logo   

वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

Home ]

 

India Flag Nepal Flag

(c)२००४-२०२१.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन।

 

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

मुन्नाजी

बीहनि कथा

टकटकी

बेरा बेरी लोकक जमा भेल भीड़क सोझाँ ठोहि पाड़ि क' कान' लागल छल ओ छओँड़ी. कियो किछु पुछय त' उतारा नै द' सभहक मुँह तकैत रहल....

भीड़ बढ़ैत जा रहल छल....मुदा सब मुकदर्शक बनल.

शान्त भीड़ मे सँ आब शब्द बहरेलै " गै, ई कह  तोहर नाम ठेकान की छौ ?"

--- यौ छोड़ू, की करब नाम ठेकान बुझि  ?.

--- तोरा तोहर घर धरि पहुँचा देबौ.

--- यौ, हमर नै कोनो घर वाँचल आछ ने कोनो ठेकाना, हम त' दंगा पीड़ित शिविर मे सँ भागि एत' एलौं ऐछ.

--- किए भगलीही , अपन जान बचेबा लेल ?

--- नै यौ, अपन संपति बचेबा लेल. !

--- आँय ! तहन तो अपन गाम - घर जो ने अपन संपैतक रक्षा करिहें.

---- गाम मे किछु आब कहाँ  वाँचल ऐछ.जे किछु संपति शेष ऐछ ओ त' हमरे लग ऐछ.आ तकरे बचेबा खातिर त' गाम सँ भगलौं.

" कत्तौ कियो रक्षक नै देखएल. !"

--- के पुरूष राखत तोरा ? जे राखत ओहो बदनाम भ' जएत.

हा....हा.......हा, ठठा के हँसैत......यौ , जँ पुरूष सबके बदनामीक सत्ते डर होइतै त' गाम सँ परदेश धरि हमर संपैतक नोच- नोची नै ने करितए. ?

भीड़ उछहि गेल....!

 

रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।