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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१७.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

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बृषेश चन्द्र लाल- बुद्धिचौ


टोलक अग्रज राम बहादुर हमर बनैत घरक निरीक्षण करैत बजलाह – ‘घर बनवैत छह तँ आब तोरा बुधि अएतह ! बिना सोच आ विश्लेषणकेँ, तकरबाद निष्कर्षकेँ आ तखन फेर योजना, साधनक सङ्गोर, समन्वय आ कार्यान्वयनकेँ घर नइ बनैत छैक !! छोट गड़बड़ी सभ किछु गड़बड़ करिते जाइत छैक । कोन काज पहिने आ फेर कोन तकरबाद सेहो घोरिएक’ सोचय पड़ैत छैक । नइ तँ नोक्साने परिणाम ! .... बुद्धिबङ्गारा (बद्धिचौ) निकललह ?...”
हम कहलिअन्हि – “ भाईजी निकलएकाल ततेक ने फारए जे डाक्टरलग जाए पड़ल । प्रवीणमा जड़िसँ उखारि देलक !”
रामदाई जोड़सँ हँसि देलाह –“ जा ... ! जनमए दितैक । सभ गड़बड़ा गेल !!”
आब दोसर प्रसंग । बीएमे अंग्रेजीमें एकटा शिर्षक रहैक – The speed of life । ओहिमे एक गोट विश्व प्रसिद्ध व्यापारी अपन पीड़ाक वर्णन कएने रहथि जे कोना जीवनक गति बढ़ल जारहल छैक आ ओ दौगए नहि सकिरहल छथि । आरकेसर बड्ड नीक पढ़बथिन्ह । पूरा कोशिश कएलन्हि हमरापर किंचित बेशीए ध्यान द’क’ जे ई बुझि लेअओ । हुनका कदाचित् बुझल रहन्हि जे एकरा बुद्धचौ जनमल नइ छैक । मुदा, हम बूझि नइ सकलिऐक । बुद्धचौ जनमल रहैत तखन ने !
आब तेसर प्रसंग । अधिकांस मित्रसभक speed बड्ड तेज ! फेर त्वरण (acceleration) अकल्पनीय !! ठकमुड़िया लागि जाइत अछि । हमरासभ पकड़ए नहि सकैत छी । आकांक्षा फेर एतेक जे चिरईक नेना जकाँ पहिनहिं प्रयासमे आकाशे नापि ली । केओ आ किछु नीक लगिते नइ छन्हि । हरेक ठाम एकहिं बेर परिवर्त्तन चाहैत छथि । बिनु प्रयासेक परिणाम गनैत छथि । क्रान्तिकारी परिवर्त्तन ! कोनो व्यक्ति, कोनो निर्णय अथवा कोनो प्रयास वा ताहिमे झाँपल रणनीतिकेँ खोजक-बूझक समयक आभाव छन्हि ! ककरो सोझे धराधर अपन वाणसँ मुहँ कोंचकएहेतु वाणसँ भरल मिसाइलसभ दागि दैत छथिन्ह !
पता नइ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्फ भीतरसँ केहन छथि ? मुदा, लगैत अछि, भीतरसँ जे होथि आमविश्वक नाड़ी पकड़ि नेने छलाह । हुनकर जमल बुद्धचौ निश्चिते गड़ल छल जे विजयश्री देलकन्हि । मुदा, समय तँ अकल्पनीय त्वरित अछि । फेर सभकिछु बदलि गेलैक । फ्रान्समे ट्रम्फक बड़बोलापनक विपरित युवा इमैनुएल मैक्रों राष्ट्रपति भेलाह अछि । 
बूझब कठीन ! चल मन भजन करह !! बुद्धिचौ जे नहि अछि !!!

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