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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)2004-2018.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

 वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

१.रबीन्द्र नारायण मिश्र- दूटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उपन्यास नमस्तस्यै (आगाँ) २. डॉ. योगेन्द्र पाठक ’वियोगी’- उपन्यास- हमर गाम (पहिल खेप)

रबीन्द्र नारायण मिश्र

विविध प्रसंग पोथीसँ दूटा आलेख

कलनाबला बाबा

मिथिलांचलमे रहनिहार सायदे किओ एहन हेताह जे कलनाबला बाबाक नाम नहि सुनने होथि।अत्यंत साधारण लिवास मे निरंतर प्रसन्न ओ कलना मे कतेको साल सँ रहैत छलाह।ओहि समयमे हम कालेजक विद्यार्थी रही।परीक्षा भए गेल रहए।गामपर खाली रही।नौकरी ताकबाक प्रयासमे बहत चिंतित रही।मोन बेचैन रहैत छल।हमर मित्र स्वर्गीय विश्नुकांत मिश्र(लाल बच्चा) बहुत  आस्थावान लोक छलाह। हुनकासंग कए पैरे दुनू गोटे कलना विदा भेलहुँ।

सुनने रहिऐक जे बाबा बहत नियम निष्ठासँ रहैत छथि। जौं हुनका लेल किछु प्रसाद लए जा रहल छी तँ बहुत पवित्रता पूर्वक लए जेबाक रहैत छल।रस्तामे यत्र-कुत्र नहि हेबाक चाही, अन्यथा कहाँदनि अनिष्ट भए जाइत छल। हम सभ तँ खाली हाथेजाइत रही तँ चिन्ताक बात नहि रहए।

कलना बाबा केँ दर्शनहेतु पहिलबेर हम अपन मित्र लालबच्चाक संगे गेल रही।रस्ताभरिपैरे-पैरे गप्प-सप्प करैत हम दुनू गोटे दूपहरिआमे ओहिठाम पहुँचलहुँ।बाबा नान्हिटा फूसक घरमे रहथि।ओहिमे बाँसक फट्टक लागल छल।एक-दू गोटे आओर ओहिठाम बैसल रहथि। बाबा अत्यंत सहज रूपमे सभसँ गप्प-सप्प करैत छलाह।गप्पक क्रममे ओ कहलाह

एकटा सेठ एकबेर हुनका लग आएल आ कहलक जे भगवान झुठ छथि। हम ओकरा कहलिऐक जे तोँही झुठ छैँ।"

ओ कहथिजे हुनका लग लोक कबुला कए लैत अछि आ ओकर अनुपालन नहि करैत अछि जाहि कारणसँ ओकरा अनिष्ट होइत अछि।कैटा भक्त हुनका लेल प्रसाद अनैत छलाह। ताहि काजमे बहुत संयम ओ स्वच्छताक प्रयोजन रहैत छल।बाबाक कहब रहनि जे जौँ क्यो हुनका हेतु अशुद्ध बस्तु अनैत अछि तँ ओकरा अपने अनिष्ट भए जाइत अछि। ताहि प्रसंगे ओ कैटा उदाहरणसभ देलथि।

कलनाबला बाबा सँ हमरा तीन बेर भेँट भेल। दू बेर तँ हुनके कलना आश्रम पर आ एक बेर ओ हमरा ओहिठाम आएल रहथि तखन। दुनू बेर कलना हम अपन मित्र लालबच्चाक संगे पैरे गामसँ कलना गेल रही।

एकबेर हम जखन बाबाक दर्शनक हेतु गेलहुँ तँ रस्तामे मोनमे भेल जे बाबाक एतेक नाम सुनैत छिअनि, किछु सद्यः देखतिऐक। बाबाक ओतए हम दुनूगोटे पहुँचलहुँ तँ बाबा कहलाह जे आइ रहि जाह। हमसभ हुनकर आज्ञानुसार रुकि गेलहुँ। रातिमे सामनेक पोखरिक घाटपर हम सभ सुति गेलहुँ।अर्धरात्रिमे देखैत छी जे एकटा बाँस हीलि रहल अछि आ ओकर फुनगीपर धोती सुखा रहल अछि। डर भए गेल जे की बात छैक? उठिकए ठाढ़ भेले रही की देखैत छी जे लगेमे बाबा हँसि रहल छथि आ हुनकर हाथमे धोती छनि।बाबा किछु-किछु कहबो केलाह।

एकबेर हमर अनुज(सुरेन्द्र नारायण मिश्र) बाबाकेँ अपना ओतए चलबाक हेतु आग्रह केलखिन।बाबा मानि गेलाह। कारसँ बाबाक संगे हमहुँ रही।बाबाक सिपहसलारसब सेहो रहथि।बाबा पहिने गिरजा स्थान गेलाह। ओहिठाम माताक दर्शन केलाह।फेर कार गाम विदा भेल। गाम पहुँचलाक बाद ओ हमरा ओहिठाम चौकीपर बैसलाह।कोनो ओछाओन नहि ओछबए देलखिन। अखरा चौकी पड़ बाबा पड़ल-बैसल रहलाह।ताबे तँ सौंसे गामक लोकक करमान लागि गेल।ततके भीड़ जमा भए गेल जे माइकसँ ओकरा शांत कएल गेल।माइकेपर बाबा किछु उपदेश देलाह।सभकेँ आशीर्वाद देलखिन। हमर अनुज(सुरेन्द्र नारायण मिश्र) केँ आशीर्वाद देलखिन जे तोरा बेटा होइ।से सत्य बेल।हुनका दूटा पुत्र तकर बाद जन्म लेलखिन।कतबो कहल गेलनि ओ किछु नहि खेलथि आ थोड़ेकालक बाद कारसँ आपस चलि गेलाह।

 बाबाक देहपर मात्र एकटा धोती रहैत छल जकरा ओठेहुनधरि पहिरने रहैत छलाह। लोककेँ देखि कए ओ अद्भुत निर्मल हँसी हँसैत छलाह। खेबाक कोनो चिंता नहि रहैतछलनि।नान्हिटा खोपड़ीमे माटिपर बाबा पड़ल वा बैसल रहैत छलाह। ओतहुँ लोक अपन स्वार्थसँ आन्हर भेल हुनका तंग केने रहैत छल।

हौ बाबा!किछु करहक ने...।

जखन बड़तंग कए दैन तँ कहथि-"का कहली? की भैल?"। मुदा जकरा ओ बाक दए दैत छलाह से जरुर उद्धार भए जाइत छल। बाबाक कहब रहैत छलनि जे जँ क्यो किछु कबुला करैत छथि तँ काज सिद्धि भेलापर ओकरा तुरंत पालन करक चाही अन्यथा अनिष्ट होइत अछि।

बाबाक आश्रममे कतेको गोटे रहैत छलाह वा अबैत-जाइत रहैत छलाह। ओहिठाम रहनिहार लोकसभ एकहि साँझ अपनेसँ रान्हि भोजन पबैत छलाह। जखन ओसभ बहुत गोहराबथि तँ बाबा हँसैत कहितथिन –“ ठीक, बनाबभोजन। भोजन जहन बनि कए तैयार भए जाए तखन बाबाक आज्ञा चाहै छल जाहिसँ ओ सभ भोजन शुरु करथि। बाबा किछु बजबे नहि करथि। लैह, आब तँ बड़का विपत्ति। भोजन पड़सल धैल अछि आ बाबाक आदेशक प्रतीक्षा भए रहल अछि। बाबाके ओ सभ गोहरा रहल छथि।बाबा बड़छगुन्तासँ हुनकासभकेँ देखथि। जखन ओसभ बाबाकेँ आग्रह करैत-करैत थाकि जाथि तखन ओ कहि दितथि- "शुरु करह"।एहि तरहेँ बाबा हुनका लोकनिक धैर्यक परीक्षा लैत छलाह।तकरबाद बाबा ओहिठाम बैसल ओकरासभकेँ खाइत देखि बहुत प्रशन्न होइत छलाह।

बाबाक आश्रममे किछु गोठे निरन्तर रहैत छलाह।किछु गोटे अबैत जाइत रहैत छलाह। खिछुगोटेतँ मात्र पेट पोसबाक हेतु ओतएपड़ल रहैत छलाह। कैटा  भक्त बाबा लेल कंबल वा आन-आन चीज-वस्तु अनितथि।बाबा ओकरा छुबितो नहि छलाह। आस-पास रहनिहारसभ ओहि वस्तुसभकेँ लुझि लैत छलाह।बाबा आश्चर्यचकित भए देखैत रहैत छलाह।

बाबाक दरबारमे पैघ सँ पैघ लोकसभ अबैत रहैत छलाह।जौँ बाबाकेँ इच्छानहि होनि तँ हुनकर पट खुजिते नहि छल। जाबे बाबा जीबैत रहलाह, ओहि परिपट्टाक लोकक अपन आशीर्वादसँ कल्याण करैत रहलाह। बिना कोनो लोभ लालच केँ संपूर्ण जीवन ईश्वरक आराधनामे  लगा देलाह।हुनक निधनसँ एकटा महान संत एहि संसारसँ मुक्त भए गेलाह संगहि बहुतरास लोकक मोनमे अथाह श्रद्धा छोड़ि गेलाह।हुनका शत-शत प्रणाम!


 

 

डॉ. सुभद्र झा (संस्मरण)

इलाकाक चर्चित व्यक्तित्व छलाह-डा० सुभद्र झा। धोती, मिरजइ सन कुर्ता पहिरने अत्यन्त सरल,  साधारण लिबासमे डाक्टर साहेब अड़ेर हाट चौकपर बरोबरि देका जएतथि। गप्प-सप्पमे ओ अपन बिचार अति स्पष्टतासँ रखैत छलाह।ताहि क्रममे जौं कने-मने विवादो भए गेल किंवा क्यो कटाक्षो कए देलक दँ कोनो बात नहि।

मिथिलेटा नहि, अपितु समस्त भारतवर्षमे तत्कालीन विद्वान लोकनिमे हुनकर प्रतिष्ठा छलनि।हुनकर विषयमे किछु कहब आ लिखब कठिन काज अछि तथापि स्मरणमे किछु घटना अछि जे लिखि रहल छी।

घटना सन् १९६५-६६ ई०क थिक। नवतुरियासभ गाममे एकटा पुस्तकालय स्थापित करए चाहैत चलाह।किछु दिनक प्रयासक वाद किछु पोथी, किछु पैसाचंदा भेल।किछु आलमारी सेहो बनाओल गेल।तकर बाद भेलैक जे ओकर उद्घाटन कएल जाए। उद्घाटन के करताह? आपसी विचार- विमर्शक बाद डा० सुभद्र झाक नाम पर आम सहमति भेल।डा० सुभद्र झा किछु दिन पूर्वसेवा निवृत भए गामे रहए लागल छलाह।आ यदा-कदा हमर गामक चौकपर अबैत-जाइत देखा जाइत छलाह। उद्घाटन कार्यक्रममे डा० सुभद्र झाकेँ सेहो किछु कहबाक आग्रहकएल गेल। बहुत दुराग्रह कएलापर ओ बजबाक हेतु तैयार भेलाह। संक्षिप्त भाषणक क्रममे ओ कहलनि जे एहि इलाकामे अनुसंधानक हेतु पर्याप्त सामग्री यत्र-तत्र पसरल अछि।ओकरासभ केँ एहन पुस्कालयमे सुरक्षित राखल जा सकैत अछि।संगहि कबीरदासपर उपलव्ध सामग्रीक उल्लेख करैत ओ कहलाह जे एहि बातक प्रमाण अछि जे कबीरदास मैथिल छलाह आ मैथिलीमे कतेको रचना कएलनि अछि।

१९७३ ई०मे लगभग एकमास डा० सुभद्र झाक राँची स्थित आवास पर रही। तखन ओ योगदा सतसंगविद्यालयक प्राचार्य रहथि।ओही परिसरमे प्राचार्यक निवासमे ओ रहैत छलाह।हुनका संगे परिवारक आर सदस्य नहि छल।घरक काज करबाक हेतु एकटा नौकर छल। भोजन ओ स्वयं बनबैत छलाह।

प्रातःकाल भात-दालि-आलूक सन्ना बनाबथि। रातुक भोजनक व्यवस्था सेहो तखने कए लेथि।रातिमे बेसी काल आँटाक चोकरकेँ दूधमे उसनि कए खाइत देखिअनि।रातिमे सूतबासँ पूर्व ओ नियमित रूपसँ पढ़ैत छलाह।साँझमे तिन-चारि गोटे बैसि कए शास्त्र चर्चा करैत छलाह।एक दिन साँझमे डाक्टर साहेबक संग कतहु जाइत रही।रिक्साबला सब जतेक पाइ मांगै, से देबाक हेतु ओ तैयार नहि होथि।रिक्सातकैत-तकैत अन्ततः सौंसे रास्ता बिति गेल।

एक दिन एहिना संगेटहलैत रहीतँ साईबाबाक चर्चा उठल।ओ हुनकर बहुत प्रशंसा करथि आ कहथि जे साईबाबा सरिपहुँ सिद्ध पुरुष छथि जकर हुनका प्रत्यक्ष अनुभव तखन भेल रहनि जखन ओ बाबाक आश्रममे सिरडी गेल रहथि। कहलाह जे आश्रममे हुनका पहुँचते देरी बाबा हुनकर मोनक प्रश्नक उत्तर देबय लगलखिन।आरो कएकटा प्रसंगसभ ओ सुनओलथि।

योगदा सतसंग महाविद्यालय नवे बनल छल। डाक्टर साहेब पूर्ण तत्परतासँ ओहि विद्यालयक विकासमे  लागल रहैत छलाह। परिसरमे आश्रमक आबास होइत छल। चारूकात गाछ सभक बीचमे बनल भाषण मंडपसभ।ओही परिसरमे एकदिस आश्रम छल जाहिमे एक दिन माँ आनन्दमयी आयल रहथि।हम डाक्टर साहेबक संगे ओतए रही।माँ आनन्दमयीक अबितहि पूरा हाँलमे शांति पसरि गेल।ओ किछु बजली नहि।चुपचाप सभगोटे ध्यान केलक।कोनो भाषणबाजी नहि भेल।

एकदिन डाक्टर साहेबक डेरापर आंगनमे ठाढ़ रही। हमरा देखि डाक्टर साहेब गंभीर भए गेलाह आ कहला जे नीकसँ पहिरल-ओढ़ल करह।जीवनमे सफलताक हेतु एहिसभकेँ बहुत महत्व अछि।ताहीक्रममे कहलाह जेएही कारणे ओ कएकबेर उच्च पदसभक चयनमे पछड़ि गेलाहयद्यपि ओ पदक हेतु पूर्ण योग्य रहथि।

डाक्टर साहेबक दोसर पुत्र भास्करजी इलाहाबाद विश्वविद्यालयमे जर्मन भाषाक व्याख्याता छलाह। हुनकर डेरापर डाक्टर साहेब अबैत -जाइत रहैत छलाह। सन्१९८३ ई०क गप्प अछि। एकदिन हम हुनका दुनू गोटेकेँ नोत देने रहिअनि। दुनूगोटे कोनो कारणसँ आगा-पाछा भए गेलाह। डा० झा पहिने चलल रहथि। भाष्करजी पाछू चललाह आ डेरापर पहुँचि कएबहुत परेशानीमे रहथि जे आखिर ओ कतए चलि गेलाह। हमसभ गोटे हुनका ताकए लगलहुँ।कतहु नजरि नहि आबथि।रातुक समय छल।भोजनमे विलंब भए रहल छल।ताबत थोड़े कालकबाद मकानक नीचासँ ओ जोर-जोरसँ हमर नाम लए कए चिकरि रहल छलाह।हमरा सभकेँ जानमे जान आएल।पता लागल जे ओ हमर डेरा तकैत-तकैत धोबी घाट चलि गेल रहथि। हमर मकान मालिक धोबी छल आ तकरे अनुमानमे ओ धोबी घाट चलि गेल छलाह।

डाक्टर साहेब अति अध्ययनशील छलाह। जखन कखनो फुरसतिमे रहितथि तँअध्ययन करएलगितथि। एकदिन प्रातः एगारह बजे इलाहाबाद मे भाष्करजीक डेरा पर गेलहुँ। डाक्टर साहेब ओतहिरहथि। कहलाह जे हम एगारह घंटासँ निरन्तर पढ़ि रहल छी।मैथिलीमे शव्दकोशक निर्माणमे लागल छलाह। एकदिन हम डाक्टर साहेबक संगे इलाहाबादमे कतहुँ जाइत रही।रस्तामे पुछलिअनि जे भगवान छथि कि नहि? ओउत्तर देलनि जे ई कहब तँ कठिन अछि जे भगवान छथि कि नहि परन्तु जौँ भगवान छथि तँ बहुत बइमान छथि, कारण दैत ओ कैटा उदाहरण देलनि। जेना पेटमे बच्चाकिएक मरि जाइत छैक? आखिर ओ जन्मसँ पूर्वे की गलती केलक?आ जौँ गलती केलक तँजनमि कए ओकरा भोगए।गप्पक क्रममे ओ कहलाह जे सम्प्रति जीबैत लोकमे बिहारमे संस्कृतक सभसँ पैघ विद्वान छथि।

साहित्य अकादमीक तत्कालीन अध्यक्ष डा० सुनीति कुमार चटर्जीक ओ बहुत प्रशंसा करथि आ कहति जे हमरा लेल ओ भगवाने छलाह।डाक्टर साहेबकसंगे एकदिन टहलैत रही।गप्पक क्रममे ओ अपन प्रवासक दौरान भेल दू गोट घटनाक चर्चा कएलनि। डाक्टर साहेब ट्रेनसँ कतहुँ जाइत रहथि।कोनो टीसनपर गाड़ी रूकल तँ डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्नन ओहिमे सवार भेलाह।डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्नन  बैसबाक हेतु घुसबाक हेतु कहलखिन।डाक्टर सुभद्र झा अड़ि गेलाह एवम् डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्नन केँ जगह नहि देलखिन।राँचीमे गप्पक क्रममे एकदिन डाक्टर साहेब कहलाह जे ओ पुस्तकालयमे नौकरी करैत रहथि।ओही क्रममे हुनकासँ जे श्रष्ठ पदपर अधिकारी छलाहसे हुनकासँ किछु गलत काज कराबए चाहैत छलाह।ओ से करबाक हेतु सहमत नहि भेलाह। ताहिसँ कुपित भएकए ओ अधिकार हिनका बहुत तंग करैत छलनि।डाक्टर साहेबकेँ पता रहनि जे ओ अधिकारी गलत काज करैत अछि। चुपचाप ओकर गलत काज बला कागजातक प्रतिलिपि ओ रखैत गेलाह।पुस्तकक क्रय-विक्रय मे ओ अधिकारी बहुत हेरा-फेरी केने छलाह, जकर कागजी सबूत डाक्टर झा लग छलनि।बादमे एहि बातक आरोप भेलएवम् जाँचक बाद ओ अधिकारी दोषी साबित भेल।अपनाकेँ बचाबक हेतु ओ चाहलक जेपुस्तकालयकेँ जे क्षति भेल रहैक से आपस करी मुदा ओकर परिवारक लोक पैसा आपस नहि कएलक।एहिबात सभसँ दुखी ओ भयभीत भए ओ आत्महत्या कए लेलक।

डाक्टर झा सँ जे  कनी-मनी हमरा संपर्क भेल ओकरा संयोग कहिसकैत छी। बच्चेसँ हम हुनकर नाम सुनैत रही।सौँसे इलाकामे ओचर्चाक विषय रहथि आ छोटसँ पैघ लोकक संपर्कमे सहजतासँ अबैत छलाह।ओ धुनक पक्का छलाह।जाहि काज मे लागि जाथितकरा पूर्ण करबाक हेतु प्राण-प्रणसँ जुटि जाथि। हुनका अपन गाममे गाछ सब रोपबाक इच्छारहनि। कहि नहि, कतए-कतएसँ आनिकए सालक साल ओ आमक गाछ रोपैत रहलाह।

हुनक प्रतिभा ओ विद्वताक वर्णन करबाक कोनो आवश्यकता नहि बुझा रहल अछि।आडम्वर रहित जीवन शैली एवम्अतिशय सहज व्यवहारक संग स्पष्टवादिताक लेल ओ सभ दिन मोन पड़ताह। धोती-कुर्ता पहिरने,  पैरे खेतक आरिए-आरिएचलैत-चलैत पता नहि ओ निरन्तर कोन चिंतनमे ध्यानमग्न रहैत छलाह। अपन मौलिकता एवम् अपन बातकेँ दृढ़तासँ रखबाक लेल ओ सभ दिन मोन पड़ैत रहताह।

 

रबीन्द्र नारयण मिश्रक

दूटा लघुकथा

पंचैती

जमाना कतए चल गेल मुदा गाम-घरक लोक अखनहुँ दू सौ बर्ख पाछा अछि। लोककेँ अखनहुँ चन्द्रमामे एकटा बुढ़िया चर्खा कटैत देखाइत छैक। लोक अखनहुँ ग्रहण लगिते स्नान करए चल जाइत अछि। किएक तँ ओकरा छुति भए जाइत छैक। लोकक संस्कार-संस्कृति सेहो आधुनिक ओ पुरातनक द्वंदक बीच चलि रहल अछि।

पुरना पीढ़ी आ आधुनिक लोकमे अखनहुँ बड़ अन्तर छैक। तेँ एकटा स्वत: सर्वत्र विद्यमान तनाव कोनो क्षण झगड़ाक रूप लए लैत अछि। एही कारणसँ गाम-घरमे पंचैतीक जबरदस्त गुंज़ाइश छैक।

मुरली पाँच भॉंइ छलाह। घरक हिसाब-किताब श्याम रखैत छलखिन। मैट्रिक तक पढ़ल छलखिन। बेस चलाक-चुस्त। लगानीक असूल करबामे पारंगत। हुनकासँ छोट तीन भाए- मोहन, रूदल आ लखन। लखन कमे बएसमे दिवंगत भए गेला। हुनकर एक मात्र पुत्र जीवनकेँ पित्ती सभ पहिनहि फराक कए देलकनि। पाँच बीघा जमीन हिस्सामे पड़लनि। लगानी-भिरानी जे किछुछलनि, सभटा श्याम बैमानी कए लेलखिन। शेष चारू भाएमे शुरूमे तँ खूब भेल छलनि मुदा किछु दिनक बाद रूदलक स्वर्ग बास भए गेलनि। हुनका मात्र तीनिटा कन्या छलनि। तीनूक बिआह पित्ती सभ केलखिन। बिआह करएबाक क्रममे सभटा जमीन तीनू भाए अपना-अपना नामे करा लेलनि। मसोमातकेँ किछु नहि रहि गेल छलैक। गामक किछु फनैत सभ ई गप्प मसोमातक कानमे दए देलकनि। मसोमात तँ ओहि दिनसँ अगिआ-बेताल छथि। एक्को दिन एहन नहि भेल जे हंगामा नहि भेल।

बुध दिन रहैक। गाममे हाट लगैत छलैक। गाम-गामक लोक हाटपर जमा छल। सरपंच साहेब उर्फ पलटू बाबू चिकरि-चिकरि कए सैकड़ो लोककेँ जमा कए लेलनि। सभ गोटे तय कएल जे मसोमातक संगे बड़ भारी अन्याय भेलैक अछि।परिणामत: दोसर दिन तीन बजे सरपंच साहेबक दलानपर पंचैती करबाक निर्णय भेल। 

दोसर दिन दुपहरियेसँ सौंसे गामक लोक सह-सह करए लागल। सरपंचक ओहिठाम बैसारी रहैक।बेर खसैत-खसैत सौंसे दरबाजा लोकसँ भरि गेल। अगल-बगलक गामक प्रमुख-प्रमुख लोक सभ सेहो बजाओल गेल छलाह। मुखियाजी एखन धरि नहि आएल छलाह तेँ ओहि टोलपर आदमी पठाओल गेल। चारि बजैत-बजैत लोकक करमान लागि गेल। सरपंच साहेब अपन स्वागत भाषण कही या जे कही, प्रारम्भ केलनि। मसोमात सेहो कोनटा लागल ठाढ़ि छलीह। चारू भाएकेँ कोनो फज्झति बाँकी नहि रहल। गाम-गामक पंच सभ सेहो छिया-छिया कहय लगलखिन। मुदा श्याम बेस चलाक लोक छलाह। ओ मुखियाकेँ रातियेमे पाँच साए टाका दए अपना गुटमे कए लेने छलखिन। मुखियाजी सरपंचपर कड़कि उठलाह-

ई अन्याय नहि चलत। आखिर तीनटा जे कन्यादान पित्ती सभ केलखिन ताहिमे खर्चा तँ अवश्ये भेल हेतैक। फेर मसोमात तँ असगर छथि। जमीन लए कए करतीह की? बारह मोन खोरिश हिनका अवश्य भेटक चाही। बाजू यौ श्याम बाबू, अपने एहिपर तैयार छी?”

श्याम बाबू स्वीकृतिमे अपन मुड़ी हिला देलखिन।

ई बात सरपंचकेँ एकदम नहि रूचलैक। ओ बमकए लागल। संगे जे ओकर चारि-पाँचटा लठैत सभ छलैक सेहो सभ बमकए लागल। जबाबमे चारू भाए सेहो भोकरए लागल। सरपंचक दरबाजापर बेस हंगामा बजड़ि गेल। अन्ततोगत्वा ई निर्णय भेल जे दूनू गोटे एकादशी दिन पाँच प्रमुख-प्रमुख व्यक्तिक समक्ष हरिवंशक पोथी उठा कए सप्पत खाथि आ ओहीसँ बात फड़िछा जाएत।

प्रात:काल सरपंच साहेबक ओहिठाम गाएक गोबरसँ ठाँव कएल गेल। ओहिपर हरिवंशक पोथी राखल गेल। पाँचो पंच बैसल रहथि। श्याम मोने-मोन खुश छलाह। पता नहि, कतेक बेर ओ एहिना हरिवंशक पोथी उठाए लोकक घर-घड़ारी घोंटि गेल रहथि। हनहनाइत, फनफनाइत अएला आ हरिवंशक पोथी उठा लेलाह। पंच सभ तकैत रहि गेला। मसोमात ओहीठाम अचेत खसि पड़लीह। मसोमातकेँ बारह मोन खोड़िसक अधिकार मात्रक घोषणा पंच समुदाय कए देलक। पंचैती समाप्त भए गेल।

बुधन गामक मानल लठैत छलाह। परमा बाबू बी.डी.ओ. साहेबसँ एकटा चापा कलक व्यवस्था करौने छलाह। कलक तीन-चौथाइ खर्चा सरकारी मदतिसँ भरल जएतैक। बुधन ओ परमा बाबूक घर सटले छल। कल कतए गाड़ल जाए ताहि हेतु जबरदस्त झगड़ा बजरि गेलैक। तय भेलै जे हीरा बाबूकेँ पंच मानि लेल जाए। ओ जे फैसला कए देथिन से मानि लेल जाए। हीरा बाबू प्रतिष्ठित, पढ़ल-लिखल एवम् ओजस्वी लोक छलाह। सम्पतिक नीक संगह कएने छलाह। प्रात: काल ओ घटना स्थलक निरीक्षण कएलाह। बुधन लठैत छल। कखनो ककरो गरिया सकैत छल। बेर-कुबेर ओ लाठी लए कए ठाढ़ो भए सकैत छल। परमा बाबू पढ़ल-लिखल सभ्य ओ शान्त स्वभावक लोक छलाह। परिणामत: हीरा बाबू फैसला कए देलनि जे कल बुधनक घर लगक खाली स्थानपर गाड़ल जाए। बुधन प्रशन्न भए गेलाह। परमा बाबू चुप, समाजक लोक चुप। 

सोमन बाबू कामरेड छथि। गाममे कतहु क्यो कोनो गड़बड़ी करैत तँ ओ अवश्य ओहिठाम पहुँचि जाइत छलाह। गरीब लोक हुनका अपन नेता मानैत छल। अमत टोलीक एकटा स्त्रीगण अपन घरबलाकेँ छोड़ि कए निपत्ता भए गेल छलि। चारि-पाँच दिनुका बाद सौंसे गाममे जबरदस्त हंगामा भए गेल। शोभा बाबू ओहि मौगीक संग निपत्ता। मुदा एहि बेर कोनो पंचैती नहि भेलैक। जे जतहि सुनलक ओ ओतहि गुम्मी लादि देलक। समरथकेँ नहि दोष गोसाई सद्य: चरितार्थ भए गेल। 

जीबछ क अबाजमे बेस टीस छनि। लोक कहैत अछि जे हिनकर पिता बड़ सुखी-सम्पन्न छलखिन। मुदा देखिते-देखिते ओहने दरिद्र भए गेलखिन। ओहि घटनाक पाछू सेहो एकटा पंचैतीक हाथ छलैक। जीबछक पिताक श्राद्धछलनि। गामक प्रमुख-प्रमुख लोकक बैसार भेलैक। जीबछ बाबू सन प्रसिद्ध ओ धनीक लोकक श्राद्धमे कमसँ कम जबार तँ खेबेक चाहैक छलैक। सएह भेलैक। चारि दिन धरि भोज होइते रहलैक। जीबछ एहि काजमे बीस हजार टका घरसँ निकाललाह। दस हजार टका कर्ज लेबए पड़लनि। अमरू दियादे छलखिन। धर दए बिना कोनो हिचकसँ हुनका पैसा दए देलक। काजक बाद कहलक- 

कोनो बात ने। जखन पैसा हो तखन दए देब।

दू साल बीति गेल। जीबछक हालत दिन-दिन बत्तर होइत गेल। तीन सालक बाद अमरू एकाएक चढ़ाइ कए देलक। ओकरा हिसाबे सूद सहित ३५००० टाका कर्ज भए गेल छलैक। अमरूअपन लठैत सभक सहायतासँ ओकर सभटा जमीन जोति लेलखिन। गाममे बेस बबंडर भेल। पंचैती बैसल। सौंसे गामक नीक लोक सभ जमा भेलाह। अमरूक विजय भेल। सभ पंच अमरूक पक्षमे हाथ उठा देलखिन। अमरू सभ जमीन जोति लेलाह। सएह भेल पंचैती। जीबछओही पंचैतीक परातसँ फक्कर भए गेलाह। 

कहबी छैक जे पति-पत्नीक पंचैती नहि करी। कारण कहि नहि, ओ कखन झगड़ा करत आ कखन एक भए जाएत। मुदा आइ-काल्हि एहनो कलाकार सभहक कमी नहि अछि जे दूनू व्यक्तिमे झगड़ा लगा कए मटरगस्ती करैत रहैत छथि। बेरपर पंचैती सेहो कए दैत छथि। बतहु मिसर एहने व्यक्ति थिकाह। पुवारि गामवाली बेस हराहि छलीह। दूनू व्यक्तिमे खटपट होइते रहैत छनि। ओहि दिन पुरवारि गामवाली कतहु हकार पुड़ए गेल छलीह, घुरैत-घुरैत अबेर भए गेल रहनि। घुमैत-फिरैत बतहु बाबू पहुँचलाह। पुरवारि गामवालीक घरबलाकेँ लोक खलीफा कहैत छल। खलीफा दरबाजापर गरमाएल छलाह। बतहु मिसरपुछलखिन- 

की बात छैक? आइ बड़ गरमाएल लागि रहल छी?”

एतबा ओ पुछलखिन की खलीफा अपन घरवालीकेँ एक हजार फज्झति करए लगलखिन। ताहि पर बतहु मिसर टीप देलाह- 

हँ बेस कहैत छी भाए। आइ-काल्हिक स्त्रीगण सभ तँ एहने होइत छैक। हुनका तँ हम जट्टाक घरमे गप्प हकैत देखलियनि अछि।

एतबा गप्प बाजि ओ ओतएसँ हटि गेलाह। 

थोड़ेक कालक बाद पुरवारि गामवाली लौटलीह। दूनू व्यक्तिमे महाभारत जे भेल से देखएबला छल। चारूकातसँ लेाक सभ दौड़ल आएल। पुरवारि गामवाली बजैत रहि गेलीह। अन्ततोगत्वा, खलीफेकेँ लोक उठा कए दोसरठाम लए गेल। दूनू व्यक्ति ओहि दिनसँ फराक-फराक रहए लगलाह। घरमे खान-पान बन्द। बतहु मिसर फेर उपस्थित भेलाह आ खलीफाकेँ कहलखिन- 

भाइ! एहि तरहेँ केते दिन चलत? आपसमे बैसार कए लिअ आ मेल-जोलसँ समय बिताउ।

तय भेल जे काल्हि आठ बजे बैसार होएत। दोसर दिनबैसार भेल। दूनू व्यक्ति अपन-अपन पक्ष कहए लगलखिन। बहुत रास गप्प-सप्प भेलाक बाद बतहु मिसर ई तय कए देलखिन जे आइ दिनसँ खलीफा अपन घरवालीक गंजन नहि करताह। 

ताहि पर पुरवारि गामवाली कनखी मारलखिन। खलीफा मुँह तकैत रहि गेलाह। बतहु मिसर तमाकुल चुनबैत-चुनबैत थपरी मारलाह आ ओहिठामसँ घसकि गेलाह। 

गाम-घरमे पंचैती एहिना होइत अछि। जकर लाठी तकर महिष।

¦

 

मुखिआक चुनाव

साँझ कए गाममे समाचार-पत्र आर्यावर्त अबैत छलैक। गाम भरिक लोक चौकपर एकट्ठा भए जाइत छलैक। चाहक दू-तीन दोकानपर लोक भन्न-भन्न करैत रहैत छल भादो जकाँ। अखबार अबैक कि गामक पढ़ुआ सभ ओहिपर टुटि पड़ए। ओहि दिन अखबारमे सरकारक एकटा सूचना बहराएल रहैक जे राज्य भरिमे मुखियाक चुनाव एक मासक भीतर सम्पन्न भए जाएत। औ बाबू! ई समाचार कि आएल जे सौंसे गाममे जेना करेन्ट लागि गेल। ओहि गाममे एकसँ एक सरगना लोक छलाह। धने-जने परिपूर्ण। मोहन बाबू, पलटन बाबू, हीरा बाबू, झगड़ू बाबू आदि-आदि।मुखिया के बनए, सरपंच के बनए। विभिन्न गुटमे इएह घोल-फचक्का शुरू भए गेल। सौंसे गाम खण्ड- खण्डमे बँटल छल।

पूबाइ टोलक सरगना मोहन बाबू छलाह। पलटन बाबू ओ हीरा बाबू दक्षिणवाइ टोलक प्रभावी लोक छलाह आ झगड़ू पछबाइ टोलक मानल लठैतमेसँ एक छलाह। उत्तरवाइ टोलक क्यो नेता नहि छल, कारण ओतए बेसी जन-बोनिहार रहैत छल आ अपनेमे ताड़ी पीब कए कटा-कटी करैत रहैत छल। ओकरा सभहक भगबान रोटिये छलैक। मालिक सभहक ओहिठाम जाए, जखन जे काज भेटैक से करए आ बोनि लए कए चल आबए। एमहर जहिआसँ चुनाव सभ होमए लगलैक अछि ओहो सभ किछु सुगबुगाएल जरूर अछि, मुदा कोनो खास नहि। कहिओ काल बाहरसँ नेता सभ अबैत छैक तँ ओहू टोलमे चहल-पहल रहैत छैक।  

चारू टोलमे झगड़ू बाबूकेँ बेस चलाचलती छैक। लाठीक बल छैक। पाँचटा बेटा छनि। सभकेँ पहलमानीमे पारंगत कराओल गेल। बेस लठैत सभ छल पाँचू बेटा। ओकरा सभहक डरे इलाका शान्त भए जाइत छल। तँए केहनो पढ़ल-लिखल लोककेँ झगड़ू बाबकेँ नमस्कार करए पड़ैत छलैक। 

चुनावक समाचार पबिते झगड़ू बाबू बमकए लगलाह। प्रात भेने हुनका टोलक सभ लठैत अपनामे बैसार केलक। मुखिया आ सरपंचक नामक फैसला तँ नहि भए सकलैक मुदा एतबा तय भए गेल जे वर्तमान मुखिया आ सरपंचकेँ अबश्य हराबक अछि।

झगड़ू बाबू भोरे सात बजे नहा-सोना कए चौकपर पहुँचलाह आ बमकए लगलाह- 

सभ चोर है, मुखिय चोर है। सरपंच चोर है, सभ को ठीक करेगा।” आदि आदि...। 

चारूकात भन्न-भन्न करैत लोक सभ जमा होमए लागल। 

की बात छैक झगड़ू बाबू?”-किओ ओहिमे सँ पुछलखिन। 

की बात छै से तोरा सभकेँ कोना बुझेतह? एहन बैमान सरपंच आ मुखिया आइ धरि एहि इलाकामे नहि भेल। कहिओ गामबलाकेँ कोटाक चीनी ठीकसँ भेटलैक? एहि बेरक चुनावमे एहि बैमान सभकेँ हरेबाक अछि..!”

लोक अबैक, लोक जाइक मुदा झगड़ू बाबू भाषण ओहिना अनबरत चलिते रहनि। रेलगाड़ीक पहिया जकाँ घुरा-फिरा कए ओतहि पहुँचि जाइत छला :

 “इस बैमान सभको हराना है।

झगड़ू बाबूक भाषण चलि रहल छलनि कि ताबतेमे सरपंच साहेब घुमैत-फिरैत आबि गेलाह। चारूकातक लोक हुनका दिस तकैत छल। मुदा झगड़ूक भाषण यथावते चलि रहल छल। सरपंच साहेब एक-दू बेर झगड़ूकेँ बुझाबक प्रयास केलथि। ताबतेमे सरपंचक भातिज मुनमा पहुँच गेल। हाथमे बेस मोटगर एकटा लाठी छलैक। ओ ने आब देखलक ने ताव आ धराम-धराम दू लाठी मारलक झगड़ूकेँ।

झगड़ू बाबू असगर पड़ि गेलाह। गरियबैत गाम दिस दौड़लाह आ पाँचो बेटाकेँ हॉंकि देलखिन। सौंसे चौकपर गरमा-गरमी भए गेल छलैक। झगड़ू बाबू मारि बिसरि फेरसँ गरजए लगलाह- 

कहाँ भागा। आए सामने तो जानें।

झगड़ू बाबूक पाँचो बेटा सेहो फराके गरजैत एवम् प्रकारेण चुनाव अभियान शुरू भेल।

पर्चा भरबाक समय करीब आबि रहल छल। घरे-घर गुटपैंची शुरू भए गेल। वर्तमान मुखिया आ सरपंच बेस टकाबला लोक छलाह। कोनो कीमतपर चुनाव जीतबाक हेतु कृतसंकल्प छलाह। मुदा नवतुरिआ सभ हुनकर विरोधी छल। गामक आरो लोक सभ सेहो हुनका सभसँ सन्तुष्ट नहि छल। अन्ततोगत्वा पर्चा भरबाक अन्तिम दिन धरि मुखिया आ सरपंचक हेतु पाँच-पाँच गोट उम्मीदवार पर्चा भरलनि। ओहिमेसँ मुखियाक हेतु तीन आ सरपंचक हेतु दू गोटाक पर्चा सही पाओल गेल। नवतुरिआक उम्मीदवार पलटू बाबू आ मोहन बाबू भेलाह। वर्तमान मुखिया ओ सरपंच सेहो एक बेर फेर मैदानमे अड़ल छलाह। ओकर अलाबा उत्तरवाइ टोलसँ गरीब लोक सभक उम्मीदवार बलचनमा सेहो अखाड़ामे उतरल छल। 

मुखियाक चुनाव गाममे तूफान अनलक से कोनो नब बात नहि छल। सभ बेर एहिना होइत छलैक। जहिआ कहिओ चुनाव होइक तऽ लोक सभ एहिना घोल-फचक्का करए लागय। मुदा एहि बेरक चुनावमे विशेषता ई छलैक जे उत्तरवाइ टोलक गरीब लोक सभ सेहो फॉंर बन्हने छलैक। बाहर-बाहरसँ नेता सभ अबैत दलैक। नित्य ककरोने ककरो ओहिठाम बैसार अबश्य होइतै। मतक हिसाबे आधासँ अधिक मत गरीबक छलैक आ जँ ओ सभ एक भए जाए तँ बलचनमाकेँ मुखिया बनबासँ कियो नहि रोकि सकैत छल। एहि बातक प्रतिक्रिया आन तीनू टोलमे सेहो भेलैक। मुदा कोनो हालतमे वर्तमान मुखिया चुनाव दंगलसँ हटए नहि चाहैत छलाह आ नवतुरिआ सभ हुनका अपन नेता मानबाक लेल तैयार नहि छल। एवम् प्रकारेण संपन्न वर्गक मत दूठाम बँटब स्वाभाविक भए गेल छलैक। मुदा बलचनमाक प्रचार जोर पकड़ने छलैक। 

झगड़ू बाबूक हेतुस्वर्णिम अवसर छल। खने बलचनमाक संगे घुमितथि तऽ खने पलटन बाबूक ओहिठाम आ खने वर्तमान मुखियाक ओतए। पर्चा भरलाक बाद चुनाव दिन धरि झगड़ू बाबूक हेतु अगहन रहैतछलनि। हुनका ईहो कोनो ठेकान नहि छलनि जे कखन कोन दलक संग भए जेताह। 

बड़का लोक सभहक मत दू ठाम बटबासँ रोकबाक हेतु साँझमे पूबाइ टोलमे बैसार भेल। क्यो किछु बजितथि ताहिसँ पहिने झगड़ू बाबू बमकए लगलाह। वर्तमान मुखियाकेँ एक हजार फज्झति कएल।

अन्ततोगत्वा ई निर्णय लेल गेल जे नवतुरिआक उम्मीदवार पलटन बाबूक समर्थन करताह। सरपंचक पदक हेतु मात्र दूटा उम्मीदवार छलाह- मोहन बाबू आ वर्तमान सरपंच नवत राय। नवत राय कमे पढ़ल-लिखल मुदा बेस फनैत लोक छलाह। कतहु किछु होइतैक कि भदवरिया बेंग जकाँ टर्र-टर्र बाजए लगितथि। घर-घर झगड़ा लगेबामे ओस्ताद छलाह। जँ किछु खर्च-बर्च कए दियैक तँ पंचयतीमे फैसला अहाँक पक्षमे सुनिश्चित कएल जा सकैत छल। जँ नीक-निकुत भेटि जान्हि तँ कतहुँ खा सकैत छलाह अन्यथा बेस नेम-टेमसँ रहैत छलाह। 

एहि सभ कारणसँ गामक लोक ओकरासँ एकदम ना-खुश छलैक। मुदा क्यो ओकरा नाराज नहि करए चाहैत छलैक कारण ओ बेस फचाँरि छल आ ककरहुँ कतहु बइज्जत कए सकैत छल। 

झगड़ू बाबू नवतुरिओपर चिकरए लगलाह। नवतुरिआ सभ सरपंचक हेतु मोहन बाबूकेँ समर्थन देबाक आश्वासन देलखिन। प्रात भेने नवतुरिआ सभ इन्नकिलाब, जिन्दाबादक नारा दैत गाम भरिमे पलटन-मोहन जिन्दाबादक स्वर गुंजित कए देलक।

एमहर गरीब लोक सभ एकदम एक भए गेल छल। लाठी लए कए सभ करे कमान छल। एवम् प्रकारेण सपष्ट लगइत छल जे मुखिया पदक हेतु बलचनमा आ सरपंचक हेतु मोहन बाबू चुनाव जीतताह। वर्तमान मुखिया ओ सरपंचजी बेचैन छलाह। रातिक बारह बजे झगड़ू बाबूक घर पहुँचलाह। दूनू गोटे झगड़ू बाबूक पैर पकड़लखिन। 

झगड़ू बाबू, अपने हमरा सपोट करू।

किएक नहि। हमर सपोट तँ सभदिन अहींक संगे रहल अछि।

से तँ ठीके मुदा एहि बेर हालत बेसी गड़बड़ छैक।

फेर कहि नहि, दूनू गोटे की फुस-फुसेलाह। २००० टाकापर सौदा भए गेल। प्राते भेने झगड़ू बाबू चौकपर फेर गरजए लगलाह- 

मुखियाजीक जे विरोध करत से हमर दुश्मन। एहन मुखिया सरपंच तँ ने कहिओ भेल छल आ ने होएत।

आदि आदि। सुननाहर सभ गुम्म।

काल्हि चुनाव होएत। राति भरि गाममे धोल-फचक्का होइत रहल। सभठाम काना-फुसी बेस जोर पकड़ने छल। पुस्तकालयपर चुनाव दल आबि गेल छल। चारिटा पुलिस लाठीलेने सेहो गश्त लगाबए लागल। पहिलुका चुनावमे उत्तरवाइ टोलपर चुनावक मतदान केन्द्रनहि होइत छलैक। मुदा एहि बेर गरीब लोक सभ बी.डी.ओ. साहेबक ओहिठाम धरनाधए देलक। एहि बेर उत्तरवाइ टोलमे सेहो मतदान केन्द्रबनल छलैक। झगड़ू बाबू आ हुनक बेटा सभ बेस मजगुतगर लाठी फनैत चुनाव मतदान केन्द्रसभपर चक्कर लगा रहल छलाह। पुवाइटोलक मतदान केन्द्र पर नवतुरिआ सभ कब्जा कए लेने छल। कसिकए वोगस मतदान भए रहल छलैक। ई खबरि झगड़ू बाबूकेँ जहाँ भेटल कि ओ अपन लठैत बेटा सभकेँ संग कए ओतए पहुँचला आ पलटन एवम् मोहन बाबूकेँ धराम-धराम दू-दू लाठी लगाओल। पीठासीन पदाधिकारी अकबका गेलाह। चारू दिस हरविर्रो मचि गेल। 

ओहि बीचमे झगड़ूक दूटा बेटा आगा बढ़ल आ सभटा मतपत्र छीनि जबरदस्ती मोहर मारि खसा कए खसकि गेल। मुदा एकर जबरदस्त प्रतिक्रिया उत्तरवाइ टोलक मतदान केन्द्र पर भेल। एक-एकटा मतपत्रपर बलचनमा अपने मोहर मारि कए खसौलक। कोनो दोसर उम्मीदवारक पोलिंग एजेन्ट ओहिठाम नहि टिकि सकल। बलचनमाक जीतब निश्चित प्राय छलैक ओही मतदान केन्द्र क, कारण आधासँ अधिक मत ओही टोलक छलैक। सरपंचक सभटा मत नवत रायकेँ भेटलैक। आन मतदान केन्द्रसभपर सामान्य रूपसँ मतदान भेल आ कने-मने मत सभकेँ भेटलै। 

साँझमे मत गणना प्रारम्भ भेल। बारह बजे रातिमे जा कए चुनावक परिणाम बहार भेलै। बलचनमा ओ नवत चुनाव जीति गेलाह। गरीब लोक सभ विजयक खुशीमे मत्त छल। नारा बुलन्द होमए लागल- 

जीत गया जी जीत गया, बलचन जीत गया। पुबारि टोलसँ लए कए पछबारि टोलक सभ लोक सन्न छल।

¦

रबीन्द्र नारायण मिश्रक

नमस्तस्यै

आगाँ...

११.

एक दिन भोरे सौंसे गाममे हाक पड़ि रहल छल। भेलैक ई जे मास्टर साहेब अपन घरसँ निपत्ता भए गेल छलाह। काल्हि साँझ धरि तँ कै गोटा हुनका ठामहि देखने रहनि। मुदा राता-राती की भेल? ककरा एहन दुश्मनी भए गेल जे विपत्तिसँ आहत, बौक भेल ओहि व्यक्तिकेँ ओहू हालमे नहि छोड़ि सकल।

मास्टर साहेबक अपन के छलैक? जेहो छलैक सेहो कात भए गेल। जाहि व्यक्तिक सामर्थ्यपर विपत्तिक ग्रहण लागि गेल हो तकर संग के पुरत आओर कथी लेल?

थाना-पुलिसमे के जाइत? ओहिना मास्टर साहेबक नाम आन्दोलनकारी सभक संगे सुमार होइत छल। कतेको तरहक फसादमे हुनकर नाम जाने-अनजाने अबैत रहैत छल। तेहन व्यक्ति हेतु अंग्रेजक पोसल पुलिस किएक किछु करितैक।

असलमे मास्टरक माथा हिल गेल रहैक। पूर्णकालिक बताह भए गेल रहथि। ई कोनो एकाएक भेलैक से बात नहि। क्रमश: होइत एहि परिवर्तनकेँ क्यो बुझि नहि सकलैक आओर एक दिन जखन ओ प्रचण्ड बताह भए गाम छोड़ि कतहुँ चलि गेलाह तँ लोकक चर्चाक विषय भए गेलैक। चर्चेटा, क्यो किछु केलक नहि। मास्टर साहेबक ओहिठाम भेल डकैतीमे, आओर तकर विरोध केलापर परिवारक सदस्यक हत्यामेमोछा ठाकुर गिरोहक हाथ छल। मोछा ठाकुर भने मरि गेल छल वा मारि देल गेल छल मुदा ओकर गिरोह अखनहुँ सक्रिय छल। तूँ डारि-डारि, हम पात-पात से कहब छल डकैतक ओहि गिरोहक। फिरंगीसभ थाकि गेल, किछु नहि कए सकल।

असलमे डकैत बनबाक फैक्ट्री छल ओहिठामक समाज। लोकमे बढ़ैत गरीबी, सामाजिक उत्पीड़न, समाजक सम्पन्न लोकक अत्याचारक प्रतिकार करबामे असमर्थ लोक सभ कतेको बेर एहि रस्ताकेँ अख्तियार करैत छल आओर सदा, सर्वदाक हेतु समाजक मूख्यधारासँ कटि जाइत छल।

एक हिसाबे शासन तंत्र मजगूत भेल शोषक तत्वक संवर्धकबनि कए रहि गेल छल। गाम-घरमे कतेको लोक नर्कक जिनगी जीबैत छल। जखन सेहो सम्भव नहि होइत छल, दिन भरि खटि कए साँझमे बिना बोनि लेने एक छीट्टा गारि-मारि संगे घर धरि धिया-पुता आओर पत्नीकेँ सहैत देखैत छल, तँ सोचल जाए सकैत अछि जे ओकरा मोनमे की-की होइत रहल होएत? कहक माने जे सामाजिक अन्तर्विरोध प्रतिकारक एकटा अभिव्यक्ति छल डकैती। एकरा पाछु आर्थिक विषमता मूल कारण छल। भए सकैए जे मोछा ठाकुरक गिरोहक लोक सभक एही तरहक समस्या रहल हो। मुदाछल ओ सभ देश भक्त। ओहिमे सँ किछु गोटे स्वतंत्रता आन्दोलनसँ रूचि रखैत छल। गाहे-बगाहे जनाधार पार्टीक समर्थक सभक विचारसँ अवगत होइत रहैत छल। मुदा ओकरा सभकेँ ओ रस्ता पसिन नहि छल। क्रान्तिकारी युवक सभसँ ओकरा मेल खाइत छलैक।

ओकर सभक सोच रहैक जे जखन अंग्रेज बलपूर्वक शासन कए रहल अछि तखन ओकरा बलपूर्वक विरोध करब कतहुसँ गलत नहि कहल जा सकैत अछि। से सभ तँ अपना जगहपर जे रहैक से रहैक मुदा कतेको बेर निर्दोष आदमी सेहो ओकर सभक चपेटमे आबि जाइत छल। वएह हाल भेल रहैक पुष्पाक।

पुष्पाक पाछा डकैतक गिरोह एहि लेल पड़ि गेल रहैक जे ओ मोछा ठाकुरक खिलाफ मुखविरी केने रहैक। ओकरा सभक मोछा ठाकुरक प्रति बहुत सम्मान रहैक। मोछा ठाकुर ओकर सभक एक हिसाबे मार्ग दर्शक रहैक, सरगना तँ रहबे करैक।

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१२.

मोछा ठाकुरक गिरोह हाथ धो कए पुष्पाक पाछु पड़ल छल। ओकरा सभकेँ पता लागल रहैक जे पुष्पा मास्टर साहेबक ओहिठाम अछि, तेँ हुनका ओहिठाम ओ सभ चोट केने छल। परिणाम तँ बूझले अछि।

पुष्पा अपने अपसिऑंत छलि। ओकर बेटाक कोनो अता-पता नहि रहैक। पैतृक सम्पत्ति सभटा मोछा ठाकुर हरपि लेने रहैक। यद्यपि आब ओ जीवित नहि छल, मुदा ओकरगिरोहक भय तँ छलहे। तेँ क्यो पुष्पाक संगे ठाढ़ होमए हेतु तैयार नहि छल।

पुष्पा गाहे-बगाहे अपन गाम गेबो केली। मुदा ओहिठामक हालत देखि रहि नहि सकलीह। किछु गोटेकेँ हुनकासँ सहानुभूति रहैक। मुदा ओहो सभ डरे चुप्पे रहि गेल। पुष्पा आपस हमरा ओहिठाम आबि गेलीह।

पुष्पा अपन सम्पत्ति आपस प्राप्त करबाक हेतु चिन्तित रहैत छलि। मुदा ओहूसँ बेसी चिन्ता ओकरा अपन एकमात्र बेटाक छलैक जकर कोनो अता-पता नहि चलि सकलैक। जीवितो छै की नहि, सेहो नहि पता। पुष्पाकेँ विश्वास रहैक जे ओकर बेटा सलामत छैक। कतए छैक, कोना छै की करैत छैक से तँ नहि जनैत रहैक मुदा माएक हृदय बेरि-बेरि कहि उठैत जे ओ जिबैत छै। से सोचि कए ओ आओर अहुरिआ काटए लगैत छलि। कखनो अपनापर, कखनो भाग्यपर तामस होइत छलैक। समाधान किछु फुराइत नहि छलैक। ओकरा एहि बातक सन्तोख छलैक जे मोछा ठाकुरक ठेकान लागि गेलैक। एहि बातक ओकरा कनिको पश्चाताप नहि रहैक जे ओ मोछा ठाकुरक लहास देखि केना ताण्डव केने छलि। अपितु ओकर हृदयमे तेहन धधरा अखनो उठैत छलैक जे गामक गाम सुड्डाह भए जाइत।

ओकर ऑंखिक प्रचण्ड ज्वाला क्यो देखि नहि पबैत छलैक। ओकर अन्तर्मनक अशान्ति समुद्र जकाँ अथाह छलैक मुदा कहिओ ने कहिओ ज्वार भाटा तँ अएनहि छलैक, से अएलैक।

ओहि दिन दुपहरिआमे पुष्पा असगरे असोरापर बैसलि छलि। एकाएक जेना ओकरा घुरमा उठलैक। ओ भागए लागलि। कतबो क्यो प्रयास केलकै, ओ नहि रुकल। ततेक बेगसँ ओ आगा बढ़ल जे ककरो हाक धरि देबाक हिम्मति नहि भेलैक। पुष्पा भगैत गेली, अविराम।

बाप रे बाप! ई के छै?एना किएक दौड़ि रहल अछि? जैह देखलक से देखिते रहि गेल। अबाक, शून्य भेल देखैत रहि गेल। भगैत-भगैत एकटा पूलपर जा कए जोर-जोरसँ अट्टाहास करए। पगला मास्टरकेँ पुलपर गॉंधी टोपी पहिरने देखिते चिचिआ उठल-

फेक एहि टोपीकेँ!एहिसँ किछु नहि हेतौ। पकड़ ई दबिला...।पता नहि की-की चिकरैत रहल। असगरि हाथमे दबिला लेने ओ मास्टर दिस बढ़लि।

हे भगवान!आब की होएत? की भए गेलैक एहि बुढ़ियाकेँ केहन बढ़िऑं संच-मंच रहैत छलैक। आइ तँ ककरोचिन्हओ नहि रहल छैक।

अबैत-जाइत लोक बजैक। जाधरि ओ पूलपर ठाढ़ि रहलि, लोक ओ रस्ता छोड़ि कात भए गेल। छगुन्तासँ देखैत रहल। पूलक ओहि छोरपर पागल भेल मास्टर आओर ओहि छोरपर दबिला लेने पुष्पा।

कहीं पुष्पा मास्टरक हत्या नहि कए दैक। कहीं मास्टर आत्म रक्षार्थ पुष्पाक दबिला ओकरेपर ने चला दैक। लोक सभ बेचैन छल मुदा किछु कए नहि पाबि रहल छल।

पुष्पाक रक्त रंजित नेत्रमे मुण्डसँ आच्दादित कालीक दर्शन होइत छल। पुष्पा आगा बढ़ल जा रहल छलि। मास्टर एकटक ओकरा देखैत रहल। ओकरा भेलैक जेना असुर भयाविनी समस्त दुष्टक संहार कए मुण्डमाल धारण केने ओहिठाम सद्य: उपस्थित भए गेल छथि।

मास्टरक आवेग देखैत बनैत छल। ओ वायुवेगसँ दौड़ल। पुष्पाक आगा धराम दए दण्डवत खसि पड़ल। आओर करवद्ध प्रार्थनाकरैतरहल-

या देवी सर्वभूतेषू शान्ति रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

एहि दृष्यकेँ क्यो देखलक, क्यो नहि देखलक। जे नहि देखलक से सभ की-की नहि सुनलक। जे देखलक से की-की नहि बजलक। क्यो कहैक साक्षात् काली सवार भए गेल छथि। क्यो कहैक जे ओ निठ्ठाह बताहि भए गेल अछि। जतेक मनुखक, ततेक रंगक गप्प।

पुष्पा मास्टरकेँ धाराशायी देखैत जेना विचारमग्न भए गेलि। फेर जोरसँ अट्ठाहास करए लागलि-

तों के छह?टोपीबला एहन भाभट किएक धेने छैं? अपन असली रूपमे आबिजो नहि तँ चला देबौ दबिला।

ओ सचमुच दबिला आगा बढ़ौने छलि कि घोड़ापर सवार एकटा युवक ओकर हाथ पकड़ि लेलक।ओहि घुड़सबारक पाछा-पाछा पाँचटा आओर घुड़सबार चलि रहल छल। ओसभ बेहद मजगूत छल। सभ गोटे अस्त्र-शस्त्रसँ सुसज्जित छल। बीच-बीचमे बन्दे मातरम् केर जयघोष करैत आगा बढ़ि रहल छल कि पुलक बीचमे एहन दुर्दान्त दृष्य देखि ठमकि गेल। पुष्पाक हाथ संधानसँ पकड़ि ओ घुड़सबार घोड़ासँ उतरिगेल। पुष्पा ओकरा देखिते चिकरि उठलैक-

के?”

हम छीराज कुमार, तोहर बेटा!”

नहि, नहि तों राज कुमार नहि छैं। क्यो छली हमर बेटाक नाम लए हमरा धोखा देबए चाहैत छैं।

कतबो राज कुमार बुझाबक प्रयास करैक ओ मानए हेतु तैयार नहि छल। कतेको दिनसँ अपन बेटाक प्रतीक्षामे छलि आओर आइ जखन ओ सद्य: अकस्मात ओकरा सम्मुख ठाढ़ छैक तँ पुष्पाक मति-गति सभ हरा गेल अछि। मुदा राज कुमार अपन माएकेँ चिन्हि गेलैक। अनमन ओकरे सन माएक मुँह छलैक। ओ माएकेँ गोहरबैत रहल। पुष्पा किन्नहुँमानबाक हेतु तैयार नहि छलैक। ओकर ऑंखि अखनहुँ रक्त रंजित छलैक। हाथमे दबिला ओहिना छलैक, मुदा पैर ठमकि गेल छलैक। प्राय: अन्तर्मनसँ कोनो घ्वनि ओकरा सुनाइत छलैक-

ई तँ हमरे बेटा अछि।

माएक ई दशा देखि राज कुमार के तँ जेना बज्र खसि पड़लैक। ओना, ओकरा कोनो उमीद नहि रहैक जे ओकर माए जीवित होएत। ओकरा अपनो जीवित रहबाक कोनो सम्भावना नहि रहैक मुदा कहबी छैक जे मारए-बलासँ जियाबए-बलाक हाथ बेसी नमगर होइत छैक।

गामसँ अपहरणकए लए जाइत काल मोछा ठाकुर ओकरा बीचमे पड़ैत धारमे धकलि देलकै। अन्हार गुज्ज रातिमे उफनैत धारक प्रवाहमे ओ भसिआइत-भसिआइत काशी पहुँच गेल। ओहिठाम मलाह सभ महाजाल फेकने छल।

ओहि महाजालमे ओ फँसि गेल। मलाह सभकेँ बहुत पैघ माँछकेँ फँसि जेबाक ततेक प्रशन्नता छलैक जे ओ सभ धराधर जाल खींचए लागल। मुदा जखन ओहि महाजालमे पाँच हाथक बेहोश मनुक्ख भेटलैक तँ ओ सभ गुम्म रहि गेल। क्यो कहैक जे मुर्दा छैक, फेरसँ दहा दही।

मुदा एकटा बुढ़बा मलाह डाक्टर बजा अनलकै। डाक्टर गौर केलक तँ साँस चलैत बुझेलैक। ओ इएह ले वएह ले राज कुमारकेँ अस्पताल लए भागल। धन्न कही ओकर प्रयासकेँ आओर राज कुमारक भाग्यकेँ। तीन दिनक बाद ओ ऑंखि खोललकै। आगा-पाछा क्यो ओकर देखनिहार नहि छल। दस दिनक लगातार इलाजक बाद ओकर जान तँ बाचि गेल मुदा समस्या छल जे आब ओ जाए तँ कतए।

संयोगवश अस्पतालमे एकटा क्रान्तिकारी गुटक युवकक इलाज चलि रहल छल। ओकर बेड सीट अगले बगल छल। इलाजक क्रममे ओकरा राज कुमारक स्थितिक जानकारी भेलैक। ओ एहि बातक चर्च अपन संगी-साथी सभसँ केलक। सभ गोटे ई निर्णय केलक जे राज कुमारकेँ अपने संगे नेने चली।

दोसर दिन भने राज कुमार आओर ओकर अस्पतालक पड़ोसी संगे संग अस्पतालसँ छुट्टी पाबि अज्ञात स्थान दिस विदा भए गेल। राज कुमार लग कोनो दोसर विकल्पो नहि रहैक।

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१३.

एमहर हमर ससुर अपन एक मात्र संतानक बिआह, कोजगराक बाद दुरागमनक प्रतीक्षामे नित्य महादेवकेँ गोहरबैत रहैत छलाह। हमर सासुक स्थिति तँ आओर खराप छलनि। एक-एकदिन गनि रहल छली। एहि बातक किछु संज्ञान नहि रहलनि जे हम मात्र १२ बर्खक छलहुँ। एतेक छोट नेनाकेँ माएक कोरसँ फराक करब अन्याय होएत। ओतबे नहि, हमर माए एकदम एसगरि भए जाएत।

सभ अपने अपने समस्यासँ फिरसान छल। ककर के सुनत? हमर सासुकेँ सेहो किओ दोसर नहि छलनि। पुतहु आबि जएबाक उमीदमे कतेको दिनसँ जीबि रहल छलीह।

आखिर ओ समय आबिए गेल। हमर ससुर हमर नैहरमे हठ कए देलखिन। हमर पित्ती बड़ कानल। ओ कि कनलाह, कानल तँ हमर माए। एक मात्र संतानक वियोगक अवश्यभावी आशंकासँ क्षत-विक्षत अन्तर्मन हाकरोस पाड़ि रहल छल। कखनहुँ कानए, कखनहुँ चिकरए, भोकरए। हमर ससुर अड़ि गेल छलाह। ओहिसँ पूर्व दू बेर दिन फेरा गेल छल।

भोरसँ साँझ-धरि कन्नारोहटि होइत रहैत। जखन कखनो खाएक अबैत, तखन कनबाक नवीन श्रृंखला प्रारम्भ होइत। माएक हाल बेहाल छल। ओकर जन्म तँ जेना कानए हेतु भेल रहैक। जखने भरल जवानीमे हमर बाप गुजरि गेलखिन तखने ओकर सर्वस्व चलि गेलैक। सुखकछॉंहो कतहुसँ नहि रहि गेलैक।

हमर जन्मसँ जे कनेक आशा जगओलक सेहो आब हटि रहल छल। उपायो की छल? आखरि बेटी भए जन्म लेने छलिऐक। जँ भागक तेजगर रहैत तँ हम बेटा भए आएल रहितहुँ। ओतेकटा राज-काजक मालिक होइतहुँ, माए-बापक वंशक रक्षा कए सकितहुँ। मुदा एहिमे हमर की दोख?

भगवानो मानव निर्मित एहि देबारकेँ नहि तोड़ि सकैत छलाह। जनमिते दू रंगक दुनियॉं, दू रंगक रेबाज, दूरंगक कानून। आश्चर्य ई जे ओ सभ अन्याय देखितहुँ चुप रहैत छथि। सभ किछु जनितहुँ अनजान बनल रहैत छथि। द्विरागमन हेबाक छलैक से भए गेल। ओहि समय हम तेरह बर्खक बच्चा रही। बेसी चीज बुझबे नहि कएलिऐक। नैहरसँ सासुर पहुँच गेलहुँ। हमर सासुक आनन्दक तँ अन्ते नहि छल। गाम-गाम बैन बँटैत रहि गेलीह। क्यो खाली हाथ नहि गेल। गीत-नादसँ तँ समस्त वातावरण कतेको दिन धरि आनन्दक बर्खा करैत रहल।

हमरा सासुरमे ततेक मानदान भेल, सासु ततेक ध्यान राखए लगलीह जे सभ बिसराए गेल। कखनो काल कए माएक उचाट जखन आबए, तँ कनाइत जरूर। से सुनि हमर ससुर हंगामा ठाढ़ कए देथि।

कोनो कष्ट नहि होनि हिनका।

सासु, ससुरक एहन सिनेह भगवान सभकेँ देथु।

मुदा हमर नैहर तँ हराए गेल छल। माएसँ भेँट होएब दुर्लभ भए गेल छल। अपन स्कूलक संगी सभ मोन पड़ैत रहैत छल। एक दिन हमर नैहरसँ खबासिन आएल। हमर माएकेँ बहुत मोन पड़ैत छलिऐक, तेँ जिज्ञासा हेतु, पठओलकै। खबासिनीसँ बहुत रास पता लागल। ईहो बुझलिऐक जे स्कूल खसि पड़लैक, जे मास्टर पागल भए गेलैक। आओर-आओर कतेको समाचार सभ भेटल।

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१४.

मास्टर साहेबक समाचार सुनि हम छगुन्तामे पड़ि गेल रही। रहि-रहि कए खबासिनीसँ हुनका बारेमे प्रश्न करैत रहलिऐक। मुदा किछु समीचीन उत्तर नहि भेटए। आखिर एहन सोझराएल सरल एवम् समाजिक लोकक ई स्थिति कोना भेल?

पुष्पा कोना दहाड़ि कए मास्टरक गॉंधी टोपी खसौलक, कोना मास्टर ओकर पैरपर खसि पड़ल से सुनि तँ छगुन्तामे पड़ि गेलहुँ। ई सभ तँ कोनो खिस्सासँ बेसी चोटगर लगैत छल। जाबे ओ खबासिनी रहल हम ओकरा एहि बातसभकेँ खोद-बेद करैत रहलहुँ।

खबासिनी आपस गाम आएलि। गामक रस्तेमे मास्टर देखा गेलैक। नंग धरंग, आधा धोती ओढ़ने, आधा पहिरने। कखनहुँ उजरा टोपी माथपर, कखनहुँ जमीनपर। बानरबला हाल भए गेल रहनि। ताहिपर सँ रहि-रहि कए भाषण करए लागथि।

महात्मा गॉंधी, तिलक, गोखलेककर, ककर नाम लए जोर-जोरसँ भाषण करैत रहैत छल। जेना सौंसे स्वतंत्रता आन्दोलनक छार-भार ओकरे माथपर होइक। महात्मा गांधीक नाम लए ओ कै बेर उत्तेजित भए जाइत छल। ओकर भाषण सुनि क्यो छगुन्तामे पड़ि जाइत। कतहुसँ कोनो दुबिधा नहि बुझाइक। लगैक जेना ककरो आत्मा ओकरामे घुसिया गेल होइक। कनीकाल भाषण देलाक बाद फेर वएह ताल-पैतरा शुरू कए दितथि। एक दिन तँ दौड़ल-दौड़ल स्कूलक खसल टाट सभकेँ सोझ करए लागल। हाथमे छड़ी लए जोर-जोरसँ चटिआ सभपर बिगड़ए लागल-

पढ़बे करोगे कि मरबो करोगे।

मुदा ने ओतए कोनो चटिआ छल आओर ने क्यो मास्टर।

निट्ठाह बता भए गेलाह।

सभ सएह कहैत आगू बढ़ि जाइत।

ओहि दिन स्कूलक सामनेक मैदानमे स्वतंत्रता आन्दोलनसँ जुड़ल जनाधार पार्टीक नेताक आगमन रहैक। ध्वनिविस्तारकसँ गाम-गाम लोक सभकेँ बैसारमे अएबाक हकार देल गेल। चारि बजेसँ बैसार रहैक। स्वतंत्रताक हेतु लोकक मोन छटपट करैत छल। तेँ लोकक करमान लागि गेल। बैसार शुरू हेबाक छल। जनाधार पार्टीक टोपीधारी नेता सभ आबि चुकल छल। बन्दे मातरम् केर नारा लागि रहल छल। सम्पूर्ण वातावरण देश भक्तिक गीतसँ ओत-प्रोत भए गेल छल।

एतबेमे मास्टर एकटा छोटसन माइक हाथमे लेने जोर-जोरसँ बाजए लागल।

जनाधार पार्टी मात्र ढोंगीक जमावरा अछि। समाजमे चारूकात अन्याय पसरल अछि। स्त्री समाज अधिकार हीन भए नाना प्रकारसँ शोषित भए रहल अछि। की होएत एहेन स्वतंत्रता लए कए, जतए आधा आवादी अशिक्षित, अधिकारहीन भए सदिखन अपन अधिकारक हेतु लड़ैत रहितहुँ अनाथ रहैत अछि?”

जनाधार पार्टीक नेता सभ ओहि विक्षिप्त व्यक्तिक भाषण सुनि गुम्म पड़ि गेलाह। लोक सभकेँ ठकविदरो लागि गेलैक। आपसमे कानाफूसी प्रारम्भ भए गेल।

ई किन्नहुँबताह नहि अछि।

मास्टर जे माइक पकड़लक से पकड़ने रहि गेल। चुप्प हेबाक नामे ने लिअए। बैसारक आयोजक सभक सभ प्रयास व्यर्थ साबित भए रहल छल। मास्टर अड़ि गेल छल जे जाधरि स्कूल फेरसँ नहि बनत ओ चुप नहि होएत। किन्नहुँ बैसार नहि होमए देत।

एतबहिमे चारिटा मुस्टंड कतहुँसँ आएल। सभ मोछ पिजा रहल छल। जनाधार पार्टीक जयक नारा संग आगा बढ़ल आओर मास्टरक माइक छीनि लेलक। किओ ओकर नरेठी पकड़लक तँ किओ ठामहि उठा कए लए भागल। बैसार चलि पड़ल। क्रान्तिकारी सभक अपन सोच छलैक। ओ सभ प्रगतिशील मंचक नामसँ काज करैत छल। ओकर सभक कहब छलैक जे स्वतंत्रतासँ बेसी जरूरी अछि सामाजिक परिवर्तन। ओ सभ कहैत छल जे राजनीतिक स्वतंत्रता जँ भेटिओ गेल, तैओ गरीब, महिला ओ अन्य शोषित वर्गक उद्धार ताधरि नहि होएत, जाबे शोषक व्यक्ति समूल नाश नहि होएत, ताहि हेतु चाहे भले किछु अनट करए पड़ैक। तकर पाछा ओकर सभक अपन सोच छलैक। आखिर राजनीतिक सत्ता अपन वर्चस्वक स्थापना हेतु बलप्रयोगक तँ करिते अछि। सही की से तँ भविष्यक बात रहैक मुदा ओकरो समर्थक छलैक। युवक पुरुष ओ स्त्री सभ ओकर संग छल। फिरंगीसभ हाथ धो कए ओकर सभक पाछा पड़ल रहैत छलैक।

क्रान्तिकारी कही, प्रगतिशील मंचक कार्यकर्ता कही, ओ सभ अपन उद्देश्यक हेतु किछु करबाक हेतु कृत संकल्प छल। दिन-राति गबैत रहैत छल-

सरफरोशी की तमन्ना, आज मेरे दिलमे है।

देखना है जोर कितना बाजुए कातिलमे है।

जनाधार पार्टीक लठैत सभ मास्टरकेँ उठा-पुठा कए कात केनहि छल कि बैसार स्थलपर घोड़ापर चढ़ल दन-दन करैत प्रगतिशील मंचक युवक लोकनि हबाइ फाइरींग करैत पता नहि कतएसँ टपकि पड़ल। बैसारमे पड़ाहि लागि गेल। कनीकालमे पूरा मैदान खाली छल। सैंकड़ोक चप्पल, जुता, यत्र-तत्र खसल छल।

प्रगतिशील मंचक युवक आगा बढ़ल। जनाधार पार्टीक मंचासीन नेता सभकेँ चुनौती दैत फेर हबाइ फाइरींग केलक। नेता सभ इएह ले वएह ले जान लए लए भागल। मुस्टंड सभक हालत तँ कहए जोगर नहि रहि गेल छल। किछु पैसाक चक्करमे ओ सभ अपन आत्माकेँ बेचि चुकल छल।

प्रगतिशील मंचक युवकमे एकटा छल राज कुमार जे किछु दिन अपन विक्षिप्त माएकेँ पुलपर सँ लए भागल छल। आइ मास्टर साहेबकेँ ओही हालमे देख ओकरा नहि रहल गेलैक। ओ चिकरि उठल। ततेक जोरसँ चिकड़ल जे लगलैक कोनो बम बिस्फोट भए गेल होइक। ओ मोचण्ड सभ जान लए भागल से घुरि नहि तकलक। राज कुमार मास्टर साहेबकेँ घोड़ापर बैसओलक आओर अपन संगी सभक संगे आगू बढ़ि गेल।

ओहि दिनक घटनाक चर्चा कतेको दिन धरि परिपट्टामे होइत रहलैक। क्यो कहैक जे जनाधार पार्टीक विचार सही अछि तँ क्यो प्रगतिशील मंचक समर्थक भए जाइक। कुल मिला कए एकटा जबरदस्त वैचारिक संघर्षक वातावरण बनि गेल छल।

प्रगतिशील मंचमे आधासँ बेसी महिला सभ छलैक। कतहु-ने-कतहु कोनो अन्यायक प्रतिकार नहि हेबाक कारणेँ विद्रोही स्वभावक भए गेल छलैक। अधिकांश महिला गरीब परिवेशसँ अबैत छलि मुदा सम्पन्न परिवारक लोक सेहो छलीह। एकटा महिला तँ श्मसान घाटसँ प्राण बचा भागल रहैक। समाजक अत्याचारक पराकाष्ठा तँ तखन भए गेलैक जखन ओकरा जबरदस्ती ओ अनिक्षापूर्वक सती करबाक हेतु श्मसान घाट धरि पहुँचा अएलैक। मुदा की ने की भेलैक जे ओ जान-बेजान भगलैक। से तेहन भगलैक जे घुरि नहि तकलकै। एहन जान-बेजान भगैत महिलाकेँ क्यो प्रगतिशील मंचक कार्यकर्ता देखलकै। ओकरा मंचक डेरापर लए अनलकै। बचि गेलै। सम्भवत: ओकरा जीनाइ छलैक। मुदा कतेको लोक सतीक नामपर जीविते डाहि देल गेल। जेकरा संगे से नहि भेलैक ओहो जीवन भरि वैधव्यक पीड़ा सहैत रहली। नाना प्रकारक यातना, अपमान सहैत चल गेली। यद्यपि सभ पुरुष कोनो-ने-कोनो स्त्रीक कोखसँ जनमैत अछि, तथापि ओकर आस्तित्वपर ग्रहण लागल रहैत अछि।

एहि सभ तरहक अन्यायक सामाजिक प्रतिकार करए चाहैत छल प्रगतिशील मंच। मुदा सभसँ बड़का समस्या रहैक अर्थक व्यवस्था। ताहि हेतु ओकरा सभकेँ कै बेर गैरकानूनी तरीका अख्तियार करए पड़ैक। ओही क्रममे ओकरा सभक भेँट-घॉंट समाजकक प्रगतिशील लोक सभसँ होइक मुदा प्रगतिशील मंचक सोचसँ कमे लोक सहमत होइक तथापि जानक डरे किछु-ने-किछु चन्दा दए दैक।

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१५.

साल भरिक बाद हमर विदागरी भेल। नैहरमे माए हमरा देखिते ततेक कानए लागलि जे सौंसे गामक स्त्रीगण सभ जमा भए गेलैक। हमरो बहुत कनाए लागल। लोक सभ ओकरा बुझौलक। कन्ना-रेाहटि बन्द भेलाक बाद हमर हाल-चाल पुछए लागलि। सासुरमे हमरा सभ तरहेँ सुख छल से जानि माएकेँ बहुत प्रशन्नता भेलैक। लोक सभमे बैन बॉंटल गेल। सभ अपन-अपन घर गेल।

हम अपन संगी सभक हाल-चाल पुछलिऐक। माए सभकेँ समाद देलकै। बेरा-बेरी सभ आबि कए हमर भेँट कए गेल। मुदा मास्टर साहेबक किछु समाचार नहि भेटए। सभ एतबे कहलक जे ओ बताह भए गेल छथि। आब कतए छथि, कोन हालमे छथि से निजगुत बात क्यो नहि कहि सकल।

पुष्पाक समाचार सेहो ओतबे बुझलिऐक जे ओ आब एहिठामसँ पता नहि कतए चल गेल। ओकर उग्र व्यवहारक चर्चा सेहो लोक केलक मुदा फिलहाल कोन ठाम अछि, ओकर की हाल छैक, से क्यो नहि कहि सकल।

अपन गाम अपने होइत छैक। लोक-बेद, खेत-पथार, पोखरि-इनार सभसँ अपनत्व भए जाइत छैक। ताहि सभकेँ एकाएक छोड़ि बेटी सासुर जा बसैत अछि। छैक ने मार्मिक बात? हमर तँ बाते अलग रहैक। नान्हिटा बच्चाक बिआह कए हमर पित्ती निश्चिंत भए गेलाह। मुदा हमर नेन्ना तँ हरा गेल। नैहरसँ सासुरक रस्तामे हम स्वयं किछु आओर भए गेल रही।बएसतँ ततबे रहए जे माएक ऑंचरसँ बाहर भए दरबाजा धरि जा सकितहुँ, खेलितहुँ, धुपितहुँ। मुदा भाग्य नियंताकेँ से मंजूरो होइक तखन ने? साल भरिक बाद नैहर आएल रही। अपन संगी, साथी सभ एक-एक कए भेँट भेल। तरह-तरहक खिस्सा पिहानी सभ सुनैत-सुनैत दिन बीति जाइक। साँझ होइते माए घर लए आनथि। दिन भरि जतेक घुमि सकी, जतेक गोटेसँ भेँट भए सकए से करी। ताहिमे कोनो रूकाबट नहि।

एक दिन सभ बच्चा संगोर कए स्कूल पहुँचलहुँ। टूटल, ढनमनाएल माटिक देबार सभ अवशेष पड़ल छल। एकटा विद्यार्थी नहि। क्यो मास्टर नहि। हमर सभक प्रिय मास्टर तँ बताहे भए गेल रहथि। हम बच्चा रही, मुदा अखियास अपन बएसक संगतुरिआ सभसँ बहुत बेसी छल। अपने बएसक पितिऔत सभकेँ स्कूल जाइत देखिऐक, खेलैत देखिऐक, अपने आपमे ग्लानि होमए लागैत। भगवानकेँ मोने-मोन उपराग देबए लगिअनि-

हे विधाता!हमर कोन कसूर। अहॉं हमरा पुरुष बनबितहुँ तँ आइ हम अपन माए, बापक वारिस रहितहुँ। अपन घर-घराड़ी, खेत-पथार सभक रक्षा कए सकितहुँ। मात्र बेटी हेबाक चलते हमर सभ किछु स्वाहा भए गेल। हाथ मलिते रहि गेल हमर माए। दियाद- बाद सभटा लूटि लेलक।

बात एतबेपर नहि ठहरल। आगा कोनो फिरसानी नहि होइक, तेँ जल्दीसँ बिआह-दान करए निश्चिन्त भए गेल। बाह रे समाज। केहन-केहन कानून बना लेलक। अपने लोक जखन शत्रु भए जाइछ तँ रक्षा के करत? सएह सभ सोचैत रही कि हमर संगी सभ आबि गेल आओर हम खेल-धूपमे लागि गेलहुँ।

बहुत दिनक बाद एतेक रास बच्चा सभक संगे उन्मुक्त भए खेलेबाक अवसर प्राप्त भेल छल। तेँ जी-जानसँ खेल-धूपमे लागि जाइ। दुपहरिआ खसिते तरह-तरहक खेल-धूप शुरू भए जाइत। आस-पासक बच्चा सभ जमा होइत आओर तेहन धमाचौकड़ी होइत जकर कोनो अन्त नहि। बेसी हल्ला सुनि कै बेर हमर पित्ती चिकरि उठितथि मुदा हमरा देखिते सकदम भए जैतथि। कतहु-ने-कतहु मोनमे ग्लानि होमए लगितनि। एतेक कम बएसमे सासुर बसैत छैक। कनीक दिन लेल अएलैक अछि। फेर सासुर चलि जाएत। कहिआ आओत, नहि आओत...। से सभ सोचि ओ गुम्म पड़ि जाइत छलाह। अबाक रहि जाइत छलाह।

ओहि दिन साँझमे गबैआ आएल छल। सौंसे गामक लोक ओकर गीत-नादक आनन्द लए रहल छल। नचारी, भगवती गीतसँ प्रारम्भ कए विद्यापतिक कतेको गीत गओलक। धिया-पुताक संगे हमहूँ कतेक आनन्दित रही। मुदा हमर माए सोगाएल, असगरे घरेमे पड़ल रहथि, कारण हमर विदागरीक दिन मनबए सासुरसँ क्यो आबि गेल छल।

 

डॉ. योगेन्द्र पाठक वियोगी

उपन्यास- हमर गाम

 

1. हमरो गाम मिथिले मे छै

हम कोनो पढ़ल-लिखल लोक नहि छी, अपितु यदि कहियै जे हमरा गाममे एकटा केँ छोड़ि कियो पढ़ल लिखल नहि अछि तऽबेसी उचित होएत। घीच-घाँचि कए कहुना दशमा पास केलहुँ आ चल गेलहुँ दिल्ली रोजगारक खोजमे। शुरुएमे बुझा गेल जे एतए अपनाकेँ दशमा पास कहलासँ लाभ नहि नोकसाने अछि तें एहि बातकेँ नुका रखलहुँ आ जे काज हाथमे आएल से धरैत करैत गेलहुँ। अवसर देखैत काज छोड़ैत पकड़ैत कहुना दस साल बाद लगलहुँ टेम्पू चलबए। ताबत गाम दिश सेहो सड़क सब सुधरि रहल छलैक, फोर-लेन बनब शुरू भऽगेल रहै तऽसोचलहुँ जे गामे घुरि चली, ओतहि टेम्पू चलाएब। कने कमो कमाइ हैत तऽबेसिए लागत कारण गाममे कमसँ कम दिल्लीक सड़लाहा बसातसँ त्राण भेटत। कतबो किछु महग होउ, गाममे एखनहु बसात साफे छैक आ फ्री सेहो कारण एखन तक ओहिपर कोनो मालिक हक नहि जतौलक अछि।

हमर नीक कि खराप लति बूझू एतबे जे भोरमे तीन टाकाक एकटा अखबार कीन लैत छी आ टेम्पूपर जखन बैसल रहैत छी तखन ओकरा पढ़ैत रहैत छी। एक दिन एहने अखबारमे पढ़ल जे मिथिलामे नवका चलन एलैक अछि अपना अपना गामक महान विभूतिक वर्णन करैत किताब लिखब। किछु एहने किताब बजारसँ कीन अनलहुँ। देखलहुँतऽहर्षो भेल आ ताहिसँ बेसी इर्ष्यो आ ग्लानि भेल। हर्ष एहि लऽकए जे पहिल बेर बुझलहुँ मिथिलामे एहन महान विभूति सब भेलाह आ इर्ष्या आ ग्लानि एहि लेल जे हमरा अपन गाममे एहन कोनो विभूति किएक नहि भेलाह।

हमरा चिन्ता भेल- की सत्ते हमरा गाम मे कोनो विभूति नहि भेला? किछु बूढ़ पुरान सँ गप कएल। एक गोटे पूछि देलनि-

खाली पढ़ले लीखल लोक विभूति होइ छै की?”

हम सोचए लगलहुँ। ठीके, से रहितै तऽ  सिनेमा स्टार आ कि खिलाड़ी सब कें कियो चिन्हबे नहि करितै। हमरा बुझा गेल जे आन गामक विभूति सन तऽ नहि, तैयो एतेक जरूर जे हमरा गामक विभूति सब एक हिसाबें कतबो विचित्र रहथु मुदा ओहो लोकनि अपना समय मे गामक नाम कोनो तरहें उजागर करबे केलनि ।

सेहन्ता भेल जे हमहूँ अपना गामक बारेमे किछु लीखी। मुदा की लीखब? लिखबाक लुरियो तऽनहि भेल। तैयो हम ठानि लेल जे लिखबे करब। विभूति लोकनि जे छलाह, जेहन छलाह, भेलाह तऽमिथिलेक सुपुत्र/सुपुत्री ने। आ हमरो गाम जेहने अछि, अछि तऽओही माटिपर कमला बलान कोशीसँ घेराएल, रौदी दाही भोगैत अशिक्षा आ गरीबीमे उबडुब करैत। तें हम निश्चय कएल जे हिनका लोकनिक कीर्तिक गाथा लीखल जाए।एखुनका युगे विज्ञापन आ प्रचारक छिऐ, से गामक नुकाएल छिड़िआएल रत्न सबकेँ बहार करबाक चाही। हम गौआँ भऽकए यदि नहि लिखबनि तऽअनगौआँकेँ कोन मतलब छैक?

ओना तऽलिस्ट पैघ बनि गेल मुदा हम बहुत पुरान लोककेँ पहिने छाँटि कए मात्र दसटाक वर्णन एतए प्रस्तुत करए जा रहल छी। एहिमे पहिल नौटा छथि हमरा गामक नवरत्न आ दसम भेलाह विशिष्ट अतिथि रत्न। आशा करैत छी गौआँ लोकनि हमर एहि प्रयासक प्रशंसा करबे करताह। यदि किछु अनगौआँ मैथिल समाजकेँ हमर गामक एको गोटेक कीर्ति नीक लगलनि तऽहमर प्रयास खूबे सफल बूझल जाएत। नहि तऽकमसँ कम किछु लिखित तऽरहिए जाएत जे एखनुक बूढ़ पुरानक दिवंगत भऽगेलाक बाद नवका पुस्तकेँ पूर्वजक यशक किछु ज्ञान देतैक।

हमर लिखल वस्तु सबकेँ मटिकोरबा गामक मिडिल स्कूलक हेडमास्टर साहेब बहुत कटलनि छँटलनि आ शुद्ध केलनि ताहि लेल हुनका बहुत धन्यवाद। बिना हुनकर सहयोग के ई अपने सबकेँ पढ़बा योग्य नहिए भेल रहैत।हम अपना गामक विभूतिक फोटो नहि छापि रहल छी। एकर कारण अपने सब पूरा पुस्तक पढ़लाक बाद बुझिए जेबैक।

 

विनीत

 

रामलाल परदेशी

(गामक एक उत्साही युवक)

गाम : खकपतिया

डाकघर:मटिकोरबा

जिला : मधुबनी
 

 

2. बीए

मूल नाम: राम किसुन सिंह

पिताक नाम: अजब लाल महतो

जन्म तिथि: 1 जनवरी 1940। ई हुनकर सर्टिफिकेटमे लिखल छनि, मुदा हुनक पिताक अनुसार ओ तीन चारि बरख जेठ जरूरे छथि। जखन ओ मटिकोरबा गामक मिडिल स्कूलमे नाम लिखौलनि तऽहेडमास्टरकेँ जे बूझि पड़लै से लीख देलकै। हुनकर जन्म तऽभरदुतिया दिन भेल छलनि।

शिक्षा: यथा नाम, माने ओ बी.. पास छथि। ओ गौरवसँ एखनहुँ लोककेँ सुनबै छथिन जे मैट्रिक, आइ.. आ बी..मे लगातार ओ तृतीय श्रेणीमे पास केलनि। संगहि मैट्रिकमे दू बेर, आइ..मे तीन बेर आ बी..मे चारि बेर फेल केलनि।

उपलब्धि: हुनक सबसँ पैघ उपलब्धि छनि हमरा गामक पहिल आ एखन तक के अन्तिम ग्रेजुएट भेनाइ। पछिला करीब पचास बरखसँ एहि रेकॉर्डकेँ पकड़ने छथि। ओहू पुरान जमानामे ग्रेजुएट भैयो कए हुनका जखन दस साल तक कतहु नोकरी नहि भेलनि तखन ओ हारि कए पुस्तैनी काज, खेती,मे लागि गेलाह।

एहन नहि जे सत्ते कतहु नोकरी नहि भेलनि। पुर्णियामे एक ठाम हाइ स्कूलमे अध्यापक भेलाह मुदा पहिले दिनक हिनक पढ़ाइ देखि कए ओतुका विद्यार्थी सबकेँ हिनक योग्यताक बेस अन्दाज लागि गेलैक आ ओ सब हड़तालपर बैसि गेल। एमहर साँझमे हिनका जे मच्छर कटलक से बोखार भऽगेलनि। दोसर दिन स्कूल जाइ के काजे नहि पड़लनि। कहुना एक हप्तापर गाम घुरि एलाह। विद्यार्थी सबकेँ विचारल बात विचारले रहि गेलैक। फेर दोसर बेर एहन योग्य शिक्षकसँ भेँट नहिए भेलनि हुनका सबकेँ।

स्वस्थ भेलाक बाद ओ नियारलनि जे मास्टरी हुनका बुते पार नहि लगतनि। चल गेलाह कलकत्ता भाग अजमबै लेल।कलकत्तामे एखनहु बीए पैघ योग्यता बूझल जाइत छलैक। ओना जाहि समय बीए बीए केलनि ताहि समय बिहारक परीक्षा पद्धतिक चर्चा आन आन ठाम शुरू भऽगेल छलैक आ किछु लोक बिहारी बीएकेँ ओकर उचित हक देबा लेल तैयार नहि छल। कलकत्तामे मटिकोरबा गामक एक गोटे कोनो सेठक ड्राइवर छल। ओ हिनक पैरवी केलक सेठ लग। किछु बेसिए बढ़ा चढ़ा कए कहि देलकै सेठकेँ। फल ई भेल जे सेठ हिनका बिना कोनो पूछताछ के अपना गद्दीपर मनेजर बना देलकनि। ई बहुत खुसी भेलाह।

मुदा भाग्यकेँ किछु दोसरे रस्ता देखेबाक छलैक। तेसर दिन सेठक एकटा मित्र आबि गेल आ ओकरा अनुपस्थितिमे ओहिना हिनका संग गपसप करए लागल। ओकरा मोनमे कोनो दुर्भाव नहि छलैक मुदा समस्या छल घेघ कतहु नुकाएल रहए ! सेठक मित्रकेँ बीएक असली घिबही बीए हेबापर कने सन्देह भऽगेलै आ एकर चर्चा ओ साँझमे अपना मित्र लग केलक। अगिला दिन जखन बीए गद्दीपर बैसलाह तखन सेठ आबि कए हुनका पछिला तीन दिनक हिसाब किताब पूछि बैसल। बीए घबरा गेलाह। ओना ओ कोनो गड़बड़ी नहि केने छलखिन मुदा हिनका ई बात सिखले नहि छलनि जे यदि किओ हिसाब किताब पूछत तऽउत्तर कोना देल जाए। एखन तक ओ खाली किताबी प्रश्नक उत्तर रटैत आएल छलाह। व्यावहारिक काजक उत्तर देब सिखबे नहि केलनि। से एतए ओ गड़बड़ा गेलाह। फल जे ओही दिन दुपहरियामे गामक गाड़ी धेलनि।

एहिना ओ पटना, दिल्ली मुम्बइ आदि कतेको छोट पैघ शहरमे सेहो भाग्य अजमौलनि मुदा भाग्य तऽहुनका गाम घीचऽचाहैत छलनि से पुर्णिया रहओ कि पटना,लखनउ कि लुधियाना, सब ठाम कोनो ने कोनो एहन परिस्थिति भइए गेलनि जे दू चारि दिनसँ बेसी नहि टिक सकलाह।

बीए सौंसेसँ बौआ कए गाममे खेती करए लगलाह। खेतीमे खूब नाम कमौलनि। दस किलो के मूर आ सात किलो के बैगन हुनके खेतमे उपजल छलनि। हमरा गाममे गुलाब आ गेंदा फूलक खेती हुनके शुरू कएल छिएनि। एखन हमर गाम एकर नीक व्यवसाय कऽरहल अछि। आब तऽदेखादेखी अगल बगलक गाम सबमे सेहो फूलक नीक खेती भऽरहलै अछि। एहि प्रयास लेल हुनका गामक पंचायतसँ विशेष पुरस्कार भेटलनि।

बीएक सबसँ पैघ उपलब्धि भेलनि गामक लोककेँ स्कूली आ कौलेजिया पढ़ाइक प्रति अविश्वास करौनाइ। तकर बाद कियो अपना धीया-पूताकेँ स्कूल कौलेज नहि पठौलक। मात्र साक्षर बनै लेल मटिकोरबाक मिडिल स्कूल तक। हमहू जे दशमा पास केलहुँ से एही कारण सम्भव भेल जे बाबूजी गुजरि गेला आ माएकेँ हम कहियो ई बूझऽनहि देलियै जे हम कतए जाइ छी आ की करै छी।

दस साल तक विभिन्न शहर सबमे घुमैत ठोकर खाइत बीएकेँ किछु नीक बुद्धि तऽभैए गेलनि। एकर उपयोग ओ केलनि गाममे झगड़लगौनाक रूपमे। हुनकर विशेषता अछि जे हुनका संग जे लोक पाँचो मिनट बैसि गेल आ हुनकर देल एक खिल्ली पान खा लेलक ओ अपना दियादी आ कि पारिवारिक झगड़ामे जरूर फँसत। आ ओहि झगड़ाक पंचैतीमे बीए जरूरे रहता। बेसी झगड़ा गामक पंचैतीसँ उपर नहिए जाइ छैक। किछुए एहन घटना भेलैक जे बीए बादमे सम्हारि नहि सकला आ मोकदमा भऽगेलै। कतबो माँजल ओझा गुणी रहथु, किछु भूत हुनको हाथसँ छुटिए जाइ छनि ने। तहिना बूझू।

हमरा गामक सीमामे जे चारू कातक चारि पाँच गामक लोकक जमीन जाल छैक ओहो सब एहि झगड़लगौना प्रेतक चक्करमे फँसिये जाइत अछि। सबकेँ बूझल छैक जे बीए संग बैसनाइ आ हुनकर पान खेनाइ माने भेल कपारपर दुरमतिया सवार। मुदा कहाँ कियो बचि पबैत अछि? बीएक मधुर सम्भाषणक आगू सब फेल।

बीए एहि लूड़िसँ कोनो कमाइ नहि करैत छथि, ई तऽमात्र हुनकर मनोरंजन छिएनि। एहन उदार चरित्रक लोक परोपट्टामे नहि भेटत। एहि किताब लिखबाक क्रम मे एक दिन हम पूछि देलिएनि-

एखन तक कतेक लोकक बीच झगड़ा लगा देने हेबै?”

ओ तऽ सबटा लीख कए रखने छला। एकटा पैघ लिस्ट हमरा आगू पसारि देलनि। हम चकित भऽ गेलहुँ। बीए तऽ नारदोक कान कटलनि मुदा किनको बूझल नहि। जरूर एकरा एक बेर गिनीज बुक अथवा लिमका बुक मे छपबैक कोशिश करबाक चाही। से भऽ गेला सँ अहीं कहू हमर गाम अपना जिला आ कि प्रदेश मे नाम करत की नहि?

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3. खुरचन ठाकुर

मूल नाम: किसुनलाल ठाकुर, प्रसिद्धि खुरचन ठाकुर

पिताक नाम: तिरपित ठाकुर

जन्म तिथि: अज्ञात

मृत्यु: सन उनैस सौ सतासी सालक बाढ़िमे

उपलब्धि: खुरचन ठाकुरक प्रसिद्धि खुरचने लऽकए भेल। हुनका लेल अस्तूरा बेकार छल। अनेरे लोक टाका खर्चा करत। ओ खुरचनकेँ पिजा लैत छलाह आ केहनो बढ़ल केस-दाढ़ी रहओ, काटि दैत छलाह।ओहीसँ नह सेहो काटि दैत छलाह। जखन केश छँटबैक प्रचलन बढ़लै तखन खुरचन ठाकुर अपन ओही औजारसँ केश छाँटब सेहो शुरू केलनि। केशमे ककबा सटा दैत छलखिन आ ओहि उपरसँ खुरचन चला दैत छलखिन। देखनिहारकेँ चकचोन्ही लागि जाइ छलनि जे बिना कैंची के केश कोना एतेक सुन्दर छँटा जाइत छलैक।

आ केहनो फोरा-फुन्सी रहओ खुरचन ठाकुरक डाकदरीक आगू सब जेना सरेंडर कऽदैत छल। फोराक डाकदर रूपमे खुरचन ठाकुर परोपट्टे नहि दश कोसमे नामी छलाह। कहियो कए तऽहुनका दूरापर लोकक लाइन लागि जाइत छल। खुरचन ठाकुरक खुरचनक स्पर्श होइतहि लोककेँ आरामक बोध होमए लगै छलै।

बीए जखन एक बेर कोनो शहरसँ घुरलाह तऽखुरचन ठाकुर हुनका देखलक ओतुका सैलूनमे केश छँटेने। बीएकेँ एखनहुँ मोन छनि खुरचन ठाकुरक हुथान। आ ओहि ‘अलूरि’ नापितक लेल प्रयोग कएल गेल अपशब्द सब जे बीए हमरा सुना तऽदेलनि मुदा लिखबासँ मना कऽदेलनि।

पूरा गाममे खुरचन ठाकुर एकसर, सौंसे गाम हुनकर जजमान। मुदा मात्र एकटा औजार, खुरचन, आ गाम नेहाल। एहन छलाह रत्न हमर खुरचन ठाकुर।

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4. टहलू दास

मूलनाम : सियाराममण्डल

पिताक नाम: जगदेव मण्डल

जन्मतिथि: अज्ञात

मृत्यु: अकालकवर्ष (सम्भवतःउनैससौछियासठि)

उपलब्धि : टहलूटहलैततऽकमेछलाहमुदाहुनकचालिमेबड़काबड़काहारिजाइतछल।बूढ़लोकसबखिस्साकहैतछथिजेएकबेरककरोसारसाइकिलपरचढ़िकए

हमरागामएलाह।हुनकरगामकरीबसात-आठकोस (एखुनकालोकलेलबूझूचौबीस-पचीसकिलोमीटर) दूर।साइकिल ओहि समय ककरो ककरो रहैत छलै, हमरा गाममे ककरो नहि छलै से बूझू सौंसे गाम जमा भऽगेल साइकिल देखबा लेल।

टहलूहुनकापूछिदेलखिन-

कतेकसमयलागलसाइकिलसँहमरागामअबैमे?”

ओगर्वसँबजलाह-

इएहगोटेकघंटाबूझिलिअऽ।

ओहो अन्दाजे बजलाह कारण हाथमे घड़ी तऽछलनि नहि आ ने टहलूएकेँ बूझल छलनि जे एक घंटा कतेक समय होइत छैक।टहलूहुनकादूसैतबजलाह-

एतेककालमेतऽहमपएरेचलजाएबआघुरिकएचलोआएब, आयदिइन्तजामकएलरहततऽअहाँकघरपरभोजनोकऽलेब।

सारकेँभेलनिजेअनगौआँबूझिकनेडींगहँकैतछथि।ओहुनालोक गाममे आएल ककरोसारकसंगहँसीमजाककऽलैतेछल।एहनोकतहुभेलैएजेलोकसाइकिलसँदूनोसँबेसीचलिलेत? मुदाएकरफरिछौहटिकोनाहोअए? ओजमानातऽमोबाइलटेलीफोनकछलैनहिजेतुरत्तेईककरोखबरिकऽदितथिनगाममेजँचैलेलजेसत्तेमेटहलूओहिगामपहुँचलाहकिनहि।

योजनाबनलजेबड़कीपोखरिकचारूकातदूनूगोटेघुमता।सारसाइकिलसँआटहलूपएरे।पोखरिक चारू कात रस्ता साइकिलो चलबै लेल नीके छलैक। जेना कि ओहि समय सब ठाम रहैत छलै, कच्चिए मुदा समतल आ पीटल-पाटल। जतेकतेजअपनचलिसकथिसेचलथु।यदिटहलूसत्तेमेबड़तेजचलैतछथितऽचक्करलगबैमेकमेसमयलगतनि।ओचक्करलगबैतरहताहजाबतसारमहोदय

साइकिलसँएकचक्करपूरानहिकऽलेथि।यदिसारेमहोदयपहिनेएकचक्करलगालेताहतऽओहोताबततकचक्करलगबैतरहताजाबतटहलूएकचक्कर

पूरानहिकऽलेथि।अन्तमेजेजतेकबेसीचक्करलगौनेरहतसेततेकसौटाकाजीतत।मानेभेलजेएकचक्करकेसमयमेयदिकियोदूचक्करलगालेततऽएक चक्कर बेसी भेलैक ताहि लेल एकसौरुपैयाजीतत।यदिआधाचक्करबेसीलगाओततऽपचासरुपैयाजीतत।एहिसँकमभेलापरदूनूकेँबरोबरिएबूझलजाएत।

गौआँजमाभऽगेलदेखबालेल।सारकबहिनोकेँकहलगेलनिहुनकेपक्षमेरहैलेलजेकोनोतरहकबेइमानीकगुंजाइसनहिरहै।खेलाशुरूभेल।जतेकताकत

छलनिततेकपैडिलमेलगबैतसारमहोदयसाइकिलदौड़ेलनि।मुदाटहलूतऽनिपत्ता।जाबतओएकमोहारटपथिताबतटहलूएकचक्करपूराकऽलेलनि।

साइकिलआपएरेदौड़चलैतरहल।अन्तमेसारमहोदयपूरेतीनसौटाकाहारिगेलाह।

ओजेहमरागामसँपड़ेलासेफेरघुरिकएकहियोनहिएएला।टहलूदासकएहिगुणकजानकारीगामोमेबहुतोलोककेँनहिछलैक।आबतऽहिनकरगुणक

बखानसबतरिहोमएलागल।डाकविभागहिनकादौड़हाकनोकरीदेबालेलतैयारभऽगेलआएहिआशयकेचिट्ठीसेहोहिनकापठादेलकनि।मुदाई

अस्वीकारकऽदेलखिन।

“उत्तम खेती, मध्यम बान, अधमचाकरी, भीखनिदान”

बलाफकराजेरटनेरहथि।ओकोनोदशामेचाकरीनहिकरताह। नहिए केलनि।

एहनमहानछलाहटहलूदास।

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5. चिलमसोंट भाइ

मूलनाम : केवलराउत

पिताकनाम : बनारसीराउत

जन्म तिथि : अज्ञात

मृत्यु: करीबचालीससालपहिने।

उपलब्धि : नामगुणकाजछलनिहुनकर।चिलमसोंटनामेपड़लनिजखनहुनकाचिलमसँबीतभरिधधराउठएलगलै।गामैकगजेरीसाहुकअभिन्नमित्र।गजेरी

साहुगाजाबेचथिआचिलमसोंटकीनथिआताहिपरसोंटलगाबथि।सोंटलगबैमेकिछुगोटेआरसंगदैतछलखिनमुदाओसबहमरासंकलनलेल

महत्वपूर्णनहिछथि।

एकबेरगाममेदूटाबबाजीएला।ईदूनूएकनम्बरकेगँजेरी।ओ बरकी पोखरिक पाकरि गाछ तर अपन आसन जमा लेलनि। एकटा गौआँकेँ चेला मुड़लनि, ओहि दिनक बुतातीक जोगार सेहो केलनि आ चिलम लेल गाजाक जोगार सेहो। अपनामे मस्त ई दूनू लगलाह चिलम सोंटए।

किछु गौआँ हिनक चिलमक सोंट देखि रहल छल। अति साधारण रूपें ई सब सोंट लगा रहल छलाह। ओ टिप्पणी कैए देलक-

“अहाँ दूनूसँ नीक तऽहमर गौआँ चिलम धुकैत अछि, ओकर नामे पड़ि गेलैक चिलमसोंट भाइ।”

बबाजी सबकेँ लगलनि जे गौआँ सब हिनकर निन्दा कऽरहल छनि। ओ चिलमसोंटकेँ बजबै लेल कहलखिन।

चिलमसोंट बजाओल गेलाह। फोकट के गाजा आ तकर सोंट – ई बात सोचिए कए ओ मुदित भेल छलाह। तैयो अपन गुणकेँ नुकबैत बबाजी दूनूकेँ टिटकारी देलखिन नीकसँ सोंट लगबै लेल। ओ सब पूरा दम लगा कए सोंट खिचलनि तऽएक बेर कने दू-तीन आँगुर धरि धधरा उपर उठलैक। चिलमसोंट विनम्र भावें अपन चिलम सुनगौलनि आ लगला सोंट खीचए। जेना जेना गाल धँसैत गेलनि तेना तेना धधरा उपर उठैत गेलै। अन्तमे पूरे हाथ भरि धधरा उठि गेलै। एहन चमत्कार तऽपहिने कोनो गौआँ नहि देखने छल। बबाजी सब तऽचकित आ डराएल। ओहिमे एक गोटे दोसरकेँ कहलखिन-

“एकरा चेला बना लेब ठीक रहत।”

चिलमसोंटकेँ गाजा चढ़ि गेल छलनि। ओ उनटे ओहि बबाजीकेँ भरि पाँज कऽधेलनि आ बजलाह-

“रौ सार, चिलम सोंटैक लूरि तऽछौके नहि, हमरेपर गुरुआइ करमे? हमरा चेला बनेमे? ढहलेल नहि तन। चल, आइसँ तो दूनू हमर चेला बनि जो आ हमर नोकर जकाँ काज कर। साँझुक पहर हम तोरा दूनूकेँ चिलम सोंटैक लूरि सिखाएल करबौ।”

आब तऽदूनू बबाजीक बोलती बन्द। कहुना अपनाकेँ छोड़ा कए ओ दूनू नाङरि सुटकबैत गामसँ भगलाह।

चिलमसोंट भाइ अपना काजमे अद्वितीय छलाह। इलाकामे करीब दस गामक बीच हुनकासँ हाथ मिलबै बला कियो नहि भेल छल।

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6. नक्कू पहलमान

मूल नाम: परमेसर यादव

पिताक नाम: शीतल यादव

जन्म तिथि: अज्ञात

मृत्यु: सन उनैस सौ बेरासी साल

उपलब्धि: नक्कू कने नकिआइत छलाह बजबामे तें ई नाम भेलनि। हुनका हनुमानजीक सराप आ आशीर्वाद छलनि जे कोनो कुश्ती खेलामे पहिल दू बेर तोरा हारए पड़तौ। जखन तों दू बेर हारि जेमे तखन तेसर बेर केहनो पहलमानसँ भिरमे, जितबे करमे, से ओ साक्षात भीमे किएक नहि आबि जाथु। बूझि ले हम अपनहि तोरा शरीरमे प्रवेश कऽजेबौ।

ई बात ककरहु नहि बूझल छलैक हुनकर बाबूजीकेँ छोड़ि। साधारण भिड़न्तमे हारि-जीत चलिते रहैत छलैक। लोक एतेक ठेकान नहिए करैत छल जे कोना दू बेर हारलाक बाद नक्कू निश्चिते तेसर बेर जीत जाइते छथि।

एक बेर दरभंगा राजक पोसुआ कैलू पहलमान हमरा गाम दिससँ जाइत छला। हुनका गुमान जे पूरा जिलामे हुनकासँ हाथ भिरबै बला कियो नहि छनि। ई गप ताहि दिनक छी जहिया मधुबनी जिला नहि बनल छलै आ दरभंगे जिलाक सवडिविजन छलै। हमरा गाममे कियो अगत्ती छौंड़ा हुनका टिटकारि देलक जे गामक नक्कू पहलमानसँ एक बेर हाथ भिरा लेथि। पहिने तऽओ अपन प्रतिष्ठा बूझि एकरा अनठबए चाहलाह मुदा गौआँक जिदपर अखाड़ामे उतरि गेला। नक्कू सेहो उतरला आ हनुमानजीकेँ स्मरण केलनि।

खेला शुरु भेल। कैलू आ नक्कू अखाड़ामे चक्कर्घिन्नी कटैत आ एक दोसरापर दाओ बजारैक चेष्टामे लागल। कियो दोसराक देहमे सटि नहि रहल छल। आ कि नक्कू किछु केलनि आ क्षणेमे कैलू चित, नक्कू हुनका छातीपर सवार। लोक अकचकाएले रहि गेल। तालीपर ताली परए लागल। कैलूकेँ किछु बुझाइये नहि रहल छलनि जे की भेलै, कोना भेलै, कोन दाओ लगलै जकर ओ सम्हार नहि कऽसकला।

दूनू पहलमान उठलाह, देह झाड़लनि, हाथ मिलौलनि आ अपन अपन गन्तव्य दिस विदा भेला।

नक्कू जीत गेलाह मुदा हुनका एकर कोनो गुमान नहि छलनि। हुनका बूझल छलनि जे अगिला दू कुश्ती हुनका हारबाक छनि। ओ अपनाकेँ कहियो महान नहि कहलनि, ई हुनकर नम्रता छलनि।

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7. पण्डितजी

मूल नाम : राधाकृष्ण मिश्र

पिताक नाम: लक्ष्मण मिश्र

जन्म तिथि: उनैस सौ पचास सालक फगुआ दिन।

उपलब्धि: हमरा गामक एकमात्र ब्राह्मण पुरोहित परिवार, पण्डितजी खाली नामेसँ पण्डित छथि। हिसाबें औंठा छापे रहि गेला। भरि गामक जजमनिका सम्हारै लेल भागिनकेँ बजा अनलनि। अपने ओकरा संग खाली नोंत खेबा लेल जाइ छथि।

मुदा पण्डितजी अद्वितीय भैए गेलाह। ई भेल हुनक अद्भुत गुणक कारण। ओ महिंसलेट भऽगेला। महींसपर बैसल बाधे बाध बौआइत रहबामे ओ ककरो कान काटि सकैत छथि। बच्चहिंसँ ओ महींसपर जे चढ़ए लगलाह से एखन तक कइए रहल छथि। महींसे पोसब हुनक मुख्य व्यवसाय भेलनि। एकटा ब्राह्मण कुलमे जन्म लइयो कए ओ कोनो यादव परिवारसँ बेसी दूधक व्यापार केलनि आ ओहिना कोनो यादव परिवारसँ बेसी पानि दूधमे मिलबैत रहला। तैयो हिनक दूधक बिक्री कम नहि भेल। महींसक खरीद बिक्री केलनि, ओकर दवाइ दारू सेहो बुझैत छथि आ सब तरहें महींसक विशेषज्ञ रूपें इलाकामे प्रसिद्ध छथि। हिनका प्रसादें कतेक महींस कें प्राण बचलै। ब्लॉक के मवेसी डाकदर सेहो हिनकर ज्ञानक प्रशंसा करैत छनि।

पण्डितजी एकटा आर गुण लेल प्रसिद्ध छथिआशीर्वाद देबाक हिनक शब्दकोष बिल्कुल अलग अछि। जीबू जागू ढनढन पादूतऽ हिनकर तकिया कलाम अछि मुदा जखन कियो कोनो तरहक छोट पैघ गलती कऽ बैसैत अछि तखन हिनक मुह सँ बहराएल शब्द विश्वक कोनो कोष मे भेटऽ बला नहि। आ सुननिहार केहनो मोट चामक बनल रहओ, कान मूनहि पड़ैत छैक। ओ आशीर्वाद-वर्षा लोकक धैर्यक परीक्षा सेहो लैत छैक। आ जे कने अधीर भेल तकरा तऽ भूलुण्ठित भेनहि कल्याण।

महींसक संग संग ई गायक व्यापार सेहो करैत छथि। गाय दरबज्जापर पोसैत कमे छथि, खाली खरीद बिक्रीक काज हाटपर करैत छथि। मटिकोरबा गामक हाटपर मरदुआरि कैल गाय सस्त दामपर कीनैत छथि, ओकरा दस दिन नीक जकाँ खुआ पिआ कए आ जहिना आइकालि लोक केश रंगैत अछि तहिना नवका तरीकासँ रंग चढ़ा कए कारी गायक रूपमे दुन्ना-तिगुन्ना दाममे बेचि लैत छथि। बेचबा काल ध्यान रखैत छथि जे ग्राहक बेस दूरक इलाकासँ रहए। लग पासक ग्राहककेँ ओ कारी गाय नहि बेचैत छथि। एक दू बेर गौआँकेँ सर सम्बन्धीक मारफत सुनबामे एलै जे मासे दिनक भीतर गायक रंग बदलए लगलै। मुदा ई शिकाएति सीधे पण्डितजी लग कियो नहि पहुँचेलक। आशीर्वाद-वर्षा मे भिजबाक डर जे रहैत छैक।

एखन तक पण्डितजी बेदाग अपन व्यवसायमे लागल छथि।

 

जारी....

 

रचनापर अपन मतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।