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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१७.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

बेचन ठाकुरजीक दूटा एकांकी-

  

नीशा मुक्‍ति बरहम बाबा

नीशा मुक्‍ति

 

पात्र परिचय : नीशा मुक्‍ति

1.      शंकर :          एकटा गरीब किसान

2.    सुनैना :         शंकरक पत्नी

3.    सुन्नर :                    शंकरक बड़का बेटा

4.    खखन :         शंकरक छोटका बेटा

5.    शान्‍ति :         शंकरक बड़की बेटी

6.    चानी :          शंकरक छोटकी बेटी

7.    खट्टर :                    शंकरक दोस

8.    मीना :                    सतमा वर्गक छात्रा

9.    राजीव :         मीनाक इसकूलक छात्र

10. रौशन :         मीनाक इसकूलक छात्र

11.  केदार सिंह :   पहिल पुलिस

12.  बदरी सिंह :   दोसर पुलिस

13.  रघुनाथ :       पहिल चौकीदार 

14. देवनाथ :      दोसर चौकीदार

15.  मटरा :         स्‍थानीय किराना दोकानदार

16.रामनाथ :       रेल यात्री

17.  प्रभुदयाल :   रेल यात्री

18.  नन्‍द किशोर : रेल यात्री

19. प्रियंका :       रेल यात्री 

20. शशिकान्‍त : प्रधानाध्‍यापक

21. सोमदेव :      सहायक शिक्षक

22. अनूप :        सहायक शिक्षक

23. सोनी :         सहायक शिक्षिका

24. चन्‍दन :       मानव श्रृंखलाक विद्यार्थी

25. गुंजन :        मानव श्रृंखलाक विद्यार्थी

26. रानी :          मानव श्रृंखलाक विद्यार्थी

27. अमन :        मानव श्रृंखलाक विद्यार्थी

28. महारानी :     मानव श्रृंखलाक विद्यार्थी

29. कपिलदेव :   मानव श्रृंखलाक विद्यार्थी

30. रामदेव :      मानव श्रृंखलाक विद्यार्थी

31. हरिदेव :        मानव श्रृंखलाक विद्यार्थी

32. ललिता :      मानव श्रृंखलाक विद्यार्थी

33. कविता :      मानव श्रृंखलाक विद्यार्थी

34. महेश्वर :       मानव श्रृंखलाक हाकिम

35. दिनेश :        फोटोग्राफर

36. बच्‍चन :       एकटा समाजिक बेकती

37. राम शरण :   बच्‍चनक सहयोगी

38. रामलाल :     एकटा समाजिक बेकती

39. रामबाबू :     चाह दोकानदार

40. ललन :        रामबाबूक सहयोगी


 

दृश्‍य एक

 


 

(स्‍थान- शंकरक घर। शंकरक पत्नी सुनैना। दूटा बेटा। सुन्नर आ खखन तथा दूटा बेटी शान्‍ति आर चानी मंचपर उपस्‍थित अछि। सुनैना परिवारिक दयनीय स्‍थितिक सम्‍बन्‍धमे चिन्‍तामग्‍न अछि। शान्‍ति आर चानी तीती-तीती खेलैए। सुन्नर आर खखन गुल्‍ली–डन्‍टा खेलैए।)

 

शान्‍ति-        ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती था।

चानी-          ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती था।

शान्‍ति-        ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती था। ई हमर राज भेलौ। हमरा राजमे पएर नै दीहें।

चानी-          ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती ती था। ई हमर राज भेलौं। तूँ हूँ हमरा राजमे पएर नै दऽ सकै छें।

शान्‍ति-        (चानीक राजमे जा कऽ) हम एबौ तोरा राजमे। तूँ की करभिन?

चानी-          तूँ हमरा राजमे सँ चलि जो। नै तँ कोनो बाप काज नै देतौ।

शान्‍ति-        नै जेबौ गइ, नै जेबौ।

चानी-          एक दू तीन कहै छियौ मारबौ। नै तँ हमरा राजमे सँ अपना राजमे चलि जो।

शान्‍ति-        मारि कऽ देखही तँ। बापसँ भेँट करा दइ छियौ।

                  (दुनूमे मारि फँसि गेल। दुनू उट्ठम-पटका करैए। सुनैना दौग कऽ आबि दुनूकेँ छोड़ा दू दिस केलक।)

सुनैना-        सरधुआकेँ खाली जनमाबै ले होइ छइ। प्रतिपाल करैमे करौआ लागल छइ। दारू-ताड़ी-गाजा पीऐ ले होइ छइ। मुड़ी मचरूआकेँ एकौटा नीशा नै छूटल छइ। भाँग खाइए। खैनी खाइए, बीड़ी-सिकरेट पीते अछि। जर्दाबला पान खाइते अछि। चाह पीबते अछि। हे मैया सरसत्ती, एहेन घरबला सात घर दुश्‍मनोकेँ नै देबइ।

                  (सुनैना फेर माथा-हाथ दऽ बैस रहली।)

सुन्नर-          (गुल्‍ली फेंक कऽ) ओत्तैसँ पढ़ैत आ।

खखन-        (एक टाँगपर) चैत-कबड्डी, चैत कबड्डी, चैत कबड्डी चैत कबड्डीऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ।

(खखनकेँ रस्‍तेमे साँस टुटि गेल।)

सुन्नर-          सार नै भेलौं, फेर पढ़।

खखन-        (फेर जगहपर जा क) चैत कबड्डी आबए दे, तबला बजाबऽ दे। गीत-नाद गाबए दे, नटुआ नचाबऽ दे ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ। (खखन ठाढ़ भऽ हकैम रहलए।) 

सुन्नर-          फेरो नै भेलौ सार। फेरो जो। पढ़ गऽ।

खखन-        (तुरैछ कऽ) हम नै जेबौ सार। हम हकैम गेलौं हेन। (सुन्नर खखनकेँ एक सटका बैसा देलक। खखन चिचिआ कऽ कानऽ लागल आर हाथ पएर पटकऽ लागल।)

                  माए गै माए, बाप रौ बाप, सार सभ मारि देलक, जे सार हमरा मारलकै ओकरा माएके।

(सुनैना उठि कऽ दौगली। दुनूकेँ एक एक चाट मारि अपना लग लऽ जा कऽ बैसेली। दुनू एक-दोसरपर कन्‍हुआइए।)

सुनैना-        तूँ सभ इसकूल किए ने गेलहीन? घरपर गुल्‍ली-डन्‍टा खेलै छें आर मारि-गारि करै छें।

सुन्नर-          कॉपी छे नहियेँ तँ इसकूल केना जेबै? 

खखन-        हमरो पेन नइए तँ मुड़ी लऽ कऽ जेबै इसकूल?

सुनैना-        बापसँ पाइ मांगए जाइ गेलहीन?

सुन्नर-          मंगलिऐ तँ कहलक- पाइ नै छौ। बुढ़बाकेँ दारू-गाँजा पीऐ ले होइ छै पाइ आर कॉपी ले नै होइ छइ।

खखन-        हरदम बुढ़बा खिसियाएले रहै छइ। हम मंगलिऐ तँ कहक-जो ने कहिऐं माएकेँ।

सुनैना-        हँ हँ, किए ने? हमरा थैली देने छै रखै ले। अपना ले लल आर गोइठा बीछऽ चल। अपना दारू-ताड़ी, गाँजा-भाँग ले पाइए नै होइ छै आर हमरा रखै ले पाइ दइए। एत्तै केतौ नीशाँ केनाइ होइ छइ। बाप रे बा, हरदम नीशेमे चूर। चकेठबा जेतै कहियो चटपटमे। टुनकीबा कमाइ कम नै छइ। मुदा पीऐ ले बेहाल रहै छइ। हम सभ अन्न बेगैर मरे छी। धिया-पुता कुकुर-बानर जकाँ एमहर-ओमहर ढहनाइए। हे भगवान, हे दाता दिनकर, ओकर नेत सुधारहक। नै तँ हमरा सभकेँ मौगैत दऽ दएह।

(सुनैना कानए लगली।)

सुन्नर-          माए गइ, खाइ ले दे। बड़ भूख लागलए।

खखन-        (कनैत) केतए सँ देबौ। की देबौ? घरमे किच्‍छो नै छौ।

शान्‍ति-        खाइले दे नऽ माए। हमरा बड़ भूख लागलए।

चानी-          (कनैत) खाइले दे नऽ गइ। खाइ ले दे नऽ गइ।

सुनैना-        (खिसिया कऽ) खाइ जाइ जो नऽ हमर देह। नोचि ले हमर देह आर खाइ जाइ जो।

(सुनैना कानऽ लगली। झूमैत-झामैत शंकरक प्रवेश।)

शंकर-         की भेलै हन? सुन्नर माए किए कनै छें? शान्‍ति, की भेलौ हेन माएकेँ? 

शान्‍ति-        खाइ ले मंगलिऐ तँ कानऽ लागल।

शंकर-         सुन्नर माए, तूँ कनलें किए? हमरा कहितेँ। खाइक जोगार हम करितिऐ।

सुनैना-        आबो की भेलै? दहक पाइ। कीन आनै छी।

शंकर-         (जेबी- ढट्ठामे ताकि कऽ) पाइ कहाँ छौ जे देबौ? पाइ तँ छेलै हन। की भेलै? लगैए केतौ खसि पड़लै। अच्‍छा जो, आइ केकरोसँ उधारी आनि लीहें।

सुनैना-        जा नऽ तूँही। आनि दहक नऽ। हमरा कोइ उधारी नै दइए। सभकेँ धरने छिऐ। सभ खोंखिया कऽ दौगैए। तूँही आनि दहक।

शंकर-         तूँही जो। हमरा तँ आओर कोइ नै दइए। तूँही जो। तोरा दऽ देतौ। तूँ  मौगी छिहीन।

सुनैना-        हम नै जाएब, हम नै जाएब, हम नै जाएब। हम मुँह नोचबै ले जाउ गऽ।

शंकर-         (खिसिया कऽ) तोरा जाए पड़तौ। हमर कहल करए पड़तौ। नै तँ देखा देबौ।

सुनैना-        हम नै जाएब। हमरा कोइ उधारी नै दइए। अपने जा।

शंकर-         (खिसिया कऽ) हमर कहल नै करभिन तँ देखही हमर खेल।

(शंकर सुनैनाकेँ अनधून मारऽ लागल चारू धिया-पुता कानऽ लागल। सुन्नर आर शानति शंकरकेँ अपन-अपना दिस घीच कऽ छोड़बऽ लागल आकि सभ धियो-पुताकेँ अनधून मारऽ लागल। सभ कियो जोर-जोरसँ चिचियाए लागल- माए गै, बाप रौ। अन्‍तमे सुनैनाकेँ मारऽ लागल। सुनैनाक मुहसँ खून खसैत देख शंकर भागल।)

पटाक्षेप।


 

दृश्‍य दू

 


 

(स्‍थान- समूदायिक भवन। शंकर आर खट्टर दारू पी रहलए। दुनू गोरे दोस छैथ। दुनू चखनो खा रहलए।)

शंकर-         रौ बैंह खट्टरा, औझका दारू बड़ सुअदगर छौ। आइ भरि मन, भरि छाँक पीबौ।

खट्टर-          शंकर सार, आइ मटराक दोकानक ताला तोड़ै के छइ। छेनी, मरिया आर रीन्‍च लऽ लीहें।

शंकर-         लै के कोन जरूरी छइ। संगेमे छइ।

(फाँड़सँ निकालि खट्टरकेँ देखौलक।)

खट्टर-          सार, तूँ पहुँचल फकीर छें रौ।

शंकर-         तब नऽ मलफै उड़बै छिऐ। 

(एकटा तेरह बर्खक सुन्नैर लड़िकी मीना बस्‍ता लऽ कऽ गुजरली।)

खट्टर-          रौ सार शंकर, किछु देखबो केलही?

शंकर-         कथी रौ?

खट्टर-          समान। चारा।

शंकर-         कथी कहै छिहीन रौ? खोलि कऽ बाज नऽ।

खट्टर-          एगो लड़की इसकूल जाइ छेलै। उ छेलै कमाल के।

शंकर-         चल नऽ कनी देखिऐ। सुनसान हेतै तँ देखबै।

(शंकर आर खट्टर अन्‍दर गेल। मीना जोर-जोरसँ माए गै, बाप रौ चिचिआ रहलए। कनीकालक पछाइत मीना दम तोड़ि देली।)

खट्टर-          (अन्‍दरसँ) रौ सार शंकरबा, तोरा बुते मरलै।

शंकर-         (अन्‍दरेसँ) रौ बैंह खट्टरा, तोरा बुते मरलै।

खट्टर-          लऽ चल एकरा। केतौ सड़क कातमे फेंक देबै।

शंकर-         जल्‍दी चल। विद्यार्थी सभ अबै छइ। पकड़ा जाइ जेबें।

(शंकर आर खट्टर मीनाकेँ उठौने प्रवेश केलक। शीघ्र दुनू गोरे मीनाकेँ मंचपर पटैक भागि जाइ गेल। राजीव आर रौशनक प्रवेश। दुनू विद्यार्थी मीनाक लाश देख डरि कऽ चौंकल।)

राजीव-        रौ रौशन, उ तँ मीना छै। अपने इसकूलमे पढ़ै छइ। इसकूलक डरेशो पहीरने छइ।

रौशन-         राजीव, हमरा बड़ डर होइ छौ। भाग एतए सँ। जल्‍दी चल, इसकूलमे सरकेँ कहबै।

(राजीव आर रौशनक तेजीसँ प्रस्‍थान। कनियेँ कालक पछाइत दूटा पुलिस केदार सिंहआ बदरी सिंह अपन दूटा चौकीदार रघुनाथ आर देवनाथक संग प्रवेश केलैथ। चारू गोरे लाशकेँ देखलैथ।)

केदार सिंह-  रेहे चौकीदार, लाश को लादो गाड़ी में।

बदरी सिंह-   सर, ई लड़की इसकूल जा रही थी। रस्‍ता मं मौका पाकर कोइ दारूबाज इसका जान ले लिया। साला निशेवाज सभ, हरामी बच्‍चा ऐ भोली-भाली बच्‍ची को लगत काम करके मारकर फेंक दिया।

केदार सिंह- रेहे चौकीदार सभ, मुँह का देखता है? जल्‍दी लादो लाश को गाड़ीमे।

(रघुनाथ आर देवनाथ लाशकेँ उठा कऽ अन्‍दर लऽ गेलैथ। दुनू पुलिस सेहो पाछू-पाछू अन्‍दर गेलैथ। कनैत-कनैत मटराक प्रवेश।)

मटरा-         (छाती पीटैत) माए गै माए, बाप रौ बाप। जुलुम कऽ देलक चोरबा जनमल सभ। हमर बाल-बच्‍चा आब केना जीयत? बाप रौ बाप। सार चोरबाकेँ पकैड़तिऐ तँ टेंगारीसँ कुट्टी-कुट्टी काटि दैतिऐ।

(रघुनाथक प्रवेश।)

रघुनाथ-       की भेलह हन मटरा भाय?

मटरा-         बाप रौ बाप, जुलुम भऽ गेलह हौ चौकीदार। डिल्‍लीसँ कमा कऽ एलौं। एक लाख पूजी लगेलौं। किराना दोकान खोललौं। महिनो नै कमेलौं। साला चोरबा ताला तोड़ि देलक। सभटा समान लऽ गेलऽ। आब कथी हम बेचबऽ? धिया-पुता कथी खेतऽ? आब हम की करबै हौ चौकीदार? हमरा किछु नै फुराइ छह हौ चौकीदार।

रघुनाथ-       ई गप तूँ थानामे इन्‍ट्री करा दहक।

मटरा-         हमरा माहुरो खाइले पाइ नै छह। तँ थानापर केना जेबै? तूँही मदैत करऽ ने?

रघुनाथ-       छोड़ि दहक। हमहीं बाड़ा बाबूकेँ कहि देबैन।

(रघुनाथक प्रस्‍थान)

मटरा-         लगैए, शंकरबा सार लऽ गेल समान। मुदा हम देखलिऐ तँ नहि। जौं पकैड़तिऐ तँ सारकेँ टेंगारीसँ कुट्टी-कुट्टी काटि ओतै राखि दैतिऐ।

पटाक्षेप।


 

दृश्‍य तीन

 


 

(स्‍थान- सामूदायिक भवन। शंकर आर खट्टर दुनू दोस चखनाक संग ताड़ी पी रहल अछि। दुनू मस्‍तीमे अछि।)

शंकर-         सार खट्टर, तूँ अनाड़ी छें। कनियेँ ले रातिमे बाँचि गेलें। नहि तँ दुनू गोरे धरा जैतें। चौकीदर अबै छेलै हन।

खट्टर-          सार शंकर, तूँही अनाड़ी छें। केहेन-केहेन पुलिस हमरा पकैड़ नै सकल। ई चौकीदरबा कोन माल-मे-माल छइ। बेसी एमहर-ओहमर करतै तँ ओकरो घरमे चोरि कऽ लेबै। लैत रहत गदहाबला।

शंकर-         औझका की प्रोग्राम छौ से कह सार खट्टरा।

खट्टर-          औझका हमर विचार ई जे बहुत परदेशी सभ फगुआमे गाम अबैत हेतै दिल्‍ली-पैंजाब-मुम्‍बइसँ कमा कऽ सभ लग बहुत-बहुत पाइ हेतइ। होशियारीसँ सबहक जेबी मारि लेबै। चल आइ टीशनेपर।

शंकर-         ठीक विचार छौ। चल टीशनेपर। जेबी नै सुतरतै तँ बैग-एटैची सुतरतै नऽ। मुदा जाइसँ पहिने गाँजा पी कऽ मूड बना ले।

सट्टर-          हमरो तँ सएह मन छेलौ। जेबी मारनाइ आकि बैग-एटैची पार केनाइ भीड़ेमे बढ़ियाँ होइ छइ।

                  (दुनू गोटे गाँजा पीलक। फेर दुनू गोरे सिकरेट धरा कऽ पीबैत टीशन दिस विदा भेल।) 

शंकर-         रौ बैंह खट्टरा, टीशनपर छौड़ी-मौगी सभ बड़ रहै छइ। एक-पर-एक सुन्नैर सभ रहै छइ। अपना सभकेँ जएह किछु तँ संतोख हेतइ।

खट्टर-          शंकरबा सार, हमरा ओत्तै नै पढ़ा। हम अपने ओइ सभसँ रिटाइर छी। भीड़मे केत्तेकेँ हम की नै करै छी। चल, चल। जल्‍दी चल। गाड़ीक समए भऽ गेलै हन।

(दुनू गोरे टीशन जा रहलए। दुनू गोरे क्षणिक समए ले अन्‍दर गेल। क्षणिक पटाक्षेप भेल। अन्‍दरमे रामनाथ, प्रभु दयाल, नन्‍द किशोर आर प्रियंका ट्रेन पकड़ै ले तैयारअछि। शंकर आर खट्टर मंचपर आएल। शीघ्र पर्दा हटल। यात्री चारू गोरे कुरसीपर बैसलए। शंकर दुनू गोरे घुमि रहलए।)

शंकर-         गाड़ी आबि रहल अछि। पॉकीटमार सँ सावधान। (यात्री चारू गोरे उठलैथ। प्रभुदयाल जेबी टटोललैथ। शंकरसहैट कऽ प्रभुदयाल लग आर खट्टर प्रियंका लग गेल। शंकर दुनू गोरे पॉकेट मारऽ लागल आकि धरा गेल। चारू आदमी शंकर आर खट्टरकेँ मारि रहलए। मार सार के- मार सार केँ हल्‍ला भऽ रहलए। केदार सिंह आर बदरी सिंह प्रवेश कऽ दुनूकेँ अनधुन मारऽ लागल। शंकर दुनू गोरे ओंघरा रहलए। बदरी सिंह शंकरकेँ आर केदार सिंह खट्टरकेँ मारि रहल छैथ।)

अनुवोधक- (अन्‍दरसँ) यात्रीगण कृपया ध्‍यान दें। जयनगर से चलकर नई दिल्‍ली को जानेवाली गरीब रथ एक्‍सप्रेस प्‍लेटफॉर्म नं. १ पर आ रही है।

(अनुवोधक ऐ गपकेँ दू बेर कहलैथ।) चारू यात्री अन्‍दर गेल। दुनू पुलिस शंकर दुनू गोरेकेँ मारनाइ छोड़ि देलैथ। दुनू उठि कऽ हाथ-पएर झाड़लक।)

बदरी सिंह-   ला साला, माल-पानी।

शंकर-         आइ नै देब सर। आइ बड़ मारलौं हन।

केदार सिंह- तूँ बड़ी चौंसठ बा। बहोत माल मारता है। लाउ एक हजार।

खट्टर-          आइ किन्नौं नै देब। अहाँ बड मारलौं हन।

केदार सिंह- ना मारी तँ पब्‍लिक कैसे बुझी। पब्‍लिक के बुझाना हाय जे हम पुलिस हाय। कुछ शो भी करना पड़ता हाय नऽ। जो ही कुछ देना है दे दऽ। 

खट्टर-          आइ हम किन्नौं नै देब। हमरा दवाइ कराबऽ पड़त। 

केदार सिंह- जाउ साला सभ, जाउ। आज छोड़ देते हैं।

(शंकर आर खट्टर लड़खड़ाइत-लड़खड़ाइत अन्‍दर गेल।)

बदरी सिंह-   केदार भाय, एगो गप बुझलिऐ हन की नहि, दारूक सम्‍बन्‍धमे?

केदार सिंह- नहि, की भेलै से?

बदरी सिंह-   दारू बन्न भऽ गेल। हम भोरे पेपरमे पढ़लौं। हेन सरकार चाहै छैथ जे देवराज्‍यकेँ नीशा मुक्‍त करी। कारण ऐ सँ राज्‍यमे अनेक तरहक घटना दुर्घटना भऽ रहलै हन। जेना- चोरी-डकैती, छीनरपनी, बैमानी, लूट-पाट, बलत्‍कारी इत्‍यादि। ऐ सभ तरहक शिकाइत सरकारकेँ बहुत भेलै हन। तही दुआरे सरकार नीशाँ मुक्‍तिक करगर कदम उठेलक हन। (दुनू पुलिस कुरसीपर बैसलैथ।)

केदार सिंह- कदम जदी सफल भऽ जेतैन तँ देवराज्‍य सरकारकेँ दुनियाँमे नीक प्रतिष्‍ठा भेटतैन। मुदा भाय, अपना सभकेँ बड़ दिक्कत भऽ जाएत।  कारण ओइ बेगैर अपना सभकेँ एको दिन नै निमहत। अपना सभ ले सरकार किछु जोगार करतै, की नहि?

बदरी सिंह-   उम्‍मीद कम आर भरोस ज्‍यादे। ओना पेपरमे दारू, ताड़ी, गाँजा, भाँग, खैनी, बीड़ी, सिकरेट, पान इत्‍यादिपर रोक लगाएल गेल हन। कारण सभ मे नीशा छै आर उ नीशा कोनो-ने-कोनो रूपमे देहक लेल नोकसानदायक अछि। जेना खैनीमे निकोटीन पएल जाइए जइसँ कैंसरक सम्‍भावना रहैए। ओही खैनीसँ बीड़ी, सिकरेट, पान मशाला इत्‍यादि बनैए। सोभाविक छै उ समान अपना सभकेँ नोकसान करत। दारूसँ फेफड़ा जरै छै, कीडनी फेल करै छै। गाँजासँ फेफड़ा जरै छै, दम्‍मा होइ छइ। ऐ तरहें हम कहि सकै छी जे प्राय: सभ नीशाबला पदार्थ देहक लेल खतरनाक अछि जेकरा तियागने स्‍वास्‍थ्‍यक रक्षा हएत।

केदार सिंह- भाय बदरी, सरकारकेँ जे करबाक हो, से करौ। मुदा हमरा ले दारूक जोगार सरकार करैत रहौ।

बदरी सिंह- अहाँ बताह जकाँ गप करै छी भाय। अहाँ आब दारूसँ छातीपर मुक्का मारि लिअ।

केदार सिंह- भाय, हमरा ओइ बेगैर नै बनत। 

बदरी सिंह-   किए नै बनतै? मनकेँ जेत्ते चसकेबै, मन ओते चसकतै। मन जेते काबूमे रहत, ओते मानवतामे धनिक रहब। मने सभ किछु छिऐ। कोनो शायर कहने छथिन- मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय। मन उजियारा जब जब फैले, जग उजियारा होइ। 

केदार सिंह- भाय, अहाँ केँ अध्‍यात्‍मिक ज्ञान बड़ अछि यौ।

बदरी सिंह-   हमरा अध्‍यात्‍मिक ज्ञान सूइयाक नोको बरबैर नै अछि। ओना, समए निकालि कखनो-कखनो कोनो-कोनो अध्‍यात्‍मिक पोथी पढ़ि लै छी। सरकारक नीशा मुक्‍ति कदमक स्‍वागत करैत हम आइ संकल्‍प लै छी जे हम कोनो नीशा नै करब, नै करब, नै करब।

पटाक्षेप।


 

दृश्‍य चारि

 


 

(स्‍थान- शंकरक घर। सुनैना सूपमे चाउर फटैक रहलए। सुन्नर आर शान्‍ति एक दिस तथा खखन आर चानी दोसर दिस भऽ कबड्डी खेल रहलए।)

सुन्नर-          कबड्डी, कबड्डी, कबड्डी, कबड्डी, कबड्डीऽऽऽ।

खखन-        चैत कबड्डी, चैत कबड्डी, चौत कबड्डी, चैत कबड्डीऽऽऽ।

शान्‍ति-        कबड्डी कबड्डी, कबड्डी खेल।

घृणा त्‍यागि, राखू मेल।

चानी-          चैत कबड्डी अड्डा, बाप तोहर बुड्ढ़ा।

तोड़ि देबौ नेंगरी, बना देबौ बोंगरी।

सुन्नर-          चैत कबड्डी एला, माए तोहर लैला।

बाप तोहर मजलूम, तूँ बाबा मखदूमऽऽऽऽ

(खखन आर चानी सुन्‍नरकेँ टाँग पकैड़ घीचैए अपना दिस आर सुन्नर अड्डा दिस घीच कऽ लऽ जाइए। सुन्नरकेँ अड्डासँ पहिने साँस टुटि गेल। खखन आर चानी थोपड़ी बजा कऽ खूम हँसए लागल।)

खखन-        कबड्डी कबड्डी, तोड़ि देबौ हड्डी।

निकालि देबौ पोंटा, मारबो दू सोंटाऽऽऽऽ।

(खखन शान्‍तिकेँ घीचने-घीचने पढ़ैत-पढ़ैत अपना घर लऽ गेल। फेर खखन आर चानी थोपड़ी बजा कऽ हँसए लागल।)

खखन-        (नचैत-नचैत) हरा देलियौ, हरा देलियौ।

चानी-          (हारि गेलें हरूआ, खा ले गूँहके तरूआ।) – 3

(चारू भाए-बहिनमे मारि फँसि गेल। सुन्नर-खखन आर शान्‍ति-चानी उट्ठम-पटका करैए। सुनैना चाउर फटकनाइ छोड़ि दौग कऽ आबि झगड़ा छोड़ाबऽ लगली। चारूकेँ दू-दू चाट दऽ कऽ सुनैना अलग-अलग केली। चारू हकमैत एक-दोसरपर कन्‍हुआ रहलए।)

सुनैना-        तूँ सभ झगड़ा किए करै जाइ गेलें?

सुन्नर-          तोहर बेटी हमरा किए कहलकौ- हारि गेलें हरूआ, खा ले गूँहक तरूआ? तीन बेर कहलकौ।

सुनैना-        आब नै कहतौ। झगड़ा नै करै जाइ जो। भाए-बहिनमे झगड़ा करै जाइ जेबहीन तँ लोक बुड़बक कहतौ।

खखन-        माए गै, पापा केतए रहै छै? काए दिनसँ घर पर नै देखै छिऐ।

सुनैना-        केतौ रहौ सरधुआ। ओम्‍हरै मरि जाउ।

शान्‍ति-        पापाकेँ गारि किए दइ छिहीन गै?

सुनैना-        तोहर पापा ताड़ी-दारू-गाँजा पी कऽ बुच्‍च रहै छौ। अपना सबहक पेटक जोगार नै करै छौ। हमरा मजूरी कऽ पेटक जोगार करए पड़ैए। तोरा सबहक पढ़ैक जोगार नै करै छौ। दोकानदार सभकेँ उधारीबला पाइ नै दै छौ। अही सभसँ दिल बड दुखाएल अछि। तँए ओकरा गरियबै छिऐ।

शान्‍ति-        ओहेन पापाकेँ हमहूँ गरियेबै। ओहेन पापाकेँसुपैन धारमे देबै, गजहर गाछमे सुतेबै।

(शंकरकेँ पकड़ने खट्टरक प्रवेश। खट्टर साधुक भेषमे अछि। शंकर एककातमे नीशामे ठाढ़ भऽ असथिरे-असथिरे हिलैए आर खट्टर ओकरा पकड़ने ठाढ़ अछि।)

खट्टर-          दोसतीनी, दोसकेँ परसू साँझमे घुमैकाल एन.एच.पर एगो बोलेरोबला ठोकर मारि देलकै। हम उठा-पुठा कऽ टेम्‍पूमे लादि होस्‍पीटल लऽ गेलौं। डाक्‍टर जाँच-परतालक पछाइत कहलैन- हिनकर फेफड़ा जरल छैन आर किडनी सेहो फेल छैन। ई बहुत सिरियस छैथ। ई दू-चारि दिनक मेहमान रहि गेल छैथ। हिनका घरेपर लऽ जाउ।

सुनैना-        अहाँ तँ एकरा बहसा कऽ तूल कऽ देलिऐ। दारू पीआ-पीआ जान लऽ लेलिऐ निशेवाज कहीं के।

खट्टर-          दोस्‍तीनी, जहियासँ सरकार नीशा बन्न केलकै तहियासँ हम नीशेबाजी छोड़ि देलिऐ। बबाजी बनि गेलौं हन। देखै छिऐ, हमर बगे।

सुनैना-        झूठा नहितन। देखबैले बबाजी भऽ गेल हन।

खट्टर-          (कण्‍ठी देखा छुबैत) हम कण्‍ठी छुबै छी। झूठ नै कहै छी। हम सभटा नीशा छोड़ि देलौं।

(शंकर बैस गेल। खट्टर ठाढ़े रहल।)

सुनैना-        तँ दोसोकेँ किए नै छोड़ा देलिऐ?

खट्टर-          दोसकेँ हम कहलिऐ। मुदा ओ नइ मानलैथ। केना-ने-केना केतौ-ने-केतौसँ ऊपर कऽ कनी-मनी पीए लै छैथ। 

सुनैना-        अखनो तँ दोस पीनेए।

खट्टर-          हमरो लगैए। हमरा आश्‍चर्य लगैए जे केना उपरा कऽ मारि दै छथिन।

सुनैना-        (खिसिया कऽ) बड़ पीयाक छै तँ भने ओम्‍हरे होस्‍पीटलेमे मरि जइतै से नहि।

शंकर-         (खिसिया कऽ झूमैत) तोरा बापक कमाइकेँ नै पीलौं हन। अपना कमा कऽ पीलौं हन। हमरा अपने बड़ मन खराप अछि। तैपर खिसियबैए।

खट्टर-          दोसतीनी, हम जाइ छी। सोसराइरमे साइरकेँ बिहा छिऐ। दोसपर नीक जकाँ धियान देबइ।

(खट्टरक प्रस्‍थान।) 

सुनैना-        दारू-गाँजा पीऐत-पीऐत मन खराप कऽ लेलक हन। परिवारपर कोनो धियाने नहि। लेबरमे खटि-खटि हम कौहना पेट चलबै छी। एकरा एकर कोनो लाज नहि।

(शंकर टगि कऽ मरि गेल। सुनैना माए गै, बाप रौ चिचियाए लगल। चारू धिया-पुता सेहो खूम कानए लागल।)

केतए चलि गेलहक हौ सुन्नर पापा। केतए चलि गेलहक हौ शान्‍ति पापा। आब केना रहबै हौ चानी पापा।

पटाक्षेप।


 

दृश्‍य पाँच

 


 

(स्‍थान- एन.एच.। नीशा मुक्ति हेतु मानव श्रृंखलाक पूर्ण तैयारी भऽ चुकल अछि। प्रधानाध्‍यापक शशिकान्‍त आर सहायक शिक्षक सोमदेव नीशा मुक्‍तिक सम्‍बन्‍धमे गप-सप्‍प करै छैथ।)

शशिकान्‍त-   सोमदेव बाबू, देवराज्‍य सरकारकेँ नीशाबन्‍दी कानून बड़ नीक रहलैन। प्राय: सम्‍पूर्ण राज्‍य नीशा मुक्‍त भऽ गेल हन। दारू बाज सभ तँ छरपटाइए। मुदा केतौ दारू नै भेटैए ओकरा सभकेँ। दारूए-टा नहि, ताड़ी, भाँग, गाँजा, खैनी, बीड़ी, पान, सिकरेट सेहो बन्न भऽ गेल। 

सोमदेव-      सर, देवराज्‍य सरकारक ई कदम बहुत सराहनीय रहल। मुदा किछु हेहर, पतीत अखनो चोरा-नुका कऽ दारू-ताड़ी-गाँजा मारिए लै छइ। आखिर रजबुधिसँ चोरबुधि भारी होइ छै किने।

शशिकान्‍त-   से जे हौउ। मुदा सरकारक ई नीशाबन्‍दी नीशामुक्‍ति कार्यक्रम 99 प्रतिशत सफल रहल। ऐ ले हम सरकारकेँ हार्दिक धैनवाद दै छिऐन। अहिना जदी सरकार अपराधपर नियंत्रण करै तँ देवराज्‍य देवलोक बनि जाएत।

सोमदेव-      सरकारेक मन छिऐ। ऊहो भऽ सकैए। सर, अखैन धरि विद्यार्थी सभ नै जुटल हन। कहीं चेकमे अपना सभ पकड़ा नै जाइ।

सुनैना-        पकड़ेबै किए? हाकिम नै बुझै छथिन ठंढाक समए छइ। सभ विद्यार्थी खा-पीब कऽ मजगूत भऽ कऽ आएत किने। कारण एन.एच.पर रौदमे ठाढ़ हुअ पड़तै। गाम-गामसँ विद्यार्थीकेँ पहुँचैमे कनी-मनी अबैर-सबेर हेबै करतै।

(सहायक शिक्षक अनूपक संग चन्‍दन, गुंजन, अमन, रानी आर महारानी अन्‍दरमे नारा लगा रहलए।)

चन्‍दन-        ताड़ी-दारू बन्न करू। (शशिकान्‍त सोमदेव उठि कऽ टहैल रहल छैथ।)

सभ कियो-   बन्न करू, बन्न करू।

(सभ कियो प्रवेश केलैथ। चन्‍दनक हाथमे झण्‍डा छैन। अनूप सभसँ पाछू छैथ झंडापर नीशामुक्‍त देवराज्‍य लिखल अछि।)

चन्‍दन-        गाँजा-भाँग बन्न करू। (घुमि-घुमि कऽ)

सभ कियो-   बन्न करू बन्न करू।

चन्‍दन-        खैनी-बीड़ी बन्न करू।

सभ कियो-   बन्न करू, बन्न करू।

चन्‍दन-        सिकरेट-पान बन्न करू।

सभ कियो-   बन्न करू, बन्न करू।

(अनूप सभ विद्यार्थीकेँ पतयानीमे लगेलैथ। सहायक शिक्षिका- सोनीक संग कपिलदेव, रामदेव, हरिदेव, ललिता आर कविता अन्‍दरमे नारा लगा रहलए। अनूप अपन टीम लग ठाढ़ छैथ।)

(शशिकान्‍त आर सोमदेवक प्रस्‍थान।)

कपिलदेव-   ताड़ी-दारू, बन्न करू।

सभ कियो-   नीरोग रहू, नीरोग रहू।

(सभ कियो प्रवेश केलैथ। कपिलदवेक हाथमे झण्‍डा छैन। सोनी सभसँ पाछू छैथ। झण्‍डापर नीशा हटाउ, देवराज्‍य बँचाउ लिखलए।)

कपिलदेव-   गाँजा-भाँग बन्न करू। (घुमि-घुमि कऽ)

सभ कियो-   बन्न करू, बन्न करू।

कपिलदेव-   खैनी-बीड़ी बन्न करू।

सभ कियो-   बन्न करू, बन्न करू।

कपिलदेव-   सिकरेट-पान बन्न करू।

सभ कियो-   बन्न करू, बन्न करू।

कपिलदेव-   सुपारी-गुटका बन्न करू।

सभ कियो-   बन्न करू, बन्न करू।

(सोनी सभकेँ पतयानीमे लगेलैथ। सोनी अपन टीम लग ठाढ़ छैथ।)

अनूप-         (घुमि कऽ) सभ गोरे ठाढ़ रह। ऊपरसँ हाकिम सभ एथिन। फोटो झीकैबला एथिन। फोटो झीका कऽ जाइ जइहें। सभ कियो सटि-सटि कऽ ठाढ़ रह आर नारा लगबैत रह।

सोनी-          (घुमि कऽ) जखन तोरा सभकेँ टाँग दुखा जेतौ तँ बैस जाइ जइहें। बिना फोटो झीकेने कोइ नइ जाइ जइहें।

कपिलदेव-   नीशा हटाउ, नीशा हटाउ।

सभ कियो-   राज्‍य बँचाउ, राज्‍य बँचाउ।

चन्‍दन-        नीशा छोड़ू, पाय बँचाउ।

सभ कियो-   धिया-पुता, पढ़ाउ-लिखाउ।

(एकाएकी सभ गोरे बैस गेल। रामशरण आर बच्‍चनक पानि लऽ कऽ प्रवेश। सभ गोरे ठाढ़ भऽ जाइ गेल। रामशरण आ बच्‍चन पानि बँटै छैथ। पानि बाँटि दुनू गोरे प्रस्‍थान केलैथ। रामलाल बिस्‍कुट लऽ कऽ प्रवेश केलैथ। रामलाल बिस्‍कुट बँटै छैथ। बिस्‍कुट बाँटि रामलालक प्रस्‍थान। राम बाबू आर ललनक चाह लऽ कऽ प्रवेश। ई दुनू गोरे चाह बँटै छैथ। चाह बाँटि दुनू गोरे प्रस्‍थान केलैथ।)

अनूप-         चन्‍दन, नीशामुक्‍तिपर जे ऊ गीत तैयार केने छेलहीन से, गाबही ने।

चन्‍दन-       जी सर, गाबै छिऐ।

(चन्‍दन आर रानी एक दिस झड़नी लऽ कऽ तथा गुंजन आर ललिता दोसर दिस झड़नी लऽ कऽ गीत गाबैले तैयार भेल।)

चन्‍दन+रानी- हॉंएजीऽ ऽ ऽ ऽ, दारू-ताड़ी बन्न भेलइ।

बन्न भाँग गाँजा।

खैनी बीड़ी सिकरेट बन्न भेलैजी।

गुंजन+ललिता-   हाँएजीऽ ऽ ऽ ऽ, गुटको पान सुपारी हटलै।

रोगी सभ निरोग भेलइ।

राज्‍य नीशामुक्‍त भेलैजी।

चन्‍दन+ललिता- हाँएजीऽ ऽ ऽ ऽ, चोरी हटलै डकैती घटलै अपराध बलत्‍कारी भगलै।

समुचित शिक्षा बढ़लै जी।

गुंजन+रानी-                   हाँएजीऽ ऽ ऽ ऽ, अनुशासन, शिष्‍टाचार एलै।

सुख-शान्‍ति बहार एलै।

सहानुभूति परेम बढ़लैजी।

चन्‍दन+रानी-      हाँएजीऽ ऽ ऽ ऽ, आब नै कहियो नीशा औतै।

औतै सत्‍यानाश हेतै।

सम्‍हरल घर बिगैड़ जेतैजी।

गुंजन+ललिता-   हाँएजीऽ ऽ ऽ ऽ, चोरबुद्धी भारी रहलै।

रजबुद्धी हल्‍लुक।   

चोर उपरा कऽ पीतैजी।

(थोपड़ीक बौछार भेल।)

अनूप-         (फोन रिसिभ कऽ) हेल्‍लो, सर प्रणाम। जी जी। जी सर। हम सभ तैयार छी। (फोन कटि गेल) 

सोनीजी, अहाँ एक-एक हाथपर लाइन लगबा लिअ। हाकिम आर फोटोग्राफर आबि रहल छैथ।

सोनी-          जी सर, हम लाइन लगबा लै छी। सभ कोइ एक-एक हाथपर लाइन लगबै जाइ जो।

(सोनी एक-एक हाथपर सभ विद्यार्थीकेँ लाइनमे लगेलैन।)

(शाशिकान्‍त आर सोमदेवक प्रवेश।)

चन्‍दन-        नीशेवाजी बन्न करू।

सभ कियो-   बन्न करू, बन्न करू।

कपिलदेव-   नीशा भगाउ, इज्‍जत बँचाउ।

सभ कियो-   इज्‍जत बँचाउ, इज्‍जत बँचाउ।

(नीशाबन्‍दी कार्यक्रमक प्रखण्‍ड स्‍तरीय हाकिम बैचयुक्‍त महेश्‍वर आर फोटोग्राफार दिनेशक प्रवेश। महेश्‍वर निरीक्षण करै छैथ आर दिनेश फोटो झीकै छैथ।)

महेश्‍वर-      अनूपजी आर सोनीजी, हमरा दुनू गोटेक गेला पछाइत अहूँ सभकेँछुट्टी। सरकारक नीशामुक्‍ति कार्यक्रम पूर्ण सफल रहल।

(महेश्‍वर आर दिनेशक प्रस्‍थान।)

अनूप-         आब सभ विद्यार्थी अपन-अपन घर ओरिया कऽ जाइ जाइ जो। एन.एच. नीक जकाँ पार करिहें दुनू कात देख कऽ।

(सभ विद्यार्थीक प्रस्‍थान भेल। शशिकान्‍त, सोमदेव, अनूप आर सोनी हाथ जोड़ि प्रणाम कऽ मुड़ी झूका लेलैथ।)

पटाक्षेप। इति शुभम।

 

 

 

 

 

बरहम बाबा


पात्र-परिचय

 

(1.)          बौकु-                 एकटा गरीब किसान

(2.)        फूलो-                बौकुक पत्नी

(3.)        बुधन-                बौकुक पड़ोसी

(4.)       चानोदाइ-                    पहिल कारणी

(5.)        रामबती-            दोसर कारणी

(6.)       बदरी-                पहिल दर्शक

(7.)        कारी-                दोसर दर्शक

(8.)        भूल्‍ला-              तेसर दर्शक

(9.)       अशर्फी-             चारिम दर्शक

(10.)   राम उदगार-        पॉंचिम दर्शक

(11.)     मुसना-              बौकुक दू बर्खक बेटा

(12.)    राम कुमारी-        बौकुक बड़की बेटी

(13.)    रामपरी-             बौकुक छोटकी बेटी

 


 

दृश्‍य- एक

 


 

(स्थान- बरहम बाबाक गहबर। समए-सौंझका बौकु आ फूलो बरहम बाबाक पूजा ले सभ श्रमजानक संग उपस्‍थित छैथ। फूलो गहबर साफ कऽ रहली अछि। तखने बुधन मृदंग आ झालिक संग प्रवेश करैए।)

 

बुधन-         भैया, बरहम बाबाक महिमा अगम अथाह छैन। सुनलौं, हुनके किरपासँ तोरा बेटा भेलह। मन बड़ हर्षित भेल। आब ठीक छह- दूगो बेटी आ एगो बेटा।

बौकु-          हुनकासँ पैघ दुनियॉंमे आर के? हिनका शरणमे जे कियो एला, हुनकर कल्‍याण आइ धरि भेल हन आ अग्रिमो हेबे करत। तँए ने हमर मुसना माए हुनक पूजामे जी-जान लगौने रहैए।

बुधन-         भैया, तूँ केतेक दिनसँ भीख मॉंगै छेलह?

बौकु-          तीन पहिनासँ बेसीए बुझीन।

बुधन-         ऐ बेर बरद नै ने बेचए पड़तह?

बौकु-          से नै पूछ। ओइ बेरुका मारल अखैन धरि छी। होश नै भेल हन। ओइ बेर पनरह दिन भीख मॉंगने रही। मुदा ऐबेर दुनू परानी तीन महिनासँ भीख ले कोन-कोन गाम नै बौआकेँ कोरामे लऽ कऽ वौएलौं। लगैए ऐ बेर नै घटतै। ओहीसँ पेटो चलै छेलए किने। सॉंझू पहर घर चलि अबै छेलिऐ।

बुधन-         अँए हौ, पूजा ले भीख मॉंगै छेलहक आ ओहीसँ पेटो चलबै छेलहक? ई नीक बात नै भेलह। अइसँ पुन नै पापे हेतह।

बौकु-          की करबै, हमरा तँ और कोनो जोगार नै छेलए। बाबा नै बुझै छथिन जे हमरा भगतकेँ पाँच आदमीक पलिवार छइ।

                  (अपन-अपन डालीक संग चानोदाइ आ रामबतीक प्रवेश। पूजाक सभ तैयारी फूलो कऽ लेली अछि। बौकु झालि आ बुधन मृदंग बजबैत भगैत गाबि रहल अछि। फूलो ध्‍यानस्‍थ भेली। बदरी, कारी, भूल्‍ला, अशर्फी आ राम उदगारक प्रवेश। राम कुमारी कोरामे मुसनाकेँ लऽ कऽ प्रवेश केली। संगमे बहीन-रामपरी सेहो अछि।)

बौकु+बुधन-       बरहम अँगनमामे, पीपरकेर गछिया हे।

                  तै पर देवी ऽ, दे ऽ वता हे।

                  बरहम अँगनमामे...।

                  कौन फूल चढ़ै देवी, कौन फूल देवता हे।

                  कौने फूल चढ़ै बरहम, बाऽ बाऽ हे।

                  बरहम अँगनमामे...।

                  अरहुल चढ़ै देवी, गेंदा फूल देवता हे।

गुलाब फूल चढ़ै बरहम, बाऽ बा हे।

बरहम अँगनमामे...।

फूल दीप मधुर देवी, लड्डू पान देवता हे।

खीर पूड़ी बरहम, बाऽ बा हे।

बरहम अँगनमामे...।

(फूलोक देहपर बरहम बाबा अबै छथिन। मृदंग बजनाइ बन्न भऽ जाइए। सभ कारणी शान्‍त भऽ हाथ जोड़ि लइ छैथ।)

फूलो-          बोल जय गंगा।

बौकु-          जय गंगा। सरकार, के छियह तूँ?

फूलो-          बोल जय गंगा। हम बरहम छियह। बोल जय गंगा।

बौकु-          जय गंगा। बड़ी कालसँ कारणी सभ बैसल छइ। कनी एकरो सभकेँ कल्‍याण करहक।

फूलो-          हम कोन जोकरक छी जे लोककेँ कल्‍याण करबै। बोल जय गंगा।

बौकु-          जय गंगा। हम बुझै छिऐ किने तूँ कोन जोकरक छहक से। एत्ते दूरसँ जे कारणी अबै जाइ छै से बिन कल्‍याणे अबै छइ। तूँ हीरा छहक। हीरा अपन मोल नै बतबै छइ।

फूलो-          बोल जय गंगा। हमरा बुत्ते जे हेतह तइमे हम नै चुबहक। सएह ने। बोल जय गंगा।

बौकु-          जय गंगा। हे, ऐ कारणीकेँ देखहक।

फूलो-          (चानोदाइ दिस ताकि) हइ, तोहर घरबला कमाइ बड़ छह मुदा भाभंश नै होइ छह। पाँच आदमीक परिवार छह। तीनि साए टाका रोज कमाइ छह। कहियो बैसलो नै रहै छह। मुदा पेटोपर आफद रहै छह। इएह बात छै की ने?

चानोदाइ-     (घोघ तरसँ मुड़ी डोलबैत) हँ।

फूलो-          हम जे कहबह, से करबहक की ने?

चानोदाइ-     हँ, करबैन।

फूलो-          सत्त करह। बाजह- एक सत्त दू सत्त, ब्रह्म विषुण सत्त अहॉंक कहल जे नै करए, अस्‍सी कोस नरकमे खस।

चानोदाइ-     एक सत्त दू सत्त, बह्म विषुण सत्त

                  अहॉंक कहल जे नै करए, अस्‍सी कोस नरकमे खस।

फूलो-          बोल जय गंगा।

बौकु-          जय गंगा।

फूलो-          तोहर घरबला दारू आ गॉंजा पीऐ छह। काजो करैले जाइ छह तँ पीकऽ बुच्‍च रहै छह। ओकरा कखैन की हेतह, कोनो ठेकान नहि। अँए हइ, तीन साए टाकामे दू साए-अढ़ाइ साएक पीए लेतह तँ बँचल-खोंचलसँ की भाभंश हेतह? तहूमे मँहगाइ अकास छूने जा रहल अछि। घरवलाकेँ कौहुना ई आदैत छोड़ाबह। कहक- दारू-गॉंजाक बदलामे दूध-दही-घी खाउ। थकान ले हम सभ दिन मालिश कऽ देब। आ करबो करहक। अइसँ पहिने तूँ कहियो मालिश नै करै छेलहक। की, बात सॉंच छिऐ, की नइ?

चानोदाइ-     हँ, सॉंचे छिऐ।

फूलो-          बोल जय गंगा।

बौकू-          जय गंगा।

फूलो-          घरवलाकेँ हँसा कऽ खेला कऽ मालिश कऽ आ ओकरामे पैस कऽ रसे-रसे कड़ाइ करबहक तँ उ अबस्‍स चेत जेतह। उ सुधरतह आ तोहर सभटा दु:ख भागि जेतह। बाजह हमर कहल करबहक की ने?

चानोदाइ-     हँ, अबस्‍स करबैन।

फूलो-          जा, तोहर कल्‍याण हेबे करतह।

                  (हाथ जोड़ि प्रणाम कऽ चानोदाइक प्रस्‍थान।)

बोल जय गंगा। और के छह?

बौकु-          (रामबती दिस इशारा करैत) सरकार, ई छथिन।

फूलो-          बोल जय गंगा। तोहर दूटा बेटा आ एगो बेटी नै सुधैर रहल छह। हरदम नरहेर जकाँ एमहर-ओहमर करैत रहै छह। तीनूक पाछू तोरा बड़ पाय खरच होइ छह। मुदा कोइ रस्‍तापर नै आबि रहल छह। तोरा अपन दियादनीपर शक होइ छह जे वएह किछु कऽ देलक हन। सएह ने?

रामबती-      (मुँह उधारि) हँ, बाबा। अपने अंतर्यामी छथिन बाबा।

फूलो-          बोल जय गंगा। हइ, दियादनीक कोनो दोख नै छह। तोहर अपने दोख छह। तीन साल पहिने परमानन्‍द मासाएबसँ छअ महिना पढ़बा कऽ फील ले आइ-काल्‍हि, आइ-काल्‍हि करै छेलहक। एक दिन बेचारा खगने कनी जोरसँ पाय मॉंगलखुन तँ तूँ सभ हुनका सातू पुरखाकेँ उकटलहक आ मारबो करै जाइ गेलहक। बेचारा कानि कऽ दुआरिपरसँ गेलह। हुनके आप छयह। कहह तँ वेचरा टीशन कऽके गुजर-बसर करै छथिन। बेचारा बड़ असथीर लोक छथिन। हुनका संग हुनके बोनि ले एहेन खराप बेवहार! ई बड़ पैघ गलती भेलह। बोल जय गंगा।

रामबती-      बाबा, आब ओकर कोन उपाए छइ?

फूलो-          बोल जय गंगा। (कनीकाल किछु सोचि कऽ) दुनू परानी हुनका ऐठाम जा कऽ पएर पकैड़ क्षमा मॉंगहक। उ दयालु लोक छथिन अबस्‍स क्षमा कऽ देथुन। तेकर पछाइत हुनका बॉंकी फीसक दोबर फीस दऽ दिहौन आ हुनकासँ अनुनय-विनय करीहक। जे धिया-पुताकेँ फेर पढ़ा दियौ। अहीं बुत्ते उ सभ सुधैर सकै छइ। आब अहॉंकेँ नै छोड़ब आ ने अहॉं संग गलती करब। बोल जय गंगा। हइ, हमरा बिसवास छह जे उ मानि जेतह। जा, अक्‍खैन जा। उ घरेपर छथिन।

(हाथ जोड़ि प्रणाम कऽ रामबतीक प्रस्‍थान।)

बोल जय गंगा।

बौकु-          जय गंगा। सरकार, हम जे सकलियह तइमे जी-जान लगा कऽ पूजा केलियह आ एहिना करैत रहबह।

फूलो-          बोल जय गंगा। हमर पूजा करै छह, नीक बात। मुदा हमरा पूजा खातिर तूँ बीकि जाह वा तकलीफ उठाबह वा प्रतिष्‍ठा हनन करह, से बात हमरा एक्को रत्ती पसीन नै छह़। हम तोरा पूजासँ एक्केअना प्रसन्न छिअ। तोहर पूजा पनरहअना बेकार भेलह। बोल जय गंगा।

बौकु-          जय गंगा। हम तँ जी-जान लगा पूजा केलियह जइसँ सरकार हमरापर सोलहन्नी खुश रहथिन आ मनसँ असिरवाद देथिन। मुदा केतए की गलती भेलै, उ तँ सरकार अपने कहबै।

फूलो-          हमरा पूजा खातिर तूँ बरद बेचलहक। से किए? आ जँ बरद रहितह तँ हरो जोति गुजर-बसर करितह। कहह तँ, केते दिन कमेबह तँ बरद कीनबह? तहूमे पेटोक सवाल छइ। गरीब किसान छह। बरद तोहर हाथ-पएर छह। बरद खातिर तोरा तकलीफ भऽ रहल छह। ओइसँ हमरो तकलीफ छह।

तूँ भीख मॉंगि पूजा करै छह से किए? अपन पसेनाक कमाइसँ पूजा करबहक तँ बेसी फल हेतह। भीख मॉंगि कऽ करैमे भीख देनिहार तोहर फल बॉंटि लइ छह। कनी देरी वा बेसी देरी हेतै पूजामे, सएह ने? तँ की भऽ जेतइ? हम तँ केतौ भागल नै जा रहल छी। तहूमे बेसी खरचा करबाक कोन खगता छइ। हम खीरक भूखल नै छी। हम प्रेम-श्रद्धाक भूखल छी। प्रेमसँ जे किछु भेलै आ जेतबे भेलै, वएह बड़ भेलइ। जी-जान लगेबाक कोनो खगता नै छै। बोल जय गंगा।

बौकु-          जय गंगा। सरकार, दोसर बेरसँ ऐ सभ बातकेँ धियान रखबै। अखैन धरि जे किछु घट्टी-कुघट्टी भेल हो, ओकरा माफ करिहक।

फूलो-          जा, माफ छह। आन बेरसँ लगती माफ नै हेतह। आब जाइ छिअ। केसटोलीमे पूजा ढारल छइ। बोल जय गंगा।

                 

(फूलो धरतीपर माथ टेकलैथ। बौकु गंगाजल छींटलैथ। फूलो उठि देह-हाथ झाड़ि सम्‍हारि कऽ बैसली। दुनू परानी दर्शककेँ हाथ जोड़ि प्रणाम केलैथ। थोपड़ीक बौछार भेल।)

 

इति शुभम्

 

 

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