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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक 

विदेह

 

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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ज्ञानवर्द्धन कंठ

भोगी बनलाह बाघ

 

     भोगी मैथिलीमे 'बी ए' की कयलाह,बड़का भोगे भोगि रहलाह अछि।जे सभ 'एम ए' रहय ओकरा त' परफेसरीओक आस रहैक,मुदा 'बी ए- बरद'क दरद के बुझैए?मैथिलीक परफेसर भ' सकैत छी,इस्कूलक मास्टर नहि।प्राथमिक कक्षामे जँ पढ़ाइ होइतैक,त' कनी गुंजाइश भइयो सकैत रहैक।मुदा भोगी बाजथि,त' बाजथि की?कहथि त' कहथि ककरा?गुड़क मारि धोकरे जनैए।भोगी पछिला रोटी खयने रहथि। जहिया सोचलनि 'एम ए' क' लैत छी, तहिया यूनिवर्सिटीए जवाब द' देलकनि।काउंटरपरक बाबू मुँह बिदूरि कहलकनि-

"एतेक दिन कत' घास छीलैत रही? एडमिसने बन्न भ' गेल आब।पंछी चलल बासके त' जोलहा चलला घास के।"

भोगी अपन भागपर अछतैत- पछतैत दिन गिन रहल छलाह।

 नहि जानि, कहिया दिन घुरतनि! मुदा एक दिन आन्हरोक लेल इजोत होइत छैक।भोगियोक भागक द्वार खुजलनि।भेलैक ई जे नवानीक चैती-दुर्गामे 'हिन्दुस्तान सर्कस' लगलैक।ओकर टेंट लागि रहल रहैक।भोगी लग सहटिक' एकटा सईस एलनि आ पुछलकनि- 

"कतेक पढ़ल छह?"

भोगी बजलाह-"मैथिलीसँ 'बी ए' कएने बेरोजगार भेल फिफिया रहल छी।"

पुछलकनि-

"सर्कसमे काज करबह?" 

भोगी अकचका गेलाह -"आँय? सर्कसमे हम कोन काज करबैक?हम कोन काजक लोक छी?" 

ओ उत्तर देलकनि- "बाघ बन' पड़तह,नीक पाइ भेटतह।मंजूर हुअ त' मालिकसँ बात करा देबह।"

भोगी कहलथिन-"हम मनुख त' ओतेक नहिए छी,मुदा बाघ बनि जायब,से ततबो नहि छी।"

ओ कहलकनि-"तकर चिंता नहि करह।रिंग मास्टर रहैत छैक।सभटा सिखा देतौह।तों खाली 'हँ' त' कहक।"

भोगीक मोन चपचपा गेलनि।अन्हरा चाहय दूनू आँखि।मालिक हिनका राखि लेलकनि।नकली खाल ओढ़ा बाघ बना पिंजरामे ढुका देलकनि।ओहिमे एकटा अजोध बाघ पहिनेसँ बैसल रहय।ओ हिनका देखि मूड़ी उचकाक' देह जोरसँ झाड़लक।भोगीक सिट्टी-पिट्टी गुम!बरहम बाबाकेँ गोहराब' लगलाह-

"हे बरहम बाबा!एहि बेरहम बाघसँ बचाबह।बड़ी फँसान फँसल छी।आइ ई बाघ हमरा गिड़नेहे अछि।अपटी खेतमे हमर परान जा रहलए।बरहम भोज करेबह हे बरहम बाबा!अरौ तोरीक तोरी!इम्हरे आबि रहल अछि।बड्ड बरंबताह बाघ बूझि पड़ि रहलए..."

तावत ओ बाघ बाघ-बनल भोगीक लग आबि गेल रहैक।भोगीक जीह सकपंज भेल रहनि। करेज भालरि जकाँ थरथर काँपि रहल रहनि।ओ बाघ धीरे-धीरे हिनका सूँघ' लगलनि।तखन ओ अपन मुँह हिनक कान लग ल' गेलनि।भोगी-बाघ बाघ-डरे आँखि मुनि लेलनि।तखने ओ बाघ हिनक कानमे फुसफुसेलनि-"तोहूँ मैथिलीएमे 'बी ए' कयने छह की?"

 

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