logo   

वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक   

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

Home ]

 

India FlagNepal Flag

(c)२००४-२०२१.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

 

मुन्नाजी

 

बीहनि कथाक आधार स्तम्भ छलाह- श्री राज

 

प्रथम पुण्यतिथि १ अगस्त २०२१पर मोन पाड़ैत

 

 

अपन आखर ,अपन बाट। साहित्य संवर्द्धन लेल ककरो बाट जोहब हुनकर आदति सं बहरीक चीज छल।पठन- पाठन आ लेखन में मस्त! जमीन परहक लोकक पीड़ा देखार करबाक जेना भारवाहक होइथ।सदिखन  आम रचनाकारक भीड़ सं विलग अपन बात राखब एकमात्र उद्देश्य में लीन देखल जाइथ।ओ साहित्य सृजन स्वान्त सुखाय लेल नै,पर पीड़ा हरनाय लेल करैत रहला।हुनकर गमैया सोच, शब्द पाठककें बन्हने रहैत छल।

 

               ओहने सोचक परिणाम छल मैथिली साहित्यक एकमात्र अपन विधा-" बीहनि कथा "। जकरा कतेको बरख धरि मगजक शिरा के खिरबैत साहित्यक जमीन पर बैसा छोड़लनि।1991सं चलि अबैत विमर्श मे सर्वसम्मति सं 1995मे विधाक मूर्त रूप में सोझां आबि सकल।ओना त' शोधक क्रम में एहेन कथाक प्रादुर्भाव मिथिला  मिहिरक 1937क अंक-2सं भेल भेटैछ।मुदा ओ एखन ओहने अइछ जेना मानवीय उत्पत्तिक समय 25-30लाख वर्ष पूर्वक मानल जाइछ मुदा ओ पूर्णत: मनुक्खे छी तकर निश्तुकी 5लाख वर्ष पूर्व मात्रक।

 

एकान्त वास हुनक आदति मे समएल छल।मुदा विचारें दसगरदा हेबा मे रूचि रखै छलाह! हम दिल्ली सं जखन गाम  जाइ त' अपन घरक बाट में पहिने हिनके घर पड़ैए,ओत' विलमैत जाइ।मारिते रास गप कोनो नव बिन्दु पर पहुंचाबए। गपक क्रम में पूछि दियैन - भाई, जिनका सं अपनेकें गप होइए तिनका लग ऐ विधाक चर्च/ पसार नै करै छियै ? छुटिते कहथि- आगन्तुक मे सं बेसी लोक सोझां अबिते साष्टांग करै छथि आ दलान सं बहराइते अदखोइ- बदखोइ,कुचिष्टा।मुन्नाजी, इ विधा,विषय गहींर आ गम्भीर लोक लेल छै।एकरा ओहोन उठल्लू लोकक बीच सझिया करै के सोचिए करेजा कांपि उठए तें मौन रहब उचित  बुझी।

 

1995 सं विधिवत समवेत प्रयासें यात्रारत इ विधा आइ राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर अपन आसन जमा लेलक।अफसोस जे बीहनिक झमटगर होइत रूप देखबा लेल नै रहला।

 

साहित्य ककरो वैयक्तिक वा पैतृक संपत्ति नै होइछ।तें कोनो विधाक कियो प्रतिपादक/आविष्कारक  नै कहा सकाइछ।कोनो विधा समवेत सहयोगे भेल विकासक फल थिक ,तें बीहनि कथा कें सेहो ओही नजरिये देखल जा सकैए।ऐ विधाक स्थापना आ विकास मे श्रीराजक कृत्य सं विद्यापतिक पछाति उएह टा चिरकालिक भ' सकलाह। 

जेना अन्य रचना सं विलग विद्यापति, मैथिली गीत लए अमर भेलाह,तहिना बीहनि कथाक संग' श्रीराजक नाम अक्षुण्ण रहतनि।शेष कथाकार हुनक नीचला पांति मे बुझू।        सादर नमन!

 

 

 

रचनापर अपन मतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।