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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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इरा मल्लिक

७ टा श्रृन्गार गीत

लs चलु नदी के पार सखि,

ओहि पार हमर प्रियतम छैथ।

हम केश सजेलौँ गजरा सँ,

नयन लगेलौँ कजरा तँ,

लै अधरकली के लाली सँ,

भेल लाज सँ गाल गुलाबी तँ,

अहाँ धरू एखन पतवार सखी,

लs चलु प्रियतम के गाम सखी।

सजि धजि के नयन बिछैने छलहुँ,

नयनन मेँ सपन सजैने छलहुँ,

तड़पैत अछि आकुल व्याकुल मन,

इहो पीर नै सहत हमर तन मन,

अहाँ करु किछ जतन उपाय सखि,

लs चलु प्रियतम के ठाँम सखी।

प्रियतम जोहै छैथ बाट हमर,

बैरिन भेल रैन, नदी के लहर,

तरिणी तट नौका बन्हल पड़ल,

नाविक सुतल निसभेर बनल.

अहाँ करु नहिँ एको छन देर सखी,

नाविक के तुरत जगाउ सखी।

लs चलु नदी के पार सखी,

ओहि पार हमर प्रियतम छैथ।

 

ओहि राति!

ओहि राति ! सपन में अयला सजना !

बिहुँसैत अधर भीजल नयना!

ओहि राति! सपन में अयला सजना!

नहुँ नहुँ दीप जरय ओहि प्रीतमहल,

हम बाती मधुर बनल सजना!

ओहि राति ! सपन में अयला सजना!

पिपासित छल मन! तन थिरकि रहल !

तकय चानक दिस चकोर नयना !

ओहि राति! सपन में अयला सजना !

वन कानन मन विरहिन पपीहा !

पीउ पुकारि रहल काँपय गगना !

ओहि राति! सपन में अयला सजना !

प्रीतकुँज जखन कुहकल कोयली!

आधे राति बिखरि गेल भोर जेना !

साँस उसाँस सुरभित सुरभित !

महुआ मादक बौरायल मना !

ओहि राति ! सपन में अयला सजना !

ओह!!

ओहि राति सपन में अयला सजना !!

 

अहाँ कहै छी ,

बैसू लग मेँ, नीक लगैये।

नेह नयन निहारब सजना,

बड नीक लगैये।

हाथ केँ हाथ सँओ साथ मिलल,

जखन पयलौँ नेह अहाँके,

जीवन डोर मेँ बान्हि पिया,

सोहागिन बनलौँ अहाँके,

अहाँ हँसै छी सौँसे घर आब ,

झिलमिल चाँद लगैये,

नेह नयन निहारब सजना,

बड नीक लगैये।

सुध बुधि नहिँ अछि अपन आब तेँ,

मुखड़ा देखि अहाँके,

सिँगार अहीँ छी,

साज अहीँ, पिया!

प्यार बसल अँगना मेँ,

अकछ करै छी पिया हमरा ,

तहियो बड नीक लगै छी,

घर मेँ होली, दशमी, दिवाली,

निशदिन आब लगैये।

अहाँ कहै छी,

बैसु लग मेँ, बड नीक लगैये।

नेह नयन निहारब सजना,

बड नीक लगैये।

साँच हमर मीत अछि!

साँच हमर मीत अछि!

विपति कष्ट हानि लाभ,

सबके कसौटी मेँ,

कसल हमर मीत अछि,

साँच हमर मीत अछि!

जीवन के दू बाट मेँ,

एक गली हार तँ,

दोसर गली जीत अछि,

अहि दू गली मेँ देखु,

जीत हमर मीत अछि,

साँच हमर मीत अछि!

नहिँ स्वार्थ नहिँ लोभ,

नहिँ दंभ नहिँ छोभ,

अहि सबसे ओ बहुत दूर,

प्रीतक रीत मेँ हुनक,

नहिँ ओर कोनो छोर छै

साँच हमर मीत अछि!

सूर्य के किरण सन,

केसर के फूल सन,

सुँदरता आ उष्मा सौँ,

परिपूरित हमर मीत अछि,

साँच हमर मीत अछि!

जीवन के अहि तपोवन मेँ,

शान्त स्वच्छ पर्णकुटीर,

क्लान्त थकित मन जतय,

पावय सुख अनँत अछि,

साँच हमर मीत अछि!

मैत्री अछि अमूल्य चीज,

नैसर्गिक जगत के,

विहुँसैत ठोर के,

मधुर रसधार बनल,

गान हमर मीत अछि,

साँचे कहैत छी ,

प्राण हमर मीत अछि,

सुनु!

साँच हमर मीत अछि!

साँच हमर मीत अछि!!!!!

 

पिया के घर!

सुँदर चौखट,

फूलक बेल ,

सुँदर आँगन,

मन के आँगन,

हमर अति चँचल!

सिँदूर भरल सिउथ,

मेँहदी रचल हाथ,

सिहकैत तन,

लाज भरल,

बड्ड मीठ मुस्कान!

मिठास भरल

घरभरि के प्यार,

अरमान नया,

प्रीत नया,

मीठ मनुहार!

कजरारे नयन,

सपन सुँदर,

करोट लैत,

रिश्ता के बैन!

मिलन के रुत,

सपना के सेज,

मनभावन रैन,

चूड़ी के खनखन,

मदमस्त पाजेब,

गीत गबै रुनझुन रुनझुन!

गजरा के गप्प,

कजरा के गप्प,

नेह भरल ,

शरारत प्यारक गप्प,

तनमन के गप्प,

गुमशुम गुमशुम,

भोर नया,

शबनम शबनम!

गजब तोहर रूप गजब तोहर सिँगार गे छौँरी,

तैपर तिरछी नजरिया मारै सौ सौ कटार गे छौँरी।

एहन बालि छौ उमिरिया कोना लचकै छौ कमरिया,

एना चलभि बीच बजरिया मरतै सँसार गै छौँरी।

छौ ठोर गुलाबी बसँती तोहर गाल गुलाबी बसँती,

सुँदर बदन तोहर छौ गुलाब के भँडार गै छौँरी।

गोरिया रँग तोहर बेजोड़ केहन मारै छौ इजोर,

चकाचक चढ़ल जुआनी पर मिटौ सँसार गै छौँरी।

नभ के आँगन मेँ एखन,

चाँद के अबइया छै।

नभ के------!

विस्तृत नभ नील वर्णी,

शाँत नि:शब्द भेल,

झिलमिल तरेगण मिल,

एकसँग बिहुँसि गेल,

स्वागत मेँ चाँद के,

चाँद के अबइया छै,

नभ के आँगन मेँ देखु,

चाँद के अबइया छै,

नभ ------!

दिवस बितल , भेल साँझ,

साँझ के कपाट खोलि,

रत्नजड़ित साड़ी मेँ,

सलज्ज चाँद प्रगट भेल,

सोलह कलासँ पूर्णचँद्र,

अमृत बरसाबय छै,

चाँदनी धवल छटाँ सँ,

दिगन्त हरसाबय छै,

चाँद के अबइया छै,

नभ के आँगन मेँ एखन,

चाँद के अबइया छै,

नभ -------!

 

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