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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

| विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१७.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

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    श्री नन्‍द विलास राय-

    दूटा लघु कथा हमर लॉटरी निकलल शिक्षाक अन्‍तिम उद्देश्‍य

    हमर लॉटरी निकलल

    झंझारपुर रेलबे टीशनक बगलमे एकटा दवाइ दोकान अछि, नाओं छिऐ- नवीन फार्मेसी। ओइ दोकानक ई विशेषता छै जे निर्मलीक डाक्‍टर पुरजा हुअए वा दरभंगाक डाक्‍टरक, फुलपरासक डाक्‍टरक पुरजा हुअए वा तमुरियाक डाक्‍टरक सभ दवाइ भेट जाएत। तँए दोकानमे खरीदवालक भीड़ हरिदम लगले रहैत अछि।

    हमरो पत्नीक इलाज चलि रहल अछि। डाक्‍टर साहैब कहने रहथिन जे छह मास धरि दवाइ खाए पड़तैन। पाँच मास तँ बीति गेल आब छठम मासक दवाइ चलतैन। तँए हमहूँ दवाइ कीलैले झंझारपुर विदा भेलौं। चारिये बजे भोरबामे उठि कऽ तैयार भऽ भपटियाही स्‍कूल लग मुख्‍यमंत्रीबला सड़कपर एलौं। ओइठामसँ टेम्‍पू पकैड़ परसा हाल्‍टपर पहुँचलौं। परसा हाल्‍टपर टिकट कटा छह बजिया ट्रेनक प्रतीक्षा करए लगलौं।

    बगलमे बैसल एक गोरे बाजल-

    ट्रेन आइ निर्मली सबेर गेल अछि तँए छह बजे धरि ऐठाम पहुँच जाएत।

    मोबइलमे समए देखलौं, पौने छह बजै रहए। ठीक छह बजे ट्रेन परसा हाल्‍टपर पहुँचल। हम एकटा कोठरीमे चढ़ि गेलौं। सबेर रहितो ट्रेनमे भीड़ छल।

    ट्रेन घोघरडीहा टीशन पहुँच कऽ रूकल। एकटा महिला जे सलवार-समीज पहिने रहए, हमरे कोठरीमे माने जइ कोठरीमे हम बैसल रही, ओहीमे चढ़ल। घोघरडीहा टीशनपर ट्रेनमे भीड़ बढ़ि गेल दल। ओ महिला जैठाम हम बैसल रही, ओहीठाम आबि चारूदिस हिया कऽ तकलक। केतौ खाली जगह नै देख हमरसँ कहलक-

    बाबा, कने हमरो बैसए दिअ।

    ओइ महिलाक बाबा कहब सुनि हम छगुन्‍तामे पड़ि गेलौं। आखिर हमरा ई औरत बाबा किए कहलक। भाइजी कहैत तँ ठीक छेलइ। कक्को कहैत तँ ओतेक सोच नहि होइतए। बाबा किए कहलक..!

    हम हिया कऽ निच्‍चा-सँ-ऊपर धरि ओइ महिलाकेँ देखए लगलौं। तैबीच ओ फेर टेकलक-

    एना की निंगहारि-निंगहारि देखै छी। कहियो मौगी नै देखने छिऐ की? कनेक घुसकु ने।

    आब तँ भेल औरो पहपैट। हमरा भेल जेना कोनो चीज चोरि करैत पकड़ा गेलौं। हम कनी खिसैक गेलौं। ओ महिला हमरा देहमे सटि कऽ बैस गेली। दोसर कियो रहैत तँ ओइ महिलाक सटब नीके लगिते। धरमागती पुछू तँ हमरो नीक लगैत मुदा ओ औरत जे बाबा कहने छेली तही सोचमे डुमल रही। सोची जे एतेक बुढ़ भऽ गेलौं जे ई महिला हमरा बाबा कहलक..?

    गाड़ी सीटी देलक आ ससरए लगल। एकटा बीस-बाइस बर्खकलड़की जेकरा कोरामे एकटा लकधक साल भरिक बच्‍चा रहै, ओ खिड़की लग प्‍लेटफार्मपर ठाढ़ छेली, ओइ औरतसँ बजली-

    मम्‍मी ठीकसँ जइहेँ। गाम पहुँचते फोन करिहेँ।

    फेर कोरैला बच्‍चासँ कहली-

    बौआ, नानीकेँ टाटा कऽ दियौ।

    ओ महिला खिड़कीसँ हाथ निकालि हिलबए लगली।

    हमर मन खसल रहए। हम सोचैत रही, आखिर ई महिला हमरा बाबा किए कहलक! जखन कि ओकरो नाति-नातिनभेल छै जे अखने देखलौं हेन।

    हम ओइ महिला दिस हिया कऽ तकलौं तँ बुझि पड़ल जे ओकर केश रंगल छइ। सलवार-समीज तेतेक कसल रहै जे शरीरक अंग, जे परदामे रहबाक चाही ओ अदहासँ बेसी वेपर्दा भऽ जाइ जखन ओ कनेको निहुरए। शरीरक रंग एकदम गोर। दोहरा हार-काठ। शरीर ने बेसी मोटे आ ने बेसी पातरे। एकदम छरहर। आँखिमे काज लगौने, कानमे आधुनिक डिजाइनक बाली पहिरने। एन-मेन सोनाक लगइ। एकटा हाथमे गोल्‍डेन चेनबला टाटा क्‍वार्ज घड़ी। दोसर हाथमे कीमती चूरी। ठोरमे गाढ़ लाल रंगक लिपिस्‍टिक, नाकमे पाथर पड़ल छक, गरदैनमे मोतीक माला। आँगुर सभमे पाथर पड़ल औंठी। आँखिमे गोल्‍डेन फ्रेमबला चश्‍मा। कन्‍हामे पर्स लटकल। हाथमे मेहदी लगौने। जखन ओकरा पएर दिस तकलौं तँ तकिते रहि गेलौं। दुनू पैरमे आरत लगौने जे ओकर पैरक सुन्‍दरतामे चारिचान लगबैत। हमरा कोनो कविक दोहा मोन पड़ि गेल-

    न पैरो में महावर रचाओ गोरी

    संगमरमर का कलेजा पिघल जाएगा।

    हम अन्‍दाज लगेलौं, ऐ महिलाक उमेर कमतीमे 40-42 बर्खसँ कम नै हेतइ। मुदा तेना कऽ मेन्‍टन केने अछि जे तीस-बत्तीस बर्खक लगैत अछि। की कहू, मन घोर-घोर भऽ गेल रहए। किछु सोहेबे ने करए। ताबत ऐगला टीशनपर पहुँच ट्रेन रूकल। हम उतैर गेलौं। पानक दोकानपर जा ऐनामे अपन चेहरा निंगहारि कऽ देखलौं तँ बुझाएल जे अदहासँ बेसी केश पाकि कऽ उज्‍जर भऽ गेल अछि। सोचलौं, सुआइतई महिला हमरा बाबा कहलक। फेर सोचलौं, ओकरो केश तँ रेगलेरहइ। फेर ऐनामे देखलौं तँ अपन गाल पचकल बुझाएल जखनकि ओइ महिलाक गाल पुआ जकाँ फूलल छेलइ। तहूँ सेव जकाँ लाल। फरे ऐनामे देखलौं तँ आँखि एक हाथ तरमे बुझाएल। पानक दोकानदार टोकलक-

    पान खाएब की? केहेन पान खाइ छी, मीठा पत्ता आकि...।

    बिच्‍चेमे हम कहलिऐ-

    नै यौ बाबू, पान नइ खाएब।

    दोकानदार पुछलक-

    एना किए कननमुँह जकाँ बजै छी? की कियो रूपैआ-तुपैआ नै तँ निकालि लेलक हेँ?” 

    से तँ नै भेल अछि।

    ई कहैत हम ससैर कऽ मोसाफिर खानामे आबि एकटा ब्रैंचपर बैस गेलौं। मन हुअए बोम फारि कऽ कानए लागी। हमरा कौलेजक समै गप मन पड़ि गेल। की जिनगी छल। फिल्‍मी हीरोक स्‍टाइलमे रहै छेलौं। अमिताभ बच्‍चनक स्‍टाइलमे बाबरी राखी। अन्‍दर सुटिंग करि पेन्‍ट-सर्ट पहिरैत रही। आँखिमे करिक्का चश्‍मा रहैत छल। कौलेजक लड़की सभ हमरा राजेशखन्ना कहए। एक दिन घटना मोन पड़ि गेल। एकटा लड़की जेकर नाओं अलका रहइ, ओ एकटा कागज हमरा कॉपीमे रखि देलक। हम कॉपी खोललौं तँ ओ कागज देखलिऐ। ओइमे लिखल रहै- आइ लव यू अलका। हम बुझू अकासमे उड़ए लगल छेलौं किएक तँ अलकाकेँ कौलेजक छौड़ा सभ कौलेज क्‍वीन कहैत छेलइ। ओ बड़ सुन्‍दर छेली। दोसर दिनसँ अलका कौलेज नइ अबैत रहए। पता चलल जे अलका बेमारपड़ि गेल अछि। बादमे पता चलल ओकर बाबूजी जे पीएनबी बैंकमे मैनेजरक पदपर काज करै छला, हुनकर प्रमोशन क्षेत्रीय प्रवंधकक पदपर दरभंगामे भऽ गेलैन हेन। तँए ओ सपरिवार दरभंगा चलि गेला। अलका आब दरभंगेमे पढ़त। एक मास तक हम अलकाक गममे गमगीन रहलौं।

    ताबेतमे ट्रेनक सीटी सुनलौं। मुसाफिर खानासँबाहर एलौं, गाड़ी टीशनपर पहुँच चुकल छल। गाड़ीमे चढ़ि गेलौं।

    परसा हाल्‍टपर ट्रेनसँ उतैर टेम्‍पू पकैड़ गाम आबि गेलौं। धोती-कुरता पहिरनहि बिछौनपर जा पड़ि रहलौं। पत्नी चूल्‍हि लग छेली, ओ देखली तँ लगमे आबि पुछली-

    मर! की भेल हेँ जे एना बिना कपड़े बदलने पड़ि रहलौं। मन-तन ठीक अछि किने?”

    हम किछु नहि बजलौं। हमरा हुअए जे बोम फारि कानए लागी।

    पत्नी फेर पुछली-

    दवाइ आनलिऐ की?”

    हम तैयो किछु ने बजलौं।

    पत्नी सोचए लगली आन दिन जे झंझारपुर दवाइ आनए जाइ छला तँ अढ़ाइ-तीन बजे धरि घुमि कऽ गाम अबै छला। आइ साढ़े दसे बजे आपस आबि गेला। भरिसक पाकेटमार रूपैए नहि तँ निकालि लेलकैन। बजली-

    रूपैआ ने तँ पॉकेटमारी भऽ गेल?”

    हम फेरो किछ ने बजलौं। 

    हमर पत्नी सोचली जे आखिर ई बजैत किए ने छथिन। ओ हमरा माथपर हाथ दैत पुछलैन-

    माथ ने तँ दुखाइत अछि?”

    हम किछु ने बजलौं। हमर पत्नी हमर हाथ अपना हाथमे लऽ कऽ बड़ प्‍यारसँ बजली-

    अहाँक हमर सप्‍पत छी, कहू की भेल। एना किए उदास भऽ कऽ पड़ल छी।

    हम कनैत जकाँ बजलौं-

    की हम बुढ़ भऽ गेलिऐ।

    तैपर हमर पत्नी बजली-

    किए, से किएक पुछै छी। के अहाँकेँ बुढ़ कहैत अछि। हम तँ आइ धरि नै कहलौं हेन।

    हम कहलिऐ-

    आइ ट्रेनमे एकटा मौगी हमरा बाबा कहलक।

    हम ओइ औरतक पूरा हुलिया अपना पत्नीकेँ बता देलिऐ।

    हमर पत्नी ठहक्का लगा कऽ हँसल। हँसैत बाजल-

    तँ ई बात छिऐ!”

    हम कहलिऐ-

    अहाँ दिल खोलि कऽ हँसै छी। हमरा मन होइए जे भोकारि पाड़ि कऽ कानए लगी।

    पत्नी बजली-

    ऐमे केकर दोख। केतेक दिन कहलों जे समराट बनि कऽ रहू। मुदा अहाँ छी जे खादीक धोती, झोलंगाबला कुरता पहिर कन्‍हापर गमछा लऽ केतौ विदा भऽ जाइ छी। ने दाढ़ी कटबै दी आ नेकेशे सीटै छी। तँ बाबा नैकहत तँ बौआ कहत।

    हम कहलिऐ-

    सम्राट जे कहै छिऐ से कोनो हम राजा महराजाक बेटा छी जे सम्राट बनि कऽ रहब।

    तैपर हमर बेटी जे टीशन पढ़ि कऽ आएले छल, बाजल- 

    पापा, मम्मी सम्राट नहि स्‍मार्ट कहैत अछि।

    तैपर हमर पत्नी बजली-

    हँ, हँ की कहलीही, बुच्‍ची असमाट?”

    हमर बेटी जे आइ.एस-सी.मे पढ़ैत अछि बाजल-

    असमाट नै स्‍मार्ट।

    हम पत्नीकेँ कहलिऐ-

    अहूँ तँ कहियो काल कहैत रहै छी जे, आब अहाँकेँ के पुछत?”

    पत्नी हमर हाथ अपना हाथमे लऽ बजली-

    उ तँ प्‍यारसँ मजाकमे कहलौं।

    तैपर हम बजलिऐ-

    के कहलक मजाकमे कहलौं छी आकि...।

    बिच्‍चेमे हमर पत्नी हमर बात कटैत बजली-

    अहाँक देह छुबि कऽ कहै छी जे ई गप हम मजाकमे कहलौं। आब मजाकोमे नै कहब। उठू, मुँह-हाथ धोउ ताबत हम चाह बना नेने अबै छी।

    बजलौं-

    अखन हमरा चाह-पान किछ ने सोहाइत अछि।

    तैपर पत्नी तोष दैत बजली-

    अहाँ एक्को मिसिया मनमे टेंशन नै लिअ। एक्के मासमे अहाँकेँ गोविन्‍दा जकाँ हीरो बना देब। फेर देखबै जे सोलह सालक लड़की अहाँसँ केहेन बेवहार करैत अछि।

    बिहाने भने हमर पत्नी हमरा संग केने निर्मली एली। पहिने डाक्‍टर रमेश बाबूक क्‍लीनिकपर अनली। डाक्‍टर साहैबकेँ हमरा देखबैत हमर पत्नी बजली-

    डाक्‍टर साहैब, हिनकर तेना कऽ इलाज करि दियौन जे गाल पुआ जकाँ फुलि जाइन।  

    तैपर डाक्‍टर साहैब कहलखिन-

    गाल फुलबेटा नहि करतैन बल्‍कि सेब जकाँ लालो भऽ जेतैन मुदा दवाइक संग खानो-पान नीक हेबाक चाही।

    पत्नी बजली-

    डाक्‍टर साहैब, अहाँ जे-जे कहबै से-से खुएबैन मुदा गाल फुलबाक चाही।

    डाक्‍टर साहैब किछु केप्‍सूल आ तीन फाइल टॉनिक लिख, खेनाइमे की-की हेबाक चाही से सभ हमरा पत्नीकेँ समझा देलखिन।

    डाक्‍टर साहैबक क्‍लिनीकसँ निकैल हम सभ बजार गेलौं। बजारमे एक किलो मनक्का, पाँच किलो सेब, पाँच किलो बदाम कीनि पत्नी झोरामे रखली। तेकर बाद क्‍लॉथ इंपोरियममे जा विमल सूटिंग-सर्टिंग दू-दूटा पैन्‍ट-शर्टक कपड़ा सेहो किनलैन। कपड़ा लऽ कऽ हम सभ मॉडर्न टेलरमे जा कऽ नाप दऽ कपड़ा सिबए लेल देलिऐ। पत्नी टेलर मास्‍टरकेँ कहलकैन-

    फिटिंग एकदम ठीक-ठाक हेबाक चाही।

    तैपर टेलर मास्‍टर जवाब देलखिन-

    मैडम, अहाँ एक्को रत्ती चिन्‍ता जुनि करू, कपड़ा पहिरलाक बाद सर बिल्‍कुल गोविन्‍दा जकाँ लगथिन।

    दर्जीकेँ कपड़ा देलाक बाद पत्नी हमरा लऽ कऽ हनमुमान रेडीमेडपर एली आ सेल्‍समेनकेँ हमरा देखबैत कहलखिन-

    हिनका लेल दूटा नीक जीन्‍स पैन्‍ट आ दूटा टी-शर्ट निकालू।

    सेल्‍समेन पुछलकैन-

    की रेन्‍जमे निकाली मैडम?”

    तैपर पत्नी बजली-

    रेंजक चिन्‍ता नै करू। स्‍टेनडरसँ स्‍टेनडर निकालू।

    सेल्‍समेन पच्‍चीस-तीस पीस जीन्‍स पैन्‍ट आ पच्‍चीस तीस पीस टी-शर्ट हमरा सबहक आगाँमे पसारि देलक। ओइमे सँ एकटा ग्रे कलर आ एकटा ब्‍लू कलरक जीन्‍स पैन्‍ट पसिन केलौं। तेनाहिये एकटा लाल रंगक टी-शर्ट आ दोसर ब्‍लू रंगपर उज्जर धारीवला टी-शर्ट पसिन केलौं। चारि हजार टकाक बिल बनल। दोकानदार केँ बिल भुतान कऽ चश्‍माक दोकानपर गेलौं। ऐठाम गोल्‍डेन फ्रेमबला चश्‍मा खरिदली। चश्‍मा खरीदलाक बाद जूता दोकानपर जा एक जोड़ा खादिम कम्‍पनीक लेदरबला फूल जूता आ एक जोड़ा सैन्‍डिल खरीदली।

    ई सभ खरीदलाक बाद पत्नी पुछली-

    आर किछ बाँकी तँ नइ रहल ने।

    हम कहलिऐ-

    दूटा रूमाल, दूटा कोठारी गंजी आ एकटा टाई।

    पत्नी बजली-

    ठीके, चलू पंसारी रेडीमेड सेन्‍टरमे ई सभ लऽ लइ छी।

    गंजी, टाइ आ रूमाल कीनलाक बाद पत्नी हमरा लऽ कऽ मुम्‍बइ सैलूनमे गेली। ओइठाम पत्नी हजामसँ कहली-

    हिनका फिल्‍मी असटाइलमे बाबरी छाँटि दियौन आ केशो रंगि दियौन।

    जाबे हजाम हमर केश बनौलक ताबेमे पत्नी एकटा नीक रेजर, एक पैकेट टोपाज ब्‍लेड, ब्रश बा बढ़ियाँ क्रीम आ फेयर इन लवली क्रीम सेहो कीनि कऽ आनली।

    सभ समान कीनलाक बाद हम सभ मुन्ना होटलमे मासु-भात खेलौं। आ कनीकालक बाद मोसाफिर खानामे अराम कऽ चारि बजेमे टेम्‍पू पकैड़ आपस गाम आबि गेलौं।

    दोसर दिनसँ भोरमे अढ़ाइ साए ग्राम सेबक फलाहार करी। फल खेलाक एक घन्‍टाक पछाइत साए ग्राम औंकुरल बदामक संग गुड़ खाइ। फेर एक गिलास दूध पीबी। खानामे पालकक साग सेहो खाइ। रातिमे सुतैसँ पहिने मनक्का देल एक गिलास दूध पीबी। आ तेकर बाद डाक्‍टर साहैबक लिखल केप्‍सूल आ टॉनिकक सेहो सेवन करी। पनरह दिनपर केश रंगी आ तेसरा दिनपर ढाढ़ी बनाबी। जहिया केतौ जेबाक हुअएतँ जाइसँ पहिने दाढ़ी बना कऽ फेयर इन लवली क्रीम लगौनाइ नहि बिसरी।

    एक मास बीतैत-बीतै हमर गाल पुआ जकाँ तँ नहि फूलल मुदा सटकलो नहियेँ रहल। चिनाए गेलौं। चेहरापर रौहानी आबि गेल।

    संयोजसँ पितियौत सारक बिआहमे सासुर जेबाक रहए। गेलौं। बरियाती जाइ काल जखन ब्‍लू जीन्‍स पैन्‍ट आ ललका टी-शर्ट पहिर गोल्‍डेन फ्रेमबला चश्‍मा लगा विदा भेलौं तँ हमर सारि जे एम.ए.मे पढ़ै छैथ, बजली-

    पाहुन तँ गोविन्‍दा जकाँ लगै छथिन।

    तैपर हमर पत्नीबजली-

    गइ छौरी, एना नहि हमरा दुल्‍हाकेँ आँखि लगाबही।

    हमर मन तँ बुझि अकासमे उड़ए लगल। बिआहसँ पहिने जखन बरमाला भऽ रहल छल तँ दुल्‍हिनक संग चारि-पाँचटा लड़की सभ बरमालाबला मंचपर ठाढ़ छेली। ओइ चारि-पाँचटा लड़कीमे एकटा सत्तरह-अठारह बर्खक बड़ सुन्नैर जे एन-मेन करीना कपुर जकाँ लगै छेली ओ एकटकसँ हमरे दिस निहारि रहल छेली। जखन हमर आँखि हुनकर आँखिसँ मिलल तँ ओ हँसए लगली।

    बरमालाक बाद जखन ओ दुल्‍हिनक संग जाए लगली तँ हमरा लग आबि बजली-

    हेल्‍लो, फेर भेँट हएब।

    ई कहि ओ आगाँ बढ़ि गेली।

    हमरा भेल जेना लाख टकाक लॉटरी भेँट गेल।

    शब्‍द संख्‍या : 1990

     

    शिक्षाक अन्‍तिम उद्देश्‍य

    रामनगर डिग्री महाविद्यालयक स्‍थापनाक स्‍वर्ण जयन्‍ती समारोहक आयोजन भेल। तीन दिवसीय कार्यक्रम रहए। पहिल दिन दू बजे दिनमे कार्यक्रमक उद्घाटन माननीय शिक्षा मंत्री एवम्‍ कुलपति संयुक्‍त रूपसँ केलैन। उद्घाटनक पछाइत पहिल सत्रमे कौलेजक इतिहासक संग कौलेजमे की कमी आ की बेसी अछि ऐपर विद्वान-वक्‍तालोकैन अपन-अपन विचार रखलैन। ई कार्यक्रम साँझक पाँच बजे धरि चलल।

    दोसर सत्रमे साँझक छह बजेसँ कौलेजक छात्र-छात्रा नृय, प्रहसन आ गीतनाद प्रस्‍तुत केलैन।

    दोसर दिन, दिनक एगारह बजे छात्र-छात्राक बीच भाषण प्रतियोगिताक आयोजन छल। जेकर विषय छेलै- लोक किए पढ़ै-लिखैए, शिक्षाक अन्‍तिम उदेस की अछि?’

    प्रतियोगिताक जूरीमे कौलेजक प्राचार्य महोदय, शिक्षक संघक अध्‍यक्ष आ छात्र संघक अध्‍यक्ष छला।

    कार्यक्रममे कौलेजक शिक्षकगण, कर्मचारीगण आ पत्रकार लोकैन सेहो उपस्‍थित छला।

    अध्‍यक्षक आदेशसँ प्रतियोगिता प्रारम्‍भ कएल गेल। पहिल वक्‍ताक रूपमे बी.ए. फाइनलमे पढ़ैत छात्र आलोक ठाढ़ भेला।ओ अपना भाषणमे बजला-

    पूज्‍यनीय अध्‍यक्ष महोदय, पूज्‍यपाद गुरुजन, उपस्‍थित वुजुर्ग आ वुद्धिजीवी लोकैन, छात्र-छात्रालोकनि- आजुक समैमे पढ़ाइ-लिखाइक बड़ महत अछि। जँ ई कहल जाए जे शिक्षा रोशनी छी तँए कोनो अनुचित नहि हएत। बिनु पढ़ल-लिखल मनुख आँखि रहितो आन्‍हर छैथ। शिक्षाक मूल उदेस ज्ञानी बनब छी। आ ज्ञानी बनि कऽ अपन चरित्र निर्माण करब थिक। ऐ सन्‍दर्भमे पूज्‍य बापू गॉंधीजी कहने छैथ- शिक्षाक अन्‍तिम उदेस चरित्र निर्माण छी। चरित्र निर्माणक पश्चात राष्‍ट्र निर्माण करब सेहो छी। और सभसँ पैघ बात ईजे चरित्र निर्माणक संग मानवक सेवा शिक्षित मनुखक सभसँ पैघ कतर्व्‍य अछि।

    ई कहि आलोक बैस जाइ छैथ। जोरदार थोपड़ी बजा श्रोता लोकैन हुनका भाषणक समर्थन केलखिन।

    दोसर वक्‍ताक रूपमे अंजली ठाढ़ होइ छैथ। अंजली बी.ए. द्वितीय वर्षक छात्रा छैथ, मैक पकैड़ सम्‍बोधनक पश्चात अंजली बजै छैथ-

    अखन जे पूर्व वक्‍ता आदरणीय आलोक भाय बजला जे शिक्षाक मूल उदेस चरित्रनिर्माण, राष्‍ट्र निर्माण ओ मानवक सेवा थिक, हम हुनका विचारसँ बिल्‍कुल सहमत नइ छी।

    श्रोतामे वुद्धिजीवी लोकैनक कान जाइत अछि। अंजली आगाँ बजै छैथ-

    हम तँ कहब शिक्षाक अन्‍तिक उदेस मात्र ढौआ कमेनाइ छी। देखियौ, लोक पढ़ि-लिख कऽ पैघ-सँ-पैघ इंजीनियर, डाक्‍टर, कलक्‍टर, एस.पी; बी.डी.ओ; प्रोफेसर, मास्‍टर नहि जानि की की बनै छैथ। मुदा किनकोमे चरित्रक निर्माण कहाँ होइ छैन। घूस लऽ कऽ अकूट सम्‍पैत जमा करए लगै छथिन। डाक्‍टर सभ कमीशनक लेल अनावश्‍यक जाँच, कमीशनबला दवाई आ बिनु जरूरतक ऑपरेशन करै छैथ। प्रोफेसर सभकेँ डेढ़-डेढ़ लाख टका दरमाहा भेटै छैन, मुदा की ओ सभ निष्‍ठा पूर्वक अपन कतर्व्‍यक निर्वहन नइ करै छैथ। डेढ़-डेढ़ लाख टका दरमाहाक बादो हुनका सभकेँ सन्‍तोख कहाँ छैन जे ट्यूशनक पाछाँ बेहाल रहै छैथ। हम तँ कहब जे विद्वानसेबेइमान आ जे डाक्‍टरसे डाकू!”

    श्रोता दिससँ जोरदार थोपड़ी बजैत अछि।

    अंजली आगू बजै छैथ-

    आलोक भाय बाजल छला- राष्‍ट्रक निर्माण...। यौ देखबे करै छिऐ जे पैघ-पैघ इंजीनियर, डाक्‍टर ढौआक लेल अपन देश छोड़ि विदेश जाइ छैथ आ अपन गाम-घर, देश छोड़ि विदेशमे बसि जाइ छैथ। एकटा बात आलोक भाय आरो बाजल छला जे मानवक सेवा। यौ जे अपन बुढ़ माए-बापक सेवा नहि कऽ रहल छैथ ओ आन मनुखक सेवा केना करता। तखन मानवक सेवा केना भेल आकि मानवताक की भेल? हँ, पत्नीभक्‍त भऽ सकैत छैथ। हमर अनुभव अछि जे विद्वान लोकैन माए-बापसँ बेसी मोजर पत्नीकेँ दइ छथिन।

    ई कहि अंजली बसि जाइ छैथ। हिनका भाषणपर बड़ीकाल धरि थोपड़ी बजैत रहैत अछि।

    तेसर वक्ताक रूपमे विवेक ठाढ़ होइत बजला-

    हम पहिलुका दुनू वक्ताक विचारसँ बिल्‍कुल असहमत छी।

    श्रोताक कान एकबेर फेर ठाढ़ भऽ जाइत अछि।

    विवेक आगॉं बजै छैथ-

    शिक्षाक उदेस चौवनिया नेता गिरी केना थिक। चौवनियॉं नेतागिरी कऽ ब्‍लौक, थानामे दलाली आ गाम-घरमे झगड़ा लगा अपन उल्‍लू सोझ करब आइ-काल्‍हिक पढ़ल-लिखल लोकक मुख्‍य काज रहि गेल हेन। जेतए तक पाइ कमेबाक बात अछि तँ ओइ लेल शिक्षित भेनाइ जरूरी नहि छइ। हमरा ओतए एकटा डीलर अछि, हँ-हँ वएह डीलर जे जनताक चाउर-गहुम आ मटिया तेल दइ छै, मोशकिलसँ दसखत करए अबै छै, मुदा ढौआ कमाइमे बड़का-बड़का इंजीनियर-डाक्‍टरक कान काटै छइ। पाँच बर्ख पहिनेसँ बोलेरो गाड़ीपर चढ़ैत अछि। मनुखोक सेवा करिते अछि। केकरो बेटीक बिआहमे पान-दस लीटर मटिया तेल दऽ दइ छइ। पाँच-दस गोरेकेँ चौक-चौराहापर चाहो-पान करा दइते छइ। फगुआमे किछ गोरेकेँ दारूओ पियाइए दइ छइ।

    ई कहि विवेक बैस जाइ छैथ। हिनको भाषणपर थोपड़ी बजैत अछि।

    चारिम वक्ताक रूपमे अलका माइक पकड़ै छैथ। ओ अपना भाषणमे कहै छथिन-

    हम पहिलुका तीनू वक्ताक विचारसँ कनिक्को सहमत नै छी। यौ आजुक समैमे शिक्षाक अन्‍तिम उदेस बिआहमे बेसी-सँ-बेसी दहेज लेब थिक।

    वुद्धिजीवी लोकैन एक-दोसरक मुँह दिस देखए लगला। अलका आगू बजै छैथ-

    देखियौ, डाक्‍टरक बिआहमे केतेक दहेज भेटै छै, फेर इंजीनियरकेँ देखियौ, कलक्‍टर-एस.पी. आ बी.डी.ओ; सी.ओ.क तँ बाते किछु और छै जे लड़िका कौलेजमे पहुँच जाइत अछि बुझियो हुनकर माए-बापक लौटरी निकैल जाइत अछि। ओइ लड़काक बिआहमे दस-बीस लाख टका नगद एकटा मोटर साइकिल, दू चारि भरि सोन दहेजक रूपमे भेटब आम बात भऽ गेल अछि। तेतबे नहि, डाक्‍टर-इंजीनियरकेँ बिना चारि चक्का गाड़ी आ कमतीमे बीस-पच्‍चीस लाख टका नगदसँ बिआहे ने होइत अछि। अहाँ कहबै ई तँ लड़काक बात भेल, लड़कीकेँ सुनू- पढ़ल-लिखल लड़कीक मांग बेसी छइ। जे मिडिलो पास लड़का छै ओहो अपन कनियॉं कमतीमे इन्‍टर पास तकै छइ। किए तँ नै बेसी तँ कम-सँ-कम इन्‍टर पास लड़की मास्‍टर तँ बनियेँ जाएत। पढ़ल-लिखल लड़कीक बिआहमे दहेजोमे किछु छूट भेटै छइ। यौ हम अपने परिवारक गप कहै छी। हम दू भाँइ आ दू बहिन छी। जेठ दुनू भैया छैथ। बड़ा भैयासँ छोटा भैया एक बर्खक छोट छैथ। बड़का भैया छठा तक पढ़ि खेती गृहस्‍तीक काज देखए लगला। छोटका भैया कौलेजमे पढ़ै रहथिन। बड़का भैयापर जे बरतुहार सभ आबथिन आ हुनका सभकेँ जखन पता चलैन जे लड़का छठे धरि पढ़ल छै तँ ओ सभ जे आपस गाम जाथि से फेर घुमि कऽ नै आबैथ। मुदा छोटका भैयाक बिआहक लेल बरतुहारक लाइन लागल रहए। बड़का भैयाक बिआहमे बाबूजीकेँ अपना तरफसँ खर्च करए पड़ल रहैन। तँए हम कहै छी जे शिक्षाक उदेस दहेज लेब छी आर किछु नहि।

    ई कहि ओ बैस जाइ छैथ। हिनको भाषणपर बड़ीकाल धरि थोपड़ी बजैत रहल।

    भाषण प्रतियोगिताक प्रथम पुरस्‍कार अलकाकेँ भेटलैन। हम सोचै रही जे प्रथम पुरस्‍कार आलोक नहि तँ अंजलीकेँ भेटतैन। मुदा से नहि भेल। हम छगुन्‍तामे रही। सोचैतरही प्राचार्य महोदय भेटता तँ पुछबैन। संयोग नीक बैसल। एकटा कथा गोष्‍ठीमे प्राचार्यमहोदय भेटला। हम पुछि देलिऐन-

    श्रीमान्, स्‍वर्ण जयन्‍ति समारोहमे कोन आधारपर अलकाकेँ प्रथम पुरस्‍कार देलिऐन?”

    प्राचार्य महोदय गम्‍भीर होइत बजला-

    शिक्षक संघक अध्‍यक्ष आ छात्र संघक अध्‍यक्षक विचार प्रथम पुरस्‍कार आलोकेँ देबाक रहैन, मुदा हम अड़ि गेलिऐ आ हमरा आगाँ हुनका दुनू गोरेकेँ किछु ने चललैन।

    हम पुछलयैन-

    अपने कोन बिन्‍दुपर अडि गेलिऐ?”

    तैपर ओ जवाब देलैन-

    हमरा अपन बेटाक बिआह मोन पड़ि गेल रहए, जखन हमरा बेटाक बिआहक लेल बरतुहार एला तँ हम स्‍पष्‍ट कहि देलिऐन- हमरा बेटाक इंजीनियर बनेबामे बारह लाख टाका खर्च अछि। तँए ओकरा बिआहमे कमतीमे पच्‍चीस लाख टका लेब। लड़कीबला सहर्ष पच्‍चीस लाख टका दइले तैयार भऽ गेल छला।

    शब्‍दसंख्‍या : 1073

     

     

     

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