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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१७.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

 

रबीन्‍द्र नारायण मिश्र

 

बाल्‍यकाल   

घरक आगूमे कनीटा जगह छेलइ। ओइ जगहमे हमर फुलवाड़ी छल। केतौसँ तीरा फूलक बीआ आनि कऽ रोपि दिऐ आ लगले माने प्राते भेनेसँ बाबाकेँ पुछए लगिऐन-

बाबा! फूल तँ नहि फुलेलै?”

हमर बात सुनिते बाबा हँसि दैथ।

रोज भोरे उठिते यएह काज...।

कएक बेर तीराक बीआसँ कनियोँटा पम्‍ह निकलै आकि फेर दौड़ी बाबा लग। बाबा फेर हँसए लगैथ। कएक दिन जखन अहिना बाबाकेँ तंग करिऐन तखन कहैथ-

समय लगै छै, एक्के-दिने थोड़े फूल फुलाइ छइ।

फेर बाट ताकी। पानिसँ पटाबी। क्रमश: बीआ गाछ बनबाक दिशामे अग्रसर होइत छल। आठ-दस दिनक बाद, जखन तीराक गाछ बढ़ि जइतैक तँ फेर बाबा लग चल जाइ आ हुनका पकैड़ कऽ आनि तीराक गाछ लग लऽ जा देखा दिऐन।

गाछक स्‍थिति देख बाबा मुड़ी डोलबैत बजैथ-

हँ! आब फूल आबि जाएत। अहिना पानिसँ पटबैत रहियौ।

किछु दिनमे रंग-बिरंगक तीराक फूलक कोढ़ी अबै आ रोज भोरे फेर जिज्ञासा भरल आँखिसँ फूलक कोढ़ीकेँ देखैत रही। फूलकेँ कोढ़ीसँ स्‍फुटित होइत देखैत रही। केतेक आनन्‍द होइत रहए, केतेक आनन्‍दित भऽ जाइत रही, तेकर वर्णन हठात्‍ करब संभव नहि।

हमर पितामह अपना समयमे पहलवान छला। लोक बजैथ जे ओ असगरे चार चढ़ा लइ छला। खेती-वाड़ी जमि कऽ करैत छला। छह फूट लम्‍बा, मजगूत कद-काठी आ घोर परिश्रमी व्‍यक्‍तित्वक लोक हमर पितामह छला। ओ भोरे उठैथ आ जन-मजदूर सभकेँ अढ़बए सिनुआरा टोल जाथि, जन लऽ कऽ खेतपर जाथि। जन सबहक पनपियाइ पहुँचाबैथ इत्‍यादि काज एकसूरे कऽ लथि।

६५ सालक उमेर तक हुनका घोर परिश्रम करैत हम देखिऐन। पोखरिक पुबरिया भीत्तापर ओलार छल। मीआजान चरबाहकेँ घरेपर सँ अवाज दैथ-

महींस पनहा गेल अछि...।

बाबाक एकटा महींस हुनके हाथे लगैत छल। जखन कखनो ओ केतौ चलि जाथि तँ आफत भऽ जाइत रहए। महींस चुकैर-चुकैर कऽ जान दइपर उतारू भऽ जाइत छल मुदा लगैत नहि छल।

कर्मठताक संग-संग ओ आस्‍तिक एवम्‍ संस्‍कार सम्‍पन्न लोक छला। बाबाकेँ एकटा डमरू रहैन जे ओ बजबैत रहैत छला। कहैथ जे ओ डमरू हुनका महादेव देने छैन। हमरा लोकनिक जन्‍मसँ पूर्वेसँ ओ डमरू हुनका लगमे छल। बादमे ओइ डमरूकेँ महादेवक मन्‍दिरपर लेने गेला आ सायंकाल नचारी गबैतकाल एवम्‍ महादेवक आरतीक समय ओ डमरू कखनो बाबा स्‍वयं वा कखनो-कखनो आर बुढ़ सभ बजबैत छला।

बच्‍चा सभकेँ बाबासँ बहुत सिनेह होइते अछि। हमरो हुनकासँ बड़ सिनेह छल। सदिखन बाबासँ सटल रही। कर्मठताक संगे ओ बड़ तमसाह छला। तथापि हमरापर ओ कहियो, एक्को बेर नइ तमसेला। मुदा हमर अनुज कएक बेर बाबासँ मारि खा जाइत छला। ओना, तमसपर बाबा मारि तँ दैन मुदा पछाइत अपने कानए लागैथ।

गाममे सुसम्‍पन्न परिवारक नायक छला- हमर बाबा। हुनकर बिआह समस्‍तीपुरक आसपासमे सोतीसलमपुरक शीलानाथ झाक पाँजिमे, ओइ समयक पाँच साए चानीक सिक्का दऽ कऽ भेल रहैन। बादमे ओ सभ जनाढ़मे बसि गेल रहैथ। बाबाक सार सभ गाहे-वगाहे अबैत रहै छला आ बहुत सम्‍मान पूर्वक बहुत-बहुत दिन धरि हमरा ओइठाम ओ लोकनि रहितो छला। बाबाक हेतु छोट-मोट उपहार जेना- चक्कू’, सरौता इत्‍यादि नेने अबथिन।

देवोत्‍थान एकादशी दिन भगवानकेँ जगौल जाइत छल। पीढ़ीपर रंग-बिरंगक अरिपन बना चारूकात दीप जरौल जाइत छल, आ चारि गोटे चारूकातसँ मन्‍त्रोच्‍चारक संग भगवानक ऊपर ...... जाथि आ फेर धीरे-धीरे निच्‍चाँ आबि जाथि। पूजा पाठ होइत, प्रसाद वितरण होइत। बाबा ऐ पूजाकेँ बहुत श्रद्धा पूर्वक करैत छला।

अनन्‍त चतुर्दशीक दिन भगवानक पूजा हमरा ओइठाम सभ साल होइ छल। सभ अपन-अपन घरसँ अनन्‍त आनैथ, प्रसाद आनैथ आ ओकर पूजा विधि पूर्वक बाबा करैत रहथिन।

किं मथसि, क्षिर निधि

प्राप्‍तो त्‍वंया, प्राप्‍तो मया।

उपरोक्‍त श्‍लोक कहि कऽ अनन्‍त सबहक पूजा होइत छल। व्रह्मस्‍थानमे लखराम महादेवक पूजा होइत आ घरे-घरे लोक माटिक महादेव बना कऽ लऽ जाइत छल। दिन भरि पूजा होइत रहै छल। गाममे समय-समयपर नवाह, अष्‍टजाम सेहो होइत रहै छल। ऐ सभसँ बालक सभमे नीक संस्‍कार पड़ैत छल।

हमर पितामह इलाकाक प्रतिष्‍ठित जमीन्‍दार छला। डॉ. सुभद्र झाजी कहैथ जे ओ जखन घोड़ापर चढ़ि कऽ कर्ज-वसूलीक हेतु नागदह जाथि तँ लोक डरे नुका रहैत छल। परिवारक आर्थिक सामर्थ्‍य बढ़बैमे हुनक जबरदस्‍त योगदान छल।

हमर गामक बिच्‍चेमे एक पोखैर अछि। पोखरिक पछवरिया भीरसँ कनिक्के हटि कऽ हमरा लोकनिक घर अछि। पोखरिक पुवरिया भीरपर ओलार छल जैठाम माल-जाल बान्‍हल जाइत छल। घरेसँ केतेको बेर बाबा चिकैर कऽ ओलारपर चरबाहकेँ निर्देश दैथ। घरक शुद्ध दूध, दही प्रचूर मात्रामे उपलब्‍ध करबामे ओलार आ ओइठाम दिन-राति खटैबला चरबाह–मियाँजान–क बहुत योगदान छल।

धिया-पुता सभकेँ हमरा घरमे बहुत हिफाजत होइत छल। बाबू असगरे छला। तँए परिवारमे नब बच्‍चा स्‍वागत योग्‍य होइत छल। ऐ तरहेँ हम सभ ९ भाए-बहिनक पैघ परिवारक अंग भेलौं।

हमर गाममे पीच सड़क छेलै, चौबटिया छेलै, जेकरा ओइ समयमे कमाल चौक कहल जाइत छल। कारण पुवारि टोलक कमाल नामक एक बेकती ओइठाम पानक दोकान खोलने रहैथ। तैसंग चाह आ मधुरक दोकान स्‍व. सुखदेव साहुक छल। ऐ दोकान सबहक अतिरिक्‍त ठेलापर दूटा आर दोकान क्रमश: खूजल। कनिक्के हटि कऽ किछु आर दोकान छल। चाह, मधुर ओतौ उपलब्‍ध छल। केतेको गोटे ओइठाम बैस कऽ गप्‍प मारि समय कटैत छला। छोट-मोट क्‍लब जकाँ ओ काज करैत छल। ओइठामक गप-सप्‍प विषय बदलैत रहै छल। एकबेर जबरदस्‍त विवादक विषय छल जे हमर गामक नाम अड़ेरु डीह छिऐ आकि अड़ेर डीह?’

..हमहूँ ओतए ई चर्च सुनैत रही। बच्‍चामे हमरा होइत छल जे ई सभ अपन समय व्‍यर्थ बरबाद कऽ रहला अछि, मुदा आब ओकर उपयोगिता बुझा रहल अछि। सही मानेमे ओ बुढ़ सभकेँ जीबाक बड़का सहारा छल।

कनियेँ दूर हटि कऽ बुध आ रबि दिन हाट लगैत छल। तरह-तरह केर तीमन-तरकारी ओतए उपलब्‍ध रहै छल। चारूकात किछु स्‍थायी दोकान सभ छल। हम सभ हाट करि अपन घरक हेतु झोड़ा भरि-भरि तरकारी अनैत छेलौं।

गाम दऽ कऽ दूटा बस चलैत छल। एकटा एकटा उजरी बस जे लाहरघाटसँ मधुबनी आ दोसर हरलाखीसँ मधुबनी जाइत छल। दुनू बस बेनीपट्टी, धकजरी, अड़ेर, रहिका होइत मधुबनी जाइत छल। ई दुनू बस जँ छुटि गेल तँ सिवाय रिक्‍शाक आर कोनो सवारी नहि छल। रिक्‍शा द्वारा गाम-घरक गरीब सबहक गुजर होइत छल। रिक्‍शो चलब धिया-पुताक मनोरंजन छल। कएटा बच्‍चा सभ रिक्‍शापर पाछासँ लटैक जाइत छल आ दूर तक रिक्‍शाक पछोर करैत छल बे-लजूलक तंग केनाइ छल आ रिक्‍शाबला सभ कए बेर तंग भऽ कऽ झगड़ापर उतारू भऽ जाइत छल।

हमर गाम बस पकड़ए हेतु दूर-दूरसँ लोक अबैत छल। जमुआरी, एकतारा, नगवास आदि गामसँ लोक अड़ेर आबि कऽ बस पकड़ै छला। क्रमश: बसक संख्‍या बढ़ल। सरकारी बस सभ चलए लगल। सीतामढ़ीबला रोडक बस चलि गेलाक बाद तँ बसक संख्‍यामे बहुत वृद्धि भेल आ आब तँ अड़ेर छोट-छीन शहरक सुविधा सम्‍पन्न भऽ चूकल अछि। सड़कक काते-काते सभ रंगक सैकड़ो दोकान खुजि गेल अछि। बैंक, ए.टी.एम., थाना, हाइ स्‍कूल इत्‍यादि सभ भऽ गेल। आसपासक आन गाम-सभमे पक्का रोड बनि गेल अछि आ अड़ेर चौकक महत्‍व बढ़िते जा रहल अछि।

गामक पूबसँ कमला नहरसँ जोड़ल धार बहैत छल। ओइमे तखने पानि अबै जखन जयनगरक आसपास बनल फाटकसँ पानि छोड़ल जाइत। भदवारिमे जखन चारूकात बाढ़ि आबि जाइ तँ ओहूमे पानिक दर्शन होइत। ओइ समयमे हम सभ धारमे खेलाइत छेलौं। चौकसँ आगाँ बनल पूल, जैपर लोहाक घेराबा देल छल, ओइपर सँ बच्‍चा सबहक देखा-देखी कुदि जाइत रही। सचमुच ई भयाबह छल मुदा सभ बच्‍चा देखसीमे एना करैत छल। कएक गोटाकेँ ओइमे चोटो लगैत रहइ।

पुलक निच्‍चाँ पानिक झड़ना छल। ओइमे तेजीसँ पानि ऊपर-सँ-निच्‍चाँ खसैत छल। ओइमे फाटक लगबैक सेहो बेवस्‍था छल जइसँ जरूरत भेलापर पानिक बहाव नियंत्रित कएल जा सकए। ओइ झड़नामे अपन गामक बच्‍चा सबहक संगे हमहूँ कुदि जाइत रही। ओतए पानिक बहाव बहुत तेज रहैत छल आ कएबेर बच्‍चा सभ गोंता खेला बाद ५-६ मीटर दूर धरि बहि जाइत छल।

एकबेर हमरे गामक खुरलुच्‍च पैघ बच्‍चा हमरा झड़नाक ऊपरसँ धकेल देलक, जइसँ हमर वामा आँखिसँ ऊपर माने भाँउ लगक कपार फुटि गेल। तेकर बाद जे उपरागा-उपरागी भेल से की लिखू।

गाम-घरमे चेचकसँ बँचबाक हेतु पाच कएल जाइत छल। ओइ समयमे एकरा धार्मिक क्रिया बुझल जाइत छल। शीतला माइक आराधनाक स्‍वरुपमे झालि बजा-बजा कऽ पचनियाँ गीत मसहूर छल। बहुत नेम-टेमसँ घरक लोक रहैत छल। कार्यक्रमक अन्‍तिम दिन तेल चढ़ैत छेलइ। पचनियाँकेँ चढ़ौना देल जाइत छल। अखनो धरि ई दृश्‍य हमरा मोन पड़ैत रहैत अछि। वामा बाँहिपर दूटा नमगर-नमगर चेन्‍ह अखनो धरि विद्यमान अछिए।

पचनियाँ सभ सरकारी कर्मचारी होइत छला जे लोकक धर्मिक भावना एवं अज्ञानताक फैदा उठबैत पैसाक उगाही करैत छला।

ओइ समयमे ग्रामोफोन हएब बड़का बात छेलइ। हमरा गाममे प्राय: तीन गोटेकेँ ग्रामोफोन रहइ। ओइमे गीतक रेकर्डगोल-गोल चक्का सन चढ़ा कऽ ग्रामोफोनक सुई चला दइ तँ गाना-बजाना होइक। बच्‍चा सभकेँ कहल जाइक जे भोपूमे आदमी नुकाएल अछि। आ हम सभ ओइ आदमीकेँ तकै छेलौं। हमरो ओइठाम एकटा ग्रामोफोन रहैक। ओकर पार्ट सभकेँ खोलि ओइमे नुकाएल आदमीकेँ तकैत रहै छेलौं। एक दिन जेना-तेना किछु पाइक इन्‍तजाम कऽ मधुबनी जा कऽ दूटा ग्रामोफोनक रेकार्ड कीनलौं, जइमे एकटा छल तेरी प्‍यारी प्‍यारी सूरत को किसी को नजर ने लगे ससुराल फिल्‍मक गाना छल।

सन्‍दुकमे राखल ग्रामोफोनकेँ खोलि ओइमे रेकर्डकेँ बजबैत कियो देख लेलक। बात बाबू तक पहुँचल। मुदा कनी-मनी डाँट-फटकारक बाद छोड़ि देल गेलौं।

हमरा गाममे दाहा अबैत छेलइ। बच्‍चा सभ ओइमे बड़ा आनन्‍दित रहैत छल। हम सभ दाहाक नकल करी। करचीमे फूल आ आर किछु खोपि दिऐ आ सभ बच्‍चा अपनामे संगोर करि कऽ अँगने-अँगने घुमी आ दमदलियाक दाहा हुसे..। कहि-कहि संगे सभ बच्‍चा चिचिआइत खूब आनन्‍दित होइत रही।

छोट-छोट बात सभसँ बच्‍चामे केतेक आनन्‍द होइत छल, तेकर ई उदारहण अछि। बरखा, थाल-कादो, रौद, पानि-बिहाड़ि इत्‍यादि सभमे बच्‍चा आनन्‍द ताकि लैत अछि। सच कही तँ वाल्‍यावस्‍था ईश्वरत्‍वक बहुत समीप रहैत अछि। अन्‍दक आनन्द यत्र, तत्र, सर्वत्र प्रस्‍फुटित होइत रहैत अछि। हम सभ दरबज्‍जापर बैसल रहितौं, सिलेट लऽ कऽ लिखैक अभ्‍यास करैत, कि एकटा पगला अबिते बड़बड़ाइत-

जलखै, जलखै...।

किछु-ने-किछु ओकरा कियो-ने-कियो खेनाइ दऽ दइ आ ओ चल जाइत। बहुत दिन तक ओ क्रम चलल रहइ...।

बालमनपर जे गड़ि गेल से गड़ले अछि। अर्द्धनग्न शरी, माटि, थाल-कादो सटने, बकर-बकर बजैत ओ अबैत-जाइत रहैत छल। कहि नइ ओ के छल आ ओकर की अन्‍त भेल...।

भूतकालक घटनाकेँ मोन पाड़ैत अनायास ओइ शिक्षकपर धियान चल जाइत अछि जे हमरा सबहक घरक सटले बच्‍चा सभकेँ पढ़बैत छला। बच्‍चा जँ कोनो गलती केलक, किंवा सबक नहि रटि सकल, तँ घोरनक छत्ता विद्यार्थी-सभपर छोड़ि दैथ।

बाप-बाप चिचिआइत बच्‍चा सभक स्‍मरण करैत अखनो रोमांचित भऽ जाइत छी। सोचल जा सकैत अछि जे ओइ बच्‍चा सबहक की भविस रहल हेतइ। एक्कोटा बच्‍चा ओइमे सँ नहि पढ़ि सकल। बच्‍चाक माए-बाप सभ अपन बच्‍चा सबहक कल्‍याणक कामनासँ मूक दर्शक बनल रहल। आ सभ बर्वाद भऽ गेल।

ई बसुधा काइ को नाही...।

ऐ पछवरिया घरवारी। ऐ पुबरिया घरवारी...।

ई टनक अबाज छल एकटा भिखमंगाक। साए वीघा खेतक हमहूँ मालिक छेलौं।

ई वसुधा काहु कि नाही...।

कएक बेर ओ ई बात चिचिआ कऽ कहैत। हाथमे छड़ी, आँखिपर टुटल-फुटल चश्‍मा, धोती पहिरने, ओकरे ओढ़ने। ओ हमरे गामसँ सटल बेलौजाक छला। हमर पितियौत बाबी ओही गामक रहैथ। तँए हुनकासँ बेसी ओ अपेक्षा रखैत छल। ओकरा एक तम्‍मा चाउर देल जाइत तखने लैत, मुट्ठी भरि नहि। जौं मुट्ठी भरि देबाक कियो चेष्‍टा करैत तँ ओ चिकरैत-भोकरैत चल जाइत। मास-दू-मासमे एकबेर अबैत आ भरि तम्‍मा भीख भेटलाक बाद ओइ दिन दोसर घर नहि जाइत। एहेन कड़क अबाज, बेवहारक ओ भीखमंगा। अन्‍दाज ओकरा ओइ अवस्‍थामे अलग पहचान दैत छल। कहि नहि की भेल जे ओकर एहेन आर्थिक पतन भेल। निश्‍चय ओ एकटा अलग व्‍यक्‍तित्वक लोक छल।

स्‍कूलक रस्‍तेसँ अल्‍हाक ढोलकक थाप सुनाइत छेलइ। होइत जे दौड़ कऽ रस्‍ता तँइ कऽ अल्‍हा सुनए पहुँच जाइ। घर पहुँचते बस्‍ता रखितौं आ भागितौं। माय कहैथ-

पहिने किछु खा तँ लिअ।

माइक गप सुनिते कहि दिऐन-

आबि रहल छी।

आ अल्‍हा सुनए पहुँच जाइ। हमरा गाममे अल्‍हाक बहुत रेवाज छेलइ। दुपहरिया कटबाक ई उत्तर साधन छल। भरि गामक लेाक सभ जमा होइत आ ओ जोशा-जोशा कऽ ढोलकपर थाप मारैत आ गबैत अल्‍हा-रुदलक अनेकानेक प्रकरण सुनबैत-

बाबू सुनो हमारी बात, एक दिन की नहीं लड़ाई गाबत बीत जाय बारहम मास...।

ऐ तरहक पाँति सभसँ गीतमय कथानक रूचिगर छल। बच्‍चा सबहक हेतु ओ अद्भुत आकर्षण छल। बेरा-बेरी केतेको दरबज्‍जापर अल्‍हाक आयोजन होइत रहै छल। ओ नट हमरा गाममे बहुत प्रसिद्ध भऽ गेल छल।  

गाम-घरमे सामान्‍यत: लोककेँ ऐ तरहक मनोरंजन उपलब्‍ध छल। औझुका जकाँ टेलीवीजन नहि रहैक तहिया। रेडियो सेहो केकरो-केकरो गाममे रहइ। तँए किछु तँ चाही।

 

 

 

 

 

 


 

भाग- २

गाममे सामान्‍यत: लोक भोरे उठि जाइत अछि। हमर बाबा तँ भोरे उठि कऽ सभ काज कऽ जन अढ़ा कऽ आबि जाइत छला, तखनो चहल-पहल कमे रहैत छल। हमहूँ नित्‍य नियमित नवका पोखैरमे स्‍नान करी। ओइठाम भगवान शिवक पंचमुखी मूर्ति छल, पूजा करी, जल ढारी, व्‍यायाम करी, तखन घर आबी। स्‍नान करए जाइत रस्‍तामे रस्‍तामे हारमोनियमपर भजन गबैत मधुर अबाज सुनैमे अबैत रहैत छल। गामसँ उत्तर-पच्‍छिम मन्‍दिरपर ओ पुजारी छला। सिघिंऔन गामक। हुनक स्‍वरक मधुरता समस्‍त वातावरणमे अद्भुत आनन्‍द भरि दैत छल।

सूर्योदयसँ पूर्व हमर स्‍नान भऽ जाइत छल। पोखैरमे धराधर डुबकी लगाबी। जाड़क मासमे तँ यैहले-वैहले स्‍नान भऽ जाइत छल। गर्मीमे कनी-मनी हेलानाइ सेहो भऽ जाइत छल। ओइ समयमे कुट्टीपर आरतीक घड़ी-घण्‍ट टनाटन करए लगैत छल जे बड़ीकाल धरि चलैत रहै छल। कुट्टी परहक बाबा बहुत संग्रही रहैथ। ओ बहुत रास गाए पोसैथ। मुदा एक राति चुप्‍पे मन्‍दिरसँ समान सभ लऽ चलि गेला।

सन्‍ १९६१मे सम्‍पूर्ण रामायण सिनेमा आएल छल। लॉडस्‍पीकर-पर गामक गाम प्रचार होइ-

देखना मत भुलियेगा, शंकर टॉकिज- मधुबनीकेँ विशाल पर्दे पर सम्‍पूर्ण रामायण...।

गाम-गामक लोक उनैट गेल छल। ओ सिनेमा केतेक चलल से नहि गनल जा सकैत अछि। हमरो गामसँ केतेको लोक सम्‍पूर्ण रामायण देखए गेला। हमहूँ बाबूजीकेँ केतेक बेर कहने हेबैन-

बाबूजी, सम्‍पूर्ण रामायण देखए चलू।

ओ आइ-काल्‍हि करैत रहला आ हम सम्‍पूर्ण रामायण सिनेमा नहि देख सकलौं। ओइ सिनेमाक गीत सभ अखनो हम सुनै छी तँ स्‍वत: अपन वाल्‍यावस्‍थामे विलीन भऽ जाइ छी।

बदलो बरसो नयन की ओर से...।

हम रामचन्‍द्र की चन्‍द्रकला से...।

ई दुनू गीत तँ हमर बेर-बेर सुनैत रहै छी। मोन होइत रहैए एकबेर ई गीत अहूँकेँ सुना दी। चलू फेर कखनो। जखन कखनो ई गीत सुनै छी तँ स्‍वत: आँखि नोरसँ भरि जाइत अछि।

सीता-जन्‍म वियोगे गेल, दुख दुख छोड़ि सुख कहियो ने भेल। जगतजननी मैथिली-सीतामैयाक दुखक वर्णन करैत ई गीतमे भावनाक अद्भुत विस्‍फोट अछि। समाजिक कुबेवस्‍था एवं सामन्‍तवादी सोचक विद्रोह स्‍वरुप अपन सन्‍तान द्वारा अन्‍यायक प्रतिवाद करैत ई गीत-

हे राम तुम्‍हारी रामायण तब तक होगी सम्‍पूर्ण नहि...।

जब तक राज्‍य के निर्माता, धोबी के बाद में आयेगे,

भारत भविष्‍य की माता को धोखे से वनमे ठुकराऐंगे...।

ऐ गीतक एक-एक शब्‍द रोमांचित करैत अछि। केतेक अन्‍याय सहए पड़ल मिथिलाक ओइ यशस्‍वी सन्‍ताकेँ। खाएर चलू आगू बढ़ी...।

जीवन यात्रामे एहेन केतेको दृश्‍य अछि, जे मोनमे गड़ि जाइत अछि। जानकीक संग एना किए भेलैन। सोचैत-सोचैत रहि जाएब। मुदा उत्तर नहि भेटत। बाबूजी कएक बेर बजैत रहैथ-

विधि वाम की करनी कठिन, जश सियहि किन्‍है बाबरो...।

यद्यपि  समय बहुत आगाँ बढ़ि गेल अछि, लोकक विचारो बदलल अछि, तथापि सीता सदृश अनेको मैथिलानी अखनो चौबटियापर न्‍यायक बाट तकैत देखल जाइ छैथ।

धिया-पुताक छोट-टोट बात ओकर भावी जीवनक दिशा निर्देश करैत अछि। हमरा बच्‍चामे खेलबाक बहुत जतन रहए। आस-पासक बच्‍चा सभकेँ पकैड़-पकैड़ कऽ खेलक हेतु इकट्ठा करी। कएक तरहक खेल होइत रहइ, बिनु खर्चक आ बिनु कोनो झंझटक- जेना कबड्डी, विट्टू, फूटबॉल, बालीबॉल आदि। कबड्डी तँ हमरा दरबज्‍जेपर होइत रहइ। स्‍कूलसँ अबिते देरी भीर जाइत रही। फूटबॉल हमरा गाममे बहुत प्रचलित छल। विष्‍णुपुर टोलसँ सटल खेलक मैदान छल, जइमे बरोबैर खेल होइत रहइ। बादमे हाई स्‍कूल बनि गेलाक बाद ओकरे मैदानमे खेल हुअ लगलै। पुरना समयमे हमर गामक फूटबॉल टीम बहुत प्रसिद्ध छल। हमर बाबू सेहो बढ़ियाँ खेलाइत छला। ओ कहैथ जे खेलक चक्करमे पढ़ाइ चौपट्ट भऽ गेल। वाट्सन स्‍कूल- मधुबनीक छात्र रहैथ आ गेनखेलीमे जेतए-तेतए चल जाइत रहैथ। हुनका केतेको मेडल भेटल रहैन। जँ आजुक समय रहैत तँ बाते अलग रहैत। शायद हुनका अपसोच नहि करए पड़ितैन। मुदा ओइ समयमे तेहेन परिस्‍थिति नइ रहइ। कलकत्ता गेल रहैथ तँ मोहनबगानमे गेनखेलीमे चुनाव भऽ गेल रहैन मुदा थोड़बे दिनक बाद गाम आपस चल एला। लोक सभ बुझेलकैन जे गाममे कोन कमी अछि जे अहाँ कलकत्ता एलौं, आदि-आदि अनेको बात कहलकैन।

पछाइत गेनखेलीसँ हुनका तेतेक परहेज देखिऐन जे जँ हम कहियो खेलैत देखा जइतौं तँ पकैड़ कऽ लऽ अबैथ। जेना खेलकेँ पढ़ाइक शत्रु मानए लगला। परिणाम भेल जे हम खेलक मामलामे चौपट्ट भऽ गेलौं आ सदा-सर्वदाक लेल खेल-धूपसँ विरत रहि गेलौं।

एकबेर केना-ने-केना पैसाक जोगार कऽ बड़का गेन किनलौं। बच्‍चा सभ मिलि ओइमे हवा भरलौं। आ कुट्टीक भीरपर खेलए गेलौं। ओ जगह गामसँ कनियेँ हटल अछि। तँए मनमे ई आशा रहए जे पकड़ल नै जाएब, मुदा केना-ने-केना बाबू ओत्तौ पहुँच गेला, हमरा देखते तमसाए लगला। खेल बन्‍द भऽ गेल। एवं प्रकारेण धीरे-धीरे हम ई सभ निठ्ठाहे छोड़ि देलौं आ सोलहन्नी कितावसँ चिपकए लगलौं। ओना, ऐसँ पढ़ाइमे फैदा भेल, मुदा खेल-धूपसँ हटि जेबाक कारण कएकटा क्षति सेहो भेल। हमरा हिसाबे ई ठीन नहि भेल, मुदा समय-समयक बात होइत अछि। ओइ समयमे जे भेलै से भेलइ। आब लोकक दृष्‍टिकोण बदैल रहल छइ। खेलक प्रति लोकक सकारात्‍मक रूखिसँ बच्‍चाक सर्वांगीण विकास होइत अछि। समाजिक पक्ष मजगूत होइत अछि एवं ओकर सोभावमे शहनशीलता ओ सामंजस्‍य करबाक भावना बढ़ैत छइ। परीक्षामे नम्‍बर आनि लेबे सभ किछु नहि अछि। ओइसँ हटियो कऽ जीवनक अनेक पक्ष अछि, जैपर धियान देबाक जरूरी अछि, जइसँ जीवन बेसी सुखी ओ शान्‍त रहि सकैत अछि।

ई निश्‍चय जे माता-पिताक मनमे सन्‍तानक कल्‍याणक कामना रहैत अछि मुदा ओकरा अपन आकांक्षा किंवा मनोरथक प्रतिविम्‍ब बनबैक परियास कएक बेर बच्‍चाक विकासमे बाधक भऽ सकैत अछि। भगवानक दृष्‍टिमे सभ मनुख एक अद्भुत रचना अछि आ सभ किछु-ने-किछु विशेषता, विशेष क्षमता लऽ कऽ अबैत अछि। परिवार एवं विद्यालयक दायित्‍व अछि जे ओकर विशेषताकेँ बुझए आ ओइ दिशामे ओकरा विकासक समुचित सुविधा सेहो दइ। डाक्‍टर, इन्‍जीनियर बनि जाए, एतबे जीवनक अन्‍तिम सत्‍य नहि भऽ सकैत अछि।

हमरा गामसँ उत्तर-पूबमे चौकसँ कनिक्के हटि कऽ एकटा मन्‍दिर अछि। जेकरा कुट्टी सेहो कहल जाइत अछि। ओइठाम सावनमे सभ साल झूला जोर-सोरसँ मनौल जाइत छल। भजन-कीर्तनक गायन होइत छल। आस-पासक गामक लोक झाँझमे ओइठाम एकट्ठा होइ छला। कार्यक्रमक अन्‍तमे प्रसाद वितरण होइत छल। कुट्टीपर बाबाकेँ बहुत रास गाए छेलैन। ओही गाइक दूधसँ प्रसाद बनौल जाइत छल, जइमे पर्याप्‍त मात्रा दूध आ मुट्ठीपर चाउर दऽ दऽ पायस बनौल जाइत छल। धिया-पुताकेँ ओ पायस खेला बाद स्‍वर्गक आनन्‍द भेटैत छल। बड़का थाड़मे पायस राखि कऽ बाँटल जाइत छल। मुदा लोककेँ पायस बहुत कम मात्रामे देल जाइत छल। मुँहमे पायस जाइते देरी लगैत जे गलि गेल। स्‍वादिष्‍ट, मधुबर एवं मनमोहक। बच्‍चा सभ पायस लेबाक हेतु बारंबार परियास करैत छल। धक्का-मुक्की होइत छल। वारिक (परसनिहार) हमरे टोलक रहैत छला। ओ सदिखन ऐ बातक धियान रखैत छला जे अपना-ले पर्याप्‍त मात्रामे पायस बँचि जाए, मुदा लोकक आक्रमण देख ओ परेशान भऽ जाइत छला। एक बेर तँ पायसक बट्टा लेने ओ पोखैरमे कुदि गेला आ अन्‍दर पानिमे जा कऽ ताबरतोर पायस सुरकए लगला। चारूकात गामक धिया-पुता ओ युवकगण ऐ दृश्‍यकेँ देखैत रहि गेला। हमहूँ पोखैरक कातमे आन-आन बच्‍चा सबहक संगे ऐ दृश्‍यकेँ देखैत रहि गेल रही, जे अखनो धरि नहि बिसराएल।

बाबू साइकिलसँ मधुबनी जाइत रहैत छला। कहियो-काल किछु-किछु फरमाइस कऽ दिऐन। एकबेर पेन अनबाक हेतु कहलयैन। सड़कक कातमे ठाढ़ भेल बड़ीकाल तक बाट तकैत रही जे बाबू पेन लऽ कऽ आबि रहल छैथ। जेतेक साइकिल देखा पड़ैत, देखते होइत छल जे वएह आबि रहल छैथ। केतेको काल धरि बाट तकलाक बाद बाबू साइकिलपर अबैत देखेलैथ। थाकल, अपसियाँत भेल बाबूजीकेँ साइकिलसँ उतैरते पुछलयैन-

बाबू, पेन अनलौं?”

बजला-

जा! बिसरा गेल..!”

सुनिते देरी बहुत निराशा भऽ गेल रही। पछाइत वौसबाक हेतु बाबू अपन हाथसँ धड़ी निकालि कऽ हमरा हाथमे पहिरा दैथ। शर्त ई जे घड़ी देख कऽ पढ़ब।

मधुबनीमे सर्कस आएल छल, राति-के फोकस लाइट छोड़ल जाइत छल जे दूर-दूर तक देखल जाइत छल। बाबूकेँ खुशामद कएल गेल। हम आ बाबू सर्कस देखलौं। तरह-तरहक व्‍यायाम, खेल, धूप आदि ओइ सर्कसमे देखौल गेल। तेतबे नहि, बाघक संग सर्कसमैनक खतरनाक खेल सेहो देखौल गेल छल। गाम-गामसँ सर्कस देखबाक लेल महिनो भरि लोकक ढवाहि मधुबनीमे लागल रहैत छल। सर्कस देख कऽ स्‍वर्गक आनन्‍द भेल रहए। तरह-तरह केर व्‍यायाम ओ खतरनाक खेल सभ एकट्ठे देखबाक एहेन अवसर गाम-घरमे कम अबैत छल।

हम सभ बच्‍चा रही तँ हमरा गामक एक महान संत श्रपति श्वामीक चर्चा होइत रहै छल। ओ गौर वर्णक ओजस्‍वी व्‍यक्‍तित्वक लोक छला। सन्‍यासी रहैथ। हाथमे दण्‍ड-कमण्‍डल रहैन। माय कहैथ जे गीता पढ़ैत-पढ़ैत हुनका मोनमे वैराग्‍य उत्‍पन्न भऽ गेल आ ओ जवानियेँमे सन्‍यास लऽ लेला। ओ कहियो काल गाम अबैत छला आ अपन शिष्‍यक ओइठाम रहैत छला। गामक पुस्‍तकालय एवं नवका पोखैरपर लोक सबहक संग ओ धर्म चर्चा करैत छला। ओइ समयमे गामक प्रतिष्‍ठित बेकतीमे ओ गनल जाइत छला।

गामक पुस्‍तकालयपर तरह-तरह केर खेलक सामग्री सभ सेहो लागल छल। किछु दिनक बाद एक-एककेँ ओ सभ टुटैत गेल आ क्रमश: नष्‍टभऽ गेल। पुस्‍ताकलयमे थोड़ेक समय तक बहुत गहमा-गहमी रहैत छल। अखबार, रेडियो अथबा पुस्‍तक सभ सेहो ओइमे छल। 

१९६२ ई.मे, जे चीन युद्धक समय छल, रेडियोसँ समाचार सुनबाक हेतु लेाकक भीड़ लागि जाइत छल। ऐ सभमे हमर गामक स्‍व. विश्‍वम्‍भर झाजीक गंभीर योगदान छल। दुर्भाग्‍यवस ओ बेसी दिन नहि रहि सकला। सन्‍१९६९ मे कमे उमेरमे हुनकर देहावशान भेलाक बाद ई सभ गतिविधि नष्‍ट भऽ गेल।

गाम-घरक आस-पास एक-सँ-एक प्रतिभाशाली बच्‍चा सभ छल। केकरो स्‍वर अद्भुत छेलइ तँ कियो पहलमानीमे निपुण छल। कियो मधुर गायन आ वाद्ययंत्रक प्रति आकर्षित छल तँ कियो किछुमे...। मुदा परिवार वा स्‍कूलमे ऐ सबहक विकासक संभावना नगण्‍य छल। परीक्षामे रटि-फटि कऽ नीक नम्‍बर अनलौं तँ बड़ नीक अन्‍यथा सभ व्‍यर्थ..! एहेन बच्‍चाकेँ नकारा घोषित कऽ देल जाइत छल। परिणामत: कएटा बच्‍चा जे जीवनक केतेको क्षेत्रमे अग्रगामी भऽ यशस्‍वी भऽ सकैत छला, मुदा ओ विषादपूर्ण जीवन जीबैले मजबूर भेला।

हमर गामेक एहेन कएटा बच्‍चा छल जिनकामे गेबाक अद्भुत सामर्थ्‍य छेलैन।  बिना कोनो प्रशिक्षण लेने जे ओ मैथिली गीत सभ गबैथ से बुझू सुनिते रहि जइतौं। मुदा हुनका सभकेँ कोनो प्रकारक संरक्षण, प्रशिक्षण नहि भेल। सभ कलान्‍तरमे गाँजाक सोंट लगबैत अपन-अपन स्‍वरकेँ नष्‍ट केलैन..!

बच्‍चामे हमरो हारमोनियम सीखबाक ललक जगल। जेना-तेना पैसाक प्रवन्‍ध कऽ मधुबनी जा कऽ अपनेसँ एकटा हारमोनियम कीनि अनलौं। गाममे एक गोटे हारमोनियम बजाएब जनैत छला। हुनकासँ हारमोनियम सीखए लगलौं कि गामक बुझनुक लोक सभ हमरा बाबूजीकेँ आबि शिकाइत केलकैन। शिकाइतो एना केलकैन जे ई बच्‍चा तँ दुरि भऽ रहल छैथ। केहेन बढ़ियाँ पढ़ैत छला। आ तैपर सँ धियान हटि गेलैन..!’

परिणाम भेल जे हम हारमोनियम सीखब छोड़ि देलौं। हलाँकि थोड़-बहुत जे हारमोनियम सीखि सकलौं, ओ अखनो अबिते अछि। मुदा तेतबे...। जे कि किछु लय निकालि सकैत छी।

मुदा अखनो धरि हम ई नइ बुझि सकलौं से कोन तरहेँ हारमोनियम सीखब खराप होइत। खाएर, लोकक सही सोचक अभाव छल जे बच्‍चा सबहक भविस हेतु कएक बेर बहुत अहितकर भेल। खाएर जे हौउ, मुदा बेटाकेँ पढ़बै-लिखबैमे हमर बाबूकेँ बहुत रूचि रहैन, जे कि हरिदम उत्‍साहित करैत रहैत छला, आ से मात्र हमरे नहि, गामक आनो-आन बच्‍चा सभकेँ।

पिताजी जइले प्रेरित करैत रहैथ, तेकर फैदा तँ भेबे कएल आ भाइए रहल अछि। परीक्षा सभमे लगातार हमरा नीक नम्‍बर आएल। मुदा कहक माने जे परीक्षाक नम्‍बर अनबाक अतिरिक्‍त जीवनक अन्‍य आयाम थिक जेकर बुझबाक, विकासक गाम-घरमे कोनो जोगार ने तहिया छल आ ने आइये भऽ सकल।

भाग्‍ये ललति सर्वत्र, न विद्या न च पौरुष:

कहल जाइत अछि जे विधाता जन्‍मसँ पूर्वे मनुखक भाग्‍य लिखि कऽ पठा दइ छैथ। हमर स्‍कूलक प्रयोगशाला कक्षमे उपरोक्‍त पाँति मोट-मोट अक्षरमे लिखल छल। जीवन यात्राक क्रममे घटित नाना प्रकारक घटना एवं अनका-अनका जीवनक तथ्‍य दिस देख, सुनि ई कथन एकदम सत्‍य लगैत अछि। एक आदमी जनैमते जीवनक समस्‍त सुख-सुविधा सम्पन्न भऽ जाइत अछि, दोसर तरफ केतेको एहेन लोक छैथ जे जीवन भरि जीबाक हेतु संघर्ष करैत रहि जाइत अछि। तेकर माने ई नहि जे भाग्‍यपर छोड़ि कऽ आदमी कर्तव्‍यहीन भऽ जाए, आ कामना करैत रहि जाए जे जे भाग्‍यमे हेतै से हेतइ। परियास तँ करब उचिते अछि, मुदा ई बात मानि कऽ चलू जे सभ किछु अपने मोनक नहि भऽ सकैत अछि। जँ अपना मोनक हो तँ नीक आ जँ अपना मोनक नहि हो तँ आर नीक। कारण ओइमे ईश्वरक इच्‍छा सम्‍मिलित रहैत अछि। बेचैन रहलासँ बढ़ियाँ अछि जे निमतिकेँ स्‍वीकार कए मनकेँ शान्‍त राखल जाए, कारण शान्‍त मनमे विकासक अनन्‍त सम्‍भावना रहैत अछि।

बच्‍चाक दुनियाँ माए-बाप, चाचा-चाची किंवा आस-पासक अन्‍य निकट सम्‍बन्‍धीक इर्द-गिर्द सिमटल रहैत अछि। ओकर सम्‍पूर्ण व्‍यक्‍तित्वक निर्माणमे परिवार एवं परिवारिक परिस्‍थितिक गंभीर प्रभाव होइत अछि। आस-पासमे रहनिहार लोक एवं परिवेश सेहो ओकरा प्रभावित करैत अछि। निश्चित रूपसँ हम ऐ मामलामे भाग्‍यवान रही। माता-पिता एवं पितामहक अद्भुत सिनेह एवं समर्थन हमरा भेटल।

९ भाए-बहिनक पैघ परिवारमे कखनो ई नहि भेल जे कियो किनकोसँ कम महत्‍वपूर्ण छल। सभपर बरोबैर धियान देल गेल। हमरासँ ज्‍येष्‍ठ पाँचटा बहिन छेली। हुनका लोकनिक बिआह-दान एकटा दीर्घकालीन घटना क्रम छल। १०-१२ वर्ष लगातार घरमे बिआह, कोजागरा, मधुश्रावणी, द्विरागमन सहित नाना प्रकारक विध-बेवहार होइत रहैत छल। एतेक भारी परिवारिक जिम्‍मेदारीक अछैत माय-बाबू बहुत आशावादी एवं आस्‍थावान छला। हमरा निरन्‍तर आगू बढ़बाक हेतु प्रेरित करैत रहला। गामक लोकक एवं परिवेशक सकारात्‍मक रूखि सेहो हमरा उत्‍साहित करैत रहल। ओ सभ प्रणम्‍य छैथ, जिनकर स्‍मरण करैत-करैत हम ओइ गामसँ दूर रहितो सदिखन अपनाकेँ ओहीठाम अनुभव करैत रहै छी।

 

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