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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)2004-2018.सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

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रबीन्द्र नारायण मिश्र- तीनटा आलेख, दूटा लघुकथा आ उपन्यास नमस्तस्यै (आगाँ)

 

रबीन्द्र नारायण मिश्र

रबीन्द्र नारायण मिश्रक

तीनिटा आलेख

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005

घरेलू हिंसाकी थिक?

 

आमतौर पर घरेलू हिंसा मात्र घरमे मारि-पीट बुझल जाइत अछि।सही मानेमे बालिकाक अरमानकेँ दबा देब, घरक अंदर परिवारक सदस्‍य द्वारा रोज-रोज मानसिक प्रताड़ना देब, तामसमे ओकर परसल भोजन फेँकि देब, ओकरा संगे गार-मारि करब, ओकर इच्छाक विरुद्ध ओकर पढ़ाइ रोकि देब, सेहो घरेलू हिंसाक रूप अछि। एकर अलावा यौन उत्‍पीड़न सेहो भारी हिंसा अछि, जाहि हेतु आम तौरपर दूरक रिश्‍तेदार वा पड़ोसक लोग जिम्‍मेदार होइत अछि। एहनमे जखन बालिका विरोध करैत अछि, तँ बदनामीक हवाला दए ओकर मुँहबंद कए देल जाइत अछि। एहि तरहक प्रतारणा नैहर, सासुर सभठाम होइत अछि।

घरेलू हिंसापारिवारिक सम्बन्धक परिपेक्ष्यमे एहन व्यवहार ओ सम्बन्धसँ जुड़ल अछि जे अपन जीवन संगीपर अधिकार जताबए एवम् मनमाना नियंत्रण करबाक हेतु कएल जाइत अछि। प्रताड़ना मनोवैज्ञानिक, शारीरिक, भावात्मक, आर्थिक, किछु भए सकैत अछि। घरेलू हिंसा विवाहित किंवा आपसी सहमतिसँ प्रेम सम्बन्धसँ जुड़लजोड़ी, ककरो संगे भए सकैत अछि।

घरेलू हिंसाक कारण की थिक?

घरेलू हिंसाक प्रारंभ तखने होइत अछि जखन बालिका अपने माए-बापसँ खिलौना मांगैत अछि। हमर समाज ओकरा नेन्नेसँकमजोर बनबैत अछि। जखन बेटा छोट रहैत अछि, तँ हम ओकरा हाथमे बैट-बाल वा स्‍पोर्टस क सामान दैत छी, जाहिसँ ओ शारीरिक आओर मानसिक रूपसँ मजगूत बनैत अछि। मुदा बालिकाक खेलक हेतु गुड्डा-गुडि़या वा चूल्‍हा बर्तन बला खेलौना देल जाइत अछि जाहिसँ ओ शारीरिक आओर मानसिक रूपसँ कमजोर होइत चलि जाइत अछि। एकर संगे भावनामे भसिआएल चल जाइत अछि। अब बालिका जेना- जेना पैघ होइत अछि घरक पाबंदी आओर समाजक यातना ओकरापर हावी होइत चलि जाइत अछि। दाम्पत्य जीवनमे घरेलू हिंसाक कारण हीन भावना, ईर्ष्या, क्रोधपर नियंत्रणक अभाव, जीवनसंगीसँ शिक्षा किंवा सामाजिक परिवेशमे न्योन होएब किछु भए सकैत अछि।

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 किएक लागू करए पड़ल?

घरेलू हिंसाक अनगिनत घटना हमर देशमे होइत अछि, मुदा महज सौ-पचास दर्ज होइत अछि, ओहो चरम पर पहुँचलाक बाद। कतेकोठाम बालिकासभ साँझक बाद घरक अपेक्षा सड़कपर अंजान लोकसंग रहब ज्यादा सुरक्षित अछि कारण घरमे अपन लोक द्वारा बेसी दुर्घटना, हत्या आओर हिंसा करबाक संभावना रहैत अछि, बालिका जखन रस्ता पर बहराइत अछि, तँ ओकरा पता नहि होइछ कि शहरकचकाचौंधमे ओकरा संगे कखन कोनठाम छेड़खानी भए जाएत। बात अगर गामक करी तँ बालिका सुन्न रस्ता पर जएबासँ डराइत अछि मुदा ओहि डरक की करी, जकर जड़ि घरक अंदर होइत अछि आओर बालिकाक संगे पैघ होइत अछि। ओहि डरक की करी जे ओकरा जनमिते ओकर माथामे बैसि जाइत अछि आओर आधा जिनगी धरि रहैत अछि।

घरेलू हिंसा क बात करैत काल ऑनर किलिंगक घटनासभकेँ फराक नहि कए सकैत छी। ऑनर किलिंगक जड़ि असलमे घरेलू हिंसा अछि। किएक तँ कोनो माए-बाप, भाए, काका कखनो सेहो अपनी बेटी वा बहिनके, सोझे मारि नहि देत, ओहिसँ पूर्व नाना प्रकारक यातना ओकरा देल जाइत अछि।

एकटा सांख्यिकीय गणनाक अनुसार :

(i) नित्य चारिटा महिला, एकटा पुरुष, आओर पाँचटा बच्चा घरेलू हिंसाक कारण अकाल मृत्युक शिकार भए जाइत छथि।

(ii) अपन जीवन कालमे प्रत्येक चारिटामेसँ एकटा महिला घेरलू हिंसाक शिकार भए जाइत छथि।

(iii) २०-२४ बर्खक महिलाक उपर घरेलू हिंसाक सभसँ बेसी खतरा रहैत अछि।

 घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 स्त्रीक सुरक्षा, ओ स्त्रीक अधिकारक अधिक प्रभावी ढंगसँ लागू करबाक हेतु आनल गेल।

एहि अधिनियमकेँ पारित करएसँ पहिने कानूनी स्थिति की छल?

 

(i) घरेलू हिंसा कानूनमे कोनो स्पष्ट मान्यता नहि छल,

(ii) (आईपीसी की 498 ए) क तहत घरेलू हिंसाक संपूर्ण अवधारणा विवाहित स्त्रीपर कएल गेल क्रूरताक धरि सीमित छल,

(iii) दुखसंतप्त बहिन, माए, बेटी वा अविवाहित स्त्री एहिमे सामिल नहि छल,

(iv) प्रताड़ित भेलापर विवाहित स्त्रीकेँ सीमित विकल्प छल: तलाक लए लिअए वा धारा 498 ए क अनुसार मोकदमा करए,

घरेलू हिंसा दू प्रकारक होइत अछिःआपराधिक आओर गैर-आपराधिक:

आपराधिक घरेलू हिंसा:

 बिना सहमतिकेँ शारीरिक संपर्क जेना यौन उत्पीड़न, लात मारब, अनावश्यक पछोड़कए भयभीत करब, कंप्यूटर हैकिंग, आपराधिक अलगाव

गैर-आपराधिक घरेलू हिंसा:

मित्र वा आन सामाजिक सरोकारीसँ संपर्क बाधित करब, टेलीफोनक संपर्क नहि होमए देब,

घरेलू हिंसा कानूनक तहत कोनो पीड़ित महिलाजे अपराधिक संगे रहैत छथि, एहि कानूनक अनुसार मोकदमा कए सकैत छथि।

घरेलू हिंसाक सबसँ खराब प्रभाव ओहि परिवारक छोट बच्चासभ पर होइत छैक।बच्चा वातावरणक उपज होइत छथि, एहने बच्चा बादमे जाकए घरेलू हिंसा करैत छथि वा ओकर शिकार भए जाइत छथि।

घरेलू हिंसा अधिनियमक धारा२ (क्यु):

घरेलू हिंसा अधिनियमक धारा२ (क्यु)क तहत मात्र पुरुष अपराधीक खिलाफ कार्रबाइक प्रावधानके असंबैधानिक घोषित करैत सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और रोहिंटन एफ नरीमनपीठ निर्णय देलक जे एहि कानूनक तहत महिला अपराधीकक खिलाफ सेहो मोकदमा चलि सकैत अछि।माननीय न्यायाधीश लोकनिक कहब छनि:

स्त्रीगणक खिलाफ कतेकोबेर स्त्रिए साजिसक तहत काजकए घरेलू हिंसामे सामिल होइत छथि, तेँ एहि कानूनक उपरोक्त धारा कानूनक मूल उद्दयेश्यसँ भुतिआ गेल लगैत अछि, तेँ ओकरा कानूनसँ हटा देल जाइत अछि।”

घरेलू हिंसा कानूनक तहत केना मदति लेल जा सकैत अछि?

(१) कोनो प्रकारक हिंसासँ वचाव हेतु आदेश प्राप्त करब,

(२) निवास करबाक अधिकारक हेतु आदेश प्राप्त करब,

(३) मौद्रिक राहत

(४) हिरासतमे लेब

(५) क्षतिपूर्तिक हेतु आदेश

(६) अन्तरिम आओर एकपक्षीय आदेश

सुरेश बनाम जयबीर (२००९):

सुरेश बनाम जयबीर (२००९)क मामलामे न्यायलय ई आदेश देलक जे घरेलू हिंसा कानूनक धारा 12 कउपखंड (1) कतहत आवेदनक निपटारा करैत अन्तरिम आदेशमे न्यायिक दंडाधिकारी गुजाराक हेतु अन्तरिम राहत दए सकैत अछि।

प्रथम श्रणी न्यायिक दंडाधिकारी वा महानगर दंडाधिकारीक ओतए सिकाइत कएल जा सकैत अछि:

(१) जतए दोषी व्यक्ति रहैत हो,

(२) जतए अपराध कएल गेल होइक,

(३) जतय प्रताड़ित व्यक्ति रहैत हो,

न्यायिक दंडाधिकारीक समक्ष सिकाइतक निपटान:

पीड़त व्यक्ति संरक्षण अधिकारी, पुलिस किंवा सेवा प्रदाता (कल्याण अधिकारी)क मदति लए सकैत छथि। हिनका लोकनिक कर्तव्य अछि जे पीड़त व्यक्तिक जरुरी मार्गदर्शन करथि एवम् न्यायलय द्वारा देल गेल मौद्रिक क्षतिपूर्तिक आदेशक पालन सुनिश्चित कराबथि। संरक्षण अधिकारीक दायित्व अछिजे वो प्रताड़ित व्यक्तिक सिकाइतक घरेलू हिंसा प्रतिवेदन (DIR) तैयारकए न्यायालयकेँ उपलब्ध कराबए।संगहिँ प्रताड़ित व्यक्तिकेँ सेवा प्रदाताक वारेमे उचित मार्गदर्शन दैक जाहिसँ ओ ओहि कानूनी सुविधाक लाभ उठा सकए।सेवा प्रदाता कोनो कंपनी, महिलाक कल्याण हेतु कार्यरत गैर सरकारी संगठन, भए सकैत अछि।सेवा प्रदाताक ई कर्तव्य थिक जे प्रताड़ित व्यक्तिकेँ कानूनमे निहित ओकर अधिकारक बारेमे जानकारी देथि एवम् कानूनी उपचार लेबाकक हेतु उचित व्वस्था करएमे ओकरा मदति करथि। पुलिसक कर्तव्य थिक जे ओ प्रताड़ित व्यक्तिकेँ संरक्षण अधिकारी एवम् सेवा प्रदाताक बारेमे जानकारी देथि। संगहिँ भारतीय दंड संहिताक अनुक्षेद ४९८ (अ) मे प्राप्त अधिकारक जानकारी सेहो देथि।

न्यायिक दंडाधिकारीक समक्ष पीड़िता द्वारा सिकाइत प्राप्त भेलाक तीनदिनक भीतर मामलामे सुनबाइक तारिख तय होएत।न्यायालयसँ समन भेटलाक दूदिनक भीतर संरक्षण अधिकारी तकर जानकारी प्रतिवादीकेँ देत। प्रतिवादीकेँ देल गेल समनक संग घरेलू हिंसा कानूनक धारा 12 कउपखंड (३)क तहत सिकाइतक प्रतिलिपि सेहो देल जाएत।प्रतिवादी द्वारासे प्राप्त भेलाक बादे एकतरफा सुनबाइ भए सकैत अछि आ स्थाइ अन्तरिम आदेश कएल जा सकैत अछि। जरुरी बुझलापर न्यायलय एकतरफा सुनबाइ कए अन्तरिम आदेश दए सकैत छथि। न्यायिक दंडाधिकारी ६० दिनक भीतर एहन सिकाइतक निपटान करताह। हुनकर आदेशक खिलाफ सम्बन्धित पक्ष ३० दिनक भीतर सेशन कोर्टमे अपील दाएर कए सकैत छथि।

प्रतिवादी द्वारा संरक्षण आदेश किंवा अन्तरिम संरक्षण आदेशक पालन नहि करब संज्ञेय एवम् गैर जमनती अपराधक श्रणीमे अबैत अछि। हुनका ताहि कारणसँ एक साल धरि जेल किंवा बीस हजार रुपया जुर्माना भए सकैत अछि। जौं संरक्षण अधिकारी दंडाधिकारी द्वारा देल गेल आदेशक पालन करबामे बिना कोनो वाजिब कारणके आनाकानी करैत छथि तँ हुनको एहि तरहक दंड देल जा सकैत अछि,  मुदा ताहि हेतु विभागीय अधिकारीकेँ पूर्व अनुमति आवश्यक थिक। पीड़ित व्यक्तिकेँ संयुक्त परिवारक साझी निवासमे रहबाक हेतु न्यायलय निवास करबाक आदेश दए सकैत अछि भले ओहि घरमेप्रतिवादीक हिस्सा होइक वा नहि होइक।

एस आर बतरा एवम् अन्य बनाम श्रीमती तरुना बतराक मामलामे उच्चतम न्यायालय ई फैसला देलक जे घरेलू हिंसा अधिनियमक धारा १७ (१) क अनुसार प्रताड़ित महिला मात्र साझी आवासमे रहबाक हकदारभए सकैत अछि।साझी आवासक माने पति द्वारा कीनल किंवा किरायापर लेलगेल घर अछि वा एहन साझी घर अछि जाहिमे पतिक हिस्सा होइक। कहक माने जे जाहि घरमे ओकर पतिकेँ कानूनी अधिकार नहि छैक ताहिमे प्रताड़ित व्यक्तिकेँ रहबाक अधिकार न्यायलय एहि कानूनक तहत नहि दए सकैत अछि।

घरेलू हिंसा रोकबाक समाधान :

घरेलू हिंसा रोकबाक एकटा समाधान ई भए सकैत अछि जे पति न्यायिक दंडाधिकारीक समक्ष शपथ-पत्र देथि जे ओ आगा अपन पत्नीक संग सम्मानपूर्ण व्यवहार करताह, एहनकिछु नहि करताह जाहिसँ ओकरा कोनो प्रकारक यंत्रणासँ फेर गुजरए पड़ैक, तकर संपूष्टिमे अपन संपत्तिकेँ गारंटी देथि जाहिसँ घरेलू हिंसाक पुनरावृति भेलापर ओकरा जब्त कए लेल जाएत।

उपसंहार

आपसी सम्बन्ध प्रेम, आदर, ईमान्दारी, एवम भावुक लगावसँ सराबोर हेबाक चाही। आपसी अविश्वाससँ हिंसा ओदुराचर बढै़त अछि, एहन दंपति निरंतर आशंकाग्रस्त रहैत छथि जाहिसँ जीवन नर्क भए जाइत अछि। जीवनक ई कटुसत्य अछि जे अहाँ दोसरकेँ नहि बदलि सकैत छी, हम अपनेटाकेँ बदलि सकैत छी।कमसँ कम एतबातँ कइए सकैत छी जे जाहि सम्बन्धमे लज्जति नहि रहि गेल अछि, जतए अविश्वासक पराकाष्ठा पहुँचि गेल अछि, ओतए फसाद बढे़नाइ छोड़िकानून सम्मत तरीका अख्तिआर करी।

महिला संगठन सिर्फ जागरूकता पैदा कए सकैत अछि, पुलिस सिर्फ उत्‍पीड़न करएबलाकेँ जेल पठा सकैत अछि, कोर्ट सिर्फ न्‍याय दए सकैत अछि, एहिमे सँ कोनो अहाँक घरक हालत ठीक नहि कए सकैत अछि, घरमे पैसि नित्य-प्रतिक समस्याक समाधान नहि कए सकैत अछि। अस्तु सिर्फ सोच बदलक जरूरत अछि।

जीवनक दुखमय परिस्थितिसँ हारि नहि मानि नव ओ सुंदर जीवन जिबाक हेतु सचेष्ट रहैत पिड़ित व्यक्तिकेँ ई विश्वास बनओने रहक चाही जे सुंदर समय आवहिँबला अछि, अएबे करत।q

 


 

 

 

 

गिरफ्तारीओ जमानत

कोनो-ने-कोनो झंझटिमे नहिओ चाहैत कए बेर लोक फँसि जाइत अछि। केबेर निर्दोष लोकक खिलाफ झूठ-फूसके मामला बना देल जाइत अछिजाहिमे पुलिसके घाल-मेल सेहो भए जाइक से भारी बात नहि।टेलेविजनकेँ गाम-गाम पसरि गेलासँ अपराधक नव-नव स्वरूप गामो-घरमे फैलिरहल अछि।कैटा कानूनो एहन भए गेल अछिजे बिना गलतिओकेँ कैबेर लोक जहलधरि पहुँचि जाइत छथिएहन परिस्थितिमे लोकके जहल ओ जमानतसँ सम्बन्धित कानूनक जानकारी बहुत आवश्यक भए गेल अछि जाहिसँ व्यर्थक फसादसँ बचि सकथिआ जरूरी भेलापर समाधान कए अपन जीवन ओ इज्जतिक रक्षा करथि।

कैटा कनून एहन अछि जाहिमे पुलिस मामला दाखिल होइते अभियुक्तकेँ गिरफ्तार कएसकैत अछि।उदाहरणस्वरूप भारतीय दणड संहिताक धारा ४९८ (ए)क तहत कएलगेल मोकदमामे अभियुक्तक हालत बहुत पातर भए जाइत छल। ओकरा सभसँ पहिने पुलिस गिरफ्तार करैत छल, तखन आर किछु। बहुत रास मामलामे देखल गेल जे कएल गेल सिकाइत झूट छल, कोर्टमे साबूतक आधारपर साबित नहि भेल, अभियुक्त बरी भए गेल, मुदा ताबति ओकर सभ दशा भए जाइत छल, ओकर इज्जतिकमटियामेट भए जाइत छल। उच्चतम न्यायलय एहि बातक संज्ञान लैति दिशा-निर्देश जारी कएसुनिश्चित करबाक प्रयास केलक जे निर्दोश लोकके एहन मामलामे वेबजह गिरफ्तारी नहि होइक।

संविधानक धारा २२ क अनुसारपुलिस द्वारा गिरफ्तार कएल गेल व्यक्तिकेँ अधिकार अछिजे ओ गिरफ्तारीक कारण जानए, जौं गिरफ्तारी वारंटक आधारपर भेल अछितँ ओकरा वारंट देखाओल जाए, वकील वा निकट सम्बन्धीकेँ संपर्क कए सकए।ओकरा गिरफ्तारीक चौवीस घंटाक भीतर मजिष्ट्रेटक सम्मुखउपस्थित करब जरुरी थिक। ओकरा इहो बताएब जरुरी तिक जे ओ जमानतपर छोड़ल जा सकैत अछिकि नहि।

गिरफ्तार कएलगेल व्यक्तिकेँ हथकड़ीलगाएब:

ऊच्चतम न्यायलयक दिशा निर्देशक अनुसार गिरफ्तार कएलगेल व्यक्तिकेँ हथकड़ीलगाबएसँ बचबाक चाही, कारण एहन व्यक्ति सजाआफ्ता नहि होइत छथि। हथकड़ीक प्रयोग अपवादिकपरिस्थितिमे तखने कएल जाएजखन किअभियुक्त हिंसक हो, पुलिसक गिरफ्तसँ भागि जेबाक संभावना होइक, किंवा आत्महत्यापर उतारु हो।

सीआरपीसीक धारा ७४क अधीनपुलिस अभियुक्तकेँ गिरफ्तार करबाक हेतु घरमे घुसिकए ओकरा पकड़ि सकैतअछि, ताहिलेल जरुरी भेलापर घरकखिड़कीकेँ तोड़िसकैत अछि।

कोनो व्यक्तिकेँ गिरफ्तार केलाकबादेओकर तलाशी कएल जा सकैत अछि, पहिने नहि। जौं गिरफ्तार कएल गेल व्यक्ति महिला छथि तखन महिले पुलिस ई काज कए सकैत अछि।

महिलाक गिरफ्तारी हेतुउच्चतम न्यायलय द्वारा जारी कएलगेलदिशानिर्देश:

उच्चतम न्यायलय द्वारा जारी कएलगेल मार्गदर्शनक अनुसार सामान्यतः कोनो महिलाकेँ साँझक बाद आ भोर हेबासँ पहिने गिरफ्तार नहि कएल जाएत। जौं ततबे आवश्यक भए जाइक आ रातियेमे महिलाक गिरफ्तारी जरूरी होइक, भोरधरि रुकब कानूनक अनुपालन हेतु दिक्कति भए जेबाक संभावना प्रवल होइक, तखन मजिष्ट्रेटक पूर्व अनुमति लए एवम्महिला पुलिस द्वारा ई काज कएल जाएत। गिरफ्तारीक बाद जौं महिलाकेँ तलाशी करब जरूरी होइक तखन ई काज महिला पुलिस द्वारा कराओल जेबाक चाही।पुलिस हाजतिमे महिलाकेँ अलग राखबाक चाहीजौं महिलाक हेतु अलग हाजति नहि होइक तखन ओकरा अलग कोठरीमे राखल जेबाक चाही।

विना वारंटकेँ गिरफ्तारीः

आपराधिक प्रक्रिया संहिता1 9 73क धारा 41क अनुसार पुलिस कोनो व्यक्तिकेँ निम्नलिखित परिस्थितिमे बिना वारंटकेँ गिरफ्तार कए सकैत अछि:

 (१) जखन ओ कोनो संज्ञेय अपराध केने हो,

(२) कोनो पुलिस अधिकारीकेँ कर्तव्य निर्वहनमे व्यवधान ठाढ़ केने होइक,

(३) ओकर घरसँ कोनो चोरीक माल पकड़ल गेल होइक,

(४) कानूनी हिरासतसँ मटिआ रहल हो,

(५) सेना, वायु सेना, जलसेनासँ भागि आएल हो,

(६) जौं ओकरा अपराधी घोषित कएल गेल हो,

(७) जौं ओ अभ्यस्त अपराधी अछि,

(८) जौं ओकरापर संज्ञेय अपराध करबाक शक छैक,

(९) जौं न्यायलय द्वारा छोड़ल गेल अपराधी न्यायलयक शर्तक अनुपालन नहि करैत अछि,

कैटा आओरएहन कानूनसभअछि जाहि सिकाइत भेलापर पुलिसकेँ अभियुक्तकेँगिरफ्तार करबाक अजस्त्र अधिकार भए जाइत अछि।

संज्ञेय अपराध की थिक?

संज्ञेय अपराधमे पुलिस बिना कोर्ट आदेशकेँ अभियुक्तकेँ गिरफ्तार कए सकैत अछि।हत्या, वलात्कार, चोरी, राष्ट्रद्रोह, सन अपराधक मामला एहि श्रेणीमे अबैत अछि।

असंज्ञेय अपराध की थिक?

असंज्ञेय अपराध क मामलामे कोर्टक आदेश भेलाक बादे ककरो गिरफ्तार कएल जा सकैत अछि।

जौं अभियुक्त पुलिसक गिरफ्तसँ भागवाक प्रयास करैत अछि, तँ ओकरा पुलिस उपयुक्त वल प्रयोग कए पकड़ि सकैत अछि, परंतु वलक अनावश्यक प्रयोगसँ पुलिसकेँ बचबाक चाही।मुदा आवश्यक भेलापर पुलिस जानोलए सकैत अछि, वशर्ते ओकर अपराध मृत्युदंड देबए जोगर होइक।

अग्रिम जमानत:

अग्रिम जमानतदेबाक अधिकारउच्च न्यायलय वा सेशन कोर्टकेँ अछि।अग्रिम जमानत हेतु आवेदन निचला कोर्टमे नहि कएल जा सकैत अछि।अग्रिम जमानत देबाकाल न्यायलय सुनिश्चित करैत अछि जे आवेदक मामलाक विवेचनामे वांछित सहयोग करताह, देश छोड़ि बाहर नहि चलि जेताह, कोनो गवाह वा सबूतकेँ प्रभावित नहि करताह।आवेदककेँ जौं आशंका होइक जे ओकरा कोनो मामलामे फँसाकए गिरफ्तार कएल जा सकैत अछितँ ओ उचित न्यायालयकेँ अग्रिम जमानत हेतु आवेदन कए सकैत छथि।

अग्रिम जमानत ताबते धरिक हेतु देल जेबाक चाही जाधरि चालान कोर्टमे प्रषित नहि कएल गेल अछि, तकर बाद अभियुक्तकेँ नियमित जमानत हेतु सम्बन्धित न्यायलयमे आवेदन देबाक चाही (सजलुद्दीन अब्दुल समद शेखबनाम राज्य महाराष्ट्र)

न्यायक तकाजा थिक जे अग्रिम जमानत देबासँ पूर्व विरोधी पक्षकेँ न्यायलय नोटिस जारी करए जाहिसँ अभियुक्त गलत जानकारि दए किंवा वांछित जानकारीकेँ दबाकए अग्रिम जमानत नहि लए सकए (बालचंद जैन बनाम मध्य प्रदेश)

जमानती वारंट:

गिरफ्तारीक वारंटकोनो कोर्टक पीठासीन अधिकारी द्वारा लिखित रूपमे जारी कएल जाइत अछि।ओहिमे स्पष्ट रूपसँ ई लिखल हेबाक चाही जे कानूनकक कोन धाराक अनुसार ओकर गिरफ्तारीक वारंट जारी कएल गेल अछि, ओकरा कहिआ आ कखन ओहि कोर्टमे हाजिर हेबाक छैक।ओहि आदेशमे इहो लिखल रहत जे ओकरा उचित जमानात देला पर एहि शर्तसंगगिरफ्तारीसँ छूट देल जाइत अछि जे ओ नियत दिन/नियत समय पर कोर्टमे हाजिर भए जाएत, ताहि हेतु एकटा निश्चित रकमक बौंड सेहोओकरादेबए पड़ैतअछि, एकाधिक व्यक्तिकक जमानात सेहो दबए पड़ि सकैत अछि।

गैर जमानती वारंट:

गैर जमानती वारंटमे पुलिस अभियुक्तकेँ गिरफ्तार कए सम्बन्धित कोर्टमे हाजिर करैत अछि, तकर बादे ओकर जमानत पर छोड़वाक आवेदनपर कोर्ट विचारकरत।कोनो मामलामे जमानत पर अभियुक्तकेँ रिहा करबासँ पूर्व कोर्टकेँ मामलाक गंभीर छानबीन कएल जाइत अछि, कोर्ट ई सुनिश्चित करए चाहैत अछि जे जमानतपर छोड़िदेलाक बाद ओ न्यायिक प्रकृयाकेँ प्रभावित नहि करए, जरुरत भरि मामलाक अनुसंधानमे सहयोगकरए, गवाहसभकेँ तोड़बाक प्रयास नहि करए।संगहि ओकर इतिहास एवम् चरित्रक विषयमे सेहो जानकारी लेबाक प्रयोजन होइत अछि जाहिसँ बाहर गेलाकबाद ओ समाजक हेतु समस्या नहि भए जाए।

सेशन कोर्टवा उच्च न्यायालयसँ जमानत:

जौं अभियुक्त एहन अपराध केलक अछि जाहिमे मृत्युदंड वा आजन्मकारावासक प्रावधान थिक, तखन ओकरा जमानत सेशन कोर्टवा उच्च न्यायालयसँ भेटत, ताहिसँ निचला कोर्टसँ नहि।

न्यायलयकेँ जमानत देबाक समय बहुत सावधानीपूर्वक विचारकरबाक प्रयोजन अछि कारण अपराध सिद्ध होयबासँ पूर्वे ककरो जहलमे सड़ादेब मानवीय अधिकारक सरासर उल्लंघन थिक मुदा संगहि समाजके व्यापकहितकेँ ध्यान राखब सेहो जरूरी अछि, जे ओ व्यक्ति बाहर आबिकए एहन ने कए देथि जे कोनो आन व्यक्तिक सम्मानओ जीवन पर संकट उत्पन्न भए जाइक।

उपसंहार

संविधानक अनुक्षेद २१ एवम २२ क तहत प्राप्त मौलिक अधिकारक रक्षाक हेतु आवश्यक अछि जे बेबजह ककरो स्वतंत्रता पर आघात नहि होइक, लोक निर्वाध अपन जीवनक रक्षा कए सकए। गिरफ्तारी निश्चय एहि संवैधानिक अधिकारकेँ सद्यः सीमिते नहि करैत अछि अपितु ग्रहण लगा दैत अछि। मुदा ककरो स्वतंत्रता एहि हद धरि नहि भए सकैत अछि जे कोनो निर्दोष आदमीक जिनाइ कठिन कए दैक, किंबा कोनो अपराधी बेटछुट्ट भेल घुमैत रहए।अस्तु, पुलिस एवम् न्यायालयकेँ एकटा संतुलित रुखि राखि प्रत्येक मामलामे नीर- क्षीर विवेक रखैत काज करक चाही जाहिसँ कोनो निर्दोष व्यक्तिकेँ फिरसान नहि होबए पड़ैक आ दोषी खुल्ला नहि घुमैत रहए।निश्चय ई संतुलन बनाएव एकटा कठिन काज थिक मुदा समस्त कानून ओ न्यायालय एहि प्रयासमे लागल रहैत अछि।q

 


 

 

 

 

सूचनाक अधिकार

भारतक संविधानक अनुक्षेद १९ मे निहित मौलिक अधिकारसँ भारतक नागरिककेँ सूचनाक अधिकार प्राप्त अछि। ताहि अधिकारकेँ प्राप्त करबाक व्यवस्था सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 क अन्तर्गत कएल गेल। सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 प्रत्येक नागरिककेँ ई अधिकार दैत अछि जे ओ सरकारसँ ओकर काजक बारेमे जानकारी मांगि सकैत अछि। एहि तरहें आब भारत सेहो विश्वक ओहि ६० देशमे सामिल भए गेल अछि जे अपन नागरिककेँ सूचनाक अधिकार प्रदान कए पारदर्शी, जवाबदेह एवम् सुशासन स्थापित करबाक चाक-चौबंद व्यवस्था केने अछि।

केन्द्रीय सूचना आयोग

सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 मे ई व्यवस्था कएल गेल अछि जे केन्द्र सरकार द्वारा एक केन्द्रीय सूचना आयोगक गठन कएल जाएत जाहिमे एक मुख्य सूचना आयुक्त एवम् अधिक सँ अधिक दसटा केन्द्रीय सूचना आयुक्त होएत। मुख्य सूचना आयुक्त एवम् अन्य सूचना आयुक्तक नियुक्तिक हेतु एकटा समिति गठित होएत जकर अध्यक्ष प्रधानमंत्री एवम् लोकसभामे विपक्षक नेता एवम् प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत केन्द्रीय मंत्रीमंडलक एकटा मंत्री एकर सदस्य हेताह। एकर अतिरिक्त प्रत्येक राज्यमे राज्य सूचना आयोग अलगसँ गठित कएल जाइत अछि।

जौं कोनो केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी बिना कोनो वाजिब कारणसँ सूचनाक हेतु आवेदन नहि लैत अछि, किंवा वाँछित सूचना देबएमे आना-कानी करैत अछि, किंवा जानि-बूझि कए गलत वा अधूरा जानकारी दैत अछि, वा सूचना नष्ट कए देल गेल अछि तँ केन्द्रीय सूचना आयोग सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 क अनुक्षेद ७ (१) अन्तर्गत ओकरा खिलाफ सम्बन्धित विभागकेँ अनुशासनात्मक कारवाई करबाक आदेश दए सकैत अछि। एहन परिस्थितिमे आयोग सम्बन्धित दोषी अधिकारीकेँ सूचना देबाक दिन धरि २५० टाका प्रतिदिनक हिसाबसँ पचीस हजार टाका धरि जुर्माना लागा सकैत अछि।

आयोगक समक्ष सिकाइत सोझे दाखिल कएल जा सकैत अछि? जौं हँ, तँ कोन आधारपर?

निम्नलिखित परिस्थितिमे सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 क धारा १८ क अन्तर्गत आयोगक समक्ष सोझे सिकाइत दाखिल कएल जा सकैत अछि:-

(क) जौं ओ ओहि कारणसँ अनुरोध प्रस्तुत करबाक हेतु असमर्थ रहल अछि, कि ओहि अधिनियमक अधीन एहन अधिकारीक नियुक्ति नहि कएल गेल अछि वा केन्द्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी ओहि अधिनियमक अधीन सूचना वा अपीलक हेतु धारा 19 क उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी वा ज्येष्ठ अधिकारीकेँ पठेबाक हेतु स्वीकार करबासँ मना कए देलक अछि;

(ख) जौं ओकरा ओहि अधिनियमक अधीन अनुरोध कएल गेल कोनो जानकारी धरि पहुंचएसँ मना कएल गेल अछि;

(ग) जौं ओकरा ओहि अधिनियमक अधीन विनिर्दिष्ट समय-सीमाक भीतर सूचनाक हेतु वा सूचना धरि पहुँचक हेतु अनुरोधक उत्तर नहि देल गेल अछि;

(घ) जौं ओकरासँ ओहन फ़ीसक रकमक संदाय करबाक हेतु अपेक्षा कएल गेल अछि, जे ओ अनुचित बुझैत अछि;

(ङ) जौं ओ विश्वास करैत अछि कि ओकरा ओहि अधिनियमक अधीन अपूर्ण, भ्रमित करएबला वा मिथ्या सूचना देल गेल अछि; आओर

(च) ओहि अधिनियमक अधीन अभिलेखक हेतु अनुरोध करबाक हेतु वा ओकरा प्राप्त करबासँ सम्बन्धित कोनो अन्य विषयक सम्बन्धमे।

सूचनाक अधिकारक तहत सरकारी विभाग, सरकारी सहायतासँ चलएबला गैर सरकारी संगठन, वा शिक्षण संस्थानसँ जानकारी प्राप्त कएल जा सकैत अछि। सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 धारा 2 (एच) क तहत लोक प्राधिकरण अथवा सार्वजनिक संस्थाक लग उपलब्ध सूचनाक मांग कए सकैत अछि। सार्वजनिक संस्थासभमे संविधान द्वारा स्थापित या गठित, संसद या कोनो राज्य विधायिकाक कानून द्वारा स्थापित वा गठित, केन्द्र वा राज्य सरकारक कोनो अधिसूचना वा आदेशक द्वारा स्थापित वा गठित, राज्य व केन्द्र सरकारक स्वामित्व बला, ओकरा द्वारा नियंत्रित वा पर्याप्त मात्रामे सरकारी धन पाबएबला निकाय सभ, गैर सरकारी संगठन व निजी क्षेत्रक निकाय जे सरकारक द्वारा प्रत्यक्ष वा अप्रत्यक्ष रूपसँ वित्तपोषित अछि, सामिल अछि।

आवेदक द्वारा सूचनाक अधिकारक उपयोग करैत केहन जानकारी मांगल जा सकैत अछि?

१. कोनो सरकारी दस्ताबेजक प्रति मांगि सकैत छी।

२.कोनो सरकारी दस्ताबेजक जाँच कए सकैत छी।

३. कोनो सरकारी काजकेँ जाँचि सकैत छी।

४. कोनो सरकारी काजमे प्रयुक्त बस्तुक प्रमाणित नमूना मांगि सकैत छी।

एहि कनूनक तहत अहाँ कोनो जानकारी हासिल कए सकैत छी जेनाकि : कोनो सड़ककेँ बनाबएमे सरकार कतेक खर्च केलक, प्रधानमत्रीक रहन- सहन पर कएल गेल खर्च, राष्ट्रपति भवनमे कएल गेल खर्च, कोनो सरकारी योजना पर कएल गेल खर्च, पंचायत द्वारा कोनो योजनामे कएल गेल व्यय वा कोनो प्रकारक अन्य जानकारी वा ओहिसँ सम्बन्धित दस्तावेजक छायाप्रति मांगल जाए सकैत अछि। सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 क अनुक्षेद ६ (२) अन्तर्गत आवेदकसँ ई नहि पूछल जा सकैत अछि जे ओ सूचना किएक मांगि रहल छथि।

संगहि व्यक्तिगत विवरण, आय, पैन नंबर, विभिन्न पैरामीटरक तहत विशेषज्ञक व्यक्तिगत पैनल द्वारा देल गेल प्राप्तांक, संपत्तिक रिटर्न आओर संपत्तिक विवरण, आकलन रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, बैंक खातोंका विवरण, प्राधिकरणसँ स्पष्टीकरण मंगैत प्रश्न नहि पूछल जा सकैत अछि।

सूचनाक अधिकारक क्षेत्रमे नहि आवएबला विभाग :

कोनो खुफिया एजेंसीक ओहन जानकारी, जकरा सार्वजनिक भेलासँ देशक सुरक्षा आओर अखंडताकेँ खतरा हो

दोसर देशक संग भारतसँ जुड़ल मामला

थर्ड पार्टी यानी निजी संस्थान सम्बन्धी जानकारी जे सरकारक पास उपलब्ध अछि ओहि संस्थाक जानकारीकेँ सम्बन्धित सरकारी विभागक मार्फत हासिल कएल जा सकैत अछि।

स्वेक्षासँ जानकारी प्रकाशित कएल जाएत:

सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 क अनुक्षेद ४ (बी) अन्तर्गत प्रत्येक सरकारी विभाग अपन विभागसँ सम्बन्धित अधिकसँ अधिक जानकारी स्वेक्षासँ विभागक वेवसाइटपर प्रकाशित करत। अन्यथा भारतक कोनो नागरिक सूचनाक अधिकारक तहत अनुक्षेद ६क तहत आवेदन दए सूचना प्राप्त कए सकैत छथि।

सूचनाक अधिकारक तहत आवेदन कोना कएल जाएत?

सूचनाक अधिकारक तहत आवेदनक हेतु कोनो निश्चित प्रपत्र नहि अछि। सादा कागज पर अपन आवेदन लिखि कए वांछित जानकारी मांगल जा सकैत अछि।

आवेदन शुल्कक भुगतान कोना कएल जाएत?

सूचनाक अधिकारक तहत आवेदन करबाक हेतु केन्द्र सरकारक अधीन आबएबला मंत्रालय विभागसँ जानकारी प्राप्त करबाक हेतु दसटाकाक शुल्क लगैत अछि जकर भूगतान पोस्टल आर्डर, बैंक ड्राफ्ट, द्वारा कएल जा सकैत अछि। राज्य सरकार सभ अलग- अलग शुल्क रखने अछि।

आरटीआइ ऑन लाइन

आवेदक सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 क अन्तर्गत सूचना प्राप्त करबाक हेतु, सूचनाक अधिकार (आरटीआई) ऑनलाइन पोर्टलक माध्यम https://rtionline.gov.in.सँ केन्द्रीय मंत्रालय/  विभागसँ एवम् ऑनलाइन सूचनामे उल्लिखित अन्य केन्द्रीय लोक  प्राधिकरणकेँ अनुरोध कए सकैत छथि।”

आरटीआई नियम, 2012 क अनुसार गरीबी रेखासँ नीचाक लोककेँ आरटीआई शुल्कक भुगतान करबाक आवश्यकता नहि अछि। तथापि, बीपीएल आवेदककेँ अपन आवेदनक संग- संग एहि सम्बन्धमे, उपयुक्त सरकार द्वारा जारी प्रमाण-पत्रक एक प्रति संलग्न करब जरुरी अछि।

प्रथम अपीलीय प्राधिकारीकेँ अपील करबाक हेतु, आवेदककेँ आरटीआई ऑनलाइन पोर्टलमे सबमिट फर्स्ट अपील”नामक विकल्पक चयन करए पड़त आओर सामने आबए बला फार्मकेँ भरए पड़त। प्रथम अपीलकेँ दायर करबाक हेतु मूल आवेदनक पंजीकरण संख्या आओर ई-मेल आईडीक आवश्यकता पड़ैत अछि। आरटीआई अधिनियमक अनुसार, प्रथम अपीलक हेतु कोनो शुल्क नहि देबाक अछि। ऑनलाइन दायर आरटीआई आवेदन या प्रथम अपीलक स्थिति/  जवाब “स्थिति” पर क्लिक कए आवेदक द्वारा देखल जाए सकैत अछि।

सूचना के देत?

प्रत्येक सरकारी विभागमे एकाधिक लोक सूचना अधिकारी/सहायक लोक सूचना अधिकारी नियुक्त कएल जाइत छथि जिनकर जानकारी सम्बन्धित विभागक वेबसाइट किंबा सूचना पट्ट वा विभागमे पूछ-ताछ कए प्राप्त कएल जा सकैत अछि। लोक सूचना अधिकारी/सहायक लोक सूचना अधिकारी विभागक हेतु सूचनाक अधिकारक अधीन कएल गेल आवेदन प्राप्त करैत छथि, ओकरा सम्बन्धित अधिकारीकेँ पठाए सूचना संकलित करैत छथि एवम् नियत समय (आवेदन केलाक वाद एक मासक अधीन, कोनो- कोनो मामलामे ४५ दिन) मे जानकारी आवेदककेँ पहुँचवैत छथि।

सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 क अनुक्षेद ६(३) अन्तर्गत जौं मांगल गेल सूचना आंशिक वा पूर्ण रूपसँ कोनो दोसर लोक प्राधिकरणसँ सम्बन्धित अछि तँ आवेदन प्राप्त केनिहार लोक प्राधिकरण ओकरा संविधित लोक प्राधिकरणकेँ पाँच दिनक भीतर स्थानान्तरित कए सकैत अछि। तकर सूचना आवेदककेँ सेहो देल जाएत।

प्रथम अपील

सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 क अनुक्षेद १९ (१) अन्तर्गत प्रत्येक सरकारी विभाग ओहि अधिकारीक नाम अधिसूचित करत जकरा लग प्रथम अपील कएल जा सकैत अछि। जौं आवेदककेँ तीस दिनक भीतर जबाब नहि भेटैत छैक, किंबा भेटल जबाब अपूर्ण वा भ्रामक छैक तँ आवेदक तीस दिनक भीतर प्रथम अपीलीए अधिकारीक ओतए अपील कए सकैत अछि। एहि हेतु ओकरा फेरसँ फीस नहि देबए पड़तैक।

द्वितीय अपील

प्रथम अपीलीय प्राधिकारीक द्वारा देल गेल निर्णयसँ जौं आवेदक संतुष्ट नहि छथि तँ ओ द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी (राज्य सूचना आयोग किंवा केन्द्रीय सूचना आयोग)केँ द्वितीय अपील कए सकैत छथि। ध्यान रहए जे एजन कोनो अपीलक समय सीमा ९० दिन अछि।

सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 क अनुक्षेद २३ अन्तर्गत कोनो न्यायालय ताधरि कोनो मामला नहि सूनत जाधरि प्रथम अपील द्वितीय अपील/ क प्रकृया पूरा नहि भेल अछि।

उच्चतम न्यायलयक किछु महत्वपूर्ण निर्णय: उच्चतम न्यायलय हालमे सिवील अपील संख्या ६१५९-६१६२(२०१३)मे संघ लोक सेवा आयोग बनाम अग्नेश कुमार एवम् अन्यक (CIVIL APPEAL NO.(s).6159-6162 OF 2013

मामलामे स्पष्ट केलक अछि जे अनर्गल, अनावस्यक एवम् अव्यवहारिक सूचनाक मांग कए सरकारी विभागकेँ एतेक फिरसान नहि कएल जा सैत अछि जे सरकारक अधिकांश समय ओहि सूचनाकेँ उपलब्ध करेबामे एहि हद तक नष्ट भए जाइक जे रचनात्मक/सकारात्मक काज केनाइ पराभव भए जाए।

उच्चतम न्यायालयक न्यायमुर्ति आदर्श कुमार गोयल एवम् न्यायमुर्ति उदय उमेश ललितक पीठ द्वारा २० मार्च २०१८क एनजीओ कॉमन कॉजक याचिकाक निस्तारण करैत फैसला देलक अछि जे कोनो हालतमे पचासटा टकासँ बेसी शुल्क नहि लेल जा सकैत अछि। एकर अतिरिक्त जौं कोनो दस्तावेजक प्रतिलिपिक मांग कएल जाइत अछि तँ प्रति पृष्ठ पाँच टका अतिरिक्त शुल्क लेल जा सकैत अछि। ई आदेश उच्च न्यायालय, विधान सभा आओर अन्य सरकारी आओर स्वायत्त निकाय सहित सभ संस्थापर बाध्यकारी होएत जे सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 क अन्तर्गत अबैत अछि।

उच्चतम न्यायलय हालमे सिवील अपील संख्या ९०१७(२०१३) थालप्पलम सहकारी बैंक एवम् अन्य बनाम् केराल राज्य एवम् अन्य (मामलामे स्पष्ट केलक अछि जे सहकारी समिति सभ सूचनाक अधिकार अधिनियम, 2005 क अन्तर्गत नहि अबैत अछि।

सूचना अधिकार कानून स्पष्टताक आवश्यकता: सूचना अधिकार कानूनक सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू लोक प्राधिकरणक मुद्दा पर स्पष्टताक आवश्यकता अछि। सूचनाक अधिकारमे अखनो कैटा त्रुटि अछि, जेना सरकारी अधिकारी द्वारा जबाब देबाक हेतु भारी भरकम फीसक मांग कए देब, आवेदनकेँ एहि विभागसँ ओहि विभाग स्थानान्तरिक करैत रहब, सामिल अछि। प्रथम अपील विभागेकक अधिकारीक समक्ष कएल जाइत अछि जाहिसँ मामलामे कोनो नव बात नहि भए पबैत अछि। समान्यतः ओ पहिने लेल गेल निर्णयक पुष्टि कए दैत छथि। तकर बाद दोसर आ अन्तिम अपील राज्य वा केन्द्रीय सूचना आयोगक समक्ष करबाक प्रावधान अछि। मुदा समस्या अछि जे ओहिठाम आवेदनक भरमार अछि आ निर्णय लेबामे बहुत समय लागि जाइत अछि जाहिसँ कैबेर गलत लोक बँचि जाइत अछि। सरकारकेँ बहुत रास मामलामे सूचना नहि देबाक छूट भेटि जाइत अछि। कानूनक एहि प्रावधानक कतेको मामलामे दुरूपयोग होइत अछि। कोनो-ने- कोनो बहाना बनाए सूचना नहि देबाक प्रयास होइत रहल अछि। हलाकि आयोग एहन मामलामे बहुत सख्त रुखि रखैत अछि आ दोषी अधिकारीकेँ जुर्माना सेहो लगबैत अछि।मुदा तैँ की? विलंब तँ भैए जाइत अछि। फेरसभ लोक ओतेक धैर्य पूर्वक लागलो नहि रहि पबैत छथि।

जे होउ, सूचनाक अधिकार कानूनकेँ बनि गेलासँ भारतक नागरिककेँ सरकारी काम-काजक जानकारी लेब आसान भए गेल अछि। कतेको तरहक जरूरी सेवामे निर्णयमे पारदर्शिता आएल अछि। बहुत तरहक कदाचारक मामला सभ पकड़ल गेल अछि। सरकारी अधिकारी गलत काज करबामे डराइत छथि। कतेको मंत्री धरिकेँ इस्तिफा दबए पड़लनि अछि। निश्चय एहि कनूनसँ आम नागरिकक महत्व वढ़ल अछि। मुदा दिक्कति एहि बातक अछि जे एखनो बहुत रास नागरिक एहि कानूनक जानकारीसँ वंचित छथि। ताहि हेतु जरुरी अछि जे एकर पर्याप्त प्रचार होइक। सूचना लेबाक आ आवेदन करबाक प्रकृयाकेँ आओर सरल बनाओल जाइक।q

२५.०३.२०१८

 

 

 

रबीन्द्र नारयण मिश्रक

दूटा लघुकथा

जीबी तँ की की ने देखी !

लोक की की ने देखलक। मुदा दू-चारि बर्खसँ जे सभ गाममे भए रहल छल से एकदम अप्रत्याशित छलैक। नव-नव गुलंजर नित्य उठैत रहैक।

रबि दिन हाट लगल रहैक। सभ पुरुष हाट करए गेल रहए। अरूण बाबू सपरिवार गाम आएल छलाह। हुनकर भाए मोहन बाबू बेस अगरजित छलाह। मैट्रिक उतीर्ण केने छलाह। ओना, खेत-पथार बहुत तँ नहि रहनि मुदा गुजर होयबामे कोनो दिक्कत नहि होइक। गाम घरक झगड़ा फड़िछाबएमे ओस्ताद छलाह मुदा अपना घरक झगड़ा नहि फड़िछा पबैत छलाह। घरवाली बड्ड तेज छलखिन। गोर-नार दप-दप। बी.ए. केने छलखिन। पिता गरीब मुदा विवेकी छलखिन। हुनकर एक मात्र कन्या छलखिन शीला, जिनक बिआह मोहन बाबूसँ भेल छलनि। मुदा बिआहक बाद हुनका लोकनिक आन्तरिक मतभेद बढ़ले चल जाइत छलनि। एहि बातसँ शीला बड़ दुखी ओ उदास रहैत छलीह।

अरूण बाबू बहुत दिनक बाद आएल छलाह। दूनू भाए आपसमे गप्प-सप्प करैत छलाह कि क्यो स्त्रीगण रिक्सापर आएल आ ओकरा संगे दोसर स्त्रीगण घरसँ बहराएल आ रिक्सापर बैस चुप्पे चलि गेलथि। किछु कालक बाद मोहन बाबू आँगन गेलाह तँ घरक जिंजीर बन्द छल। आँगन सुन्न। कतहुँ क्यो नहि। मोहन बाबू गुम्म। ने हुनका आगा सुझनि आ ने पाछा। की करी,की नहि करी किछु फुराइते ने छलनि। क्रमशः ई गप्प सौसे गाम पसरि गेल।

ई घटना कोनो नव नहि छल। एक मास पहिने एकटा एहने घटना भेल जे पूरा इलाकाकेँ झकझोड़ि देलक। पूरबरिया गामवाली बड़ सात्विक छली। दुरागमनसँ पहिने बिधबा भए गेल छलीह। तहिआसँ आइ धरि सात बर्ख बीति गेल। मुदा कतहुँ हुनक चर्चा नहि भेल। नित्य प्रात: चारिये बजे उठि जाइत छली। गामक सभ लोक सूतले रहए कि अन्हरिएमे नहा-सोना कए पूजा-पाठ करए लगैत छलीह। सम्पूर्ण शरीर तेजमय। मुदा किछु दिनसँ दर्द दर्दक सिकाइत करैत छलीह। लोककेँ होइक जे पेटमे अल्सर भए गेलनि अछि। लाजे ओ किछु बजथिन नहि। अन्ततोगत्वा पढ़ुआ काका नहि मानलखिन। हुनका जबरदस्ती अस्पताल लए गेलखिन। डाक्टर अस्पतालमे भर्ती कए देलकनि। ओकरा भर्ती करा कए पढ़ुआ काका किछु पैसा-कौड़ी जोगार करए गाम आपस अएलाह। प्रात:काल अस्पताल पहुँचला तँ रोगीक कतहुँ पत्ते नहि। पता नहि रोगी केतए चल गेलीह। सौंसे इलाकामे एहि बातक गर्द पड़ि गेल।

ओना तँ गाम-घरक लोक बेस नेम-टेमबला। मुदा बेसीलोकक मोन सिआह। क्यो ककरोसँ कम नहि मुदा भीतरे-भीतर सभकेँ घून पकड़ने। मुदा इलाकामे एक्के बिहाड़ि। स्त्रीगण सभ घोघ उठाबए लेल बेहाल। बेटा सभक पिताक कुंजी छिनए लेल बेहाल। पुतोहु सभ सासुक गट्टा पकड़ए लेल बेहाल। घरे-घरे भिन्नक हाबा से जोरगर बहल अछि जे बयन परसैत-परसैत सभ परेशान। घरे-घर कै-कै गोट चूल्हा भए गेलैक अछि।

खैर ! ई तँ जे भेलैकसे भेलैक। मुदा सभसँ आश्चर्य ओहि दिन भेल जहन पुरुषोत्तम बाबूक घरवाली हनहनायल थाना पहुँचि गेलैक। ओकरा देखए लेल चौगामका हजारो लोक जमा भए गेल। करमान लागल लोक आ तैयो दनदनाइत दरोगाजीक ऑफिसमे प्रवेश कए गेल। दरोगाजी पुलिसकेँ आदेश देलखिनजे भीड़केँ भगा दौक आ अपने ओहि कन्याक इजहार लेबए लगलाह। सँए-बहुमे गम्भीर मतभेद भए गेल छलैक। घरवाली कनिक्को रौ सहए वाली नहि छलैक। बाते-बातमे दूनू व्यक्तिमे मारि -पीट भए गेलैक। घरवाली थानामे आबि कए एफआइआर कए देलकैक- हमारा जान का खतरा है।

तकर बाद ओ रिक्सा पकड़ि मधुबनी चल गेलि। बहुत दिनक बाद सुनल गेल जे ओ कतहुँ आनठाम बिआह कए लेलक अछि।

गाममे ओझा-गुनी आ भगैतक चर्चा अखनो जोर पकड़ने छल। फुदरक घरवालीकेँ हाथक चाटी चलैत छलैक आ कनेक-मनेक मंत्र-तंत्र सेहो ओ जनैत छल। मुदा एहि बेर अष्टमीक दिन बेस ताल भए गेलैक। ओकर घरवाली साफे बकए लगलैक। खुलि कए देवी खेलाए लगलैक। गाम-गामक भगता आएल। मुदा ककरो बुते देवी नहि पकड़मे अएलैक। गाममे ओहि दिन पछवारि गामक ओझाजी आएल छलाह। हुनको तंत्रे-मंत्र बेस जोरगर छलनि। दौड़ल-दौड़ल लोक हुनका बजौने आएल। ओझाजी अएलाह। अनुष्ठान भरि राति भेलैक। देवी बन्‍हेबे नहि करैक। अन्ततोगत्वा भोरुकबा रातिमे आबि कए ओ देवी पकड़मे अएलैक। गटागट बाजए लगलैक-

एक मास धरि अनुष्ठान कर। ई कर, ओ कर, नहि तँ सौंसे गामकेँ पीस कए धए देबौक। इत्यादि-इत्यादि...।

औ बाबू! आब तँ सौंसे गौंआ ओझाजीक अनुनय-विनय करए लागल। ओझाजी अपन भाव बढ़बए लगलाह-

हमरा तँ ओतए जेबाक अछि। ई करबाक अछि, ओ करबाक अछि। हम परसू जेबे करब। एक्को दिन नहि रूकि सकैत छी।

बड्ड मोसकिलसँ ओ रूकलाह। नित्य साँझसँ देवीक अनुष्ठान घरमे शुरू होइक आ भोर धरि चलैत रहैक। ओहि अनुष्ठानक दौरान ओतए ककरो आएब मनाही छलैक। देवी रहि-रहि कए गरजै-

सभकेँ देखबौ। एक-एककेँ देखबौ..!”

फूहर बाबू बाहर दरबाजापर सभ सुनैत रहथि आ देवीक आराधना करैत-करैत औंघा जाथि। ओमहर ओझाजी अनुष्ठानमे लीन। अनुष्ठानक अन्तिम दिन छल। नि:शब्द राति। ओझाजी आ फूहरक घरवाली अनुष्ठानमे लीन। सभ क्यो औंघाइत छल। एही समयमे दूनू देवी-देवता एकाएक गाएब। गामसँ पूब दिस सड़क छलैक। से पकड़ने-पकड़ने ने जानि कतए चल गेल। भोर भेने गाममे फेर एकटा गुलंजर छुटि गेल।

गाममे आब की की ने अछि। इंजीनियर, प्रोफेसर आ बीए-एमए केर तँ गप्पे जाए दिअ। गामक लोक बेस टेटियाह। एकदम नियमसँ रहब आ नियमसँ जीब। भोरे उठि कए सुतबाक काल धरि मंत्रोच्चार करैत रहताह। गरीबक घर कोनो अधलाह काज भेल नहि कि ओकरा चट्टे बारि देताह। मुदा धनिक लेल सातटा खूनो माफ।

प्रोफेसर साहेबकेँ घरवालीसँ नहि पटलनि। तलाकक मोकदमा भए गेल। घरक लोकमे सँ क्यो कनियाँक पक्षधर नहि भेलैक। तलाक पास भए गेलैक। प्रोफेसर साहेब धराक दए दोसर बिआह केलाह। ओहिसँ बच्चो भेलनि ओ ओहि बच्चाकेँ विआहो भए गेलैक।

सोचियौक समय कतए-सँ-कतए पहुँचि गेल। जीबी तँ की की ने देखी !

¦
 

 

तुषारपात

सभागाछीसँ बरक सिद्धान्त लिखाकए आबि गेल छलैक। सौंसे गाम हँगामा भए गेलैक। हीराबाबूक बेटीक बिआह आइ.ए.एस. अधिकारीसँ हेतैक। पिता हो तँ एहन। लाख रूपैआ तिलक लगलैक।

हीराक पिता शीतल बाबू नामी ठीकेदार छलाह। एक मात्र सन्तान एक बेटी छलखिन। कतेको बरखसँ बरक खोजमे भिरल छलाह मुदा कतहुँ किछु कमी तँ कतहुँ किछु...। ओहि दिन पुरबारि गाम दिस बिदा भेल छलाह कि रस्तामे अकस्मात किछु गोटेसँ परिचय भए गेलनि। वएह सभ ओहि बरक परिचय देलकनि। बर जहिना देखैत सुन्नर तहिना सौम्य स्वभाव। शीतल बाबू तय कए लेलाह जे जान रहए कि जाए मुदा ई काज करक अछि।

अन्तोगत्वा एक लाख टकापर गप्प गेल। पन्द्रह जुलाईक दिन सेहो निश्चित भेल। बड़ उत्साहसँ बिआहक विधि सभ पूर्ण भेल ओ शीतल बाबूक ओहिठामसँ चौगामा लोककेँ हकार देल गेल।

हीरा बाबू नीलिमाक बिआहक चर्च इलाका भरिमे पसरि गेल। जकरे देखू सएह ओहि बिआहक चर्च करैत छल। बिआहक चारि-पाँच दिनक बाद हीरा बाबू आइ.ए.एस.क प्रशिक्षण करए चल गेलाह। बेस मौज कटलैक ओहि प्रशिक्षणमे। हीरा बाबू गोरनार ओ अतीव सुन्दर छलाह। हुनक व्यक्तित्वमे आकर्षण छलनि। बेस मौजी लोक छलाह एवम् विचारसँ अत्याधुनिक। आइ.ए.एस.क प्रशिक्षण करैत-करैत ओ दुनियाँसँ पूर्ण परिचित भए गेल छलाह। प्रशिक्षण समाप्त भेलापर हुनकर पदस्थापन लखनउ भेलनि।

हीराबाबूक पराक्रम दिन दुगुन्ना ओ राति चौगुन्ना बढ़िते जा रहल छल। नीलिमाक पालन-पोषण संयत वातावरणमे भेल छल। ठीकेदार साहेब यद्यपि सुखी सम्पन्न लोक छलाह, मुदा स्वभावसँ अतिशय संयत। धिया-पुतापर हुनके संस्कारक छाप छल। नीलिमा जहिना देखैत सुन्दर छलीह, स्वभावो ओहिना मधुर। बिआहसँ साल भरि पूर्वे वो स्नातकक परीक्षा प्रथम श्रेणीमे उत्तीर्ण केने छलीह। बिआहक बादसँ हुनका अपूर्व प्रशन्नता छलनि। यद्यपि वो सभ काज पूर्ववते करैत छलीह। मुदा मोन सदिखन हुनकेपर टांगल रहनि।

ओमहर हीराबाबू भोग-विलासमे नीलिमाकेँ बिसरि गेलाह। प्रयोजने कोन छलनि जे वो नीलिमा हेतु व्यग्र होइतथि।

नीलिमाक आँखि चिर प्रतीक्षासँ असोथकित भए गेल छलनि। एक दिन अपन माएकेँ संग कए हीराबाबूक डेरापर स्वयं पहुँच गेलीह। डेरापर पहुँचिते ओतएसँ एकटा बेस सुन्दरिकेँ बाहर जाइत देखि हुनकर माथा ठनकलनि। हीराबाबू ओकरे संग कोठरीसँ बहराएल छलाह। नीलिमाकेँ देख वो गुम्म पड़ि गेलाह। फेर बजलाह-

हलो!नीलिमाजी। आउ, आउ। हम तँ अहींक प्रतीक्षा कए रहल छलहुँ।

किछु दिन हीराबाबूकेँ नीलिमाक संग खूब नीक लगलनि। किन्तु मासक धक लगिते हीराबाबूक पुरना आदति सभ पछोड़ करए लगलनि। किछु दिन नीलिमा चुप्प रहलीह, किन्तु जहन मामला हदसँ बाहर भए गेल तँ वो सोचलीह जे हीराबाबूकेँ बुझाएल जाए।

अहाँ एतेक राति धरि कतए रहैत छी?”

कतहुँ रहैत छी ताहिसँ अहाँकेँ मतलब?”

जरूर मतलव अछि! आखिर हम अहाँक अर्द्धांगिनी थिकहुँ। अहाँक सुख-दुखमे हाथ बटायब हमर हक ओ कर्तव्य अछि।

नीलिमा सेहो तावमे आबि गेल छलीह। बाते-बातमे हीराबाबू शराबक नशामे धुत एक चाटी चला देलखिन। नीलिमा ओतहि पसरल ओछाओनपर जा खसलीह। हीरा बाबू दोसर कोठरीमे जाए किदनि बजैत आराम करए लगलाह। ओहि दिनसँ जे दूनू गोटेमे शास्त्रार्थ शुरूआत भेल से अविरल चलिते रहल। घरक वातावरण कलहसँ नर्क भए गेल छल। नीलिमा हीराबाबूकेँ सुधारक हेतु कृतसंकल्प छलीह ओ हीरा बाबू सेहो अपने रस्तापर चलबाक हेतु अड़ल रहलाह। निरन्तर तनाव ओ कलहमे रहलासँ नीलिमाक स्वास्थ्य खसए लगलनि। ओ एक मास धरि लगातार ज्वरसँ पीड़ित रहलीह।

नीलिमाक विमारीक खवरि ठीकेदार बाबूक कान धरि पहुँचल। पहिने तँ हुनका विश्वासे नहि भेलनि मुदा जखन हुनका नीलिमाक पत्र प्राप्त भेलनि तँ ओ गुम रहि गेलाह।

तेजस्वी, चंचल ओ सतत प्रशन्न रहए वाली नीलिमा पीयर, निस्तेज ओ शुष्क पड़ि गेल छलीह। फटकियेसँ अपन पिताकेँ अबैत देखि जान-मे-जान आबि गेलनि। ओ दौड़लीह आ अपन पितासँ स्नेहवश सटि गेलीह। ठीकेदार साहेबकेँ अश्रुपात होमए लगलनि। हीराबाबूक कार सेहो संयोगसँ ओहि समयमे बाहरसँ आएल एवम् ओहीठाम ठहरल।

बाप-बेटीक एहि मधुर मिलनक कोनो प्रभाव हीराबाबूपर नहि पड़ल आओर वो ससुरकेँ बिना गोर लगने अपन निवास स्थित कार्यालयमे दनदनाइत चल गेलाह। ठीकेदार साहेब बुजुर्ग छलाह। हीरा बाबूक रंग-ढंग ओ नीलिमाक निस्तेज देहकेँ देखि ओ स्थितिकेँ तुरन्त बुझि गेलाह। मोनमे भयंकर क्रोध होमए लगलनि। मुदा अपन आवेगकेँ बेस मोसकिलसँ रोकलाह। फेर नीलिमाक संगे हुनकर कोठरीमे चलि गेलाह।

पता नहि, कतेक काल धरि ठीकेदार साहेब नीलिमाक संगे बैसल रहलाह। स्नेह मिश्रित अपन गप्पसँ हुनका सुखी करैत रहलाह। एहि गप्प सभसँ नीलिमाकेँ प्रर्याप्त मानसिक विश्राम भेलनि। वो सुति रहलीह। ठीकेदार साहेब पता नहि, की की सोचैत रहलाह?

भोरे आठे बजे ओ ओहिठाम पहुँचल रहथि। दुपहरियाक एक बाजि रहल मुदा हीरा बाबू अखन धरि ससुरक पुछारि नहि केलाह। नीलिमाक संग भोजन कए ठीकेदार साहेब स्वयं हीरा बाबूसँ भेँट करए गेलाह। हीरा बाबू अपन आवासीय कार्यालयमे फाइलक बीच डूबल छलाह। ठीकेदार साहेब हुनका देखि ठिठकि गेलाह। मुदा हीरा बाबू अविचल रहि हुनक तिरस्कार करैत रहलखिन।

नीलिमा आगू बढ़ैत कहलखिन-

बाबूजी, अएलाह अछि।

हीरा बाबू ठीकेदार साहेबकेँ इसारा कए बैसबाक आग्रह कएलनि। ठीकेदार साहेब पुछलखिन-

की हाल अछि?”

ठीके। कोना अएलहुँ?” हीरा बाबू बाजि उठलाह।

ओहिना शहरमे किछु काज छल। सोचलहुँ अहुँसँ भेँट केनहि चली।

नीलिमाकेँ अपन पिताक उपेक्षा नहि सहल गेलनि। ओ तमतमाइत अपन पिताकेँ घिचने ओहिठामसँ उठि गेलीह। हीरा बाबू पुन: फाइलमे डुवि गेलाह।

गाड़ी मधुबनी टीशनपर आबि गेल छलैक। नीलिमाकेँ औंघी लागि रहल छलनि। ठीकेदार साहेब उठौलखिन-

उठू नीसू उठू। मधुबनी आबि गेल।

नीलिमा थाकल, झमार लउतरलीह। निस्तेज, उत्साहहीन, नीलिमाक एक्का जौं-जौं गाम दिसि बढ़ए लागल, नीलिमाकेँ भूतकालक दृश्य सभ मोन पड़ए लगलनि। कतेक दुलारू छली ओ। गामक लोक सभ जे क्यो ओमहरसँ गुजरए, नीलिमा दिस तकिते रहि जाए। जेहने सज्जन तेहने सुन्दरि। स्वभाव ओ गुणक अपूर्व समन्वय। पिताक एकलौता सन्तान। ठीकेदार साहेब जे किछु कमेलाह तकर प्रेरणा नीलिमेक छल। कतेक गरीब छलाह वो। नीलिमा लक्ष्मी बनि कए आएल छलि हुनका ओतए। नीलिमाक जन्म होइतहि ओ बढ़ए लगलाह। मुदा आइ संगे-संग एक्कापर चलैत-चलैत ओहो गुम छलाह। किछु कालमे गाम आबि गेल। ठीकेदार साहेब ओ नीलिमा एकपेरिया रस्तापर अपन घर दिस बढ़ैत गेलाह। लगैत छलैन जेना हुनकर सभ आशापर तुषारपात भए गेल हो।

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रबीन्द्र नारायण मिश्रक

नमस्तस्यै

आगाँ...

३२.

गाम अबितहिं ओकरा पुष्पाक समाचार भेटलैक। पुष्पा मास्टर साहेबक नवजागरण मंचक सदस्यता लए लेने छलि। बेटा राजकुमारक उग्रवादी सोचक प्रगतिशील विचारमंचक मूर्धन्य नेता छलैक मुदा ओ मास्टर साहेबक इमान्दार छबिसँ प्रभावित रहए। फेर दुनू गोटे संगे मनोरोगी अस्पताल काँकेमे साल भरि समय बितौने छल। बादमे डाक्टर भेद खोललक जे दुनू स्वस्थे छल। ककरो दिमाग खराप नहि रहैक। मानसिक अवसादक कारण व्यवहार गड़बड़ा गेल रहैक।

जे होइक, मुदा घरेमे वैचारिक मतभेद ओहो माएक संग राजकुमारक हेतु एकटा कठिन परिस्थिति जरूर उत्पन्न कए देने छल। तकर समाधान हेतु राजकुमार मास्टर साहेब ओहिठाम पहुँचल। मास्टर साहेब राजकुमारकेँ देखि बहुत प्रशन्न भेलाह। राजकुमार सभटा बात मास्टर साहेबकेँ कहलकनि। आखिर ओ हुनकर विद्यार्थी रहि चुकल छल। मास्टर साहेबक कोनो बात काटए जोगर नहि होइत छलैक। ओजनाधार पार्टीक रुखिसँ असहमत छलाह। कारण ओकरामे वैचारिक इमान्दारीक अभाव रहैक। मुदा प्रगतिशील विचारमंचक सेहो समर्थन नहि कए सकैत छलाह। कारण उग्रवादसँ फिरंगीक लोहा लेब सम्भव नहि छल। सामाजिक परिवर्त्तन तँ मास्टर साहेबक मूलमंत्र छलनि।

सैद्धान्तिक रूपसँ राजकुमार मास्टर साहेबसँ सहमत छल। मुदा एकर कार्यान्वयन कोनो होएत। कारण ओकरा गुटमे आधा आदमी तँ भूतपूर्व डकैत छल जे गाहे-बगाहे ओकर संग भए गेल छल। डकैती आब छोड़ि देने छल मुदा अतीत ओकरा सभक पछोड़ कए रहल छल।

एहि सभक समाधान हेतु मास्टरे साहेब विचार देलखिन जे अरुणसँ भेँट कए एहन लोक सभकेँ आम माफी दिआबक प्रयास कएल जाए जाहिसँ ओ सभ खुलिकए राष्ट्रक मुख्यधारासँ जुड़ि सकए।

राजकुमारकेँ ई विचार बहुत नीक बुझेलैक। मास्टर साहेबक संग कए अरुणक डाक बंगला दिस विदा भए गेल। मोन भेल जे एक बेर अरुणसँ भेँट कएल जाए। बच्चाक दोस्तछल, हमर नैहरक छल, तेँ जिज्ञासा स्वभाविक। हुनका कहलिअनि तँ सहर्ष तैयार भए गेलाह। हम सभ बिना कोनो पूर्व सूचनाकेँ दड़िभंगा कलक्टरक डेरापर पहुँच गेलहुँ। ओहि डेराक रूप-रंग देखिकए लगैक जे कोनो पैघ आदमी ओतए आबि गेल छी। कतेको नोकर-चाकर सभ लागल छल। फुल, फलहरीसँ भरल छल। कतेको गोटे कलक्टर साहेबसँ भेँट करए आएल रहथि। मुदा पीए जहॉं हमर नाम कहलकै ओ तुरन्त अपने बाहर आबि गेलाह आओर हमरा देखिते बहुत प्रशन्न भेलाह। हम सभ अन्दर अतिथि कक्षमे बैसिले रही कि मास्टर साहेब, राजकुमारक ओहिठाम आगमनक सूचना भेटल। अरुण हुनकर विद्यार्थी रहि चुकल अछि।

राजकुमार तँ स्कूलिया संगी रहैक। अरुणकेँ जहॉं खबरि भेटलैक, तुरन्त ओकरो सभकेँ ओहीठाम बजा अनलक। तीनटा स्कूलिआ संगी, हम, अरुण आओर राजकुमार मास्टर साहेबक संगे एकट्ठा भए गेल रही। सभक बहुत खातिर भेल। ओकर अंग्रेजी पत्नी एंगल जरूरी काजसँ पटना गेल रहैक। सौंसे डेरा खालिए छल।

गप्प-सप्पक क्रममे मास्टर साहेब प्रगतिशील विचारमंचक चर्चा केलथि। ओ जहॉं से बात शुरू केलथि तँ अरुण टोकलकनि जे अहॉं तँ नव जागरण मंच बनौने छी। फेर प्रगतिशील विचारमंचसँ की लेना-देना?

ताहिपर मास्टर साहेब कहलखिन जे दुनू संस्था अलग-अलग काज कए रहल अछि। दुनूक उद्देश्यमे कोनो बेसी अन्तर नहि छैक। हम सभ आपसमे मिलि कए फिरंगीसँ संघर्ष करए चाहैत छी। मुदा एहिमे दिक्कत आबि रहल अछि।

ताहिपर अरुण हुनका दुनू गोटेकेँ दोसर कोठरीमे लए गेल आओर सभ बात विस्तारसँ सुनि कहलक जे हम फिरंगीसँ प्रगतिशील विचारमंचक कार्यकर्त्ता सभपरसँ पुरना केस सभ हटा लेबाक अनुशंसा कए देबैक मुदा भविष्यमे हिंसाक रस्ता छोड़ए पड़तैक। सभकेँ लिखित शपथपत्र देबए पड़तैक जे ओ सभ आगा एहि तरहक काज नहि करत। मास्टर साहेब आओर राजकुमार तुरन्त एहि बातमे सहमति दए देलथि। एहिसँ नीक प्रस्ताव भइए की सकैत छल?

गप्प-सप्पक बाद ओ सभ हमर कोठरीमे आबि गेलाह। ताबे हम सभ चाह-जलखै कए लेने रही। कनीकाल आरामो केने रही। मास्टर साहेब अतिशय प्रशन्न रहथि। राजकुमार सेहो आश्वस्त छल। सभ अपन-अपन जगहपर बैसि आगूक कार्रबाइक योजना बना रहल छलाह कि क्यो धरफराएल अन्दर आएल। ओ राजकुमारक हाथमे एकटा पुर्जी देलक। राजकुमार ओकरा पढ़ि चिन्तित भए गेल। सभ पूछए लगलैक- “की भेल?”

मास्टर साहेबकेँ सेहो चिन्ता होमए लगलनि। राजकुमारक माए पुष्पा बहुत दुखित छलैक। जखन राजकुमार गामसँ विदा भेल रहए तखनो ओकर हालत ठीक नहि रहैक। ओ मास्टर साहेबक संगे चोट्टे गाम विदा भए गेल।

हम सभ ओतहि अटकि गेलहुँ। कारण नीकसँ गप्प करक इच्छा छल। एक युगक बाद ओकरासँ भेँट भेल छल। स्कूलिआ संगी तँ छलहे, हमर पितिऔतो छल आओर से ओकर व्यवहारमे लक्षित भए रहल छल।

हमरा सभ अरुणक सत्कारसँ बहुत प्रशन्न रही। सभ तरहक सुविधासँ सम्पन्न ओहि डेरामे अभाव छल तँ ओकर पहिल पत्नीक जे तमसाकए किंवा आक्रोशमे डेरा छोड़ि नैहर चलि गेल रहथिन।

भोर होइते हमरा लोकनिक हेतु गरम-गरम चाह आबि गेल। सर्किट हाउसक डिलक्स कोठरीमे हम दुनू गोटे रही। लगए जेना दोसर देश पहुँचि गेल छी। कतए गामक परिवेश, कहॉं कलक्टरक आवासक सम्पन्न परिसर ओ सुसज्जत सर्किट हाउस।

कनीकालमे अरुण अपने आएल। सभ गोटे संगे चाह पीलहुँ। चाह पीबैतकाल गप्प-सप्पक क्रममे धिया-पुताक चर्च स्वाभाविकसँ भेलैक। बच्चा सभक, खास कए बेटी सभक पढ़ाइ लए कए हम बहुत चिन्तामे रही।

अरुणक उदारताक वर्णन लोकक मुहेँ सुनैत रहिऐक। से सद्य: तखन देखलिऐक जखन ओ तुरन्त बच्चासभक पढ़ाइक जिम्मा उठा लेलक। सरकार दिससँ बहुत रास छात्रवृत्ति अबैत छलैक आओर एमहर-ओमहर भए जाइत छलैक।

अरुणक एहि आश्वासनसँ मोन प्रशन्न भए गेल। फेर आओर-आओर प्रकरण सभपर गप्प होमए लागल। हम सभ भोरे जे बैसलहुँ से ९ बाजि गेल। अरुणकेँ कार्यालय जेबाक रहैक। पहिनेसँ तय कैटा बैसारमे से जेबाक रहैक। जाइत-जाइत अपन पहिल पत्नी उमाक चर्च कए गेल आओर आग्रह केलक जे ओकरा मनाओल जाए। अरुण ओकरो अपना ओहिठाम राखबाक हेतु तैयार छल। उमाक नैहर हाजीपुर लग नवगाम हमर सभक गामसँ फटकी रहैक तथापि ओकरा आश्वासन दए हम सभ गाम विदा भेलहुँ।

समस्या जटिल तँ भइए गेल रहैक। उमाक नैहर बेस धनाढ़्य छलैक। ओ सभ कोनो मामलामे अरुणसँ उन्नैस नहि रहैक, बीसे रहैक। उमाक भाए सभ बड़का-बड़का पदपर रहैक। बाप धनीक ओ प्रतिष्ठित जमींदार रहथिन। तखने मोतीपुर ड्योढ़ीमे अरुणसन बरसँ बेटीक बिआह केलथि। मुदा समय बलवान होइत अछि। लोक सोचैत अछि किछु, भए जाइत छैक किछु।

ओमहर गाम पहुँचतहिं राजकुमारक मोन कोनादन भए गेल। जेना किछु असगुन घटित भए गेल हो। पोखरिक लग पहुँचले छल कि रमुआ भेटलैक। ओकरा देखिते भोकासी पाड़ि कए कानए लगलैक रमुआ। कनैत-कनैत बाजल-

मालकिन नहि रहलीह

एतबा कहैत-कहैत ओ फेरसँ कानए लागल, राजकुमारसँ लपटि गेल। की-की कहैत रहल। राजकुमार तँ अपने अबाक रहए, एना असमयमे माए चलि जेथिन से नहि सोचि सकल रहए। मुदा भावी...। राजकुमारक कनैत-कनैत ऑंखि लाल भए गेल। जमीनपर प्राणहीन, नि:शब्द, अचल पड़ल ओकर माए तुलसी चौरा लग उत्तर मुहेँ राखल छलीह। चारुकातसँ लोक सभ घेरने छलाह। राजकुमार दण्डवत भए हुनका प्रणाम करबक हेतु उद्धत भेल आओर ठामहि खसि पड़ल।

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३३.

अरुण कार्यालय गेल मुदा ओकर मोनमे काल्हिसँ आइ धरि भेल घटनाक्रम बेर-बेर मोनमे घुमैत रहलैक। क्यो ई नहि सोचि सकैत छल जे मास्टर साहेब सन नीक लोकक खिलाफ जासूसी चलैत हो। मुदा सत सएह रहैक। अंग्रेजक राज रहैक। जे क्यो देश भक्त छल ओकरा सभपर फिरंगीक वक्र दृष्टि रहैक। लोककेँ पता होइक नहि होइक मुदा ओकर हिसाब-किताब फिरंगीक ओहिठाम राखल जाइत छल। के कतए गेल,ककरा ककरासँ भेँट केलक- सभ बातक जानकारी ओकरा रहैत छल।

कार्यालयमे प्रगतिशील विचार मंच एवम् नव जागरण मंच सहित अन्य एहन संचिका सभ मंगओलक। संचिका देखि ओ दंग रहि गेल। आश्चर्य लगलैक जे एतेक असत्य खबरि सभ कोना आओर ककरा माध्यमसँ अबैत रहल। एताबत ई बुझा गेलैक जे मास्टर साहेबक बातपर अमल करैत तथाकथित विद्रोही सभकेँ माफी देब आसान नहि छलैक। मुदा ओ प्रयास करैत रहल।

किछु दिनक बाद फेर घुमैत फिरैत हम सभ अरुणक डेरापर पहुँचलहुँ। एहि बेर हमर चारू बच्चा संगे छल। तीनू बेटीक कालेजमे नाम लिखाबक छलैक। एहि बातक चर्च होइतहि अरुण तुरन्त अपन पीएकेँ घण्टी दए बजओलक आओर आदेश देलक जे तीनू बच्चाक नाम पटना कालेजमे लिखा देल जाए एवम् तीनूक रहबाक ओ अन्य खर्चाक प्रबन्ध हेतु पर्याप्त छात्रवृति स्वीकृत सेहो कए देल जाए। आखिर तँ ओ जिलाक कलक्टर छल। तीनू बेटीक नाम पटना कालेजमे लिखा गेल। छात्रावासमे रहबाक व्यवस्था भए गेल एवम् मासिक छात्रवृत्तिक पहिल अग्रिम भूगतान सेहो भए गेल।

हमरा उमीदसँ बेसी मदति अरुणसँ भेटल। ओकरा हृदयसँ धन्यवाद दैत हमसभ दोसर दिन गाम आपस विदा होइत रही। अरुण उमाक हाल चाल पूछए लागल। हम सभ हाजीपुर लग स्थित नवगाम जाए उमासँ भेँट कए आएल रही, मुदा ओहिठाम भेल बातकेँ कहबाक हिम्मत नहि भए रहल छल। मुदा अरुण तँ तेज आदमी छल। ओ हमरा लोकनिक भाव भंगिमासँ सभ बात अखिआसि लेलक आओर एतबे आग्रह केलक जे एकबेर ओकरा उमासँ भेँट करबा दैक, कारण व्यक्तिगत स्तरसँ ओ एहिमे सफल नहि भए सकल छल।

एमहर हम सभ गाम पहुँचले छलहुँ कि मास्टर साहेब, राजकुमारक शीघ्रे एक हेबाक समाचार भेटल। मास्टर साहेब ओ राजकुमारक वैचारिक मतभेद परिस्थितिजन्य कारणसँ कम भेल जा रहल छलनि। ओ सभ तँ जनाधार पार्टीक मुखिआ चेतनसँ सेहो गप्प करए चाहैत छलाह। उद्देश्य ई छल जे समस्त राष्ट्रवादी शक्ति एक भए फिरंगीकेँ देशक बाहर करए। देश स्वतंत्र होएत तँ सभ रस्ता अपने खुजत। पराधीन सपनहुँ सुख नाही। से बात आब सभक मोनमे धसि गेल छलैक। पहिनहुँ ई बात सभ जनैत छल, मानैत छल, मुदा आपसी मतान्तरक नफा फिरंगी सभ उठबैत रहल।

फिरंगी सभकेँ जासूसी खबरि भेटि गेलैक जे राष्ट्रवादीसभ एक भए रहल अछि। ओकरा सभहक हेतु ई कोनो शुभ समाचार नहि छल। सभ वरिष्ठ अधिकारी सभक बैसार भेल। विचार रहैक जे जनाधार पार्टीक प्रगतिशीलमंचसँ फराके रखबाक प्रयास होइक। ताहि लेल मास्टर साहेब ओ राजकुमारक एकटाकेँ प्रोत्साहित कएल जाए। ताहिपर अरुण अपन बात रखैत जोर देलक जे ई तखने सम्भव होएत जखन कि ओकरा सभक खिलाफ मोकदमा सभ आपस लेल जाए। कहक मतलब जे आम माफीक एलान कए देल जाए। सभ अरुणक प्रस्ताव मानि गेल। किछुए दिनमे मास्टर साहेब ओ राजकुमारकेँ अरुणक कार्यालयसँ बजाओल गेल आओर सरकारी एलानक चिट्ठी देल गेल जाहिमे प्रगतिशील विचार मंच एवम् नव जागरण मंचक कार्यकार्त्ताक नाम तमाम मोकदमा सभसँ हटा देल गेल। ओकरा सभकेँ आम माफी दए देल गेल।

डिगडिगिआ पिटि कए एहि बातक एलान गाम-गाम कए देल गेल। निश्चय ई मास्टर साहेब ओ राजकुमारक हेतु बहुत नीक दिन छल। परिपट्टामे ओकर सभहक नारा लागि रहल छल। हमरा लोकनि अपन गामसँ सिमरिआ मास करए गेल रही। गाम-गामक लोक सभ ओहिठाम एक मास गंगाक कछारमे टेंट खसाए भोरे-भोर गंगा स्नान कए पूजा पाठ करैत अछि। नव नव लोकसँ परिचयक अवसर भेटैत छैक। गाम घरक चिन्तासँ किछु दिनक हेतु मुक्ति भए जाइत अछि।

ओहि माघ मेलामे नवगामक लोक सभ सेहो रहैक। हमर नैहरक लोक सेहो रहैक। सभक आपसमे क्रमश: भेँट-घॉंट होइत होइत बात खुजलैक जे उमा सेहो मास करए आएल छथि। हम एक दिन असगरे हुनकर बासा दिस गेलहुँ। संयोगसँ ओ बाहर निकलिते रहथि। नवगाम लोकक डेरा दूरेसँ क्यो देखा देने रहए। हमरा हुनका एकबेर भेँट भेल रहए, मुदा एक्कहि बेरमे कतेक गप्प कएल जाइत। अपना भरि बुझाबक प्रयास केने रहिऐक। एहिबेर एसगरि पाबि विस्तारसँ गप्प भेल।

उमाक संग अन्याय तँ भेले रहैक। ओ चुपचाप से सहि जाएवाली नहि रहथि। हुनकामे दृढ़ता ओ निष्ठा भरल छल। सत्य ओ न्यायक हेतु ओ कोनो हद धरि लड़ि सकैत छलीह। हुनकर इएह व्यक्तित्व तँ अरुणक डरक कारण छल। ओ जनैत छल जे उमा प्रतिकार करतीह। एही भयसँ ग्रसित भए ओ किछु बीचक रस्ता निकालबाक प्रयासमे छल। मुदा उमा तँ एकदम एहि पार वा ओहिपारक तैयारीमे छलि। ओकर तर्कक आगू हम किछु नहि कहि सकलिऐक। अरुण गलती तँ केनहि रहए।

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३४.

आममाफीक एलानमे भजनानन्ददास उर्फ गरम सिंहक नाम सेहो रहैक। ई शुभ समाचार देबए मास्टर साहेब राजकुमारक संग कए स्वयं देबए गेलाह। ई तँ एकटा बहाना रहैक, असलमे हुनका सभक इच्छा रहनि जे भजनानन्ददासजी महराजसँ भेँट कए स्वतंत्रता आन्दोलनकेँ आग बढ़ाबक जोगार कएल जाए। किछु आर्थिक मदतिक सेहो प्रयोजन रहनि।

भजनानन्ददासक यश चारूकात पसरि गेल छल। देशक कोन-कोनसँ भक्तगण ओहि आश्रममे आबि शान्ति लाभ करैत छलाह। भजनानन्दजीक व्यक्तित्व ओ चरित्र दिन प्रति दिन चमकि रहल छल। लोकसँ स्वेच्छासँ प्राप्त अकूत धनक उपयोग ओ जन कल्याणमे करैत छल। ओकर आश्रममे अध्यात्मक व्यवहारिक स्वरुप देखबामे अबैत छल। आश्रममे रहनिहार बिधवा सभ पूर्ण सुरक्षित ओ आनन्दमे रहैत छलीह। दू सएसँ बेसीए बिधवाक पालन पोषण हुनकर आश्रममे होइत छल। वृन्दावनेमे नहि अपितु चारूकात भजनानन्ददासक आश्रमक यश छल।

भजनानन्ददास भजन करैत-करैत वस्तुत: संत भए गेल छलाह। संगहि विशुद्ध राष्ट्रवादी विचारक छलाह। फिरंगी सभकेँ हुनकर बढ़ैत प्रतापसँ डर होइत छलैक। तेँ हुनका केसमे फसाबए चाहलक मुदा सत्यक विजय भेल। ओ ई बात बुझैत रहथि।

दोसर दिन साँझमे मास्टर साहेब ओ राजकुमार आश्रम पहुँचलह। ओहि समय आश्रममे आरती चलैत रहैक। भजनानन्दजी इशारासँ हिनका सभकेँ ओतहि रुकबाक हेतु कहलखिन।

आश्रमक आरती तँ नामी छल। सैंकड़ो संत, महात्मा, गृहस्थ, बिधवा सभ मगन भए आरती करथि ओ राधे! राधे!क भजन सेहो। हारमोनियम, ढोल, झाइलक संग सूरदासक भजन सुनि तँ कतेको भक्तगण भाव विह्वल भए नृत्य करए लगैत छलाह। करीब डेढ़, घन्टा भरि ई कार्यक्रम चलल।

तकर बाद प्रसाद वितरण भेल। हमरो सभकेँ प्रसाद भेटल। प्रसाद अति स्वादिष्ट होइत छल। होइत छल जे खाइते रही।

आरतीक बाद भजनानन्दजी हमरा सभकेँ अपन कक्षमे बजा लेलथि आओर सभ बात ध्यानसँ सुनलथि। ओ एहि बातसँ बहुत प्रशन्न भेलथि जे हुनका एवम् आश्रममे हुनका संगे रहनिहार हुनकरचेला सभपर सँ पुरनका मोकदमा सभ सरकार आपस लए लेलक। मास्टर साहेब बात आगू बढ़बैत कहलखिन जे स्वतंत्रता आन्दोलनमे गति देबाक काज छैक।

आपसी संगठन मजगूत कए फिरंगी सरकारपर आक्रमणक प्रयोजन छैक। ताहि हेतु ओ सभ प्रगतिशील विचार मंच ओ जनजागरण मंचक विलय करए चाहैत छथि।

प्रयास तँ ईहो भए रहल अछि जे जनाधार पार्टीक सेहो सामिल कए समस्त जनशक्तिकेँ संगठित कएल जाए मुदा जनाधार पार्टीबला सभ आगा- पाछा कए रहल छल। ओकरा सभमे असलमे सही नेतृत्वक अभाव छल।

भजनानन्ददास एहि बात सभसँ बहुत प्रशन्न भेलाह जे स्वतंत्रता आन्दोलन आब गति पकड़ि रहल अछि। अपना तरफसँ ओ सभ प्रकारसँ सहयोगक आश्वासन देलाह। तय ईहो भेल जे एकमास बाद दड़िभंगामे एकटा सम्मेलन कएल जाएत जाहिमे प्रगतिशील विचार मंच ओ जनजागरण मंचक आपसी विलय भए जाएत।

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