसैत चल गेल।

पुष्पाक पतिक हत्याक बाद ओकर आओर ओकर एकमात्र सन्तानक रक्षाक कोनो व्योंत नहि रहि गेल। एक राति ओकर देओर ओकरा सभकेँ गामक घरसँ उठा अनलक। कहि नहि, कतए-कतए घुमबैत रहल। घुमैत-घुमैत ओ सभ एहि जंगल महलमे आनल गेल। ओकर बेटा कतए निपत्ता भए गेल से बुझिओ नहि सकल। कनैत-कनैत ओकर नोर सुखा गेल। हृदय पाथर भए गेल। विक्षिप्त जकाँ रहए लागलि। मुदा ओकर बच्चाक कोनो अता-पता नहि लागल। पुष्पा अपन दिओरकेँ कतेको बेर अपन बेटाक मारफत हाथ-पैर जोड़लक मुदा ओ ठहाका पाड़ए लागए। एक व्यंगपूर्ण एवम् कूड़तासँ भरल आक्षेपक संग कतहु घसकि जाइत। हत्या, लूटपाटओकर नित्य-प्रतिक धन्धा छल। ओ तँ सजाआप्ताछलहे। आब आओर की क्यो करितैक? जेलमे ओ मोछा ठाकुरक नामसँ कुख्यात छल। जाबे जेलमे रहल, जेलक दादा रहए। छोट-मोट नवागन्तुक कैदी सभ ओकर चाकरी करैत छल। जेलर बाबू सेहो ओकरासँ डरैत छलैक। कारण ओ स्वयं चोर रहैक। कैदी हेतु देल गेल अन्न-पानिकेँ चोरा कए बेचि दैक। अपन पैघ-पैघ मोछक चलते मोछा ठाकुर नाम प्राप्त कए ओ गौरवान्वित छल। भए सकैए मोछा ठाकुरक जेलसँ फरार होमएमे जेलरोक हाथ रहल होइक। ताहि बातक जॉंच पड़ताल भेबो केलैक। मुदा जेलर बेदाग साबित भेल आओर मोछा ठाकुर फरार भेल से भेल रहि गेल।

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५.

दू दिनक बाद फेर क्यो हमर पित्तीकेँ एकटा चिट्ठी पठओलक। ओहि चिट्ठीमे ओकरा स्थान ओ समयक सूचना देल गेलैक, जतए ओकरा फिरौती लए पहुँचक रहैक। ओहिमे ईहो लिखल रहैक जे दगाबाजी केलापर गम्भीर परिणामक हेतु तैयार रहए।

ओतेक पैसाक जोगार एतेक जल्दी नहि भए सकलैक। तथापि जे किछु सम्भव भेलैक से लए ओ नियत समयपर नियत स्थानपर पहुँचल। मोछा ठाकुर स्वयं ओहिठाम मौजूद छल। पैसाक बोरा लेबाक हेतु अग्रसर भेल कि कतहुँसँ गोली चलबाक आबाज भेल। मोछा ठाकुर ओतहि धराम भए गेल।

ओमहर पुष्पा हमरा लए ओहि कोठरीसँ निपत्ता भए गेल। भेलैक ई जे मोछा ठाकुर ओकरा हमरा सुंझाओगाही करए गेल छल। पुष्पाकेँ ई मौका भेटलैक आओर हमरा लेने भागलि। संयोगवश भगैत-भगैत ओ ओहीठाम पहुँच गेल जतए मोछा ठाकुरक लाश पड़ल छल। हमर पित्तीक नजैर हमरापर पड़लैक। ओ झपट्टा मारलक आओर हमरा लैत इएह ले वएह ले चम्पत भए गेल।

असलमे भेलैक ई जे मोछा ठाकुरक प्रतिद्वंदी सभ पुलिसक मुखविर बनि गेल छल। ओ सभटा सूचना पुलिसकेँ दए देने रहए। पुलिस तँ ओकरा पाछा छलहे। पुलिसकेँ अबैत देखि ओ भागवाक प्रयत्न केलक, मुदा सफल नहि भए सकल। कनीके कालमे ओकरा आओर पुलिसमे गोलीवारी होमए लगलैक आओर ओ पुलिसक गोलीसँ ठामहि रहि गेल।

इलाका भरिमे हमर लौटि जएबाक समाचार बिजली जकाँ पसरि गेल। हमरा ओतेक होश नहि रहए मुदा एतबा तँ बुझलिऐक जे एकटा महान संकटसँ उबरि गेल रही। हमर माएक प्रशन्नताक अंत नहि छल। ओकरा फुरेबे नहि करैक जे हँसए कि कानए। अफरातफरीमे पुष्पा दिस ककरो ध्यान नहि गेल। हमरा लए कए हमर पित्ती गाम भागल। लोक सभ सेहो गाम दिसि ससरल। मुदा पुष्पा...। ओ तँ मोछा ठाकुरकेँ मृत देखि ठहाका पाड़ए लागल। ठहाका ततेक विभत्स ओ जोरदार छल जे सम्पूर्ण वातावरणकेँ हिला कए राखि देलक। बात एतबेपर नहि रूकल। ओ प्रचण्ड पागल जकाँ मोछा ठाकुरक लहासक चारूकात नाचए लागलि, गाबए लागलि। बड़बड़ाए लागलि-

आब ले हमर जमीन -जायदाद। ले हमर घर घराड़ी। हमर घरबला आबिते होएत। तोरा छोड़तह नहि। अन्यायक प्रतिकार कइए कए रहत। अपन अधिकार लइए कए रहत।

महाभारतमे दुस्साशनक लहासपर नचनिहार पुरुष छलैक भीम जकरा डरे के के ने डराइक। जकरा कतेको हाथीक बल रहैक। मुदा एतए तँ एकटा वृद्ध महिला चिर प्रतिक्षित प्रतिशोधक अग्निमे धधकि रहल छल। की ओहो मोछा ठाकुरक छाती फारि देत? लगए तँ तेहने।

पुष्पाक अट्टाहास सुनि किछु ग्रामीण घुरि अएलैक। ओ सभ जस-के-तस मुरुत जकाँ ठाढ़े रहि गेल। चीत्कारक स्वर ओकरा सभकेँ गतिशून्य कए देलक। क्यो किछु बुझिए नहि पाबि रहल छल। आखिर ई वृद्धा के अछि? की कहए चाहैत अछि? ई मृतक एकरा कोन अन्याय केलक?

क्यो किछु कहैत ताहिसँ पहिने ओ फेर चिकरए लागलि-

कतेक बेर अएताह राम?कतेक पाथर बनल अहिल्याक उद्धार करताह। ई कलियुग छैक। सुनैत जाउ औ लोक सभ। तेँ ई राक्षसक नाश रामक प्रतीक्षा नहि कए सकल।

एतबे बाजल की फेर वएह ठहाका मारलक। निठ्ठास पागल भए गेल छल। गौंऑंकेँ के किछु नहि बुझा रहल छलैक जे की करए?

पुष्पा ककरो सुनए हेतु तैयार नहि छलि। आखिर बात हमर पित्तीक कान धरि गेलैक। हमरे संगे तँ ओ आएल छलि। ई बात बुझिते हमर पित्तीक आत्मा काँपि उठल। मुदा ओ कोनो हालतमे हमरा एसगर नहि छोड़ए चाहैत छल। तेँ चारि-पाँचटा बुझनुक लोककेँ पठौलथि जे पुष्पाकेँ कहुना अपना ओहिठाम लए आनए।

पुष्पाक उग्र रूप देखि ककरो ओकरा टोकबाक हिम्मत नहि भेल, बुझेबाक तँ बाते छोड़ू। ओकरा हाथमे दबिला पता नहि कतएसँ आबि गेल। ओ बेरि-बेरि मोछा ठाकुरक चारूकात घुमि-घुमि नृत्य कए रहल छलि। सभ डरा गेल, कही ओ दबिला ओकरेपर ने चला दैक। इएह ले वएह ले सभ अपन जान लए भागल। पुष्पा ओहिना रहि गेलि।

कनी कालमे पुलिसक आला अधिकारी सभ ओतए पहुँचल। मोछा ठाकुरक लहासकेँ थाना लए जेबाक रहैक। एक ट्रक पुलिस आएल। चारूकात घेरि लेलक। अधिकांशक हाथमे हथियार छल। जकरा हाथमे से नहि छल से सभ गोटे मोट -सोट लाठी भाँजि रहल छल। देखिते-देखिते मोछा ठाकुरक लहासपर पुलिसक कब्जा भए गेलैक।

लहास चल गेल मुदा पुष्पा एसगरे ओतहि चिकरैत-भोकरैत रहि गेल। कतहु क्यो नहि। लहास चलि गेलाक बाद ओ धराम दए खसल आओर राति भरि ओहिना रहि गेल। भोरे लोक ओकरा तकलक। ओ ओहिना बेसुध पड़ल छलि। हमर माए सेहो उत्सुकतावश ओकरा देखए गेली। ओ ओकरा देखि छगुन्तामे पड़ि गेली। ओ तँ ओकर नैहरक छलैक। ओ पुष्पाकेँ नाम लए कैबेर उठौलक। पुष्पा तकलकै। ऑंखि खोलिते हमर माएकेँ चिन्हि गेली। ओ माएकेँ बात मानि ओकरे संगे विदा भए गेली। इलाकामे गर्द पड़ि गेल। हमरा ओहिठाम ओकरा देखक लेल के के नहि आएल।

एहि घटनाक बाद गाममे लोक सतर्क भए गेल। क्यो अपन बच्चाकेँ असगरे कतहु नहि जाए दैक। कैटा बच्चा स्कूल गेनाइ छोड़ि देलक। हमरो संग सएह भेल। हम चौथा पास कए पाँचमामे गेले रही कि एहि आफतमे फँसि गेल रही। हमर पित्ती कोनो हालतमे स्कूल पठबए हेतु राजी नहि भेल।

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रबीन्द्र नारयण मिश्र

लघुकथा

रबीन्द्र नारयण मिश्रक

लघुकथा

सनकल

नहरिक काते-काते वो चल जाइत छल। फाटल-चीटल नुआसँ देहक लज्जावरण दैत दूनू हाथे दूनू बच्चाकेँ कोरतर दबने एक सुरे बढ़ल जाइत रहए। जेठक ठहा-ठही रौद। चारूकात कतहुँ क्यो नहि। मुदा ओ अपसियाँत भेल बढ़ले जाइत छलै। कि भेलै ओकरा से नहि कहि? प्राय: ओ सासुरसँ रूसि गेल छल। थाकल, ठेहियाएल वो पाकड़िक छाहरि देखि बैसि गेल। ओकर आँखिसँ नोर झर-झर खसए लागल। के पोछत ओकर नोर? सुनैत छल जे सासुरमे लोककेँ बड़ सुख होइत छैक। सासु-ससुर, दिओर, दियादिनी सभ छलै ओकरा। मुदा सभ जेना जन्मी दुश्मन रहैक ओकर। ओकर अनेरे खिदांस करब जेना ओकरा सभक धर्म रहैक। खेबो-पीबोक ओकरा कष्टे छलैक। घरबला कमासुत छलैक। मुदा भैयारीमे सभसँ छोट होयबाक कारण परिवारक ऋृण ओकरापर बहुत रहैक।भाए सभ गरीबीमे छलैक। तेँ जे चारि-कौरी कमाइतो छल से कैठाम बँटि जाइत छलैक। स्त्रीसँ ओकरा प्रेम तँ छलैक मुदा कालक प्रभाव ओकरो नहि छोड़लकै। समय बीतलासँ ओकरा सौन्दर्य-सौष्ठव कम भए गेल छलैक आ ओकर ध्यान क्रमश: कोनो आन स्त्रीपर केन्द्रित होमए लागल छलैक। ओ स्त्री सुन्नरि तँ छलै, संगहि ओकरामे आधुनिकताक पुट सेहो छलैक, आंगिक चमत्कार छलैक आ यौवनक मादकता ओकरा आकर्षणक केन्द्र बना देने छलैक...।

कोना-ने-कोना इएह बात सभ ओकरा कानमे पड़लैक जे ओकरा पचाओल नहि भेलैक। दरिद्राक भार फराक, तंदुरूस्ती घटैत से छलैक आ ओमहर घरबलाक उपेक्षापूर्ण आचरण...।

मोन जेना बेरक्त भए गेल रहैक आ तँए एक दिन वो सासुरसँ काँखक तर बच्चाकेँ दबने भागि गेल।

नैहर धनिक तँ छलै मुदा भाए सबहक राज। पिता मरि गेलै आ माए सेहो बुढ़ भए गेल छलैक। क्यो घरमे मोजर नहि करइ। मुदा बेटीक तँ की नहिरे की सासुरे। आ तँए जखन वो नैहर पहुँचल तँ चारूकात गामक नव-पुरान लोक ओकरा घेरि लेलक।

किछु सुनलिऐ? फलनमाक बेटी सासुरसँ भागि अएलैक अछि।

इत्यादि-इत्यादि, जकरा जे फुराइक से बाजैत छलै। आओर वो हतप्रभ बीच अँगनामे ठाढ़ रहए। के खोंइछ खोलत आ के पटिया ओछा कए बैसए कहतैक। अपने घरमे वो आन बनल छल। क्यो सहारा नहि बुझाइ।

ताबतमे प्राण दाइ कतहुँसँ एलखिन आ कहलखिन-

दूर जाइ जाउ। केहन पाथर भए गेलहुँ अहाँ लोकनि..! बेटी डाटी छइक आइ आएल, काल्हि चल जाएत। तकर अनादर किएक करैत जाइत छी।

कैटा कनियाँ सभ आबि गेल छलैक ओहि आँगनमे। तीनटा ओकरभाए छलैक। भरि-भरि दिन वो जेठकाकेँ कोरा खेलबैत रहैत छलैक। जाड़क मासमे रौदमे तेल लए देह मलैत रहए आ कनेको जहाँ बच्चाकेँ सर्दी होइक तँ जेना ओकर प्राण सन्न दए रहि जाइत रहैक। मुदा आइ चारि-पाँच दिन अएला ओकरा भए गेल छलैक आ ताधरि जेठकासँ टोका-चाली नहि भेलैक।भाए सभ तीनू तीन ठाम भए गेल छलैक आ माएकेँ तीनू गोटे मिलि कए फराक खोड़िस दैत छलैक।

हारि कए जखन ओकरा कोनोभाए नहि पुछलकै तँ माएक संगे रहए लागल। माए तँ माए होइत छैक किने। रहि-रहि कए नोरक धार बहाबए लगैत छलैक। उच्च सुनैत छलैक आ तेँ ओकरासँ जे खुलि कए गप्पो करैत सेहो नहि होइक। कारण जे ओकर बात कनियाँ सभ सुनबाक हेतु टाट लागल रहैत छलैक। कहबीछैक जे गेलहुँ नेपाल आ कर्म गेल संगे। सएह परि ओकरो भेलैक। सासुरमे सासु, ननदि आ दियादिनी तँ नहिरामे ई कनियाँ सभ ओकर जानक जपाल भए गेल छलैक। तैयो माए लग छल। अहिठाम किछु स्वतंत्रता तँ छलैक।

सएह की हाल अछि ओकरा सन-सन हजारो कन्याक जकरामे सासुर ने नहिरे- क्यो कतहुँ सहारा नहि होइत छैक?”

सएह सभ सोचैत रहए। सोन दाइ सोन दाइ, सौंसे गाममे सोर रहैत छलैक। गोर नार दप-दप छल वो। ओकरामे सभ गुण छलैक। मुदा गुणसँ की हो? टाकाक बिआह होइत छैक। पिता धनिक तँ छलैक मुदा कंजूस छलखिन। बेटीक भाग नहि देखलखिन आ एकटा साधारण लोकसँ ओकर बिआह करा देलखिन सौंसे गाम छिया-छिया कहलकै।

सएह हौ, लोचनो बाबू, विचार घोरि कए पीबि गेलाह। बेटीक भविष्यक कनियोँ विचार नहि केलाह। पाइ तँ अबैत जाइत रहैत छैक।

इत्यादि-इत्यादि। बेटा सबहक भविष्यक चिन्ता जबरस्त छलनि। की होएत की नहि? बेटी तँ दोसर धर चल जाइत छैक। ओकरासँ वंशक रक्षा तँ नहि होइत छैक। मुदा बेटा तँ कुलक आधार छैक। सएह सभ हुनकर पुरनका मिजाज सोचैत रहैत छल।

सासुरमे दरिद्रा चरम सीमापर छलैक। सभ दियादिनी मरूआ कूटए। रोटी ठोकए। धनकुट्टी करए। द्विरागमनक पन्द्रह-बीस दिन धरितँ ओकरा क्यो किछु नहि कहलकै। मुदा कालक्रमे सभक व्यवहार कठोर होइत गेलैक। पटिदारी छलैक किने।

गे मैयो भरि दिन बैसल रहतौ जेना फरफेसरक बहु हो..!”

घरबला जाबत काल रहैक ताधरि क्यो ओकरा किछु नहि कहितै। ओकरा काजपर जाइते फेर वएह रामा वएह खटोली। ओकरा बासन छुआओल गेल आ क्रमश: ओ पार लगा कए चौका-बासनक काज करए लागल। मुदा ओहि घरमे तँ पटिदारी छलैक। जेठकी दियादिनी बड़ क्रूड़ छलैक। ओकर इच्छा जे कुटनी-पिसनीमे सेहो पार लगौक। किछु दिनक बाद ओकरा सन्तान हेबाक सम्भावना भेलैक। मुदा ताहिसँ की? भानस-भात, कुटनी-पिसनी आ ताहिपर सँ सासु ओ ससुर तथा दियादिनी सबहक कटाह गप्प-सप्प।

सुनैत-सुनैत ओकर दम फुलैत छल। मुदा करए की? ककरा कहितै अपन दुख। चारूकात अन्हारे-अन्हार बुझाइक। जकर घरोबला ओकर पक्षमे नहि होइक ताहि स्त्रीगणक भगबाने मालिक होइत छैक आ सएह परि ओकरो छलैक। ओना, नवमे ओकर घरबला बड़ आव-भाव रखलकै। नव-नव कपड़ा-लत्ता सभ चीज आनि-आनि दैत छलैक।

मुदा ओकरा ध्यान जेना क्रमश: हटैत गेलैक। ओ एसगरे हकासलि-पियासलि भरि दिन आ दुपहर राति धरि काज करैत रहैत छल। क्यो एहन नै भेटलैक जकरा अपन मोनक भाव कहितै, जकरा लग मोन भरि कनितै।

उपाय तँ छलैक। मुदा बोराक आम आ बेटीमे मिथिलामे कोनो अन्तर नहि छैक। साँठि देनहि कल्याण। आ जँ एक बेर ककरो गारामे बान्हि देलिअनि तँ फेर जन्म भरिक लेल निचैन भए जाउ। धन्यवाद कही मिथिलाक समाजकेँ जे एखनो धरि अपन स्त्री समाजकेँ एतेक निरघीन जीबन वितएबाक हेतु मजबूर कए दैछ।

इएह सभ बात ओकर मोनमे उठैत रहैत छलैक। ओमहर ओकरभाए सभ अपनामे भिन्न-भिनाउज कए लेलकै आ सभ अपना-अपनीक धन जमा करैत छलैक। सभकेँ कोठा छलैक। जहिआ ओ नैहरसँ कनैत बिदा भेल छल तहियो ओकर पिताकेँ कोठा छलैक। मुदा अखन तँ ओकरा बुझाइत जेना दोसर ठाम आबि गेल हो। चारूकात पोखरिया-पाटन छलैक। सएह, धन एतेक आ मोन कतेक छोट छै ओकरभाए सबहक। ठीके छै कहबी जे टाका आगू लोक सभ सम्बन्ध बिसरि जाइत अछि।

किछु दिन नैहरमे रहलाक बाद ओकर सासुरक लोक अएलैक। बड़ उपरागा-उपरागी भेलैक। आ ओकरा फेर लोक सासुर लए गेलैक। मुदा एहि बेर तँ ओकर सासु बाढ़निये नेने ओकर स्वागत केलक। एवम्-प्रकारेण आनो-आनो लोकक आचरण ओकरा प्रति कठोर होइत गेलैक। ओकर गहना सभ बेचि देल गेल रहैक। ओ क्रमश: अकान ओ सुन्न भेल जाइत छल।

एक दिन ओकरा ने आगू फुराई आ ने पाछू।दिमाग बिजलीक करेन्ट जकाँ फेल कए गेलैक। ओ फेर भागल नैहर। एहि प्रकारे नैहर-सासुरओ कै बेर केलक। सभठाम ओकरा उपेक्षा भेटैत छलैक। नैहरोसँ ओकर मोन उचटि गेल रहैक। तेँ ओ सोचलक जे बरे लग चली। जेना-तेना हराइत-भुतियाइत ओ बरक डेरापर पहुँचलतँ जे देखलक से देखि कए गुम्मे रहि गेल। भोरक समय छलैक ओकर घरबला कोनो दोसर स्त्रीक संग एसगर घरमे रहैक। ओ चोट्टे घुमि गेल आ भागल भागल-भागल नहि जानि ओ कतए गेल।

एमहर ओकर खोज-पुछारि होमए लगलैक आ कएक दिनक बाद एकटा टीशनपर ओकरा लोक बैसल किछु-किछु रखने फाटल-चिटल कपड़ा पहिरने देखलक। ओ ठहाका भरि कए हँसैत छलैक- जेना समस्त समाजपर हँसि रहल हो। ओकरा ने कथुक लाज छलैक आ ने धाक। मुदा लोक सभ कहए लगलैक जे ओ एकदम सनकि गेल छल। ओ एकदम गुम्म भए गेलैक। तकर बाद फेर कहिओ ककरोसँ नहि बजलकै।

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