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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक 

विदेह

 

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-२०२१.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’                               

आँखिमे चित्र हो मैथिलीकेर ( आत्मकथा )

             २०.चारि बरख पचरुखीमे – 

हम  18 .01.1989 क’ साँझमे सीवान आबि गेलहुं आ बैंकसं सटले राज होटलमे टिकलहुं |  19 क’ जीपसं पचरुखी गेलहुँ आ शाखामे योगदान केलहुं | शाखा प्रबंधक छलाह आर. एन. मिश्र जी |

और सदस्य सभ जे ताहि समयमे छलाह अथवा बाद मे एलाह से छलाह :

पी.दुबे ,ए. के. सहाय, मो.आलम,जे.बी. उपाध्याय, ओम प्रकाश स्वर्णकार,एस.के.तिवारी, आर. एम. प्रसाद आ मोहन राम | 7 अगस्त   91 क’ तीनटा नव लिपिक एलाह :  चन्द्रमा मांझी, जमादार मांझी आ राजेन्द्र दास | बाद मे एकटा अधिकारी एलाह एस.डी.राम |

आर.एन.मिश्र जीक ट्रान्सफरक बाद किछुए दिन लेल एलाह एस.बी.तिवारीजी आ हुनका बाद 19.02.91 क’एलाह जनार्दन मिश्र जी |

शाखामे ऋण आवेदन सबहक निष्पादन हेतु क्षेत्रीय कार्यालयक  आदेश पर ए.एफ.ओ. रामजीत सिंह जी किछुए दिन लेल एलाह |

ई शाखा बहुत दृष्टिसं नीक छल मुदा अहू ठाम बैलेंसिंगबला समस्या छलै, आइ.आर.डी.पी. मे तीनटा लेजर छलै आ बैलेंस जून 1984 तक मिलल  छलै, फसल ऋणक दूटा लेजर छलै आ बैलेंस जून 1982 तक मिलल छलै | ई दुनू पहिने मिलयबाक प्रयास केलहुं | 10  मार्च तक फस ऋणक शेष मिलान दिसम्बर 1988 तक भ’ गेल |  आइ.आर.डी.पी. बहीक मिलान दिसम्बर                   1984 तक भेल | सभ गोटेक सहयोगसं बही मिलान स्थितिकें क्रमशः  नीक सं नीक बनयबाक प्रयास करैत रहलहुं | बचत खातामे 33 आ सावधि जमामे 10 टा लेजर छलै | पेंशनक काज सेहो बहुत छलै |

सीवानसं लगभग 10  किलोमीटरपर पचरुखी शाखा छलै, हम सीवानमे आवास राखक लेल क्षेत्रीय प्रबंधकक अनुमति हेतु आवेदन पठा  देलिए | प्रतिदिन सीवानसं पचरुखी जाए लगलहुं | साँझमे घुरिक’ सीवानमे  राज होटल पहुंचि जाइ छलहुँ |

सीवानमे पाँच साल रहि चुकल छलहुँ, बहुत गोटे पूर्व परिचित छलाह | डी ए वी कॉलेज सीवानक प्राध्यापक डा. अमर नाथ टाकुर, प्रो. गंगानंद झा, आर एन चौधरी आ  ओकील साहेब सुभाष्कर पाण्डेयजी सभ गोटेकें डेरा तकबामे सहयोग  हेतु कहि देलियनि आ निश्चिन्त छलहुँ जे डेरा जल्दिए कतहु अवश्य भेटत | यैह सोचिक’ परिवार संगे आबि गेल छलहुँ |

चारि-पाँच दिन भ’ गेल छल | कतहुसं कोनो डेराक पता नहि भेटल  छल |

एक दिन सबेरे होटलक बालकोनीसं नीचां तकलहुं त बाबूकें देखलियनि चल अबैत, आश्चर्य भेल, कत’ सं आबि रहल छथि एते सबेरे, नीचां जाक’ हाथसं सामान सभ ल’ लेलियनि आ हुनका संगे ऊपर गेलहुँ |

गप-शप भेल त पता चलल, तिला संक्रान्तिक किछु सनेश ल’क’ ट्रेनसं आदापुर एलाह, ओत’ पता चललनि जे हम सीवान चल गेलहुँ | आदापुर शाखाक ए एफ ओ द्विवेदीजी हुनका अपना घरपर रक्सौल ल’ गेलखिन, ओत’ एकदिन राखिक’ बस पर चढ़ा देलखिन आ कहलखिन जे बैंक लग जाक’ होटलमे अथवा बैंक शाखामे पता करबै त भेंट भ’ जेताह | बस स्टैंडसं पता लगाक’  बैंक लग आबि गेल छलाह त हम देखि लेलियनि |

बाबू एलाह त’ रस्तेसं हमर डेरा ठीक केने एलाह |

जेबीमे सं एकटा कागजक टुकड़ी निकाललनि, कहलनि जे ई सज्जन  रक्सौलसं हमरा संगे बसमे एलाहे आ कहलनिहें  जे हमर डेरा बैंकक लगेमे अछि आ हमहूँ कोनो बैंके  स्टाफकें मकान भाडापर देब’ चाहैत छी |

किछु काल बाद ठाकुरजी एलाह त कहलनि जे हम जनैत छियनि रामचंद्र सिंहकें, चलू ने एखने चलैत छी |

सभ गोटे गेलहुँ | घर देखलिऐ, शास्त्री नगरमे काली मन्दिरसं कनिएँ दूरपर सड़कक कातेमे |

राम चन्द्र सिंह जी सं भेंट भेल, गप  भेल, डेरा ठीक भ’ गेल |

हम सभ गोटे होटल छोडि डेरामे आबि गेलहुँ | स्टोव संगमे  अनने रही, एकटा डेकची आ किछु थारी-बाटी-गिलास सेहो रह्य, डेरामे भोजन बनाएब शुरू भ’ गेल |

डेरामे एकटा कमी छलै | लो वोल्टेज रहबाक कारणे पानि सदिखन ऊपर नै चढ़ि पबैत छलै, सबेरे एक बेर ऊपर आबि जाइत छलै | तें नहाए बला पानि स्टोर क’क’ रखबाक लेल बाबूक संगे जाक’ एकटा बड़का ड्रम किनलहुं  आ एकटा पाइप सेहो | ड्रम लेल ढक्कन बनबौलहुं |

बाबू किछु दिन रहिक’ गाम वापस चल  गेलाह |

हम सभ 14  फरबरीक’ आदापुरसं ट्रकमे सामान सभ ल’क’ सीवानक डेरामे चलि एलहुं |

आदापुरसं चलबासं पहिने द्विवेदीजीक बहुत आग्रहक कारण रक्सौलमे हुनका घरमे  चारि दिन पहुनाइ कर’ पडल,से बहुत नीक लागल |

जहिया सीवान सभ गोटे सभ सामान ल’क’ एलहुं, ओही दिन रातिमे ओकील साहेब सुभाष्कर पाण्डेय जीक प्रथम पुत्रीक विवाहक उत्सवमे सभ गोटे शामिल भेलहुँ |

वसन्त आ मैथिलीक नाम राजवंशी बालिका उच्च विद्यालयमे आ शैलेन्द्रक नाम  सरस्वती शिशु मन्दिरमे लिखाएल गेलनि | आब शैलेन्द्र भ’ गेलाह विवेक आनन्द |

सीवानमे क्षेत्रीय कार्यालय हमरा डेराक बहुत लग छल |

ओत’ राजभाषा अधिकारी कर्णजी आ सुरक्षा अधिकारी मिश्र जी सं निकटता भेल |

कर्ण जी और मिश्र जी दुनू गोटे दू यूनियनक सदस्य छलाह मुदा दुनू गोटेमे अदभुत सामंजस्य छलनि  | हम अधिकारी यूनियनक छलहुँ, हमरापर कर्णजीक सहयोगसं यूनियन बदलबाक लेल बहुत दबाब पडल आ कर्णजी ई कहिक’ एकर समापन केलनि जे ई दबाबपर एक मकानक किराया दू आदमीकें दैबला लोक छथि, तें हिनका दिक नै करै जैयनु |

मिश्र जी सभकें भोरे जगबाक आ टहलबाक अभ्यास लगौलनि |

अपना डेरासं अबैत छलाह , रस्तामे जकर-जकर डेरा छलै, सभकें जगबैत संग क’ क’ वी. एम. एच . ई. स्कूलक मैदानमे ल’ जाइत छलाह | ओत’  सभकें व्यायाम करबैत छलाह |

हमरो भोरे जगबाक आ व्यायाम करबाक अभ्यास लागल |

मिश्र जी साहित्यिक अभिरूचि सेहो रखैत छलाह |

अपन आवासमे दिनकर स्मृति संध्या 23  सितम्बरक’ मनबैत छलाह |साहित्यिक गोष्ठी सभमे उपस्थित होइत छलाह आ भाग लैत छलाह |

हमर साहित्यिक क्रिया कलाप :

एहि बेर सीवानमे हमर साहित्यिक गतिविधि सीमित रहल |

कॉलेजक पूर्व परिचित प्राध्यापक लोकनिसं सम्पर्क बनल रहल | आदरणीय प्रो. गंगा नन्द झाक सलाहसं बंगला लेखक आशापूर्ण देवीक प्रथम प्रतिश्रुति, बकुल कथा, शंकरक ए पार बांगला ओ पार बांगला, सीमाबद्ध आ विमल मित्रक इकाई दहाई सैकडा आ खरीदी कौड़ियों के मोल पढलहुं | एकर अतिरिक्त हरिवंश राय बच्चन, दिनकर आ नागार्जुनक किछु पोथी सेहो पढलहुं | ओशोक किछु पोथी सेहो पढलहुं | ओशो टाइम्स पत्रिका सेहो पढैत छलहुँ |

1992मे  26 जनबरी क’ सीवान  क्लब द्वारा आयोजित कवि सम्मलेनमे, 23फरबरीक’ डी ए वी कॉलेजमे  आयोजित  कवि सम्मेलनमे आ शास्त्री जयन्तीक अवसरपर 2 अक्टूबरक’ सीवानक मिडिल स्कूलक प्रांगणमे आयोजित कवि सम्मलेनमे किछु मैथिली आ हिन्दीक रचना प्रस्तुत केलहुं | क्लबक कार्यक्रममे क्षेत्रीय कार्यालयक सुरक्षा अधिकारी, हरि शंकर मिश्र जी सेहो नजरुल इस्लामक रचना ‘विद्रोही’क पाठ बहुत सुन्दर केने छलाह |

कतहु साहित्यिक कार्यक्रम होइत छलै, त अवश्य जाइत छलहुँ |

1992 मे 26   जनवरी क’ पचरुखी मे इप्टाक नाटक ‘जनता पागल हो गई है’ देखलहुं |

28  जनवरीक’ सीवानमे इप्टा द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘एक और द्रोणाचार्य’ बहुत नीक लागल |

एहि साल  9-10  नवम्बर क’ पटनामे विद्यापति पर्वक अवसरपर सियाराम झा ‘सरस’ सं हुनक किछु रचना सुनलहुं, ‘डिगरी भ’ गेलै झुनझूना साढ़े छबे आनामे’ नीक लागल रह्य |ई रचना ओहि समयमे बिहारमे शिक्षा आ परीक्षाक स्थितिक पोल खोलैत छल |

सीवान मे कवि सम्मेलन आ मुशायरा देखब नीक लगैत छल | एक बेर तंग इनायतपुरी( जे असलमे श्रीवास्तव छलाह )क संग डेरापर बैसार भेल | ओ एकटा पांती देलनि :

‘लोग पहचाने गए हैं काम से किरदार से’   एहि पांतीकें ल’क’ एकटा गजल तैयार करबाक लेल कहलनि | हम तैयार त केलहुं,मुदा ओहिसं अपनो संतुष्टि नै भेल | हम गजल लिखबाक कोशिश त करै छलहुं, मुदा गजलक व्याकरणक ज्ञान नै भ’ सकल छल |  

बच्चन जीक ‘मधुशाला’ बहुत पहिने पढने रही आ ‘की भेटल आ की हेरा गेल’ –आत्म गीत लिखबाक विचार मोनमे आएल छल, ताहि  लेल किछु पहिनहुं लिखने रही आ किछु अहू समयमे लिखलहुं |

ओहि समय बिहारक जे स्थिति रहै, ताहिपर हमरासं एकटा रचना लिखाएल जे बादमे मैथिली पत्रिका ‘भारती मंडन’ मे प्रकाशित भेल :

                गीत

गोली बारूदक मौसममे हम कविता केहेन सुनाबी

हाल देखि बेहाल भेल छी, गीत कोनाक’ गाबी ?

 

गाम-गाम  आ शहर-शहरमे आतंकक  अछि छाया

ठोहि पारिक’ कानि रहल अछि गौतम बुद्धक काया

शब्द-शब्दमे  चिनगी-चिनगी,  शब्द-शब्दमे धधरा

अपनहि घर हम जरा रहल छी अप्पन-अप्पन बखरा

 

गामक गाम जरैए धह-धह  ककरा कोना बचाबी

एहेन हालमे कानि सकै छी, गीत कोनाक’ गाबी ?

 

टूटल  सरस्वती केर वीणा केर संगीतक धारा

मनुखक छुद्र स्वार्थ पर कनइत अछि विज्ञान बेचारा

पत्रहीन सभ गाछ नग्न अछि जेम्हरे देखू तेम्हर

कत’ अलोपित भेल गामसं बरक गाछ झमटगर

 

थाकल-हारल लोक सोचैए कत’ कने सुस्ताबी

एहेन हालमे अहीं कहू त गीत कोनाक’ गाबी ?

 

बेर-बेर  उठबैए  हाबा   एखनहु  वैह  सवाल

बुद्ध –महावीरक  ई  धरती  एहेन  किए कंगाल

द्रोण -भीष्मकेर चुप्पी आ धृतराष्ट्रक कुत्सित सपना

बेर-बेर दोहराएल जाइत अछि लाक्षागृह केर घटना

 

उचित यैह जे आमक खातिर  आमक गाछ लगाबी

चलै-चलू हम सभ हिलि-मिलिक’ अपन बिहार बचाबी |

 

शिशवा गामक महादेव ठाकुर हारमोनियमपर नीक गीत गबैत छलाह, हमरासं किछु गीत लिखबौने छलाह, करीब दसटा गीतक कैसेट बनबौलनि, एकटा प्रति हमरो देलनि |

ओहिमे निम्नलिखित गीत सभ छल :

‘आउ आइ हम सभ हिलि मिलिक’ मांक उतारी आरती’

‘एना गे सुगिया कतेक दिन रहबें’

‘बौआ बनि गेल नेता दाढ़ी बढ़ाक’

‘आइ धरतियो लगैछ नव कनियाँ जेना’

‘सजाउ हे यै बहिना, मैथिलीक प्रतिमा सजाउ’

‘आजुक राति कथीले’ रे भैया, आजुक राति कथीले’

‘छोटे-मोटे टूटल मडैयामे गौरी कोनाक’ रहती हे’

आ किछु और गीत |

बादमे स्थानान्तरणपर बिहारसं बाहर जेबाक कारणे ने शशिकान्तजी-सुधाकान्तजीसं सम्पर्क राखि सकलहुं ने महादेवजीसं |

 

रामचंद्र बाबूक मकानमे :

मकान फ़ैल छलै, एकेटा कमी छलै, पानिक व्यवस्था नियमित नहि छलै, जाहि कारण असुविधा होइत छल तथापि एहि बेर सीवानमे जाधरि रहलहुं, अही मकानमे रहलहुं |

 

द्विरागमनक बाद एक बेर किछु दिन एहि ठाम हमर अनुज ललनजी सपत्नी रहलाह | एक बेर दू सप्ताह लेल हमर ससुर आ  डुमरा बला साढू पत्नी आ छोट बालक नीरजक  संग रहलाह | ओहि समय हम सभ स्नान करबाक लेल विशेष उपाय करैत छलहुँ |

सड़कक पच्छिम प्रथम तलपर हमर आवास छल आ सडकक पूब अवकाशप्राप्त प्राचार्य महेन्द्र बाबूक पैघ हातामे एकटा इनार छलै, आदमी बढलापर पुरुष लोकनि स्नान करबाक लेल ओहि इनारपर जाइत छलाह |

ओहि हातामे एकटा चापा कल सेहो छलै, हम अधिक काल चापा कलक उपयोग करैत छलहुँ |

एक बेर पटनासं मामा सेहो सपरिवार दस दिन लेल एलाह आ जेना-तेना काज चलि गेल |

पान आ तमाकुल :

सीवानमे पान बहुत खाए लगलहुं | काली मन्दिर लग पानक दोकान तेहेन सुन्दर पान खुअबैत छलै जे बेर-बेर खेबाक लेल प्रेरित करै छलै | दिन-दिन आदति पुष्ट भेल जा रहल छल |

क्षेत्रीय कार्यालयक सुरक्षा अधिकारी लोकक स्वास्थ्यक सेहो चिन्ता करैत छलाह | ओ कय बेर कहैत छलाह पान छोडि देबाक लेल | एक बेर बहुत दृढ़ संकल्प ल’क’ छोडि देबाक निर्णय लेलहुं आ पान खाएब छोडि देलहुं, मुदा मोन विचलित होमय लागल | मोनकें ठकबाक लेल तमाकुल कखनोक’ खाए लगलहुं | मुदा मोन कनीसं मानैत नै छल , तकर परिणाम भेल जे जेना पहिने पान खाइ छलहुँ, तहिना तमाकुल खाए लगलहुं | ई और खतरनाक छल |

एक दिन प्रो. गंगा नन्द झा कहलनि, ‘अहाँसं शिकायत अछि, अहाँ पान खाएब छोडि देलहुं त तमाकुल किए खाए लगलहुं |’

हम बहुत गंभीरतासं विचार करैत एक दिन तमाकुल सेहो छोडि देलहुं |

तमाकुलक सेवन हमर पूर्वज सभ सेहो केने छलाह |

हमरा टोलमे एक-दू घर छोडिक’ सभ घरमे जवान आ बूढ़ लोक सभ द्वारा तमाकुलक सेवन चलैत छल |

हमर बाबा (दादा) सेहो अपने बाड़ीमे तमाकुल उपजबैत छलाह, ओकरा सरियाक’ रखैत छलाह आ साल भरि ओकर सेवन करैत छलाह |

बाबू कलकत्तासं एलाह त ओहो एकर सेवन करय लगलाह |

हम बी.एस.सी. पार्ट एक तक पान-सुपारी-तमाकुलसं दूर रहैत छलहुं |

ढोली एग्रीकल्चर कॉलेजमे एक बेर एक संगीक जोरपर सिगरेट मुंहमे लेलहुं, मुदा चक्कर जकाँ आबि गेल | ओही दिन सिगरेटसं मुक्ति भेटि गेल |

बहुत पहिने एक बेर रातिमे हमरा दांतमे दर्द उठल | बेचैन भेलहुँ | रातिमे और कोनो उपाय नहि देखि हमर पिता कनी तमाकुल चुनाक’ देलनि आ कहलनि जत’ दर्द करैछह ओत’ राखि दहक | हमरा तेहेन निशा लागल जे सबेरे तक सूतल रहि गेलहुँ | तकरा बाद बहुत दिन धरि ने दांतमे दर्द भेल आ ने तमाकुल दिस तकबाक हिम्मति भेल |

बादमे जखन कखनो दांतमे दर्द हुए त हम तमाकुलक उपयोग करय लगलहुं | धीरे-धीरे पानक विकल्प तमाकुल आ तमाकुलक विकल्प पान भ’ गेल | क्यो एकर अधलाह पक्ष दिस सचेत नहि क’ सकलाह |

बहुत दिन बाद मिश्र जी आ प्रो. गंगानंद झा एहेन लोक भेटलाह जे पान आ तमाकुलसं मुक्तिक लेल प्रेरित केलनि आ हम अपनापर नियंत्रण क’ सकलहुं |

किछु दिन त निमाहि लेलहुं, मुदा एकटा सम्बन्धी एलाह आ कहलनि जे एक-दू बेर खेबामे हर्ज नै छै, ओ खाइत छलाह, हमरासं ओ प्रभावित नहि भेलाह, हमहीं हुनक प्रभावमे आबि गेलहुं आ कखनो-कखनोक’ लेब’ लगलहुं | धीरे-धीरे फेर पूर्ववत तमाकुलक अधीन भ’ गेलहुँ | एहिसं मुक्तिक लेल आवश्यक मंत्र तकबामे चौदह बरख लागि गेल | जबलपुर पहुंचलापर कारगर मंत्र भेटल जे एक संग पान, तमाकुल, माछ-मांस, पियाजु-लहसुन सभसं मुक्ति दिया देलक | ओहि मंत्रक चर्चा आगाँ समय एलापर करब |

देश आ प्रान्तक राजनीति :

1989 मे 2 दिसम्बरक’ केन्द्रमे राष्ट्रीय मोर्चाक सरकारमे विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधान मन्त्री भेलाह | 1990 मे 7 अगस्तक’ प्रधानमन्त्री द्वारा मंडल आयोगक अनुशंसाकें क्रियान्वित करबाक घोषणा भेल |

एहि घोषणाक विरोधमे पूरा देशमे छात्र-आन्दोलन शुरू भ’ गेल , कतेक युवक द्वारा आत्मदाहक घोषणा हुअ’ लागल |

25  सितम्बरक’ अयोध्यामे विवादास्पद बाबरी मस्जिद –राम जन्मभूमिपर मन्दिर निर्माण हेतु भाजपाध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा गुजरातमे सोमनाथ मन्दिरसं रथ-यात्रा आरम्भ भेल |

23  अक्टूबरक’ लाल कृष्ण आडवानीकें समस्तीपुरमे गिरफ्तार क’ लेल गेलनि, भाजपा राष्ट्रीय मोर्चा सरकारसं समर्थन वापस ल’ लेलक आ   7 नवम्बरक’ राष्ट्रीय मोर्चा सरकार खसि पड़लै |

1991मे  21   मइक’ राजीव गांधी बमसं मारल गेलाह,   21  जूनक’ पी. वी, नरसिंहा राव प्रधान मन्त्री भेलाह |

बिहारक स्थिति दयनीय भ’ गेल छल |

जे सरकार छलै से सरकार लेल  छलै | अशान्ति आ असुरक्षाक वातावरण उपस्थित छलै | सीवानमे ई स्थिति बेशी कष्टकर भ’ गेल छलै |शिक्षाक मन्दिर सभ अनाथ जकाँ भ’ गेल छल | स्थिति एतेक जबदाह भ’ गेल छलै जे पीड़ित लोक अस्पताल जेबासं, लोक लोकक जिज्ञासामे जेबासं आ अखबार सभ सही बात लोकक सोझाँ अनबासं डेराइत छल |

आर्यावर्त, इंडियन नेशन आ मिथिला मिहिर पहिने बन्द भ’ गेल छल | माटि-पानि सेहो बन्द भ’ गेल छल | सरकार द्वारा लोक सेवा आयोगसं मैथिली विषयकें हटा देल गेल | राज्यमे विरोधक स्वर दबल रहल |

असामान्य स्थितिक प्रभाव बैंक सभपर नहि छलै, तथापि सीवानक हवा विषाक्त लगैत छल | तैपर बिजलीक संकट आ ओहि सं उत्पन्न अनेक असुविधा बेर-बेर ई सोचबापर विवश क’ रहल छल जे कतहु एहेन ठाम स्थानान्तरण होइत जत’ बिजली सदिखन रहैत होइ आ वातावरणमे शान्ति होइ |

पारिवारिक स्थिति :

परिवार तीन ठाम भ’ गेल छल, गाममे माए-बाबू छलाह, सीवानमे हम पाँच गोटे छलहुँ आ दिल्लीमे ललनजी आ रतनजी छलाह | बादमे ललनजीक पत्नी सेहो पहुँचलखिन |

हम गामपर एकटा बाथ रूमक आवश्यकताक अनुभव करैत छलहुँ, से ललनजीक द्विरागमनसं पूर्व भ’ गेल, दूटा कोठली सेहो हुनक द्विरागमनसं पहिने बनबाओल गेल |एहि लेल बैंकसं ऋण सेहो लेब’ पडल |

ललनजी दिल्लीमे आजादपुर मंडीमे काज पकडलनि | बहुत दिन धरि ओत’ एसगरे रहलाह |

रतनजी बी एस सी फिजिक्स प्रतिष्ठामे प्रथम श्रेणीमे उतीर्ण भेलाह | बाबूक विचार छलनि जे एम एस सी सेहो क’ लेथि, मुदा हुनका दिल्लीमे जीविकोपार्जन दिस ध्यान छलनि |

माए आ बाबू  बेरा -बेरी अस्वस्थ रहैत गेलाह |

बाबू मधुबनीमे डा.के. के. मिश्रसं देखौलनि, 25  दिनमे किछु लाभ नै भेलनि त दरभंगा जाक’ डा. आर.बी.ठाकुरसं देखौलनि |

माएकें सूतलमे कोनो जंतु पैरमे नछोरि  लेलकनि, इलाज भेलनि |

माए ठीक भेलीह त बाबू दुखित पडलाह |

1992 के सितम्बरमे रतनजी एक बेर पटना मे कोनो परीक्षा दैत गाम गेलाह त बाबूक स्वास्थ्य ठीक नै लगलनि, 16 सितम्बर क’ हुनका नेने दिल्ली चल गेलाह |

दिल्लीमे बाबू हमर सभसं छोट बहिन-बहिनोक घरमे रहलाह | ललनजी आ रतनजी सेहो लगेमे रहैत छलखिन |

ललनजी किछु मास एसगरे रहलाह,किछु दिन दुनू गोटे बहिन-बहिनो ओत’ रहलाह आ फेर बादमे शैल संगे आदर्श नगर बला मियानीमे रह’ लगलाह |

          पटेल अस्पतालक  डा. पालसं बाबूक  इलाज शुरू भेलनि, एकटा आयुर्वेदक आ एकटा यूनानी डा.सं सेहो सम्पर्क कएल गेल |

बाबू किछु मास दिल्लीमे रहिक’ स्वस्थ भ’क’ गाम घुरलाह |

दिल्लीमे रतनजी सेहो पीलियाक शिकार भेल छलाह |

 

सीवानमे एक राति बच्चीकें बिच्छू डंक मारि देलकनि | डॉक्टरसं देखब’ पडलनि, दबाइ खाए पडलनि |

मैथिलीकें एक बेर भरल गमला पैरपर खसि पडलनि |

एक बेर माता निकलि गेलखिन |

विवेक सेहो अस्वस्थ भेलाह | दरभंगाक डा. वीरेंद्र प्रसादक इलाजमे आ बादमे सीवानमे डा. डी. एन. श्रीवास्तवक इलाजमे रहलाह |

हमरा सेहो बोखार भेल, मिश्रजीक सलाहपर डा.निजामुल हसनसं सम्पर्क केलहुं | कहलनि फैलेरिअल फीवर अछि,पन्द्रह दिन दबाइ खाए पडल |

हमरा डेराक बगलमे एकटा आँखिक विशेषज्ञ एलाह डा. लाल बहादुर सिंह, हुनकासं आँखिक जांच कराय चश्माक उपयोग करय लगलहुं |

परम्परा आ आधुनिकताक समन्वय :

अही अवधिमे 1990 मे  प्रो.गंगा नन्द झाजीक दुनू बालकक विवाह भेलनि | हमरा सभसं सभ बातक चर्च करैत छलाह | हुनक जेठ बालकक विवाह 1 फरबरीक’ जमालपुरमे भेलनि जाहि ठाम वरियातीमे सीवानसं डा.अमर नाथ ठाकुर जीक संग हमहूँ गेल रही | ओहि वरियातीमे किछु विशेषताक संग परम्परागत विवाह जेना मधुबनी-दरभंगामे होइछै,तहिना अनुभव भेल, नीक लागल |

हुनक दोसर बालकक विवाह आधुनिक ढंगसं भेलनि जाहिमे वरियातीक स्थानपर दुनू दिससं किछु मित्र लोकनि उपस्थित भेलखिन आ दुनू दिससं माता-पिताक उपस्थितिमे आ हुनका लोकनिक आशीषक संग दू-तीन घंटामे विवाहसं द्विरागमनधरिक  सभ कार्यक्रम आ सभ पावनि-तिहार पटनामे संपन्न भेल |

हमरा एहि दुनू विवाहसं सिखबाक लेल बहुत किछु भेटल |

माता-पिताकें अपन बालकक अनुरूप पुतोहु तकबामे कोन-कोन बातकें प्राथमिकता देबाक चाही आ कोन-कोन बातपर अपन सहमति आ आशीर्वाद देबाक लेल अपनाकें तैयार रखबाक चाही, से हमरा सिखबाक अवसर भेटल | अपनो  मोने विवाह करब त  माता-पिता आ मित्र-बन्धुक  आशीर्वाद आ शुभकामनाक संग करब, ईहो उदाहरण नव लोक सभ लेल बहुत अनुकरणीय आ प्रशंसनीय लागल |

एकमात्र योग्य पुत्रक पिता विश्व प्रसिद्द किडनी विशेषज्ञ  डा.विवेकानंद झा आ एकमात्र योग्य पुत्रीक पिता साहित्यकार-चिन्तक आ दिल्ली विश्वविद्यालयक चर्चित प्रोफ़ेसर अपूर्वानन्द आधुनिक भारतीय समाज लेल सफल आ सबल दाम्पत्य जीवनक संग संतुलित पारिवारिक आ सामाजिक जीवनक अदभुत उदाहरण प्रस्तुत करैत छथि | हमरा हर्ष अछि जे हिनका लोकनिकें लगसं देखबाक आ जनबाक अवसर प्राप्त भेल अछि |

 

माएक संग तीर्थाटन :

1991 के अक्टूबरमे रतनजी  शान्ती बहिनकें गामपर राखि माएकें सीवान नेने एलाह | एल.टी.सी.क सुविधाक उपयोग करबाक विचार भेल | सिवानसं सभ गोटे दिल्ली गेलहुँ, बहिन-बहिनोक घर पर रहलहुं |

एक दिन दू टा ऑटो रिक्शा ल’क’ सभ गोटे दिल्लीमे लाल किला,इंडिया गेट,राजघाट,विजय घाट,शक्ति स्थल,शान्ति वन,चिड़िया खाना,लोटस मन्दिर  आदि बहुत ठाम घूमै गेलहुँ |

किछु दिनक बाद  एक दिन एकटा गाड़ी ल’क’ सभ गोटे हरिद्वार आ  ऋषिकेश मे कय ठाम घूमै गेलहुँ | ऋषिकेश मे लक्ष्मण झूलापर द’ क’ दोसर कात मन्दिर सभ घूमैत रातिमे पुनः हरिद्वार पहुंचि श्री राम धर्मशालामे विश्राम करै गेलहुँ |

दोसर दिन हरकी पौरी गेलहुँ,ट्रालीसं मनसा देवी मन्दिर गेलहुँ | ओत’सं भारत माता मन्दिर,राम हनुमान मन्दिर देखैत पाँच बजे गाड़ीसं विदा भ’ गेलहुँ | 

फेर किछु दिन बाद एकटा गाड़ी ल’क’ सभ गोटे आगरा, मथुरा, वृन्दावनमे कए ठाम घूमि अबै  गेलहुँ |

ई यात्रा सभ गोटेक लेल बहुत आनन्द प्रदान करैबला रहल |

रतनजी नोकरीक लेल ओतहि रहि गेलाह आ हम सभ माए संग सीवान घूरि माएकें गाम पहुंचा देलियनि |

1992 मे वसन्त (वंदना )क दसमी बोर्डक परीक्षा भेलनि | द्वितीय श्रेणीमे उतीर्ण भेलीह,900  मे   533 अंक एलनि,  59.2 प्रतिशत |

 

पदोन्नति :

1992 मे स्केल II मे पदोन्नतिक प्रक्रियामे  17 जुलाइ  क’ साक्षात्कार भेलै,  21 अक्टूबर क’ परिणाम घोषित भेलै,  हमहूँ सफल भेलहुँ |

ओहि बेर किछु गोटेकें मध्य प्रदेश जाए पड़लनि, पैंतालीस बरखसं बेशी वयसबलाकें बाहर नै जाए पडलनि | हम पैंतालीसक भीतरे रही, तें आंचलिक कार्यालय,रायपुरमे योगदान देबक लेल जिनका सभकें आदेश भेटल रहनि, ओहिमे हमहूँ रही |30 नवम्बरक’ हमरा सभकें रायपुर आंचलिक कार्यालय पहुँचबाक छल |

अही बीचमे जमशेदपुरसं वीणाक विवाहक सूचना भेटल | वीणा आ ममता दुनू बहिन नान्हिए टा रहथि त माए दुनियाँ छोडि देलखिन, किछु दिन गाममे रहलाक बाद दुनू गोटे जमशेपुरमे जेठ भाए,भौजी,भातिज आ भतीजी सबहक संग रह्य लगलीह | साढ़ू समय-समयपर कलकत्तासं आबिक’ भेंट क’ जाइत छलखिन | वैह वीणा, हमर साढूक जेठ पुत्री वीणाक विवाह भ’ रहल छनि जमशेदपुरमे आ हमरा जमशेदपुर होइत जेबाक अछि रायपुर | कार्यक्रममे कनी सामंजस्य केलासं हम विवाह दिन त नहि, विवाहक तेसर दिन भेंट क’ सकैत छी हुनका सबहक |बच्ची अपन पिता लेल स्वेटर आ मफलर बुनने छथि सेहो द’ देबनि आ सभ गोटे सं भेंट-घाँट सेहो भ’ जाएत |

तदनुसार कार्यक्रम  बनल जे पटनासं जमशेदपुर भोरे पहुंचब, सरोज स्टेशनसं हमरा डेरापर ल’ जेताह, ओत’ दिन भरि सभसं भेंट-गप करैत वर-कनियाँ कें आशीर्वाद दैत साँझमे जमशेदपुरसं रायपुर बला ट्रेन पकड़ि लेब | अही अनुसार ट्रेनमे आरक्षण कराओल |

27  नवम्बरक’ पचरुखी शाखासं भारमुक्त भए रायपुर जेबाक लेल सीवानसं  28  क’ एसगरे प्रस्थान केलहुं |

सीवान स्टेशनपर तंग इनायतपुरी भेटलाह, हमरा विदा करैत ओ अपन कोनो मित्र-शायरक एकटा शेर सुनौलनि :

‘मुझे थकने नहीं देता है जरूरतों का पहाड़

मेरे  बच्चे  मुझे  बूढ़ा  होने  नहीं  देते’

ई शेर भरि रस्ता हमरा बझेने रहल |

(क्रमशः)

पटना / 14.10.2021

 

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