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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक   

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मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-२०२१.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

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योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी’

पिरामिडक देश मे (तेसर खेप)

(पछिला दू अंक मे अपने पढ़लियैक मिस्रक राजधानी काहिरा के आसपासक इलाका मे हमर तीन दिनक यात्राक अनुभव, जाहि मे मुख्य छल गीजाक पिरामिड परिसर आ स्फिंक्स, पापीरस गैलरी, सकाराक स्टेप पिरामिड आ दहसुरक टेढ़ आ लाल पिरामिडक दर्शन, मेम्फिसक म्यूजियम मे रानी हातसेप्सुतक स्फिंक्स आ फैरो रैमसेस-2 के अनेक मूर्तिक दर्शन, काहिरा शहर मे ईजिप्सियन म्यूजियम मे तूतनखामन के सोनाक ताबूत आ अनेक ममी देखनाइ आ बजार घुमनाइ।)

चारिम दिन 20 सितम्बर 2019। अधरतिए मे होटल छोड़बाक छल आसवानक यात्रा लेल। आसवान मिस्रक दक्षिण भाग मे अवस्थित प्रसिद्ध शहर छैक जे प्राचीन समय सँ बनिज व्यापारक प्रमुख केन्द्र रहलैक अछि। थोमस कूकक प्रोग्रामक अनुसार हम सब आब एही दछिनबरिया इलाका मे बस, जहाज आदि सँ घुमैत रहब आ अन्तिम दिन लक्जर शहर सँ फेर हवाइ जहाज द्वारा काहिरा पहुँचि देश आपस जाएब।

पछिला राति मे मात्र तीन घंटा लेल हमरा निन्नक आवाहन नहिए कएल भेल, वेकअप कॉलक भरोसे हम नहिए रहैत छी कारण सुतबा काल आँखिक चश्माक संग कानक चश्मा सेहो खोलि कए राखि दैत छिऐक। तें जगले आ सतर्क रहलहुँ। दू बजे होटल सँ चेकआउट करैत जलपानक पैकेट संग मे लैत गीजाक होटल छोड़ि देल आ बस मे सवार भए काहिरा एयरपोर्ट विदा होइत गेलहुँ।

एयरपोर्ट पहुँचि हमरा आसवान लेल तुरत्ते एकटा पहिलुके फ्लाइट मे जगह भेटि गेल कारण हमर एहि खंडक टिकट बिजनेस क्लासक छल। सम्भवतः थोमस कूक कें सब पसिंजर लेल इकोनॉमी क्लास मे टिकट नहि भेटल हेतैक तें हमर प्रोमोसन भऽ गेल छल। अस्तु, एहि सँ कोनो विशेष लाभ नहि, एतबे जे बिजनेस क्लास मे एक कप नीक गर्म कॉफी भेटि गेल आ काहिरा एयरपोर्ट पर प्रतीक्षा करबाक बदला आसवान पहुँचि एयरपोर्ट पर प्रतीक्षा करए पड़ल। जलपानक पैकेट देखल, किछु बेसिये सामान बुझाएल। अस्तु, हिसाबें निकालि कए खा लेल आ बाकी राखि देल। आजुक प्रोग्राम मे लंच सेहो पैकेटे भेटबाक छलैक कारण बहुत दूरक बस यात्रा छल आ साँझे भेला पर जहाज पर भोजन भेटैत।

ग्रुपक सदस्य लोकनि बादक फ्लाइट सँ बेराबेरी अबैत गेलाह। सब कें एकत्रित करैत सभक सामान बस मे उठबैत प्रायः साढ़े आठ बाजि गेलैक। बस मे चढ़िते थोमस कूकक स्थानीय पार्टनर कम्पनीक लोक लंच पैकेट आ जल सब कें बाँटि देलनि। एतए मोहम्मद अब्दुल्ला नामक गाइड बस मे संग भेलाह। कारी अफ्रिकन मूलक बेस पैघ कायाक व्यक्ति मुदा बहुत हँसमुख, ईजिप्टोलोजीक नीक ज्ञान, अपना काज मे दक्ष आ बहुत परिस्कृत अंग्रेजी बजैत। सब यात्री कें आदर अथवा मजाक मे ‘फैरो’ सँ सम्बोधन हुनक, माने हुनका लेल तऽ हम सब टूरिस्टे सम्राट छलिएनि। टूरिस्टेक आय सँ हुनको पेट चलैत छलनि आ देशक अर्थ व्यवस्था सेहो। अगिला चारि दिन हिनके संग हमरा सब कें भ्रमण करबाक छल। गाइडक बुद्धि आ व्यवहार सँ सब गोटे प्रसन्न छलाह आ थोमस कुक कें एहू लेल बधाइ भेटलनि।

गाइड अब्दुल्ला बूझू प्राइमरी स्कूलक मास्टर जकाँ हमरा सब कें इतिहास बुझा रहल छथि, बीच बीच मे प्रश्न सेहो पूछि बैसैत छथि। भाषणक बीच ककरो गप करब हुनका पसिन्न नहि। यात्री सब सेहो मिस्रक इतिहास बहुत किछु बूझि पढ़ि कए आएल छथि आ गाइडक बात ध्यान सँ सुनलाक बाद हाथ उठा हुनकर प्रश्नक उत्तर दैत छथि अथवा किछु प्रतिप्रश्न सेहो करैत छथि।

आइ हमरा सब कें जेबाक छल अबू सिम्बेल नामक जगह। ताहि सँ पहिने सकाले ओ सब कें आसवानक हाइ डैम देखबा लेल लऽ गेलखिन। आसवानक ई हाइ डैम आधुनिक आ स्वतंत्र मिस्रक कायाकल्प केनिहार प्रोजेक्ट छलैक जहिना स्वतंत्र भारत लेल भाखड़ा-नाँगल सदृश योजना। मिस्र मे नील नदीक प्रवेश करितहिं पैघ बान्ह बना कए विस्तृत जलाशय आ जल-विद्युत उत्पादन केन्द्र बनाओल गेल। नेहरूक परम मित्र मिस्रक राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासर एकर सूत्रधार छलाह। तें बान्ह सँ बनल जलाशय कें ‘लेक नासर’ कहल जाइत छैक। हाइ डैम पर ठाढ़ भऽ कए लेक नासरक विशालताक मात्र कल्पना कएल जा सकैत छैक।

नील नदी पर आसवान इलाका मे अंग्रेज शासन मे सेहो एकटा बान्ह बनल छलैक, ओ छैके, मुदा छोट आ पुरान, एकरा आब ‘लो डैम’ कहल जाइत छैक। नव स्वतंत्र मिस्र कें औद्योगिक राष्ट्र बनेबाक दिशा मे बिजली उत्पादन बहुत जरूरी छलैक। ताही दिशा मे काज करैत राष्ट्रपति नासर पहिने स्वेज नहरक राष्ट्रीयकरण केलनि, अंग्रेजक हाथ सँ ओकर स्वामित्व अबिते राष्ट्रक आय सेहो बढ़ि गेलैक। तखन रूसक सहायता सँ नव पैघ डैम बनाओल गेल। गाइड अब्दुल्ला डैम आ लेक सम्बन्धित बहुत रास बात बतबैत छथि जाहि मे मुख्य अछि एखन लेक मे सहसह करैत गोहिक जनसंख्या। गोहि प्राचीन कालहिं सँ नील नदी मे भेटैत रहलैक आ नाविक सब कें सतबैत रहलैक। तें एकरो देवताक खाढ़ी मे राखल गेल। बान्ह बनला पर लेक मे गोहि सब फँसि गेल, दोसर कात जाएत कोना ? प्रजनन चलैत रहलैक आ जनसंख्या बढ़ैत रहलैक। एकर शिकार पर प्रतिबन्ध लागि गेला सँ ई जानवर आओरो छुट्टा भऽ गेल। एखन स्थिति ई छैक जे यदि पति पत्नी मे झगड़ो होइत छैक तऽ धमकी इएह देल जाइत छैक — “लेक नासर मे फेकि देबौ, गोहिक शिकार बनमे”।

लेक नासरक विशालताक अन्दाज करबा लेल बुझियौ जे एकर जल धारण क्षमता 132 घन किलोमीटर छैक, एकरा तुलना मे भारतक सबसँ पैघ नर्मदा बान्हक जलाशय ‘इन्दिरा सागर डैम’क क्षमता मात्र 12.2 घन किलोमीटर छैक। लेक नासर के सतहक घेरा करीब साढ़े पाँच हजार वर्गकिलोमीटर मे पसरल छैक, बूझू एकर तुलना मे भाखड़ाक गोविन्द सागर मात्र 168 वर्गकिलोमीटर छेकने छैक।

एहि जलाशयक बनला सँ मिस्रक एहि इलाका मे अवस्थित कएकटा प्राचीन स्मारक ओकरा पेट मे चल गेलैक। एहि मे सँ किछु अति महत्वपूर्ण स्मारक कें ओ लोकनि पूर्ण रूपें एक एकटा पाथर काटि कए उठा कए प्रतिस्थापित कऽ देलनि। ई काज कएल गेल यूनेस्को के तत्वावधान मे अनेको देशक वास्तुकार, इंजीनियर आ तकनीकी विशेषज्ञ लोकनिक देखरेख मे। एहने प्रतिस्थापित स्मारक अछि अबू सिम्बेल मे उनैसम वंशक प्रतापी सम्राट रैम्सेस-2 के मंदिर।

अबू सिम्बेल आसवान शहर सँ 300 किलोमीटर दूर अवस्थित अछि, हिसाबें लेक नासरक दोसर छोड़ पर, रस्ता सपाट मरुभूमि बाटे। करीब चारि घंटा जेबा मे आ ओतबे फेर घुरबा मे लगैत। एहि यात्रा मे बसक एयरकन्डिसनिंग मसीनक देखभाल लेल अलग सँ मिस्त्री सेहो बस मे चढ़ल गेलाह कारण आइ गर्मी सेहो खूब छलैक आ रस्ता मे मरुभूमिक बीच कोनो तरहक सहायता भेटब असम्भवे।

मरुभूमि मे एतए सड़क एकदम सपाट आ सीधा, बूझू पचीसो किलोमीटर मे कोनो घुमाव नहि। दूनू कात जतेक दूर तक नजरि जाइत छल कतहु कोनो आबादीक चिन्ह नहि। रस्ता मे कतहु कोनो गाड़ी नहि, कखनहु कए एकाधटा मिलिटरी ट्रक मात्र जाइत अबैत।

अब्दुल्ला बतौलनि जे रस्ता मे एहि गर्मी मे मरुभूमिक प्रसिद्ध घटना ‘मृग मरीचिका’ (mirage) देखब सम्भव होएत। ठीके करीब एगारह बजे तक रौद एतेक तेज भऽ गेल छलैक जे मरीचिका देखबा मे आबऽ लागल। किताबे मे एहि घटनाक बारे मे पढ़ने रही मुदा प्रत्यक्षतः आइए देखल। एहि यात्रा मे बूझू ई बोनस भेल।

पूरा रस्ताक बीच मात्र एक ठाम ‘मिडवे’ जकाँ एकटा दोकान जतए किछु ड्रिंक आदि भेटैत आ पाँच पौंड बला पेड शौचालयक सुविधा छलैक। करीब दू घंटाक यात्राक बाद आएल ओ मिडवे। सब गोटे उतरैत गेलहुँ। भारत मे एहन कोनो मिडवे पर अनेको गाड़ी बस लागल रहैत मुदा एतए किछु नहि। एकमात्र हमरा सबहिक बस। कने लेट भऽ गेला सँ दोसर टूरिस्ट बस पहिनहि चल गेल छलैक। एहि मिडवे मे एकटा घर आ तकरा आगू किछु काठक खुट्टा पर चढ़ाओल पातर छाही। मुदा वाह रे मरुभूमिक घरक छाही ! मकइक डाँट उपर मे छिड़िआएल, एतेक हटल हटल जे कहुना छाहरिक बोध होइत। एहि सँ घनगर तऽ बाती आ खरही देल बिन छाड़ल ठाठ हमरा सब बन्हैत छी गाम मे। बरखा तऽ एतए होइते नहि छैक तखन रौद सँ बँचबा लेल एतबो बहुत।

अस्तु, एतए लोक शंका निवारण केलक, किछु गोटे कोल्ड ड्रिंक लेलनि। दस मिनट बाद बस विदा भेल। जेना जेना हम सब अबू सिम्बेलक लग अबैत गेलहुँ, गाम घरक दर्शन होमए लागल। मरुभूमि मे गाम घर तऽ जलक स्रोत ओएह लेक नासर।

करीब डेढ़ बजे हम सब अबू सिम्बेल गाम पहुँचलहुँ। पार्किंग मे बस लगा देल गेल। ओतए सँ हमरा सब कें पएरे करीब आधा किलोमीटर चलि कए ओहि स्थल पर पहुँचबाक छल जतए प्रतिस्थापित मंदिर छलैक। रस्ता मे थोड़ेक दूर तक तऽ दूनू कातक मीनाबजारक छाहरि छलैक। तकर बाद जतए टिकट चेक कएल गेल ओतए एकटा घर ‘विजिटर सेन्टर’ बनाओल। एहि मे प्रतिस्थापन कालक पूरा भीडियो चलैत। तकर बाद रस्ता फेर खुला आ प्रचंड रौद मे।

ई मंदिर अजन्ताक गुफा जकाँ पाथर कें काटि कए बनाओल गेल छलैक ईसा पूर्व तेरहम शताब्दी मे सम्राट रैमसेस-2 द्वारा। एकटा पैघ मंदिर अपना लेल आ बगल मे दोसर छोट मंदिर अपन सर्वप्रिय रानी नेफरतारी लेल। असल मे मंदिर मे ओहि समयक प्रचलित देवता ‘आमुन’ (Amun), ‘रा-होराख्ती’ (Ra-Horakhty) आ ‘ता’ (Ptah) कें समर्पित छल। ‘रा’ सूर्य कें कहल गेल छनि।

प्रतिस्थापित करबा लेल पहिने उपरका पाथर कें हल्लुक ब्लास्ट सँ हटाओल गेल। तखन 20-30 टन ओजन के टुकड़ी मे मूर्ति सब कें काटल गेल। एक हजार सँ बेसी एहन टुकड़ी सब कें विशाल किरान द्वारा उठा कए नव जगह आनि फेर एक एकटा टुकड़ी कें बैसाओल गेल। एहि लेल पहिने कृत्रिम पहाड़ी बनाओल गेल आ ओकरा खोह मे पाथरक टुकड़ी सब कें एहि तरहें बैसाओल गेल जे एकदम असली मंदिर बनि गेल। विश्वक धरोहर कें सुरक्षित रखबाक एतेक पैघ स्तर पर एहन भगीरथ प्रयास अन्यत्र कतहु नहि भेल छलैक। सबसँ मुख्य बात छलैक मंदिरक द्वारक दिशा सही राखब जाहि सँ 22 अक्टूबर आ 22 फरवरी कें भोर मे सूर्योदयक समय सूर्यक किरण एकदम भीतरक गर्भगृह पर पड़ैक, जेना कि मूल मंदिर मे होइत छलैक। एहि तारीख कें विद्वान लोकनि रैमसेस-2 के जन्मदिन आ राज्यारोहण दिन सँ सम्बन्धित मानैत छथि।

मुख्य मंदिरक सामने भाग मे रैमसेस-2 के 20 मीटर ऊँच चारिटा विशाल मूर्ति छलैक, प्रवेश द्वारक दूनू कात दू दूटा मूर्ति। एकटा मूर्ति मिस्रक प्राचीन भूकम्प मे पहिनहि क्षतिग्रस्त भऽ गेलैक। एकरा एखनहु ओहिना छोड़ि देल गेल छैक। मूर्ति मे सम्राट सिंहासन पर बैसल छथि आ मिस्रक दूनू भाग — अपर इजिप्ट आ लोअर इजिप्ट — कें निरूपित करैत जौआँ मुकुट पहिरने छथि। एहने जौआँ मुकुट पहिरने रैमसेस-2 के मूर्ति अन्यत्र सेहो पहिनहिं देखने छलहुँ। भीतर मे विशाल स्तम्भ सब पर मूर्ति, सम्राट द्वारा कएल गेल विभिन्न लड़ाइ के चित्रकारी आदि एखनहु जीवंत छैक। भीतर मे अनेक कक्ष छैक जे सामने सँ अन्दर जाइत छोट होइत जाइत छैक। सबसँ भीतर मे मात्र एकटा कक्ष जे गर्भगृह भेलैक।

तहिना करीब 100 मीटर दूरी पर ओही कृत्रिम पहाड़ीक दोसर भाग मे रानीक मंदिर बैसाओल गेल। ई मंदिर देवता हाथोर आ रानी नेफरतारी कें समर्पित अछि। एकर सामनेक भाग मे प्रवेशद्वारक दूनू कात करीब 10 मीटर ऊँच तीन तीन टा मूर्ति, जाहि मे बीच मे सम्राट आ दूनू कात रानी। एहू मंदिर मे भीतर मे विशाल स्तम्भ सब मे चित्रकारी मुदा ओतेक कक्ष नहि।

मंदिर घुमबा मे लोक कें प्रायः आधा घंटा लगलैक मुदा फेर बस तक आपस जेबा मे समय लगलैक। पाछू सँ देखला पर ई कृत्रिम पहाड़ी एको रत्ती बनाबटी नहि लगैत छैक। अस्तु करीब अढ़ाइ बजे हम सब अबू सिम्बेल सँ विदा लेल।

एक घंटाक मंदिर दर्शन आ आठ-नौ घंटाक बस यात्रा। ओना तऽ साँझ मे आसवान शहर घुमबाक किछु कार्यक्रम छल मुदा यात्री सब कें थाकल रहला सँ एकरा त्यागि देल गेल। हम सब सोझे पहुँचलहुँ अपन जहाज ‘क्राउन प्रिंसेस’ पर। आब तीन दिन तक एतहि रात्रि विश्राम करबाक छल।

‘क्राउन प्रिंसेस’ पाँच सितारा होटलक समकक्ष मानल जाइत छैक। पाँच तल्लाक बेस पैघ जहाज, करीब अढ़ाइ सौ पसिंजरक रहबाक व्यवस्था। तकरा सेवा लेल सब प्रकारक कर्मचारी। सबसँ नीचा मे डाइनिंग हॉल छलैक, तकरो नीचा मे इंजन रूम आदि। तखन चारि तल्ला मे रहबाक कमरा, लॉबी, दोकान, बार, आदि सब किछु। उपरका डेक पर स्विमिंग पूल, आ खुला जगह मे अनेको कुर्सी लागल। एतहु चाह, कॉफी, ड्रिंक आदि उपलब्ध मुदा अलग सँ पैसा देला पर। दुपहरिया मे एक बेर चाह/कॉफी फ्री, माने जहिना होटलक आन भोजन फ्री (दाम तऽ टूरक पैकेज मे देले छलैक)। एहि समय अपन भारतीय यात्री लेल इन्द्रजित अपन रसोइया सँ पकोड़ा, सिंघाड़ा आदि सेहो बनबा लैत छलाह।

एतए रूम सब करीब करीब होटले जकाँ, मात्र कने छोट कारण जगह बचेबाक लेल। रूमक सफाइ सेहो नित्य ओहिना कएल जाइत छैक। खाली इंटरनेट बहुत महग आ पीबाक जल जेना हमरा गीजाक होटल मे भेटैत छल से नहि। तें बाहर सँ जल कीनऽ पड़ल। एतहु डाइनिंग हॉल मे अलग सँ भारतीय व्यंजनक इन्तजाम थोमस कूक केनहि छल, ओकर अपन रसोइया तऽ संगहिं छलैक। हमरा सब लेल किछु टेबुल सेहो रिजर्व रहैत छल आ कहलो गेल छल जे अन्यत्र नहि बैसी। ओना भोजन लेल लोक किछुओ चुनि सकैत छल, कन्टिनेटल, जे अन्य यात्री लेल बनाओल जाइत छलैक, अथवा भारतीय, ई अपना इच्छा पर निर्भर छलैक।

जहाजक सवारी के हमर अनुभव बहुत कमे रहल अछि -  किछु घंटाक सवारी अंडमान यात्रा मे केलहुँ, एक टापू सँ दोसर टापू पर जेबा लेल, तहिना इंगलिस चैनल पार करबा काल आ डेनमार्क सँ स्वीडन जेबा काल, ततबे। जहाज पर रात्रि विश्रामक अनुभव पहिले बेर भेल अछि। एतए देखलियैक जे एक बेर भीतर गेला पर आ चेकइन केला पर बाहर जेबा लेल लोक कें एकटा पास देल जाइत छलैक। घुरला पर गेटे पर ओ पास रखबा लेल जाइत छलैक। साधारणतः ई प्रक्रिया तखन बेसी जरूरी रहैत छैक जखन जहाज किछुए समय मे तट छोड़ि देबा लेल तैयार रहैत अछि आ कोनो व्यक्ति कें बाहर जाएब जरूरी भऽ गेलनि। जहाज खुजबा सँ पूर्व सबटा पासक गिनती कएल जाइत छैक जाहि सँ पता चलैक जे कोनो व्यक्ति बाहर तऽ ने छूटि गेल। आइ राति जहाज कें एतहि रहबाक छलैक।

अगिला दिन 21 सितम्बर 2019, सबेरे हम सब जलपानक बाद बस मे सवार भऽ कए गेलहुँ आसवान शहरक एक इलाका जतए फेर छोटका नाओ सँ एकटा टापू पर जाकए फिले (Philae) मंदिर देखबा छल। फिले मंदिर नील नदीक एकटा टापू पर छैक जे पुरना लो डैमक जलक्षेत्र मे पड़ैत छलैक। एहि इलाका मे अनेक छोट पैघ टापू। फिले मंदिरक मूल टापू मुदा जखन डूबऽ लगलैक तखन एकर समस्त मंदिर परिसर कें उठा कए लगेक दोसर उँचगर टापू पर प्रतिस्थापित कएल गेल। नाओ पर सँ गाइड अब्दुल्ला हमरा सब कें मूल फिले टापू देखा देलनि।

फिले मे मंदिर सब मिस्रक मूल फैरो (सम्राट) नेक्टानेबो-1 द्वारा ईशापूर्व 370 इस्वी मे देवी इसिस लेल बनाओल गेल। जखन मिस्र पर ग्रीक लोकनि शासन करए लगला तखन स्थानीय जनताक विश्वास जितबाक लेल आ ओकरा सब कें अपना दिस मिला कए रखबा लेल ओ लोकनि मिस्रक पुरान देवी देवताक नाम पर फेर सँ मंदिर सब बनौनाइ शुरू केलनि। तहिना बाद मे रोमन शासक लोकनि सेहो मंदिर सब बनौलनि। फिलेक मंदिर मुख्यतः टोलेमी-2, टोलेमी-5 आ टोलेमी-6 के शासन काल मे बनाओल गेल।

काहिराक ईजिप्सियन म्यूजियम देखबा काल अनेक टूरिस्ट ग्रुपक बीच हमरा सब कें ईयरफोन देल गेल छल जाहि सँ अपन गाइड कें सुनि सकी। एतए ओ सुविधा नहि आ अनेको ग्रुपक लोक आ गाइड बौआइत। हमर गाइड अब्दुल्ला सबकें एकठाम जमा कऽ कए फिलेक वर्णन सुनबए लगलाह मुदा लोक सब तऽ फोटो लेबा मे व्यस्त भऽ जाइत छल। भीड़ मे चालीस सदस्य कें एक संग सम्हारि कए राखब कठिन काज छलैक। तथापि ओ हमरा सब कें मंदिरक पहिल प्रवेश द्वार, जाहि मे विशाल गोपुर (pylon) बनल छलैक, फेर भीतर के विशाल आङन, तखन दोसर गोपुर होइत अन्त मे छोट गर्भगृह देखौलनि। गर्भगृह मे एखन मात्र ग्रेनाईटक चबूतरा टा छैक। कोनो समय मे एहि चबूतरा पर देवी इसिसक मूर्ति रहल हेतनि।

आङन मे एक कात अनेको छोट छोट कमरा सब छैक जे कहियो पंडित लोकनिक निवास रहल हेतनि। संगहि कात मे सेहो विशाल स्तम्भ सब छैक। गाइड अपन काज समाप्त कऽ कए फोटो लेबा लेल अलग सँ बीस मिनट समय देलखिन। अस्तु हम सब ओतए सँ फेर नाओ पर चढ़ि कए बस पार्किंग बला जगह अबैत गेलहुँ।

अगिला भ्रमण स्थल छल एतुका प्रसिद्ध ईजिप्सियन कॉटन के दोकान। मिस्रक सूती वस्त्र विश्व प्रसिद्ध छैक से सबकें बूझल छल। मुदा गाइड कहलनि जे साधारणतः दोकान सब मे एखन खाली चीनी सामान (जकरा ओ मजाक मे आर-ओ-सी, माने रिपब्लिक ऑफ चाइना कहैत छलथिन) भरल छैक आ सुच्चा ईजिप्सियन कॉटन सब ठाम नहि भेटैत छैक। एहि मे हमरा सब कें कोनो अतिशयोक्ति नहि बुझाएल कारण चीनी सामानक बाढ़ि तऽ विश्वक हरेक गली कूची मे देखबा मे अबिते छैक।

अस्तु, हम सब एकटा एहन सुच्चा कपड़ाक दोकान मे प्रवेश केलहुँ। सत्ते एतुका वस्त्र देखि सन्देह मेटा गेल। मुदा वस्त्र सबहक दामो तहिना ऊँच। कोनो हाफ शर्ट 900 पौंड (माने करीब 4000 रुपैया) सँ कम नहि। थोड़ेक काल तक तऽ प्रायः सब गोटे घुरिआइते रहलाह मुदा किछु गोटे कीनब शुरू केलनि तऽ हमरहु धाख छूटल। नाति नातिन लेल टीशर्ट कीनल, क्रेडिट कार्ड सँ पेमेंट कएल।

समय कम छल, लंच तऽ जहाजे पर करबाक छल मुदा बेसी महत्वपूर्ण छलैक जहाज कें डेढ़ बजे छुटबाक समय। तें अब्दुल्ला सब कें समेटि बस मे ढुका लऽ अनलनि जहाज पर। आसवान शहर छोड़ि देल। आब जहाजे पर सब किछु।

एहने समय लेल पैघ समुद्री यात्रा मे लोक जहाजक लाइब्रेरीक उपयोग करैत रहल होएत। हमर लाइब्रेरी किन्डल मे छल। रौद बेसी रहला सँ उपरका डेक पर जाएब सम्भव नहि। रूम एयरकन्डिसन्ड छले। बस, खिड़कीक पर्दा हटा देल आ बैसि कए नील नदीक किनाराक बदलैत दृश्यक आनन्द लेबऽ लगलहुँ।

सूर्यास्त सँ किछु पहिने हम सब पहुँचलहुँ “कोम ओम्बो” मंदिर लग। आब हम सब उत्तर दिशा मे चलैत आसवानक बान्ह सब के जलक्षेत्र सँ बहुत दूर चलि आएल छलहुँ आ मंदिर सब मूले स्थल पर अवस्थित छैक। एहि मंदिर कें “स्वास्थ्य लाभक मंदिर” सेहो कहल जाइत छैक। प्राचीन काल मे दूर दूर सँ बीमार लोक एतए अबैत छल, चढ़ौआ चढ़बैत छल आ अपन नीरोग हेबाक कामना करैत छल।

कोम ओम्बो मन्दिर कें जोड़ा मन्दिर सेहो कहल जाइत छैक कारण एतए दूटा देवता लेल एक समान सटले-सटल दूटा मन्दिर बनलैक। एकटा मन्दिर मे गोहि देवता ‘सोबेक’ लेल, जिनका प्रजननक देवता सेहो बूझल जाइत छल। दोसर मन्दिर अछि बाज देवता ‘हारोरिस’ लेल। एतए घुमैत साँझ परि गेलैक आ बहुत रास मन्दिर परिसर हम सब बिजलीक प्रकाशे मे देखल, ई नव अनुभूति भेल।

ई मन्दिर सब ग्रीक शासनक समय बनाओल गेल छलैक। कतेको चित्र आ मूर्ति कें देखा कए गाइड हमरा सब कें बुझौलनि जे ग्रीक लोकनिक बनाओल चित्र मे नारीक शरीरक विभिन्न अंगक अनुपात पुरान जमानाक मिस्र मे बनाओल चित्र सँ बहुत भिन्न छैक। ग्रीक लोकनि महिलाक वक्ष कें बेस पैघ बनाकए वक्षाग्र पर्यन्त कें देखनुक बना अनावृते छोड़ि दैत छलखिन। मुस्लिम संस्कृति मे जनमल भीजल अब्दुल्ला कें ई ढंग नीक नहि लागि रहल छलनि।

एहि मन्दिर मे ओहि जमाना मे व्यवहृत शल्य चिकित्साक औजारक चित्र सब बनाओल छैक। एतए ओहि प्राचीन समय मे प्रसव काल महिला लोकनि कें कोन तरीका सँ बैसाओल जाइत छल तकर एकटा चित्र देखल। गाइड अब्दुल्ला हमरा सब कें बुझा देलनि जे ई तरीका आब फेर लोकप्रिय भऽ रहल छैक। हमरा ग्रुप मे एकटा तमिल महिला गाइनेकोलोजिस्ट छलीह। ओ एकर समर्थन केलखिन।

मन्दिर परिसर मे पहिल बेर देखल नाइलोमीटर (Nilometer) जे एकटा इनार जकाँ होइत छलैक। प्राचीन काल मे एहि इनारक जल स्तर सँ प्रशासन कें ई बुझबा मे अबैत छलैक जे नील नदी मे एहि बेर कतेक पानि एलैक, ओहि हिसाबें जनता कें खेतीक उपजा केहन भेल हेतैक। ताही हिसाबें कर ओसूल कएल जाइत छलैक। यदि पानि कम रहलैक तऽ नीक उपजा नहि भेला सँ लोक कें कमे कर देबऽ पड़ैत छलैक। एतेक संतुलित आ वैज्ञानिक कर व्यवस्था विश्वक प्राचीन इतिहास मे अन्यत्र भेटब कठिन। एतहि क्रोकोडाइल म्यूजियम देखल जतए एकटा हॉल मे बहुत रास गोहिक ममी बना कए राखल छलैक। मनुष्यक ममी तऽ काहिराक म्यूजियम मे देखने छलहुँ, गोहिक ममी एतहि देखल, ई विश्व मे अद्भुते अछि।

हमरा सब एखन जहाजक पंछी बनि गेल छी — जैसे उड़ि जहाज की पंछी पुनि जहाज पे आबै। सएह गति। अस्तु, मन्दिर भ्रमणक बाद घुरि अबैत गेलहुँ जहाज पर। जहाज राति मे एतए सँ विदा भऽ जेतैक से बता देल गेल। संगहि ईहो जे बहुत सकाले एडफू मंदिरक दर्शन करबा लेल तैयार होमए पड़त। साढ़े चारि बजे भोरे बार मे चाहक व्यवस्था भेल रहतैक। कोनो दशा मे पाँच बजे जहाज छोड़ि सड़क पर आबि जेबाक छल। बर बेस, भोजनक बाद रात्रि विश्रामक तैयारी मे लागि गेलहुँ।

जहाज पर अन्तिम दिन, 22 सितम्बर। जहाज राति मे कखन चललैक आ कखन एडफू पहुँचि गेलैक से नहिए बुझलियै मुदा सकाल मे तैयार भऽ साढ़े चारि बजे चाह पीबा लेल सब गोटे जमा भए गेलहुँ। ठीक समय पर सड़क पर अबैत गेलहुँ। थोमस कूकक व्यवस्था मे कतहु कोनो कोताही नहिए रहैत छलैक। सड़क पर चारि सीट बला बहुत रास टमटम सब ठाढ़। एडफू मन्दिर जहाज सँ करीब डेढ़ किलोमीटर दूर छलैक तें सबके टमटम सँ ओतए जेबाक छल। लोक अपना हिसाबें चारि गोटेक ग्रुप बना लेलक। आ टमटम सब दौड़ए लागल। किछुए दूर गेला पर मंदिर परिसरक दर्शन होमए लागल। परिसर बहुत पैघ। एतेक सबेरे तैयार होइतहु मंदिर परिसर पहुँचैत हम सब अन्य ग्रुपक यात्री सबसँ कने पछुआइये गेलहुँ। गेट तऽ छओ बजे खुजबाक छलैक मुदा लोक लाइन मे पहिनहि सँ लागल। हमहूँ सब लाइन मे लगैत गेलहुँ।

अस्तु, गेट खुजलाक बाद सब ग्रुप मे अपन अपन गाइड सब जगह बना कए लोक कें मदिरक इतिहास आदि बतबए लगलखिन। हमरो लोकनिक गाइड अब्दुल्ला कमान सम्हारलनि, सब गोटे कें घेरा मे ठाढ़ कऽ कए मंदिरक सब जानकारी विस्तार सँ दऽ देलनि। तकर बाद लोक स्वतंत्र छल अपना हिसाबें घुमबा लेल आ जतेक इच्छा होइ से फोटो घिचबा लेल।

एडफू मंदिर ग्रीक शासनक समय मे बनल छलैक जे टोलेमी-3 के समय शुरू भेल आ टोलेमी-12 के समय मे बनि कए तैयार भेल। एकर पहिल गोपुर 37 मीटर ऊँच आ 70 मीटर चौड़ा छैक जकरा बीच मे प्रवेश द्वार बनल छैक। सामने मे दूटा बाजक मूर्ति। एकटा कने खंडित भऽ गेल। गेटक आगू भीतर मे विशाल आङन। ताहि मे तीन कात बरामदा जकाँ अनेको स्तम्भ बनल। भीतर मे एकटा बाजक मूर्तिक नीचा सम्राट टोलेमी-12 ठाढ़ छथि।

ई मन्दिर देवता ‘होरस’ कें समर्पित अछि जे एतए बाज के रूप मे प्रतिष्ठित छथि। मंदिरक सबसँ भितरका भाग, गर्भगृह, मे एकटा ग्रेनाइटक चबूतरा पर हिनक पवित्र नाओ राखल रहैत छलैक। वर्ष मे दू बेर एतए सँ नाओ पर नील नदी मे जुलूसक संग होरस कें बाहर निकालल जाइत छल आ डेन्डारा सँ हिनक पत्नी देवी ‘हाथोर’ ओहिना नाओ पर जुलूसक संग अबैत छलखिन। एहि समय समूचा मिस्र मे खूब उत्सव मनाओल जाइत छलैक। पत्नी सँ मिलनक बाद एक सप्ताह तक दूनू गोटे एडफू मे रहैत छलाह। तकर बाद फेर हाथोर कें डेन्डारा पठा देल जाइत छलनि।

एडफूक मन्दिर बहुत दिन तक नील नदीक गादि आ मरुभूमिक बालु सँ झाँपल रहलैक। एतेक तक जे एकरा उपर लोक सब घर सेहो बना लेलक। कतोक पाथरक टुकड़ी लोक सब अपन घर बनेबा मे उपयोग कऽ लेलक। उनैसम शताब्दी मे जखन मिस्र मे फ्रेंच लोकनि अएलाह आ प्राचीन स्मारक सबहक खोज शुरू भेल तखन एकरो पता चललैक। फेर एहि जगह कें अवैध कब्जा सँ मुक्त कराओल गेल आ पूरा परिसर के सफाइ भेल। वर्तमान मे ई मन्दिर मिस्रक सब स्मारक सँ बेसी नीक सुरक्षित अछि। मंदिरक किछु भाग मे एखनहु गादि मे डुबलाहा भागक चिन्ह भेटैत छैक। रोमन साम्राज्यक प्रारम्भिक समय मे जखन ईसाइ धर्मक अतिरिक्त आन धर्म कें ‘पागान’ घोषित कऽ देल गेल आ दूनू मे धर्मयुद्ध शुरू भेल तखन कतेको ईसाइ मिसनरी एहि मन्दिर मे नुका कए रहैत छलाह।

मंदिर देखि हम सब करीब आठ बजे तक जहाज पर घुरि अएलहुँ। जलपान केलाक बाद एखन बेसी लोक डेक पर चल गेल। भरि दिन आब जहाजे पर रहबाक छलैक। किछु लोक स्विमिंग पूलक मजा लेलनि। किछु अन्य अपन चाह कॉफी आदि पीबैत नदीक दूनू कातक गाम घरक दृश्य देखैत रहलाह। असल मे थोमस कूकक बनाओल प्रोग्राम मे तीन दिनक ‘नील क्रूज’ के असली मजा लोक एखने लऽ रहल छल।

एहि बीच एकटा खेला शुरू भेल। एकटा छोटका नाओ (डोंगी) हमरा सबहिक जहाज मे बन्हा गेल। ओहि मे दूटा स्थानीय युवक हमरा सब कें आकर्षित करैत चिचिया रहल छलाह जे हुनका सँ किछु कीनी। ओ सब बेडशीट, टेबुलक्लॉथ आदि बेचि रहल छलाह। सामान सब तऽ ओएह चीनी माल (अब्दुल्लाक भाषा मे आरओसी, republic of china, बला) मुदा आब लोक बचि कए कतए जाएत ? सब तरि तऽ ओएह सामान कीनैत छी, दीपावलीक गणेश आ लक्ष्मीजीक मूर्ति सँ लऽ कए सालो भरिक सजावटक बिजलीक सामान तक। संकेतक भाषा मे मोल मोलाइ चलए लागल। हमरा ग्रुपक किछु गोटे एहन सामान किनबो केलनि। सामान ओ सब प्लास्टिकक बैग मे बान्हि एहन साधल लक्ष्य सँ उपर फेकैत छलथि जे ओ सीधे डेक पर पहुँचि जाइत छल। यदि डेक सँ कियो हुनका सामान घुरा देलखिन तऽ ओहो ओहिना डोंगी पर फेकि दैत छलखिन आ ओ स्थानीय व्यक्ति आराम सँ ओकरा लौकि लैत छलाह। तहिना ओकर दाम सेहो एकटा चद्दरि मे बान्हि डेक पर सँ नीचा फेकि देलक लोक आ बेचनिहार लोकि लेलनि ओकरा।

बाट मे करीब बारह बजे ‘एसना’ शहर लग एकटा लॉकगेट आएल जतए नदी पर बान्ह बनल छलैक। एतए जहाज कें ओहि लॉकगेट बाटे जेबाक दृश्य सेहो मनोरंजक छल। लॉकगेट सँ पास हेबा मे जहाज सबहक लाइन लागल छलैक। बेराबेरी सब निकलि रहल छल। एतए एक घंटा सँ बेसी समय लागि गेल। लुकझुक साँझ मे जहाज लक्जर शहरक बाहरी इलाका मे एक ठाम किनार लागल। एतए बहुत नीक बाग बगीचा लागल। आब हमरा सबहिक नदी यात्रा शेष भेल मुदा राति आइयो जहाजे पर बितेबाक छल। आब जहाज सँ बाहर जेबा मे कोनो पासक आवश्यकता नहि। ने जहाज कें कतहु जेबाक छलैक आ ने यात्री कतहु बेसी दूर भागि सकैत छल। अगिला दिन बहुत भोरे कोनो प्रोग्राम सेहो नहि छलैक। भोजनोपरान्त यात्री लोकनि एहि नदी यात्राक खुसी मे बहुत नाच गान करैत गेलाह। तकर बादे रात्रि विश्राम भेल।

 

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