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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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रबीन्द्र नारायण मिश्र- दूटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उपन्यास नमस्तस्यै (आगाँ)

 

रबीन्द्र नारायण मिश्र

रबीन्द्र नारायण मिश्रक

दूटा आलेख

 

ई समय ककरो नहि

हम श्यामा भगवतीक दर्शनक हेतु गेल रही। महाराजा रामेश्वरक चितापर बनल ओहि भव्य मन्दिरक अद्भुत सौन्दर्य अछि। टुह-टुह सिंदुरिआ रंगमे रंगल मन्दिरक दहिना कात पोखरि अछि जकर जमकल पानिमे हाथ देलासँ स्वच्छता बढ़क बदला घटि सकैत अछि। मोन पड़ि गेल जे जखन सी.एम. कालेज दरभंगामे विद्यार्थी रही तँ एठि ठाम आबी, भगवतीक दर्शनक बाद पोखरिक घाटपर बैसल करी। ओहि समय पोखरिक हालक बेहतर छल।

श्यामा मन्दिरमे माँकालीक भव्य मूर्ति ओहिना चमकैत, दमकैत छल। भक्तगणक श्रद्धा ओहिना वा कि पहिनहुँसँ बेसी बुझाइत छल। मन्दिरमे कै ठाम भक्तसभ पूजा पाठमे तल्लीन छलाह।

मिथिलेश रमेशस्य चितायं सुप्रतिष्ठित। श्यामा रमेश्वरीपातु रमेश्वर कुलोद्रवान्।”

मन्दिरक मुख्य द्वारपर लिखल उपरोक्त श्लोक कतेक बेर पढ़ैत रहलहुँ।

श्यामा मन्दिरक बाहर आ अंदरमे प्रसादक विक्रय होइत अछि। अन्दरेमे प्रसाद किनलहुँ। भगबतीकेँ प्रसाद चढ़ओलाक बाद कनीकाल ओतहि बैसि गेलहुँ। कनी कालक बाद बाहर भेलापर चिंता भेल जे प्रसादकेँ बानरसँ कोना बचाबी कारण एकबेर एहिना प्रसाद चढ़ाकए निकलल रही कि एकटा बूढ़बा बानर कहाँसँ दौरल आएल आ प्रसाद लुटि लेलक। हम अबाक देखैत रहि गेल रही। अस्तु, प्रसादकेँ अंगाक अंदर कहुना कए नुकौलहुँ। बाहर आगू बढ़लापर चारूकात कोनो-ने-कोनो महराजक चितापर बनल मन्दिर सभकेँ देखैत मोनमे दरभंगा महराजक अकूत संपत्ति आ ओकर अपव्ययपर ध्यान हठात चलि जाएब कोनो भारी बात नहि। जँ एहि धनक उपयोग एतेक रास मन्दिरक बजाए जनताक कल्याणमे खर्च कएल जाइत तँ लोक समृद्ध होइत, आ महाराजो यशस्वी होइतथि। मुदा जे हेबाक छल से भेल। महराजक राज चलि गेल। बड़का-बड़का देबार सभ ढहि गेल। राजक हाताक अन्दरक जमीन सभ बिका गेल। आब ओहिठाम होटल अछि, दोकान अछि, सामान्य व्यक्ति सभक घर अछि। ने वो रामा ने वो खटोला। महाराजाक गौरब-गरिमाक बखान करए हेतु ढहैत, ढनमनाइत राज परिसरक दुर्दशा अन्तहीन भए गेल अछि।

श्यामा मन्दिरक आस-पास बनल आओर मन्दिर सभ कतेको बेर गेल छी। तें रिक्सा पकड़ि सोझे शुभंकरपुर बिदा भए गेल रही। मोनमे होइत छल जे जँ महराज वा हुनकर सलाहकारक जन कल्याणमे कनिको रूचि रहैत तँ आइ मिथिलाक लोकक भविष्ये किछु आओर होइत।

काली मन्दिरसँ आगा बढ़लापर मिथिला विश्वविद्यालयक विशालकाय परिसर आएल। दरभंगा महराजक ओहि महल सभकेँ सरकार अधिग्रहण कए ओहिमे विश्वविद्याल स्थापित कए देलक। महराजक राज-पाट नाम सभ चलि गेल। एतबो नहि भेल जे वोहि विश्वविद्यालयक नाममे महराजक नाम रहैत। मुदा भावी प्रवल। समय बलबान होइत अछि।

जो उग्या सो अन्तवे, फूल्या सो कुमलाही

जो चिनिया सो ढही पड़े, जो आया सो जाही।”

कबीरदासक उपरोक्त कथन ध्यानमे आबि रहल छल। संसारक नियम अछि जेकर उदय भेल तकर अस्त होएत। समय रहिते जे किछु कए गेल वएह रहि जाइत अछि।

विश्वविद्यालयक दहिनाकात बदरंग भेल इन्द्रपूजा स्थली आ तकर सामने बड़ीटा खाली मैदान- बिना कोनो देखरेखकें। आश्चर्यक बात थिक जे एहि ऐतिहासिक, सांसकृतिक धरोहरक रखरखावक उचित व्यवस्था किएक नहि भए रहल अछि?

कनीक आगा बढ़ब तँ बड़का-बड़का देबार जे महाराजा सभ बना गेलाह, ओहिमे यत्र-तत्रगाछ सभ जनमि रहल अछि। देबारक बीचमे बनल हनुमानजीक मूर्तिकेँ लोक सभ पूजा करैत देखाइत। आश्चर्यक बात ई थिक जे बिना कोनो देखरेखकेँ एतेक पुरान देबार सभ अखनो ठाढ़ कोनो अछि?

श्यामा मन्दिरसँ शुभंकरपुर लौटबाक क्रममे महराजी पूलसँ पहिने जाम लागि गेल छल। रिक्सा आगू नहि बढ़ि सकैत छल। संगहि साइकल, स्कूटर, ठेला, पैदलयात्री, कार आ पैदलयात्री तेना ने लदमलद भए गेलाह जे कनी काल लेल भेलैक जे आब एतहिसँ आपस होमए पड़त। पैरे जेबाक सेहो जगह नहि बाँचल छल। चुप-चाप रिक्सा पर बैसल रहि जेबाक अतिरिक्त किछु विकल्प नहि छल।

जाबत ओहि जामकेँ हटि जेबाक प्रतीक्षा करैत रही ताबतेमे किछु गोटे राम नाम सत्य है, सबका यही गत्त है”बजैत एकटा मृतककेँ कान्हपर उठौने ओतहि आबि कए अटकि गेलाह। हुनका पाछा- पाछा कतेको लोक चलि रहल छलाह जे मृतकक अन्तिम संस्कारक हेतु वएह सभ बजैत चलि रहल छलाह।

कहुना कए कनीक जाम खुजलै। उसास पबिते अन्तिम यात्रापर निकलल वोहि मृतक आ तकरा कान्ह देनिहार सभकेँ लोक सभ आगा जाए देलक। महराजी पूल पार करैत वो सभ आगा बढ़ि गेलाह। हम ताधरि रिक्सेपर थामहि प्रतीक्षा करैत रही जे आब लोक आगा बढ़त तँ ताब।

 कनीके कालक बाद फेर वएह ध्वनि। राम नाम सत्य है, सबका यही गत्त है...।”

किछु गोटे मृतककेँ कान्ह देने छलाह। आगा आगा गोरहाक सुनगैत आगि, कोहा लेने कर्त्ता आ तकर पाछा पाछा मृतकक महायात्राक गवाह सभ राम नामक महिमा गबैत आगा बढ़ि नहि सकबाक कारणें ओहिठाम ठमकि गेल रहथि। हम रिक्सापर रही आ ठीक हमरा सामानान्तरमे पीताम्बरीसँ आवृत, गेनाक फूलसँ लादल वोहि मृतकक निष्प्राण शरीर छल। ओहि दिवंगत आत्माकेँ मोने-मोन प्रणाम कएल। किछु-किछु सोचाए लागल। मोन कनी एमहर ओमहर भेल। ताबे जाम कनी ढील भेलैक। ओ सभ राम नाम सत्य है, सबका यही गत्त है, बजैत आगा बढ़ि गेल। आ हम रिक्सासँ महराजी पुलपर चढ़ि गेलहुँ।

कनीके आगा पुलपर रिक्सा चढ़ले छल कि फेर वएह ध्वनि। राम नाम सत्त है, सबका यही गत्त है। किछु गोटे एकटा मृतकक शवयात्राक संगे राम नामक महिमा गबैत आगा बढ़ि रहल छलाह। मृतकक फूलक मालासँ लादल चारि गोटेक कान्हापर आगा बढ़ि गेल। अगल-बगल कतेको लोक मूकदर्शक छलाह जेना कोनो खास बात नहि भेल हो। तरकारी वाली तरकारी बेचि रहल छल। माछक दोकानपर ओहिना माछक खण्ड बिका रहल छल। कोन पर चाहक दोकानपर लोक चाह पीबि रहल छलाह। कतहु कोनो प्रकारक आलाप, प्रलाप नहि। रिक्साबला गप्पक क्रममे कहलक जे एहिठाम तँ नित्य एहने दृष्य रहैत अछि। आगा बनल श्मशान घाटमे ओकर दाह संस्कार होइत अछि।

संभवत: मृत व्यक्ति सभ वृद्ध छलाह जाहिसँ वातावरणमे, संगे कटिहारी गेनिहार लोकोमे कोनो भाव विह्लता देखबामे नहि आएल।

ओहि दिन साँझमे ओही सड़क बाटे फेर जेबाक अवसर भेटल। हम सभ बरिआती जा रहल छलहुँ। महराजीपुलसँ पहिने जाम लागि गेल छल। लोक ठसाठस भरल छल। हमरा आगा पाछा दोसर बिआहक बरिआती छल। लोककेँ आगू पाछू घसकबाक रस्ता नहि भेटि रहल छल। सजल- धजल बरक कार ठामहि छल कि आगूसँ अबैत कोनो दोसर गाड़ी पों-पोंक आबाज करए लागल। के आगा बढ़त, के पाछा जाएत, कोनो ठेकान नहि। आधा घण्टा धरि ई स्थिति बनल रहल। फेर केना-ने-केना रस्ता खुजल। लोकसभ आगा बढ़ल। हम अपन कारमे आगा बढ़लहुँ। शेष बरिआती, बर पाछा छुटि गेल छल, तथापि ओहिठाम ठाढ़ भाए प्रतीक्षा करब उचित नहि छल। एक्के दिनमे एकहिठामसँ तरह तरहक दृष्य गुजरि गेल छल। राम नाम सत्य हैसँ लए शहनाइक धूनपर नचैत गबैत जाममे थकमकाएल बरियातीक धमाचौकरी देखएमे आबि रहल छल। मुदा ओही स्थानक चारूकात बैसल, ठाढ़ लोक सभ हेतु धनि सन। ने हर्षो न च विष्मय :।

असलमे कोनो घटना विशेष अपने आपमे ताधरि कोनो माने नहि रखैत अछि जाधरि हम ओहिसँ कोनो- ने-कोनो कारणसँ जुड़ि जाइत छी। तात्पर्य ई जे कोन वस्तु हमरा कष्ट देत आ ककरासँ सुख होएत ओ पूर्णत: ओहि वस्तु विशेष वा घटना विशेषक प्रति हमर रूखिपर नर्भर करैत अछि। अस्तु, एकहि दिनमे श्यामा मन्दिरसँ शुभंकरपुरक मध्य कतेको तरहक दृष्य देखबामे आएल। कतेको पुरान घटना सभ स्मृति पटलपर फेरसँ उगि आएल। ई समय ककरो नहि अछि। दरभंगा महराजक नहि अछि, आम आदमीक नहि अछि। मोन हो कठिआरी जाउमोन हो बरियाती भए जाउ। मुदा समय ठाढ़ नहि रहत। भोर साँझमे बदलि जाएत। छोड़ि जाएत मोनक कोनो कनतोसमे एकटा आओर निसान जे दिन भरिक घटनाक क्रम देने गेल। काल्हि फेर प्र:काल ओहिना सूर्य उगताह, दिन भरि किछु ने किछु होइत रहत, साँझ होएत। सभटा होएत, मुदा हमर अहाँक जिनगीक एकटा आओर दिन कम भए जाएत। समयकेँ की हेतै? ओ तँ एहिना आगू चलैत जाएत। गुजरि जाएब हम ओहिना जेना कतेको गुजरि गेलाह आ लोक राम नाम सत्य है..., कहैत महराजीपूलक एहि पारसँ ओहि पार भए जाएत।q

२/११/२०१७

 


 

 

 

 

घमंड

जीवनमे बहुत रास अनुभव होइत रहैत अछि। नित्य किछु ने किछु एहन घटना घटित होइत अछि जे हमर आँखि खोलि सकैत अछि मुदा से होइत कहाँ अछि? हमसभ नियतिवश चलिते जा रहल छी, सोचि नहि पबैत छी जे हम एना किएक कए रहल छी? ई बात प्रायः सभ जनैत अछि, जे जन्मल अछि से मरत। मृत्यु अवश्यंभावी अछि, तथापि हमसभ सोचैत रहैत छी जे हम तँ अहिना रहब। युधिष्ठिर द्वारा यक्षकेँ देल गेल एहने प्रश्नक उत्तर एखनो ओहिना सार्थक अछि जहिना ताहि समयमे रहल होएत। आखिर एना कोना होइत अछि जे हमसद्यः घटित होइत घटनाक प्रति अनजान बनल रहि जाइत छी आओर एकदिनसभ किछु एतहि छोड़ि कए सभदिनक हेतु एहि दुनियाँसँ आँखि मुनि लैत छी।

आखिर किछु तँ छैक जे मनुक्ख मात्रकेँ निरंतर ओझरौने रहैत अछि। हम निरंतर अपन आस्तित्वक रक्षाक हेतु संघर्षशील रहैत छी। हम जे कहैत छी से लोक मानए, हमर महत्व बुझए एवम् हमर श्रेष्ठत्वकेँ स्वीकार करए। एहिसभक पाछा हमर घमंड प्रमुखतासँ मुखरित होइत रहैत अछि। जीवनसँ लए कए मृत्यु पर्यंत हमरा लोकनिक व्यवहारकेँपाछा ई तत्व विद्यमान रहैत अछि। हम जाने-अनजाने दोसरसँ अपनाकेँ श्रेष्ठ साबित करबाक फेरमे पड़ि अपन जीवनकेँ तँ अशांत केनहि रहैत छी, संगहि दोसरोकेँ तंग कए दैत छी कारण एहन स्वार्थमूलक सोचसँ व्यक्तिक अहंमे टकराव उतपन्न होइत अछि आओर लोक अपनाकेँ पैघ देखेबाक प्रयासमे दोसरकेँ छोट साबित करए लगैत अछि। परिणाम होइत अछि, व्यर्थक अनवरैत चलैत अन्तरद्वंद।

मान-सम्मान, प्रतिष्ठाक लिप्सा मनुक्ख मात्रमे ततेक बलबती रहैत अछि जे ओ कोनो हालातमे ताहि हेतु किछु करए हेतु तैयार रहैत अछि। लोक हमरा बुझए, मान्यता दिअए, हम समाजमे देखगर लोकमे गनल जाइ, एहि समस्त भावनाक पाछा जँ देखल जाए तँ ओकर घमंडे काज करैत रहैत अछि। एहन घटना नित्य-प्रति देखएमे अबैत अछि जे कतेको गोटे बेबजह अनकर मामलामे टांग अरबैत रहताह। जेना कि ओ चैनसँ रहिए नहि सकैत छथि। एहन आदमी हेतु इहो कहल जा सकैत अछि जे ओ अपन चालिसँ लाचार छथि। कोनो, ककरो बात उठल कि ओ अपनाकेँ ओहि बीचमे ठाढ़ कए देताह। तरह-तरहक ब्यर्थ उदाहरण दैत रहताह जाहिसँ ई कहुना सिद्ध होउक जे हुनके टा सभबातकेँ बुझए अबैत छनि किंबा ओ जे कहैत छथि सैह व्रह्मसत्य थिक। एहन आदमीकेँ अहाँ की कहबैक? “एकोहं द्वितीयो नास्ति” -एहि तरहक सोच कोना कारगर भए सकैत अछि?

हमर गाममे एकबेर श्राद्ध भोज होइत रहए। एकटा प्रतिष्ठित व्यक्तिक देहावसान भए गेल छल। अपना जीवन कालमे ओ खूब संपत्ति अर्जित कएलाह। बहुत संघर्ष कए आगा बढ़लाह।तखन तँ मृत्यु सभक होइत अछि से हुनको भए गेलनि। अपने जीवनमे लीखसँ लाख करबाक पुरषार्थ हुनकामे भगवान देलखिन। मृत्युक बाद लोकसभक आग्रह जे जबार होउक, एतेक संपत्ति अरजि कए गेल छथि। मुदा से तँ नहि भेलैक, गामे लए कए भोज हेबाक निश्चय भेलैक। संयोगसँ हमहूँ हालेमे सेवा निवृत भेल रही आ गामे पर रही। भोज खेबाक हेतु गेलहुँ तँ देखैत छी एकटा हमर ग्रामीण, जे भरि जिनगी बाहर कमाइत रहलाह, घरक दरबाजाकेँ गछारि कए ठार भेल छथि, गरजि रहल छथि, बारंबार चेता रहल छथि जे एक-एक कए लोक अन्दर जाथि। हुनकर चिकरब-भोकरब ततेक प्रखर चल जे अनेरे ककरो ध्यान हुनका पर पड़ि जाइत छल। एवम् प्रकारेण हुनका अपन महत्वक प्रदर्शन करबाक आ ताहिसँ संतुष्टिबोध प्राप्त करबाक पर्याप्त अवसर भेटलनि। जँ ओ नहि चिकरितथि, किंवा घरक केबार धए ठाढ़ नहि रहितथि, लोक अपने अबैत जाइत, तैओ भोज भए जैतैक, प्रायः बेसी नीकसँ होइतैक कारण ओ तँ अनेरे केबारकेँ पकड़ि चिकरि कए महौलकेँ गड़बड़ा रहल छलाह, मुदा हुनका तँ देखेबाक रहनि जे ओ एतेक महत्वपूर्ण व्यक्ति छथि, सबके कस्तन कए रहल छथि, हुनके आज्ञासँ लोक भोज खाए अन्दर जाएत नहि तँ ओतए बबाल भए जाएत। बिचारि कए देखबैक तँ एकरा व्यक्ति विशेषक घमंडक अतिरिक्त किछु आओर नहि कहल जा सकैत अछि।

की पैघ, की छोट सभ क्यो कतहुँ ने कतहुँ, कहुना ने कहुना घमंडक चपेटमे पड़िए जाइत छथि। शास्त्र-पुराणसभमे सेहो कतेको एहन प्रसंगक वर्णन अछि जाहिमे एक सँ एक संत महात्मा, देवी-देवता एकरप्रकोपमे पड़ि गेलाह। महाभारतमे एहि सम्बन्धमे बहुत मार्मिक घटनाक वर्णन अछि। एकबेर हनुमान बूढ़ बानरक रूपमे भीमके रस्तामे बैसि गेलाह। भीम हुनका अपन नाङरि हटेबाक हेतु कहलखिनकारण हुनका जल्दी जेबाक रहनि मुदा ओ बानर टस सँ मस नहि भेल, उल्टे व्यंग करैत कहलकनि जे जखन अहाँ एतेक बलवान थिकहुँ तँ नान्हिटा हमर नाङरिकेँ उठाए किएक नहि आगू बढ़ि जाइत छी? भीमकेँ ई बात बहुत अनर्गल बुझेलनि आओर ओ ओहि बूढ़ बानरक नाङरिकेँ हटबएमे लागि गेलाह, सभ प्रयत्न कए थाकि गेलाह मुदा नाङरि ठामहि रहल। हारि कए भीम कहलखिन जे अहाँ साधारण बानर नहि छी, के छी से सत-सत बाजू। तखन हनुमानजी अपन भेद खोलि कहलखिन जे हम आहीँक भाए हनुमान छी। भीम बहुत लज्जित भेलाह आ हुनकासँ घट्टीमानलथि। एहि तरहेँ हनुमानजी हुनकर घमंडकेँ चकना चूर केलाह। कहक माने जे घमंड एकटा एहन व्याधि थिक जे अनेरे हमरा लोकनिक आँखिपर पट्टी लगा दैत अछि आ हम सत्यकेँ देखितहुँ ओकरासँ फराक रहि जाइत छी।

घमंड किंवा अहं केर टकरावसँ कतेकोलोकनिक पारिवारिक जीवान नर्क भए जाइत अछि। हम ककरासँ कम? हमरा ई कहलक, ओ कहलक, हम ओकर बात किएक सहबैक, एहने-एहने छोट-छोट बातकेँ पकड़ि कए लोक धए लैत छथि जाहिसँ आपसी प्रेम ओ विश्वास नष्ट भए जाइत अछि, बात ततेक बढ़ि जाइत अछि जे सम्बन्ध विच्छेद धरि भए जाइत अछि। जौं एहन समयमे क्यो बुझनिक होथि, एक डेग पाछा भए जाथि, हारि मानि लेथि तँ बहुत रास परिवार खंडित हेबासँ बँचि सकैत अछि, बहुत रास धीया-पुताकेँ पारिवारिक आश्रय बनल रहि जाएत एवम् परिवारमे समन्वय, शान्ति बनल रहत। मुदा ई बात बुझब आ बुझिओ कए व्यवहारमे आनब कै बेर बहुत मोसकिल भए जाइत अछि कारण क्यो अपन अहंकेँ छोड़बाक हेतु तैयारे नहि होइत अछि। परिणाम सामने अछि। नान्हिटा टेल्हकेँ माए-बापक बीच कलहक दृष्य देखए पड़ैत छैक। बच्चासभ घरक वातावरणसँ तंग भए घरसँ भागल-भागल रहए लगैत अछि आ गलत संगतिमे पड़ि कए कै बेर नशेड़ी भए जाइत अछि। सोचए बला बात अछि जे माए-बापक व्यर्थक अहंक कारण एहन वच्चाक भविष्यक संगे कतेक अन्याय होइत अछि?

एहन नहि अछि जे कमे पढ़ल-लिखल लोक घमंडक प्रदर्शन करैत छथि अपितु एक सँ एक विद्वान ओ पैघ-पैघ लोकमे एकर व्यापक प्रभाव देखएमे अबैत अछि। जे जतेक पैघ तकर घमंड ततेक विनासकारी भए सकैत अछि। इराकक राष्ट्रपति सद्दाम ओ अमेरिकाक राष्ट्रपति बुशके बीच जे एतेक भारी युद्ध भेल तकर पाछु की छल? महज अहंक टकराव? जहिना गाम-घरमे मूर्ख लड़ैत अछि तहिना ओ सभ आपसमे ताधरि लड़ैत रहलाहजाधरि सद्दामक विनाश एहि हदधरि नहि भए गेल जे ओ अपन प्राणोसँ हाथ धोलक।

बादमे पता चलल जे ओकरा लगमे कोनो रासायनिक हथियार नहि छल जकरा आधार बनाए इराकपर अमेरिका आक्रमण केलक। कार्यालयमे अधिकारी लोकनि कए बेर अहं पर चोट पड़लापर अधीनस्त कर्मचारीकेँ तबाह करबाक कोनो ब्योंत बाम नहि जाए दैत छथि। बदली कएदेब.काजसँ हटा देब आ ताहुसभसँ संतोष नहि भेलनि तँ नौकरीसँ मुअत्तल कए देब सामान्य बात थिक। जे ततेक पैघ अधिकारी तिनक अहंसँ ततेक बेसी सावधान रहब जरुरी थिक। काज करी वा नहि करी मुदा हुनकर सलामीमे कोनो कमी नहि हेबाक चाही। जँ से भेल तँ अहाँक भगवाने मालिक।

असलमे घमंडी व्यक्ति भीतरसँ असंतुष्ट होइत छथि। हुनका लगैत रहैत छनि जेना सौँसे दुनियाँ हुनका पाछा पड़ल अछि, जेना क्यो हुनका संगे न्याय नहि कए रहल अछि, एहि तरहक फिजुल बातसभ हुनकर मोनमे बैसल रहैत अछि जाहि कारणसभ हुनकर व्यवहार स्वयं असंतुलित भए जाइत अछि किंवा लोकसँ बहुत बेसीक अपेक्षा रखैत अछि। परिणामई होइत अछि जे ओ बात-बात पर लोक सभसँ मरए-कटए हेतु तैयार रहैत छथि। सोचबाक बात थिक जे एहन लोककेँ शान्ति कतएसँ भेटि सकैत अछि आ “अशांतस्य कुतो सुखम्?

एहि तरहक अशांत प्रवृतिक लोकमे घमंड भरल रहैत अछि। जाहिर अछि जे एहम लोक आस-पासकेँ लोककेँ तरह-तरहसँ कष्ट पहुँचबैत छथि। अपने तँ दुख कटिते छथि दोसरोक जीवनकेँ नर्क कए दैत छथि।

घमंड कतेको कारणसँ भए सकैत अछि आ कए बेर तँ बिना कोनो औचित्यकेँस्वभाववश सेहो लोक घमंडी भए जाइत अछि। एहन उदाहरण अहाँकेँ कतेकोठाम देखबामे आएत। हमरा गाममे एकटा भिखमंगा कहिओ काल अबैत छलाह। यद्यपि ओ भिख चाहैत छलाह मुदा हुनक बाजबाक चहटिसँ क्यो नहि कहैत जे ओ भिखमंगा थिकाह। असलमे ओ पहिने बहुत धनीक छलाह मुदा कालक्रमे गरीब भए गेलाह। जमीन-जायदाद बिका गेलनि। कहबी छैक जे जौर जड़ि गेल मुदा एंठन अछिए। सैह गप्प छलैक।

महाभारतमे खिस्सा अछि जे द्रोपदीकेँ अपन सौंदर्यपर बहत घमंड रहनि आओर गाहे-बगाहे ओ एहि कारणसँ कतेको शत्रु बना लेलीह। परिणामसभकेँ बुझल अछि। मामला द्रोपदी चीर हरणधरि पहुँचि गेल। की-की तमाशा ने भेल। भयानक युद्ध भेल आओर समस्त परिवार विनाशकेँ सीमानधरि पहुँचि गेल। कहक माने जे घमंड चाहे जिनका होनि, आओर जाहि कोनो कारणसँ होनि, एकर परिणामखराबे होइत अछि।

घमंड एकटा मानसिक रोग थिक जे मनुक्खकेँ सत्यक दर्शन करएसँ ओहिना रोकि दैत अछि जेना सीसीमे कोनो वस्तुकेँ पैसबासँ ठेपी। घमंडी व्यक्ति एक हिसाबे आन्हर होइत अछि जेमदांध भए सही विचारकेँ कदापि नहि सुनैत छथि। एहने मानसिकता रावणकेँ रहैक जाहि कारणसँ घरहंज भए गेलैक, सभ किछु नष्ट भए गेलैक। मेघनाद सन बीर ओ तेजस्वी संतानसँ हाथ धोअए पड़लैक, कुंभकरण सन भातृभक्त भाए मारल गेलैक, विभीषण घर छोड़ि भागि गेलाह। सभ ओकरा बुझबैत रहलैक, एहि हद धरि जे मंदोदरीक कथन धरिकेँ ओ सौतिआ डाह कहि अपमानित केलक। परिणाम सभकेँ बुझल अछि। अस्तु, घमंड सर्वथा त्याज्य थिक।

जँ बिचारिकए देखल जाए तँ एहि दुनियाँमे कोनो तरहेँ पार पाएब आसान नहि अछि। पढ़ले देखू तँ एक सँ एक विद्वान छथि। आइन्सटाइन, सेक्सपीयर, कालीदास, राधाकृष्नन, कतेको नाम अछि, ककर नाम लेब, ककर छोड़ब, पन्नाक पन्ना भरि जाएत। धनिकमे गिनती करब तँ गनिते रहि जाएब। एहिना पद, सौंदर्य, वुद्धि सभ तरहेँ एकसँ एक लोक एहि संसारमे भेलाह आआोर छथिहो। तखनो जँ क्यो कथुक घमंड करैत छथि तँ की करबै? हँसबे करबै ने? अस्तु, विनम्र होएब सबसँ नीक ऐश्वर्य अछि जे सही कही तँ भाग्यवाने लगमे होइत अछि।

बरसहि जलद भूमि निअराए, नबहि यथा बुध विद्या पाए।

विनम्रता विद्वताक परिचायक थिक। जरुरी अछि जे सहीज्ञान प्राप्त कए स्वभावमे विनम्रताकेँ आनल जाए आओर घमंडसँ मुक्ति पाओल जाए, जाहिसँ जीवन सुखमय होएत।q

रबीन्द्र नारायण मिश्रक

दूटा लघुकथा

यमलोकक दल-बदलू

ओहि दिन यमलोकमे जबरदस्त गहमा गहमी छल। भेल ई जे मृत्यु लोकसँ हालमे आएल बहुत रास लोक ओतए पहुँचलाक बाद जनतंत्र बहालीक मांग पर अड़ि गेल रहए। नित्य प्रतिक हंगामासँ तंग भए यमराज यमलोकक नव संबिधानक हेतु अध्यादेश जारी केलाह। तकर बाद मृत्यु लोकक तर्जपर चुनावक कार्यवाही प्राम्भ भेल।

यम प्रतिनिधि बनब कतेक कठिन बात थीक से भुक्तभोगिये कहि सकैत छथि। यद्यपि सत्तारूढ़ दलसँ लए कए विपक्षी धरिक सभ व्यक्ति अपन-अपन सेवाक प्रति समर्पणक भावनाक चर्च करैत-करैत अपसियाँत रहैत छथि मुदा असलमे जे वो करैत छथि से जगजाहिर अछि। इएह सभ गप्प हम ओहि दिन सोचैत रही कि यमलोकक अखबारमे प्रतिनिधि सभा चुनावक समाचार निकललैक।

समाचार देखिते एक बेर हमरा जेना करेन्ट जकाँ लागि गेल। कोना ने लागए। यमलोकमे जहिआसँ चुनावक सिलसिला अएलैक तहिआसँ कतेक घर बसि गेल। कतेको बेरोजगार सभ रातिये-राति धनिक भए गेल। इएह कारण थिक जे आब लोक जहाँ यमलोकमे चुनावक हल्ला सुनैत अछि कि टिकट लेबक हेतु एड़ी-चोटीक पसेना एक कए दैत अछि।

यमलोकक प्रतिनिधि सभाक चुनाव भेला एक मास भेल छलैक। कोनो दलक स्पष्ट बहुमत नहि आएल छलैक। प्रधान बनए लेल बेस घमरथन भए रहल छलैक। यद्यपि दल सभहक संख्या तँ ९ टा छल मुदा मूलत: तीनटा दलक सदस्य बेसी छलाह- पिसाँच दल,भूतनाथ दल ओ प्रेत दल।

नव निर्वाचित सदस्यमे सँ कमसँ कम पचासटा सदस्य एहन छलाहजे कमसँ कम पाँच-सात बेर दल बदलि चूकल छलाह। यम प्रतिनिधि सभामे कोनो दलकेँ स्पष्ट बहुमत नहि भेटलासँ हिनका सभहक लेल स्वर्णिम अवसर छलनि। नवका यम प्रतिनिधि सभ अपन-अपन भविष्य सुधारबाक हेतु बेस उत्सुक छलाह।

प्रमुख महोदयकेँ से बेस परेशानी छलनि। हुनका तीनू दलक नेता बेरा-बेरीसँ अपन-अपन समर्थनमे आधासँ अधिक सदस्यक सूची प्रस्तुत केने छलाह। तीनू सूचीमे पचासटा सिद्धहस्त दल-बदलू आ पचीसटा नवका यम प्रतिनिधि केर नाम सामिल छल। प्रमुख महोदय भूतपूर्व इमानदार छलाह। मुदा जनताक हिसाब देखि कए रंग बदलि लेने छलाह। ओहो मामला नीकसँ बुझि रहल छलखिन। आखिर इमानदारीसँ होइते की छैक? नून रोटी चलि सकैत अछि। घरवाली कहथिन जे कहि नहि कोन करम केलहुँ जे अहाँक संग भेल।

जहिआसँ प्रमुख महोदय अपन चालि-ढालि बदललाह तहिआसँ दुनियाँ दोसर भए गेलनि। जेम्हरे देखू तेम्हरे लक्ष्मीक दर्शन। ई मौका हुनका हेतु स्वर्णिम अवसर छल। जनसेवाक व्रतधारी लोकनिक प्रथम अवतार भए रहल छल। यमराज तीनू नेतासँ गप्प-सप्प करबाक हेतु तिथि निर्धारित कए सूचित कए देलखिन आ अपने भूमिगत भए गेलाह।

 प्रेत दलक नेता रातिक बारह बजे यमराजक पत्नीसँ भेँट करए गेलाह। दोसर-तेसर ओहिठाम क्यो नहि छल। सूटकेशसँ नोटक सभ गड्डी निकालि धराधर टेबुलपर राखि देलखिन।

ई थिक पुतोहुक मुँह देखाइ।

फेर गप्प-सप्प आगा बढ़ल कहए लगलखिन-

राजनीतिक हाल-चाल तँ अहाँकेँ बूझले अछि। पिसाँच दल ओ भूतनाथ दलक नेता सभ हमर पक्षक यम प्रतिनिधि सभकेँ फोरि रहल छथि। अहाँ यमराजकेँ हमर सिफारिश कए हमरा न्याय दिआउ।

यमराजक धर्म पत्नीजीकेँ तीनू लोक सुझि रहल छलनि, मुदा तैयो बजलीह-

अवश्य कहबनि। अहाँसँ बेसी योग्य, कर्मठ ओ इमानदार के भए सकैत अछि। प्रधानक पद तँ अहींकेँ भेटबाक चाही।

 प्रेत नेता सहर्ष ओहिठामसँ बिदा भेलाह। मुदा ओ समस्याक अन्त नहि छल। आखिर मास दिनक बादे सही, यम प्रतिनिधि सभाक सामना तँ करैक छलनि। तेँ कमसँ कम पचासटा आओर यम यम प्रतिनिधि के अपनामे मिलायब जरूरी छलनि।

राता-राती ओ अपन विश्वासपात्र प्रेत नेताक सचिवक ओहिठाम पहुँचलाह। ओमहर पिसाँच दल ओ भूतनाथ दलक लोक सभ सेहो बैसल नहि छलाह।

राति भरि हुड़दंग होइत रहल। असलमे बीस-पच्चीसटा यम प्रतिनिधि कै गोटेसँ टाका लए लेने छलाह। तीनू नेता सोचथि जे ओ सभ हमरा संगे छथि मुदा असलमे वो सभ ककरो संगे नहि रहथि। ओ सभ चुनावमे खर्च भेल अपन पूँजी ऊपर करबाक हेतु अपसियाँत छलाह। मुदा यमराज सेहो आब घवरायल छलाह आ यम प्रतिनिधि लोकनिकेँ साफ कहलखिन-

जँ अहाँ लोकनि स्पष्ट स्थिति नहि उत्पन्न करब तँ हम यमलोक प्रतिनिधि सभाकेँ भंग करबा देब।

ई बात सुनि नवका यम प्रतिनिधि सभहक मनमे हड़बड़ी मचि गेल। ओ सभ गोटे प्रेत दलकेँ अपन समर्थन देबाक निर्णय प्रमुख महोदयकेँ अवगत करा देलखिन।

प्रात:काल प्रेत दलक नेता मंगनूकेँ प्रधान पदक हेतु सपथ कराओल गेल।

प्रात:काल सपथ ग्रहण समारोह प्रारम्भ भेल। मनोनीत प्रधानजी अपन जेबीमे सँ एकटा चिट निकालि कए अपन पी.ए.केँ देलखिन। पी.ए. साहेब ओहि कागजकेँ प्रमुखक आप्त सचिवकेँ दए देलखिन।

ओमहर यम प्रतिनिधि लोकनि मंत्री पद प्राप्तिक संभावनासँ अपसियाँत छलाह। किछुए कालमे घोषणा प्रारम्भ भेल। नव मंत्रीमण्डलमे तीस गोट कैबीनेट, बीसटा राज्यमंत्री ओ बीसटा उपमंत्रीक नामक घोषणा कएल गेल। एवम्-प्रकारेण यम प्रतिनिधि सभा क एक तिहाइ सदस्य मंत्री बनि रहल छलाह। शेष सदस्यमे सँ सत्तापक्षक समर्थक यम प्रतिनिधिकेँ कोनो-ने-कोने पद अवश्य देबाक स्पष्ट आभास भेटि गेल छलनि। प्रमुख निकेतन खचाखच भरल छल। सपथ ग्रहण समाप्त होमएपर छल कि सत्तापक्षक एकटा यम प्रतिनिधि गरजि उठला-

मंत्री पदक हेतु चयनमे पक्षपात कएल गेल अछि!आदि-आदि...। प्रधानजी मुड़ी उठेलाह आ इसारासँ किछु कहलखिन।

प्रधान विक्षुब्ध यम प्रतिनिधि सभक गुप्त बैसार कए रहल छलाह। रात्रिमे बारह बजे बैसार शुरू भेल से प्रात: छह बजेमे सम्पन्न भेल। बैसारमे पचासटा यम प्रतिनिधि छलाह जे कहैत गेलाह जे जौं अहाँ अपन बात नहि राखब तँ हमहूँ सभ अपन बात बदलबाक हेतु मजबूर भए जाएब।

हारि कए प्रधानजी ओहिमे सँ पन्द्रह गोटेकेँ विभिन्न कैबिनेट मंत्रीक दर्जा संगे अपन-अपन जिलाक प्रशासनिक मुखिया सेहो बनाओल गेल। सभा विसर्जित भेल।

ओमहर पिसाँच दल आ भूतनाथ दलक नेता प्रेत दलक नेताकेँ प्रधान पदक सपथ केर विरोधमे संपूर्ण यमलोकमे हड़ताल कए देलन्हि। यमलोकमे कानून/व्यवस्थाक गम्भीर समस्या उत्पन्न भए गेल। असलमे दूनू नेताकेँ प्रधान पद छुटि जयबाक आक्रोश तँ छलनिहे। सभसँ बेसी कष्टक गप्प छल जे हुनका लोकनिकेँ गम्भीर आर्थिक क्षतिसँ सामना करए पड़ल छलनि। यमलोकक पचासो यम प्रतिनिधि तीनू नेतासँ यथेष्ट पाइ टानि लेने छलाह। प्रधानकेँ अपन कुर्सी बचायब पराभव भए रहल छलनि। प्रमुखक खिलाफ दूनू विरोधी दल यमलोक भरिमे गम्भीर हड़ताल कए देने छलैक। स्थिति सम्हरने नहि सम्हरि रहल छलैक। अन्ततोगत्वा प्रधानजी विरोधी दलक नेता सभसँ गोपनीय बैसार करबाक निर्णय केलनि।

दोसर दिन विरोधी नेतासभ एक-एक कए प्रधानजीसँ फराक-फराक भेँट करए लगलाह। पाँचटा छोट-मोट नेताकेँ शान्त केलनि। मुदा पिसाँच दल ओ भूतनाथ दलक नेता किछु सुनबाक हेतु तैयार नहि छलाह।

अन्ततोगत्वा प्रधानजी पिसाँच दलक नेताकेँ विपक्षक नेता बनएबाक घोषणा केलनि। हुनको कैबिनेट मंत्रीक दर्जा देल गेल। संगहि भूतनाथ दलक नेताकेँ यम प्रतिनिधि सभा क उप-सभापति बनएबाक निर्णय कएल गेल। दूनू नेताकेँ पॉंच-पाँच कड़ोर टाका अपन-अपन जिलाक बिकासक नामपर खर्च करबाक अधिकार देल गेल।

एवम्-प्रकारेण मंत्री मण्डलक कृयाकलाप प्रारम्भ भेल। प्रमुख महोदय सहित यम प्रतिनिधि लोकनिके हरियरी आबि गेल। यमलोकमे यम प्रतिनिधि सभा क अधिवेशन प्रारम्भ भेल। कतेको नव गोटे एहि बेरक अधिवेशनमे देखबामे आबि रहल छल। सदस्य सभकेँ सपथ दिआवोल गेल आ तकर बाद प्रमुख महोदयक भाषण भेल। यमलोकक अगिला बर्खक बजट केर प्रस्ताव प्रस्तुत कएल गेल। एतबा कार्यक्रम भेल छल कि विपक्षी नेता सभ वर्तमानमंत्री मण्डलमे अपन अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत केलनि। यम प्रतिनिधि सभामे जबरदस्त हंगामा होमए लागल। हंगामा नियंत्रणसँ बाहर भए गेल आ अध्यक्षकेँ यम प्रतिनिधि सभाक कार्यवाही स्थगित कए देबए पड़ल।

ओमहर विपक्षक नेता अपन चेला-चाटीक संगे यम सभा अध्यक्षक निर्णायक विरूद्ध यम प्रतिनिधि सभासँ वहिगर्मन कए देल।

यमलोकक राजनीतिक स्थिति कहुना ठहरिये ने रहल छल। प्रधानजी परेशान छलाह। प्रतिपक्षक नेता सभ यमलोकमे हड़तालक आह्वान कए देने छलाह। मुदा प्रधानजी कोनो कीमतपर कुर्सी छोड़बाक हेतु तैयार नहि छलाह। दोसर दिन यम प्रतिनिधि सभा क सत्र फेर प्रारम्भ भेल आ सत्ता पक्ष ओ प्रतिपक्षक नेता एवम् सदस्य लोकनि हंगामा करए पर अड़ल छलाह। प्रधानजी जतबोकेँ मंत्री बना सकलाह ततबो लोक गड़बड़ी नहि करताह तकर कोनो ठेकान नहि छल। शेष लोकनिक कहब मोसकिल।

 ओहि दिन सेहो यम प्रतिनिधि सभा क बैसार स्थगित भए गेल। एवम्-प्रकारेण प्रधानजी पाँच दिन काटि लेलाह। ताधरि अनेको उद्योगसँ मंत्रीमण्डलक गठनमे जे आर्थिक दबाब पड़लनिसे आपस भए गेल छलनि। विपक्षक सदस्य सभ यमराजकेँ विज्ञापन-पर-विज्ञापन दैत छलाह जे यम प्रतिनिधि सभा क अधिवेशन शीघ्र बजाओल जाए। अन्ततोगत्वा यमराज प्रधानजीकेँ बजा कए साफ कहलखिन जे अहाँ सात दिनक भीतर प्रतिनिधि सभामे अपन बहुमत सिद्ध करू अन्यथा अहाँक कुर्सी चलि जाएत।

प्रधानजी अपसियाँत छलाह। नवका यम प्रतिनिधि-क गुटक कोनो भरोस नहि छलनि। मुदा झख मारि कए यम प्रतिनिधि सभामे विश्वास प्रस्ताव रखलाह। निर्णय भेल जे काल्हि एहिपर मतदान होएत। विपक्षक सदस्य सभ हर्षसँ थपड़ी पीटए लगलाह।

राति भरि क्यो यम प्रतिनिधि सुतल नहि। प्रात:काल दस बजे यम प्रतिनिधि सभा क बैसार प्रारम्भ भेल। यम सभा अध्यक्ष महोदय आशनपर विराजमान भेलाह। मत विभाजनक घन्टी बाजल। गुप्त मतदानक व्यवस्था छल। आधासँ अधिक सदस्य प्रधानक विरोधमे मतदान कए देलाह। यम सभा अध्यक्ष एहि निर्णयक घोषणा कए देल। प्रधान दल बदलक गम्भीर शिकार भए गेल छलाह। मुदा ई सभ कोना भेल से नहि कहल जा सकैत अछि।

प्रधानजी अपन त्याग पत्र यमराजकेँ दए देलखिन। मास दिनक भीतर एक बेर फेर नव मंत्रीमण्डलक गठनक तैयारी जोर-सोरसँ प्रारम्भ भेल। मुदा आब यम प्रतिनिधि सभ सेहो चितिंत छलाह। प्रतिनिधि सभा भंग होयबाक समाचार जोर-सोरसँ चारूकात पसरि गेल छल। यमराज सेहो सख्त रूखि अपनौने छलाह। तेँ हेतु सभक मत भए गेल छलैक जे एकटा ठोस मंत्रीमण्डल बनाओल जाए।

भूतनाथ ओ पिसाँच दलक नेता आपसमे बन्द कोठरीमे बैसार केलाह। तय ई भेल जे पिसाँच दलक नेता प्रधान बनताह। मंत्रीमण्डलमे दूटा उपप्रधान हेताह। एकटा उपप्रधान भूतनाथ दलक हेताह आ दोसर नव यम प्रतिनिधि गुटक नेता...। येन-केन प्रकारेण नव मंत्रीमण्डलक गठन भेल। यम प्रतिनिधि लोकनि आश्वस्त भेलाह जे जन सेवाक आब नीक अवसर हुनका सभहक हाथसँ नहि सरकतनि। यम प्रतिनिधि सभामे एहि मंत्री मण्डलकेँ विश्वास सेहो प्राप्त भए गेलैक। किछु दिन दोबारा यमलोकमे जनतंत्र बहाल भेल।

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नर्कक संसद

सुनैत जाइ जाउ सभासद सभ। आजुक कार्रवाही प्रारम्भ हेबासँ पूर्व सभाक रपट पढ़ल जाएत। तदुपरान्त नव सदस्यक उद्घोषणा होएत आ फेर आन-आन कार्यवाही। नवगठित सदनक अध्यक्षताक भार नर्कक वरिष्ठतम सदस्य मनमोहन केँ देल जाइत अछि।

ई ध्वनि होइत अछि। जनता दिसिसँ आवाज आएल-

अध्यक्षजी अपन परिचय देथि।

मुदा ताबते संसदक सचिव उठलाह-

बेस तँ सुनि लिअ। ई अत्यन्त निष्ठावान, नर्कक वयोवृद्ध आ वरिष्ठतम सहयोगी थिकाह। हिनका मर्त्यलोकमे फाँसीक सजाए भेटल छलनि। आ ओतए ई सिद्धहस्त खूनी छलाह। इलाका भरिमे हिनक यश पसरल छल। ओना, हिनकर खाता सभ दिन लाले रहलनि अछि, मुदा एतय अएलाक बादो वो कतेको कीर्तिमान स्थापित करैत रहलाह जाहिसँ यमराजक विशेष आज्ञासँ नर्क लोकमे रहबाक अवधि बढ़ैत रहलनि। हिनक दक्षताक सभसँ पैघ प्रमाण तँ इएह थिक जे एहू अवस्थामे नर्क लोकक सभटा सामान भयादोहन कए देल आ ककरो एकर भनकी तक नहि लगलैक। सौभाग्यवश कही वा जे कही, वो सभ सामान तस्करीक छलैक आ मृत्युलोकमे क्यो प्राणी अपन पूर्वजक प्रोन्नतिक हेतु परमात्माकेँ घूस स्वरूप गाया जा कए दान केने छल। चूँकी ई सभ सामन तस्करीक छलैक, तेँ एकरा नर्क लोकसँ गुजरए पड़लैक। वो पारगमनमे छलाह कि नर्क लोकक चुंगीक सिपाहीकेँ मेन्डेक्सक गोली खुआ निशामे बुत्त कए मनमोहनजी सभटा सामन ब्लैक कए देल। मुदा धर्मराजक खुपिया विभाग बड़ चौकस अछि आ मनमोहनक एहि सुकृतिक पुरस्कार भेटलनि। पाँच बर्ख अतिरिक्त नर्क बाससँ।

बाह-बाह..! एकदम सही आदमीकेँ अध्यक्ष बनाओल गेल।

जय हो़ !जय हो़!”

आबाज आएल चारूकातसँ।

ई निश्चय नर्कक गरिमा बढ़ओताह। थपड़ीक गड़गड़ाहटक बीचमे अध्यक्ष महोदय आसन ग्रहण कए उद्घोषणा कएल-

मान्यवर नर्कवासी लोकनि, अहाँ सभ जे हमर सम्मान कएल अछि से युगानुकूल अछि। कलियुगमे पापक पुरस्कार धड़ाकसँ भेट जाइत छैक। तस्करी करू कोठा पीटू, घूस लिय, इन्जीनीयर जमाए करू। त्याग, तपस्या ओ चरित्रक महत्वक जमाना चल गेलैक। आब तँ लूटि लाउ, कुटि खाउ। एहि बातमे अहाँ सभ गोटे पारंगत थिकहुँ। ओना, मृत्युलोकक नियम सभ किछु आओर थिक। ओतए कानूनक राज थिक, मुदा नामे के। से जँ सत्ते रहैत तँ एहिठाम नर्कमे कतेको भूतपूर्व महामहिम नहि पड़ल रहितथि। अहाँ लोकनिक सामने जे मंचपर छथि से मृत्युलोकमे बेस सम्मानित जन नेता रहि चूकल छथि। जय-जयकार होइत छलनि हिनकर। मुदा काजक हिसाबे नर्कमे तृतिय श्रेणी भेटल छनि। हुनका नर्कक गेटक रखबारी करबाक भाड़ भेटलनि। हमर कहब जे जहन मृत्युलोकमे सभ किछु दनादन चलिए रहल छैक, तँ नर्क लोक कथि लेल पाछा रहए। एही बातकेँ ध्यानमे राखि कए हम नर्क लोकमे पुन: भयादोहन कएल आ एकर परिणामो अनुकूले भेल।

चारू दिससँ थपड़ी पड़ए लागल। तदुपरान्त सचिव महोदय पूर्व सभाक कार्यवाही सदनक संपुष्टिक लेल प्रस्तुत करए लगलाह-

मान्यवर, पूर्व सभाक प्रमुख-प्रमुख कार्यवाही प्रस्तुत अछि-१. नर्कक बढ़ैत जनसंख्या वृद्धिकेँ देखैत एहिठाम यथाशीघ्र परिवार नियोजन पखवारा मनायल जाए। वस्तुत: मर्त्यलोकमे अपराधक संख्याक भारी वृद्धिक कारणेँ नर्कक संतुलन गड़बड़ायल अछि आ एहिसँ नर्कक वरिष्ठ वासी लोकनिकेँ नाना प्रकारक भयंकर कष्टक सामना करए पड़ि रहल छनि। अस्तु, ई प्रस्ताव पारित भेल जे सामान्य कोटिक पापीकेँ नर्कसँ फराक एकर सीमानसँ बाहरे उपनगरी बनाओल जाए।

(हर्ष ध्वनिक बीचमे लोक प्रस्तावक सहमतिमे थपड़ी पीटैत छथि।)

नर्कक चाहरदिवारी छोट अछि जाहि कारणसँ स्वर्गलोकसँ कतेको लोककेँ असानीसँ एहिमे फना देल जाइत अछि। हमरा लोकनि एहि तरहक प्रकृयाक घोर विरोध कए रहल छी। संगहि ई प्रस्ताव पारित कएल जाइत अछि जे नर्कसँ ओतबे संख्यामे लोककेँ स्वर्ग जेबाक प्रावधान कएल जाए।

आवाज होइत अछि-

हमरा लोकनि स्वर्ग हरगिज नहि जाएब। हमरा सभकेँ नर्के नीक लगैत अछि। एहिठाम पाकिटमारीक खूब गुंजाइश छैक। स्वर्गमे तँ ककरो पाकिटे नहि छैक। ई प्रस्ताव मंजूर नहि अछि।

सचिव महोदय एकाएक प्रस्ताव सभ पढ़ैत गेलाह आ उपस्थित नर्कवासीगण बेरा-बेरी थपड़ी पीटैत गेलाह। एतबहिमे नर्कक घन्टा सभ घनघनाय लागल। पता लगलैक जे नर्कमे एकटा महापापीक प्रवेश भेल अछि। ओकरा यमदूत नाना प्रकारक यातना दए रहल छलैक। मर्त्यलोकमे ओ गम्भीर अपराधी छल। मुदा ओकरा लेल धनि-सन। नर्कलोकमे एहन यातनाक मध्यो वो कनखी मारैत हँसैत आगू बढ़ैत सभहक अभिनन्दन करैत चलि रहल छल। ताबतिमे नर्कवासीक किछु उचक्का ओकरा गोलिओलक आ ओकरा जेबीमे ओकर संतति द्वारा दान कएल गेल जे किछु कैंचा आ वस्तु छलैक से छीनि लेलक। ओ कनीके आगा बढ़ल की ओकरा अपन कका नजरिमे अएलैक। ओकरा बड़ आश्चर्य लगलैक। ओकर कका तँ बेस भक्त छलैक। तीन फट्टा चानन करैत छलैक। भोर-साँझ स्नान करैत छलैक। ओ घन्टा-घन्टा भरि पूजा करैत रहैत छलैक। अरे! ओकर ककाका पाछा तँ एकटा वोर्ड लागल छलैक।

मर्त्यलोकमे ढोंग करबामे कुशल रंजनजी अपना जीवन कालमे कतेको डकैती वो हत्या काण्डमे सम्मिलित रहला।- भातिज गुम्म।

बाह रे कका! ओहिठाम तँ बेस हवा बनौने छलाह।

संसदक अधिवेशन जोरपर छलैक। नव-नव सदस्यक परिचय कराओल जाइत छलैक। पण्डालक अग्रभागमे नव सदस्य सभकेँ राखल गेल छल।

ई थिकाह ब्रजमोहन। भूतपूर्व मुख्य मंत्री। ई अपन शासन कालमे फुसि बजबाक कीर्तिमान बनौलथि। कहिओ बैमानी करबासँ नहि हिचकला। मुदा पहिरन-ओढ़न बेस स्वच्छ सात्त्विक। हिनका नर्कमे स्थायी स्थान भेटलनि अछि। ओना सामान्य कोटिक पापीकेँ दोसर ओ तेसर सालपर कागज-पत्रक समीक्षा होइत छैक। मामलाकेँ फेरसँ जाँच-पड़ताल होइत छैक, मुदा हिनकर मामलामे यमराज एकतरफा निर्णय सुना देल जे ई नर्कक स्थायी सदस्य हेताह आ हिनकर कागज-पत्रकेँ गोपनीय कए देल जाए ताकि चित्रगुप्तक सहायक लोकनि ओहिमे कोनो प्रकारक हेरा-फेरी नहि कए सकथि।

तिलक क पार आएल। टांग टुटि गेल छलनि। यमराजक पूत सभ लादि कए नर्क पुरी आनि रहल छल कि अकस्मात ओकर टांग नक्षत्रमे घुमि रहल स्काइलैवक टुकड़ीसँ टकड़ा गेलैक जाहिसँ भयंकर दुर्घटना भेल ओ तिलक प्रेतक टांग कटि गेलनि। ओना,तिलक मृत्युलोकमे मुखिया छलाह। ब्लौक डेबलपमेन्ट कमीटीक कार्यकारिणीक सदस्य छलाह ओ गाममे बेस धाख छलनि। गाममे राजनीति कए इलाकाक लोककेँ अपना दिसि कए अपन सहोदर भाएकेँ रातिये-राति निपत्ता कए देलनि। ओना, बाहरमे बेस बिलाप कएलनि। छाती पिटलनि। थानामे रिपोर्ट दर्ज करेलनि। इत्यादि-इत्यादि। मुदा संयोग जे ओहि समयमे नर्कमे समयोपरि काज चलि रहल छलैक आ भारतक विभागक किरानी काज कए रहल छलाह। नर्कलोकसँ वो सभ घटनाक दूरदर्शनपर देख रहल छलाह। नर्कक कागज-पत्रमे सभ लिखल छल। यमराजक कोर्टमे पहुँचि कए वो अवाक रहि गेलाह।

के बाहर केलक ई सभ..!”

सोचैत छलाह। एवम् प्रकारेण एकसँ एक नवागन्तुक सदस्यक परिचय होइत गेल।

एतबहिमे भयंकर हल्ला सुनबामे आएल। दर्शक दीर्घासँ कूड़ा फेकल जा रहल छल। क्यो गोटे जोर-जोरसँ उद्घोष कए रहल छल-

भाई लोकनि! यमराजक अत्याचारसँ हमरा लोकनि उबि गेल छी। नर्कक व्यवस्था साफ गड़बड़ा गेल अछि। हमरा लोकनि २५ बर्खसँ बिना सुनबाइ-के हाजतमे पड़ल छी।

एतबहिमे दसटा बेस नमगर पोरगर जवान सभ हाथमे हथकड़ी लेने प्रवेश कएलक। हाथमे डंटा छलैक ओ आँखि लाल कए रहल छल।

संसदमे विरोधी पक्षक नेता गड़जि उठला-

ई संसदक घोर अपमान थिक। संसदक अध्यक्षक अनुमतिक बिना एहिमे पुलिसक एहि प्रकारक प्रवेश निंदनीय थिक।

चारू दिससँ सदस्य सभ फानय लगलाह। यमराजक प्रतिनिधि टीक पकड़ने हुनका अगत-अगत कए रहल छल। भयंकर कोलाहलसँ जखन किछु श्रुतव्य नहि रहि गेल तँ अध्यक्ष महोदय हारि कए सदनक कार्यवाही, ओहि दिनक हेतु स्थगित कए देल। संसदक किछु भाँगठ सदस्य भीड़मे डगमगा कए खसि पड़ि रहल छलाह। धक्कम-धुक्कीमे किछु नांगड़ सदस्यक दोसरो टांग आहत भेल जा रहल छलनि। बड़ी मोसकिलसँ वोहि दिन नर्कवासी अपन-अपन डेरा आपस पहुँचलाह।

 

रबीन्द्र नारायण मिश्रक

नमस्तस्यै

आगाँ...

३५.

जाबे अरुणओ एडली लन्दनमे पढ़ाइ-लिखाइ करैत रहए ताबे दुनू गोटे दू देह आओर एक आत्मा छल। अरुण सोचैक तँ एडली बजैक। एडली सोचैक तँ अरुण बजैक। दुनूक दोस्ती से परमान चढ़ल जे दोसर सभकेँ इर्ष्या होमए लगलैक। क्यो-क्यो चौल करैक जे ई दुनू कहीं आपसेमे ने बिआह कए लिअए। जाधरि ओ सभ संगे रहल दिन रातिक कोनो पता नहि चलैक। दुनू संगे पढ़ए, संगे टहलए आओर संगे खाए यद्यपि दुनूकेँ छात्रावासमे अलग-अलग कोठरी रहैक मुदा बेसी काल दुनू एक्केठाम रहए। प्रेमक पराकाष्ठा कहल जाए तँ हर्ज नहि।

मुदा एकर सभक प्रेमक बीचमे आबि गेलैक एंगल। एंगल एडलीक मित्र छलैक। ओ एडलीक शिक्षको रहैक। मुदा ताहिसँ की? पाश्चात्य संस्कृतिमे ई सभ चलैत छल। अरुणक एडलीक संग घनिष्टताक कारण एंगलक अरुणो लग उठब बैसब होइते छल। देखए सुनएमे अरुण आकर्षक छलहे संगहि ओकर प्रतिभाक चर्च सगरे कालेजमे छल।

एक दिन एडली ओ एंगल पिकनिक मनाबए लन्दनक लगीचक झील जा रहल छल। एंगल कहलकै जे अरुणोकेँ संग कए लेल जाए। एडली ई प्रस्ताव अरुण लग रखलक तँ ओ सहर्ष तैयार भए गेल। तीनू झीलक कातमे बैसल छल। जाड़क समयमे हल्लुक रौद ओकरा सभपर पड़ि रहल छल। झीलक चारूकात अर्द्धनग्न जोड़ी सभ अपना-आपमे मस्त छल। क्यो ककरो देखत से होश नहि रहए।

एहन मनमोहक ओ उत्तेजक वातावरणमे एडली, एंगल ओ अरुण एक दोसरकेँ देखि रहल छल। एंगलकेँ की फुरेलैक जे ओ अरुणकेँ हाथ धए खिचलक आओर चलैत गेल। एडली देखिते रहि गेल। तहिआसँ अरुणक एंगलसँ आकर्षण बढ़िते गेल। साँझमे एडली, एंगलमे कहा-सुनी भेलैक। मुदा एंगल अपन जिद्दपर अड़ि गेलैक। ओ अरुणक प्रति अपन आकर्षणक आगू किछु नहि सोचि सकल। एडली ओकर पुरान दोस्त रहैक, मुदा सेहो पाछु रहि गेलैक। एडली बाजी हारि चुकल छल।

एडली बुधियार छल। ओ बातकेँ बतंगर बनबएमे विश्वास नहि करैत छल। अस्तु स्थितिसँ समझौता करैत ओ अरुणसँ अपन मित्रता बनओने रहल। एंगलसँ विचार करएमे सेहो कोनो लाभ नहि छलैक। तेँ सभ चुपचाप सहि गेल। तकर लाभ ओकरा भेलैक। गाहे-बगाहे एंगल ओकरो ध्यान रखैत रहल। एवम् प्रकारेण अरुण, एडली आओर एंगलक तिकड़ी बनि गेल, ताबे ओहिना रहल जाबे अरुण लन्दनमे रहए।

अरुण प्रशासकीय सेवामे उत्तीर्ण भए गेल छल। तकर बाद ओकरा अपन देश आपस अयबाक रहैक। एंगल संगहि जयबाक हेतु जिद्द कए देलकै। एडली सेहो एहि हेतु अरुणकेँ बुझओलक। अन्तगोगत्वा अरुण ओ एंगल संगहि दड़िभंगा आएल। एडली ओतहि रहि गेल।

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३६.

पूर्व निर्धारित कार्यक्रमक अनुसार दड़िभंगामे प्रगतिशील जागरण मंच ओ जनजागरण मंचक राष्ट्रीय कार्यकारिणीक सम्मेलन बजाओल गेल। देश भरिसँ ज्ञात-अज्ञात करीब पाँचसए प्रतिनिधिभाग लए रहल छलाह। दड़िभंगाक राज मैदान टेंटक शहर बनि गेल छल। कतहु लाल, कतहु हरिअर झंडा फहरा रहल छल। राष्ट्रभक्तिसँ भरल ओजस्वी गीत सभ बजाओल जा रहल छल। एहि वातावरणमे रहि-रहि कए तरह-तरहक सूचना प्रसारित भए रहल छल।

जनाधार पार्टीक सेहो आमंत्रित कएल गेल छल। परन्तु ओ सभ एहिमे भाग ली, नहि ली से दुबिधामे रहि गेलाह। स्वतंत्रताक लड़ाइ एकजुट भए लड़ब ई तँ नीक बात रहैक, मुदा नेतुत्वक समस्या ओझड़ाएल रहैक। अन्ततोगत्वा तय भेल जे ओ सभ फिलहाल यथावतक स्थितिमे रहत। माने अपन अलग आस्तित्व बनओने रहत। मुदा जनाधार पार्टीक नव निर्वाचित मुखिआ चेतन व्यक्तिगत स्तरपर आएल छल। ओकरा संगे दू-चारि गोटे आओर आबि गेल रहए।

कार्यक्रम प्रारम्भ होइते बंदे मातरम्-क नारासँ धरतीसँ आकाश एक भए गेल। सभ एक स्वरसँ सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम्” गबैत गबैत भाव विभार भए गेल। तकर बाद राजकुमार विस्तारसँ राष्ट्रीय परिदृष्यक वर्णन करैत दुनू मंचक अंदरुनी स्थितिक चर्चा केलाह आओर घोषणा केलाह जे आइसँ दुनू मंचक विलय भय गेल अछि। आब एहि मंचक नाम राष्ट्रवादी दल रहत।

एतबे बात ओ कहने छल कि उमा अपन संगे १५-२० टा महिलाक संगे नारा लगबैत मंच धरि पहुँच गेलि। हुनका सभक हाथमे पट्ट छल जाहिपर मोट-मोट आखरमे लिखल छल-

स्त्रीक सम्मान बिना स्वतंत्रताक गप्प निरर्थक थिक।

उमाकेँ एहि तरहेँ आओर महिला सभक संगे एहि तरहेँ आक्रमण देखि सभ सकदम भए गेलाह। बैसारक कार्यवाही रुकि गेल। जे जेना छल, तहिना रहि गेल। लगलैक जेना सम्पूर्ण वातावरणकेँ लकबा मारि देने हो। राजकुमार ओ मास्टर साहेबकेँ किछु फुरेबे नहि करनि।

बैसारमे भाग लैत अधिकांश लोक उमाक समर्थनमे बाजए लगलाह। ओहिमेसँ किछु गोटे तँ उमा लग आबि ओकरे संगे नारा लगबएलगलाह। आब की होएत?

मास्टर साहेब स्वयं उठि कए उमा लग गेलाह। जन भावनाक आदर करैत उमाकेँ मंचपर लए अनलखिन। तकर बादे बैसारक कार्यवाही प्रारम्भ भेल।

चारूकातसँ लोक उमाक समर्थनमे आबि गेल आओर आग्रह करए लागल जे उमाकेँ नवोदित राष्ट्रवादी दलक अध्यक्षा बनाएल जाए। मास्टर साहेब, राजकुमार उमासँ मंत्रणा कए हुनका राष्ट्रवादी दलक अध्यक्ष चूनि लेल गेल। उमा देवीक जयसँ वातावरण गुंजायमान भए गेल।

राष्ट्रवादी दलक गठनसँ जनाधार पार्टीमे आपसी सिरफुटौअल बढ़ि गेल। पार्टी कतेको गुटमे बँटि गेल छल। पार्टीमे किछु गोटे राष्ट्रवादी दलक संगे विलएकपक्षधर रहथि। एहिसँ स्वतंत्रता आन्दोलन प्रखर होइत। मुदा पार्टीक बूढ़ नेता सभ चाहथि जे यथावत बनाओल रहए देल जाए कारण ओ सभ अपन अपन कुर्सीकेँ संकटमे नहि देबए चाहथि।

उमाकेँ राष्ट्रवादी पार्टीक अध्यक्षा बनबाक समाचार अरुणकेँ जासूसक माध्यमसँ भेटलैक। ओ अत्यन्त विचलित भए गेल। उमाक एहि तरहक प्रतिकृयाक ओकरा आशा नहि छल।

महौलकेँ गड़बड़ाइत देखि अरुण एंगलक संगे किछु दिनक हेतु लन्दन सरकारी यात्रापर चलि गेलाह। हमर माए दुखित पड़ि गेल छल। ओकरा असगरमे बहुत दिक्कत भए रहल छलैक। तेँ किछु दिनक हेतु हम अपन नैहर गेलहुँ जाहिसँ माएकेँ सेवाक अवसर भेटए। एक युगक बाद हम नैहर गेल रही। हमरा देखिते हमर माए बहुत प्रशन्न भेल। लगलैक जेना तुरन्त ठीक भए गेल। टन-टन बाजए लागलि।

असलमे ओ एकाकीपनसँ उबि गेल छलि। फेर दिआदसभ सेहो तंग करनि। सम्पत्तिमे हिस्सा नहि दैक जाहिसँ ओ बहुत दुखी छलि। हमर अपन पित्ती सेहो गुजरि गेलाह। हुनका तीनटा बेटीए रहनि। अस्तु, हमर सभक समस्त सम्पत्तिकेँ हमर पितिऔत काका हरपि लेबए चाहैत छल।

माएक स्वास्थ ठीक भेल। ओमहर हमरा सासुरसँ विदागिरीक हेतु समाद आबि गेल छल। मासो दिन नैहरमे नहि भेल छल। मुदा कै बेर विदागरीक हेतु आदमी आबि चुकल। अन्तमे ओ स्वयं आबि गेलाह आओर हम सासुर विदा भए गेलहुँ।

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३७.

वृन्दावन बिहारी लाल की जय।निरंतर भजन, कीर्तन ओ प्रवचनमे तल्लीन भजनानन्ददासजी महराज अध्यात्मिक पराकाष्ठापर पहुँच गेल रहथि। एकहि जीवनमे व्यक्तित्वक एहन रूपातंरण कमे सूनएमे अबैत अछि। किन्तु जन्म-जन्मक संस्कार जेार मारैत अछि। जीवनक कतेको रहस्य अछि जकर गणितीय व्याख्या असम्भव। परन्तु सद्य: सत्य इएह छल जे एकटा डकैत गरम सिंह महान कृष्णभक्त भए गेलाह।

ततबे नहि लोक कल्याण हेतु सर्वस्व, समस्त सामर्थ्यकेँ अर्पित कए देने छलाह। जहिना ओहि आश्रममे धनक बर्खा होइत छल तहिना ओहि पैसाक जन कल्याण हेतु खर्च कए देल जाइत छल। कहबी छैक :

पानी बाढ़े नावमे, घरमे बाढ़े दाम

दोनो हाथ उलिचिये, एही सयानो काम।

एहि कथानकक भजनानन्दजी महराज एकटा जीवन्त उदाहरण छलाह। अपना लेल किछु नहि। तेरा तुझको अर्पणकेँ चरितार्थ करैत छलाह, अपन आश्रममानव जातिक कल्याण हेतु उपलब्ध कए देने छलाह।

आश्रममे तँ भजन किर्तन चलिते रहैत छल। भण्डारा चलिते रहैत छल। भक्तगण सभ मृदंग, ढोलक, पखावज ओ झालि बजाए कृष्ण नाम संकिर्तन करिते रहैत छलाह। समस्त वातावरण ततेक धार्मिक ओ भावनापूर्ण रहैत छल जे ओहिठाम अएनिहार कोनो, केहनो व्यक्ति शान्तिक अनुभव करैत छल।

मुदा भजनानन्दजी एतबेपर नहि ठहरल छलाह। ओ अपन राष्ट्रक प्रति कर्तव्यसँ सेहो सचेत छलाह। हुनकर कहब छलनि जे जाधरि भारतमाता परतंत्रताक बेड़ीसँ जकड़ल छथि, ताधरि स्वर्गो व्यर्थ थिक। मुक्तिक कामना अन्याय थिक।

के बोले मा तुमि अबले...।नहि, नहि, भारत माता अवला कदापि नहि भए सकैत छथि। कोटि, कोटि हुनक संतान हुनक प्रतिष्ठा ओ स्वतंत्रताक रक्षा हेतु र्स्वस्व त्याग करए हेतु कृतसंकल्प अछि। देश स्वतंत्र भए कए रहत।भारत माताक जय! वन्दे मातरम्- इएह कहि हुनकर प्रवचनक अन्त होइत छल।

राष्ट्रवादी दलक आर्थिक समस्याक समाधान तँ भजनानन्ददासजी महराजक आश्रमक माध्यमसँ भए जाइत छल। महराजजीक एकटा भक्तक दड़िभंगामे तीन महलक भवन छलैक। ओ तीनू महल भजनानन्दजी प्रेरणासँ राष्ट्रवादी दलकेँ दान कए देलक। स्वयं दुनू व्यक्ति दिन-राति राष्ट्र सेवामे लागि गेल। फिरंगी सभ एक हिसाबे हिलि गेल छल। ओकरा सभकेँ राष्ट्रवादी दलक बढ़ैत शक्तिसँ ततेक व्याकुलता भेलैक, ततेक भय भए भेलैक जे इज्जतिसँ देश छोड़बाक रस्ता ताकय लागल।

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३८.

अरुण एंगल केर संग लन्दन हवाइ अड्डापर पहुँचले छल कि एडली हवाइ अड्डापर पहुँच गेल। लगैत छल जेना ओ बहुत दिनसँ एहि अवसरक प्रतिक्षामे छल। ओकर फाटल- फाटल हरिअर ऑंखि बहुत किछु कहि रहल छल। हवाइ अड्डासँ अरुण ओ एंगल वहिर्गमन द्वारपर एडलीक स्वागतसँ अभिभूत छलाह।

अरुण सरकारी काजसँ जोगार लगाए लन्दन गेल छल। ओहिठाम आवास सहित आओर आवश्यक सुख-सुविधाक प्रबन्ध छल। ओसभ ओतहि जेबाक हेतु उद्यत छल परन्तु एडली अड़ि गेल। ओकर बात काटबओकरा सभक बसमे नहि छल।

अस्तु, ओ सभ एडलीक बात मानि ओकर घर दिसि विदा भेल। अरुण लेल ओकर घर नव नहि छल। लन्दन प्रवासक दौरान ओ सभ कतेको दिन ओतए रहल छल। अबैत जाइत छल। एक हिसाबे ओ सभ ओकर पारिवारिक मित्र भए गेल छल। लन्दन पहुँचि अरुणकेँ उसास तँ भेलैक। कमसँ कम उमाक घात-प्रतिघातसँ तात्कालिक राहत भेटलैक। संगे पुरान दोस्त सभसँ भेँट-घॉंट होइत रहलैक। ओकरा सभक संगे बिताओल मधुर, स्नेहिल समयकेँ पुन: सद्य: जीबाक अवसर भेटलैक। सरकारी कामकाज तँ बहाना छल।

एक दिन एडलीक ओहिठाम रहि अरुण सरकारी अतिथि गृहमे चलि आएल। एंगल ओ एडली ओतहि रहल। ई दुनू तँ पुरान दास्त छल। बहुत दिनक बाद एकठाम भेल छल। लगलै जेना बिर्डो उठि गेल। दुनूकेँ गप्पक अन्ते नहि होइक। गप्पेटाक बात रहितए तँ कोनो बात नहि। लगबे नहि करैक जे अरुण ओकरे संगे आबि कए कतहुँ आनठाम रुकि एंगलक प्रतीक्षा कए रहल अछि।

आखिर लन्दन, लन्दन छैक। ओहिठामक अन्मुक्त वातावरणमे बढ़ल, पढ़ल एंगल ककरो हेतु बान्हल छेकल कतेक रहि सकितैक? एहनमे तँ अरुण स्वयं सोचि सकैत छलाह। मुदा भावी प्रवल। जे हेबाक छल से भेल। दुखक बात तँ ई छल जे एहूकात गाड़ी घिसिर-फिसिर करैत छल। ओहिकात तँ सद्य: उमा गरजि रहल छलैक। अरुण सचमुचमे बेचारा भए गेल छल। कहबी ठीके छै- ने दौड़ि चली, ने ठेंसि खसी।

एक सप्ताह बहुत नहि होइत छैक। देखिते देखिते शनि, रबि आबि जाइत छैक। पाँच दिनका खटैनी दू दिनका सप्ताहान्त अवकाशमे गलि जाइत छैक। अरुण सेहो पाँच दिन लन्दनक सरकारी काजमे व्यस्त रहल मुदा शुक्रक साँझ अएलापर माथ ठनकलै। आब की कएल जाए? एंगलक अएबाक गप्प कोन, फोनो नहि केलकै। ओ तँ एडली संगे तेना कए रमि गेलैक जे आगा- पाछा किछुक सुधि नहि रहलैक।

अरुण जखन एडलीक ओतए पहुँचल तँ पता लगलैक जे ओ सभ लन्दनसँ बाहर चलि गेल अछि। कतए गेल से घरक लोक ने अपना मोने किछु कहलकै आ ने अरुण पुछलक। ओहिठामक समाजमे बेसी खोध-बेधक परम्परा नहि छैक। बहुत रास बात व्यक्तिगत रहि जाइत अछि।

अरुण गुम्म छल। ओकरा एहि बातकेँ आब आभास भए रहल छलैक जे अपन सभक माटि-पानिमे जन्मल, पोसाएल पुरुखक बिआहक एहन कल्पना रहैत छैक जाहिमे ओकर स्त्री आजन्म ओकरा प्रति निष्ठावान रहैक, ओ जे चाहए सएह करैक, मुदा ई तँ लन्दन छै। से बात बहुत बिलंबसँ बुझए आबि रहल छलैक।

एडली ओ एंगल स्कूटरपर लन्दनसँ करीब चालीस किलोमीटर दूर एकटा रिजार्टमे ठहरए हेतु जा रहल छल कि एकटा तेज गतिसँ चलैत कार ओकरा टक्कर मारि देलकै। टक्कर ततेक जबरदस्त छल जे स्कूटर पचरा भए गेल। हेडली ओहीठाम कै पलटी खेलक मुदा कोनो बेसी चोट नहि लगलैक। परन्तु एंगल हवामे कै फीट ऊँचाइ धरि फेका गेल आओर धरामसँ नीचा बीच सड़कपर खसल। ई तँ संयोग छलैक जे पाछुसँ अबैत दोसर कारक वाहन चालक एकाएक ब्रेक लए लेलक नहि तँ ओतहि ओ टुकड़ी-टुकड़ी भए जाइत।

एहि दुर्घटनामे एंगलक दहिना जॉंघक हड्डी टुटि गेल छलैक। कनी- मनी चोट तँ सौंसे देहमे छलैक। एडलीक हालत सेहो ठीक नहि छलैक। क्रमश: दुनू पैर फुलि गेलैक जाहिसँ चलबामे असोकर्य होइत छलैक।

कहुना कए स्थानीय पुलिस एकरा सभकेँ लन्दनक प्रतिष्ठित अस्पतालमे भर्ती करओलक। अरुणकेँ सेहो पुलिस द्वारा सूचना भेटल। ओ तुरन्त अस्पताल पहुँचल। ओ एंगलक हालत देखि दुखी भए गेल। जाबे एंगल अस्पतालमे रहल ताबे ओहो ओतहि रहल। मुदा तकर बादक चिन्तासँ ओ व्यग्र रहए लागल।

शुरूमे अरुणक कार्यक्रम छलैक जे ओ तीन-चारि मासमे अपन देश आपस आबि जाएत। मुदा गाम-घरसँ जे समाचार सभ भेटैक आओर जाहि प्रकारेँ उमा उग्रसँ उग्रतर भए रहल छलि, ओकर मोन बेचैन भए जाइक, कोनो समाधान नहि फुराइक।

संयोग एहन भेलैक जे अंग्रेजसभकेँ खुफिआ रिपोर्ट भेटलै जे अरुणकेँ हितमे नहि छल। ओकरा सभकेँ अरुणक गति-विधिपर सन्देह भए गेल छलैक। तेँ ओकरा कम-सँ-कम साल भरिक हेतु लन्दनमे रहबाक आदेश कए देलक।

सरकारी आदेश छलैक, तेँ अरुणकेँ कोनो विकल्पो नहि रहैक। ओकर मोन निरन्तर अपन गाम-घरपर टांगल रहैत छलैक। तथापि ओ अपना आपकेँ लन्दनमे व्यस्त कए लेलक। दिन भरि कार्यलयमे समय बीति जाइत छल। साँझ कए समय बिताबक हेतु एतए बहुत जोगार सभ छलैक।

एंगल अस्पतालसँ छुटि कए अरुणक डेरापर अएलैक। मुदा ओकरा नीकसँ चलल नहि होइक। डाक्टरक परामर्शक अनुसार ओकरा फिजिओथिरैपीक प्रयोजन रहैक। सभ सुविधा आसे-पासमे उपलब्ध छल। मुदा घरमे बैसल-बैसल ओ तंग भए रहल छलि। कोनो उपायो नहि रहैक। अरुण कार्यालय चलि जाइक। दिन भरि ओ एसगरि कहुनाक समय बिताबथि।

एहिना एक दिन ओ उदासघरमे किछु पढ़ि रहल छलि कि एडलीक फोन आएल। एंगल ओकरा तुरन्त आबए हेतु आग्रह केलक। एडली बिना विलम्ब केने ओतए आबि गेल। दिनभरि दुनू गोटाकेँ गप्प-सप्पमे समय कोना बीति गेल सेपता नहि चलल। साँझमे ओ अपन घर आपस जेबाक इच्छा व्यक्त केलक। ताबत अरुण सेहो आबि गेल रहए। अरुण ओ एंगल दुनू गोटे ततेक आग्रह केलकै जे ओ ओहीठाम रहि गेल। एंगल, एडली संगे तेहन तल्लीन भए जाइक जे अरुणकेँ करए हेतु किछु रहिए नहि जाइक। कखनहुँक ओहो गप्पमे लारि देबाक प्रयास करैक मुदा ओकरा सभक हेतु धनिसन।

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३९.

अरुण लन्दन चलि गेल से समाचार हमरा सभकेँ खबासिनीक माध्यमसँ भेटल। एहि बेर ओ बहुत दिनपर आएल छलि। गप्प-सप्पक क्रममे कहए लागलि जे हमर माए सम्पत्तिमे बँटबारा हेतु बहुत हल्ला केलकै। मुदा हमर पितिऔत काका टस सँ मस नहि होइत छैक। ओकर कहब जे बेटीक बिआह भइए गेल। तखन अहॉंकेँ खोरिसक अतिरिक्त किछुके अधिकार नहि अछि। कतेको बेर बैसार भेलैक। पंचसभ सेहो ओकरे संग भए गेलैक। बहुत रास सम्पत्ति तँ ओ अपना नामे करा चुकल छल।

ई बात सभ जखन हुनकर कानमे गेलनि तँ दड़िभंगामे मोकदमा कए देलाह। दड़िभंगाक नामी ओकिल मोना बाबू हमर सभक केस लड़ि रहल छलाह। कोर्टसँ नोटिस जारी भेल। हमर पितिऔत काकाकेँ दिआद सभ बहुत कहलकै। अनततोगत्वा ओ पसीजल आओर पाँच बीघा जमीन हमरा माएकेँ देबाक हेतु तैयार भए गेल। ओ एहि प्रस्तावकेँ मानि लेलाह। जतए हम सत्तरि बीघाक उत्तराधिकारी रहितहुँ कतए मात्र पाँच बीघापर समझौता करए पड़ल। कोनो विकल्पो नहि छलैक। कानूने तेहने छलैक।

समय बीतैत देरी नहि होइत अछि। देखिते-देखिते हमर बच्चा सभ जबान भए गेल। तीनू बेटीक पढ़ाइ पूरा भए गेल। ओ सभ अपन अपन रूचिक विषयमे एमए पास कए चुकल छलि। एकमात्र पुत्र सेहो इंजीनियरिंगमे पढ़ैत छल। एकरा सभक पढ़ाइ-लिखाइमे अरुणक गम्भीर योगदान छलैक। आर्थिक चिन्ता तँ कहिओ होमए नहि देलक।

पढ़ि-लिखि तँ गेल मुदा आब की कएल जाए। ई समस्या विकट छल। कारण ओहि समयमे बेटीक पढ़ाइ-लिखाइ बिरलैके क्यो करैत छल। से हम सभ केलहुँ आओर जेना-तेना पार लागि गेल। मुदा भविष्यक संघर्ष आओर प्रवल लगैत छल।

इएह सभ सोचैत रही कि हमर तीनू बेटी गाम आएल। ओकरा सभकेँ देखि मोन गदगद भए गेल। सभक व्यक्तित्वमे अद्भुत चमक छलैक। आत्मविश्वाससँ भरल छल। विद्यासँ ओकरा सभकेँ बहुत आत्मशक्ति प्राप्त भए गेलैक आओर ओ सभ जीवनमे किछु स्थान बनबए हेतु कृतसंकल्प लगैत छलि।

जहियासँ राष्ट्रवादी दल बनल, जनाधार पार्टीक जनाधार तेजीसँ खसकि रहल छल। राष्ट्रवादी दलक कमान उमाक हाथमे पड़िते चारूकातक स्त्रीगण खास कए मध्यवर्गीय परिवारक, ओहि दलसँ जुड़ए लागलि। लगैक जेना देशमे क्रान्ति आबि गेल अछि।

शिक्षा नहि, पारिवारिक सम्पत्तिमे हिस्सा नहि, घरसँ बाहरो निकलबाक परिस्थिति नहि, आखिर एहि बातक प्रतिकार तँ भेनहि रहैक। अस्तु, अवसर भेटिते एक दिस तँ बन्देमातम्”केर नारा लगैत तँ दोसर दिस स्त्री सम्मानक रक्षाक चर्चा सेहो जोर पकड़ने जाइत छल।

फिरंगी सभ एहि बातसँ चिन्तित छल। ओकरा सभकेँ किछु फुरेबे नहि करैक जे एहि परिस्थितिसँ कोनो निपटी। तखन ओ सभ सोचलक जे जनाधार पार्टीक मदति लए आपसेमे उठापटक कराओल गेल।

जहिआसँ चेतन जनाधार पार्टीक अध्यक्ष भेल छल, ओकर फिरंगी सभसँ पहिल भेँट-धॉंट रहैक। मुदा फिरंगीसभ ओकरा प्रभावमे नहि आनि सकल।

राष्ट्रवादी दलक प्रभावसँ हमर तीनू बेटी- हीरा, वाणी ओ गंगा प्रभावित छलीह। देश ओ समाजक हेतु किछु करबाक इच्छा हुनका सभकेँ उद्वेलित कएने छल। उच्च शिक्षा प्राप्त कए ओ समाजक दुर्दशाकेँ बेसी नीकसँ बुझैत छलीह। अस्तु, ओ सभ सभ काजकेँ पाछु कए उमाक संग भए गेलीह। राष्ट्रवादी दलक सक्रिय सदस्यता ग्रहण कए गाम-गाममे घूमए लगलीह।

आब उमा एसगरि नहि छलीह। छोट, पैघ, जवान, बूढ़ सभ ओकरा संग दए रहल छलैक। असलमे गाम-गाममे पसरल एहि अन्यायसँ मुक्तिपाबक एकटा अवसर आबि गेल छल। जतहि देखू बन्दे मातरम्” केर नारा लागि रहल अछि। भारत- माताक जयगान भए रहल अछि। एकहि स्वरमे समाजमे युग-युगसँ पसरल वैमनस्यता, भोदभाव, शोषणक विरुद्ध आक्रोश सेहो तीव्रतर भए रहल अछि। क्यो-क्यो कहैत छल जे समाजकेँ बिखण्डित करबाक ई फिरंगी सभक नव हथकंडा अछि।

राष्ट्रवादी दलमे महिलाक पैठसँ सभसँ बेसी प्रशन्नता भजनानन्ददासजीकेँ भेलनि। हजारो सालसँ यातनापूर्ण जीवन जीबए हेतु विवश स्त्रीगणकेँ अभिव्यक्ति एकटा साधन भए गेल छल राष्ट्रवादी दल। जखन कखनो नव प्रयोग होइत अछि, चाहे ओ सही हो, गलत हो, जे हो, ओकर विरोध, प्रतिरोध होइते अछि। मुदा ओहो विकासक एकटा पदचापे बुझबाक चाही। अन्ततोगत्वा मनुक्खक प्रयास सफल होइते अछि। से नहि होइत तँ मनुक्खक विकास नहि भए सकैत अछि। आदिकालसँ लोक परिस्थितिसँ संघर्ष केलक आओर आगा बढ़ल अछि।

भजनानन्ददासजी भक्ति, अध्यात्म ओ राष्ट्रवादक प्रखर घ्वजवाहक भए गेल छलाह। गाम घरमे भए रहल सामाजिक, राजनीतिक घटनाक्रमसँ आश्रममे अएनिहार लोकक माध्यमसँ ओ पूर्ण अवगत छलाह। हुनकर एहि उदारताक लाभ राष्ट्रवादी आन्दोलनकेँ भेटि रहल छल। एही बात सभकेँ ध्यानमे रखैत राष्ट्रवादी दलक अगिला बैसार वृन्दावनमे करबाक निर्णय भेल।

 

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