प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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डॉ. शिव कुमार मिश्र (संपर्क- 9122686586)

प्रोफेसर डा. रामावतार यादव ओ हुनक विलक्षण अनुसंधान तकनीक (मिथिला भारती शोध पत्रिकाक संदर्भमे)

अंतरराष्ट्रीय लब्धप्रतिष्ठ भाषा वैज्ञानिक प्रोफेसर डा. रामावतार यादवक अनुसंधान काजक समीक्षा करबाक सामर्थ्य कोनो गंभीर भाषाविदहिसँ संभव छैक। हमरामे ई सामर्थ्य नहि जे हुनक अनुसंधान काजक समीक्षा अथवा मूल्यांकन कए सकी तथापि आशीषजीक आग्रह पर एहन गंभीर विषय पर विशेषरूपसँ मिथिला भारती शोध पत्रिकामे प्रकाशित शोध आलेखक संक्षेपमे किछु चर्चा करए चाहब।

मिथिला भारतीसँ पहिल संपर्क प्रोफेसर यादव महोदयकें 2016 मे होइत छन्हि जखन स्वर्गीय पण्डित गोविन्द झाक 'मैथिली क्रियापद-रुपावलीक मूलान्वेषण' (मिथिला भारती, भाग-3 ,2016, पृष्ठ -110-112) नामक शोध आलेख पढ़ैत छथि। प्रोफेसर यादव महोदय एहि आलेखक गंभीरतापूर्वक समीक्षा कयलन्हि। एहिमे पण्डित गोविन्द झाक कतोक तथ्यक समर्थन ओ कतोक विचारसँ कोनो संकोच बिनु कयने असहमति व्यक्त कयलन्हि। ई गवेषणात्मक समीक्षा पण्डित गोविन्द झाकें पत्रक माध्यमे प्राप्त भेलन्हि। ई पत्र जखन हमरा हाथ लागल तखन हमरा लोकनि आनंदित भेलहुँ एवं मिथिला भारतीक दोसर अंकमे (भाग-4, 2017) प्रकाशित कयल गेल। एकर प्रकाशनक पश्चात वाट्स एप पर श्रीमानसँ मिथिला भारतीक मादे चर्चा भेल। वार्ताक क्रमे श्रीमानसँ आग्रह कयल जे मिथिला भारतीकें अपनेक सहयोगक नितांत आवश्यकता छैक। ओ हमर प्रार्थना स्वीकार करैत पूर्ण सहयोगक आश्वासन प्रदान करबाक कृपा कयलनि। तहियासँ मिथिला भारतीकें हुनक सहयोग भेटि रहल अछि। बर्ख 2023 मे मैथिली साहित्य संस्थान द्वारा श्रीमानसँ आग्रह कयल गेल जे मिथिला भारतीक संपादक मंडलमे शामिल भय आशीर्वाद देल जाय तकरा हुनका द्वारा स्वीकार करबाक कृपा कयल गेल। आब मिथिला भारती शोध पत्रिका अंतरराष्ट्रीय स्तरक स्वरूप ग्रहण कय लेलक अछि। विश्वविद्यालय अनुदान आयोगक केयर लिस्टमे सम्मान सेहो भेटि चुकल अछि।

प्रोफेसर यादव महोदयक 'Metathesis in Maithili' नामक पहिल शोधालेख मिथिला भारतीमे प्रकाशित भेल (भाग-7, 178-187)। ई शोधालेख मौलिक संदर्भ पर आधारित छैक। पण्डित गोविन्द झाक पोथी ओ अन्य विद्वान सभक ग्रंथक बेस चर्चा भेल छैक एवं एहिपर तुलनात्मक अध्ययन सेहो छैक। शोध तकनीकक पूर्ण व्यवहार करैत कतोक शब्दकेँ मथि कए स्पष्ट कएल गेल छैक जाहिसँ शोधकर्ता लोकनिकें बुझबामे कनियों भांगठ नहि होनि। डाइक्रिटिकल मार्कक विलक्षणता अपूर्व छैक। डायक्रिटिकल मार्कक व्यवहार वर्तमान समयमे कम्म भए गेल छैक तैं शब्दक शुद्ध उच्चारण असंभव भय गेल छैक। मुदा प्रोफेसर यादव महोदयक शोधालेखमे डायक्रिटिकल मार्कक तकनीक अंतरराष्ट्रीय स्तरक शोधकर्तागणकें आकर्षित करैछ। एहि आलेखक संदर्भ देखला पर बुझना जाइछ जे संसारक कतोक दुर्लभ ग्रंथक अध्ययन कयल गेल छैक। एहि भागमे एकगोट पुस्तक समीक्षा सेहो हुनक प्रकाशित भेल छैक। 'The History Janakpurdham: A Study of Asceticism and The Hindu Polity: Brief Remarks' नामक छओ पृष्ठक समीक्षा (मिथिला भारती -भाग 7, पृष्ठ 213-218)अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्यकें शोधार्थीलोकनिक सोझाँ रखैत छैक। ई समीक्षा नेपालक प्रथम राष्ट्रपति डा. रामबरन यादवक सोझां पुस्तक विमोचन समारोहमे प्रोफेसर यादव महोदय द्वारा देल गेल भाषण छैक। Richard Burghart महोदय द्वारा लिखित प्रस्तुत पोथीमे कहल गेल छैक जे अठारहम शताब्दीमे वैष्णव मताबलम्बी रामानंदी लोकनि जनकपुरमे बाँस खढ ओ भीतक घर बनाय पूजा पाठ आरंभ कयलनि। कालक्रमे पजेबाक मंदिर बनाय राम सीताक पूजा पाठ आरंभ कएलनि। एहि तरहें जनकपुरधाम नामक प्रसिद्ध धर्म स्थलक स्थापना अठारहम शताब्दीक आरंभमे भेल। एहि पोथीमे एहि नगरक क्रमिक विकासक चर्चा विस्तारसँ कएल गेल छैक। नेपाल देशक प्रमुख शासक एवम् बुद्धिजीवी लोकनिक सोझाँ ई चर्चा अत्यंत तथ्यात्मक रूपमे प्रोफेसर यादव महोदय द्वारा राखल गेल छल।

मिथिलाक प्रसिद्ध ओ सभसँ पैघ पुरास्थल बलिराजगढ़क पुरातात्विक ओ ऐतिहासिक अध्ययनक क्रमे हमरा जे साक्ष्य भेटल छल ताहि आधार पर हम एहि तथ्यकें जगजियार करबाक उद्देश्यसँ एकगोट शोध आलेख तैयार कयने छलहुँ जे अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकामे प्रकाशित भेल छल ('पुरातत्व की दृष्टि में मिथिलापुरी -बलिराजगढ़', The Journal of The Bihar Research Society, Volumes 75-78,1990-92,117-123)। प्रोफेसर यादव महोदयक ई समीक्षा पढ़लाक उत्तर हमर सोच आओर दृढ़ भेल जे नेपालक जनकपुरक कोनो संबंध राजा जनकक राजधानीसँ नहि छैक।

बर्ख 2021 मे प्रोफेसर रामावतार यादव महोदयक 'A Hitherto Undiscovered and Unstudied Hand- Copied Newari Manuscript of Maithili Barahamasa Song by King Jagatprakasamalla(1643-1673CE) of Bhaktapur: A Preliminary Analysis '(मिथिला भारती- भाग- 8, 2021,88-119) नामक एकगोट विस्तृत शोधालेख प्रकाशित भेल। एहि आलेखमे राजा जगत्प्रकाशमल्लक व्यक्तित्व ओ कृतित्वक चर्चा भेल छैक। हुनका अनुसारें मैथिली भाषाक पहिल बारहमासा ई छैक जे नेवारी लिपिमे लिखल छैक। एहि हस्तलेखक प्राप्ति स्थानक उल्लेख करैत प्रोफेसर यादव महोदय द्वारा देवनागरी एवम् रोमन लिपिमे एकर रुपांतरण कएल गेल छैक जाहिसँ अंग्रेजी भाषा जे नहि जनैत छथि तिनको बुझएमे सुगम हेतन्हि। आन-आन भाषामे लिखित बारहमासासँ तुलनात्मक अध्ययन सेहो कएल गेल छैक। एहि बारहमासामे प्रयुक्त विविध प्रकारक राग ओ स्वरूपक विस्तृत विवरण ओ अध्ययन प्रस्तुत छैक। डायक्रिटिकल मार्क ओ संदर्भक तकनीक अंतरराष्ट्रीय स्तरक उपयोग कएल गेल छैक। एहि तरहें ई शोधालेख शोधज्ञ लोकनिक लेल अविस्मरणीय सिद्ध भ' सकैछ।

'The Nepal--Tirhut Connection: A Linguistic Analysis of Middle Maithili Archival Literary Texts' (मिथिला भारती, भाग-9, 2022,104-133) एवम् 'Diachronic Phonology of Maithili: Vowel Sequencing, Glide Insertion, and Diphthongization' (मिथिला भारती, भाग -9, 2022,134-156) नामक दुइ गोट शोध आलेख प्रकाशित भेल छैक। पहिल आलेखमे भारत ओ नेपालक अभिलेखागारमे संकलित मैथिली पाण्डुलिपिक संदर्भ सहित चर्चा करैत ओकर भाषायी विश्लेषण कएल गेल छैक। भारतीय ओ नेपाली भाषाविद ओ इतिहासकार लोकनिक उल्लेख करैत मध्य मैथिलीक (1600-1769) उत्पत्ति, संरचना ओ विकासक विश्लेषण कएलन्हि अछि। आकृति, लिपि, शब्द, काल, उच्चारण प्रभृतिक विस्तारसँ विश्लेषण कएलन्हि अछि। दोसर आलेख पूर्णरूपेण व्याकरण पर आधारित विश्लेषण छैक। ऐतिहासिक उच्चारणक क्रमे कतोक वैयाकरणक उल्लेख छैक। प्राचीन मैथिली (10-15म शताब्दी) भाषाक उच्चारणमे स्वर अनुक्रमणक विश्लेषण करैत चर्यापद, वर्णरत्नाकर ओ पदावलीक संबंधमे कएल गेल कतोक विद्वान सभक विचारक चर्चा छैक। तहिना मध्य ओ आधुनिक मैथिलीक स्वर अनुक्रमणक विश्लेषण ओ समीक्षा भेल छैक।

प्रोफेसर यादव महोदयक 'नेपाल राष्ट्रिय अभिलेखालय काठमांडूमे अनुरक्षित एवम् नेवार नरेश- विरचित मध्य मैथिली गीति-काव्यमे छन्दोलक्षणगुम्फित गीतक छन्दशास्त्रीय विवेचन' (मिथिला भारती, भाग -10 ,2023, 35-65) नामक आलेख प्रकाशित भेल। मिथिला भारतीमे मैथिली भाषाक ई हुनक पहिल शोधालेख छन्हि जे एहि अंकमे प्रकाशित भेल छन्हि। एहिमे गीतक उल्लेख करैत छन्दशास्त्रीय विवेचनक क्रमे गीतमे प्रयुक्त विविध प्रकारक राग ओ तालक चर्चा अछि। गीत सभक वर्णन- विश्लेषण ओ समीक्षात्मक टिप्पणी अत्यंत तथ्यात्मक ओ ज्ञानवर्धक छैक। दोसर आलेख अंग्रेजीमे प्रकाशित छन्हि। 'AUX Forms in Mid- Maithili-With Special Reference to Medieval Archival Literary Texts of Drama and Songs Composed by Newar Kings of Nepalamandala' (मिथिला भारती, भाग- 10, 2023,133-159) नामक आलेख प्रकाशित भेल अछि। एहिमे अभिलेखीय साक्ष्यक आधार पर मध्य मैथिलीक व्याकरणिक श्रेणी सभक वैज्ञानिक भाषागत विवरण प्रस्तुत भेल अछि। एहि क्रमे जगज्ज्योतिर्मल्ल, सिद्धिनरसिम्हमल्ल, जगत्प्रकाशमल्ल ओ भूपतींद्रमल्लक कतोक ग्रंथ सभ एवं मैथिली अभिलेख गीतमालाक शिलालेखमे उल्लिखित मैथिलीक सहायक स्वरूपक विवरण छैक। एहिमे अछि, थिक, छथि, छी प्रभृतिक उत्पत्ति ओ विकासक विश्लेषण अत्यंत महत्वपूर्ण अछि।

एखन धरि जतेक शोधालेख मिथिला भारतीमे प्रकाशित भेल छैक ताहि आधार पर कहल जा सकैछ जे प्रोफेसर रामावतार यादव महोदय सदृश मैथिली भाषाक लेल एतेक गंभीर अध्ययन कएनिहार प्रायः असगरे छथि। हमरा नजरिमे एहन गंभीर अध्ययन कएनिहार मैथिली भाषामे प्रायः नहिये केयो भेल छथि आ निकट भविष्यमे केयो दोसर सेहो नहि देखबामे अबैछ। अनुसंधानक तकनीक जतेक वैज्ञानिक छन्हि तहिना तथ्यपूर्ण ओ मौलिक साक्ष्य प्रस्तुत करबाक विधि अपूर्व छन्हि। साक्ष्यक सत्यताक पुष्टि करबाक विधि ओ क्षमता हुनकामे एहि अवस्थामे जे छन्हि से विरले भेटैछ। संदर्भ सूचीमे एक एक सूचनाकें शामिल केनाय अनुकरणीय अछि। तहिना सहयोग केनिहारकें धन्यवाद देबयमे पूर्ण सचेष्ट रहैत छथि। प्रूफ रीडिंग करबाक विधि सेहो अद्भुत छन्हि छोटसँ छोट त्रुटिकें ताकि ओकर निवारण करैत छथि। मैथिली भाषाक प्रति समर्पण, तथ्यात्मक अनुसंधान, संपादन, प्रूफ रीडिंग प्रभृतिक जे क्षमता प्रोफेसर यादव महोदयमे छन्हि ताहिसँ बेस सिखबाक सुअवसर हमरा भेटि रहल अछि। हमरा जनतबे मैथिली भाषाक विश्व पटल पर राखए लेल जे काज एवं समर्पण हुनक छन्हि से अद्भुत एवम् दुर्लभ अछि। परमात्मासँ प्रार्थना करैत छी जे प्रोफेसर डा. रामावतार यादव महोदय दीर्घायु होथि ओ स्वस्थ रहथि जाहिसँ बेसी समय धरि मैथिली भाषाक उपकार कए सकथि। संगहि हमरालोकनिक ज्ञानवर्धन करैत रहथि।

 

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