प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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निर्मला कर्ण (१९६०- ), शिक्षा - एम. ए., नैहर- खराजपुर, दरभङ्गा, सासुर- गोढ़ियारी (बलहा), वर्त्तमान निवास- राँची, झारखण्ड। झारखंड सरकार महिला एवं बाल विकास सामाजिक सुरक्षा विभागमे बाल विकास परियोजना पदाधिकारी पदसँ सेवानिवृत्ति उपरान्त स्वतंत्र लेखन।
 

अग्नि शिखा (भाग- २७)
(मूल हिन्दी- स्वर्गीय जितेन्द्र कुमार कर्ण, मैथिली अनुवाद- निर्मला कर्ण)


कथा अखन धरि:

उर्वशी आ राजा पुरूरवा अपन गृहस्थ जीवनक उपभोग करवा में दुनियाँक सब किछु बिसारि व्यस्त भs गेल छलाह। 

आब आगू:
राजा पुरूरवा आ उर्वशी विवाहित जीवन में अपन प्रण्य संबंध के प्रगाढ़ सँs प्रगाढ़तम करवा में बहुत व्यस्त भs गेल छलाह। राजा अपन राज्य संचालन आ प्रजा के समस्या सs दूर भs कs उर्वशी के सौंदर्य पाश में आबद्ध भs गेल छलाह।मुदा एक कार्य हेतु ओ सतत सजग रहैत छलाथि । शेष सब किछु बिसरि गेला के उपरान्तहु उर्वशीक शर्त ओ एको क्षण नहि बिसरलथि ।ओ अपन समस्त शक्ति सँs आ सदि खन सजग रहि मेमना सभक रक्षा मे लागल रहलाह। भले दुनू गोटे कोनो उपवन में रहितथि अथवा कुनू आश्रम में!मुदा उर्वशीक दुनू मेमना सेहो हुनका दुनू प्राणीक संगहि देखबा मे अबैत रहैत छल । राजमहल मे सेहो एकटा सुन्दर सन सजायल कक्ष मे दुनू मेमनाक निवासक व्यवस्था कएल गेल छल। दुनू मेमनाक रक्षाक लेल सदिखन दू टा पहरेदार ओहि दुनू जीवक संग रहैत छल। जेना आदमी संग परछाईं रहैत छैक,ओहिना दुनू मेमना संग दुनू पहरेदार रहैत छल। ओना परछाईं तs अन्हार में आदमी सँs विलग भs जाइत छैक,मुदा पहरेदार अन्हारहु में तत्पर रहैत छल मेमनाक सुरक्षा में। उर्वशी सेहो राजा पुरूरवा सँs अत्यंत प्रसन्न छलीह।राजा पुरूरवाक संगति में प्रसन्नता एवं चंचलता जेना हुनकर अविभाज्य सखि बनल छल, जे सदिखन हुनका संगहि रहैत छल। कखनो काल हुनकर चंचलता राजा केँ सेहो परेशान करैत छलनि, जाहि कारणेँ ओ परेशान भs जाइत छलाह।आ उर्वशी सs पिता जाइत छलाह,मुदा आपसी झगड़ा मात्र उनका सबहक मध्य मधुर तकरार छलन्हि। हुनका दुनू के मध्य होई बला तकरार कहियो कलह के रूप नहि लेलक। ओना तs पति-पत्नीक मध्य होई बला तकरार के एक अलग आनंद होइत छैक। जाहि घरमे जँ कोनो नोक-झोंक अथवा तकरार नहि होइत छैक तखन ओ केहन घर अछि। ई नोक-झोंक अथवा तकरार वैवाहिक जीवन के सुखक एकटा महत्वपूर्ण अंग थिक। रानीक चंचल व्यवहारक कारणेँ राजा में चंचलता आ चपलता सन गुण बहुत तीव्र गति सँs विकसित भs रहल छल,सदिखन शान्त आ गंभीर रहई बला राजा उर्वशीक सान्निध्य मे एहन चंचलता आ चपलता देखबैत छलाह जे देखि कतेको बेर उर्वशी सेहो आश्चर्यचकित भs जाइत छलीह आ हुनका सोझाँ मे ओ अपन पराजय स्वीकार कs लैत छलथि | एक दिन दुनू दंपति प्राकृतिक रूप सँ बनल एक सुन्दर झील लग बैसल प्रकृति केँ मनोरम दृश्यावलि देखि आनंद लs रहल छलथि। राजा एहि दृश्य मे बेसी डूबि गेल छलाह।एम्हर उर्वशी धीरे-धीरे उठि गेलथि आ हुनक दृष्टि सँ बचैत चुपचाप एकटा गाछक पाछू नुका गेलीह। पुनः ओ धीरे-धीरे जा कए ओहि वृक्ष केर डारिसँ झूलि गेलीह।आ फेर धीरे-धीरे एहि शाख सs ओहि शाख पर चढ़इत ओकर पात सभक बीच नुका कऽ बैसि गेलीह। अचक्के राजा किछु पुछलथि उर्वशी सs,जखन प्रत्युत्तर नहि भेटलन्हि,राजा घुमलथि उर्वशी के दिशा में,ओ विचलित भऽ गेलथि हुनकर स्थान रिक्त देखि।आश्चर्यचकित भऽ ओ एम्हर-ओम्हर अपन दृष्टि घुमाबय लगलाह ।ओ व्याकुल भय सभ दिशा मे एम्हर-ओम्हर तकलनि,अपन दृष्टि घुमा-घुमा कऽ ​​उर्वशी के तलाश केलथि,मुदा कतहु नहि भेटलन्हि सुनकर प्रिया उर्वशी।आब राजा अत्यंत भयभीत भs गेलाह आ उर्वशी केँ तीव्र आवाज में बजाबय लगलाह,मुदा उर्वशी नहि एलीह। राजा हुनका नहि भेटला पर चिंतित भ गेल छलाह।मुदा ओ ओतय सँ उठि कs कतहु दूर चलि कs हुनकर तलाश मे एम्हर-ओम्हर सेहो नहि जा सकैत छलाह,कारण हुनकर दुनू मेमना के ओहि बियाबान में छोड़ि कतहु गेनाइ संभव नहि छलनि।एहन स्थिति मे हुनकर कुंठा आ तामस बढ़ि रहल छलनि। ओहि कुंठा में ओ "उर्वशी....उर्वशी....उर्वशी...."आवाज देलथि।ओ जोर-जोर सँ आवाज दऽ रहल छलथि आ अपन दृष्टि दूर-दूर धरि पसारि ताकि रहल छलथि उर्वशी केँ। झील के चारू कात आ ओहि पार अपन दृष्टि के सीमा तक देखबाक प्रयास कs रहल छलथि।उर्वशी केँ नहि भेटला पर अत्यंत दुखी भs कsओ घबरा कs और दूर तक हुनका देखबा हेतु एखन ठाढ़ भेल छलथि,तखनहि ऊपर गाछ पर सँs उर्वशी "धम्म" केर आवाज करैत नीचाँ धरती पर कूदि कs पुनः राजाक कान्ह पर बैसि गेलीह। राजाक घबराएल मुखमंडल देखि उर्वशी ठठा कs हँसय लगलीह।उर्वशीक ई शरारती चंचल व्यवहार देखि राजाक क्रोध क्षण भरि मे समाप्त भ' गेलनि,आ ओहो हँसय लगलाह। राजा उर्वशीक संगति में रहि कम चंचल आ शरारती नहि रहलाह। हुनक चंचल शरारती मोन में उर्वशीक एहि शरारत केँ आओर बेसी भारी शरारत सँ प्रतिउत्तर देबाक विचार उठलनि।एहि लेल ओ एकटा खतरनाक खेल करवाक विचार केलथि ।जखन उर्वशी मेमना सभक संग खेलाइत-खेलाइत ओकरा दुनू के दुलार करवा में व्यस्त छली,ओहि काल राजा पुरूरवा गहींर झील मे घुसि गेलथि आ झील मे दूर धरि हेलबाक नाटक करय लगलथि।कनि आगू बढ़लाक बाद,डूबबाक नाटक करैत,जोर सँs करुण स्वर में पुकार लगौलथि - "उर्वशी!हमरा बचाउ!हमरा बचाउ!उर्वशी! हम डूबि रहल छी!"हम डूबि रहल छी! पहिने हुनका सं गप्प करैत काल उर्वशी के ज्ञात भेल छलनि जे हुनका हेलब नहिं अबैत छनि,ताहि लेल उर्वशी के लागल जे राजा डूबि रहल हेताह, ताहि लेल ओ एतेक जोर सं चिचिया रहल छथि। उर्वशी सँs सहायता माँगि रहल छथि। ई सोचि ओ पलक झपकैत झील लग आबि गेलीह।ओ राजा के बचाबय लेल आयल छलीह,मुदा ओतय हुनका राजा के निर्जीव सन भेल शरीर धीरे-धीरे एकटा चट्टान के पाछु पानि में डूबैत भेटलनि।उर्वशी डरि गेलीह आ ओहो घबराहट में झील में कूदि गेलीह।आ पानि के शीघ्रता सs कटैत राजा के निकट पहुँचि गेली। ओ कोनो तरहेँ राजा के सहारा देने पानि मे खींचैत किनार दिस आबय लगलीह। बहुत कठिनाई सँs राजाक संग झीलक कात मे पहुँचि सकली उर्वशी! राजाक शरीर झीलक कछार पर पहुँचला उपरान्त उर्वशी हुनक नाड़ी आ साँसक परीक्षण केलथि। नाड़ी तऽ धीरे-धीरे चलैत छल मुदा साँस नहि चलि रहल छल। ई तऽ मृत्युक संकेत स्पष्ट रूपेँ देखबा मे आबि रहल छल।शोक-संतप्त उर्वशी आँखि मे नोर लs कs कानय लगलीह। ओ कानि रहल छलीह, आ आद्र स्वर में किछु -किछु बाजि रहल छलीह ।- "ओह प्रिय आब हम कोना क रहब ! आब हमर के सहाय होयत !हमरा छोड़ि कतय चलि गेलौं !आब हम केकर भरोसे अहि धरती पर रहब!" एहन तरहक विभिन्न बात कहैत उर्वशी बिलखि-बिलखि कs कानि रहल छलीह,आ दुनू आँखि सँs दहो-बहो नोर झहरा रहल छलीह। एतय हुनकर सहायता करय वास्ते किनको आबय के कोनो संभावना नहि छल।एहि जन-शून्य वन क्षेत्र मे हुनकर सहायता करय लेल कियो कोना कs अबैत। ओ सब किनको बिना जानकारी देने अतह आयल छलथि। तखन एहना स्थिति में रक्षक के हुईतथि! केओ भरोस देमय वला नहि छलनि। दुःख सs कातर उर्वशी अपना के नि:सहाय अनुभव करैत एहन स्थिति मे कष्टदायक करुण स्वर मे विलाप करैत रहलीह।हुनकर मेमना सेहो ओतय आबि गेल छल आ प्रेमपूर्वक राजाक देह पर चुम्बन लs रहल छल।ई देखि उर्वशी अपना के असहाय बूझि मेमना के अपन प्रियजन मानैत आर करुण स्वर में विलाप करs लगलीह। किछु काल धरि एहि तरहें विह्वल भय विलाप कएलाक बाद ओ उठि कs ठाढ़ होइत कहलथि - "ठीक छै प्रिय,अहाँ हमरा छोड़ि कs चलि गेलहुँ! आब हमहूँ जीबs नहि चाहैत छी। हमहूँ आब आत्महत्या कs लेब।" ई कहि ओहो झील मे उतरि गेलीह, आगू बढ़बा सँ पहिने एक बेर फेर पुरूरवा लग आबि राजाक कपार पर चुम्बन लs कs कानय लगलीह। राजाक एक-एक अंग केँ चुम्बन लैत कानैत रहलीह।किछु क्षणक बाद पुरूरवाक आँखि झपकs लागल छल । किछु काल धरि आँखि धीरे-धीरे फुजइत बंद होइत रहल ... आ फेर दुनू आँखि खुजि गेल। उर्वशी नोर भरल आँखि सँ अश्रुसिक्त स्वर में बजलीह - . "आब अहाँक केहन मोन अछि प्रिये!" राजा पुरूरवा तीव्र स्वर सँ ठहक्का लगबैत हँसैत बजलाह - "हमरा!हमरा तs किछु नहि भेल अछि!तखन हमर हालत के बारे मे किएक पूछैत छी?" उर्वशी "लेकिन अहाँक ओ स्थिति जे अखनि किछु क्षण पहिले धरि छल! अहाँक श्वास बन्द छल!" राजा ठठा कs हँसैत बजलाह "अच्छा!ओ! ओ तs प्रतिउत्तर छल अहाँक ठिठोली के। हम तs एक पहर तक श्वास रोकि कs रहि सकैत छी।" उर्वशी एहि बात पर तमसा गेलीह।ओ बजलीह - "की एहि तरहक हंसी ठिठोली करवाक चाही?कतहु आओर हम नहि सुनने रही एहेन दिल्लगी होइत छैक,एहेन सन बात अहाँ कतह सिखलहुँ ? अहाँ हमरा सँs एहन भयानक हंसी किएक केलहुँ!अहाँक हालत देखि हम मरs जाइत रही। हमरा एहन हँसी-दिल्लगी नीक नहि लगैत अछि,तेँ फेर कहियो अहाँ सँ हम गप्प नहि करब।" ई कहि उर्वशी तमसा कs आगू बढ़य लगलीह।राजा दुनू मेमना केँ पकड़ने हुनका पाछाँ-पाछाँ विदा भेलाह। राजा पुरूरवा एवं उर्वशी दुनू मौन धारण कएने रस्ता पर बढ़ल जाइत रहथि।दुनू में सs केओ मौन भंग करवाक प्रयास नहि कs रहल छलथि। किछु कालघरि अहिना चलवा के बाद राजा के नहि रहल गेलनि। ओ रूसल प्रिया के बंहुँसवाक प्रयास प्रारंभ केलथि,भांति-भांति के वार्ता एवं क्रियाकलाप के द्वारा। लेकिन उर्वशी मौन रहली। तखन राजा अनेक प्रकार के वार्ता एवं चुहलबाजी करैत फेर हुनकर चुप्पी तोड़बाक प्रयास केलनि, मृदा उर्वशी पर कोनहु असर नहि पड़ल। किछु काल उपरान्त राजा उर्वशी सँs हुनकर कोमलता के विषय में चर्चा करs लागलाह। अहि बेर ओ अपन प्रयास में सफल भेलथि उर्वशी के मौन तोड़ि देलथि। ओ कहलथि - "अहाँक कोमल पैर एहि वन प्रांतक कठोरता नहि सहत। अहाँ आराम करू,हम अहाँ केँ अपन कान्ह पर लs जायब।" ई कहि राजा उर्वशी केँ उठा कs कान्ह पर बैसा लेलथि । उर्वशी उछलि कs हुनकर कान्ह पर सँ उतरि गेली आ फेर सँs अपन पैर जमीन पर पटकैत आगू बढ़s लगलीह।आब राजा पुरूरवा फेर बजलाह - "अहाँ एतेक नहि तमसाऊ!हमरा सs रूसू नहि प्रिये! आबहु मान समाप्त करू,नहि तs हम जीवित नहि बचब! हमरा संग पहिले सन प्रेम करू प्रिये ,नहि तs सच में अहाँक ई प्रेम-पिपासु मरि जायत।" उर्वशी घुमि क' देखलथि । पुरूरवाक आँखि मे नोर भरि गेल छलैक।ओ अपना के नहि रोकि सकलथि आ पुरूरवा केँ अपन आलिंगन मे लs लेलथि । ओ भावावेश में कतेको बेर पुरूरवाक वक्षस्थल पर चुम्बन लेलथि।फेर ओ पुरूरवाक वक्षस्थल मैं अपन चेहरा केँ सटेने हुनका आलिंगनबद्ध कएने रहलीह। किछु काल के बाद ओ अपन मुख उठा पुरूरवा के आँखि में देखैत बजलीह - "अहाँ सदिखन मरय के बात किएक करैत छी! हमरा ई बात कनिको पसिन्न नहि अछि! अहाँ सदिखन मरय-जीबय के गप्प नहि करु। ई बात हमरा बहुत हरान करैत अछि प्रिय! हमरा वचन दिय,आब अहाँ एहेन गप्प नहि करब।" राजा पुरूरवा हुनकर मस्तक के प्रगाढ़ चुंबन लेलथि।उर्वशी हुनकर वक्षस्थल में फेर अपन मुख नुका लेलथि। किछु समयक बाद हुनकर छाती सँs मुख उठा कs हुनकर आँखि मे तकैत बजलीह - "हमअहाँ पर कोना तमसाएब!नहि प्रिय,हम अहाँ पर तमसाएल नहि छलहुँ,ने हम अहाँ सs रूसल छलहुँ!नहि प्रियतम,ई हमर मात्र अभिनय छल।" दुनूक बीचक सभटा तामस आ मान समाप्त भs गेल,तखन दुनू गोटे ओतहि एकटा गाछक छाँह में बैसि प्रेमालाप मे मगन भs गेलथि ।
क्रमशः

 

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