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रोशन जनकपुरी

समयके कथा

 

"भाग न रे बोङबहरा ! अयलौ बाप सुन"- अंगना आगूके सड़कपर रुकल गाड़मे स उतरैत सेनाके जत्था पर नजर परिते पटिया बीनैत बु ढ़िया मध्धिम स्वरमे चिचिययलै । मचन्ना पर स रोहित बारी दिस छड़प' चाहलकै, मुदा सरकारी गोली ओकरा मौका नइँ देलकै । गोली रोहितके पिठ्ठी छेदैत कर्चीके टाट छेदैत मकैबारीमे कतौ हेरा गेलै । रोहित मचन्नेके निच्चामे गुरैक गेल । बुढ़बा मुदा मकैबारीमे छड़प'मे सफल भ'गेल । ओ सेनाके एकतरफी ध्यानके फयदा उठौलक । अंगनामे बैसल बुढ़िया आ भन्सा घरक दुहाइर पर ठाढ़ ओकर बेटीके जेना बकझड़ लाइग गेल छलै ।  

 सेनाके जत्था फायर करैत मकैबारी दिस दौगल ।

कहाँ दुन बुढ़बा दौगैत रहैत त बाँइच जाइत । मुदा बूढ़ देह बेसी दूरतक दौग नइँ सकल । ओहू पर हँफनीके बिमारी । बुढ़बा मकैबारीके ओइपार आइर पर एकटा जिलेबीके गाछक निच्चा बैस गेल आ घेरा गेल आ मारल गेल । अंगनामे बुढ़िया के त खाली अवाजे सुनायल रहे । ओ त' जगता कहलकै जे 'सरबा सुन कको के माइर देलकै', तब ओ दौगल रहै । सेनाके दूटा जवान बुढ़बाके लाशके उठयने गाड़ी दिस ल'जाइत रहै । बुढ़बाके आँइख खुलले रहै, भय मिश्रित, दर्द स चियारल । आगू-पाछू डोलैत गर्दन दिस बुढ़ियाके ध्यान गेल रहै । ओकरा एक क्षणके लेल बुझयलै जेना बुढ़बा चियारले आँइख ओकरे दिस ताइक रहल छै । दूटा आओर सेना रोहितके लाशके सेहो गाड़ीके पाछू ट्रेलर पर कोनो बोरा जका फेकलक - 'धम्म' । रोहित दोसर गामक पार्टी कार्यकर्ता छल । आ गाड़ी आगू बइढ़ गेल, अरोसिया-परोसियाके सकदम्म आ बुढ़िया आ ओकर बेटीके हकरोर पारैत छोइर क'

दश वर्ष बीत गेलै अइ घटनाके । मुदा बुढ़ियाके दिमागमे अखनो ओहिना अइछ । रोहितके पिठ्ठी स बौछार मारैत लेहू, बुढ़बाके उनटा मूँहे लटकल आगू पाछू हीलैत गर्दन, ओ दर्द स चियारल आँइख, जेना अखनो बुढ़बा ओकरे दिस ताइक रहल अइछ । कतेको बेर, राइतके कोनो पहरमे ओ चेहा क' ऊठल अइछ आ  राइत भइर जगले रहिगेल अइछ ।

"गे माई ! आ, चाह पी "- भन्सा घर स बेटीके अवाज ओकरा वर्तमानक भुइँयाँ पर पटैक देलक । एकटा नम्हर साँस खीचैत ओ भन्सा घर दिस तकलक । अपने गति स पटिया बीनैत ओकर हाथ अस्थीर भ'गेल । तखने सड़क पर एकटा बुल्लू रंगके गाड़ी रुकल आ ओहिमे स उतैर क' चाइर गोटे पुलिसक संग इन्सपेक्टर अंगनामे आयल । पुछलक - "गनपति माट्साबके घर इहे हइ किने ?"- बुढ़बा मास्टर रहै ।

बुढ़िया 'हँ मे मूँड़ी हिलौलक । बेटी भन्सा घरके दुहाइर पकैरक' ठाढ़ भ' गेलै ।

"अहाँ मास्टर्नी साहेबनी छी ?" - इन्सपेक्टर मुस्काइत फेर पुछलक आ जबाबके प्रतीक्षा बिनु कयनही नमस्कार सेहो कयलक ।

बुढ़िया दुनू हाथ जोइरक' नमस्कारक जबाब देलक ।

"हमसब गणतन्त्र दिवसके अवसर पर शहीद परिवारसबके सम्मान कार्यक्रम रखले छी । अपनेहु अइतियइ त निमन होइतइ ।" - इन्सपेक्टर बाजल ।

"होत्तै । कहाँ रखले छी ?" - बुढ़िया पुछलक ।

"थने मे हइ । सबेरे चइल अइती, त निमन होइतइ ।" - आमन्त्रण पत्र दैत इन्सपेक्टर बाजल ।

"होतै, हम सबेरे पहुँच जायब ।" -बुढि़या जबाब देलक आ इन्सपेक्टर लौट गेल ।

बुढ़िया देवाल पर टाँगल बुढ़बाके फोटो दिस तकलक । गोलमोल मूँह आ नम्हर, मोट आ हँसैत आँइखबला बुढ़बा फोटोमे मुसैक रहल छल ।

"गे बुढिया ! अखनी हमरासबके गरियबै छे । कहियो जिला जबारके लोकसब फूलमाला ल'' अयतौ ।" - बुढ़ियाके याद परलै बुढ़बाके कौचर्य । ओकरा अपन गाल भीजल बुझयलै । हाथ स छूलक, नोर अपने मने आँइख स टघैर रहल छल । आँचर स ओ नोर पोछलक । "ले चाह ।" - बेटी हाथमे चाहक गिलास पकड़ा देलकै तखने । ओ देखलक बेटियो के आँइख पनियायल छल । बेटियोके मन शायद ओकरे जका व्यग्र अइछ । ओ बेटीके पिठ्ठी पर स्नेह स हाथ फेरलक । "तोहर बाप बड़का दै पुरुख छलौ ।"- ओकर ठोर बुदबुदायल । पच्छिममे सुरुजक चक्का अन्तिम साँस ल' रहल छल ।

जहिया स बुढ़बा भूमिगत भेल छल, अहिना सुरुजक चक्का डूइब गेलाक बाद लुकझुक अन्हार होइत काल अबैत छल । चाइर वर्षक बेटी, पन्द्रह वर्षक बेटा आ छोट छीन खेतक जिम्मेवारी बुढि़या के खौँझाह बनादेने छल । तैँ ओ सबबेर बुढ़बाके स्वागत गारिए स करैत छल - ''बजरखसुवा, कोइढ़फुट्टा, जन्माक' छोइर गेल, कइला अबै छै, ओम्हरे मइर जाइत', एहनेएहने । आ अंगनामे बैसल बुढ़बा मुस्काइत रहैत । बुढ़बाके अंगनामे देइख क' बुढ़िया आरो खौँझाइत -"जयबे भितरी कि रहबे अंगनेमे, अयतौ कही तोहर पुलिसबा बाप सुन त टिङ ' पाइद जयबे ।"

बुढ़बा मुस्कियाइत बजैत -" मया त हउ हमर ।"

"हँ, हँ, हमरा कोनो मया दरेग हय से !" - बुढ़िया खौँझाइत बजितै । बुढ़बा ओकर बाँहि पकैरक' भितरी ल' जइतै । घरमे बुढ़बाके छाती पर मूँड़ी राइख क' बुढ़िया कतेको बेर कानल रहय - " ई त चइल जाइ हइ । ई बालबच्चा, खेतपथार, केना चलइ हइ से हमही जनै छी । हम एगो मौगी जाइत, फेनु एकरा किछो भ' गेलै त हम कत्त भ'' रहब !"

आ बुढ़बा ओकरा लगमे खीच क' पिठ्ठी पर हाथ सोहर'बैत समझायल करै - दुनियाँजहानके बात, देश, समाज, गणतन्त्र, जनताके राज, गरिबहासबके मुक्ति, वर्ग संघर्ष, माओवाद, कीदनकीदन । बुढ़िया सब बात त नइँ बूझै, मुदा एतेक जरुर बुइझ जाइ जे ओकर बुढ़बा राजाके राजके विरोधमे लड़ै छै आ चाहैछै जे जनताके राज होइ, गरिबहाके केओ दुःख नइँ दइ ।

सबबेर एहि प्रेम प्रसंगक अर्ध विराम बु ढ़ियाक मुस्कान स होइ । ओ त धियापुताके भार, खेतीके झंझट आ पुलिसबाके डरत्रास छल जे बुढ़ियाके किचकिचाह बनादेने छल । ओकरा मनमे ई त रहै जे बुढ़बा ओकरे संगे रहैत, खेतीबारी करैत आ बालबच्चा पालैत त नीक होइतै, नइँ त ओ बूझैत छल जे ओकर बुढ़बा समाजेके लेल ड़ि रहल छल । उपर स ओ कतबो गरियबौ, ओकरा अपन बुढ़बा पर गर्व रहै । कतेको बेर अधरतियामे उइठक' , सुत्तल बुढ़बाके मूँहठान एकटक निहारैत छल । गोलमोल मूँहठानमे बुढ़बाके मोट आ नम्हर आँइख मुनलोमे हँसैत बुझाइ ओकरा । कतेकबेर भोढ़ढ़ियामे अन्हरौखे बुढ़बा उठबै छलै ओकरा । मुस्काइत गम्भीर नजर आ भाव स कहै छलै - "हमर त कोन ठीक । लौटियो सकै छी, नहियो लौट सकै छी । ई बेटा-बेटी, घरदुआर सब तोरे जिम्मा छौ कुर्थाबाली । जाबे तक जीत नइँ होतै, लड़ाई चलतै । साथीसब अयतौ त सहयोग करियही ।" - बुढ़बा ओकरा छाती स लगबै आ मकै बारीमे हेरा जाइ । ओ अनमनायलसन बैसले रहिजाइ असोरा पर, भोरका चक्का ऊग'तक, जाबे तक ओकर बेटी चाहे बेटा टोइक नइँ दइ ।

बुढ़बाके मरलाके किछु दिनतक त जेना समये सुन्न भ'गेल होइ बुढ़ियाके लेल । किछु दिन त ओ बदहवास जका रहल । एक दिन लुकझुक अन्हारमे चाइर गोटे मकै बारी स अंगनामे अयलै । बुढ़िया अकचकायल आ डेरायल सेहो । मुदा एकटा अधबयसु पुरुष बाजल - " भाउजू ! नइँ डेराउ, हमसब मास्साहेबके साथी छी । राइत भइर रहब, भोरे चइल जायब ।"

बुढ़बा मोन पइर गेलै बुढ़ियाके -"साथीसब अयतौ त सहयोग करियही ।"

"खाना ख'बै कि न ?" -बुढ़िया पुछलक ।

"हँ, हमसब दिने स भुखले छी ।" - ओ अधबयसु बाजल ।

बुढि़या खाना बनयलक आ खुअयलक । अधरतिया तक ओ अधबयसु, बुढ़िया, ओकर बेटी, बेटा बतियाइत रहल । घरदुआरके बात, देशविदेश, राजा, राजनीतिक पार्टीसब, धनीगरीब, गणतन्त्र, जनताके राज, दुनियाँजहानके बात । ओहिना जेना ओकर बुढ़बा बतियायल करै । ओकरा बुढ़बा मोन पइर गेलै । मनके भीतर बर्फ जेना टुइट रहल छल । जमल समय जेना पिघैल रहल छल । ओ आँचरक कोर स नोर  पोछलक ।

"भाउजू, दाजू महान छेलै । गरीबगुरुबाके खातिर शहीद भ्या'गेलै । हमसब त मुरुख गरीब किसान छेलियै । दाजुए हमरासबके सिखेलकै । हमसब लड़बै भाउजू ! जाबेतक देशमे गणतन्त्र आ ओतबे नइँ जनताके राज नइँ एतै, हमसब लड़बै । चाहे जत्ते शहीद होब' परइ । देखै छी भाउजू ! हमरसबके पार्टी एक दिस छै आ बाँकीसब दोसर दिस । ओकरासबके गरीब जनताके कोनो मतलब नइँ छै । सब राजाके दास भ' गेल छै आ विदेशीके दलाल । लेकिन जनताके आगूमे किओ नइँ टिकतै । देखबै भाउजू, एक न एक दिन गरीब जनताके राज अयबे करतै .......।"- अधबयसू बजैत जा रहल छल । बुढ़बाके स्मृति बुढ़ियाके भीतर स आर्द्र आ उद्दिग्न बनारहल छल । बेरबेर नोराइत आँइख पोछैत बुढ़िया बाजल - "राइत बेसी भ'गेलै बौआ । जाउ सतूग' सब गोरे, फेन भोरे जाहू परत ।"

ओ सब सूत' चइल गेल । ओ राइत असोरे पर सुत्तल बुढ़िया अन्हारेमे निःशब्द सुबुइकसुबुइक क' खूब कानल । ओकर मन भइर बुढ़बाके स्मृति चित्र भरल छल ।

अन्हरौखेमे बुढ़ियाके फुसफुसाइत स्वरमे केओ उठौलकै -" भाउजू, हमसब जाइछी । दाजू त शहीद भ्या' गेलै । ऊ लौट के त नइँ अ'तै । लेकिन हमसब अहीँके धीयापुता छी । जखनी जरुरी परत, जगताके दुआरा खबर पठायब । ऊ पार्टीके आदमी छै । हमसब एम्हरेओम्हरे घूमैत रहै छी ।"- अधबयसू पुरुष प्रणाम कयलक आ चारुगोटे मकैबारीमे पैसगेल । बुढ़िया बहुत देर तक असोरे पर बैसल रहिगेल । सुरुजक चक्का पुरुबमे उग' लागल रहै । ओ देखलक, मोटका आ हँसैत आँइखबला बुढ़बा फोटोमे मुस्का रहल छल ।

पता नइँ किया, ओइ दिन स बुढ़ियाके धैरज बन्हा गेलै । बीचमे पुलिसबासब आइबक' हरान कर' लगलै त ओ बेटोके पार्टीएमे पठादेलक । ओ अधबयसू कामरेडसंगे ओकर बेटा ओकरा गोर लाइग क' जखन मकै बारीमे पैसैत रहइ, तखन ओकर करेज चनकल रहै, मुदा ओ कइस क' मनके बन्हलक । ओ बुढ़बाके फोटो दिस तकलक । बुढ़बाके स्मृति आब ओकरा पीड़ा नइँ, प्रेरणा जका भ'गेल छलै । 'हजारौ हजारके बेटा छै त किछु नइँ, हमर बेटा छै त की भेलै । कोनो खराब काम नइँ, नीके काममे छ ओकर बेटा ।' जनताके राज लाब'के सपना आब ओहो देख' लाग' छल ।

जइ दिन गणतन्त्र घोषणा भेलै, ओकरा बुझयलै जे सपना पूरा भ'गेलै । ओइ दिन ओ कानल रहे । ओकरा बुझायल रहइ फोटोमे नइँ, ओकरे लगमे ठाढ़ भ'' हँइस रहल छै ओकर बुढ़बा । 

किछु दिनक बाद ओकर बेटो लौट आयल रहै । ओकर अंगना आब भरल रहै छल लोकसब स । ओकर बेटा आब खाली गामेके नइँ क्षेत्रेके नेता भ'गेल छल । बुढ़बे जका गोलमोल मूँहठानबला ओकर बेटा आब बापे जका देशदुनियाँके बात कर' लागल छल । जगता त जेना हरदम सटियायल रहै छलै । कहियो सुनसान रह'बला ओकर आंगनक आगूमे मोटरसाइकल आ गाड़सब लाग' लागल छलै । लोक सबहक आबाजाहीमे भोर स साँझ कखनी भ'जाई से पते नइँ चलै ।

"चाह पीले ? गिलास ला ।" - बेटीके आवाज ओकरा फेर वर्तमानमे ठाढ़ क' देलकै । अन्हार गहीँर भेल जा रहल छल । ओकर बेटीद्वारा बारल गेल डिबिया आ लालटेनक सीमित इजोत अन्हार स लइड़ रहल छल ।

गाममे पार्टी कार्यालय खुललाके बाद किछु महिना स ओकर बेटा ओम्हरे बैस' लागल छल । तैँ आब अंगनामे भी़ कम आ प्रायः नहिए जका रहैत छल । सड़क पर एकटा मोटरसाइकल अस्थीर भेल, आ ओकर बेटा अंगनामे प्रवेश कयलकै । ओ रुकल नइँ, सोझे कोठरी दिस जा रहल छल ।

"लबका निस्पेटर आइल रहलैय । गनतन्तर दिवसके कारकरममे हमरो आबेके कहैत रहलैय ।" - बुढ़िया बाजल ।

"हँ, चइल जइयही ।"- अपने गतिमे ओकर बेटा बाजल । ओकरा लगलै  बेटाके पैर लड़खड़ा रहल अइछ ।

"बिहान तू रहबिही कि न ?" - बुढ़िया पुछलक

"हँ, हमहूँ रहबै ।" - कहैत, ओकर बेटा धड़ाक् स केबारी बन्द क' लेलक ।

"केना अन्हारेमे सूइत रहलै । लमटेनो त बाइर लितै ।" - बुढ़िया खौँझाइत बाजल । किछु दिन स लगातार अहिना भ' रहल छल । बुढ़ियाके नइँ नीक लगलै । ओ परोसियाके हाक पारलकै - "रे जगता !"

"हँ काकी ! कथी कहै छे ?" - जगता अयलै ।

"रे ई छौँड़ाके कथी भ'गेल हइ ? राइत क' अतौ, 'तौ न पीतौ, पट् द' केबारी लगा लेतौ ।"

"हमरा नइँ बूझल हउ काकी, आब हमरा संगे कहाँ रहैहउ, आब त ऊ बड़का लोकसुन् जरे रहैहउ" - जगता जबाब देलक ।

बुढ़िया चुप्पे रहल । मन मुदा व्यग्र भ'गेल छल । ओकरा साँसमे किछु दिक्कत महसूस भेलै । किछु दिन स हँफनी बइढ़ गेल छलै , बुढ़बे जका । गोटी खयलक, किछु ठीक बुझयलै, मुदा मन अशान्ते छल । ओकरा ओ अधबयसु कामरेड मोन पइर गेलै । एक दिन दिनेमे ओ आयल रहै । बुढ़िया ओकरा चाह देलकै ।

"गणतन्त्र त अयलै, लेकिन सोँचल सन के नइँ भेलै भाउजू ! नेतासब बिगैड़ गेलै, बुझाइछै आरो लड़' परतै"- ओ बाजल रहे ।

बुढ़ियोके नीक नइँ लाइग रहल छल, तैयो ओ बाजल -"गनतन्तर त आइब गेलै, आब कथिला लड़बै ?"

"नइँ बुझलियै भाउजू , गणतन्त्र त आइब गेलै, लेकिन नेतासब बुझाइछै जुगजुगके भुखायल बाघ । गरीब जनताके कत्त हित करतै, उनटे सब  अपने घर भर'मे लागल छै । अधबयसू कामरेड मनक पीड़ा उझिललक ।

" त आब की करबै ?" - बुढ़िया अबोध प्रश्न कयलक ।

"करबै की भाउजू ! दाजू एक्केटा बात कहने छेलै, जनताके राज आब'तक आन कोनो विकल्प नइँ छै । पहिने त नेतासबके सुधार'के कोशिस करबै । नइँ सुधरतै त संघर्ष करबै ।" - अधबयसू अपन निष्ठा, प्रतिबद्धता आ संकल्प प्रस्तुत कयलक । बुढि़या चुप्पे रहल । ओ अधबयसू फेर उदास स्वरमे बाजल - "एकटा बात कहू भाउजू ! बौवोके संघत बिगैर रहल छै । ओकरा पर धियान देब' परतै । आखिर गनपत मास्साहेबके बड़का नाम छेलै ।"

जबाब नइँ देने रहे बुढ़िया, मुदा किछु दिन स ओकरो अहिना बुझा रहल छल । आई किछु बेसिए बुझायल । गुनधुनाइत बुढ़िया राइतमे कखन निन्न परल से बुझबे नइँ कयलक । ओेहि राइत सपनामे कखनो हँसैत, त कखनो दर्द स आँइख चियारने बुढ़बा, कखनो बहुत आदमीके भीड़मे भोज खाइत हँसैत ओकर बेटा, त कखनो भलभल लेहू बहैत रोहितके लाश, कखनो झण्डासब नेने बहुत आदमीके भीड़, त कखनो गाड़ीसब पर दौगैत सेनापुलिससब बुढ़ियाके कखनो खुशी त कखनो दुःखी करैत रहल

बुढि़या कने देरिए स सूतल छल, तैँ उठबो कयल कने देरिए स । पुरुबमे ललौन पसैर रहल छल । मुदा अकास आई किछु मेघौन सेहो बुझा रहल छल । जेना सुरुजक ललौनके किछु बादलके टुकड़ा झाँ'के कोशीस क'रहल हो, अकास किछु एहने बुझा रहल छल ।

आठ बजे जगता अयलै -" काकी ! जयबे थना दिस ?"

"हँ, चल । हम तोरे रस्ता तकै छलियौ ।"- बुढ़िया बाजल आ जगता संगे आंगन स निकैल गेल ।

चौक पर खासे चहलपहल नइँ रहै, लेकिन थानाके देवालसब तूलबैनर स छारल रहै । ओ देखलक परमेसरा पानबला, गंगबा हलुवाई, रतना हजाम अपनअपन काममे व्यस्त छल, आने दिन जका । बुढ़ियाके देइख क' गंगबा प्रणाम कयलकै ।

"गनतन्तर दिवसमे नइँ जइबही रे गंगबा ?"- बुढ़िया ओकरा आशीष दैत पुछलक

", अपनेही सुन जाउ माहटर्नी चाची । अब्भी थनेमे गणतन्त्र अ'लैय । हमरा बहुते काम हय । चाह पुगाबे त हम आइए जायब ।"- गंगबाके मुस्कानमे कटाक्ष बुझायल बुढ़ियाके । बिना जबाब देने ओ थानामे पैस गेल । ओत्त सामियानामे सजलधजल मंच बनल छल । इन्सपेक्टर मुस्काइत ओकरा प्रणाम कयलक आ अगिलका लाइनमे कुर्सीपर बैसादेलकै । जगता पाछुए बैसगेल । "अगाड़ी आ न !"- बुढ़ियाके बजौलाके बादो जगता आगू नइँ यल । बुढ़िया नजर दौगयलक, ओकर बेटा अखनो धइर नइँ आयल छल । बुढ़ियाके साँस किछु बढ़ल बुझा रहल छल । हँफनी किछु दिन स बेसिए परेशान कयने छल । बेटा रहैत त दबाई कीन क' लाइब देब'ला कह' मन छल ओकर । ''रहौक, आब कार्यक्रमके बादे दबाई खायब' - बुढ़िया मनेमन सोचलक ।

कार्यक्रम शुरु भेल । बुढ़ियाके नइँ नीक लगलै । मंचपर ओहोसब छल जे पंचायतीकालमे राजाके विरोध कर'बलाके मरबयने छल, ओहोसब छल जे गणतन्त्रके लेल हथियार उठाब'बला सबके मारनेमरबयने छल, आ ओहोसब छल जे गणतन्त्रके पक्षमे लड़ल छल । सीडियो प्रमुख अतीथि छल । बुढ़िया बगलमे बैसलसंगे खौँझ उतारलक -"धौर, कोनो नेता न रहलैय, जे सीडियोके परमुख अतीथि बनलकैय ।"

"ई सरकारी गणतन्त्र हइ मास्टर्नी साहेबनी !"-बगलबला शायद मजाकिया छल । ई सब देइख क" बुढ़ियाके मन तीत भ' रहल छल । कार्यक्रमके बीचमे ओकर बेटा आयल । ओकरा मंचपर बैसाओल गेल । किछुकालक बाद उद्घोषक घोषणा कयलक जे प्रमुख अतिथि द्वन्द पीडि़तसबके सरकार दिस स राहत प्रदान करत । "ई द्वन्द पीडि़त कथी होइछै ?"- बगलबला स बुढ़िया पुछलक

" राजा आ पुरना सरकारसंगेके लड़ाईमे जेसब मारल गेलै से सब ।"-बगलबला समझाब' के कोशीस कयलक ।

"विरोध करेबला सुन से मारल गेलै से कि सरकार मारलकै सेहो सुन ?"- बुढ़िया आशंकित प्रश्न कयलक

"दुनू !"-बगलबला बाजल ।

"त शहीद के भेलै ?"-बुढ़िया फेर प्रश्न कयलक ।

"आब.....आब....।"-बगलबलाके आगू नइँ फुरयलै -"....आब सरकार अहिना कहै छै ।"-हँसैत ओ बाजल । देख'मे ओ पढ़ललिखल बुझाइत छल । बुढि़याके मनमे किछु खौल' लागल छल । सीडियो मंचपर 'द्वन्द पीडि़त'सबके साड़ीधोती आ राहत र 'प्रदान' 'रहल छल । उद्घोषक बुढ़ियाके नाम बजौलक । ओकरा ऊठ'के मन नइँ भेलै । उद्घोषक फेर नाम बजौलक । "अपनेके नाम बजबैय मास्टर्नी साहेबनी, जाउ न !"-बगलबला ओकरा कहलक । मंचपर स ओकर बेटा हाथ हिलाक' ओकरा बजारहल छल । ओ धीरेधीरे मंचपर पहुँचल । सीडियो मुस्काइत साड़ीके पैकेट आ सरकारी राहत रकम ओकरा दिस बढ़ौलक । बुढ़िया बाजल -"हम पहिने किछु बोलब " । सीडियोके आँइखमे किछु आशंका आ अप्रसन्नता छल, तैयो ओ माइक लग स हइट गेल । बुढ़ियाके कन्ठमे जेना गोला अटैक रहल छल । मनके व्यग्रता, आक्रोश आ घुरमैत बातसब स छाती धक्धक् क'रहल छल । ओकरा अपन साँस सेहो बढ़ल बुझयलै । अपनाके सम्हारैत बुढ़िया माइक पकरलक -"हमर बुढ़बा माहटर साहेब जहिया जीबैत रहै, हमरा कहलकै जे हम मइर जबौ त  तोरा शहीदके घरबाली कहतौ । लोकसुन सम्मान करतौ । ऊ रजाके बिरुध लड़लै । रजाके पुलिससेनासुन ओकरा माइर देलकै । रजासंगेके लड़ाईमे बहुते गोरे मरलै । रजाके बचाबेबला कुछके करान्तीकारीसुन मारलकै आ बहुतेके रजाके सेनासुन । हमर बुढ़बा कहै जे करान्तीकारीसुन मारल जाइहइ त शहीद होइ हइ । ई निस्पेटरो काइल्ह सियामे हमरा ओइय गेल रहे त कहलक शहीद परिवारके सम्मान कार्यक्रम रखले छी । की यौ निस्पेटर साहेब ......" - बुढ़िया इन्सपेक्टर दिस तकलक । इन्सपेक्टरके किछु नइँ फुरयलै, ओ अपने मनेमने बुदबुदायल -'सरकार द्वन्द पीडि़ते कहै हइ त.....।'

बुढ़िया जेना अचानक बहुत बुधियार भ'गेल छल । ओ आगू बाजल "......रजाके बचाब'बला जे सब मारल गेलै, ओकरा परिवारके सरकार तोकभरोस देलकै, ई बढि़याँ बात हइ । लेकिन जे सुन रजाके विरोधमे आ जनताके पक्षमे लड़लै आ मरलै, ओकर परिवारसुन खाली द्वन्द पीडि़त नइँ शहीद परिवार हइ । हमर बुढ़बा लड़लै आ मरलै त ई गनतन्तर अ'लैय । ऊ शहीद भेलै । हम त मुरुख छी, अहाँसुन पढ़लहबा आ बुधियार सुन छी । जनतोके खातिर मरेबला , गनतन्तरोके खातिर मरेबला आ  बढि़याँ कामके खातिर मरेबला खाली द्वन्द पीडि़ते होतै त शहीद के होतै ?.......।"

गणतन्त्रके कार्यक्रमके जेना ठन्ढी माइर देने छल । बुढि़या बजैत जा रहल छल -"......जदी हमर बुढ़बासुन शहीद न हइ, आ हमसुन खाली द्वन्द पीडि़ते परिवार छी त हमरा सुन ला अखनी गनतन्तर आब'के बाँकिए हइ । ठिके कहै छलै गंगबा हलुवाई जे अखुनी खाली थनेमे गनतन्तर अ'लैय । सीडियो साहेबके लागि, निस्पेटर साहेबके लागि । सबके लागि गनतन्तर आयल रहितै त थनामे नइँ, चौक पर कारकरम होइतै । गंगबा हलुवाई, रतन हजाम, परमेसरा पानबला सुन सेहो खुशी मनइतइ । सीडियो साहेब ! अपनेके, अपनेके गनतन्तरके धनबाद जे हमरा बोलइली । हम खाली द्वन्द पीडि़त नइँ छी । जइ दिन रतना हजाम सुनके गनतन्तरके सरकार अ'तै, ओइ दिन जरुरे हमरा बुढ़बाके शहीद कहतै आ हमरा शहीद परिवार कहतै । अभित्ता ई समानसुन हम नइँ लेब । सबके परनाम ।"

मंचपर आ निच्चा, लोकसबके बकझड़ लागले रहै । बुढ़िया मंचपर नजर दौगयलक । ओकर बेटा मूँड़ निहुरयने बैसल छल । ओ धीरेधीरे मंच स निच्चा उतैर गेल । ओकरा अपनेपर आश्चर्य लाइग रहल छल , एतेक बात कना कहिगेल, तेज भ'रहल साँसके बावजूदो । साँसके गति किछु बेसिए बइढ़ रहल बुझयल । कहुना मंच स उतैर त गेल, मुदा आब डेग उठयनाई पहाड़ बुझा रहल छल । आब त बकारो फुटनाई मोसकिल बुझा रहल छल । ओ हाथ स जगताके अपना लग आब'के ईशारा कयलक । बुढ़ियाके भाषण करैत देइख क' जगताके सेहो चकबिदोर लाइग गेल छल । अचानक ओकर भक्क टूटल आ ओ दौगल । बुढ़ियाके स्थिति बिगैड़ रहल छल । ओकर साँसक गति असामान्य भ'गेल, आँइख सेहो उपरनिच्चा कर' लागल छल । ओकरा लगलै कहीँ ओ मइर नइँ जाय, लेकिन ओकरा मनमे अपन कामक प्रति सन्तोष छलै । लेकिन पीड़ा सेहो । ओकर बुढ़बा अखनो तक शहीद नइँ छ, गणतन्त्र अयलाक बादो । ई केकर गणतन्त्र छै ? जगता समयपर नइँ पहुँचैत त बुढ़िया निच्चेमे खइस परि । जगता कोरामे लोइक लेलक । किछु कालक लेल कार्यक्रम बाधित भ'गेलै । खबर थाना स बहरा सेहो पसैर गेलै । परमेसरा, गंगबा आ रतना आ आरो लोकसब आएल । बुढ़ियाके उठाक' हेल्थ पोस्ट तक पहुँचायल गेल । हँफनी शायद अन्तिम दम लगा रहल छल । अधमुनायल आँइख स देखलक बुढ़िया । जगता, रतनासबके पाछूमे ठाढ़ ओकर बेटा डाक्टर स बतिया रहल छल । बुढ़ियाके माथा सुन्न परल जा रहल छल । कन्ठमे गोला बढ़ले जा रहल छल । ओकरा लगल ओ मइर रहल छ । क्षण भइरके लेल ओकर मन भेलै जे ओकर बुढ़बाके अधबयसु साथीके देखैत । फेर बुढ़बाके मोट आ हँसैत आँइखबला चित्र अभरलै, मुदा निमिष मात्रके लेल । कन्ठमे गोला आओर बइढ़ गेल, सउँसे देह जेना अपस्याँत भ' रहल ह । ओकरा अपन गर्दन लटकल बुझयलै, शायद केओ ओकर माथक तर स तकिया हटा देने छल । ओकरा मोन परलै भलभल लेहू बहैत रोहितक लाश आ फेर स्मृति पटलपर अभरलै सेनासबहक कान्ह पर ओकर बुढ़बाके एम्हरओम्हर झूलैत गर्दन आ दर्द स चियारल आँइख, जेना ओकरे दिस तकैत हो निरन्तर.....निरन्तर .....।

गंगबा बजलै -"माहटर्नी चाचीके दम्मा छलै । ई बड़ खतरनाक बिमारी होइ हइ । मौके नइँ दइ हइ ।"

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दोसर दिन ।

एकटा गाममे बुढ़बाके अधबयसु साथी अपन साथीसब संगे बैसल छल । ओ बाजल -"काइल्ह गणतन्त्र दिवसके दिन माहटर्नी भाउजूके देहान्त भ्या'गेलै । साथीसब, गणतन्त्रके लड़ाईमे  ओ बड़ सहयोगी छेलै । आउ सब गोटे मिलिक' ओकरा श्रद्धान्जली अर्पण करी !"

आ  बुढ़ियाके श्रद्धान्जलीमे सबहक मुट्टी आकाश दिस उठल । ओहिमे जगता सेहो छल आ परमेसरा, गंगबा आ रतना हजाम सेहो।

जनकपुर धाम्

 विक्रम सम्वत २०७०१ 


 

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