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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

| विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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  • अरुण लाल

    दू  टा लघुकथा

    1

    कुंभ स्नान

    .....परीछन छह ....। आबह आबह।
    हौ ! राम जी इच्छा स' कत' गेल छलह, मने गोटेक सप्ताह स' गायब छलह । कत'
    अलोपित्त भ' जाइत छह।किछु
    थाहे ने चलैए ।

    .....कि कहियह ! तों जे नै रहैत छह ने , मोने ने लगैत अछि , एकदम खालीपन महसूस
    होमय लगैत अछि ।आर सब त' कुकुर बानर अछि ककरा स बतिआउ । सब स बेसी दिक्कत
    अखबारक होइए । तोरा इसकुल गेलाक बाद धरौरा बाली आनि लै छथि तोरा आंगन स'।

    कहैत कहैत चौधरी जी महींस कें पुचकारय लगला।फेर कहय लगला ई जे महींस अछि ने से
    बड़ पौस मानैत अछि ,एकदम बकेन, बुझलह किने । राम जी इच्छा स' पक्का तीन सेर सबा
    तीन सेर दूध दैए , एकदम गढगर बुझलह किने ।

    धरौरा चौक पर त' एकरे पांच सेर बना क बेच लेत ।हमरा त' तोरे सन सन चारि टा
    गाहक अछि ।राम जी इच्छा सँ एकहक  सेर सबकें  दैत छी आ किछु चाहो लै रहि जाइत
    यै ।
    अच्छा छोड़ह इ सब बात ।बतौलह नै, कत्त' गेल छलह रामजी इच्छा स।

    .....कि कहू बाबा ।हमरा इसकुल स' बस कें टिकट कटैत छै कुंभ स्नान के बुझलियै।
    हमरो टिकट कटा देलक जबरदस्ती । हमहूँ सोचलौं भइये आबी एक बेर । सब पाप कटा ली ।
    मुलकी बाली त' जरि  क' मरल छलै ने ।अहाँ कें त बुझलै अछि सबटा।

    परेशानी त भेल जाइत काल । मुदा कि कहू बाबा, एक डूम देलाक बाद लागल जेना जिनगी
    सकारथ भ' गेल ।
    सब पाप ओतहि बिला गेल ।देह एकदम हल्लुक,फूल जकाँ आ मन शान्त भ' गेल। बुझायल
    जेना हम किछु नै छी। एक टा  कनौसियो  बरोबरि नहि ।निमित्त मात्र छी ।हमर वजूदे
    कतेक ।संसार हुनके स चलैत अछि।लोक झुठे हाइ हाइ करैत अछि। सबहिं नचाबत राम
    गोसाईं ।

    बहुत संतोष आ दृढ़ इच्छाशक्ति जागल अछि । जिनगीक अर्थ आब समझि मे आबय लागल ।भला
    होइन्ह जोगी जी कें ।अद्भुत संसार और संस्कृति रचलन्हि अछि कुंभ घाट पर ।

    हमरा त' लगैए बाघ आ बकरी एकहि घाट पर निर्भिक भ' पाइन पीब रहल अछि ।अखंड शांति
    ।निर्मल कलकल बहैत गंगा, जमुना आ सरस्वतीक संगम मे डूम दैते अनन्त सुखक
    प्राप्ति होइछ ।पूछू नै फेर फेर जाइ के मन करैयै ।

    ओह गदगद भ' गेल मन ।

    ...से बात ।ओह! तखन हमरो नेने जइतह ने अपने संगे रामजी ईच्छा स। बूढ सूढ आदमी
    हम सब कोना जा सकब ।

    किए नै । कुंभ मे अइबेर बहुत नीक बेबस्था सरकार केने छै ।
    आ जानै छिऐ बाबा अइ कुंभ मे जबाहर लाल सँ ल'क' जोगी , मोदी सब स्नान क' चुकलाह
    ।आ देखा देखी राहुल ,प्रियंका सेहो स्नान करती ।हिन्दुत्वक भावना हुनको सबकें
    किछु किछु जगलन्हि अछि ।भले
    देखाबटी ही सही ।

    धरोराबाली हुलकी द' सब बात खिड़कीक दोग सँ अकानि रहल छलीह ।चौधरी जी संग धर्म
    युद्ध पर अड़ल छलीह जे किछु बीत जाय ओ कुंभ स्नान करबे करती ।हुनका मोन मे
    खुदबुद्दी लागल छलन्हि आ प्रायश्चित करय चाहैत छली आखिर दूध मे सबदिन एक
    लोटकी  पाइन वएह त' मिलबैत छलीह ,राम जी इच्छा स ।



    2.


    ग्राहक .

    आइ भोरे भोर चौधरी जी नहा सोना क' जल्दी जल्दी दोकानक शटर अपने स' कहुना क'
    उठा रहल छलाह कि रेंजर सैहेबक ड्राइवर तखने दोकान मे लिस्ट ल' क' पहुँचल ।

    ...यौ सोइंठ अछि , आ मरीच सेहो लेबै। कनी लाल मेरचाइ ,आ बाबा रामदेब बला हिंग
    अछि न ।

    ...आबय दही मनटुनमा के ।कने धुपबत्ती देखाबय दे ।
    ...यौ बासमती चाउर केना दैत छिऐ।

    ...अबै छौ मनटुनमा बता देतौ।जय गणेश जय गणेश जय गणेश ..........

    ...यौ चिकेन मसाला अछि न ?
    ...आ सर्फ एक्सेल , डाबर हनी , बिसलरी बोतल ।

    ...चुप ने कनी मनटुनमा अबिते हेतै। कत' रहि जाइत छै, ईहो छौंड़ा ,राम जी इच्छा
    स ,से नहि जानि ।

    ...यौ जूता के फित्ता सेहो रखै छिऐ,आ फिनाइलक बोतल।

    ...हँ हँ सब छै।तों कनी दम धर । जय गणेश जय गणेश जय गणेश देबा।

    ...कखन आओत ओ। हमरा त देरी होइए । यौ किचेन किंग आ किचेन मसाला मे कोन बढियां
    होइत छै ।

    ...कत्ते बजै छैं , बाप रे बाप ।

    ...यौ कखन मनटुनमा आओत ।हमरा त सैहेब बाजय लगता । कहता कत' एतेक समय लागि गेलौ
    त की कहबै ।बताउ।

    ...ओम नमः शिवाय।कनी चुप रहय ने ।अगरबत्ती देखाब' दे न ।

    यौ बासमती चाउर बढियां अछि कि कतरनी । कनी देखाउ न। कोन सस्ता छै आ बढियां ,
    मेमसैहेब पोलाउ बनेथिन ।बहुते लोक सब आयल छै ।

    ...कहलियौ ने सब बात मनटुनमे के बुझल छै आ ओकरे रखलो छै ।

    ...यौ ओकरा कत्ते दरमाहा दैत छिऐ ।

    ...से कियै ।चौधरी जी कनी गरमाइत बजला। मोन आब खिसियानी बिल्ली सन भेल जा रहल
    छलन्हि।

    ...अहाँ के किछु बुझले ने अछि ।तखन ओकरे काउंटर पर बैसय दिऔ , पैसा अधिक भेटतै
    त अपने समय पर आओत आ अहाँ किछु दिन ओकर बला काज करु जाहि स' रखरखाव आ सब जिनिस
    के दाम सेहो पता रहत अहाँ कें ।

    ...ऐं ! कि कहलैं ।चौधरी जी लाचार भेल शून्य मे तकैत मनटुनमा कें अखनो एबाक
    इन्तजार बहुत बेसब्री स' क' रहल छलाह।

    मने मन सोचय लगला सैह देखू कनियें ओहदा  पाबि क' केना लोक इतराय लगैत छैक
    ।रेंजर के एक टा मामूली ड्राइवर कतेक पैघ बात कहि देलक । एबाक एबे करत मनटुनमा
    ,लेकिन बेइज्जत कराए देलक ।

    ठीके लोक कहैत छै जे मौत आ ग्राहक कखनो आबि सकैए, राम जी इच्छा स ।

    अरुण लाल
    02.02.2019

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