logo logo  

वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

| विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

Home ]

India Flag Nepal Flag

(c)२००४-१७.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

  •  

    नन्‍द विलास राय- दूटा लघु कथा

     

    हमर पत्नीक मनोरथ

    हम निर्मलीमे डाक्‍टर रमेश बाबूक क्‍लिनिकपर बैसल रही। डाक्‍टर साहैब कोठरीमे रोगी सभकेँ जाँच कऽ रहल छला। कोठरीक आगाँ राजदेव बाबू, रामविलास बाबू आ हम बैस कऽ मैथिली साहित्‍यपर चर्चाकऽ रहल छेलौं कि हमर मोबाइलक घन्‍टी बजल।

    जेबीसँ मोबाइल निकालि नम्‍बर देखलौं तँ मालूम भेल हमर पत्नीक फोन छी। हम मने-मन भनभनेलौं-

    आबि गेल आफत...!”  

    एक मन भेल जे फोन काटि दी, फेर मन भेल जे रिसिभे ने करी। मुदा डर ईहो रहए जे जँ फोन रिसिभ नै करब तँ गामपर पहुँचते देरी महाभारत शुरू भऽ जाएत आ रातिमे फेरो मच्‍छर सभकेँ हमर भरपूर खून पीबाक अवसर भेट जेतइ। यौ बाबू की करितौं हारि कऽ मोबाइलक हरियरका बटम टीपैत बजलौं-

    हेलौ, की कहै छी?”

    ओम्‍हरसँ पत्नीक अवाज आएल-

    फोन किए ने उठबैत रहिऐ। की करै छेलिऐ?”

    बजलौं-

    फोन तँ उठेबे केलौं, हँ! पहिलुक घन्‍टीपर नहि उठा चारिम घन्‍टीपर उठेलौं। अच्‍छा कहू की हुकुम?”

    ओम्‍हरसँ पत्नी बजली-

    दूटा ब्रेड पकौड़ा नेने आएब। आ हँ, पोलीथीनमे चटनी सेहो लऽ लेब।

    कहलयैन-

    ब्रेड पकौड़ा तँ गरमे खाइमे नीक लगै छै, ढंढामे तँ कोनो सुआदे ने बुझाएत।

    ओ बजली-

    अहाँ नेने आउ ने चूल्‍ही पजारि हम ताबापर सेक लेब।

    ई कहि ओ फोन काटि देली।

    हमर मुँह लटैक गेल। किए तँ जेबीमे एकोटा छेदामो ने रहए। बीसटा टका जे रखने रही ओ साइकिलक ट्यूब पंचरमे खर्च भऽ गेल रहए। सोचमे पड़ि गेलौं। सोची केकरासँ मुँह छोड़ी। जं केकरोसँ मुँह छोड़ी आजँ पाइ नै देत तब तँ अपनेसनक मुँह हएत आ तनावसँ बढ़ि जाएत। फेर सोची जँ पत्नीक फरमाइस पूरा कऽ कऽ गामपर नै जाएब तँ रातिमे फेरो दलानेपर सूतए पड़त आ सूतब की कपार, भरि राति मच्‍दर हौंकैत परात करए पड़त। हमरा दस बर्खक पहिलुका घटना मोन पड़ि गेल।

    निर्मलीमे सर्कस आएल रहइ। गामक जनीजाति सभ सर्कस देखबाक प्रोग्राम बनौलैन। हुनका सबहकप्रोगाम सौंझुका 6 बजसे 9 बजेक शो देखबाक छेलैन। मुदा गामपर सँ विदा हेती दुइये बजे, किएक तँ पहिने जेती तखन बजारमेमे अल्‍ता, टिकुली, लिपिस्‍टिक स्‍नो-पोडर, पवन टोकी कानमेहक, नाकमेहक आ केशमेहक कीनती...।

    हमरो पत्नीकेँ मालूम भेलैन। ओ जलखैये करैकाल हमरा कहली-

    यौ सुनै छिऐ?”

    हम कहलयैन-

    कोनो कि कानमे ठेकी नेने छी जे नै सुनब। बाजू ने की कहै छी?”

    तैपर पत्नी बजली-

    अँइ यौ, दारू पीब कऽ आएल छी की जे एना बजै छी?”

    हम कहलयैन-

    से दिन कहिया हेतै जे पुतोहु कहत ..... । ऐठाम तँ चाह पीबैले पाइयेने अछि आ अहाँकेँ दारू सुझैत अछि! कहू ने की कहै छी।

    पत्नी बजली-

    गामक लोक सभ सर्कस देखैले जाइत अछि।

    तैपर बजलौं-

    ऐमे की लगै छइ। पच्‍चीस टका टिकटमे आ पच्‍चीस टकाक चाह-नाश्‍ता। पच्‍चीस टकाक व्‍योंत करि लिअ। नइ होइए तँ तीन किलो चीकने बान्‍हि लेब। ओकरा पल्‍लपर बेच लेब, पाइ भऽ जाएत।

    ई बात सुनिते-देरी पत्नीक पारा चढ़ि गेलैन। ओ तामसे भेर भऽ गेली। बजली-

    अँइ! हम चिकना लऽ कऽ सर्कस देखए जाएब! नै जाएब! हमर कपारे जरल अछि जे अहाँ संग बिआहभेल। ने कहियो सिनेमा आ ने कहियो सर्कस देखेलौं। ने स्‍नो, ने पाउडर, ने नाकमेहक, ने कानमेहक, ने काजर, ने ठोर रंगा, ने सेनुर आ ने टिकुली कहियो अहाँकेँ जुड़ल। अहीठाम मैलावाली छै, अेकर दुल्‍हा ओकरा रंग-रंगक साबुन, तेल आ सिंगारक चीज-वौस आनि-आनि दइ छइ। जखनी घर बलाकेँ जे कहलक तखनी घरबला हजूरमे रहै छइ। की हमरा कोनो मनोरथ नै छइ। अहाँबुते कहियो हमर कोनो मनोरथ पुरा भेल।

    ई कहैत ओ कानए लगली। हम छगुन्‍तामे पड़ि गेलौं। हम कहलयैन-

    मैलाववालीक घरबला मास्‍टरी करै छइ। तीस-पैंतीस हजार टका महिना कमाइ छै, आ अहाँक घरबला कएटा पाइ कमाइए। अच्‍छा हमहीं दोकानसँ चिकना बेच कऽ आनि दइ छी, अहाँ सर्कस देख आएब।

    तैपर पत्नी बजली-

    निर्मलीबजार जाएबतँ सर्कसेटा देखब आकि किछु सिंगारो-पेटारोक चीज कीनब। हमरा कमतीमे दू साए टका चाही।

    हम कहलयैन-

    अहीं कहू जे अखन हाथमे एकोटा टका नै अछि तखन दू साए टका केतएसँ देब। के देत दू साए टका। जहिया पाइक ओरियान हएत तहिया निर्मली जा कऽ सिंगारक समान लऽ आनब। आइ सर्कसटा देख आबू। हम दोकानसँ चिकना बेचि पच्‍चीसटा टका आनि दइ छी।

    तैपर पत्नी बजली-

    हम जाएब तँ दू साए टका लऽ कऽ नहि तँ नै जाएब।

    हम केतेको गोरेसँ दू साए टका मंगलौं मुदा कियो ने देलक। दोकानमे चिकना बेच पच्‍चास टका आनि पत्नीकेँ देलिऐन तँ ओ ढौआकेँ फेक देलक आ बाजल-

    दू बजे लोक सभ सर्कस देखए विदा हएत। अहाँ जँ दू बजे तक दू साए टका आनि कऽ देब तब तँ बड्ड बढ़ियाँ नै तँ अहाँ जानी आ आ अहाँक काज जानए।

    हम बड्ड परियास केलौं मुदा कियो मुँहपर माछी नै बैसए देलक। पत्नीक तुगलका फरमान हमरा बुत्ते पूरा कएल नै भेल।

    स्‍नान कऽ खेनाइ खा मैलामवाली लग गेलौं आ कहलयैन-

    भौजी दू साए टकाक व्‍योँत कऽ दिअ। बड्ड जरूरी अछि।

    तैपर मैलामवाली कहली-

    हमरा लग पाँचे साए टका अछि आ निर्मली सर्कस देखए जाइ छी। बजारमे चूड़ी पहिरब आ किछु सिंगारक समान सेहो कीनब। हमरा तँ पाँच साए टकासँ पारो ने लागत तँ अहाँकेँ केना देब।

    हम अपन सनक मुँह लऽ कऽ अँगना एलौं आ बोलीमे हजार मन मिश्री घोरैत पत्नीक हाथ अपना हाथमे लऽ कऽ कहलिऐ-

    हे समूचा गाम घूमि एलौं मुदा कियो टका नै देलक। केकरा-केकरा लग ने मुँह छोड़लौं मुदा कियो मुँहपर माछी नइ बैसए देलक। से नै तँ अहाँ ई पच्‍चास टका लऽ कऽ सर्कस देख आउ, जखन पाइक व्‍योँत भऽ जाएत तँ दुनू गोरे फेर निर्मली चलब, सिनेमा देखब आ अहाँसिंगारोक समान कीनि लेब।

    तैपर पत्नी हमर हाथ अपना हाथसँ झटकैत बजली-

    ईह! बेदरा जकाँ हमर परताए एला हेन! जाउ राखु अपन पचसटकही। नै हम सर्कस देखै छी।

    हम केतबो खुशामद केलिऐन मुदा ओ टस-सँ-मस नै भेली। आ ने सर्कसे देखए गेली। हमरो ब्‍लडपेसर बढ़ि गेल। मुदा दिमागकेँ स्‍थिर रखैत चौकपर चलि गेलौं।

    एक्केबेर आठ बजे रातिमे चौकपर सँ एलौं। अँगना गेलौं तँ चूल्‍हा-चौका सभ बन्न रहए आ पत्नी कोप भवनमे जा कऽ सूतल छेली। भीतरसँ बिलैया लगा नेने छली। हम केबाड़लग जा कऽ केतबो हाक देलिऐमुदा ने ओ केबाड़े खोलली आ ने किछु बजबे केलीह। सभसँ मोश्‍किल भेल जे रातिमे सूतब केतए। की करितौ हारि कऽ दलानपर जा अखड़े मोथीक पटियापर सूतलौं। सूतब की दैवक कपार भरि रातितौनीसँ मच्‍छर हौंकैत परात केलौं।

    मनमे पत्नीक प्रति पूरा रोष भऽ गेल रहए। सोचलौं ओ पत्नी की जे पतिक दुख नै बुझलक..!

    बिआहमे एकटा चरिआना भरि सोनाक औंठी देने रहए। वएह औंठी नरहिया बजारमे बन्‍हकी लगा दिल्‍ली विदा भऽ गेलौं। दिल्‍ली जा स्‍पोटमे पाँच हजार टका महिलापर काज पकड़लौं। आठ घन्‍टाक ड्यूटी रहए। चारि घन्‍टा ओभर टाइमो खटी। ख-पीब कऽ आ रूप भाउ़ा दऽ कऽ चारि हजार टका बँचैत रहए।

    छह मास धरि काज केला पछाइत लगधक पच्‍चीस हजार टका जमा भेल। एक दिन फोनसँ खबर भेल जे माए बीमार अछि। जँए छी तँए चलि जाउ।

    हम दिल्‍ली बजारमे पत्नी-ले ब्रेसिर, स्‍नो, पाउडर, लाहबला चूड़ी, रेाल्‍ड-गोल्‍ड नेकलस, कानक बाली, नाकमेहक नथिया, कानमेहक झुमका, गमकौआ साबून, ठोररंगा, पैररंगा आ लबन टोकी सभ सिंगारक चीज वौस कीनलौं। हँ, कपड़ा नै कीनने रही। किए तँ हमर कीनलाहाकपड़ा हमरा पत्नीकेँ  पसिने नहि होइ छैन तँए सोचलौं दू हजार टका दऽ देबै अपन निर्मली जा शिव वस्‍त्रालयमे मनपसन्‍द कपड़ा कीनि लेती।

    एकटा अटैचीमे सभ समान राखि गाम विदा भेलौं। दरभंगावाली सुपर फास्‍ट ट्रेनमे बैसलौं। केतेको परियास केलाक बादो रिजर्वेशन नै भेल छल मुदा जेनरले बौगीमे खिड़की लग एकटा सीट भेट गेल रहए।

    अटैचीकेँ बर्थपर रखि चौकन्ना छेलौं जे कियो चोरा ने लिअए। भरि राति सुतबो ने केलौं। मुदा बनारस अबैत-अबैत आँखि लगि गेल। सपनामे देखलिऐ हमर पत्नी अपना आँगनमे सभ चीज-वौस रखि निहारि रहली अछि। ओ बड्ड खुश अछि। हमर हाथ अपना हाथमे रखैत बाजि रहल अछि- आइ हमर मनोरथ पूरा भऽ गेल। नीन टुटल तँ देखलिऐ एकटा बीस-बाइस बर्खक अति सुन्नैर लड़की हमरा कहि रहल छेली- कनेक हमरो बैसऽ दिअ प्‍लीज।

    हम पहिने अटैचीदिस देखलौं तँ ओ सुरक्षित बुझि पड़ल। तेकर बाद ओइ लड़की दिस धियानसँ देखलौं तँ ओ कोनो फिल्‍मी दुनियाँक हीरोइन जकाँ बुझि पड़ली। ताबेमे ओ लड़की फेर बाजल-

    प्‍लीज कनेके खिसकु ने।

    ओ गजब सुन्नैर छेली। अपना आपकेँ भाग्‍यशाली बुझैत हम खिसैक गेलौं। ओ लउ़की बैस गेली। भाग्‍यशाली ई बुझलौं जे एहेन दिव्‍य नवयौवना हमरा लगमे बैसली। हुनका शरीरसँ मधुर-मधुर सुगन्‍ध हमरा मदहोश करए लगल। ओ लउ़की पर्स खोललक आ एकटा पत्रिका निकालि पढ़ए लगल। हमर आँखि हुनकर सुन्‍दरता निहारएलगल। एकदम गोर वर्ण, भरल-पूरल देह। सेव जकाँगाल। हिरण जकाँ कजरारी आँखि। नागिनसन केश जे खुजले छल, कानमे तीन स्‍टेपबला झुमका, नाकमे हीरा जड़ल छक, समतोलाक फारा सन ठोर जैपर हल्‍का लाल रंगक लिपिस्‍टिक लागल। बिल्‍कुल पारदर्शी साड़ी आ ब्‍लौज पहिरने। साड़ीक भीतरसँ पेटीकोट आ ब्‍लौजक भीरसँ अधोवस्‍त्र पहिरने छेली से झलाक-झलाक देखाइत। पैरमे जे मेहदी(आरत)लगौने रहए ओ ओकरा पैरकसुन्‍दरतामेचारिचान लगबैत रहइ। ब्‍लौज तेतेककसल जे ओकर जवानीक छातीक एक चौथाइभागबाहरे। जेना देखनिहारकेँ जवानीक टेलर देखबैत...।

    हम ओइ लड़कीसँ पुछलिऐ-

    ट्रेन केतए पहुँचल अछि?”

    ओ लड़की जवाब देलक-

    मुजफ्फरपुरसँ आगाँ निकैल गेल अछि। केतए उतरब।

    हमरा मुहसँ अनायास निकैल गेल-

    दरभंगा।

    तैपर ओ बजली-

    हमहूँ दरभंगे उतरब। अहाँ दिल्‍लीसँ अबै छी की?” ओ फेर पुछलक।

    हमरा फेर बजा गेल-

    हँ दिल्‍लीसँ अबै छी।

    ई कहैत हम खिड़कीसँबाहर मकइकेँ फसल देखए लगलौं। ओ लड़की हमरा देहमे सटि गेली। हमरा जेना 440 वोल्‍ट बिजलीक झटा लगल, तहिना बुझना गेल। मुदा डरो हुअए तँए कनी अपनाकेँ सिकोररि लेलौं आ थोड़े ओइ लड़कीसँदेह अलग कऽ लेलौं। सोचलौं की जानि की भऽ जाए, किएक तँ कहल गेल छै- त्रियाचत्रिम् देवो ने जानए..।

    बजलौं-

    मेडब कनेक हटिये कऽ बैसू।

    ओ लड़की हमरा दिस तकैत बजली-

    की यौ बिआह भेल अछि की नहि।

    हम सोचलौं, लड़की ई गप किए पुछैए! कहलिऐ-

    हँ बिआह तँ भऽ गेल अछि।

    ओ फेर पुछलक-

    बाल-बच्‍चा अछि की?”

    हमरा बजा गेल-

    हँ एकटा बेटीअछि।

    तैपर ओ पुछलक-

    अपन छी की अनकर?”

    आब तँ बुझू जे हमरा रिश उठि गेल। मनमे बहुत बात आएल। मुदा डर हुअए जे किछु ऊँच-नीच गप बजा गेल आ जँ ई लड़की कोनो अबलट लगा दिए तखन तँ बड़का पहिपैटमे पड़ि जाएब आ सभ प्रतिष्‍ठा माटिमे चलि जाएत। मुदा तैयो हम पुछलिऐ-

    मेडम एना किए बजै छिऐ।

    तैपर ओ कहलक-

    अहॉंकेँ देखै छी जे मौगीक महक लगैए। पत्नियोँ हेती तं हमरासँ सुन्नैर तँ नहियेँ हेती।

    हम सकदम्म भऽ गेलौं। फेर वएह पुछलक-

    आकि अहाँक बिआह हेमामालिनीक बहिनसँ भेल अछि?”

    हम बजलौं-

    नइ जानि मेडम किएक अहाँ हमरा एहेन-एहेन बात कहै छी।

    तैपर ओ लड़की बजली-

    अच्‍छा छोड़ू ऐ बात सभकेँ आरामसँ चलू।

    ई कहि ओ फेर हमरा देहसँ सटि गेल। डर तँ हेबे करए मुदा अपना-आपकेँ बड्ड सौभाग्यशाली सेहो बुझै रही जे एहेन दिव्‍य लड़कीक सानिध्‍य प्राप्‍त भऽ रहल अछि।

    थोड़ेकालक बाद ओ लड़की अपन हाथक पत्रिका हमरा दैत बजली-

    लिअ पढू अहाँ बोर भऽ रहल छी।

    हम पत्रिका पकड़ैत पुछलिऐ-

    आ अहाँ?”

    जवाब देली-

    हम गृहशोभा पढ़ै छी।

    हम पत्रिकाक पन्ना उलटाबए लगलौं। पत्रिकामे नीक-नीक लड़की सबहक अर्द्धनग्‍न फोटोसभ रहए। एकटा कथा रहै- लबली हेमा। कथा बड्ड रामोन्‍टिक रहए। हम ओइ कथामे हेरा गेलौं। ताबेमे ट्रेन समस्‍तीपुर टीशनपर पहुँच गेल छल। ट्रेन रूकल। एकटा चाहबला हमरा वौगीमे चए़ि अवाज देलक-

    चाह गरम! गरम चाह..!”

    ओ लउ़की चाहबला दिस तकैत बजली-

    ऐ चाहबला दो कप चाह देना।

    हम मने-मन सोची जे दू कप चाह कीकरती। फेर मनमे भेल जे भऽ सकैए जे एक कप चाहसँ छाँक नै भरैत होइ।

     चाहबला दू कप चाह ओइ लड़कीकेँ पकड़ा देलकै। एकटा कम हमरा दिस बढ़बैत ओ लड़की बजली-

    लिअ चाह पीबू। एतेक भीड़मे अहाँ अपना दिक्कत सहि हमरा जगह देलौं।

    हम कहलिऐ-

    धन्‍यवाद। अहाँ पीबू हम चाहबलासँ लऽ लइ छी।

    तैपर ओ बजली-

    यौ अहाँ हमर पाइक चाह नै पीयब तँ अहीं दियौ ढौआ, हमहीं अहाँ पाइक चाह पीब। अहाँ ने छुबा जाएब मुदा हम नै छुबाएब।

    हम ओइ लड़कीक हाथसँ चाह पकड़ैत जेबीसँ दसटककी निकालि चाहबला दिस बढ़ा देलिऐ। ओ लड़की अपना पर्ससँ चारिटा मोट-मोट बिस्‍कुट निकालि दूटा बिस्‍कुट हमरा दिस बढ़बैत बाजल-

    लिअ बिस्‍कुटक संग चाहक मजा लिअ।

    हम कहलिऐ-

    धन्‍यवाद। अहाँ खाउ।

    तैपर ओ बाजल-

    की होइए जे ई छौरी बिस्‍कुट खिया कऽ सभटा ढौआ-कौरी छीनि लेत। यौ हम एहेन नइ छी। हम मिथिला विश्‍वविद्यालयमे गृह विज्ञानक पी.जी फाइनलक छात्रा छी।

    की करितौं। ओकरा हाथसँ बिस्‍कुट लऽ चाहमे डुबा-डुबा खाए लगलौं।

    बिस्‍कुट खेलाक किछे मिनटमे हमरा नीन आबए लगल। आँखि खुजल तँ लहेरियासराय अस्‍पतालमे बेडपर पड़ल रही। एकटा नर्स हमरा मुँहपर पानिक छीटा मारैत रहए। ने ट्रेन रहए आ ने ओ लड़की। हमरा चीज-वौससँ भरल अपन अटैची मोन पड़ल। हम बजलौं-

    हमर अटैची?”

    तैपर ओ नर्स बजली-

    आपको दरभंगा रेलबे स्‍टेशपर बेहोशी की हालत में उतारा गया है। पूरा बौगी खाली था। आप अपने सीटपर बिल्‍कुल बेहोश थे। चाह घन्‍टा उपचार के बाद आपको होश आया है।

    हम अपन जीन्‍स पैन्‍टक जेबी टटौललौं तँ ढौआबला पर्स गायब रहए। हम बजलौं-

    हाय रे हमर पत्नीक मनोरथ।

    ई कहैत हम फेर बेहोश भऽ गेलौं।

    शब्‍द संख्‍या : 2077

    25.03.2017


     

     

     

    चरित्तर कक्काक ब्‍लडपेसर

    चरित्तर काकासँ भेँट करैले मन औनाइत रहए। हुनका भेँट भेना एक माससँ बेसीए भऽ गेल छल। किएक तँ हमहूँ धनकटनी आ गहुम बाउग करबामे व्‍यस्‍त छेलौं। गहुम बाउगसँ फुरसत भेटल तँ नारक टाल लगाएब, धान दौनी कराएब, एकटा ने एकटा काज लगले रहल। दौन-दौगोनी होइत-होइत गहुम पटबै-जोकर भऽ गेल। यौ बाबू किसानी जीवनमे बड्ड भीर। एकटा-ने-एकटा काज लगले रहत। आ जँ ओ काज समयपर नै करब तँ हानि छोड़ि लाभ नै हएत। मुदा  मुदा नोकरी करैबलाकेँ से बात नहि। तइमे सरकारी नोकरी करनिहारक तँ बुझू पाँचो आँगुर घीयेमे। आगि लागौ चाहे पाथर खसौ समयपर दरमाहा भेटबे करतै आ ऊपरका आमदनी अलगसँ। ने हर-हर आ ने खट-खट। देखै नै छिऐ प्रो. वीरेन्‍द्र बाबूकेँ केहेन मोछमे घी लगबै छथिन। एगारह बजे दिनमे महाविद्यालय जाइ छथिन आ तीन बजे बेरमे आपस आबि जाइ छथिन आ दरमाहा केतेक भेटै छैन...। खाएर छोड़ू ऐ बातकेँ...। 

    हम आ चरित्तर कक्काक बेटा विमल लंगोटिया संगी।पहलासँ बी.ए. धरि संगे पढ़लौं। ओ कलकत्तासँ बी.एड. कऽ लेलक तँए उच्‍च विद्यालयमे शिक्षकक पदपर नोकरी करै छैथ आ हम कोनो प्रशिक्षण नै प्राप्‍त केलौं तँए खेती-गिरहस्‍ती कऽ अपन जिनगीक गाड़ी खींच रहल छी। ओना, नोकरी-ले हमहूँ परियास कम नहि केलौं, मुदा ऐ युगमे भगवान भेटब असान अछि जखनकि नोकरी भेटब कठिन।

    29 दिसम्‍बरकेँ जखन गहुम पटबैत रही, फोचाइ कहलक जे चरित्तर काका बेमार पड़ि गेला हेन। ब्‍लड पेसर बढ़ि गेल छैन। जखनेसँ कक्काक बेमारीक बात सुनलौं हुनकासँ भेँट करैले मन कछमछ करए लगल। कछमछाइत मनमे उठल- चरित्तर काका मेहनती किसान छैथ। कन्‍हपर कोदारि आ हाथमे खुरपी रहबे करै छैन। जीर-मरीच आ नोनक अलाबे खाइ-पीबैक कोनो वस्‍तु नै कीनए पड़ै छैन। कहियो ने सुनने रहिऐ जे चरित्तर काकाकेँ माथो दुखाएल हेतैन। फेर ब्‍लड पेसर किएक बढ़ि गेलैन?

    विहाने भेने सुति उठि कऽ चरित्तर काकासँ भेँट करए लेल विदा भेलौं। रस्‍तेमे नित्‍यक्रियासँ निवृत्त भेलौं। कक्काक घर हमरा घरसँ लगधक डेढ़ किलोमीटरपर। हमर घर गामक दछिनवरिया टोलमे सभसँ दच्‍छिन आ हुनकर घर उतरवरिया टोलमे सभसँ उत्तर छैन।

    चरित्तर काका दलापरचौकपर कम्‍मल ओढ़ि कऽ बैसल रहैथ। हम दलानक निच्‍चेसँकहलयैन-

    काका गोड़ लगै छी।

    काका बजला-

    नीके रहह। आबह-आबह। केतए हेराएल छेलह हेन। एक-डेढ़ मासक वाद तोरासँ भेँट भेल हेन।

    कहलयैन-

    की कहब काका, एक्कोरत्ती फुरसत नइ भेटै छल। अहाँ तँ बुझिते छिऐ जे किसानक जिनगी केहेन होइ छइ। काल्‍हि गहुमक पहिल पटौनी समाप्‍त केलौं हेन। गहुमे पटबैतकाल फोचाइ कहलक जे काका बेमार भऽ गेला हेन। बुझू तखनेसँ अहाँक भेँट करैले मन कछमछ करै छइ। सुति उठि कऽ एमहरे विदा भऽ गेलौं।

    काका बजला-

    हँ, तेतेक ने टेंशन भऽ गेल अछि जे ब्‍लड पेसर बढ़ि गेल। आठम दिन डाक्‍टर रमेश जँचने रहए। कहलक जे नीचलका साए आ ऊपरका एकसाए साठि भऽ गेल अछि। दवाइ खाइ छी। काल्‍हि जँचबैलौं तँ कहलक आब ठीक अछि। तैयो परहेजसँ रहैले कहलक हेन। ठीक रहितो ऐ बेमरीमे दवाइ सभ दिन चलिते रहत सेहो कहलक। ठंढासँ बँचि कऽ रहैले कहलक हेन। भात आ नोन कम खाइले कहलक हेन।

    हम सभ गप करिते रही ताबेमे चरित्तर कक्काक पोती दूटा प्‍लेटम चारि-चारिटा नमकीन बिस्‍कुट आ दूटा कपमे चाह दऽ गेल।

    काका पुछलैन-

    पानियोँ पीबह?”

    कहलयैन-

    हँ काका, पीब।

    काका पोतीकेँ कहलखिन-

    गइ रीना एकलोटा पानि आ एकटा गिलस नेने आ।

    रीना एक लोटा जल आ एकटा गिलस राखि गेल। हम बिस्‍कुट खा जल पीब चाहक चुस्‍की लेबए लगलौं। चाहो पीबी आ कक्काकसँ गपो करी। हम पुछलयैन-

    काका, ऐबेर गहुमक खेतीक केते केने छी?”

    तैपर काका जवाब देलैन-

    एक्को धुर नहि।

    कक्काक गप्‍पक हमरा कोनो अर्थे ने लगल। हम छगुन्‍तामे पड़ि गेलज्ञैं। सोचएलगलौं- काका जीवनी किसान छैथ। चारि-पाँच बिगहामे सभ साल गहुमक खेती करै छैथ। फेर एना किए बजला! पच्‍चीसे नवम्‍बरकेँ विमल चौकपर भेटल रहए तँ कहने छल जे आइए गहुमक बाउग समाप्‍त केलौं। तैपर हम पुछनौं रहिऐ जे केतेक खेतमे गहुम बाउग केलह अछि। तैपर विमल कहने रहए पँच बिगहामे। तैपर हम कहने रहिऐ-बड़ी अगता गहुम खेती मारि लेलह। तैपर विमल बाजल रहए- रौ मीत पाँचो बिगहा खेतमे क्रान्‍ति धान रोपने रही। नारेपर कटबा लेलौं। फारबला ट्रेक्‍टरसँ एक दिन पाँचो बबिगहा खेतकेँएक समार जोतबालेलौं आ पाँच दिन रौद लगला बाद छठम दिन खाद आ बीआ छीटबा कऽ रोटावेटरसँ एक चास करा देलौं। आब की कोनो हर-बरदसँ खेती होइए जे बेसी समय लगात।

    हम कहने रहिऐ- हँ से तँ ठीके कहै छीही। तोर खेतो सड़के कातमेछौ, तँए ट्रेक्‍टर जाइक सुविधा छौ आ छह-सात बिगहा खेतो एकेठाम छौ।

    विमल कहने रहए- हँ से तँ अछिए। एकेटा कमी अछि। बोरिंग नइ अछि। की करबै तीन-तीन ठाम लेअर जाँच करबौलिऐ मुदा 250-300 फीटसँ कमपर लेअरे ने भेटै छइ।

    हम कहने रहिऐ- तोहर खेत तँ बिहुलो धारसँ पटि जाइ छौ। बोरिंगक खगतो तँ नहियेँ छौ। 

    विमल कहने रहए- हँ से तँ पटि जाइए।

    हमरा सोचमे डुमल देख चरित्तर काका टोकलैथ-

    की सोचए लगलहक।

    कहलयैन-

    काका हमरा तँ अहाँ गपक कोनो अर्थे ने लागल। 25 नवम्‍बरकेँ विमल भाय कहने छला जे आइए पाँच बिगहा गहुम बाउग कऽ निचेन भेलौं हेन। ओ किए झूठ बाजल?”

    तैपर काका बजला-

    ने विमले झूठ बाजल आ ने हमहीं गलत कहै छिअह।

    कक्काक बात सुनि हम आरो ओझरीमे पड़ि गेलौं। गपक कोनेा भाँजे ने लागए। कहलयैन-

    काका, अहाँ की कहै छिऐ से तँ हमरा भाँजे ने लगैए।

    काका समझबैत बजला-

    सुनह, गहुम ठीके पाँचबिगहामे बाउग केने छी। ओहो 25 नवम्‍बरकेँ। तोरा तँ बुझले छह जे गहुमक फसिलमे बाउग केलाक बीसम दिनसँ लऽ कऽ पच्‍चीसम दिन धरि पहिल पटौनी कऽ देबाक चाही।नै तँ गहुमक गाछमे वृद्धि नै होइ छइ।

    मुड़ी डोलबैत कहलयैन-

    हँ, से तँ ठीके। नहि तँ आखिरी पच्‍चीसम दिन धरि पहिल पानि देब अनिवार्य अछि।

    काका बिच्‍चेमे बजला-

    ठीके कहलक। आब तोंही कहह जे हमरा गहुम बाउग केला पैंतीस दिन भऽ गेल हेन आ अखन धरि पटवन नै भेल। भेल एक्को धुर गहुम बाउग केनाइ? बुझह जे हाथो तरक गेल आ लाटो तरक गेल।

    हम मुड़ी डोलबैत बजलौं-

    से तँ ठीके कहै छिऐ। जँ गहुमक फसिलमे पटवन नै केलिऐ तब तँ सभ खर्चा आ मेहनत पानिमे चलि गेल। मुदा एना भेल किए?”

    तैपरकाका बजला-

    सभ साल बहुल नदीसँ गहुमक पटवन भऽ जाइ छल। एमकी अगते बहुल धार सुखि गेल।

    हम पुछलयैन-

    एना किए भेल? एतेक अगता धार किए सुखि गेल।

    काका बजला-

    सुनै छिऐ गोठ नरहिया लग एन.एच. 104मे पुल बनि रहल छै, तँए पुलक ठिकेदार धारकेँ नरहियासँ एक किलोमीटर उत्तर बान्‍हि देलक। तँए पानि एनाइ बन्न भऽ गेल आ धार सुखिगेल।

    हमरा चरित्तर कक्काक ब्‍लड पेसरक कारणक भाँज लागि गेल। समयपर गहुम नै पटलासँ कक्काक ब्‍लड पेसर बढ़ि गेल रहैन।

    हम खड़ा होइत बजलौं- 

    काका,जाइ छी। बड्ड काज अछि।

    ई कहैत हम विदा भऽ गेलौं।  

    शब्‍द संख्‍या : 1061

        

    ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।

     

  •