logo logo  

वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

| विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

Home ]

India Flag Nepal Flag

(c)२००४-१७.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.

  •  

        

    रवि भूषण पाठक

    औझका डायरी

     शुकुल जी जायसीक प्रशंसा करैत छथिन ।भाव ई छैक मुसलमानो होइतो जायसी भारतीय कविता के एत्‍ते बूझैत छथिन ,मुसलमान होइतो जायसी हिंदू स्‍त्रीक जीवन ,प्रेम ,विरह कें एत्‍ते नीक जँका चिन्‍है छथिन ,मुसलमान होइतो जायसी अवधक लोकजीवन में प्रवेश क पाबैत छथिन ......

    जेना मुसलमान केओ होय त ऊ कविता नइ लिखै ,लिखबो करै त केवल अल्‍लाह आ कुरान पर या केवल ईरान ,तुर्किस्‍तान पर ।
    (दिनांक07 -04-17)





    मैथिली के एकटा आलोचक चाही ,आलोचक नइ नव्‍यालोचक ,नव्‍यालोचक नइ वज्रालोचक ।एहन आलोचक जे बज्‍जर सन सन बात कहै । काबिल सँ लिखबाबै , बेगारू सभ कें टरकाबै ।

                                  एहन आलोचक जेकरा मे केवल बहुज्ञता नइ रसबोध सेहो होइ ,केवल रसबोधे नइ समै-सजगता सेहो । केवल फार्मे नइ कंटेंटक प्रति सेहो समझदारी होए ।

                           एहन आलोचक जेकरा मे समैक जिम्‍मेवारी उठाबैत साहित्‍य के आगू बरहेबाक ताकति होए । एहने सन जे मिथिला आ मैथिलीक परिवर्द्धित आ संवर्धित स्‍वरूपके बूझै आ  ओकर रक्षा करै  ।एहन आलोचक जेकरा मे मैथिलीक वर्तमान साहित्‍यक दिशा गमबाक हिम्‍मत होए आ ओकरा समकालीन भारतीय साहित्‍य के जनबाक जरूरति सेहो महसूस होए ।
    (दिनांक 11 04 2017 )

    ओकरा गाब
    दियौ ,गेबाक आनन्‍द लिय दियौ ,ओकरा पर अपन अपेक्षाक पहाड़ नइ लादियौ ,ओकरा पर उपराष्‍ट्रीयताक ठप्‍पा नइ लगाबियौ ,एहन  अनेर नइ बाजियौ कि ऊ जीत जाए त मिथिला जीत गेलै आ ऊ हारि गेलै त मिथिला हारि गेलै ।

                          निश्चितरूपेण ओकरा मे आगू जेबाक हिम्‍मत आ ताकति छैक , मुदा ऐ चीजक लेल तैयार रहियौ कि ऊ जीत गेलै त ऊ राष्‍ट्रीय अपेक्षाक अनुसार अपना आप कें बदलि सकै ।ओकरा मत दियौ समर्थन दियौ आ ऐ चीजक आर्शीवाद कि ओ समग्र देशक लेल गाबि सकै ।जेना कुनो बोली राष्‍ट्रीय बनै छैक त ओ आनो बोलीक गुण आ सकारात्‍मक तत्‍व ग्रहण करैत छैक आ एक अर्थ मे ई ओइ बोलीक मृत्‍यु होइत छैक ,किएक त ओ पुरनका पंजर छोडि़ के नया रूप धारण करैत छैक ।तहिना ओ समुच्‍चा देसक लेल गाबै ,ई शुभकामना ।


                  बात एहने सन होए कि गायन कला जीतै नइ कि मिथिला ,पंजाब ,महाराष्‍ट्र या गुजरात ,ओना मॉडर्न बनियौटी एकरा संघर्ष आ क्षेत्रक संघर्ष वला रूप देबाक प्रयास करत ,मुदा हम सब संयमित रही ।आ एतबे धरि नइ मिथिला मे सब तरहक गायनक मुकम्‍मल परंपरा फेर सँ प्रारंभ होए ,ई नेशान केवल अमता ,बहेड़ी ,दरभंगा आ विद्यापति समारोहे तक सीमित नइ रहै ।ओहुना मैथिली मंच पर राम चतुर मल्लिक कें हूट केनिहार आ दुमका-झुमका कें बढ़ाबा देनिहारक कमी नइ ......



                           दिनांक 13-04-2017

    ऊ हम्‍मर कुटुम छथिन ,दियाद छथिन आ दोस छथिन।ऊ चौबीसो घंटा हेलमेट पहिरै छथिन ,केओ कुटुम देखि ने लए ,ऊ कखनो काल एकटा अंग के बेकाम क
    दए छथिन ,कहबेन त सुनता नइ ,ईशारा देबै त रूकता नइ ,अनुमान यदि लगा लेता त ह्रदयहीन भेने कुशल ।ऐ रस्‍ता बाटे नइ ,ऐ चौक पर बाटे नइ ,दस बजे के बदला मे एगारह बजे चलता आ पांच बजे के बदला मे सात बजे लौटता ।धीरे-धीरे .....केओ दे‍खि ने लए । हुनकर बदलबाक कुनो अंत नइ ,नाम ,गोत्र ,गाम ,शहर सब बदलि के अपन जेबी आ अपन स्‍टेटिक इनर्जी कें सेव करैत छथिन ।एहने केरेक्‍टर हमरे परिदृश्‍य मे नइ आहूं के वायुमंडल मे अछि  ।ऊ आ हुनका सन कतेको कतेक अपन ओकादि बदलबाक प्रतीक्षा क रहल छैक । ओका‍दि बदलिते भाषा ,भंगिमा ,टोन ,बॉडी लैंग्‍वेज सब बदलि जाइत छैक ।कखनो-कखनो ओकादि आ भाषा साथ-साथ बदलैत छैक ,कखनो-कखनो ओकादि बदलबाक प्रत्‍याशा मे भाषा आ टोन समै सँ पहिले बदलि जाइत छैक आ ओकादि बाद मे बदलै छैक ।कखनो काल दुर्भाग्‍य सँ भाषा त बदलि जाइत छैक ,मुदा ओकादि बदलबाक प्रक्रिया मे ब्रेक लागि जाइत छैक
    (दिनांक 15-04-2017)

     

     

    ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।

     

  •