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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)2004-2018.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- तीनटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उपन्यास नमस्तस्यै (आगाँ) २. डॉ. योगेन्द्र पाठक ’वियोगी’- उपन्यास- हमर गाम (पहिल खेप)

रबीन्द्र नारायण मिश्र

तीनिटा आलेख

डॉ. जयकान्त मिश्र (संस्मरण)

सन्१९७८ इस्‍वीक जनवरी मासमे दिल्‍लीसँ स्‍थान्तर भए हम इलाहाबाद गेल रही। ओहि समय प्रथम बेर डॉ. जयकान्त मिश्रजी सँ हुनकर तीभूक्‍ति, सर पीसी वनर्जीरोडस्थित घरमे भेँट भेल। बिना कोनो पूर्व परिचय रहितौं ओ सभ काज छोड़ि हमरासँ भेँट केला।एकटा मैथिलकेँ हमर डेरा तकबाक हेतु कहलखिन। ओतहिसँ हमर हुनका संग परिचय ओ सम्‍पर्कक क्रम प्रारंभ भेल जे अन्त धरि चलैत रहल।

जखन-कखनो हम हुनकर डेरापरजाइतँ ओ सभ काज छोड़ि हमरासँ अत्यन्त अपनत्‍व भावसँ गप्प करथि। अपनेटा नहि, अपितु हुनक पत्नी, ओ संगे रहनिहार परिवारक अन्‍य लोकनि सभ सेहो ओहिना गप्प-सप्पमे संग देथि। जलखै, चाह, पान तँ हेबे करइ।

ओही क्रममे कतेको गणमान्‍य मैथिल लोकनिसँ हुनकर डेरापर भेँट भेल। हुनकर अध्‍ययन, अध्यापन, लेखन सबहक अवलोकन करबाक अद्भुत अवसर भेटल। कए दिन हुनका संगे इलाहाबाद विश्वविद्यालयक अंग्रेजी विभाग गेलहु, जाहिठाम ओ अंग्रेजी विभागक अध्‍यक्षक पदपर कार्यरत छलाह।

इलाहाबादमे रहनिहार मैथिल समाज डॉ. जयकान्त मिश्रसँ पूर्ण परिचित छलाह। अधिकांश मैथिल सभसँ हुनकर व्यक्तिगत सम्‍पर्क छलनि। प्रत्‍येक साल विद्यापति समारोहमनाओलजाइत छल। डॉक्‍टर जयकान्त मिश्र ओहिमे अवश्‍यमेव रहैत छलाह। हुनकर डेरापर निरन्तर मैथिलीक विकास केना हो, तकर चर्चा होइत रहैत छल। ओ सदिखन बजैथ-

मैथिलीमे लिखल करू। मैथिलीक हेतु काज करू।

संगे मैथिलीक हेतु कएल गेल अपन अनवरत संघर्षक चर्चा सेहो होइत, जाहिसँ मैथिली विकास यात्राक साक्षातअनुभव होइत छल।

मैथिली भाषाकेँ बिहार लोक सेवा आयोगमे हटा देल गेल रहइ। तकरा पुनश्‍च आपस अनबामे, मैथिलीकेँ बच्चा सबहक शिक्षाक अनिवार्य माध्‍यम बनेबाक हेतु ओ कहि नहि, कतेको बर्ष संघर्ष करैत रहलाह आ अन्ततोगत्‍वा अपन प्रयासमे सफल रहलाह। मैथिलीक विकास हेतु ओ गाम-गाम घुमैत रहलाह। ततबे नहि, जतए कतहु मैथिलीक चर्चा होइत आकि कोनो कार्यक्रम होइत तँ ओहिमे डॉ. जयकान्त मिश्रजी अबस्‍से भाग लेथि।

आयु बढ़लासँ नाना प्रकारक स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बन्‍धी समस्‍या रहैत छलनि। हुनका कतेको साल पूर्व पेसमेकर लागल छलतथापि जँ कतहु मैथिलीक कार्यक्रममे हुनका बजाओल जाइत, तँ ओ अबस्‍स जाथि। परिवारक लोक चिन्तित भए जाइत छलखिन।

एकबेर हम इलाहाबादसँ पटना जाइत रही। स्‍लीपरमे हमर आरक्षण छल। डॉक्‍टर जयकान्त मिश्रजी केँ देखलहुँ। ओहिना ठाढ़, बिना सीटेक यात्रा कए रहल छलाह। बहुत आग्रह केलापर ओ हमर सीट लेबाक हेतु तैयार भेलाह। कहथि जे ओ अहिना चलि जेता। ई छल हुनकर उत्‍साह- मैथिली कार्यक्रमे भाग लेबाक। ओहि दिन पटनामे कोनो मैथिली कार्यक्रममे भाग लेबाक हेतु जाइत छलाह।

डॉ. जयकान्त मिश्रजीक भाषा ओ व्यवहारमे अद्भुत मधुरता छल। कखनो नहि लगैत जे एतेक पैघ विद्वानसँ गप्प कए रहल छी। जे जेहने स्‍तरक लोक रहैत, तेकरा संग तेहने भए गप्प करितथि। पूरा घ्‍यान देथि।घरक सदस्‍य जकाँ ओकर पूर्ण स्‍वागत करथि। घरक प्रथम तलपर हुनकर पुस्‍तकालय छल। ओहिमे बैस कए ओ अध्‍ययन, लेखन करैतरहैतछलाह। इलाहाबादसँ लघुकाय एकटा मैथिली पत्रिकाक सम्‍पादन सेहो करै छलाह। हुनकर नाति, भातिज सभ ओहि पत्रिकाक मैथिल लोकनिमे वितरणक व्यवस्था करथि। एकाध बेर हमरो ओहि काजमे ओ लगा लैत छलाह।

माघ मासमे प्रयागमे संगमतर पर ओ सपरिवार मास करैत छलाह। मिथिलाक प्रसिद्ध माछबला झण्‍डा मैथिल पण्‍डा सबहक पहिचान अछि। ओहि झण्‍डाकेँ देखि कए जयकान्त बाबू डेराक ठेकान लागि जाइत छल।

नवम्बर २००७ इस्‍वीमे हम इलाहाबाद गेल रही। हुनकर डेरापर गेलहु। परन्‍तु ओ काशी मास करए चल गेल रहथि। हुनकासँ भेँट नहि भए सकल। हुनकर डेरापर हुनकर नाति, एवम् परिवारक अन्‍य सदस्‍य सभ छलाह। डेरा उदास-उदास लगैत छल। परिवारमे कएटा दुर्घटना भए गेल छल। किछु साल पूर्व हुनक ज्‍येष्‍ठ पुत्र डा. रूद्रकान्त मिश्रक आकस्‍मिक असामयिक निधन भए गेल छल। आओर कएटा गप्प-सप्प...। एहि सबहक आभास घरमे भए रहल छल। किछुकाल बैसला बाद हम सभ ओतए-सँ अपन स्‍मृतिकेँ पुनश्च जगा कए ओहिठामसँ विदा भए गेलहु। डॉक्‍टर साहेबसँ भेँट नहि भए सकल।

डॉक्‍टर जयकान्त मिश्रजीक पिता महामहोपाध्याय डॉ. उमेश मिश्रक बर्षी बहुत यत्न पूर्वकमनाओलजाइत छल। ओहिमे डॉक्‍टर साहेब ओतए हम (जाधरि इलाहाबादमे रहलहुँ) नियमित आमंत्रित होइतछलहुँ। हुनकर सम्‍पूर्ण परिवार अत्यन्त मनोयोग पूर्वक ब्राह्मण भोजनक व्यवस्था करैत रहलाह। नाना प्रकारक भोजनक व्‍यंजन सबहक स्‍मरणे मात्रसँ मन आनन्‍दित भए जाइत अछि। भोजनक संग-संग कतेको गप्प-सप्प मैथिल लोकनिसँ ओहि अवसरपर भेँट भए जाइत छल।

इलाहाबादमे गप्प-सप्पक क्रममे ओ मैथिलीकेँ साहित्य अकादेमीमे मान्‍यताक सम्‍बन्‍धमे हुनक कएल गेल प्रयासक वर्णन करथि। ओहि हेतु ओ दिल्‍लीमे तत्‍कालिन प्रधान मंत्री द्वारा मैथिली पोथीक प्रदर्शनीमे भाग लेब, दिल्‍लीक उपराज्‍यपाल स्‍व. आदित्यनाथ झाजीक प्राप्त समर्थन एवम् सहयोगक चर्चा सेहो करैत छलाह।

एकबेर हम डॉ. शुभद्र झाजीक संग इलाहाबादमे डॉ. जयकान्त मिश्रजीक ओहिठाम जाइत रही। रस्‍तामे डॉ. जयकान्त मिश्रजीक मैथिलीक प्रति अनुराग ओ मैथिलीक विकास हेतु संघर्षक प्रशंसा करैत डॉ. शुभद्र झा कहलाह-

मिथिलामे डॉ. जयकान्त मिश्रक एवम् हुनक पूर्वज लोकनिक अद्भुत योगदान अछि।

संगे ईहो कहलाह-

एहन बहुत कम परिवार भेटत जाहिमे लगातार छह पुश्त सरस्‍वतीक एहन आर्शीवाद प्राप्त रहल हो।

ओ दिल्‍ली आबथि तँ हमरा सूचित करथि। कतेको बेर तँ ओ हमरे ओतए ठहरैत छलाह। कए बेर हवाइ यात्रासँ उतरि लबनचूस बच्चा सबहक लेल नेने अबैत छलाह। जाधरि ओ डेरापर रहथि, निरन्तर मैथिली सम्‍बन्‍धी चर्चा होइत रहैत।

मैथिली आन्‍दोलनक संघर्ष यात्रा आओर अनेकानेक लोकनिक योगदानक चर्चा सेहो होइत।

एकबेर ओ (डॉ. जयकान्त मिश्र) दिल्‍लीमे मैथिलीक प्रश्‍न पत्र बनबए खातिर आएल रहथि। संगमे स्‍व. सुमनजी एवम् डॉ. नवीन बाबू सेहो रहथिन। ओ तीनू गोटेहमर आग्रहपर पुष्‍पबिहार, दिल्‍ली स्थित हमर आवासपर अएला आ एकसंग हुनका सभकेँ भोजन करेबाक सौभाग्य प्राप्त भेल। ओहि अवसरकेँ स्‍मरण करैत अखनो रोमांचित भएजाइतछी। तीनू गोटेक एकट्ठे हमरा ओतए आएब आओर हुनकर वार्तालाप सुनि मोन आनन्दित भए गेल। आनन्‍दितो केना ने होइत, डॉ. सुमनजी एवम् डॉ. नवीन बाबू सी.एम. कौलेज- दरभंगामे हमरा मैथिली पढ़ौने रहथि।

डॉ. मिश्रजी अत्यन्त समाजिकव्यक्तिछलाह। इलाहाबाद किंवा बाहरोक मैथिल लोकनिकेँ व्यक्तिगत स्‍तरपर ओ मदति करैत छलाह। नयाकटरा, इलाहाबाद स्थित हमर डेरापर कएक बेर पएरे चलि आबथि। कतेको मैथिल विद्यार्थी सभकेँ ओ अपना ओहिठाम राखि कए हुनकर शिक्षामेसहायता करैत छलाह।

इलाहाबाद विश्वविद्यालयक अंग्रेजी विभागक अध्‍यक्ष पद हेतु हुनका बहुत विरोधक सामना करए पड़ल छलनि।ताहिखातिर ओ इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालयमे केस सेहो केने रहथिन। अन्‍तोगत्‍वा हुनकर विजय भेल, आ ओ अंग्रेजी विभागाध्‍यक्ष भेलाह। हुनकर विरोधी सबहक कहब रहैक जे ओ मैथिलीमे लिखै छथि। हुनकर पी.एच-डी.क विषय मैथिली भाषाक इतिहास छल तखन ओ अंग्रेजी विभागक अध्‍यक्ष केना भए सकै छथि?

जयकान्त बाबू दिल्‍ली आएल रहथि। तहिया हुनकर पोती रोहिनीमे रहैत छलखिन।। हुनकासँ भेँट करबाक रहनि। हमरा संगे चलए कहलनि। बसपर ठाढ़े हम दुनू गोटेरोहिनी विदा भेलौं। इलाहाबादसँ एकटा पोटरी अनने रहथि। तेकरा उपहार स्‍वरूप अपन पोतीकेँ देलखिन। किछु कालक बाद हम सभ ओहिठामसँ आपस भए गेलहु। ओहि पोतीक बिआह दिल्‍लीएमेभेलनिएवम् बिआहक हकार हमरा देबाक हेतु डॉ. रूद्रकान्त मिश्र (कन्‍याँक पिता) स्‍वयं आएल रहथि। हम बिआहक अवसरपर गेलो रही। बिआहमे डाक्टर साहेबक सभ भाए आएल रहथिन। कोनो प्रकारक दहेज नहि लेल गेल छल। डॉक्‍टर साहेब दहेज रूपी लेन-देनक खिलाफ छलाह एवम् एकरा मिथिलाक संस्‍कृतिक प्रतिकूल कहथि।

डॉक्‍टर जयकान्त मिश्रजीक पिता महामहोपाध्याय- डॉ. उमेश मिश्रक बनाओल मकानमे डॉक्‍टर साहेब एवम् हुनकर भैयारी लोकनि सेहोरहैतछलखिन।। सभसँ शुरूबला हिस्‍सामे डॉक्‍टर साहेब रहथि आ तकर बादबलामे आर भाए सभ।

डॉक्‍टर साहेबक व्यक्तिगत जीवनमे, परिवारोमे भोजन आ रहन-सहनमे मिथिलाक संस्‍कृतिक अमिट छाप छल। मकानक ओसारपर माछक मूर्ति लटकल, सदैव झूलैतरहैतछल। घरमे भोजन बनबएकाल देहपर वस्‍त्र नहि रहक चाही। ब्राह्मण भोजनकाल परसनिहार आ भोजन केनिहार गंजी, कमीज नहि पहिरथि। भोजनमे पियाजु-लहसुन नहि पड़ए। जखन कखनो ओ बाहर यात्रापर जाथि तँ अपन नियम सबहक पालन कठोरतासँ करथि। बाहरमे बेसीकाल चुरा-दहीसँ काज चलबथि।

इलाहाबादमे रहितो ओ गामसँ सम्‍पर्क बनओने रहथि आ सभ साल मास-दू मास गाम जा कए रहथि। गामसँ लौटैतकाल सभ ग्रामीणक ओहिठाम जा कए भेँट करथि एवम् पुनश्च गाम एबाक इच्छा रखैत सभसँ विदा लेथि। एहि क्रममे किछु साल पूर्व ओ गाम गेल रहथि, ओतहि बहुत जोरसँ बिमार पड़ि गेला। हर्ट अटैक भए गेल रहनि। ओहिठामसँ लोक सभ उठा-पुठा कए दरभंगाअनलकनि।दरभंगामे थोड़ेक सुधार भेला पछाइत इलाहाबाद आपस अएला। इलाहाबादमे हुनकर मासो इलाज चलल। बहुत मुश्‍किलसँ हुनकर जान बॉंचल। बिमारीसँ उठलाक बाद एक दिन फोनपर गप्प भेल रहए। बहुत दुखी बुझाइत रहथि। अबल भए गेल रहथि, तथापि मैथिलीक विकासमे अभिरूचि बनल छलनि आ ओहि विषयमे गप्प करैत रहलाह।

मैथिलीक विकासक हेतु डॉ. मिश्रजीक अद्भुत योगदान अछि। संविधानक अष्टम अनुसूचीमे मैथिलीकेँ सामिल करबाक हेतु ओ कतेको साल प्रयास करैत रहलाह। अन्ततोगत्‍वा हुनकर ईहो स्वपन्न साकार भेल एवम् मैथिलीकेँ संविधानक अष्‍टम् सूचीमे सामिल कएल गेल।

इलाहाबाद विश्वविद्यालयसँ सेवा निवृत्त भए ओ मध्‍यप्रदेशमे चित्रकुट स्थित ग्रामीण विश्वविद्यालयमे विभागाध्‍यक्ष भेलाह। ओहिठाम ओ कएक साल धरि रहि संस्‍थानक शिक्षण व्यवस्थाकेँ उत्‍कृष्‍ट बनेबामे संलग्‍न रहलाह। नानाजी देसमुख विश्वविद्यालयक उपकुलपति रहथि। देसमुखजी डॉ. मिश्रक कार्यसँ अतिशय प्रभावित रहथि। हुनकर इच्छा रहनि जे डॉ. मिश्र ओतए बनल रहथि परन्‍तु मैथिलीक काजमे विशेष रूचि ओ व्‍यस्‍तताक कारणेँ ओ विश्वविद्यालयक काजसँ त्‍याग-पत्र दए देलनि।

डॉक्‍टर मिश्र अत्यन्त अध्‍ययनशीलव्यक्तिछलाह। रातिमे जखन-तखन ओ उठि जाथि आ पढ़ल लागथि। हुनकर स्‍वास्‍थ्‍यक चिन्‍तासँ फिरसान भए परिवारक लोक कएक बेर आपत्ति करथि जे एतेक परिश्रम नहि करथि, मुदा ओ अपन कार्यक्रममे अनवरत लागल रहैत छलाह। मैथिलीक नाम सुनिते जेना हुनका स्‍फुर्ति आबि जाइत छल। पेसमेकर लगलाक बादो ओ मैथिलीक आन्‍दोलनक हेतु समर्पित रहलाह आ जतए कतहु हुनकाएहि काजे बजाओल जानि तँ ओ सहर्ष जाथि।

२००८ इस्‍वीमे, नव वर्षक आगमनक अवसरपर हम हुनका नव वर्षक मंगल कामना पत्र पठौनेरहिएनि। तकर जवाबमे ओ पोस्‍टकार्ड लिखने रहथि जाहिमे थर-थर कँपैत हाथसँ लिखल गेल अक्षर ओ हस्‍ताक्षर देखि हुनक एहू अवस्थामे सकृयताक प्रमाण भेटल। तकर बाद लगभग साल भरि कोनो सम्‍पर्क नहि रहल। जनवरी (२००९) मे एक दिन डॉ. धनाकर ठाकुरजी पत्र इन्‍टरनेटपर पढ़ल, जाहिमे डॉक्‍टर मिश्रक प्रयागमे मासक दौड़ान निधनक समाचार छल। कतेको बेर ओहि समाचारकेँ पढ़ल। मैथिलीक एकटा अनन्य सेवकक चिर संघर्षक बाद देहावसान भए गेल छल। मिथिलाक गाम-गाममे शोक सभामनाओलगेल। श्रर्द्धांजलि देनिहार लोक सबहक हुनक प्रति सिनेह अवर्णनीय छल।

डॉ. जयकान्त मिश्र अपने-आपमे मिथिलाक इतिहास छलाह। मिथिलाक कोनो एहन गाम नहि हएत जतए ओ मैथिली कार्यक्रमक हेतु नहि गेल होथि। विद्यापति समारोह हो, किंवा मैथिलीकेँ संविधानक अष्टम सूचीमे सामिल करबाक हेतु आयोजित आन्‍दोलन हो, वा मैथिलीकेँ शिक्षाक अनिवार्य माध्‍यम बनेबाक प्रयास हो, सभठाम हुनकर नाम अबिते छल एवम्ओ व्यक्तिगत रूपसँ सभ कार्यक्रमे भाग लइते छलाह।

जखन-कखनो ओ भेटितथि, मैथिलीमे लिखबाक हेतु प्रेरित करबे करथि, मैथिलीक सम्‍मानक हेतु कएल जा रहल प्रयासक चर्चा करितथि, सभ काजपर मैथिलीसँ जुड़ल आन्‍दोलनकेँ प्राथमिकता देबे करथि।

मैथिलीक एहि अनन्‍य सेवकक कतेक उपकार अछि तकर वर्णन असंभव। हुनक साहृदयता, वाणीक मधुरता एवम् अपनत्व सदिखन मोन पड़ैत रहत आ मोन रहतहुनका संग बितौल गेल अद्भुत क्षण। ओ आब नहि छथि, मुदा कोटि-कोटि मैथिलक हृदयमे ओ सदिखन विद्यमान छथि ओ रहताह। q

 

 

 

 

 


 

पं. परमानन्द झा (एक समस्मरण)

लोक एहि दुनियाँमे अबैत अछि, चलि जाइत अछि मुदा ओकर कएल काज ओकरा जिबैतरखैत अछि।कतेको व्यक्ति एहि संसारमे एहने भेलाह अछि जे अपन संघर्षसँ अपनजीवनमे एकटा नव दृष्टान्तउपस्थित केलाह आ हुनका गेलाक बादो लोकसभ हुनक कृतित्वक चर्च कए गौरवक अनुभव करैत छथि।एहने लोक छलाह हमर ग्रामीण-स्वर्गीयपण्डित परमानन्द झा।

हमसब जखन नेने रही तँ हुनका कतेको बेर पैरे अबैत-जाइत देखिअनि।पैरे चलब ओहि समयमे कोनो अजगुतक गप्प नहि छलैक। मुदा ओ पैरे-पैरे मुजफ्फरपुर साक्षात्कर देबए चलि जाइत छलाह। लौटि कए ओहिना दन-दन करैत रहैत छलाह।कहिओ हुनका बैसल, आराम करैत नहि देखलिअनि। दिन-राति ओ किछु-ने-किछु करैत भेटताह।व्यर्थ आडंवर किंवा प्रदर्शन करबामे हुनका कोनो रुचि नहि छल।सौंसे दुनियाँ जँ खिलाफ भए जाए आ हुनका लगतनि जे ओ सहीपर छथि तँ ओ अपन निश्चयपर अडिग रहैत छलाह।

सत कहल जाए तँ एहन कर्मठ लोक बिरलैके देखएमे अबैत अछि।खेत कोरब, धान रोपब, धान काटब, दाउुन करब सँ लए कए इसकूलमे मास्टरी करब फेर विद्यार्थीसभकेँट्युशन करब, ततबे नहि पंडिताइ करब, सभटा काज ओ एकसुरे करैत रहैत छलाह।हमसभ जखन नेना रही तँ हुनके घरक पाछा ब्रम्ह स्थानमे हमर सभक इस्कूल छल। ओतए हमसभ पढ़ए जाइत छलहुँ।कै दिन पानि पीबाक हेतु हुनका ओहिठाम आबि जाइत छलहुँ।जखनकखनो ओतए जइतहुँ ओ निरंतर काजमे व्यस्त रहैत छलाह।छोट-छीन फूसक घरमे अपन साधनामे लागल रहैत छलाह। कोनो काज करबासँ हुनका परहेज नहि छल। लोक की कहत से हुनका सुनबाकसमय नहि छल।जे अपना ठीक बुझाइन से ओ करथि, जकरा जे मोन हो से कहैतरहए।हाथी चलए बजार, कुत्ता भुकए हजार।”

जीवन भरि ओ घोर संघर्ष करैत रहलाह। कठोर परिश्रम ओ मितव्यितासँ गामक आस-पास चिक्कनजमीन-जाएदाद बनओलनि। अड़ेरचौकपर सेहो बहुत कीमती जमीन ओ कीनलथि।सुनबामे आएल जे अट्ठारह बीघा जमीन ओ अपना जीवनमे मेहनति एवम् इमान्दारीसँ कीनलथि।एतबे नहि जाहिठाम एकटा मामूली फूसक घर छल ओतहि पता नहि कतेको कोठरीक घर बना देलथि। ओहिठाम गेलापर अहाँकेँ चारू कातघरे-घर देखएमे आएत।गाम-घरमे जकरा पोखरिआ-पाटन कहैत छैक, ताही तरहक हुनकर ग्रामीण आवास अछि।आ से सभटा मेहनतिसँ केलाह, कोनो ककरो वइमानी नहि, अपितु अपन विद्या ओ वुद्धिसँ निरन्तर समाजकेँ सेवा करैत उपार्जन केलाह।ओ निट्ठाह कर्मयोगी छलाह।कखनो बैसलनहि रहितथि। कोदारि पारवसँ लए कए इसकूलक मास्टरी भावसँ ओ जीवन पर्यन्त करैत रहलाह। अगहन मासमेमाथपर धानक बोझा लदने सीताराम-सीताराम कहैत डेगार दैत अपन धानक खेतसँ खरिहान धरि अबैत-जाइत हम हुनका देखिअनि। जकरा जे बाजक होइक सेबाजए, हुनका लेल धनिसन।

ओ खाली धने अर्जित करैत रहलाह से बात नहि, अपितु घनघोर संघर्ष कएविद्योपार्जन सेहो केलाह। कतेको विषयमे आचार्य केलाह।फेर अंग्रेजी माध्यमसँ सेहो उच्च शिक्षा प्राप्त केलनि। बहुत दिन धरि रहिका उच्च विद्यालयमे संस्कृतक शिक्षक रहलाह आ प्रधानाध्यापकक पद धरि प्रोन्नति प्राप्त केलनि। धर्म ओ अध्यात्मक सेहो हुनका बहुत नीक जानकारी छलनि।कतेकोठाम धार्मिक सभा सभमे प्रवचन सेहो करैत छलाह। दड़िभंगामे संत-समागममे प्रवचन करैत हमहुँ हुनका सुनने रही।ओहि समयमे हम ओतए सी० एम० कालेजमे पढ़ैत रही।

कतेको दिन हमसभ हुनका साइकलपर इंटा बन्हने, आ स्वयं ओकरा गुरकबैत पैरे-पैरे चलैत देखिअनि।कहिओ सीमेन्टक बोरा, कहिओ बाउल, कहिओ इंटा ओही साइकिल पर ढ़ो-ढ़ोक ओ पक्का मकान बना लेलथि। एहन धुनकेँ पक्का, कर्मकीट ओ संकल्पक धनी व्यक्ति डिविआ लए कए तकनहुँ नहि भेटि सकत।

व्यक्तिगत जीवनमे कैबेर हुनका प्रतिकूल परिस्थितिक सामना करए पड़ल, तथापि ओ धैर्यपूर्वक जीवनयात्रामे लागल रहलाह।आस-पासक गामक बहुत रास लोक हुनकार अध्यात्मिक चेला छल।हुनकासँ मंत्र लेने छल।हुनका प्रति श्रद्धाक भाव रखैत छल आ हुनक मृत्युसँ बहुत दुखी भेल छल।

आब ओ एहि दुनियाँमे नहि छथि। खिछु साल पूर्व एकाएक हुनकर किडनी खराप भए गेल।मास दिनक भीतरे ओमार्च २०१४मे चलि गेलाह। ओहि समय हुनकर बएस अस्सीसँ उपरे रहल होएत। मृत्युसँ किछुमास पूर्वे हमगाम गेल रही तँ हुनकासँ भेंट भेल रहए। ओ पूर्णतः स्वस्थ लगैत छलाह।अपितु बरी काल धरि अध्यात्मिक विषयपर अपन मंतव्य दैत रहलाह। हमर माएसँ सेहो गप्प करैत रहलाह। तकर किछुए दिनक बाद हुनक मृत्युक समाचार भेटल।आश्चर्यमे पड़़िगेलहुँ।

हुनक देहावसानसँ गामेक नहि अपितु परोपट्टाकेँ एकटा अपूर्णीय क्षति भेल। कर्मठताएवम् सफल संघर्षक एहन जीवंत उदाहरण भेटब बहुत मोसकिल काज अछि। हुनका हमर शत-शत प्रणाम! q

 

मिथिलाक संस्कृति

बहुत पहिने मिथिलाक नाम विदेह छल आओर ओहिमे वर्तमान मिथिला, वैशाली, कतेको राज्यसभ सामिल छल। चारिम वा पाँचम शताव्दीमे ई मिथिला किंवा तीरभुक्तिक नाम ग्रहण कएलक। मुगल साम्राज्यक काल मे एकर एकटा भाग (उत्तर दिसिसँ)नेपालक राजाक अधीन चल गेल। शेष भाग तिरहुत कहल जाइत छल। मिथिलाप्रान्तक व्याख्या जे ग्रिअरसन महोदय केलनि अछि, तदनुसार एकर क्षेत्रफल लगभग तीस हजार वर्गमील अछि आओर एहिमे विहार राज्यक मुजफ्फरपुर, सितामढ़ी, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहर्षा, उत्तर मुंगेर, उत्तरी भागलपुर, आओर पुर्णिाक किछु भाग सामिल अछि संगे नेपालक रौताहट, सरलाही, सप्तरी, मोहातारी, आओर मोरंग जिला ओहिमे अवैत अछि।

मिथिलाक वर्तमानक दरिद्रता आओर भूतकालक ऐश्वर्यमे कोनो साम्य नहि अछि। सन् १९३४ ई०क भूकंपक बाद एहिठामक लोकक स्थिति आओर खराव भए गेल छलैक आओर भूकंपक कारणे ओहिठामक आबोहवापर सेहो प्रतिकूल प्रभाव पड़ल। आलसी आओर खोचाँह स्वभावक कारण एहिठामक लोक संप्रति कष्टमे छथि, मुदा प्राचीनमे ई स्थिति नहि छल। लोक प्रशन्नचित्त समय बितबैत छल आओर धने-जने पूरल रहए। प्रयाप्त सुख-सुविधाक उपलव्धक संग लोकक ध्यान कला ओ संस्कृतिक विकासपर जाएब स्वबाविक अछि आ तेँ ई कोनो आश्चर्य नहि थिक जे लोक पर्याप्त साहित्यिक ओ सर्जनात्मक प्रतिभाक परिचय देलक।

प्राचीन कालसँ मिथिलाक प्रशस्तिक आधार विद्वता रहल अछि। षड़दर्शनमेसँ चारिटा दर्शन, न्याय, वैशेषिक, मिमांसा आओर सांख्यक रचनाकार लोकनि क्रमशःगौतम, करणाद, जैमिनी ओ कपिल मिथिलेमे भेलाह। मुगल आक्रमण कालमे आचार-विचार शुद्धिपर ध्यान देव आवश्यक भए गेल तेँ मध्यकालमे नव्य न्याय, पूर्व मिमांसा आओर स्मृति निवंध रचनापर बेसी तुल देल गेल। मिथिलाक प्रतिष्ठा बाहरक विद्वान लोकनिमे बनल रहए तेँ ओतए कतेको प्रकारक पदवी विद्वान लोकनिकेँ देबाक प्रथा चलल, मुदा ओहि हेतु बहुत क्लीष्ट परीक्षा होइत छल-जेना कि श्लाका परीक्षा, उपाध्याय, महामहोपाध्याय आदि। मिथिलाक प्राचीनमे विदेह राजाक प्रतिष्ठाक आधार हुनक ज्ञान एवम् विद्वते छल। तहिना महेश ठाकुर ओ खांडववंशीय अन्य राजा लोकनि एवम् अन्य विद्या अनुरागी भेलाह आ मिथिलाक कीर्ति बढ़एबाक हेतु सभ तरहेँ प्रयास कएलनि ओ तदनुकूले प्रतिष्ठो प्राप्त कएलनि।

मिथिलाक सोनितमे भगौती जानकीक अंश सर्वत्र विराजमान अछि। घर-घरमे पसरल गोसाउनिक शिर भगवतीक आराधना स्थल अछि। प्रत्येक शुभ अवसरपर भगवतीक वंदना गएबाक प्रथा मिथिलाक संस्कार भए गेल अछि। विद्यापतिक वंदना “जय जय भैरवि असुर भयाउनि, पशुपति भाविनी माया”,मिथिलाक राष्ट्रगानक तुल्य अछि।

यत्र-तत्र पसरल भगवतीक सिद्धपीठ जेना उच्चैठ, उग्रतारा आदि शक्तिक आराधनाक सार्थकताकेँ प्रमाणित करैत छथि। उच्चैठक कालीक कृपासँ कालीदास मूर्खसँ एकटा महान विद्वान भए गेलाह। कहबी अछि जे ओ तेहने मूर्ख छलाह जे भदवारिक झर-झर पानि बहैत कालमे भगवतीक मुँहमे करिखा लेपए लगलाह जाहिसँ प्रसन्न भए भगवती हुनका वरदान देलथिन। मिथिलाक त्रिपुंडकसंग लालठोप ओ चाननक उर्ध्वपुणड करबाक परंपराक अर्थ ओकर शाक्त, वैष्णव ओ शैव संप्रदायमे समन्वय स्थापित करब छल। प्रति वर्ष हजारक हजार कमरथुआ वैद्यनाथधाम जाए महादेवकेँ गंगाजल ढ़ारि अवैत छथि। संगे गाम-गाम बनल महादेवक मन्दिर शिवक प्रति आस्थाकेँ प्रमाणित करैत अछि। “कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ” गबैत-गबैत कतेको भक्त लोकनिकेँ अश्रुपात भए जाइत छनि। एतबा होइतो शालीग्रामक रूपमे भगवान विष्णुक पूजा सगरे मिथिलामे पसरल अछि। तुलसी चढ़ाय चरणामृत लए भोजन ग्रहण करैत छथि। जँ गंभीरतासँ कहल जाएतँ मिथिलाक माटि-पानिमे अध्यात्म कुटि-कुटि कए भरल अछि। जन्मसँ मरण धरि हिन्दू धर्मशास्त्रमे जतबा संस्कार कएल जाइत अछि से मैथिल लोकनि बड़ धार्मिक भावनासँ निष्पादित करैत छथि। समाजशास्त्रीय दृष्टिकोणसँ सेहो मिथिलाक मुड़न, उपनायन ओ विआहक परंपरा समाजक विभिन्न घटकमे समन्वय ओ धार्मिक भावनाक अभ्युदयक हेतु अतिशय महत्वपूर्ण कहल जा सकैत अछि।

भारत भरिमे मिथिलाक विआहक परंपरा अपनामे विचित्रताक हेतु प्रसिद्ध अछि। बर्खक बर्खधरि पसरल अनेकानेक प्रकारक पर्व ओ त्योहार मिथिलामे विआहक अनिवार्य अंग थिक। विआह होइते चतुर्थी, चरुचन, मधुश्रावणी, कोजागरा, विदाइ, पुछारी, नागपंचमी ओ द्विरागमनक अवसरपर नाना प्रकारक भार पठएवाक परंपराकेँ लोक आबो ओहिना लदने चलि आवि रहल अछि जेना अठ्ठारहम शताव्दीमे रहल होएत। एहि दृष्टिकोणसँ मिथिलाक लोक अखनो पछरले छथि। दहेजक प्रथा तेहन संक्रामक ओ घातक भए गेल अछि जे जिनका दू-तीन टा बेटी होन्हि तिनका दरिद्र बनबासँ भगवाने रक्षा कए सकैत छथि। आवश्यकता एहि बातक अछि जे मिथिलामे कन्यालोकनिक प्रति जे अन्याय भए रहल अछि से आबो बंद होइक। बोराक आम आ घरक कनिआमे भेद करब कठिन थिक।

एहि सम्बन्धमे सौराठसभा ओ ओकर परंपरागत इतिहासक वर्णन करब उचित होएत।ई भारतवर्षमे अपना-आपमे एकमात्र संस्था थिक जे बिना कोनो राजकीय हस्तक्षेपकेँ प्रतिवर्ष दस हजार मैथिल व्रहमण लोकनिक विआह-सम्बन्ध स्थापित करबाक आधार बनैत अछि। एहिठाम एक निश्चित अवधिमे करीब लाख व्रहमण जमा होइत छथि। सौराठसभाक स्थापना करीब सए साल पूर्व भेल छल। ओतए पंजिकार लोकनो होइत छथि जे कन्यापक्षकेँ  सिद्धान्त दैत छथिन। ओकरा अस्वजन-पत्र सेहो कहल जाइत अछि। नियमानुसार सात पीढ़ी पाछा देखला संता पंजकार ई प्रमाणपत्र दैत छथि जे सम्बन्धित वर ओ कन्या पक्षमे सम्बन्ध भए सकैत अछि। यद्यपि ई व्यवस्था वंश परंपराक प्रतिष्ठा ओ शुद्धता वनयबाक हेतु कएल गेल, मुदा एकर जड़िमे पंजी व्यवस्था छल जे १३१० ई०मे महाराजा हरिसिंघ द्वारा चलाओल गेल। एहि व्यवस्थाक अनुसार मिथिलाक व्राहमण लोकनिकेँ चारिभागमे बाँटल गेलाह। (१) श्रोत्रिय, (२) योग, (३) पंजीवद्ध, (४) जयबार। प्रथम तीन कोटिक व्राहमण भलमानस कहल जाइत छलाह आ अन्तिम याने जयबार लोकनि कुलशीलक हिसाबे छोट व्राहमण कहल गेलाह। सौराठ साभामे बैसबाक स्थान ओहि हिसाबे निर्णीत भेल छल। ऐहि प्रथामे सबसँ बड़का दोष ई छल जे भलमानुष लोकनिक सामाजिक प्रतिष्ठा बहुत बढ़ि गेल आ ओ लोकनि क्यो सए क्यो पचास एनाकए विआह सम्बन्ध स्थापित करए लगलाह। कतेकठामतँ इहो सुनबामे अबैत छलजे भलमानुष लोकनिकेँ विआह केलाकबाद दोहराकए सासुर जेबाक समय ओ स्मृति नहि रहैत छलनि।

विभिन्न प्रकारक पाँजि रखनिहार लोकक मूलक संग गाम विशेष वा व्यक्तिविशेषक नाम जोड़ल रहैत अछि। जेना-महादेव ठाकुर पाँजि, शीलानाथ झा पाँजि आदि। यद्यपि आब एहि परंपराक कोनो सामाजिक महत्व नहि रहि गेल अछि तथापि पंजिकारलोकनि एकर भष्मावशेषकेँ उठओने फिरि रहल छथि कारण ओहिसँ हुनका लोकनिक जीविका चलैत छनि। आबक मिथिलाक पाँजि थिक-इन्जीनियर, डाक्टर, प्रोफेसर ओ खूब धनिक लोक।

कोनो ठामक संस्कृतिपर ओके लिपि ओ भाखाक बड़ प्रभाव होइत अछि। मिथिलाक भाखा मैथिलीकेँ अपन लिपि तिरहुता किंबा मिथिलाक्षर कहल जाइत अछि। दुर्भाग्यक बात थिक जे मैथिलीमे देवनागरी लिपिक प्रयोग संग ओकर मौलिक लिपिक प्रयोगमे प्रचूर ह्रास भेल। एतबा धरि जे मिथिलाक्षरमे लिखा-पढ़ी करएबला लोक आंगुरपर गनलेसँ भेटि सकैत छथि।

मैथिली भाखामे साहित्यक प्रत्येकविधापर काज भेल अछि। प्राचीनकालसँ आइ धरि कतेको विद्वान लोकनि अपन कलमक जोड़सँ एहि भाखाकेँ कृतार्थ कएलनि अछि। चर्यापदमे दार्शनिक तथा धार्मिक मान्यताकेँ लौकिक रूपमे प्रस्तुत करबाक चेष्टा कएल गेल अछि। एकर पद सभमे चौबीस प्रकारक राग-रागिनी सभक प्रयोग भेल अछि। ज्योतिरिस्वरक वर्णरत्नाकर, धर्तसमागम ओ पंचशायकक मैथिली भाखाकेँ अपूर्व योगदान अछि। वर्णरत्नाकरक ई विशेषता थिक जे हमरा लोकनिक आद्य ग्रंथ होइतो ई गद्यमे लिखल अछि जखन कि आन-आन भाखाक आदिग्रंथ पद्यमे अछि। मध्यकालमे मैथिली साहित्यक युग प्रवर्तक भेलाह विद्यापति जे संस्कृत, अवहट्ट, ओ मैथिली भाखामे कतेको सोरहि रचना कए अमर भए गेलाह। गाम-गाम पसरल विद्यापतिक सोहर, समदाउन, वटगबनी ओ नाना प्रकारक भक्ति गीत अखनो हुनकर साहित्यिक स्वरुपकेँ ओहिना जीवित रखने अछि जे चारि-पाँच सए बर्ख पूर्ब रहल होएत। विद्यापतिक बाद गोविन्ददास झा, उमापति, मनबोध, लोचन, हर्षनात झा धरि अपूर्व शृंखला चलल जाहिमे विद्यापति साहित्यक शृजनात्मक छाप सतति परिलक्षित भेल।

चंदा झाकेँ आधुनिक युगक प्रवर्तक मानल जाइत अछि। ओ बहुमुखी व्यक्तित्वक लोक छलाह। हिनक सात गोट प्रकाशित ग्रंथ भेटैत अछि तथा पाँच गोट एहनो ग्रंथसभक उल्लेख भेटैत अछि जे अप्रकाशित अछि। हिनक प्रकाशित ग्रंथक नाम थिक- (१) मिथिलाभाषा रामायण, (२) गीति सुधा, (३) महेषवाणी, (४) अहिल्या चरित नाटक (५) चंद्र पद्यावली, (६) लक्ष्मीश्वर विलास, (७) विद्यापतिक पुरुष परीक्षाक गद्य-पद्यमय अनुवाद। हिनक अप्रकाशित रचना अछि- (१) गीत सप्तशती, (२) मूलग्राम विचार, (३) छन्दोग्रन्थ, (४) वाताव्हान, (५) रसकौमदी। विद्यापतिकेँ जँ मैथिली साहित्यक सूर्य कहल जाए तँ निश्चय चंदा झा ओहि साहित्यमे चन्द्रमाक स्थान प्राप्त करबाक योग्य छथि।

चन्दा झाक बाद जीवन झा, म.म.परमेश्वर झा वख्सी, रघुनंन्दन दास, म.म.मुरलीधर झा, जनार्दन झा जनसीदन, ओ लालदासक नाम प्रमुख साहित्यकारक रूपमे अविस्मरणीय अछि। लाल दास क रचित रमेश्वर चरित रामायणमे सीताक महिमा बेसी स्थान पओने अछि अर्थात ई शक्तिक प्रधानता देलनि अछि जे मिथिलाक परंपरा ओ संस्कृतिकक अनुकूल अछि। महाकाव्यक क्षेत्रमे सीताराम झाक अम्व चरित, बद्रीनाथ झाक एकावली परिणय, मधुपजीक राधा विरह, तंत्रनाथ झाक झाक कीचक वदओ कृष्णचरित, सुमनजीक प्रतिप्रदा स्वतः स्मरण भए जाइत अछि।

एकरे संगे अंग्रेजी, संसकृत ओ मैथिली साहित्यक प्रकाण्ड विद्वान होइतो मैथिली साहित्यकेँ गौरवान्वित करबामे डा. रमानाथ झा ओ डा. जयकांत मिश्रक नाम स्वर्णाक्षरसँ लिखए जोगर अछि। हास्यरसावतार प्रो० हरिमोहन झाक कृतिसँ मैथिली भाखाक कोष भरल-पूरल अछि। ओ अपन उपन्यास कन्यादान एवम् द्विरागमनक माध्यमसँ मिथिलाक कुप्रथापर अपूर्व चोट कएलनि। खट्टरककाक तंग, प्रणम्य देवता, रमगशाला, चर्चरी, आदिक रचनासँ ओ मैथिली साहित्यमे अमर भए गेलाह अछि। डा. शैलेन्द्र मोहन झा, कांशीनाथ झा किरण, श्री वैद्यनाथ मेश्र यात्रीक सेहो अपन-अपन योगदान अछि।यात्रीजी अपन साम्यवादी विचारक पुष्टि करैत बहुत रास ओजस्वि ओ क्रान्तिकारी विचारसँ पूर्ण रचना कएलनि। उदाहरणस्वरूप-

अगड़ही लगउ बरु वज्र खसौ, एहन जातिपर धसना धसौ,

भूकंप होउक फटौक धरती, माँ मिथिले रहि कए की करती?

डा. सुभद्र झाक'फारमेसन आफ मैथिली लिटरेचर, 'हिस्टोरिकल ग्रामर आफ मैथिली ओ प्रवास,हुनक तीनटा पोथी मैथिली साहित्यके प्राण प्रतिष्ठा देबएमे अद्वितीय योगदानक रूपमे अविस्मरणीय अछि।

आधुनिक कालमे मिथिला मिहिरक संपादकगण एहि प्रकारे स्पष्ट अछि जे साँस्कृतिक दृष्टिए मिथिलाक माटि-पानि बड़ हरिअर अछि। मुदा दुर्भाग्यक बात ई थिक जे आलस्य किंवा प्रमादवश हमरालोकनि अपने साँस्कृतिक उपलव्धिकेँ बिसरि रहल छी। स्व० राजेश्वर झा, योगानन्द झा, स्व. चन्द्रनाथ मिश्र, राजकमल चौधरी, ललित, ओ रमानन्द रेणु, श्री सोमदेव आदि कतेको लेखक लोकनि ओ कवि लोकनि मैथिली साहित्यकेँ हिष्ट-पुष्ट करबामे सहायक सिद्ध भेलाह अछि। एही क्रममे पिलखवाड़वासी गंगेश गुंजनक चर्च सेहो उचित अछि जे अपन कथासंग्रह- “अन्हार इजोत” ओ कविता संग्रह” हम एकटा मिथ्या परिचय”क हेतु प्रसिद्ध छथि। एकर अलावा हिनक रेडिओ रुपक “जय सोमदेव” श्रोतालोकनिकेँ कतेक आनंदित कएलक अछि से वर्णन करब कठिन थिक।

एहि प्रकारे स्पष्ट अछि जे साँस्कृतिक दृष्टिए “मिथिलाक माटि-पानि बड़ हरिअर अछि। मुदा दुर्भाग्यक बात ई थिक जे आलस्य किंवा प्रमादवश हमरालोकनि अपने साँस्कृतिक उपलव्धिकेँ बिसरि रहल छी। बारीक पटुआ तीत” जे कहल गेल अछि से सगरे मिथिलामे प्रयुक्त अछि। सीकींसँ नीक-नीक बासन बनाएब वा उपनायन, बिआह ओ आन-आन शुभ अवसरपर सुन्दर-सुन्दर कढ़ाइ करब मिथिलामे हजारक हजार वर्खसँ प्रचलित अछि। गाम-गाम एकसँ एक कलाकार एहि कलाके जीवित रखने रहलाह मुदा एकर महत्व लोक तखन बुझलक जखन कि हजारक हजार संख्यामे एहि वस्तुसभक मांग किछु वर्ख पूर्वसँ विदेशीसभ करए लगलाह।

जाहि मिथिलाक ध्वजा न्यायशास्त्रमे देशभरि मे फहराइत रहल, जतएक गायक लोकनि देशभरिक राज परिवारमे संमानक पात्र छलाह ओ कलाक दृष्टिसँजे सर्वत्र सम्माननीय छल ओहीठाम लोक भरि जाढ़मे घूरतर ओ गर्मीमे पीपड़क छहड़िमे गप्प मारि-मारि दरिद्राक सेवन करैत सब तरहेँ क्षीणशक्ति भए रहल छथि से चिन्ताक बात अवश्य अछि मुदा एकर अर्थ ई कदापि नहि जे हम अपन आत्मविश्वासकेँ परित्याग कए दी आ अन्धाधुन्ध आन-आन साँस्कृतिक ऐब सभकेँ अपना जीवनमे प्रश्रय दी। q

 

 (१४ अगस्त १९८३क मिथिला मिहिरमे प्रकाशित)

 

रबीन्द्र नारयण मिश्रक

दूटा लघुकथा

फसाद

भोरसँ साँझ धरि ओ टीशनपर प्रतीक्षा करैत रहल। जतेक बेर गाड़ी अबैक ओ सचेष्ट भए जाइत छल। आबए बला लोक सभ दिस टकटकी लगौने रहैत छल। मुदा सभ बेर ओकरा निराशेहोमए पड़ैक। साँझमे ओ थाकल-झमारल गाम लौटल तँ देखलक जे पलटनमाक घरवाली ओ पलटनाक माएमे मचल छलैक।लगैक जेना गंभीर विवाद भए गेलैक अछि। आँगन आएल। मुदा दूनूमे सँ क्यो सुनए लेल तैयार नहि छलैक। मामला बढ़ैत देखि ओ गरजल। मुदा बेकार। दूनू आपसमे एक-दोसरक गड़ा गाटि देबाक निश्चय कए चूकल छल। रमुआकेँ नहि रहि भेलैक। ओ उठौलक लाठी आ पलटनमा माएकेँ लगलैक सटाक, सटाक। पलटनमाक माए गरियबैत भागल। 

मामला शान्त भेलैक। आइ तीन साँझसँ घरमे क्यो नहि खेने छलैक। पलटनमाक अबाइ छलैक आ तेँ ओ टीशन गेल छल। एमहर पलटनमा घरवाली मालिकक आँगनमे काज कए आएल छलैक। अबैत काल मालकिनी किछु देने छलखिन तकरे बटवारा करैत-करैत सासु-पुतोहुमे विवाद पसरि गेल छलैक। 

साल भरिसँ पलटनमा बाहर छलैक। जहिआसँ गाम छोड़लकै तहिआसँ आइ धरि कोनो खोज-खबरि नहि आएल छलैक। गामक बहुत लोक कलान्तरमे भोज करैत छलैक आ ओहिठामसँ सभ मास क्यो ने क्यो अबिते रहैत छलैक। ओकरे सभसँ पलटनमाक समाचार गाममे पहुँचैत रहैक। 

पूरबारि टोलक कए गोटा पछिला मास आएल छलैक आ ओकरा दिया पलटनमा समाद देने रहैक जे आगा मास पुर्णिमा दिन गाम आएत। मुदा नहि अएलैक। एहि बातक अंदेशा रहैक रमुआकेँ। टीशनसँ घुरैतकाल ओ बड़ अछता-पछता रहल छल। एही गुन-धुनमे गाम आएले छल रमुआ कि घरक गरम वातावरणमे आओर गरमा गेल। पलटनमा माएकेँ तामसपर नीक मारि पड़ि गेल छलैक आ ओ मारि खा कए पता नहि कतए निपत्ता भए गेलि। 

रमुआक कतेको पुस्त ओही गाममे गुजर केने छल। मुदा पलटनमा गामक सीमान नांघि देलकै। पलटनमाक एहि काजसँ मालिक सभ बड़ अप्रशन्न भेल रहैक। मुदा ओ ककरो नहि सुनलक। माए जाए काल बड़ कनैत रहैक। मुदा की कए सकैत छलैक। पलटनमा कलकत्ता पहुँचते देरी काज शुरू कए देलक। आमदनी नीक होइक। मुदा रखबाक लूरि नहि रहैक। संगी-साथी सभ आगत-भागत कए ओकरासँ सभटा पैसा खर्च करा लैक। 

एक दिन ओहि मीलमे आन्दोलन भेलैक। मजदूर सभ मालिकक अत्याचारक खिलाफ अबाज उठौलक। ओहि आवाजक पलटनमाक मोनपर बेस प्रतिकृया भेल रहैक। पलटनमा लोककेँ नारा लगबैत देखि चिकरि उठल- 

नहीं चलेगी, नहीं चलेगी, यह बैमानी नहीं चलेगी।

पूरा मीलमे तालाबन्दी भए गेलैक। मजदूर सभ मील मालिकक घरक घेरा कए देलक। मीलक मालिक लाख प्रयास केलक मुदा पलटनमा टससँ मस नहि भेलैक। मीलक गेटपर एक सएसँ अधिक मजदूरक संग अनशनपर बैस गेलैक। आन्दोलन तीव्रतर होइत गेलैक। अन्ततोगत्वा पलटनमा गिरफ्तार भए गेल। ओकर संगी सभ सेहो जहल गेल। नारा लगैत रहलैक- 

नहीं चलेगी, नहीं चलेगी...।

 ई सभ घटना अनायास भए गेल छलैक। पलटनमा तेँ अपन रोजी-रोटीक कमाइमे लागल छल। मुदा ओकर सोनित कहि नहि किएक एकाएक खौल उठलैक। 

पलटनमा जहल गेल मुदा जेना एहि घटनासँ ओकर संस्कारमे अप्रत्याशित परिवर्तन आबि गेल छलैक। गामक वातावरणमे रहैत रहैत ओ मौन सभ प्रकारक प्रतारणा ओ अन्याय सहैत रहल। मुदा एहि घटनासँ जेना ओकर अन्तरात्माक ज्वालामुखी फुटि पड़ल छलैक। ज्वालामुखी जे संघर्षक आगिसँ अन्यायकेँ जरा देबए चाहैत छल।

जाहि दिन ओकरा जयबाक प्रोग्राम छलैक ओहि दिन ओ पकड़ल गेल। जहलमे एकान्तमे ओकरा कहि नहि की की फुराइत रहलैक। रमुआक टुटल खोपरी आ चारूकात गामक मालिक सभहक बड़का-बड़का दलान। पण्डितजीक बड़का दलान। दनानक अगवासमे बैसार होइक। साँझक साँझ गामक सभ प्रतिष्ठित व्यक्ति सभ अबैत छलाह आ अपन-अपन विचार व्यक्त करैत छलाह। लहना-तकादा सेहो ओतहि होइत छलैक। 

बुधदिन छलैक गाममे हाट लागल छलैक। पण्डितजीक ओहिठामबैसार भेल। पूरा गामक लोक जमा भेल छल। रमुआ ओतए बुधन बाबूक किछु कर्जछलनि। ओही कर्जकेँ सधएबाक हेतु बैसार छलैक। पँच लोकनि ई फैसला केलनि जे रमुआ अपन घराड़ी बुधन बाबूक नामे कए देथि आ पलटनमा हुनका ओहिठाम चरबाही करए। कारण जे घराड़ीक मुल्यसँ मात्र मूर सधैत छलैक आ सूदक तरीमे ओ चरवाही करत। एहि निर्णयक संग ओहि दिन बैसार खतम भए गेल।

रमुआ आँगन पहुँचले हेताह कि पलटनमाक माए देहरियेपर भेटलनि आ समाचार पुछि गरजए लागलि-

नहि जानि ई सभ की की करत? गे दाइ !गे दाइ !हमर घराड़ी एकरा सभ नहि देखल जाइत छैक।

मुदा किछु ने चललैक। दोसर दिन रमुआ बेनीपट्टी जा कए अपन घराड़ी बुधन बाबूक नामे रजिष्ट्री कए देलखिन। रजिष्ट्री घरसँ निकलैत हुनका होनि जेना आँखिक डिम्हा क्यो बहार कए लेने हो। सगतरि अन्हारे अन्हार। 

साँझ पड़ैत-पड़ैत रमुआ गाम पहुँचल। मुदा एतबेसँ बुधन बाबूक मोन नहि भरलनि। पलटनमाकेँ खबरि देबए लगलखिन जे तोरा हमरा ओतए काज करए पड़तौक। हँसि कए कर आ कि कानि कए कर। 

पलटनमाक मोनकेँ ई सभ असहज लगलैक ओ दोसर दिन दुपहर रातिमे चुप्पे-चाप गामसँ पड़ाएल। पलटनमा जहलमे पड़ल-पड़ल ई सभ सोचैत रहल मोन कहैक- 

छोड़ पलटनमा ई रस्ता। कमो खो। की राखल छैक फसादमे। आखिर हमरा लोकनिक कै पुस्त तँ एहिना बीति गेल। सभ अपन चैनसँ जिनगी कटलक। फेर ई आफद किएक।

दोसर मोन कहैक- 

नहि, नहि लड़ पलटनमा लड़। संघर्ष केनहिसँ परिवर्तन हेतैक। आखिर अपने लेल लोक नहि जीबैत अछि। भविष्यक हेतु भावी पीढ़ीक हेतु आधारशिला तँ वर्तमाने पीढ़ी तैयार करैत अछि किने।

इएह सभ सोचैत रहए कि जेलर साहेब आबि गेलखिन आ ओकर चिंतन क्रम टुटि गेलैक...।  

जेलमे सात दिन बिता चूकल छल पलटनमा। मीलक मालिक मीलमे तालाबंदी कए देलक आ संगे मीलमे काज केनिहार नवका कर्मचारी सभकेँ छँटनी सेहो कए देलक। ई सभ समाचार पलटनमाकेँ जेलेमे भेटैत रहैत छलैक। 

ओहि दिन रातुक बारह बाजि रहल छलैक। जेलर पहरेदार फोंफ काटि रहल छल। पलटनमा आ ओकर दूटा संगी जेलक चाहरदीवारी फानि गेल। जेलमे खतराक घण्टी बाजए लागल। मुदा पलटनमा ओ ओकर संगी नदारद। कतहुँ ओकर थाह पता नहि चललैक। पलटनमा दौड़ैत गेल, दौड़ैत गेल आ बहुत दूर एकटा अज्ञात जगहमे जा कए अचेत खसि पड़ल। ओकर दूनू संगी ओकर पछोर देने ओतए पहुँचलैक। 

दुपहर छलैक। बारह घन्टा लगातार दौड़ैत रहलाक बाद तीनू गोटे असोथकित भए गेल छल। पलटनमा अचेत छल आ ओकर दूनूटा संगी गमछीसँ ओकरा हवा करैत छलैक। 

संघर्ष, संघर्ष, संघर्ष। पलटनमा अपढ़ छल। गरीब छल। मुदा हालतसँ लड़ए चाहैत छल। ओकर सभसँ बड़का अपराध इएह छलैक। गाममे ओकरा सन-सन कतेको मजदूर ओहि हालातसँ गुजरिकए नियतिसँ सामंजस्य कए चूकल छल। मुदा ओ नहि सहि सकल। तेँ गाम छोड़ए पड़लैक। शहरमे पुनश्च ओकरा असह भए गेलैक। यातना, शोषण ओ प्रतारणाक खिलाफ नारा लगा देलकैक। मुदा आब कतए जाएत! गाम छुटलैक, तँ शहर आएल। शहरसँ पड़ा कए जंगल आएल। आब कतए जाए। की करए। खैर! अखन तँ ई सभ सोचबाक समय नहि छलैक। चेतनतासँ कष्टक अनुभूति होइत छैक। तकरो अखन ओकरामे अभाव भए गेल छलैक। ओअचेत पड़ल छल। ओकर दूनू संगी ओकरा गमछासँ हवा करैत रहलैक। 

दिन लुक-झुक कए रहल छलैक। पलटनमा सुगबुगेलै। पलटनमाक संगी सभ खुश भेल। कनी-मनी कछमछ कएलाक बाद पलटनमा फुरफुरा कए उठि गेल जेना किछु भेबे नहि कएल रहैक। 

पलटनमा ओहि राति जंगलेमे बितौलक। चारूकात जंगलक भयानक जानवर सभक आवाज अबैत रहल। भोरहोमए पड़ छलैक। पलटनमा गंभीर चिन्तनमे लीन छल। की गरीबक हार-काठ पाथरक बनल होइत छैक? नहि, तखन ओकरापर जनमिते समाज एहन कठोर किएक होइत छैक। एक-एक पल जीवनक हेतु संघर्षमे बीत जाइत छैक। की संसारक सौन्दर्यक आनन्द लेबाक ओकरा कोनो अधिकार नहि? जीबाक हेतु प्रयत्न करैत-करैत ओ मृत्यु दिस अग्रसर भए जाइत अछि। इएह छिऐक गरीबक जीवनवृत..?

इएह सभ सोच-विचारमे ओ छल कि कनेक दूरपर पुलिसक जीप अबैत ओकरा नजरि अएलैक। एक बेर पुन: पलटनमा अपन संगी सभक संगे भागल। मील मालिक पलटनमाक पकड़बाक हेतु पुलिसकेँ जेब गरम कए देने छलैक आ पुलिस ओकरा पाछू हाथ धो कए पड़ि गेल छल। पलटनमा भागिते जा रहल छल। मुदा जंगलकेँ चारूकातसँ घेर लेल गेल छलैक। 

पलटनमा ओ ओकर संगी पकड़ल गेल। पकड़लाक बाद ओकर हाथ पाछू कए बान्हि देल गेलैक। थानामे पलटनमाकेँ एकटा घरमे एसगर बन्द कए देल गेलैक। प्रात भेने ओहि घरसँ पलटनमाक लाश निकललैक। कहि नहि राति भरि ओकरा की की यातना देल गेलैक। पलटनमा आब एकटा मुर्दा छल। पोस्टमार्टम रिपोर्टक अनुसार ओकर मृत्यु जंगलमे कोनो जहरीला जानवरक कटलासँ भेलैक। प्रात:काल अखबारमे छपि गेलैक- 

भगोरा कैदीक लाश जंगलसँ आनल गेल।

पलटनमाक पिता ओहि राति सूति नहि सकल छल। प्रात: काल ओकरा एकटा तार भेटलैक।

पलटनमा जंगलमे जानवरक प्रकोपसँ मरि गेल। लाश लए जाउ।

पलटनमाक पिता सुन्न पड़ि गेल। शून्यतामे ओकर आँखि देखैत रहि गेलैक। पलटनमाक माए एक बेर फेर चिचिआ उठलैक आ तुरन्त शान्त भए गेलैक। एक दिस पलटनमाक माए आ दोसर दिस पलटनमाक पिता निस्तब्ध, चुप, चेतना विहीन पड़ल रहल। गामक लोक कनीकाल तमासा देखलक आ अपन-अपन काजमे लागि गेल। क्यो-क्यो कहैत रहैक-

पलटनमा अनेरे फसाद केलक। गाममे एतेक गोटे गुजर करैत अछि, मरि जाइत अछि। गरीबो बहुत अछि मुदा एना उजाहटि तँ ओकरे ने छलैक आ तकर फलो तँ वएह भोगत।

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पुनर्मिलन

ओकरामे प्रतिभाक कतहुँसँ अभाव नहि छलैक। पूरा गाम ओकर यशगान करबाक लेल तत्पर छलैक। नीक, सुन्दर, सुशील आ मेघावी छल अरूण। माए और बापक कोनो स्मृति ओकरा नहि छलैक। जीबनक प्रत्येक डेग ओ लड़ि कए आगा बढ़ल छल। अपमानक अलावा समाजसँ ओकरा किछु प्रतिदान नहि भेटल छलैक मुदा ओ ओकरे, प्रेरणाक आधार बना जीबनमे विजयश्री प्राप्त करबाक हेतु कृतसंकल्पित छल। ओकर जन्मसँ लए कए अखन धरि जतेक घटना घटल छलैक सभ स्वयंमे एकटा वृतान्त छल।

प्रतिभा जेना ओकरा प्रकृतिसँ पुरस्कारक रूपमे भेटल होइक। बच्चेसँ छात्रवृत्ति ओकरा भेटए लगलैक। शिक्षक लोकनि एक पृष्ठ पढ़ावथि तँ ओ दू पृष्ठ स्वयं पढ़ि लैत छल। ओकर प्रतिभासँ सभ क्यो दंग रहैत छलाह। यद्यपि ओकरा रस्ता देखौनिहार क्यो नहि छलैक, ओ स्वयं जेना सभ किछु जनैत हो, की करक चाही, ककरासँ की बाजक चाही आ की करी जाहिसँ आबएबला समय नीक हो से ओकरा खूब नीकसँ बूझल छलैक। हाई स्कूलक परीक्षा प्रथम श्रेणीसँ उतीर्ण केलक आ पूरा राज्यमे प्रथम स्थान ओकरा प्राप्त भेलैक। कालेजक शिक्षा प्राप्त करबाक प्रबल आकंक्षा ओकरा छलैक मुदा आर्थिक परिस्थिति अति दुखद छलैक। गामपर घराड़ीटा बाँटल छलैक। माए, बाप,भाए, बहिन ककरो कोनो सहारा नहि छलैक।

थाकल, ठेहिआएल, ओ दरिभंगा महराजक राजधानीक महल सभमे घुमि रहल छल। पैरमे पनही नहि, देहपर एकटा नीक कपड़ा नहि, मुदा अपनापर तेज, स्वभावमे सौम्यता ओ व्यवहारक नम्रता अनेरे लोकक ध्यान ओकरापर आकृष्ट कए लैत छल।

संयोगसँ चौधरीजी रिक्सासँ उतरलाह। अरूण हुनका नमस्कार केलक। अरूणक प्रतिभाशाली मुखमण्डल देखि ओ चकित भए गेलाह। चौधरीजीक धिया-पुताकेँ पढ़एबाक काज ओकरा भेटि गेलैक। हुनकासँ ज्येष्ठ सन्तान उर्मिला नवम् वर्गमे पढ़ि रहल छलीह। देखयमे खूब सुन्दरि, स्वभावसँ विनम्र ओ प्रतिभामे अद्वितीय। उर्मिलाकेँ देखितहि अरूणकेँ ठकविदरो लागि गेलैक। जेना पूर्व जन्मक संगी रहल हो। उर्मिलाक पढ़ाइमे अद्भुत प्रगति भेलैक। अरूण सेहो प्रशन्नचित्त अपन गाड़ी आगा पढ़बए लागल। मुदा एक दिन बड़ विचित्र घटना घटलैक। अरूणक सभटा स्वप्न देखिते-देखितेमे भंग भए गेलैक। उर्मिला स्कूल गेलैक आ ओहिठामसँ लौटितहिँ दर्द-दर्द कए चिचिआए लगलैक। कतेको ओझा-गुनी, डाक्टर-वैद्य अएलैक मुदा ओकरा कोनो सुधार नहि भेलैक। हालत बदतर होइत गेलैक आ ओ प्रात: होइत-होइत निष्प्राण भए गेल। सौंसे गर्द चढ़ि गेल। दुर्भाग्य ओकरा ओतहुँ संग नहि छोड़लकै।

उर्मिलाक आकस्मिक निधनसँ ओकर सपना सभ छिन्न-भिन्न भए गेलैक। अरूणकेँ आब एकहुँ दिन ओतए रहब असम्भव भए रहल छलैक। ओ चुप-चाप ओतएसँ खसकल। पैरे-पैरे दड़िभंगासँ समस्तीपुरक रस्तामे ओ बहुत दूर आगा आबि गेल छल। पाकरीक गाछतर छाहरिमे बैसल। कण्ठ जरि रहल छलैक। कतहु पानिक दर्शन नहि छलैक। थाकियो नीक जेना गेले छल। बैसल कि आँखि लागि गेलैक। सुतले-सुतल ओ स्वर्ग लोकक परिभ्रमण कए रहल छल। उर्मिला अत्यन्त प्रशन्न मुद्रामे ओकरा नमस्कार कए रहल छलैक।

आ अरूण तों। बड्ड नीक छेँ तूँ। तोरे ताकि रहल छियौक। जहिआसँ एतए एलहुँ एकहु दिन चैन नहि अछि। दिन-राति बस तोरे ताकि रहल छी। आ जल्दी आ। देख हम कतेक परेशान छी। देख हमर कण्ठ जरि रहल अछि। हमर हृदयक पियास कण्ठ तक पहुँच रहल अछि। एक गिलास पानि दे। अरूण पानि दे। कनी सुन।

कहि नहि ओ की की कहैत रहि गेलैक। अरूण किछु नहि बजलैक आ क्रमशः ओनेपत्ता भए गेल। अरूणक निन्न सेहो उचटि गेलैक। मुदा ताधरि किछु नहि रहि गेल छलैक। अरूणक अन्तर्मनमे दिन-राति ई सपना घुमैत रहैत छल। उर्मिलाक स्नेहिल व्यवहारक अमिट छाप ओकर हृदयसँ मेटने नहि मेटा रहल छल। सएह सभ गुन-धुनमे ओ आगा बढ़ैत रहल। 

समस्तीपुर टीशन बहुत करीब आबि गेल छलैक। रेलगाड़ीक चलबाक आबाज कान तक पहुँचि रहल छलैक। मिथिला एक्सप्रेस लागल छलैक। दौड़ल दौड़ल ओ टीकस कीनलक आ गाड़ीमे कहुनाक ठूसा गेल। गाड़ी झिक-झिक करैत छलैक। एक कदम आगा बढ़ैक, दू कदम पाछा बढ़ैक आ ठामहि ठाढ़ भए जाइक। आगू घुसकैत-घुसकैत गाड़ी रूकि गेलैक। ड्राइभर साहेब चाह पीबैत छलैक कि गार्ड साहेब हरी झंडी देखौलकै आ गाड़ी स्पीड धए लेलकैक। छक-छक-छक...। अरूणकेँ बैसबाक जगह भेटि गेल रहैक। बगलमे एकटा महिला सहयात्री ओकर, दूटा बच्चा, एकटा अधबयसू पुरूष आ कहि ने के के सभ..? कलकत्ता जाएबला गाड़ीक समय विशेषता ओहि गाड़ीमे छलैक। आधासँ आधिक यात्री नौकरीक खोजमे महानगरीक प्रयाण कए रहल छलाह। बरौनी जक्सनसँ गाड़ी आगा बढ़ि गेल छलैक। ओकरा फेर आँखि लागि गेल छलैक। फेर आबि गेलैक उर्मिला। एहि बेर आओर व्यथित आओर अधिक करूण स्वरमे निवेदन करैत एक तरफा अपन मोनक बात ओ कहैत गेलैक।

अरूण। अरूण। हम नहि रहि सकब। हम नहि रहि सकब एसगर अरूण। देख हमर की हाल भेल अछि। देहक आभा झूस पड़ि रहल अछि। अरूण चल, हमरे गाम चल, मुदा...। मुदा...। मुदा...।

गाड़ी सरपट आगा बढ़ैत गेल। आसनसोल स्टेशन करीब आबि गेल छल। गाड़ी टीशनपर रूकल आ बहुत रास यात्रीक चढ़ब ओ उतरब सुनि ओकर निन्न उचटि गेलैक। सपना एक बेर फेर सपना भए गेलैक। 

दोसर दिन साँझमे ओ कलकत्ता शहर पहुँचि गेल। मुदा रस्ताक सपना ओकर माथासँ हटि नहि रहल छलैक। कलकत्ता शहरक नाम बड़ सुनने छल। मुदा कतए जाए? ककरा ताकए? कुनु ठौर ठेकान नहि रहैक। आगा बढ़ल जाए। चारूकात बंगला भाखाक सोर। चलैत-चलैत थाकि गेल। ताबतमे उर्मिलाक आबाज ओकर कानमे पहुँचलैक। अरूण अकचका गेल-

ई तँ उर्मिला लागि रहल अछि!”

आश्चर्यचकित ओ ऊपर ताकए लागल। किछु देखा नहि रहल छलैक। ताबतमे फेर वएह आबाज-

डरा नहि। हमहीं छी- उर्मिला, तोहर चिंर परिचित संगीनी। देख हम कतेक परेशान छी। तोरा पाछू-पाछू बिहारि जकाँ गाड़ीक संगे आबि रहल छी। मुदा घबरो नहि। आखिर हम तोहर विद्यार्थी छियौक ने। ले दस हजार टाका। एहिसँ काज चल जेतौक ने? बाज! बजैत किएक नहि छेँ?”

अरूण अपन आगामे नोटक पुलिंदा सभ देखि कए गुम रहि गेल। फेर वएह आबाज-

उठा। जल्दी उठा। लुच्चा, बदमास आबि रहल छौक। अच्छा तँ हम जा रहल छी।

अरूण झट दए टाकाकेँ फाँड़मे राखि लेलक। राखिते देरी मनमे उठलै- एतेक रास टाका कतएसँ अनलक उर्मिला? नाना प्रकारक प्रश्न अरूणक मनमे उभरि रहल छलैक। संगे डरो भए रहल छलैक। मुदा पासमे टाका आबि गेलासँ हिम्मत सेहो बढ़ि गेल छलैक। एतेक आसानीसँ ओकर आर्थिक समस्याक समाधान भए जेतैक से ओ सपनोमे नहि सोचने छल। टांग तेज ओ मोन सुस्त भए रहल छलैक। आगामे एकटा होटल नजरि अएलैक। होटलक कोठरी नम्बर पाँचमे ओ डेरा ललेक। बेस थाकि गेल छल। विश्राम करबाक तीव्र आवश्यकता छलैक। कपड़ा-लत्ता खोललक। हाथ-पैर धोलक। घंटी बजबैत नौकर दौड़लैक। मीनू हाथमे दए देलकै आ किछु-किछु पूछए लगलैक। मुदा बंगला बजैक। अरूण किछु नहि बुझलकै। नोकरबा तमसा कए चल गेल। अरूण स्नान कएलक आ कपड़ा-लत्ता पहीरि कहि नहि कतेक गाढ़ निन्नमे सुति रहल।

उर्मिला फेर हाजिर। अरूणकेँ भेलैक जेना क्यो ओकरा उठौने चल जाइत होइक। ओ चुप-चाप सन देखि रहल हो। बहुत दूर एकटा झीलक कातमे ओकरा राखि देलकै। बहुत काल धरि ओ सभ कहि नहि की की गप्प सप करैत रहल। ओ कहैत रहलैक- 

अरूण, तूँ बड़ नीक लोक छेँ। तोहर स्मृति एक क्षणक लेल हमर मोनसँ नहि जाइत अछि। सून, एकटा काज करऽ। हमरे संगे चल। तोरा सभ किछु भेटतौक।

पता नहि आओर की की ओ कहैत रहलैक...।

भोर होमए पड़ छलैक। अरूणक आँखि खुजलैक तँ ओ आश्चर्यचकित भए गेल। ओकर कोठरीमे उर्मिलाक वएह वस्त्र राखल छलैक जे ओ मरबासँ किछु पूर्व पहिरने छल। वोहि वस्त्रकेँ ओ हटौलक तँ आओर आश्चर्यचकित भए गेल। बहुत रास हीरा-जबाहरात ओतए राखल छलैक। अरूण परेशान छल जे ई सभ की भए रहल छल। देखिते-देखिते अरूण कड़ोर पति भए गेल छल। सभ सामानकेँ ओ सावधानीसँ रखलक आ चुप-चाप होटलसँ प्रस्थान कए गेल।

मास-दू-मासक अन्दरमे ओ एकटा नीक होटलक मालिक भए गेल। दस-बीस नोकर-चाकर ओकर आगा-पाछा करैत छलैक। प्रतिदिन हजारो टाका कमाइ ओ करैत छल।

छह मासक भीतरेमे ओ गाममे १० बीघा जमीन कीनलक आ इलाकाक संमपन्न व्यक्तिक रूपमे प्रतिष्ठित भए गेल। अरूणक समय देखिते-देखिते साफ बदलि गेलैक मुदा ओकरा खूब नीक जकाँ एकर रहस्य बूझल छलैक। ओ जखन कखनो एकान्त होइत कि उर्मिलाक छाया ओकर सामनेमे उपस्थित भए जएतैक। अस्त-व्यस्त,भाव विह्वल, उर्मिलाक आकर्षक मुद्रामे आह्वान देखि अरूण स्तब्ध रहि जाइत छल...।

ओहि दिन अरूणसँ नहि रहल गेलैक आ पूछि बैसलैक- 

उर्मिला, एतेक परेशान किएक छेँ? हम तोरा संगे कोना भए सकैत छी? हम जीवित छी। तों शरीर मुक्त छेँ। हमरा तँ शरीर चाही।

उर्मिला ई गप्प बड़ ध्यानसँ सुनलकै। ओ बेर-बेर बजैत रहलैक-

हमरा तँ शरीर चाही। हमरा तँ शरीर चाही।

आ ठहाका मारि कए हँसय लगलैक।

अरूण डरा गेल। उर्मिला ओतएसँ गाएब भए गेलैक।

अरूणक बिआह एकटा संपन्न परिवारक सुन्दरि कन्यासँ भए गेलनि। कनियाँक द्विरागमन बेस धूम-धामसँ बिआहक ९ दिनक भीतरे संपन्न भेलैक। पूरा भरल-पूरल परिवारमे आबि ओ कनियाँ बेस प्रशन्न छल। रातिमे अरूण जखन ओकरासँ भेँट करए गेलाह तँ ओकर आबाजमे आश्चर्यजनक परिवर्तन देखि दंग रहि गेलाह। ओ कनियाँ हँसल आ हँसिते रहल-

नहि चिन्हलौं हमरा..! हम छी उर्मिला। अहाँक पुरान संगीनी। अहाँ तँ हमरा बिसरि गेलहुँ मुदा हम अहाँकेँ नहि बिसरि सकलहुँ। हमरा शरीर नहि अछि आ अहाँकेँ तँ शरीर चाही। मुदा अहाँई गप्प नहि बुझलहुँ जे शरीर सीमित अछि। मोनक कोनो सीमान नहि अछि। छोड़ू ई क्षुद्र शरीरकेँ। आउ। अएबे करू। मौन भए जाउ।

गाममे सौंसे हल्ला भए गेलैक। अरूणक शरीर चेतना शून्य पड़ल छल। नव कनियाँ ओकरा देखि-देखि कानि रहल छलीह। कतेको डागडर, वैद्य, ओझा, गुनी आँगनमे पथरिया देने छलाह। मुदा अरूण नहि उठल। ओ मौन भए गेल छल। शरीरक सीमानसँ ऊपर उठि गेल छल। उर्मिला अरूणक मोन एकाकार भए गेल।

 

रबीन्द्र नारायण मिश्रक

नमस्तस्यै

आगाँ...

१६.

प्रगतिशील मंचक कार्यकर्ता सभ ओना छल देशभक्त, समाजक हितकारी विचार रखैत छल, सौंसे पसरल अन्याय, शोषण, भेद-विभेदकेँ समाप्त कए समता मूलक व्यवस्था स्थापित करए चाहैत छल, मुदा ओकरा सभकेँ साधन सीमित छलैक। सामान्य आदमी धरि पहुँचबाक अवसर कम छलैक कारण फिरंगीओकरा सभक पाछा हाथ धो कए पड़ल छल। झूठ-फूस मोकदमामे नाम धए देब, तरह-तरहसँ प्रतारित करब आम बात छल।

जनाधार पार्टीक लोक सेहो प्रगतिशील मंचक विरोधी छल। तकर मूल कारण आपसी प्रतिद्वंदिता तँ छलहे, सैद्धान्तिक मतभेद सेहो छल। मुदा ओकरो सभकेँ कतहुँ-ने-कतहुँ एहि बातक एहसास रहैक जे प्रगतिशील मंचक युवक, युवती सभ राष्ट्रभक्त अछि, भनेओकर रस्ता फराक होइक।

ओनातँ बने-बने भटकैत, समाजमे आतंक, लूट-पाट करैत जीबैत छल डकैतक गिरोह। मुदा ओहो सभ कतहु-ने-कतहु सताओल गेल छल। अन्यायक मान्य एवम् कानूनी प्रतिकार नहि कए सकल छल, तेँ हथियार उठा लेने छल। कतेको हत्या, लूटपाटक घटना सभमे सामिल छल। जाहिर छैक जे कानून ओकरा सभक पाछा पड़ल छलैक। कखन के पकड़ाएत, के जीत के मरत तकर कोनो ठेकान नहि छल। एक हिसाबे जान हाथमे राखिएकए ओ सभ रहैत छल।

मोछा ठाकुरक मृत्युक बाद गरम सिंह ओहि डकैतगिरोहक सरगना भेल। नामे गरम सिंह रहैक। सोचल जा सकैत अछि जे ओ केहनरहल होएत।

इलाकामे डकैतीक घटना बढ़ए लागल। संगे प्रगतिशील मंचक गतिविधि सेहो गाम-गाम पसरए लागल। फिरंगीसभक सूचना तंत्रकेँ ई बात नहि बुझाइक जे आखिर एकरा सभकेँ आर्थिक मदति कतएसँ आबि रहल अछि। प्रगतिशील मंच फिरंगी ओ जनाधार पार्टीक नेता दुनूक हेतु संकट भए गेल छल। तकर मूल कारण छलैक जे ओ सभ भाषणमे कम आओर त्वरित कारबाइमे बेसी विश्वास रखैत छल। प्रगतिशील मंचक महिला कार्यकर्ता सभ फिरंगीसभक नाकमे दम कए देने छलि कारण ओ सभ आसानीसँ घरे-घर घुसिआ जाइत आओर जरूरी संवाद कतएसँ कतए पहुँचि जाइत। ओकरा आगू फिरंगीसभक सूचना तंत्र पछड़ि गेल छल।

मास्टर साहेब ओ पुष्पा जखन कखनो गप्प करथि तँ लोक गुम्म पड़ि जाए। कोनो प्रकारसँ मानसिक असंतुलनक संकेत नहि बुझाइक। देखनाहर, सुननाहर सभ गुम्म पड़ि जाइत छल। बताहोक कतेको प्रकार होइत छैक ताहि बातपर लोककेँ विचार करबाक उत्तम अवसर छलैक- ई दुनू गोटा। एक दिन मास्टर साहेब पुष्पाकेँ संकेत कए भाषण करए लगलाह। हुनका कहबाक तात्पर्य जे पुष्पाकेँ अपन हक छोड़क नहि चाही। आब जखन ओकरा अपन एक मात्र संतान आपस भेटि गेलैक अछि आओर ओ सशक्त अछि, तँ अपन सम्पत्तिकेँ दियाद-बादसँ मुक्त करा लेबाक चाही। मुदा पुष्पा किछु बजबे नहि करैक। ओकरा अन्तर्मनमे डर पैसल रहैक से हटबे नहि करैक। मास्टर साहेब ओकरा बेरि-बेरि सुनबथि :

अधिकार खो कर बैठ रहना, यह महा दुष्कर्म है।

न्यायार्थ अपने बन्धु को भी, दण्ड देना धर्म है।

परन्तु पुष्पा अपन बेटाकेँ किछु नहि कहैत। ओकरा डर हेाइक जे कहीं ओकरा एकमात्र संतान फेर ने बिला जाइक। यएह सभ सोचैत सोचैत ओ फेर अपन पुरान समयमे लौटि जाइत। किछु, किछु बड़बड़ाइत आओर गुम्म भए जाइत।

डकैत सभक सरगना गरम सिंह हमरे गामक छल। ई बात तँ तखन खूजल जखन कि एक दिन प्रगतिशील मंचक जंगलमे बैसार भए रहल छल। गरम सिंह अपन दल-बलक संगे ओहि ठामसँ गुजरि रहल छल। प्रगतिशीलमंचक बैसार देखि ओ सभ कात भए ओकर सभक बातसभ सुनलक। ओकरा रामकुमार चिन्हएमे आबि गेलैक। बच्चामे दुनू गोटे गामक स्कूलमे पढ़ैत छल। हमहूँ ओही स्कूलमे पढ़ैत रही। मास्टर साहेबकेँ ओ सभ धर दए चिन्हि गेल।

गरम सिंहक भेँट रामकुमारसँ भेलैक तँ दुनू गोटेक आनन्दक वर्णन नहि छल। दुनू दलक लोक सभ छगुन्तामे पड़ि गेल।

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१७.

राम कुमार आओर गरम सिंहक आपसी दोस्ती बढ़िते गेलैक। एहिसँ प्रगतिशील मंचक आओर लोक सभ गरम सिंह एवम् ओकर संगी सभक सम्पर्कमे आएल। एक हिसाबे गरम सिंहक गुट प्रगतिशील मंचक सदस्य बनि गेल छल मुदा खुलि कए एहि बातकेँ प्रकट करबासँ सभ परहेज करए, कारण जँ बात खुजितैक तँ प्रगतिशीलमंचक जनतामे सद्भावना घटतैक। ओ सभ अराजकतावादी तँ कहबिते अछि, डकैतक सहयोगी हेबाक कारण सामाजिक ओ कानूनी रूपसँ प्रताड़ितो कएल जाएत। मुदा भितरिआ सम्पर्क दुनू गुटमे बढ़िते गेल। मास्टर साहेब एवम् पुष्पा सन-सन कतेको लोकक शरणस्थली छल प्रगतिशील मंच। एहि कारणसँ ओकरा सभकेँ समाजमे सहयोग बढ़ि रहल छल। जनमानसमे ओकर सभक मानवताबादी छबि बनि रहल छल जे जनाधार पार्टीक लोक सभकेँ बेचैनीक कारण छलैक। मुदा ओकरा सभकेँ प्रगतिशीलमंचक तोड़ नहि भेटि रहल छल। रामकुमारक समस्या मात्र ओकर माएटा नहि छलैक। मास्टर साहेबक देखभाल सेहो ओकरे करए पड़ैक। आओर कतेको असहाय, असमर्थ लोक सभ ओकरा सभक संस्थासँ जुड़ि गेल रहैक। ओहिमे किछु गोटे तँ ओकरा सभक संगे रहैक, किछु गोटे यत्र-तत्र पसरल रहैक आओर मौका-कुमौका अबैत जाइत रहैक।

यद्यपि समाजमे सती प्रथा रुकि गेल रहैक, तथापि गाहे-बगाहे एहन प्रसंग सुनएमे अबैत। लोक तखनहुँ ओकरा महिमामण्डित करबासँ पाछा नहि रहैत। मुदा एहन घटना सभ आब अपबाद भए गेल रहैक। लेकिन समस्याक ई अन्त नहि छल अपितु अधिकांश मामलामे ई नव-नव समस्या सभक प्रारम्भ छल।

समाजमे विधबा सभ जीबैत लहाश छलि। कोनो अधिकार नहि। जँ बेटा भेल तखन तँ पारिवारिक सम्पत्तिमे ओकरा हिस्सा भेटि सकैत छलैक, अन्यथा ओहो नदारद। विधबा माए किंवा ओकर बेटीकेँ पारिवारिक सम्पत्तिमे मात्र जीवन निर्वाह योग्य खोरिसक अधिकारी बूझल जाइक। एक हिसाबे तँ अन्यायक पराकाष्ठा रहैक। बेटा, बेटीमे जन्मजात भेदभावकेँ धार्मिक, सामाजिक एवम् कानूनी मान्यता रहैक। तेँ बेटीकेँ जनमिते कतेको ओहिठाम उदासी भए जाइत छल। प्रगतिशील मंच समाजमे महिलाक पराभवसँ चिन्तित छल। ओहि काजकेँ आगा बढ़ाबए हेतु समाजमे जनचेतना आनबाक हेतु ओ सभ प्रयत्नशीलो छल मुदा परिणाम अपेक्षाकृत निराशाजनक छलैक कारण समाजक अधिकांश लोक धरि ओकरा सभक पहुँचे नहि रहैक। लोक सभ सीमित स्वार्थ एवम् सहज प्रवृतिक कारण कोनो तरहक नव प्रयोग करएसँ बचैत छल। जे किओ सुरखुरेबो करथि तिनका ततेक झंझट होमए लगलनि जे आगा क्यो एहन प्रयास करएसँ बचैत छल। मास्टर साहेबक उदाहरण सामने छल। एकटा एकदम निर्दोष आदमीक सत्यानाश भए गेल छल। ओकर परिवार तहस-नहस भए गेल छल आओर कर्मक्षेत्र, जे गामक पाठशाला छल, तकरा नष्ट कए देल गेल छल। एहिसँ ककरो की लाभ भेल? मुदा से सभ सोचबाक ने ककरो फुरसति रहैक आओर ने प्रयोजन बुझाइक। एकाध गोटा जे सम्पन्न छल से अपन सम्पत्तिक रक्षामे लागल रहैत छल आओर शेष अपन जीवन बचबएमे निरंतर एहि प्रयासमे जे कहुना एकहु साँझ भोजन होइक आओर जान बॉंचि जाइक। एहि सभ विषयपर प्रगतिशीलमंचक रामकुमार ओ डकैत सभक सरगना गरम सिंहकेँ बीचमे कतेको बेर गरमागरम बहस होइत रहैत छलैक। निर्दोष आदमीक लूटपाट, हत्या कए ओकर धन-सम्पत्ति हरण कए लेब कोनो तरहेँ वाजिब बात नहि लगैत छल। एही बिन्दुपर दुनू गोटेमे कै बेर मतान्तर टकरावक रूप धए लैत छल। बात बढ़ैत देखि दुनू दिसक लोक सभ थोड़ थाम्ह लगा दैक आओर सभ अपन-अपन काजमे चल जाइक।

मास्टर साहेबक घरमे डकैती एवम् ओकर पत्नीक डकैत सभ द्वारा हत्याक गप्प राजकुमारकेँ नहि बिसराइक। रहि-रहि कए ओकर मोनक कचोट गप्प-सप्प लक्षित होइत छल। मुदा ओकरा ई नहि बूझल छल जे एहि कुकृत्यक नायक गरमसिंह आओर ओकर गुटक लोक छल। एहि घटनासँ गरमसिंह सेहो दुखी छल।

असलमे ओ सभ मास्टर साहेबक ओहिठाम धोखासँ पहुँचि गेल रहए। ओकर सभक लक्ष्य ओही गामक जमिन्दार हरिहर राय छलै। ओ मास्टर साहेबक पड़ोसी छल। डकैत सभ हरिहर रायक घर दिस बढ़िए रहल छल कि मास्टरक घरसँ ओकर जवान होइत बेटा टार्चक लाइट बारलक। हल्ला सुनि ओ घरसँ बहराए लागल। डकैतक सरगना गरम सिंह ओकरा चेतओलकै जे भागि जो। मुदा ओ हल्ला करए लागल। ताबतेमे मास्टरक पत्नी घरसँ बाहर भेलखिन। बेटाकेँ ओझराइत देखि ओहो चिकरए-भोकरए लगलीह। डकैत सभ एहि बातसँ फिरसान भए गोली चला देलक। मास्टरक पत्नी ठामहि रहि गेलीह। प्रात भेने डकैतक सरगनाकेँ जखन सभ बातक अखिआस भेलैक तँ बहुत दुखी भेल मुदा आब की? मास्टरक सर्वस्व नष्ट भए गेल रहैक।

प्रगतिशील मंचक लोक सभ आपसी चर्चामे एहि घटनाक उल्लेख करिते छल। संगहि डकैतक गिरोहसँ फराके रहबाक चर्चा सेहो करैत छल। मुदा कहबी छैक जे मजबूरी जे ने करा दिऐ। ओकर सभ आर्थिक तंगी बढ़ल जाइत रहैक। सामाजमे जनाधार पार्टी लोकक वर्चस्व बढ़ल जाइक। सरकारो ओकरे संग दए दैत कारण प्रगतिशील मंचक उग्र रुखिसँ ओ सभ बेहतर विकल्प बुझाइत छलैक। अंततोगत्वा डकैत सभक प्रगतिशील मंचमे बिलए भए गेल। एहि हेतु रामकुमार ओ गरम सिंहक आपसी सम्पर्क बहुत कारगर साबित भेल। ई तय भेल जे डकैत गिरोहक सदस्य आब ओतबे डकैती करताह जाहिसँ प्रगतिशीलमंचक आर्थिक आवश्यकताक पूर्ति भए सकए। ओहो फिरंगी द्वारा संचालित सरकारी बैंक, रेलबेक वा सार्वजनिक सम्पत्ति सभकेँ मूलत: ठेकाना लगाओल जाएत। शेष समयमे समाजमे प्रगतिशील मंचक गतिविधिपर ध्यान देल जाएत।

प्रगतिशील मंचक संशोधित नाम प्रगतिशील विचारमंच भए गेल। एकर मूल उद्देश्य सामाजिक परिवर्तनक संग देशकेँ अंग्रेजक चंगुलसँ मुक्त कराएब छल। एहिमे सभसँ बाधक जनाधार पार्टीक टोपीधारी नेता सभ छलथि जे ओकरा परास्त करए हेतु अंग्रेजो सभसँ गुप-चुप बैसारकरएसँ परहेज नहि रखैत छलाह। मुखमे राम बगलमे छुड़ी। मुदा प्रगतिशील विचार मंच एकर किछु परवाह केनहिबिना अपन काजमे लागल रहैत छल।

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१८.

द्विरागमनक बाद दोंगामे बेस चीज-बस्तु हमरा नैहरसँ आएल छल। हम एकबेर फेरसँ अपन सासु-ससुरक चास-बासपर बिराजमान भए गेल रही। लोक सभक आबाजाही तँ लगले रहैक। हमर नैहरसँ खबासनी मासमे दूबेर अवस्से आबि जाइत छल जाहिसँ हमरा ओहिठामक समाचार सभ भेटि जाइत छल। नैहरक चर्चा होइक आओर नोर नहि खसए से भइए नहि सकैत अछि।

माए कोना अछि? कक्का कोना छथि? कोनो अछि हमर संगी-साथी। स्कूलिआ विद्यार्थी सभक तँ विशेष जिज्ञासा रहिते छल कारण कनिके दिनका नेन्नाक सुखद स्मृतिमे ओकर पैघ स्थान छल। ओतए नित्य किछु काल हम स्वतंत्रतापूर्वक अपन संगी सभक संगे गप्प करी, खेल धूप करी। आब सुनै छी जे स्कूल टुटि गेल। मास्टर साहेब बताह भए गाम छोड़ि देलनि। कक्का नित्यप्रति भांग खाए ओहिना अलमस्त रहैत छथि।

हमर दोंगाक थोड़बे दिनक बादहमर सासुर डीहगामामे अगिलग्गी भेलैक। बहुत रास घर सभ जरि कए खाक भए गेल। बोराक बोरा अन्न पानि स्वाहा भए गेल। बखारी सभसँ तँ कहि नहि कतेक दिन धरि धुँआ उठैत रहल। सौंसे गामक लोक यत्र-तत्र शरण लेने छल।

ओहि समयमे सरकारी सहायता नाममात्रक होइत छलैक। विदेशी सभक हुकुमत छलैक जे स्थानीय चापलूस सभक मदतिसँ देशकेँ सालोंसँ गुलाम बनौने छल। अगिलग्गीक बाद जनाधार पार्टी ओ प्रगतिशील विचारमंचक कार्यकर्त्ता सभक गाममे कैम्प खसल छल। ओ सभ यथासाध्य लोक सभक कष्टकेँ कम करबाक प्रयास भेल।

एही क्रममे पहिल बेर हमरा रामकुमार ओ गरमसिंहसँ भेँट भेल। ओ सभ डीहगामा अबितहि हमर खोज केलक आओर भेँट होइतहि बड़ प्रशन्न भेल। ओकरा सभक स्वागतमे कोनो कसरि नहि रहल। हमर सासु ससुर ओहनो हालतमे ओकरा सभक पर्याप्त ध्यान रखलथि। एहि बातसँ ओहो सभ बहुत प्रशन्न रहथि जे हमर नैहरक लोक सभ हाल-चाल लेबए आएल अछि।

गप्प सभक दौरान आओर-आओर संगी सभक चर्चा स्वाभाविक छल। ओतेक रास विद्यार्थीमेसँ बूधन काकाक पुत्र रमणकचर्चा जोर-सेारसँ भेल कारण ओ बहुत पढ़ाइ केलक। ततबे नहि, ओ विदेशमे परीक्षा सभ पास कए कलक्टर भए गेल छल। आओर कोनो विद्यार्थीक एहन भविष्य नहि बनलैक।

गामक स्कूल बन्द भए गेलाक बाद बेसी विद्यार्थी तँ पढ़ाइ छोड़ि खेती-बारीमे लागि गेल छल। मुदा रमण पढ़ए हेतु गाम छोड़ि दड़िभंगा चल गेल। पढ़ाइमे औवल आबए लागल। तेँ घरक लोक सभ ओकरा पटना पठाए देलखिन। ओहीठामसँ आगाक रस्ता खूजल। प्रतियोगिता परीक्षा देबए लन्दन चल गेल। तकर बाद कलक्टर बनि गेल।

ओहि समयमे कलक्टर बनब अपना देशक लोकक हेतु भारी बात छलैक। अंग्रेजी पढ़ाइ करब सभक बसक बात नहि छल। फेर कलक्टर बनए हेतु तँ विदेशमे अंग्रेज सभ द्वारा संचालित प्रशासकीय सेवा परीक्षा पासकरब बहुत दुरुह काज छल। अंग्रेजक अधीन काज करए हेतु कतेको गोटे तैयारो नहि होथि। एहने समय साल रहैक जे राष्ट्रभक्त सभ प्रशासकीय सेवा पास केलाक बादो ओकरा त्याग कए राष्ट्रीय आन्दोलनसँ जुड़ि गेलाह। ई मामूली त्याग नहि छल।

रमणक एहि सफलतासँ सौंसे जिला-जबार गौरवान्वित भेल। देश भरिमे इनल-गिनल लोक सभमे ओकर नाम अबैत छल। एहि बातसँ कोनो बापकेँ फक्र भए सकैत छलैक। बूधन ककाक तँ पैर जमीनपर रुकबे नहि करनि। ओ हमर पितिऔत कका छलाह। हमर बाबा हुनकर पिताक सहोदर भाए रहथिन। मुदा खानदानमे शिक्षा ओ पदमे ओ औअल आबि गेल रहथि। सभ ठाम हुनके चर्च होइत रहैत छल।

रामकुमार ओ गरमसिंह अपन संगी सभक संगे राति भरि डीहगामामे काज करैत आओर भोर होइते निपत्ता भए जाइत। लोक सभ ओकर सभहक अनुग्रहित भए गेल छल। जकरे देखू, सभक मुहेँ ओकरा सभक प्रशंसा सुनएमे अबैत। मुदा क्यो ओकर सभक नाम नहि जानैत। बुझैत-बुझैत लोक एतबे बुझलक जे ओ सभ प्रगतिशील विचार मंचक कार्यकर्ता अछि। आओर किछु नहि। नित्य नव ढवमे ओ सभ प्रकट होइत। गाममे ओकर सभक यश पसरि गेल।

हम तँ एतबे बातसँ खुश रही जे हमर नैहरक लोक बेरपर काज आएल। हमरे घरक नहि अपितु कोनो-ने-कोनो रूपे पुरा गामक मदति केलक। आओर कोनो अपेक्षा नहि रखलक। प्राय: हमरा छोड़ि क्यो ओकर सभक नाम-गाम धरि नहि बुझि सकल।

हमर धिया-पुताक संगी सभ एहन नीक काज केलक ताहि बातसँ हम आनन्दमे रही। रमणक समाचार सुनि सेहो बहुत खुशी भेल। मुदा एहि बातसँअखनो दुख होअए जे हम नहि पढ़ि सकलहुँ।

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१९.

प्रगतिशील विचार मंचक बैसारमे सभक मत रहैक जे मास्टर साहेब, पुष्पा ओ एहने आन-आन लोक सभकेँ मानिसक स्वास्थ लाभक हेतु प्रयत्न कयल जाय। ताहि हेतु हुनका सभकेँ मानसिक चिकित्सालय, काँके (रॉंची) लए जयबाक कार्यक्रम छल। सभक ई सोच छलैक जे एहन प्रताड़ित, दुखी आत्मा सभकेँ सहायता करब मानवीय कर्तव्य थिक। देशक स्वतंत्रतासँ बेसी जरूरी थिक जे ओहिमे रहनिहार लोक मनुक्खक जीवन जीबए। एही मुद्दापर ई सभ जनाधार पार्टीक पछाड़ि रहल छल। कारण ओ सभ तँ खाली उपरे-झापरे काज करए। बैसार, भाषणबाजीसँ लोककेँ जोशा तँ दैक मुदा जाहि घरमे चुल्हि नहि फुकाइत छल से कि जानैत स्वतंत्रताक स्वाद। आर्थिक परतंत्रता मनुक्खक सर्वस्व हरण कए लैत अछि चाहे ओ जकरा द्वारा आओर जाहि स्तरपर हो। अंग्रेज चल जेतैक तँ क्यो दोसर ठाढ़ भए जेतैक। शोषणमुक्त, समतामूलक, समन्वयवादी समाजक स्थापना होएत तखनहि स्वतंत्रताक लाभ समाजक दलित, शोषित वर्ग धरि पहुँच सकत अन्यथा ओकर सम्पूर्ण लाभ बलगर वर्ग सोखि लेत। से कहब छलैक ओकरा सभक।

प्रगतिशील विचार मंचक जन कल्याणकारी कार्यक्रमक तहत मास्टर साहेब, पुष्पाकेँ काँकेक मनोचिकित्सालयमे भर्ती कराओल गेल। किछु आओर एहने लोक सभकेँ ओतए आनल गेल। जानि बुझि कए ओकर सभक नाम लोककेँ नहि बताओल गेल कारण ओकरा सभक पाछा फिरंगीसभहाथ धो कए पड़ल छल आओर ताहीसँ ओ सभ ततेक उत्पीड़ित होइत गेल जे अपन-अपन माथपर सँ नियंत्रण खतम कए लेलक। आओर भए गेल आजाद

कतेक दुखद परिस्थिति रहैक तकर वर्णन सुनि क्यो उद्वेलित भए सकैत छल। उद्वेलित मास्टरो भेलाह, पुष्पा सेहो भेली आओर कतेको एहने उद्वेलित होइत-होइत काँके पहुँच जाइत गेल।

रामकुमार स्वयं हुनका सभकेँ दूटा आओर संगी सभक संगे काँके मानसिक रेागी अस्पताल काँकेमे भर्ती करओलक। ओहिठामसँ लौटएमे कै दिन लागि गेलैक।

रामकुमार आपस अपन अड्डापर आबि रहल छल कि डकैतक गिरोह सभपर फिरंगीसभक बढ़ैत चोटक समाचार भेटलैक। जहिआसँ रमण ओहि जिलाक कलक्टर भेलैक एहन लोक सभक पराभव भए गेल छल। यद्यपि ओ रमणकेँ नीकसँ जनैत छल मुदा ओकरा भेँट करबासँ कोनो लाभ नहि लगैत छल कारण ओ आखिर छल तँ फिरंगीसभकनौकर। ओकरे आदेशपर चलैत छल।

ओना किछु मामलामे रमण समाजमे यश प्राप्त केने छल। चोरी-चकारी लूट-पाट सभ ओकरा अएलाक बाद बहुत कम भए गेल छल। मुदा तकर लाभ तँ समाजक सम्भ्रान्त वर्ग धरि सीमित रहि गेलैक। जकरा किछु छलैहे नहि, तकर की लुटेतैक? तेँ ओकर प्रयास एकभगाहे रहि गेल छल। अंग्रेजक अफसर रहैत ओ आओर कइए की सकैत छल? जहिआसँ रमण ओहि जिलामे आएल गरम सिंह ओ ओकर गुटक लोक हालत पातर भए गेल छल।

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२०.

खबासिनीक आबाजाही लागले रहैक। ताहि माध्यमसँ नैहरक आओर आस-पासक घटना क्रमसभ हमरा पता लगैत रहैत छल। मास्टर साहेब आओर पुष्पाकेँ काँकेमे भर्ती केलाक समाचार सेहो खबासिनीक माध्यमसँ भेटल। आओर गप्प सभ होइते रहैक कि लागल जेना धरती जोर-जोरसँ हीलि रहल अछि। सभ भूकम्प-भूकम्प बजैत घर छोड़ि पड़ाएल।

मुदा भागैत कतए? भयानक गुड़गुड़ीक आबाजक संग लगैक जेना पृथ्वी फाटि जाएत। जमीनपर ठाढ़ रहब पराभव छल।क्यो खुट्टा पकड़ने ठाढ़ छल तँ क्यो किछु। माल-जाल सभ चिकड़ि भोकरि रहल छल। कुकुर सभ पहिनहिसँ भुकए लागल छल।

कतेको घर ढनमनाए खसि पड़ल। कतेकोमे दरारि पड़ि गेलैक। अन्न-पानि चीज-वस्तु सभ बर्बाद भए गेलैक। कतेको गोटे घायल भए गेल। कतेकोक हार-पाँजर टुटि गेलैक। के ककरा सम्हारत? कतहु पैर रखबाक जगह नहि रहैक।

ओहि दिन पहिल बेर डीहगामामे घरसँ दरबाजा दिसि हम आएल रही। कनिआ, पुतरा सभ भागली। घरक घर स्वाहा भए गेल। थोड़बे कालमे पृथ्वीक ई गति भए गेल छल। जकरा सम्हारएमे सालो लागि गेल। गामक गाम उजरि गेल।

हम ताबे सासुरमे पुरान भए गेल रही। तीनटा धिया-पुता सभकेँ सम्हारक छल। वयोवृद्ध सासु, ससुरक देखभालक हुनको देखबाक छल। मुदा घर उसरि गेल छल।

सरकारी सहायता मुँहगर लोक धरि सीमित छल। प्रगतिशील विचार मंच ओ जनाधार पार्टीक लोक सभ गामे गाम घुमि- घुमि लोकक मदतिक प्रयास करैत छल मुदा कारगर मदति तँ गरम सिंह आओर ओकर गुटक आओर आओर लोक सभ केलक जकर नामो क्यो नहि जनैत छल।

कहबी छैक जे कलियुगमे नीक करू तैओ अधलाह होइत अछि। सएह परि भेलैक गरम सिंह आओर ओकर गुटक लोक सभकेँ। लोक सभक उपकार तँ ओ सभ दिन केलक मुदा गाहे-बगाहे ओकर भेद खुजि गेलैक। समाचार जिलाक कलक्टरक कान धरि गेलैक।

खुफिआ तंत्र तँ कतेको सालसँ एकर सभहक गतिबिधिक टोह लैत रहैत छल। अपना भरि पकड़बाक प्रयत्न सेहो करैत रहैत छल। मुदा गरम सिंहक जनतामे बहुत समर्थन रहैक। गरीब गुरबा सभक हेतु तँ ओ भगवाने छल। तेँ जखन कखनो आपत्तिकाल होइक, एकरा सभकेँ स्थानीय लोक सभ घरे-घर नुका लैत छल। बादमे ओ सभ अपन काजमे परिबर्तन आनए चाहलक, ओही उद्देश्यसँ ओ सभ प्रगतिशील विचार मंचसँ आबाजाही केलक। मुदा रमणकेँ अएलाक बादसँ दृष्ये बदलि गेलैक।

रामकुमारकेँ रमणकेँ सम्पर्क रहैक। आखिर ओकर नेन्नेक दोस्त छलैक। मुदा गरम सिंहक सही पहचान देबएमे ओहो डरैत छल। ओकरा डर रहैक जे रमण बड़ सख्त आदमी अछि। अंग्रेजक अधीन काज करैत अछि। तेँ ओकरा जँ गरमसिंहक पता चलि गेलैक तँ ओ ओकरा छोड़त नहि।

एक दिन तँ गरम सिंह पकड़ाइत- पकड़ाइत बॉंचल। ओ आब अपन जीवनक दिसा बदलए चाहैत छल मुदा हालत ओकरा संग नहि दए रहल छलैक। कहबी छैक जे मनुक्खक पछिला कर्म ओकरा पछोड़ करैत छैक। सएह ओकरोपर लागू छल।

एकराति ओकर सभक बासापर एकाएक पुलिस छापा मारलक। दुनू कातसँ फायरिंगक आवाज आबैत रहल। एक बेर तँ हल्ला भए गेलैक जे गरम सिंह मारल गेल। पुलिस जश्न मनाबए लागल मुदा सत्य बात ई छल जे ओ जान बचाए भागएमे सफल रहल।

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२१.

पहिने अगिलग्गी, फेर भूकम्प दुनू मिलि कए गामक लोक सभक रीढ़ तोड़ि देलक। लोकक घर नष्ट भए गेल। घरमे राखल चीज, वस्तु सभ स्वाहा भए गेल। बखारी सभ ढनमनाए खसि पड़ल। लोकक संग रहि गेल मात्र अपन परिवार। मुदा ओकर भरण-पोषण एकटा जबरदस्त समस्या छल।

एहन विषम परिस्थितिमे हमर माए टैर गाड़ी भरि-भरि सामान सभ पठओलक। एहिसँ परिवारकेँ कतेक उपकार भेल तकर वर्णन नहि।

ओही समयमे हमर नैहरसँ खबासनी सेहो आएल छलि। ओकरा अएलासँ एकटा अपूर्व आनन्द हमरा होइत छल। बुझाइत छल जेना हम एक बेर फेर अपन नैहर पहुँचि गेलहुँ। माएक समाचारसँ प्रारम्भ भए गप्पक अनबरैत श्रृँखला पता नहि कतए कतए पहुँचि जाइत।

ओहिमे मास्टर साहेब, पुष्पा, रमण, रामकुमार आओर गरम सिंहक तँ कतेको बेर चर्च होइत। ई गप्प-सप्प होइते छल कि खबासिनी गुम्म भए गेल। लाख कोशिश करिऐक, ओकरा घिघरी लगलैकसे लगले रहि गेल। बहुत मोसकिलसँ ओकरा अबाज लौटलैक। कतेको बेर पुछलाक बाद ओ बाजि सकल जे गरम सिंह गुटक अधिकांश डकैत मारल गेल जे बॉंचल से पकड़ि लेल गेल। मुदा गरम सिंह स्वयं चम्पत अछि।

जीवितो अछि कि नहि?”

तकर ओ किछु जवाब नहि दए सकल छलि।

ई सभ कोना भेलै?” –हम पुछलिऐक।

नवका कलक्टर हाथ धो कए एकरा सभक पाछा पड़ि गेलैक।” –खबासिनी कहलक।

ओओर कतेक तरहक गप्प भेल रहैक। मुदा गरम सिंहक पराभवक समाचार सुनि बच्चाक बात सभ मोन पड़ए लागल। ओकर घरक हालत बहुत खराब रहैक। ओ तथापि स्कूल अबैत छल। खेल-धूपमे औवल छल। मुदा पढ़ाइमे मोन नहि लगैक। मास्टर साहेब लाख बुझबितथि ओकरापर कोनो असर नहि होइक।

बहुत दिन धरि गरम सिंहकेँ रहस्यमय ढंगसँ गायब भए जेबाक चर्च इलाका भरिमे होइत रहल। जकरा जे फुराइक से कहितथि। किछु गोटेक हिसाबेओहो पुलिस संगे मुठभेड़मे हताहत भए गेल। मुदा फिरंगीसभ आश्वस्त रहैक जे ओ जीबिते अछि। ताहि बातकेँ स्थानीय समाचार पत्र प्रमुखतासँ छपने छल। मुदा ओ गेल कतए?

हमर नैहरक लोक सभ क्रमश: फेरसँ अपन-अपन खेती-बाड़ीमे जुटि गेल रहथि। सम्पन्न गाम छल। यद्यपि अगिलग्गी आओर तकर बाद भेल भूकम्पसँ बहुत क्षति भेल रहैक, तथापि लोक सभ अपन मेहनतिक बदौलत फेरसँ ठाढ़ भए गेल।

धिया-पुता सभ छेटगर भए गेल छल। ओकर सभक उपनायनक कार्यक्रम बनल। सभ कुटुम्बकेँ आमंत्रित कएल गेल। हमर माए नाना प्रकारक उपहार पठओलक। मास दिन धरि तरह-तरहक विध-विधान होइत रहल। उपनयनक दिन नाच गानक सेहो प्रबन्ध छल। दरबाजापर सामिआना लागल छल। गाम भरिक लोक गीत-नादक आनन्द लैत रहलाह। भोज- भात तँ भेबे कएल।

सभसँ मनोरंजक दृष्य तखन भेल जखन एकटा पाहुन टेबुल घड़ीकेँ चोरा कए अपन धोती तरमे रखने छलाह। ओ कनी दिमागसँ हिलल सेहो रहथि। घड़ीमे एलार्म भरल रहैक। ओ जोर-जोरसँ घनघनाए लागल। चारूकातक लोक एकट्ठा भए गेल। लोक सभमे ठहाका पड़ि गेल। हराएल घड़ी भेटि गेल। मुदा ओ पाहुनजे भगलाह से घुरि नहि अएलाह।

उपयनक पाहुन सभ क्रमश: अपन-अपन गाम आपस चलि गेलाह। सभक यथासम्भव विदाइ कएल गेल। भोजक ततेक सामग्री बॉंचल छल जे गाम भरि बएन परसल गेल। लोक सभ खाइत-खाइत तंग भए गेल।

भोरे-भोर बरुआ सभ संध्याबन्धन करैत छलाह। पण्डितजी नित्य भोरे आबि कए ओकर व्यवस्था करथि। गीत-नाद तँ कतेको दिन धरि चलैत रहल। रातिक समयमे पोखरिक भीड़पर जाए बरुआ सहित कतेको लोक की-की बिध सभ केलाह। सत्य नारायण भगवानक पूजा भेल। तकर बाद उपनायनक प्रकृया सम्पन्न भेल।

हमर नैहरसँ आएल खबासिनी सेहो आपस जाए चाहैत छल। ओकरा एकाध दिन रोकि लेलिऐक जाहिसँ गप्प-सप्प कए सकी।

काजसभसँ चैन भए खबासिनीकेँ बैसाए नैहरक समाचार सुनए लगलहुँ। ओही क्रममे गामक कैटा नव-नव समाचार भेटल। कैटा विधबा सभ गाम-घर छोड़ि वृन्दावन चलि गेलीह। परिवारमे समावेश नहि भेलनि।

ओहि समयमे विधबाक दुर्गति कोनो नव बात नहि छल। ककरो पति मरि गेल ताहिमे ओकर की दोष? मुदा से बात समाज ओ कानूनकेँ बुझाइक तखन ने? एक तँ ओकर पति चल जाइक, ताहि संगे सर्वस्व स्वाहा! पहिने तँ देहोमे आगि फूकि दैक आओर हल्ला कए दैक जे सती भए गेलैक। तकर बाद ओकरा देवीक दर्जा प्राप्त होइक। ओकर छाउरपर सती मन्दिर बना दैक आओर चैन भए जाए।

क्रमश: सती प्रथापर रोक लागल। विधबा अपन जान तँ बचओलक मुदा कोन कीमतपर? ई सभ प्रश्न हमरा मोनकेँ उद्वेलित कए दैत छल। ई सभ सोचैत-सोचैत ध्यान माएपर चलि गेल। कनैत देखि खबासिन सेहो कानए लागलि। थोड़बेकालमेसभ सामान्य भए गेल। ओ आपस हमर नैहर दिस विदा भेलि आओर हम अपन काजमे व्यस्त भए गेलहुँ।

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२२.

गरम सिंह दलक एतेक जल्दी पराभव भए जेतैक से सरकारो नहि सोचने छल। मुदा गरम सिंह स्वयं नहि पकड़ाएल रहैक।ताहि लए कए सरकारी व्यवस्थाक चिन्ता तँ रहबे करैक। ओ सभ रने-बने गरम सिंहकेँ तकैत रहल आओर क्रमश: ढील पड़ि गेल। डकैतक गुट कमजोर भए गेल छलैक। सरकारी अधिकारी सभकेँ निश्चिन्त हेबाक सेहो कारण छल।

असलमे बचल डकैत सभ प्रगतिशील विचार मंच धए लेने छल आओर ओकर आर्थिक पक्षकेँ मजगूत करएमे प्रयुक्त होइत छल। ताहिसँ प्रगतिशील मंचकेँ जनाधार पार्टीकेँ टक्कर देबामेआसानी भए गेलैक। गाम-गाममे प्रगतिशील विचार मंचक समर्थक लोक भए गेल छल। सक्रिय सदस्यक संख्या सेहो बढ़िते जा रहल छल।

गरम सिंह पुलिसक गिरफ्तसँ भागि सोझे वृन्दावन पहुँचि गेल। ओहिठाम एकटा मन्दिरक स्थापना कए ओकर मठाधीश भए गेल। ओकरा संगे चारिटा डकैत सभ सेहो भागएमे सफल भेल छल। ओहो सभ अपन-अपन चोला बदललक आओर सन्यासी भए गेल।

गेरुआवस्त्र पहिरने कृष्णक भक्त स्वांग धेने दिन राति ओ सभ अपन नव कलेवरमे निश्चिन्त भए वृन्दावनवासी भए गेल। क्यो ओकरासभक पछिलका जीवनक जिज्ञासा नहि केलक।

गरम सिंह अपना संगे पर्याप्त धन अनने छल जाहिसँ वृन्दावनमे शीघ्र स्थापित भए गेल। स्थानमे भव्य मन्दिर, अतिथि गृह सहित सभ प्रकारक सुविधा भरि गेल। क्रमश: ओकर चेला सभक संख्या बढ़िते गेल। ओहिमे तँ कतेको यत्र-तत्रसँ आएल विधबा सभ छलीह जिनका सभकेँ कहुना कए रहबाक एकटा ठौर तँ चाही, से ओतए भेटि गेलनि। एहि प्रकारें गरम सिंह भजनानन्ददासक नामसँ प्रसिद्ध भए गेलाह।

भजनानन्ददास जखन प्रवचन दैत छलाह तँ चारूकात ओकर चेला सभ मण्डपमे पसरि जाइत छल। किछु गोटे काते-कात ठाढ़ भए जाइत छल। प्रवचन, भजनक बीच-बीचमे ओ सभ ततेक मगन भए कीर्तन करैत, नृत्यक नाना प्रकारक भंगिमा करैत, जे लगैत जेना भजनानन्ददास साक्षात कृष्ण होथि।

पीअर वस्त्र, पीअर चानन, सौंसे कृष्णे कृष्ण। एहि वगएसँ ओ सन्त समाजमे अपन स्थानतँ बनाइए लेलक संगहि भूतकालक कुकाण्ड सभसँ निवृति सेहो भए गेल। ओकरा शास्त्रक कोनो ज्ञान तँ छलैक नहि, मुदा आगन्तुक भक्त सभ अपनेमे ततेक फिरसान रहैत छल जे बिना किछु सोचने विचारने भजनानन्ददासक पैरपर खसैत छल आओर कल्याणक हेतु, नाना प्रकारक कष्ट सभसँ मुक्तिक हेतु हुनकर प्रार्थना करैत रहैत छल। ओहि क्रममे कतेको भक्त तँ अपन धन-सम्पत्ति धरि दान कए हुनकर पक्का चेला बनि गेल छल।

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२३.

अगिला बेर खबासिनी जल्दीए चंगेरा लए आबि गेलि। ओकरा माए ततेक ने कहलकै जे ओहो तैयार भए गेलि। उठेलक चंगेरा आओर हमर सासुर दिस विदा भेलि। ओकरा अखन आबक इच्छा नहि रहैक, कारण ओकर बेटी नैहर आएल रहैक आओर कए दिनसँ नातिक पेट झड़ैत रहैक। पाँच वर्षक नातिक संगे ओ दिन-राति प्रशन्न रहैत छलि। ओकर अस्वस्थतासँ खबासिनीकेँ दिक्कत भए गेल छलैक। मुदा हमर माए नहि मानलकै आओर नातिकेँ गामक डाक्टरसँ इलाजोमे मदति कए देलकै।

खबासिनीकेँ अबिते हमरा बहुत प्रशन्नता होइत छल। नैहरक सभ समाचार तँ ओ दैते छल, संगहि एहूठामक गतिविधि सभमे ओ बहुत रूचि लैत छल। एहि बेर ओकरा जल्दी अएबाक कारण छल जे माए एकटा खराप सपना देखलक। ओ रातिएमे जोर-जोरसँ चिकरए-भोकरए लागलि। सौंसे ऑंगन लोक भरि गेल। सभ एतबे पुछैक जे एतेक रातिमे हुनका की भए गेलनि? भेल-तेल तँ किछु नहि रहैक मुदा सपनाकेँ ओ सच बुझि लेने छलि। सपना की देखलक से ककरो कहबे नहि कहैक।

खबासिनी हमर नैहरक खिस्सा सुनबैत-सुनबैत रमणक चर्चा करए लागलि। ओ कलक्टर भेलाक बाद गाम कमे काल जाइत छल। बेसी काल दड़िभंगेसँ घुरि जाइत छल। तथापि पैघ लोकमे सभक अनायसे रूचि भए जाइत छैक। खबासिनीक मुहेँ रमणक नाम खसिते हमर उत्सुकता बढ़ि गेल। की बात भेलैक जे एहि बेर ई अबिते रमणक चर्च कए रहल अछि?

हमरा उत्सुक देखि खबसिनी परिछेलक जे रमणक घरवाली ओकरा छोड़ि देलक। कारण पूछलापर ओ किछु बजितेनहि छल। बहुत प्रयास केलापर ओकर मुँह खूजल।

कहॉं दनि रमण जखन इंगलैंडमे पढ़ाइ करैत रहए तँ ओहिठाम एकटा मेम साहेबसँ लकड़ी लागि गेलैक। से ततेक परमान चढ़लैकजे रमण चर्चमे जा कए पूजा-पाठ कए लेलक। ओइ अंग्रेजनिऑंकेँ पता नहि चलए देलकै जे रमणक बिआह पहिनहिसँ भेल अछिमुदा ओहो अन्हरा गेल रहैक। ऑंखि मुनि देलकै। रमण कलक्टरीक परीक्षा पास कए अपन देश लौटए लागल तँ ओहो पछोड़ धए लेलकै। कतबो प्रयास केलक जे ओ ओतहि रहि जाए, से ओ टस सँ मस नहि भेलैक।

रमणक तँ सिटीपीटी गुम्म भए गेलैक। अपना ओहिठाम अंग्रेजनिआँकेँ लए कोना जाइत? की ओकर पहिल पत्नी ई बर्दास्त करत? कृत्घन्ता तँ ओ कइए चुकल छल। ओकरा इंगलैंड जेबाक खर्चा ससुर अपन खेत बेचि कए केने रहथि। दू साल धरि मासक मास ओ इंगलैंड टाका पठबैत रहलाह। संगहि अपन बेटी ओ नाति, नातिनक भरण-पोषण करैत रहलाह, एहि उमीदमे जे जमाए बड़का हाकिमभए जेथिन तँ बेटीक सुख-सुविधा, मान-सम्मानक पराकाष्ठा भए जाएत। अपन संतानक सुख के नहि चाहैत अछि? ताहि लेल जँ कनेक कष्टो होइक तँ लोक सहि जाइत अछि।

मुदा रमण तँ सभटा पर पानि फेरि देलाह। सिगरेट, सिगार ओ विदेशी दारूक संग अंग्रेजी भाषी कनिआक चस्का पड़ि गेलिन। आब तँ वएह सभ हुनकर जिनगी भए गेल अछि। भोरेसँ तरह-तरहक नशाक सेवन करैत अंग्रेजनी संगे रंग-रभस करैत रहैत छथि। कहि नहि कलक्टरीक काज कोना करैत छथि?

मुदा काजमे ओ पक्का रहथि। अंग्रेजक स्वामी भक्त रहथि। ताहिसँ अंग्रेज पत्नीओ लए अनने रहथि। एहि बातसँ तँ अंग्रेज सभ बेहद प्रशन्न भेल रहए। गाहे-बगाहे हुनक अंग्रेज पत्नी (एंगल) सँ सम्पर्को ओ सभ करैत रहैत छल। अंग्रेजकेँ आओर चाहिऐ की? ओ सभ पिट्ठू, अन्धभक्त अधिकारी तकैत छल जे सुख, सुविधा ओ सोनाक टुकड़ीक लालचमे अपनहि देश ओ धर्मसँ दगाबाजीकए सकैत छल आओर करितो छल, रमण ओकर सबहक फर्मामे एकदम फिट कए गेल छल। उपरसँ अंग्रेजिनीक आनि कए सोनामे सुगन्ध कए लेने छल।

ई बात नहि छैक जे अंग्रेज सरकार ओकरापर ऑंखि मूनि विश्वास कए लेने छलैक। ओकरो चारूकात जासूस लागल रहैत छलैक। एहि बातक ओकरा पक्का सबूत तखन भेटल जखन प्रगतिशील विचार मंचक नायक रामकुमारक ओकरा घर अएलाक तुरन्त बाद कमीश्नर साहेबक फोन आबि गेलैक। ततबे नहि ओकरासँ विस्तृत आख्या सेहो मांगल गेल। रमणकेँ जवाब दैत-दैत पराभव भए गेल छल।

खबासिनीक मुहेँ एतेक रास गप्प सुनि हम पहिल बेर छगुन्तामे पड़ि गेल रही। खबासिनी कतेक दिन रहितए? ओकरा अपन काज सभ मोन पड़ए लगैक आओर तखनसँ आपस हेबाक ब्योंतमे लागि जाइत। ओ जखन गाम जाए लागलि तँ रमणक परिवारक की कोना भेलैक, तकर सभटा जानकारी अगिला बेर आनए हेतु कहि ओकरा विदा कएल।

खबासिनीक आबाजाही बनल रहलासँ हमरा तँ मोन लागिए जाइत छल, हमर माएकेँ बड़का उसास होइक। नान्हिटा बच्चासँ हम जबान भए गेलहुँ, मुदा माएक हेतु तँ जेना दुधपीबे रही। सही कहल गेल अछि माए, माए होइत अछि..! मुदा हमर माएक तँ हम एकमात्र आश रहिऐक आओर सेहो कनीकेटामे ओकरासँ फराक एकदम नव लोकक संग सासुर बसए लागल रहिऐक।

क्रमश: सासुर घरे लागए लगलैक। जुड़ल अटल घर रहैक। जमीन-जालसँ नीक उपजा भए जाइक। दिन कोना बीति जाइक से पतो नहि चलैक। परिवारमे नव-नव बच्चा सभ अबैत गेल। बेटा, बेटी सभसँ घर भरि गेल। हमर ससुर एहि बातसँ बहुत खुश रहथि।

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२४.

ओहि समयमे स्वतंत्रता आन्दोलन जोड़ पकड़ने छल। गामे-गाम लोक फिरंगीसभक खिलाफ नारा लगबैत छल। कोनो इलाकामे जनाधार पार्टीक बर्चस्व तँ कतहु प्रगतिशी विचार मंचक। गरम सिंह गुटक डकैत सभ जे जीबित रहि गेल से अधिकांश प्रगतिशील विचार मंचमे सक्रिय भए गेल तँ किछु गोटे वृन्दावन बासी भए भजनानन्ददासजी महराजक सेवक भए बेस मोट-सोंट भए गेल। नाना प्रकारक चानन-तिलक, गरामे तरह-तरहक रूद्राक्ष ओ हाथ-सँ-पैर धरि सुसज्जति पीताम्बरी पहिरने ओकर सभक शोभा तँ देखैत बनैत छल।

दिन भरि ओकर सभक आश्रममे एक तरफ किर्तन तँ दोसर तरफ भन्डारा चलैत रहैत छलैक। शिष्यक संख्यामे निरन्तर वृद्धि भए रहल छलैक। आश्रममे पैसा, रूपैआ तँ जेना झहरैत छल। गनबाक पलखति नहि रहैक। तेँ चारिटा मुस्टंड ओहि टाका सभक देखभालमे मुस्तैद छल।

आश्रमकधनबल, जनबलक लगातार होइत वृद्धिसँ भजनानन्ददासजी निरन्तर आनन्दमे रहैत छलाह। साक्षात कृष्णक स्वरूपमे जखन ओ भक्तक समक्ष उपस्थित होइतथि तँ आश्रमवासी विधबा भक्तगण सभकेँ तँ भक्तिकज्वारभाटा उठि जाइत छलनि। कतेको भाव विह्वल भए नृत्य करए लागथि। कतेको भजन करए लागथि। ककरो-ककरो तँ जेना भजनानन्द स्वामीमे साक्षात् कृष्णक दर्शन होमए लागए आओर ओ सभ हुनकर पैरपर दंडवत खसि पड़ैत।

झालि-मृदंग, ढोलक संग कृष्णक रासलीलाक अनुपम दृष्य देखए हेतु कतए-कतएसँ भक्त सभ आबि जाइत छलाह।

एहि प्रकारक भक्तिरसमे सराबोर लोककेँ माथाक कोन काज? ओ सभ अन्धभक्त भए गेल छल। भजनानन्ददासक हेतु सर्वस्व तन, मन, धन अर्पित छल। आखिर, सभकेँ मुक्ति तँ चाहबे करी। भवजालसँ दूर हटि कए स्वर्गक द्वार खुजि रहल छलैक। ताहि पथकेँ चलिते-चलिते भक्त सभ अपन धन ओ समस्त सम्पदा स्वत: अर्पण करबाक हेतु आतुर भए गेल छल।

आब तँ बस एकटा आदेशहोइक आओर ओ सभ अपन नगद, गहना, जमीन, जायदाद, सभ भजनानन्द स्वामीकेँ समर्पित करए लागल। मुदा भजनानन्दजी तँ कथुमे हाथो नहि लगबैत छलाह। सभकाज हुनकर मुस्टंड सभक मार्फत भए जाइत छल। बहरिआ सभ बुझि नहि रहल छल जे आखिर भए की रहल छल?

प्रगतिशील विचार मंचक किछु कार्यकर्तासँ जनाधार पार्टीक लोक सभसँ कोनो-कोनो बातपर बाद-विवाद होइते रहैत छल। पहिने तँ ई बात गाहे-बगाहे होइत छल मुदा किछु दिनसँ एकर रफ्तार बढ़ि गेल छल। जनाधार पार्टीक नेतृत्वक चिन्ता बढ़लजा रहल छल मुदा ओ सभ किछु कए नहि पाबि रहल छलाह।

हारि कए ओ सभ प्रगतिशील विचार मंचक संग बैसार केलाह। उद्देश्य ई जे गप्प-सप्पसँ समस्यासभक समाधान कएल जाए। जनाधार पार्टीक नेता सभ अपना भरि सभ कोशिश केलाह मुदा प्रगतिशील मंचक लोक एहि बातपर अड़ि गेल जे स्वतंत्रतासँ बेसी जरूरी सामाजिक परिवर्तन थिक। शोषण मुक्त समाजक बिना स्वतंत्रताक लाभ किछु गोटे धरि रहि जाएत। अधिकांश ओहिना रहि जाएत। गप-सप्प होइते छल कि आसपासमे जोरदार धमाका भेलैक।

अफरा-तफरीक महौलमे के कतए गेल, ककर की हराएल, ककर जान गेल, के मरि गेल किछु नहि बुझाएल। के साजिस केलक तकर किछु अनुमान नहि लागि रहल छल। जनाधार पार्टीबला सभ प्रगतिशीलमंचपर आरोप लगा रहल छल जखन कि ओ सभ अपनाकेँ निर्दोष कहैत छल। क्यो-क्यो कहैक जे एहिमे फिरंगीजासूसक हाथ भए सकैत अछि।

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२५.

अचानक भेल बिस्फोट ततेक सशक्त छल जे आस-पासक मकान सभ हिलि गेल। कैटाक खिड़की, केबाड़क शीशा चूर-चूर भए गेलैक। जनाधार पार्टीक प्रान्तीय प्रमुख सहित कैटा स्थानीय नेता खूनसँ लतपथ पड़ल छलाह। प्रगतिशील विचारमंचक कार्यकर्त्ता सभ सेहो घायल रहथि मुदा अपेक्षाकृत कम। संयोगवश राजकुमारकेँ दहिना पैरमे मामूली चोट आएल छल। ओकरा प्राथमिक इलाजक बाद अस्पतालसँ छुट्टी भए गेलैक। गम्भीर रूपसँ घायल सभकेँ अस्पतालमे भर्त्ती कएल गेल। ओहिमे जनाधार पार्टीक प्रान्तीय प्रमुखक हालत बहुत गम्भीर छल।

देश-विदेशमे ई समाचार पसरि गेल। फिरंगी सभकेँ मौका भेटलैक। आनन-फाननमे प्रगतिशील विचार मंचपर प्रतिबंध लगा देल गेल। ओकर कार्यकर्त्ता सभकेँ हिरासतमे लए लेल गेल। मुश्किलसँ राजकुमार बँचि कए भागल।

असलमे फिरंगी सभ बहुत दिनसँ प्रगतिशील विचारमंचसँ तमसाएल छल। कखन ओ सभ सरकारी असहयोगक बाबजूद तेजीसँ देश भरिमे पसरि रहल छल। फिरंगी सभकेँ ओ चुनौती दए रहल छल।

रॉंची मनोचिकित्सालयमे भर्तीक बादसँ क्यो मास्टर साहेब वा पुष्पाक हाल-चाल लेबए नहि गेल। ओ सभ जीबए, मरए तकर ककरो चिन्ता नहि। ओहिठाम एहेन सैकड़ो एहन मनोरोगी छलाह जे आब स्वस्थ भए गेल रहथि मुदा हुनकर परिवार अपना ओहिठाम नहि लए जाथि। ओकर सम्पत्तिकेँ हरण कए निश्चिनत भए गेल रहथि। मनोरोगी अस्पताल काँकेक स्थिति भयाबह छल। क्यो रोगी बड़बड़ा रहल अछि तँ किओ गुम्म पड़ल अछि। क्यो-क्यो बहुत आक्रमक छल। मनुक्ख देखितहिं चिकड़ए लगैत छल। सभ जानवर जकाँ जीबि रहल छल।

बिस्फोटक बाद राजकुमार अस्पतालसँ घसकल। देखलकै जे पुलिस ओकर गुटक लोकसभकेँ ताकि रहल अछि। कै गोटा पकड़ल गेल छल। ओ जान-बेजान ओहिठामसँ भागल आओर घुरि नहि तकलक। राते-राती बस पकड़ि रॉंची पहुँच गेल। ओतएसँ काँके मनोचिकित्सालय पहुँचल। ओतए पहुँचतहि अपन माएकेँ ताकए लागल। पुष्पाक हालत ठीक नहि छल।

मास्टर साहेब पूर्ण स्वस्थ भए गेल रहथि। राजकुमारकेँ देखितहि चिन्हि गेलखिन। भाव विह्वल भए कानए लगलाह। जल्दीसँ जल्दी घर आपस जाए चाहैत छलाह। अस्पताल प्रशासनसँ गप्प कए रामकुमार हुनका ओहिठामसँ छुट्टी करओलक। मास्टर साहेबक गाम विदा कए राजकुमार माएक जिज्ञासामे फेर अस्पताल पहुँचले छल कि पुलिसकेँ कतहुँसँ ओकर हवा लागि गेलैक पुलिस ओकरा तकैत-तकैत रॉंची पहुँच गेल छल। पुलिसकेँ पछोड़ करैत देखि ओ भागबाक प्रयास केलक मुदा पुलिस चारूकातसँ घेरि लेलकै। ओ भागि नहि सकल। पकड़ा गेल।

राजकुमार पुलिसकेँ बहुत हाथ-पैर जोड़लक जे ओकर माए अस्पतालमे भर्ती अछि। ओकर हालत ठीक नहि अछि, मुदा ओ सभ किछु नहि सुनलकै। थोड़कालमे राजकुमारकेँ लए पुलिस अज्ञात स्थान दिस चलि गेल।

मास्टर साहेब बहुत दिनक बाद अपन गाम पहुँचलाह। किछु गोटे तँ हुनका चिन्हिओ नहि सकल। आकार, प्रकार सभ बदलि गेल छल। कृष्णकाय, दप-दप करैत मुखारविंद ओ तेजस्वी संभाषणसँ ओ अखनहुँ लोककेँ प्रभावित कए लेने छलाह। थोड़बे कालमे सौंसे गामक लोक जमा भए गेल।

मास्टर साहेब सभसँ ततेक नीकसँ गप्प-सप्प केलथि जे लगबे नहि करैक जे ओ काँकेसँ इलाज कए लौटलाह अछि। मुदा किछु लोककेँ अखनो चिन्ता होइक जे कहीं ओ दोबारा ओही हालमे ने पहुँचि जाथि। ताहि हेतु ओ सभ शुरूएसँ सावधान भए गेल। ओ सभ मास्टर साहेबक शुभचिन्तक एवम् निकट सम्बन्धी छलाह। अस्तु, एहि बातक हेतु सचेष्ट रहथि जे हुनका कोनो प्रकारसँ मानसिक दबाब नहि पड़नि।

मास्टर साहेब जखन अपन घर आपस अएलाह तँ कनी काल तँ गुम्म पड़ि गेलाह। फेर आगू बढ़लाह। घरसँ एकटा युवक बहराएल। ओकरा देखिते मास्टर साहेब चिकरि उठलाह-

किशोर!तूँ कतए छलह एतेक दिन?”

मास्टर साहेबक हिसाबे तँ ओ डकैतक गिरोह द्वारा मारल गेल। माएक संगे डकैत सभ ओकरो मारि देलक। मुदा क्यो एहि बातपर ध्यान नहि दए सकल जे घटना स्थलसँ मात्र मास्टर साहेबक पत्नीक लहास भेटल छल। किशोर तँ कतहुँ निपत्ता भए गेल छल।

भेलैक ई जे डकैत सभ धोखासँ परिस्थितिवश मास्टर साहेबक घरमे फसाद कए देलक। जाबे ओकरा सभकेँ हालत काबूमे अएलैक, मास्टर साहेबक पत्नी तँ दुनिऑंसँ जा चुकल छलि। मुदा किशोर बचल छल। ओकर चोट बहरिआ छलैक। डकैत सभ ओकरा उठौने-पुठौने सरकारी अस्पताल लग छोड़ि देलक। संयोग रहैक जे ओहिठामसँ अस्पतालक डाक्टर जाइत रहए। ओ ओकरा उठा-पुठा कए अस्पतालमे भर्ती कए देलक। ओ मामूली इलाजक बाद बचि गेल। जीबि तँ गेल मुदा ओकरा किछु मोन नहि पड़ैक। स्मृति क्षय भए गेल रहैक। एहि स्थितिमे ओ अस्पताल छोड़ि कतहु चलि गेल।

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डॉ. योगेन्द्र पाठक वियोगी

उपन्यास- हमर गाम

 

8. लम्बोदर

मूल नाम: दरिद्र नारायण झा

पिताक नाम: पलटू झा

जन्म तिथि: अज्ञात

मृत्यु: पाँच वर्ष पहिने

उपलब्धि: लम्बोदर नाम गुण पैघ उदर बला छलाह। हमहूँ देखने छिऐनि हुनकर शरीर। कण्ठसँ डाँड़क बीच मात्र एक तिहाइमे छाती आ दू तिहाइमे लम्ब उदर। से कोनो पैघ धोधि फूटल नहि, सपाट। आइ कालि हीरो सब सिक्सपैक चमकबैत रहैत अछि मुदा लम्बोदरकेँ छातीआ पाँजरक सबटा हाड़ लोक सौ मीटर दूरोसँ गनि सकैत छल। हुनका बुझलो नहि छलनि जे ई शारीरिक सौष्ठवक विशेषता छिऐ।

वृत्तिएँ लम्बोदर मरणोपरान्तक संस्कार करबैत छलखिन।आ पोखरिपर भोजन करब हुनक एहि वृत्तिक अंश छल। मुदा एक बेरक खिस्सा जे बूढ़ लोक कहैत छथि से अद्भुत छल।

लम्बोदर अपन जजमनिकामे कोनो गाम गेल छलाह। ओतए चूरा-दही भोज छलैक। इन्तजाम तऽठीके छलैक मुदा हिनका सबहिक भोजन बेर किछु कुव्यवस्थाक कारण दही कने कम पड़ि गेलै कारण पोखरि पर सामान हिसाबे सँ पठाओल गेल छलै। लम्बोदर लगलाह अखरा चूरा फाँकए। जाबत घरवारी दहीक व्यवस्था केलनि ताबत ई करीब पाँच सेर चूरा सधा देलखिन। आब हाल ई छल जे जाबत दही आबए ताबत हिनका पातमे चूरा सधि जाए, ई छुच्छे दही सुड़कथि आ तकर बाद फेर अखरा चूरा फाँकथि। ई अपना दूनू कात माटिपर चेन्ह दऽकए आन लोककेँ उठि जेबाक संकेत देलखिन आ अपने खाइते रहलाह। जखन करीब एक बोरा अखरा चूरा आ चारि तौला दही सधा देलनि तखन घरवारी हाथ जोड़ि कए ठाढ़ भऽगेलखिन। तैयो ई ढकार नहिए लेलनि मुदा परिस्थितिकेँ बूझि घरवारीकेँ कहि देलखिन-

“अहाँ पार उतरि गेलहुँ, हम आब तृप्त छी।”

एतबा कहि ओ उठि कए हाथ धोलनि, पान सुपारी लेलनि आ दस किलोमीटर टहलैत टहलैत गाम आबि गेलाह। कियो कखनहु हुनकर पेट उठल कि फूलल नहि देखलक। अगिला दिन लम्बोदर फेर कोनो भोज खेबा लेल तैयार। हिनके भोजन देखि ने कियो फकड़ा बनौने छल –

पाँच पसेरी अखरा चूरा, दही छाँछ भरि जलखै जकरा

की हैत चटने पाभरि जोड़न? ऊँटक मुहमे जीरक फोड़न !

 

हमरा अपना गाममे हुनका के खुअबितए? मुदा ओ परिस्थितिकेँ बुझैत छलखिन आ गामक भोजमे कहियो छूटल घोड़ा जकाँ व्यवहार नहि केलनि।

हमरा गाममे किएक ककरो बूझल रहतैक जे गिनीज बुकमे हुनकर नाम रेकॉर्डमे लिखबितए। हमसब एहि गौरवसँ चूकि गेलहुँ तें हम नियारल जे अपन संकलनमे हुनकर चर्चा जरूर करब।

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9. नटवर लाल

मूल नाम: जयन्त कुमार लाल दास

पिताक नाम: शिव मोहन दास

जन्म तिथि: सन उनैस सौ अठतालीस के चौरचन दिन

उपलब्धि: नटवर लालक पिता अल्प वयसमे मरि गेलखिन। माताक एकमात्र सन्तान ई गामक बिगड़ल छौंड़ा सब के संगतिमे फँसि गेलाह। यद्यपि हमरा गाममे बीएक असफलताक बाद सब गार्जियन अपन धियापूताकेँ स्कूल जेबासँ परहेज करबए लागल मुदा जयन्त कुमार लाल दास स्कूल गेला जहिना कि हिनका टोलक किछु आर बच्चा सब करैत छल। कहुना अठमा तक घुसकला तकर बाद हाथ उठा देलनि।

बच्चहिंसँ हिनकामे विशेष लूरि छलनि लोककेँ ठकबाक। पहिने तऽबहुत दिन तक माएकेँ ठकलनि आ मटिकोरबा गामक हाटपर झिल्ली कचरी बतासा लड्डू खाइत रहलाह। तकर बाद अनकोपर अपन मंत्रक प्रयोग केलनि। लम्बोदरक पितियौतकेँ जजमनिकामे भेटल रंगल धोती सब ई कामति टोलक लोककेँ किना दैत छलखिन, बेसी दामपर जे तोरा रंगक खर्चा बचि गेलहु, आ धोती बलाकेँ कहि दैत छलखिन जे रंगल धोती कियो नहि कीनत, ओ तऽधन्य कहू जे हम एक गोटेकेँ फुसला कए राजी केलहुँ। धोती बेचनिहार कहियो नहि बुझलनि जे के किनलक आ कीननिहार कहियो नहि बुझलनि जे ककर धोती ई किनलक। एही तरहेँ पुरना किताब विद्यार्थीसँ लऽ कए ओकरा नवका भावें बेचथि। एहि व्यवसायमे हिनका नीक आमदनी होमए लागल। अपने ई लील टिनोपाल देल नीक धोती गंजी पहिरए लगलाह।

एहि बीच किशोर वयसमे प्रवेश करिते हिनक आदति सब बिगड़ए लागल। ई सुनसान गाछी बिरछी आ पटुआ कुसियारक खेतमे शिकार करए लगलाह। हाथमे पाइ रहितहि छलनि से शिकार भेटिए जाइ छलनि। सब गाममे सब तरहक लोक होइ छै आ हमरो गाम एहिसँ बचल नहिए छल। मुदा जखन एक गोटेकेँ किछु भऽगेलै आ ओकर बाप हिनका तंग करए लागल बियाह कऽलेबा लेल तखन ई पहिल बेर डरा कए गामसँ भागि गेला।

छओ मास बाद घुरला तऽमाएकेँ सब बात बुझबामे आबि गेल छलनि। ओ बेचारी नीक रस्ता धेलनि आ हिनकर बियाह करा देलखिन। नटवर लाल पत्नीमे रमि गेला। साले साल पुत्र रत्नक बरखा होमए लागल। तेरह साल पुरैत पुरैत हिनका लग छोट पैघ तेरहटा बच्चा छल– एकछाहा पुल्लिंग। घरमे जगह तऽनहिए छलनि, बुतातोपर आफत आबि गेलनि। ताबत माताराम उपरक रस्ता धेलनि आ ई लगला पुस्तैनी जायदादकेँ बेचि गुजर चलबए।

एहि बीच हिनकर भाग्य जागल जखन मात्रिकक एक गोटे बैंक मनेजर बनि कए राजनगर एलखिन। हिनकर दुर्दशा देखि ओहि बेचाराकेँ दया लागि गेलै आ हिनका बैंकमे चपरासीक नोकरी भेटि गेलनि। आब की छल? राति दिन हिनका आङ्गनसँ माछक सुगन्ध उठए लागल।

बैंकमे पहुचि नटवर लालकेँ अपन असली रूप देखेबाक अवसर भेटि गेलनि। हमरा गामसँ राजनगर दस किलोमीटर। ताबत ने रोड नीक भेल छलै आ ने टेम्पूक चलन भेल छलै। ई लोककेँ फुसिया फुसिया बैंकमे खाता खोलबौलनि आ तकर बाद ओकरा सबकेँ लघु बचत योजनासँ जोरि नित्य साँझमे एकटकही दुटकही, जकरा जेहन जुड़ै, से जमा करए लगला। पासबुक बनि गेलै मुदा सबटा पासबुक ई अपनहि संग राखथि। लोककेँ विश्वासमे लेने। जरूरति पड़लापर सौ पचास उधार सेहो दऽदैत छलखिन ई कहि जे बैंकसँ लोन भेटलहु। लोक लोन सधबए लागल आ अगिला किस्त उठबए लागल।

एहि बीच ई गामक संचित टाका निजी काजमे लगाबए लगला। पासबुकपर किछु चढ़ै नहि। लोककेँ किछु बुझबामे अबै नहि। प्रायः पाँच साल तक ई खेला चलैत रहल। कियो यदि कहियो पासबुकक चर्चो करए तऽई बहन्ना बना देथि जे बैंकमे राखल छै। दश किलोमीटर बिना कोनो साधन के चलि कए जाएब कठिन छलै आ लोक अनठा दैत छल।

एक बेर ककरो बेटीक बियाह लेल पाँच हजार टाका निकासी करबाक जरूरति भेलै। ओकरा हिसाबें जतेक टाका ओ जमा करैत गेल छल ओहिसँ पाँच हजार जरूरे उठाओल जा सकैत छलै। नटवर लाल किछु दिन टालमटोर करैत रहला। मुदा बेटी बला कते दिन मानितए? अन्तमे हारि कए ओ एक दिन पहुँचि गेल राजनगर बैंक।

तकर बाद जे हेबाक छलैक सएह भेलै। सबटा भेद खुजि गेलै आ बेटी बलाक खातामे मात्र अढ़ाइ सौ टाका भेटलै। गामक प्रायः सब के टाका डुबलै। सब अपन कपार पीट कए रहि गेल।

नटवर लालपर विभागीय कारवाइ भेलनि, ओ जेल गेला। एहि बीच तेरह पुत्र सेहो बढ़ैत गेलखिन आ सौंसे भारतमे छिड़िया गेलखिन। हुनका लोकनिक लेल बापक पापक बीच गाममे रहब कठिन भऽगेलनि। पत्नी सेहो अस्वस्थ रहए लगलखिन आ करीब चारि सालक बाद स्वर्ग गेलीह। पेरोलपर आबि नटवर लाल पत्नीक संस्कार केलनि।

करीब सात साल जेलमे सरलाक बाद ओ गाम घुरला। मुदा हुनका मुखरापर कोनो ग्लानिक भाव कहियो नहि एलनि। एखन गामे रहैत छथि आ बेटा सबहक पठाओल टाकापर गुजर करैत छथि।

कोशिश तऽओ एखनहु करैत छथि लोककेँ ठकबाक, पुरान आदति जे छनि, मुदा आब लोक हिनका चीन्हि गेल अछि से हिनका नहि सुतरै छनि।

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जारी....

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