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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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.अनुवादक डॉ. शिवकुमार प्रसादक किछु अनुदित काव्य (मूल रजनी छाबड़ा- हिन्दी) २. कवि डॉ. शिवकुमार प्रसादक

किछु कविता

 

अनुवादक डॉ. शिवकुमार प्रसादक

किछु अनुदित काव्य (मूल रजनी छाबड़ा- हिन्दी)

(PAGHALAIT HIMKHAND

Maithili translation of ‘PaighalteHimkhand’

An Anthology of Hindi Poems by Rajni Chhabra from Hindi into Maithili by Dr. Sheo Kumar Prasad.)

ई केहेन नाता

ई केहेन नाता अछि

खुशी अहाँकेँ भेटैत अछि

खोइछ हमर भरि जाइत अछि।

 

करोट जखन अहाँ घुमै छी

हमर सुख हेरा जाइत अछि।

 

चोट अहाँकेँ लगए

नोर हमर आँखिमे

डबडबा जाइत अछि।

 

अहाँक आँखिमे

नोर छल-छलाइसँ पहिनहि

अपन पिपनीमे समेटबाक

मन होइत अछि।

 

अट्टखेल करैत

लहैरमे किएक

अहाँक छवि

अभरऽलगैत अछि।

 

चुपे-चाप मौसम

गुनगुनाए लगैत अछि

अहाँक स्मृति

हमरामे बसि जाइत अछि।

 

कानमे मिठगर

घन्टी सन बाजए लगैत अछि

जखन अहाँक बोलक

जादू पसरैत अछि।

 

जिनगीक आधा खाली जाम

आधा भरल नजैर अबैत अछि।

 

अनाम सम्बन्धकेँ 

नाम देबए-मे

शब्दो भण्डार खाली भऽ जाइत अछि।

 

अहीं कहू ने

अहाँसँ ई

केहेन नाता अछि? q


 

 

 

मनक पखेरू

आकुल नैन

व्याकुल बाट

अलोपित होइत

आड़ि-धूर,

 

क्षितिजकेँ

छुबाक आस

अतृप्त पियास।

 

तबधल रेगिस्तानमे

सौनक बात

नेहक मेघकेँ बरसब

जिनगीक भीजब,

 

छद्म सपना

फुजल आँखिक छल।

 

 

मनक पखेरू केर

पाँखि कतरब

यएह अछि

यथार्थ केर धरातल। q


 

 

 

कचोट

अधखड़ु जिनगीक चोट

एना जिनगीमे

सन्हिया रहल अछि,

 

जेना करिया रातिक

गाढ़ रोशनाइ

नोरोसँ नहि

धुआ रहल हो। q


 

 

 

स्मृति

अहाँक गुम्मी

अहाँक आँखिक जिह्वासँ

अनकहलो बात

कथा बनि जाइत अछि।

 

नहुसँ छुबि कऽ

बात

फुला जाइत अछि

अधफुलल कलिकाकेँ

ओ छुअब

जिनगीक मस्ती

बनि जाइ छै।

 

अहाँक गमक लऽ कऽ

अबैत अछि वात

ओ क्षण बनि जाइ छै

जिनगीक स्मृति। q


 

 

 

आसक चिड़ै

मन तँ आसक चिड़ै छै

एकरा किए बान्है छी

कैदी बनैले

मनुषक देह

की कम अछि? q

 

कवि डॉ. शिवकुमार प्रसादक

किछु कविता

भोग

हम जे भोगि रहल छी

ओकरे भाखि रहल छी

फाग दियारी ओ अगहन केर 

कातिक सन हम काटि रहल छी

जिनगीक सभ मनोरथ

नोरक तरे आँकि रहल छी। q


 

 

 

जाड़

सौंसे दिन अगियासिये बीतल रातिक कोन ठिकाना

कम्मर तोसकसँ तँ नीक छल नारे-पुआर बिछाना

कहुना कऽ जारसँ बाँची टोपीसँ नीक छल गाँती।

 

मनक मन जरना नित जड़ए तैयो जाड़ नहि मानए

कतबो देहपर कपड़ा लादी तैयो जाड़ नहि भागए

कोना क जाड़सँ बाँची टोपीसँ नीक छल गाँती।

 

गाए महींस थैरपर काँपय गुदरा कम्मर ओढ़ने

गाछपर चिड़ए विकालक मारल देऽह लोल सटौने

सबहक चिन्ता भारी टोपीसँ नीक छल गाँती। q


 

 

 

कनकनी

छुटै छै बोखार सबहक

किछ नहि फुरैत छै

दिनोमे छै राति जकाँ

कन कनी बढ़ले जै छै।

छुटै छै...।

 

बूढ़ बच्चा खेन्हरामे

तैयो कँप कँपैत छै

मालजालक कोना के कहत 

केहेन ओकर हाल छै।

छुटै छै...।

 

घरसँ बाहर सगरे 

तन मन कँपैत छै

हेतए अनर्थ एहि बेर

तेहने आब बुझैत छै।

 

छुटै छै बोखार सबहक

किछु नै फुरैत छै। q


 

 

 

रिजल्ट

नाच गान आ शान सपटहि

बाबू सभ मशगूल

पढै लिखैमे लालबुझकर

छोड़लक सभ इस्कूल।

 

छोड़लक सभ इस्कूल 

ने जानै पोथियोकेर ओ नाम

तीन तीन बेर परीक्षा देलक

भेटय ने रिजल्टमे नाम।

 

भेटय ने रिजल्टमे नाम

मस्टरबा सभ एक्के छै

कोनो बिषयमे नम्बर

दस से ऊपर नै छै। q


 

 

 

जिनगीक झमेला

जिनगीक मेला आब खेला लगैत अछि

आगि कि पानि हो झमेला लगैत अछि।

किनका की कही किनका लग बैठी

काम निष्काम बेकामे लगैत अछि

जिनगीक....।

 

जड़ैत छै पुआर तँ लपकै छै धधरा

मन जखन जड़ै तँ देह जाएछै पझहा

नोरक ठेकान कोन कखन पघैल जाए

देह मन दुनु आब बेकाबू लगैत अछि।

जिनगीक....।

 

पढ़लहुँ जे गुनलहुँ अछि एखनहुँ सहोदर

भाइये बहिन सन नेहगर आ पोरगर

ओकरे बदोलैत जिनगी खेपाइत अछि

ऊँच नीच टेढ़ -मेढ़ एक्के लगैत अछि

जिनगीक....। q


 

 

 

गाम छूटल

फेर आइ गाम छूटल।

नैत छल नातिन छल

सुग्गा सन मेना सन

बेटी छल बेटा छल

आँगन बनल कचबचिया मचान छल 

आइ ओ बथान छुटल

फेर आइ गाम छूटल।

 

नार पुआर संग

गोरहा गोरहन्नी

मोट पातर ठाढिसँ

घूरा बना कऽ

हँसैत खेलाइत छलहुँ

सभ किछ आइ छूटल

फेर आइ गाम छूटल।

 

जाड़ संग ठार्हो छलै

रोटी संग सागो छलै

मारा संग मरूआ रोटी

दूध संग छाल्ही छलै

चलैत खन नैत नातिन संग

नोरक टघार छूटल

फेर आइ गाम छूटल। q
 

 

छितिर-बितिर

कन कन मन संग

घुमलहुँ सगरो

कन कनाइत छल देह

मन नहि मानय तैयो

घुमि घुमि

आबी पुरने गेह

मन अपचंक रहै अछि सदिखन

केतए हेराएल नेह।

 

सभ दिन सभ केर

मन पुरेलहुँ

बनि-बनि अदराक मेघ

अन्त समय आब

आसिनक मेघ सन

छितिर-बितिर भेल गेह। q

 


 

 

 

जातिक छाऊर

छौरक ढेरीमे

तकैत रहलहुँ

अपन आदर

सनमान 

ई जनैत कहाँ छेलिऐ

छाऊर छाऊरे रहैत छै।

पानि सुखिते उड़ए लगै छै।

कतबो जल किएक ने छिटल जाय।

 

आखिर ई जातिक छाउर

कतेक  दिन 

अहिना उड़िया-उड़िया

सभ किछु झॉंपैत रहतइ! q

 


 

 

 

ईहो तँ जिनगीए छै

जखन देखैत छी

जिनगीक ओल झोल

मोल तोल ऊँच नीच

अपनकेँ आन सन

आनकेँ समांग सन

अपनेमे टेंढ़

लाख दू लाखपर

छाँटैत बड़प्पन

तँ देख देख कखनो

हँसैत समाज बीच

कहुना जीबि लैत छी

अपनेमे सन्हियाइत

ईहो तँ जीनगीए छै। q


 

 

 

गामक बात

ई मौसम अछि कतेक नीक

धात्री फरल बैगन फरल

आलू उखरब अछि नजीक 

कुरथी दालिक पुछू ने बात

अपना गामक राखी आश

की कहू अपन गामक बात।

 

बथुआ संग खेसारी साग

मटर पालक भेल भकरार

धनिया आ धात्री केर चटनी

नबका चौरक मीठगर भात

की कहूँ अपन गामक बात।

 

डिल्ली बम्बई बड़का नगर

अपना गामक सुटकल डगर

बड़का नगर आब धरऽ दौड़ए

अपने गामक राखि आश

की कहूँ अपन गामक बात

 

 

 

कोबी-मूड़-मटर केर छिम्मी

खेत-खेतमे हँसैत गुम्मी

कन-कन सागक संग सोहनगर

लागए केहन सुन्नर गात

की कहूँ अपन गामक बात।

ऐ रचनापर अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।