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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

| विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)2004-2018.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

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  • डॉ. योगेन्द्र पाठक वियोगी

    उपन्यास- हमर गाम

     

    निवेदन

    वन्धुवर जगदीश प्रसाद मण्डलक आग्रह जे 24 मार्च 2018केँ आयोजित ‘सगर राति दीप जरय’ लेल हम एकटा बाल उपन्यास जरूर लीखी जकर विमोचन ओतए कएल जाएत। हम पहिनहि कहि देने छलिएनि जे किछु निजी व्यस्तताक कारण हम एहि आयोजनमे सशरीर उपस्थित नहि भऽसकब।

    बाल उपन्यासक एकटा खाका दिमागमे तैयारो कएल मुदा आकस्मिक चक्रव्यूहमे फँसि गेलासँ ओ तैयार नहि भऽसकल। मात्र दू दिन बचल छल जखन दोसरे किछु फुरा गेल आ चारि पाँती लीख बैसलहुँ। जे अछि, अपनेक समक्ष अछि। एकरा उपन्यास कहबै, उपन्यासिका, कथा आ कि गामक लेखा-जोखा से निर्णय अपनहि करबै।

    अत्यल्प समयमे चि. उमेश मण्डल एकरा पुस्तकाकार बना विमोचन लेल तैयार केलनि ताहि लेल हुनक आभारी छी।

     

    योगेन्द्र पाठक वियोगी

    कलकत्ता, 21 मार्च 2018 

     

                                                                              

    1. हमरो गाम मिथिले मे छै

    हम कोनो पढ़ल-लिखल लोक नहि छी, अपितु यदि कहियै जे हमरा गाममे एकटा केँ छोड़ि कियो पढ़ल लिखल नहि अछि तऽबेसी उचित होएत। घीच-घाँचि कए कहुना दशमा पास केलहुँ आ चल गेलहुँ दिल्ली रोजगारक खोजमे। शुरुएमे बुझा गेल जे एतए अपनाकेँ दशमा पास कहलासँ लाभ नहि नोकसाने अछि तें एहि बातकेँ नुका रखलहुँ आ जे काज हाथमे आएल से धरैत करैत गेलहुँ। अवसर देखैत काज छोड़ैत पकड़ैत कहुना दस साल बाद लगलहुँ टेम्पू चलबए। ताबत गाम दिश सेहो सड़क सब सुधरि रहल छलैक, फोर-लेन बनब शुरू भऽगेल रहै तऽसोचलहुँ जे गामे घुरि चली, ओतहि टेम्पू चलाएब। कने कमो कमाइ हैत तऽबेसिए लागत कारण गाममे कमसँ कम दिल्लीक सड़लाहा बसातसँ त्राण भेटत। कतबो किछु महग होउ, गाममे एखनहु बसात साफे छैक आ फ्री सेहो कारण एखन तक ओहिपर कोनो मालिक हक नहि जतौलक अछि।

    हमर नीक कि खराप लति बूझू एतबे जे भोरमे तीन टाकाक एकटा अखबार कीन लैत छी आ टेम्पूपर जखन बैसल रहैत छी तखन ओकरा पढ़ैत रहैत छी। एक दिन एहने अखबारमे पढ़ल जे मिथिलामे नवका चलन एलैक अछि अपना अपना गामक महान विभूतिक वर्णन करैत किताब लिखब। किछु एहने किताब बजारसँ कीन अनलहुँ। देखलहुँतऽहर्षो भेल आ ताहिसँ बेसी इर्ष्यो आ ग्लानि भेल। हर्ष एहि लऽकए जे पहिल बेर बुझलहुँ मिथिलामे एहन महान विभूति सब भेलाह आ इर्ष्या आ ग्लानि एहि लेल जे हमरा अपन गाममे एहन कोनो विभूति किएक नहि भेलाह।

    हमरा चिन्ता भेल- की सत्ते हमरा गाम मे कोनो विभूति नहि भेला? किछु बूढ़ पुरान सँ गप कएल। एक गोटे पूछि देलनि-

    खाली पढ़ले लीखल लोक विभूति होइ छै की?”

    हम सोचए लगलहुँ। ठीके, से रहितै तऽ  सिनेमा स्टार आ कि खिलाड़ी सब कें कियो चिन्हबे नहि करितै। हमरा बुझा गेल जे आन गामक विभूति सन तऽ नहि, तैयो एतेक जरूर जे हमरा गामक विभूति सब एक हिसाबें कतबो विचित्र रहथु मुदा ओहो लोकनि अपना समय मे गामक नाम कोनो तरहें उजागर करबे केलनि ।

    सेहन्ता भेल जे हमहूँ अपना गामक बारेमे किछु लीखी। मुदा की लीखब? लिखबाक लुरियो तऽनहि भेल। तैयो हम ठानि लेल जे लिखबे करब। विभूति लोकनि जे छलाह, जेहन छलाह, भेलाह तऽमिथिलेक सुपुत्र/सुपुत्री ने। आ हमरो गाम जेहने अछि, अछि तऽओही माटिपर कमला बलान कोशीसँ घेराएल, रौदी दाही भोगैत अशिक्षा आ गरीबीमे उबडुब करैत। तें हम निश्चय कएल जे हिनका लोकनिक कीर्तिक गाथा लीखल जाए।एखुनका युगे विज्ञापन आ प्रचारक छिऐ, से गामक नुकाएल छिड़िआएल रत्न सबकेँ बहार करबाक चाही। हम गौआँ भऽकए यदि नहि लिखबनि तऽअनगौआँकेँ कोन मतलब छैक?

    ओना तऽलिस्ट पैघ बनि गेल मुदा हम बहुत पुरान लोककेँ पहिने छाँटि कए मात्र दसटाक वर्णन एतए प्रस्तुत करए जा रहल छी। एहिमे पहिल नौटा छथि हमरा गामक नवरत्न आ दसम भेलाह विशिष्ट अतिथि रत्न। आशा करैत छी गौआँ लोकनि हमर एहि प्रयासक प्रशंसा करबे करताह। यदि किछु अनगौआँ मैथिल समाजकेँ हमर गामक एको गोटेक कीर्ति नीक लगलनि तऽहमर प्रयास खूबे सफल बूझल जाएत। नहि तऽकमसँ कम किछु लिखित तऽरहिए जाएत जे एखनुक बूढ़ पुरानक दिवंगत भऽगेलाक बाद नवका पुस्तकेँ पूर्वजक यशक किछु ज्ञान देतैक।

    हमर लिखल वस्तु सबकेँ मटिकोरबा गामक मिडिल स्कूलक हेडमास्टर साहेब बहुत कटलनि छँटलनि आ शुद्ध केलनि ताहि लेल हुनका बहुत धन्यवाद। बिना हुनकर सहयोग के ई अपने सबकेँ पढ़बा योग्य नहिए भेल रहैत।हम अपना गामक विभूतिक फोटो नहि छापि रहल छी। एकर कारण अपने सब पूरा पुस्तक पढ़लाक बाद बुझिए जेबैक।

     

    विनीत

     

    रामलाल परदेशी

    (गामक एक उत्साही युवक)

    गाम : खकपतिया

    डाकघर:मटिकोरबा

    जिला : मधुबनी।
     

     

    2. बीए

    मूल नाम: राम किसुन सिंह

    पिताक नाम: अजब लाल महतो

    जन्म तिथि: 1 जनवरी 1940। ई हुनकर सर्टिफिकेटमे लिखल छनि, मुदा हुनक पिताक अनुसार ओ तीन चारि बरख जेठ जरूरे छथि। जखन ओ मटिकोरबा गामक मिडिल स्कूलमे नाम लिखौलनि तऽहेडमास्टरकेँ जे बूझि पड़लै से लीख देलकै। हुनकर जन्म तऽभरदुतिया दिन भेल छलनि।

    शिक्षा: यथा नाम, माने ओ बी.. पास छथि। ओ गौरवसँ एखनहुँ लोककेँ सुनबै छथिन जे मैट्रिक, आइ.. आ बी..मे लगातार ओ तृतीय श्रेणीमे पास केलनि। संगहि मैट्रिकमे दू बेर, आइ..मे तीन बेर आ बी..मे चारि बेर फेल केलनि।

    उपलब्धि: हुनक सबसँ पैघ उपलब्धि छनि हमरा गामक पहिल आ एखन तक के अन्तिम ग्रेजुएट भेनाइ। पछिला करीब पचास बरखसँ एहि रेकॉर्डकेँ पकड़ने छथि। ओहू पुरान जमानामे ग्रेजुएट भैयो कए हुनका जखन दस साल तक कतहु नोकरी नहि भेलनि तखन ओ हारि कए पुस्तैनी काज, खेती,मे लागि गेलाह।

    एहन नहि जे सत्ते कतहु नोकरी नहि भेलनि। पुर्णियामे एक ठाम हाइ स्कूलमे अध्यापक भेलाह मुदा पहिले दिनक हिनक पढ़ाइ देखि कए ओतुका विद्यार्थी सबकेँ हिनक योग्यताक बेस अन्दाज लागि गेलैक आ ओ सब हड़तालपर बैसि गेल। एमहर साँझमे हिनका जे मच्छर कटलक से बोखार भऽगेलनि। दोसर दिन स्कूल जाइ के काजे नहि पड़लनि। कहुना एक हप्तापर गाम घुरि एलाह। विद्यार्थी सबकेँ विचारल बात विचारले रहि गेलैक। फेर दोसर बेर एहन योग्य शिक्षकसँ भेँट नहिए भेलनि हुनका सबकेँ।

    स्वस्थ भेलाक बाद ओ नियारलनि जे मास्टरी हुनका बुते पार नहि लगतनि। चल गेलाह कलकत्ता भाग अजमबै लेल।कलकत्तामे एखनहु बीए पैघ योग्यता बूझल जाइत छलैक। ओना जाहि समय बीए बीए केलनि ताहि समय बिहारक परीक्षा पद्धतिक चर्चा आन आन ठाम शुरू भऽगेल छलैक आ किछु लोक बिहारी बीएकेँ ओकर उचित हक देबा लेल तैयार नहि छल। कलकत्तामे मटिकोरबा गामक एक गोटे कोनो सेठक ड्राइवर छल। ओ हिनक पैरवी केलक सेठ लग। किछु बेसिए बढ़ा चढ़ा कए कहि देलकै सेठकेँ। फल ई भेल जे सेठ हिनका बिना कोनो पूछताछ के अपना गद्दीपर मनेजर बना देलकनि। ई बहुत खुसी भेलाह।

    मुदा भाग्यकेँ किछु दोसरे रस्ता देखेबाक छलैक। तेसर दिन सेठक एकटा मित्र आबि गेल आ ओकरा अनुपस्थितिमे ओहिना हिनका संग गपसप करए लागल। ओकरा मोनमे कोनो दुर्भाव नहि छलैक मुदा समस्या छल घेघ कतहु नुकाएल रहए ! सेठक मित्रकेँ बीएक असली घिबही बीए हेबापर कने सन्देह भऽगेलै आ एकर चर्चा ओ साँझमे अपना मित्र लग केलक। अगिला दिन जखन बीए गद्दीपर बैसलाह तखन सेठ आबि कए हुनका पछिला तीन दिनक हिसाब किताब पूछि बैसल। बीए घबरा गेलाह। ओना ओ कोनो गड़बड़ी नहि केने छलखिन मुदा हिनका ई बात सिखले नहि छलनि जे यदि किओ हिसाब किताब पूछत तऽउत्तर कोना देल जाए। एखन तक ओ खाली किताबी प्रश्नक उत्तर रटैत आएल छलाह। व्यावहारिक काजक उत्तर देब सिखबे नहि केलनि। से एतए ओ गड़बड़ा गेलाह। फल जे ओही दिन दुपहरियामे गामक गाड़ी धेलनि।

    एहिना ओ पटना, दिल्ली मुम्बइ आदि कतेको छोट पैघ शहरमे सेहो भाग्य अजमौलनि मुदा भाग्य तऽहुनका गाम घीचऽचाहैत छलनि से पुर्णिया रहओ कि पटना,लखनउ कि लुधियाना, सब ठाम कोनो ने कोनो एहन परिस्थिति भइए गेलनि जे दू चारि दिनसँ बेसी नहि टिक सकलाह।

    बीए सौंसेसँ बौआ कए गाममे खेती करए लगलाह। खेतीमे खूब नाम कमौलनि। दस किलो के मूर आ सात किलो के बैगन हुनके खेतमे उपजल छलनि। हमरा गाममे गुलाब आ गेंदा फूलक खेती हुनके शुरू कएल छिएनि। एखन हमर गाम एकर नीक व्यवसाय कऽरहल अछि। आब तऽदेखादेखी अगल बगलक गाम सबमे सेहो फूलक नीक खेती भऽरहलै अछि। एहि प्रयास लेल हुनका गामक पंचायतसँ विशेष पुरस्कार भेटलनि।

    बीएक सबसँ पैघ उपलब्धि भेलनि गामक लोककेँ स्कूली आ कौलेजिया पढ़ाइक प्रति अविश्वास करौनाइ। तकर बाद कियो अपना धीया-पूताकेँ स्कूल कौलेज नहि पठौलक। मात्र साक्षर बनै लेल मटिकोरबाक मिडिल स्कूल तक। हमहू जे दशमा पास केलहुँ से एही कारण सम्भव भेल जे बाबूजी गुजरि गेला आ माएकेँ हम कहियो ई बूझऽनहि देलियै जे हम कतए जाइ छी आ की करै छी।

    दस साल तक विभिन्न शहर सबमे घुमैत ठोकर खाइत बीएकेँ किछु नीक बुद्धि तऽभैए गेलनि। एकर उपयोग ओ केलनि गाममे झगड़लगौनाक रूपमे। हुनकर विशेषता अछि जे हुनका संग जे लोक पाँचो मिनट बैसि गेल आ हुनकर देल एक खिल्ली पान खा लेलक ओ अपना दियादी आ कि पारिवारिक झगड़ामे जरूर फँसत। आ ओहि झगड़ाक पंचैतीमे बीए जरूरे रहता। बेसी झगड़ा गामक पंचैतीसँ उपर नहिए जाइ छैक। किछुए एहन घटना भेलैक जे बीए बादमे सम्हारि नहि सकला आ मोकदमा भऽगेलै। कतबो माँजल ओझा गुणी रहथु, किछु भूत हुनको हाथसँ छुटिए जाइ छनि ने। तहिना बूझू।

    हमरा गामक सीमामे जे चारू कातक चारि पाँच गामक लोकक जमीन जाल छैक ओहो सब एहि झगड़लगौना प्रेतक चक्करमे फँसिये जाइत अछि। सबकेँ बूझल छैक जे बीए संग बैसनाइ आ हुनकर पान खेनाइ माने भेल कपारपर दुरमतिया सवार। मुदा कहाँ कियो बचि पबैत अछि? बीएक मधुर सम्भाषणक आगू सब फेल।

    बीए एहि लूड़िसँ कोनो कमाइ नहि करैत छथि, ई तऽमात्र हुनकर मनोरंजन छिएनि। एहन उदार चरित्रक लोक परोपट्टामे नहि भेटत। एहि किताब लिखबाक क्रम मे एक दिन हम पूछि देलिएनि-

    एखन तक कतेक लोकक बीच झगड़ा लगा देने हेबै?”

    ओ तऽ सबटा लीख कए रखने छला। एकटा पैघ लिस्ट हमरा आगू पसारि देलनि। हम चकित भऽ गेलहुँ। बीए तऽ नारदोक कान कटलनि मुदा किनको बूझल नहि। जरूर एकरा एक बेर गिनीज बुक अथवा लिमका बुक मे छपबैक कोशिश करबाक चाही। से भऽ गेला सँ अहीं कहू हमर गाम अपना जिला आ कि प्रदेश मे नाम करत की नहि?

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    3. खुरचन ठाकुर

    मूल नाम: किसुनलाल ठाकुर, प्रसिद्धि खुरचन ठाकुर

    पिताक नाम: तिरपित ठाकुर

    जन्म तिथि: अज्ञात

    मृत्यु: सन उनैस सौ सतासी सालक बाढ़िमे

    उपलब्धि: खुरचन ठाकुरक प्रसिद्धि खुरचने लऽकए भेल। हुनका लेल अस्तूरा बेकार छल। अनेरे लोक टाका खर्चा करत। ओ खुरचनकेँ पिजा लैत छलाह आ केहनो बढ़ल केस-दाढ़ी रहओ, काटि दैत छलाह।ओहीसँ नह सेहो काटि दैत छलाह। जखन केश छँटबैक प्रचलन बढ़लै तखन खुरचन ठाकुर अपन ओही औजारसँ केश छाँटब सेहो शुरू केलनि। केशमे ककबा सटा दैत छलखिन आ ओहि उपरसँ खुरचन चला दैत छलखिन। देखनिहारकेँ चकचोन्ही लागि जाइ छलनि जे बिना कैंची के केश कोना एतेक सुन्दर छँटा जाइत छलैक।

    आ केहनो फोरा-फुन्सी रहओ खुरचन ठाकुरक डाकदरीक आगू सब जेना सरेंडर कऽदैत छल। फोराक डाकदर रूपमे खुरचन ठाकुर परोपट्टे नहि दश कोसमे नामी छलाह। कहियो कए तऽहुनका दूरापर लोकक लाइन लागि जाइत छल। खुरचन ठाकुरक खुरचनक स्पर्श होइतहि लोककेँ आरामक बोध होमए लगै छलै।

    बीए जखन एक बेर कोनो शहरसँ घुरलाह तऽखुरचन ठाकुर हुनका देखलक ओतुका सैलूनमे केश छँटेने। बीएकेँ एखनहुँ मोन छनि खुरचन ठाकुरक हुथान। आ ओहि ‘अलूरि’ नापितक लेल प्रयोग कएल गेल अपशब्द सब जे बीए हमरा सुना तऽदेलनि मुदा लिखबासँ मना कऽदेलनि।

    पूरा गाममे खुरचन ठाकुर एकसर, सौंसे गाम हुनकर जजमान। मुदा मात्र एकटा औजार, खुरचन, आ गाम नेहाल। एहन छलाह रत्न हमर खुरचन ठाकुर।

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    4. टहलू दास

    मूलनाम : सियाराममण्डल

    पिताक नाम: जगदेव मण्डल

    जन्मतिथि: अज्ञात

    मृत्यु: अकालकवर्ष (सम्भवतःउनैससौछियासठि)

    उपलब्धि : टहलूटहलैततऽकमेछलाहमुदाहुनकचालिमेबड़काबड़काहारिजाइतछल।बूढ़लोकसबखिस्साकहैतछथिजेएकबेरककरोसारसाइकिलपरचढ़िकए

    हमरागामएलाह।हुनकरगामकरीबसात-आठकोस (एखुनकालोकलेलबूझूचौबीस-पचीसकिलोमीटर) दूर।साइकिल ओहि समय ककरो ककरो रहैत छलै, हमरा गाममे ककरो नहि छलै से बूझू सौंसे गाम जमा भऽगेल साइकिल देखबा लेल।

    टहलूहुनकापूछिदेलखिन-

    कतेकसमयलागलसाइकिलसँहमरागामअबैमे?”

    ओगर्वसँबजलाह-

    इएहगोटेकघंटाबूझिलिअऽ।

    ओहो अन्दाजे बजलाह कारण हाथमे घड़ी तऽछलनि नहि आ ने टहलूएकेँ बूझल छलनि जे एक घंटा कतेक समय होइत छैक।टहलूहुनकादूसैतबजलाह-

    एतेककालमेतऽहमपएरेचलजाएबआघुरिकएचलोआएब, आयदिइन्तजामकएलरहततऽअहाँकघरपरभोजनोकऽलेब।

    सारकेँभेलनिजेअनगौआँबूझिकनेडींगहँकैतछथि।ओहुनालोक गाममे आएल ककरोसारकसंगहँसीमजाककऽलैतेछल।एहनोकतहुभेलैएजेलोकसाइकिलसँदूनोसँबेसीचलिलेत? मुदाएकरफरिछौहटिकोनाहोअए? ओजमानातऽमोबाइलटेलीफोनकछलैनहिजेतुरत्तेईककरोखबरिकऽदितथिनगाममेजँचैलेलजेसत्तेमेटहलूओहिगामपहुँचलाहकिनहि।

    योजनाबनलजेबड़कीपोखरिकचारूकातदूनूगोटेघुमता।सारसाइकिलसँआटहलूपएरे।पोखरिक चारू कात रस्ता साइकिलो चलबै लेल नीके छलैक। जेना कि ओहि समय सब ठाम रहैत छलै, कच्चिए मुदा समतल आ पीटल-पाटल। जतेकतेजअपनचलिसकथिसेचलथु।यदिटहलूसत्तेमेबड़तेजचलैतछथितऽचक्करलगबैमेकमेसमयलगतनि।ओचक्करलगबैतरहताहजाबतसार

    महोदयसाइकिलस

    ँएकचक्करपूरानहिकऽलेथि।यदिसारेमहोदयपहिनेएकचक्करलगालेताहतऽओहोताबततकचक्करलगबैतरहताजाबतटहलूएकचक्कर

    पूरानहिकऽलेथि

    ।अन्तमेजेजतेकबेसीचक्करलगौनेरहतसेततेकसौटाकाजीतत।मानेभेलजेएकचक्करकेसमयमेयदिकियोदूचक्करलगालेततऽएक चक्कर बेसी भेलैक ताहि लेल एकसौरुपैयाजीतत।यदिआधाचक्करबेसीलगाओततऽपचासरुपैयाजीतत।एहिसँकमभेलापरदूनूकेँबरोबरिएबूझलजाएत।

    गौआँजमाभऽगेलदेखबालेल।सारकबहिनोकेँकहलगेलनिहुनकेपक्षमेरहैलेलजेकोनोतरहकबेइमानीकगुंजाइसनहिरहै।खेलाशुरूभेल।

    जतेकताकतछलनिततेक

    पैडिलमेलगबैतसारमहोदयसाइकिलदौड़ेलनि।मुदाटहलूतऽनिपत्ता।जाबतओएकमोहारटपथिताबतटहलूएकचक्करपूराकऽलेलनि।

    साइकिलआपएरेदौड़चलैत

    रहल।अन्तमेसारमहोदयपूरेतीनसौटाकाहारिगेलाह।

    ओजेहमरागामसँपड़ेलासेफेरघुरिकएकहियोनहिएएला।टहलूदासकएहिगुणकजानकारीगामोमेबहुतोलोककेँनहिछलैक।

    आबतऽहिनकरगुणकबखानसबतरिहोमएलागल।डाकविभागहिनकादौड़हाकनोकरीदेबालेलतैयारभऽगेलआएहिआशयकेचिट

    ्ठीसेहोहिनकापठा

    देलकनि।मुदाईअस्वीकारकऽदेलखिन।

    “उत्तम खेती, मध्यम बान, अधमचाकरी, भीखनिदान”

    बलाफकराजेरटनेरहथि।ओकोनोदशामेचाकरीनहिकरताह। नहिए केलनि।

    एहनमहानछलाहटहलूदास।

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    5. चिलमसोंट भाइ

    मूलनाम : केवलराउत

    पिताकनाम : बनारसीराउत

    जन्म तिथि : अज्ञात

    मृत्यु: करीबचालीससालपहिने।

    उपलब्धि : नामगुणकाजछलनिहुनकर।चिलमसोंटनामेपड़लनिजखनहुनकाचिलमसँबीतभरिधधराउठएलगलै।गामैकगजेरीसाहुकअभिन्नमित्र।गजेरी

    साहुगाजाबेचथिआचिलमसोंटकीनथिआताहिपरसोंटलगाबथि।सोंटलगबैमेकिछुगोटेआरसंगदैतछलखिनमुदाओसबहमरासंकलनलेल

    महत्वपूर्णनहिछथि।

    एकबेरगाममेदूटाबबाजीएला।ईदूनूएकनम्बरकेगँजेरी।ओ बरकी पोखरिक पाकरि गाछ तर अपन आसन जमा लेलनि। एकटा गौआँकेँ चेला मुड़लनि, ओहि दिनक बुतातीक जोगार सेहो केलनि आ चिलम लेल गाजाक जोगार सेहो। अपनामे मस्त ई दूनू लगलाह चिलम सोंटए।

    किछु गौआँ हिनक चिलमक सोंट देखि रहल छल। अति साधारण रूपें ई सब सोंट लगा रहल छलाह। ओ टिप्पणी कैए देलक-

    “अहाँ दूनूसँ नीक तऽहमर गौआँ चिलम धुकैत अछि, ओकर नामे पड़ि गेलैक चिलमसोंट भाइ।”

    बबाजी सबकेँ लगलनि जे गौआँ सब हिनकर निन्दा कऽरहल छनि। ओ चिलमसोंटकेँ बजबै लेल कहलखिन।

    चिलमसोंट बजाओल गेलाह। फोकट के गाजा आ तकर सोंट – ई बात सोचिए कए ओ मुदित भेल छलाह। तैयो अपन गुणकेँ नुकबैत बबाजी दूनूकेँ टिटकारी देलखिन नीकसँ सोंट लगबै लेल। ओ सब पूरा दम लगा कए सोंट खिचलनि तऽएक बेर कने दू-तीन आँगुर धरि धधरा उपर उठलैक। चिलमसोंट विनम्र भावें अपन चिलम सुनगौलनि आ लगला सोंट खीचए। जेना जेना गाल धँसैत गेलनि तेना तेना धधरा उपर उठैत गेलै। अन्तमे पूरे हाथ भरि धधरा उठि गेलै। एहन चमत्कार तऽपहिने कोनो गौआँ नहि देखने छल। बबाजी सब तऽचकित आ डराएल। ओहिमे एक गोटे दोसरकेँ कहलखिन-

    “एकरा चेला बना लेब ठीक रहत।”

    चिलमसोंटकेँ गाजा चढ़ि गेल छलनि। ओ उनटे ओहि बबाजीकेँ भरि पाँज कऽधेलनि आ बजलाह-

    “रौ सार, चिलम सोंटैक लूरि तऽछौके नहि, हमरेपर गुरुआइ करमे? हमरा चेला बनेमे? ढहलेल नहि तन। चल, आइसँ तो दूनू हमर चेला बनि जो आ हमर नोकर जकाँ काज कर। साँझुक पहर हम तोरा दूनूकेँ चिलम सोंटैक लूरि सिखाएल करबौ।”

    आब तऽदूनू बबाजीक बोलती बन्द। कहुना अपनाकेँ छोड़ा कए ओ दूनू नाङरि सुटकबैत गामसँ भगलाह।

    चिलमसोंट भाइ अपना काजमे अद्वितीय छलाह। इलाकामे करीब दस गामक बीच हुनकासँ हाथ मिलबै बला कियो नहि भेल छल।

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    6. नक्कू पहलमान

    मूल नाम: परमेसर यादव

    पिताक नाम: शीतल यादव

    जन्म तिथि: अज्ञात

    मृत्यु: सन उनैस सौ बेरासी साल

    उपलब्धि: नक्कू कने नकिआइत छलाह बजबामे तें ई नाम भेलनि। हुनका हनुमानजीक सराप आ आशीर्वाद छलनि जे कोनो कुश्ती खेलामे पहिल दू बेर तोरा हारए पड़तौ। जखन तों दू बेर हारि जेमे तखन तेसर बेर केहनो पहलमानसँ भिरमे, जितबे करमे, से ओ साक्षात भीमे किएक नहि आबि जाथु। बूझि ले हम अपनहि तोरा शरीरमे प्रवेश कऽजेबौ।

    ई बात ककरहु नहि बूझल छलैक हुनकर बाबूजीकेँ छोड़ि। साधारण भिड़न्तमे हारि-जीत चलिते रहैत छलैक। लोक एतेक ठेकान नहिए करैत छल जे कोना दू बेर हारलाक बाद नक्कू निश्चिते तेसर बेर जीत जाइते छथि।

    एक बेर दरभंगा राजक पोसुआ कैलू पहलमान हमरा गाम दिससँ जाइत छला। हुनका गुमान जे पूरा जिलामे हुनकासँ हाथ भिरबै बला कियो नहि छनि। ई गप ताहि दिनक छी जहिया मधुबनी जिला नहि बनल छलै आ दरभंगे जिलाक सवडिविजन छलै। हमरा गाममे कियो अगत्ती छौंड़ा हुनका टिटकारि देलक जे गामक नक्कू पहलमानसँ एक बेर हाथ भिरा लेथि। पहिने तऽओ अपन प्रतिष्ठा बूझि एकरा अनठबए चाहलाह मुदा गौआँक जिदपर अखाड़ामे उतरि गेला। नक्कू सेहो उतरला आ हनुमानजीकेँ स्मरण केलनि।

    खेला शुरु भेल। कैलू आ नक्कू अखाड़ामे चक्कर्घिन्नी कटैत आ एक दोसरापर दाओ बजारैक चेष्टामे लागल। कियो दोसराक देहमे सटि नहि रहल छल। आ कि नक्कू किछु केलनि आ क्षणेमे कैलू चित, नक्कू हुनका छातीपर सवार। लोक अकचकाएले रहि गेल। तालीपर ताली परए लागल। कैलूकेँ किछु बुझाइये नहि रहल छलनि जे की भेलै, कोना भेलै, कोन दाओ लगलै जकर ओ सम्हार नहि कऽसकला।

    दूनू पहलमान उठलाह, देह झाड़लनि, हाथ मिलौलनि आ अपन अपन गन्तव्य दिस विदा भेला।

    नक्कू जीत गेलाह मुदा हुनका एकर कोनो गुमान नहि छलनि। हुनका बूझल छलनि जे अगिला दू कुश्ती हुनका हारबाक छनि। ओ अपनाकेँ कहियो महान नहि कहलनि, ई हुनकर नम्रता छलनि।

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    7. पण्डितजी

    मूल नाम : राधाकृष्ण मिश्र

    पिताक नाम: लक्ष्मण मिश्र

    जन्म तिथि: उनैस सौ पचास सालक फगुआ दिन।

    उपलब्धि: हमरा गामक एकमात्र ब्राह्मण पुरोहित परिवार, पण्डितजी खाली नामेसँ पण्डित छथि। हिसाबें औंठा छापे रहि गेला। भरि गामक जजमनिका सम्हारै लेल भागिनकेँ बजा अनलनि। अपने ओकरा संग खाली नोंत खेबा लेल जाइ छथि।

    मुदा पण्डितजी अद्वितीय भैए गेलाह। ई भेल हुनक अद्भुत गुणक कारण। ओ महिंसलेट भऽगेला। महींसपर बैसल बाधे बाध बौआइत रहबामे ओ ककरो कान काटि सकैत छथि। बच्चहिंसँ ओ महींसपर जे चढ़ए लगलाह से एखन तक कइए रहल छथि। महींसे पोसब हुनक मुख्य व्यवसाय भेलनि। एकटा ब्राह्मण कुलमे जन्म लइयो कए ओ कोनो यादव परिवारसँ बेसी दूधक व्यापार केलनि आ ओहिना कोनो यादव परिवारसँ बेसी पानि दूधमे मिलबैत रहला। तैयो हिनक दूधक बिक्री कम नहि भेल। महींसक खरीद बिक्री केलनि, ओकर दवाइ दारू सेहो बुझैत छथि आ सब तरहें महींसक विशेषज्ञ रूपें इलाकामे प्रसिद्ध छथि। हिनका प्रसादें कतेक महींस कें प्राण बचलै। ब्लॉक के मवेसी डाकदर सेहो हिनकर ज्ञानक प्रशंसा करैत छनि।

    पण्डितजी एकटा आर गुण लेल प्रसिद्ध छथिआशीर्वाद देबाक हिनक शब्दकोष बिल्कुल अलग अछि। जीबू जागू ढनढन पादूतऽ हिनकर तकिया कलाम अछि मुदा जखन कियो कोनो तरहक छोट पैघ गलती कऽ बैसैत अछि तखन हिनक मुह सँ बहराएल शब्द विश्वक कोनो कोष मे भेटऽ बला नहि। आ सुननिहार केहनो मोट चामक बनल रहओ, कान मूनहि पड़ैत छैक। ओ आशीर्वाद-वर्षा लोकक धैर्यक परीक्षा सेहो लैत छैक। आ जे कने अधीर भेल तकरा तऽ भूलुण्ठित भेनहि कल्याण।

    महींसक संग संग ई गायक व्यापार सेहो करैत छथि। गाय दरबज्जापर पोसैत कमे छथि, खाली खरीद बिक्रीक काज हाटपर करैत छथि। मटिकोरबा गामक हाटपर मरदुआरि कैल गाय सस्त दामपर कीनैत छथि, ओकरा दस दिन नीक जकाँ खुआ पिआ कए आ जहिना आइकालि लोक केश रंगैत अछि तहिना नवका तरीकासँ रंग चढ़ा कए कारी गायक रूपमे दुन्ना-तिगुन्ना दाममे बेचि लैत छथि। बेचबा काल ध्यान रखैत छथि जे ग्राहक बेस दूरक इलाकासँ रहए। लग पासक ग्राहककेँ ओ कारी गाय नहि बेचैत छथि। एक दू बेर गौआँकेँ सर सम्बन्धीक मारफत सुनबामे एलै जे मासे दिनक भीतर गायक रंग बदलए लगलै। मुदा ई शिकाएति सीधे पण्डितजी लग कियो नहि पहुँचेलक। आशीर्वाद-वर्षा मे भिजबाक डर जे रहैत छैक।

    एखन तक पण्डितजी बेदाग अपन व्यवसायमे लागल छथि।

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    8. लम्बोदर

    मूल नाम: दरिद्र नारायण झा

    पिताक नाम: पलटू झा

    जन्म तिथि: अज्ञात

    मृत्यु: पाँच वर्ष पहिने

    उपलब्धि: लम्बोदर नाम गुण पैघ उदर बला छलाह। हमहूँ देखने छिऐनि हुनकर शरीर। कण्ठसँ डाँड़क बीच मात्र एक तिहाइमे छाती आ दू तिहाइमे लम्ब उदर। से कोनो पैघ धोधि फूटल नहि, सपाट। आइ कालि हीरो सब सिक्सपैक चमकबैत रहैत अछि मुदा लम्बोदरकेँ छातीआ पाँजरक सबटा हाड़ लोक सौ मीटर दूरोसँ गनि सकैत छल। हुनका बुझलो नहि छलनि जे ई शारीरिक सौष्ठवक विशेषता छिऐ।

    वृत्तिएँ लम्बोदर मरणोपरान्तक संस्कार करबैत छलखिन।आ पोखरिपर भोजन करब हुनक एहि वृत्तिक अंश छल। मुदा एक बेरक खिस्सा जे बूढ़ लोक कहैत छथि से अद्भुत छल।

    लम्बोदर अपन जजमनिकामे कोनो गाम गेल छलाह। ओतए चूरा-दही भोज छलैक। इन्तजाम तऽठीके छलैक मुदा हिनका सबहिक भोजन बेर किछु कुव्यवस्थाक कारण दही कने कम पड़ि गेलै कारण पोखरि पर सामान हिसाबे सँ पठाओल गेल छलै। लम्बोदर लगलाह अखरा चूरा फाँकए। जाबत घरवारी दहीक व्यवस्था केलनि ताबत ई करीब पाँच सेर चूरा सधा देलखिन। आब हाल ई छल जे जाबत दही आबए ताबत हिनका पातमे चूरा सधि जाए, ई छुच्छे दही सुड़कथि आ तकर बाद फेर अखरा चूरा फाँकथि। ई अपना दूनू कात माटिपर चेन्ह दऽकए आन लोककेँ उठि जेबाक संकेत देलखिन आ अपने खाइते रहलाह। जखन करीब एक बोरा अखरा चूरा आ चारि तौला दही सधा देलनि तखन घरवारी हाथ जोड़ि कए ठाढ़ भऽगेलखिन। तैयो ई ढकार नहिए लेलनि मुदा परिस्थितिकेँ बूझि घरवारीकेँ कहि देलखिन-

    “अहाँ पार उतरि गेलहुँ, हम आब तृप्त छी।”

    एतबा कहि ओ उठि कए हाथ धोलनि, पान सुपारी लेलनि आ दस किलोमीटर टहलैत टहलैत गाम आबि गेलाह। कियो कखनहु हुनकर पेट उठल कि फूलल नहि देखलक। अगिला दिन लम्बोदर फेर कोनो भोज खेबा लेल तैयार। हिनके भोजन देखि ने कियो फकड़ा बनौने छल –

    पाँच पसेरी अखरा चूरा, दही छाँछ भरि जलखै जकरा

    की हैत चटने पाभरि जोड़न? ऊँटक मुहमे जीरक फोड़न !

     

    हमरा अपना गाममे हुनका के खुअबितए? मुदा ओ परिस्थितिकेँ बुझैत छलखिन आ गामक भोजमे कहियो छूटल घोड़ा जकाँ व्यवहार नहि केलनि।

    हमरा गाममे किएक ककरो बूझल रहतैक जे गिनीज बुकमे हुनकर नाम रेकॉर्डमे लिखबितए। हमसब एहि गौरवसँ चूकि गेलहुँ तें हम नियारल जे अपन संकलनमे हुनकर चर्चा जरूर करब।

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    9. नटवर लाल

    मूल नाम: जयन्त कुमार लाल दास

    पिताक नाम: शिव मोहन दास

    जन्म तिथि: सन उनैस सौ अठतालीस के चौरचन दिन

    उपलब्धि: नटवर लालक पिता अल्प वयसमे मरि गेलखिन। माताक एकमात्र सन्तान ई गामक बिगड़ल छौंड़ा सब के संगतिमे फँसि गेलाह। यद्यपि हमरा गाममे बीएक असफलताक बाद सब गार्जियन अपन धियापूताकेँ स्कूल जेबासँ परहेज करबए लागल मुदा जयन्त कुमार लाल दास स्कूल गेला जहिना कि हिनका टोलक किछु आर बच्चा सब करैत छल। कहुना अठमा तक घुसकला तकर बाद हाथ उठा देलनि।

    बच्चहिंसँ हिनकामे विशेष लूरि छलनि लोककेँ ठकबाक। पहिने तऽबहुत दिन तक माएकेँ ठकलनि आ मटिकोरबा गामक हाटपर झिल्ली कचरी बतासा लड्डू खाइत रहलाह। तकर बाद अनकोपर अपन मंत्रक प्रयोग केलनि। लम्बोदरक पितियौतकेँ जजमनिकामे भेटल रंगल धोती सब ई कामति टोलक लोककेँ किना दैत छलखिन, बेसी दामपर जे तोरा रंगक खर्चा बचि गेलहु, आ धोती बलाकेँ कहि दैत छलखिन जे रंगल धोती कियो नहि कीनत, ओ तऽधन्य कहू जे हम एक गोटेकेँ फुसला कए राजी केलहुँ। धोती बेचनिहार कहियो नहि बुझलनि जे के किनलक आ कीननिहार कहियो नहि बुझलनि जे ककर धोती ई किनलक। एही तरहेँ पुरना किताब विद्यार्थीसँ लऽ कए ओकरा नवका भावें बेचथि। एहि व्यवसायमे हिनका नीक आमदनी होमए लागल। अपने ई लील टिनोपाल देल नीक धोती गंजी पहिरए लगलाह।

    एहि बीच किशोर वयसमे प्रवेश करिते हिनक आदति सब बिगड़ए लागल। ई सुनसान गाछी बिरछी आ पटुआ कुसियारक खेतमे शिकार करए लगलाह। हाथमे पाइ रहितहि छलनि से शिकार भेटिए जाइ छलनि। सब गाममे सब तरहक लोक होइ छै आ हमरो गाम एहिसँ बचल नहिए छल। मुदा जखन एक गोटेकेँ किछु भऽगेलै आ ओकर बाप हिनका तंग करए लागल बियाह कऽलेबा लेल तखन ई पहिल बेर डरा कए गामसँ भागि गेला।

    छओ मास बाद घुरला तऽमाएकेँ सब बात बुझबामे आबि गेल छलनि। ओ बेचारी नीक रस्ता धेलनि आ हिनकर बियाह करा देलखिन। नटवर लाल पत्नीमे रमि गेला। साले साल पुत्र रत्नक बरखा होमए लागल। तेरह साल पुरैत पुरैत हिनका लग छोट पैघ तेरहटा बच्चा छल– एकछाहा पुल्लिंग। घरमे जगह तऽनहिए छलनि, बुतातोपर आफत आबि गेलनि। ताबत माताराम उपरक रस्ता धेलनि आ ई लगला पुस्तैनी जायदादकेँ बेचि गुजर चलबए।

    एहि बीच हिनकर भाग्य जागल जखन मात्रिकक एक गोटे बैंक मनेजर बनि कए राजनगर एलखिन। हिनकर दुर्दशा देखि ओहि बेचाराकेँ दया लागि गेलै आ हिनका बैंकमे चपरासीक नोकरी भेटि गेलनि। आब की छल? राति दिन हिनका आङ्गनसँ माछक सुगन्ध उठए लागल।

    बैंकमे पहुचि नटवर लालकेँ अपन असली रूप देखेबाक अवसर भेटि गेलनि। हमरा गामसँ राजनगर दस किलोमीटर। ताबत ने रोड नीक भेल छलै आ ने टेम्पूक चलन भेल छलै। ई लोककेँ फुसिया फुसिया बैंकमे खाता खोलबौलनि आ तकर बाद ओकरा सबकेँ लघु बचत योजनासँ जोरि नित्य साँझमे एकटकही दुटकही, जकरा जेहन जुड़ै, से जमा करए लगला। पासबुक बनि गेलै मुदा सबटा पासबुक ई अपनहि संग राखथि। लोककेँ विश्वासमे लेने। जरूरति पड़लापर सौ पचास उधार सेहो दऽदैत छलखिन ई कहि जे बैंकसँ लोन भेटलहु। लोक लोन सधबए लागल आ अगिला किस्त उठबए लागल।

    एहि बीच ई गामक संचित टाका निजी काजमे लगाबए लगला। पासबुकपर किछु चढ़ै नहि। लोककेँ किछु बुझबामे अबै नहि। प्रायः पाँच साल तक ई खेला चलैत रहल। कियो यदि कहियो पासबुकक चर्चो करए तऽई बहन्ना बना देथि जे बैंकमे राखल छै। दश किलोमीटर बिना कोनो साधन के चलि कए जाएब कठिन छलै आ लोक अनठा दैत छल।

    एक बेर ककरो बेटीक बियाह लेल पाँच हजार टाका निकासी करबाक जरूरति भेलै। ओकरा हिसाबें जतेक टाका ओ जमा करैत गेल छल ओहिसँ पाँच हजार जरूरे उठाओल जा सकैत छलै। नटवर लाल किछु दिन टालमटोर करैत रहला। मुदा बेटी बला कते दिन मानितए? अन्तमे हारि कए ओ एक दिन पहुँचि गेल राजनगर बैंक।

    तकर बाद जे हेबाक छलैक सएह भेलै। सबटा भेद खुजि गेलै आ बेटी बलाक खातामे मात्र अढ़ाइ सौ टाका भेटलै। गामक प्रायः सब के टाका डुबलै। सब अपन कपार पीट कए रहि गेल।

    नटवर लालपर विभागीय कारवाइ भेलनि, ओ जेल गेला। एहि बीच तेरह पुत्र सेहो बढ़ैत गेलखिन आ सौंसे भारतमे छिड़िया गेलखिन। हुनका लोकनिक लेल बापक पापक बीच गाममे रहब कठिन भऽगेलनि। पत्नी सेहो अस्वस्थ रहए लगलखिन आ करीब चारि सालक बाद स्वर्ग गेलीह। पेरोलपर आबि नटवर लाल पत्नीक संस्कार केलनि।

    करीब सात साल जेलमे सरलाक बाद ओ गाम घुरला। मुदा हुनका मुखरापर कोनो ग्लानिक भाव कहियो नहि एलनि। एखन गामे रहैत छथि आ बेटा सबहक पठाओल टाकापर गुजर करैत छथि।

    कोशिश तऽओ एखनहु करैत छथि लोककेँ ठकबाक, पुरान आदति जे छनि, मुदा आब लोक हिनका चीन्हि गेल अछि से हिनका नहि सुतरै छनि।

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    10. झलकी देवी

    मूल नाम: अज्ञात, सब दिन लोक ओकरा एही नामसँ जनैत छैक।

    पिताक नाम : रतन सदाए

    जन्म तिथि: ठीकसँ नहि बूझल मुदा हमर समवयस्के अछि झलकी।

    उपलब्धि: झलकी अपन माए-बापक एकमात्र सन्तान। बच्चेसँ कने गौरवाह। कहियो कोनो समवयस्क छौंड़ाकेँ गुदानलक नहि। बियाह भेलाक बाद एतहि रहि गेल। पति घर-जमाए बनि गेलखिन।

    झलकी सुन्नरि अछि एखनहु। जखन ओ यौवनक देहरिपर डेग देलक तखन गाममे बहुतोकेँ मोन डोललै। कसल देह, सुगठित बाँहि आ यौवनक अन्य सब लक्षणसँ युक्त जखन ओ अल्हर भावें बाध दिस जाइत छल तखन हमरा उमेरक छौंड़ा सब ओकर पछोड़ धऽलैत छल। ओकरा लेल धन सन। एक बेर चौरमे रहमतबा कने नजदीक आबि गेलै, झलकी पाछू घूमि ओकरा तेहन चाट मारलकै जे ओ ठामहि खसि पड़ल, दाँती लागि गेलै। तकर बादसँ हमरो सबकेँ बूझल भऽगेल आ झलकी अपनहुँ आश्वस्त भेल जे कियो ओकरा देहमे भिरबाक साहस नहिए करतै।

    हम जखन दिल्ली चलि गेलहुँ तखनुक घटना थिक। झलकी एकसरिये छल घरमे। एहि बातक फाएदा उठा मटिकोरबा गामक भूतपूर्व मुखियाक बेटा अपन एकटा उद्दंड संगीक संग ओकरा घरमे प्रवेश केलक बलात्कारक उद्येश्यसँ। मुदा चल गेल यमलोक। झलकी कचिया हाँसूसँ दूनूकेँ दू टुकड़ी कऽदेलकै आ घरेमे गारि देलकै। ओतबे नहि, शोणित लगले कपड़ामे रातिएमे हाँसू हाथमे लेनहि सौंसे टोलमे चिकरि कए कहि देलकै जे कियो यदि गवाही देतै तऽओकरो यमलोक जाए पड़तैक। तकर बाद पोखरिमे नहा लेलक, हाँसू धोलक आ आबि कए निश्चिन्त भऽकए सूति रहल।

    ओकर एहि धमकीसँ कानूनक काज तऽरुकितै नहि। अगिला दिन थाना पुलिस ओकरा ओहि ठाम पहुँचि गेलै। झलकी घरसँ बहराएल तऽगरदनिमे सातटा कचिया हाँसूक माला पहिरने। एहन रौद्र रूप तऽपुलिसो कहियो नहि देखने छल। दूनू पुलिस दरोगाक पाछू सुटकि गेल जेना मरखाहा साँढ़केँ अबैत देखि छोट बच्चा माएक पाछू सुटकि जाइत अछि।

    ककरो हिम्मते नहि होइ ओकरा लग जेतै, आ कि घरमे किछु सर्च करतै। दरोगा ओकरा पुछलकै-

    “तों रातिमे ककरो खून केलही?

    झलकी निडर भावें उत्तर देलक-

    “एखन तऽदुइएटा केँ कटलइयैए, जँ छौंड़ा सब आबहु नहि सीखत तऽदू सैइयोकेँ काटि देबै एही कचिया हाँसूसँ। जकरा जे करबाक छैक से कऽलिअए। हम ने कतहु जेबै आ ने ककरो अपना देहमे हाथ लगबए देबइ।”

    दरोगा मुश्किलमे पड़ि गेल। ओ दूटा सिपाही लेने आएल छल जे खूनीकेँ हथकड़ी लगा कए घिचने आओत थाना, जेना ओ सब दिनसँ करैत आएल छल। एहन काली माइसँ भेँट हेतै तकर सपनोमे कोनो अन्दाज नहि छलै। एकेटा उपाय छलै जे महिला पुलिस बजाओल जाए नहि तऽई मौगी की कऽबैसत से नहि जानि।

    दरोगा हेडक्वार्टरकेँ फोन लगेलक आ ओतहि बैसल रहल, झलकी चल गेल आङ्गन अपन काज करै लेल। ककरो हिम्मत नहि भेलै ओकरा आङ्गन ढुकै के। करीब तीन घंटाक बाद मधुबनीसँ जीपपर सवार चारिटा महिला पुलिस एलै। ओ सब जखन झलकीकेँ हथकड़ी लगा पकड़ै लेल गेलै, झलकी ओकरो सबकेँ डाँटि देलकै आ हाथ तेना ने झटकि देलकै जे एकटा महिला पुलिस खसिए पड़ल। ओ बेपरवाहि ओहि चारूसँ पुछलकै-

    “तों सब मौगी छें ने। कह जे यदि रातिमे कियो तोहर इज्जत लूटै लेल तोरा लग पहुँचतौ तऽकी करबही? अपन बचाव करमे, ओकरा पाठ पढ़ेमे कि उतान भऽकए पड़ि रहमे?

    सब सकदम। ककरो कोनो जबाबे नहि फुरा रहल छलै झलकीक प्रश्नक। जबाब फुरेबो करतै तऽकोन भाषामे झलकीकेँ उत्तर देतै? बड़ी कालक नाटक के बाद झलकी अपनहि मोने थाना विदा भेल। कियो ओकरा देहमे नहिए भिड़लै। आगू आगू झलकी, ओहिना सातो कचिया हाँसूक हँसुली पहिरने, केश खूजल, उड़ियाइत, आ पाछू दरोगा सिपाही आ किछु गौआँ सब। जिनकर बेटा कटलनि तिनका लोक एखन तक कतहु नहि देखलक।

    झलकी हाजतमे बन्द भेल, फेर मधुबनी पठा देल गेल। मोकदमा चललै मुदा सरकारी ओकील कोनो तरहक साक्ष्य जुटेबामे असमर्थ रहलाह। पूरा गाम झलकीक समर्थनमे जुटि गेल। छओ मासक बाद झलकी बरी भेल आ गाम घुरि आएल।

    पछिला पंचायत चुनावमे झलकी निर्विरोध सरपंच चूनल गेल। आब ओ ब्लॉकपर आ इलाकामे झलकी देवी नामे प्रसिद्धि पाबि रहल अछि। एखन गामक पंचैतीपर ओकर रौद्र रूपक प्रभाव झलकैत रहैत छैक। फल ई जे अपराधो कम भेलैए।

    हम सब लागि गेल छी प्रयास मे जे अगिला विधान सभा चुनाव मे झलकी कें एमएलए बना पटना पठाबी । हमरा सबहक विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति लेल आरक्षित छैके । ब्लॉक पर ओकर लोकप्रियता देखैत ई लक्ष्य असम्भव नहि बुझाइत अछि । ओ अपनहुँ एहि दिस ध्यान देलक अछि आ किछु पढ़ब लीखब शुरू केलक अछि।

    गामक लोकक कहब छैक जे झलकी साधारण महिला नहि, कालीक अवतार अछि। जखन ई मरत तखन एकरा सारापर काली मंदिर बनाओल जाएत।

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    11. राजा-रानी

    हमरा गाममे एकटा एलाह राजा। आ हमरे गामक पुत्री भऽगेलखिन हुनकर रानी। एतए हिनक मूल नाम, जन्म तिथि आदिसँ हमरा सबकें सरोकार नहि अछि, मात्र हिनक अद्भुत चरित्र लीख रहल छी जे हिनका दूनूकेँ वास्तविक अर्थमे हमरा गामक पूज्य राजा-रानीक रूपमे स्थापित कऽदेलक आ इलाकाक अन्य गाम सबमे सेहो हिनकर ख्याति बहुत पसरल।

    राजा तऽजहिना नाम तहिना हुनक विशाल शरीर आ उदात्त चरित्र। हुनकर चरित्रक प्रशंसा सुनि बहुतो कुमारि कन्या अपन भाग्य अजमौलनि मुदा राजाकेँ तऽएकेटा पसिन्न पड़लनि। भऽगेल राजा आ रानीमे प्रेम। से एहन प्रेम जे लोककेँ विश्वासे नहि होइ। बूढ़ पुरान सब बाजए लगलाह-

    “हौ, ई कोनो साधारण प्रेमी-युगल नहि छथि, जरूर कोनो देव अंश छथि। गामक ई उत्तरदायित्व जे हिनका दूनूक रक्षा करए।”

    बस, तहिना भेल। हिनकर आवास बनाओल गेल, सब तरहक सुख सुविधाक इन्तजाम कएल गेल। पार बाँटि गौआँ सब हिनकर भोजन पठबए लागल। जहिया जकर पार होइ ओ अपनाकेँ धन्य बूझए जे आइ ओकरे अन्न-पानिसँराजा-रानी तृप्त भेलाह।

    राजा-रानी एक दोसराक लेल प्राण दैत। रानी तऽअपनाकेँ अति भाग्यशाली बूझथि जे सब किछु होइतो हुनकर कोनो सौतिन नहि छलनि। बहुतो लोक प्रयास केलक जे एको नजरि राजा अन्य कन्यापर दऽदेथि मुदा बेकार। राजा तऽरानीक प्रति समर्पित छलाह। आब हुनका एहन आत्मतृप्ति भेलनि जे ककरो अनका दिस तकबो नहि करथि।

    जेना कि प्रकृतिक नियम छिऐक, राजा-रानीक प्रेमक फल भेल हुनकर तीन पुत्र आ एक पुत्री। पुत्र लोकनि जेना जेना पैघ होइत गेलाह, अपन अपन व्यवसाय सम्हारलनि। बचि गेलखिन पुत्री। ओहो तीव्र गतिए बढ़ए लगलखिन। रानीकेँ चिन्ता भेलनि एकर बियाह कोना करौतीह। कहियो बियाह नहि करौलनि। अपने तऽतेहन राजकुमारक प्रेममे फँसलीह जे बियाहक प्रश्ने नहि उठलैक। मुदा बेटी?

    रानीकेँ डर छलनि जे जवान बेटीकेँ देखि कतहु राजाक मोन डोलि ने जानि। मुदा राजा अपनहि अपनाकेँ सम्हारने रहलाह। 

    ऋतुमासक समय पर बेटीकेँ पुरुषक जरूरति भेलैक। ओ एम्हर-आम्हर तकलक। कतए जाएत? ओकरा माए-बापक प्रेमक खिस्सा तऽबूझल नहि छलैक। ओ लागल ओही पुरुषक चारू कात चक्कर काटए जे सबसँ लगमे ओकरा भेटलैक। ओ बिसरि गेल जे ओ पुरुष ओकर जन्मदाता छलैक।

    पुरुष अर्थात हमरा गामक राजा अपनाकेँ बहुत सम्हारलनि मुदा भावीकेँ के रोकि सकलए? ओ नवयुवतीक चालिमे फँसिए गेलाह। ओकरा शरीरसँ उठैत मादक गन्ध हुनका मदमत्त कऽदेलक। हुनक संयमक बान्ह टुटि गेलनि। नवयुवतीक काम-पिपासा तृप्त भेलैक। ई दृश्य रानीसँ नुकाएल नहि रहलैक। रानी बजली किछु नहि मुदा बहुत दुखी जरूर भेलीह।

    ई घटना हमरा सबकेँ देखल अछि जे ओही राति रानी मरि गेलीह। राजा अपनाकेँ दोषी मानए लगलाह। एहि नवयुवतीकेँ अपन दोसर रानीक रूपमे ओ स्वीकार नहिए कऽसकलाह आ एक मासक भीतरे शोकसँ डूबल ओहो शरीर त्याग केलनि।

    राजा-रानीक एहि अमर प्रेमक खिस्सा इलाकाक आनो गाममे लोक सबकेँ बूझल छैक।

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    12. अन्तमे

    एखनुक समय जकाँ यदि पहिने रियलिटी शो के प्रचार भेल रहितै आ हमरा गामक लोककेँ किछु बूझल रहितैक तऽ खुरचन ठाकुर आचिलमसोंट भाइ जरूरे स्टेजपर सिनेमा स्टारक सामने अपन करतब देखा कए इनाम लूटने रहितथि। तहिना जँ ओलिम्पिक आ अन्य खेल महोत्सव सबमे भाग लेबाक अवसर भेटल रहितै आ कि मैराथनक प्रचार भेल रहितैक तऽके टहलू दासकेँ हरा सकैत छल? आइ मिल्खा सिंहक बदला टहलू दासक नाम लोक जपितए। हमरा गामक नामे ओलिम्पिक मेडल रहितए। लम्बोदरक भोजनक खोराक जरूरे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्डमे लिखा गेल रहितै। बिग बॉस सन शो लेल बीए अति उपयुक्त व्यक्ति होइतथि, सब प्रतिभागीमे झगड़ा लगा अपने जीत जइतथि। यदि कियो ढंगसँ पैरवी केने रहितै तऽहुनका सरकारक कृषि पण्डित पुरस्कार सेहो भेटि जइतनि। पण्डितजीक आशीर्वचनक शब्दकोष यदि छपि गेल रहितनि तऽ जरूरे अपने सब हमरा गामक एहि विभूतिसँ परिचित भऽ गेल रहितहुँ। छपेबाक प्रयासमे लागल छी। ईहो अद्वितीये होएत से हमरा विश्वास अछि।

    फूलन देवीक ओतेक नाम भेलै मुदा हमरा बुझने साहसमे ओ झलकीक पासङ्ग नहिए होइतए। झलकी एखन अछिए आ ओकरा बहुत नाम कमेबाक छैक। हमहूँ एहिमे ओकर मदतिमे लागि गेल छी। जे समय बीत गेल से समय तऽघुराओल जेतै नहि, वर्तमानकेँ तऽसुधारी। जहिया झलकी एमएलए बनि जाएत तहिया हमर खकपतिया गामक नाम अपनहि देश मे सबतरि प्रचारित भऽ जेतै।

    आब अपने सब बुझिए गेल हेबै जे हमरा गामक एहि रत्न सभक फोटो किएक नहि देल गेल। दिवंगत लोक सबकेँ फोटो अबितै कतए सँ? विभिन्न कारणसँ बीए, नटवर लाल आ पण्डितजी फोटो नहि खिचौलनि। झलकीक फोटो तऽ छैक मुदा एखन ओ फोटो छपबए नहि चाहैत अछि। ओकर लक्ष्य पैघ छै। फूलन देवीपर सिनेमा बनलै तऽ झलकी पर किएक नहि? जखन झलकी एमएलए बनि जाएत तखन अपनहि ओ ई काज कऽ लेत। ओकरो पूर्ण इच्छा छैक जे गामक नाम उजागर होअए। एकर तैयारी लेल ओकर जतेक प्रोग्राम होइत छैक तकर भीडियो बना कए हम सब रखने जाइ छी। हमरा आशा अछि जे कहियो ओकर उपयोग झलकीपर सिनेमा बनौनिहार करबे करता।

     

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