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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)2004-2018. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

वि  दे   विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका  नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू।

जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’

१ टा गीत२७ टा गजल

 गीत

छागर कटैत रहलै

कनैत कलपैत रहलै

भगवती प्रसन्न भ’ गेलीह

लोक सभ बुझैत रहलै |

 

परम्पराक मंचपर हत्याक खेल

बाघकेर बलि कहियो ने देल गेल

 

ढोल-पिपही बजैत रहलै

आ नटुआ नचैत रहलै

भगवती प्रसन्न भ’ गेलीह

लोक सभ बुझैत रहलै |

 

सत्य आ अहिंसाक ज्ञान मौन भेल

भरि गाँ तमाशा देखैछ ठाढ़ भेल

 

लिधुर जे बहैत रहलै

बखरा लगैत रहलै

भगवती प्रसन्न भ’ गेलीह

लोक सभ बुझैत रहलै |

 

कहलनि जे बुद्ध, महावीर आबिक’

सुतलोमे सदिखन रहू जागिक’

 

हिंसा जे होइत रहलै

विपदा अनैत  रहलै

भगवतीक आँखिकेर नोर

क्यो नहि देखैत रहलै|

 

माउसकें  प्रसाद मानि लेल

हर्षमे विषाद सानि देल

 

धरती फटैत रहलै

ट्रेन पलटैत  रहलै

नभमे ई व्याप्त चीत्कार

मौत बनि अबैत रहलै |

गजल

काँट हटयबामे लागल छी

बाट बनयबामे लागल छी

 

आठ बजै छै सभ सूतल छै

साफ़ करयबामे लागल छी

 

काज कनी करियौ यौ बौआ

ढोल बजयबामे लागल छी

 

लोक लगा देने छै झगडा

आगि मिझयबामे लागल छी

 

भाइ कनी अनको दिस तकियौ

पाइ कमयबामे  लागल छी

 

छाँह कमल जाइछ धरतीपर

गाछ लगयबामे लागल छी

 

पाप बहुत बढलै दुनियामे

प्रेम बढयबामे लागल छी

 

        

 

मात्रा क्रम : 22222221

कौआकें कौआ कहि देल

बूझू बड़का गलती  भेल

 

एके घरमे सबहक बास

नै ककरो ककरोमे मेल

 

मरला बहुतो जन महगीसँ

आ हुनकर वेतन बढि गेल

 

जुनि पूछू बौआ हमरासँ

दालि कते दिन खेना भेल

 

सोचै  छी जीवन की थीक

सीढी आ साँपक बस खेल

 

धीया पूता बिनु ई महल

हमराले बूझू अछि जेल

(चारिम शेरक दोसर पाँतिमे

दूटा लघुकें दीर्घ मानबाक छूट

लेल गेल अछि)

        

मात्रा क्रम : 21-12-222

नोर   गरम पीबै छी

भाग्य अपन लीखै छी

 

टीक अपन  नोचै छी

माथ अपन  पीटै छी

 

सोर करू ककरा हम

ठोर अपन  सीबै छी

 

गाछ बनत बड़का ई

बीज ई जे  छीटै छी

 

जोर घटल जाइत अछि

बाँस जकाँ  लीबै छी

 

बाउ अहाँ करबै  की

सभक पता  टीपै छी

 

गीत गजल सीखू ने

गारि किए सीखै  छी

(चारिम शेरक दोसर पांतिमे

एक टा दीर्घकें लघु मानबाक

छूट लेल गेल अछि )

 

     

मात्रा क्रम : 2121-22-221

बात एक लागू सभ ठाम

चोर और साधू सभ ठाम

 

काज काल पाछू रहताह

भोज बेर आगू सभ ठाम

 

पाप थीक माँगब ककरोसँ

से धियान राखू सभ ठाम

 

बूढ-सूढ भूखल ने रहथि

घूरि-फीरि ताकू सभ ठाम

 

बात-बात पर जुनि तमसाउ

मीठ-मीठ बाजू सभ ठाम

 

प्रेम थीक बड़का उपहार

बेर-बेर बाँटू सभ ठाम  

 

किछु लिखबाले किछु पढबाले

सदिखन ताकू  किछु  करबाले

 

चानो आकाशक कहइत  अछि

शीतलता   सभठाँ   बँटबाले

 

क्यो जाइत अछि क्यो अबइत अछि

नित नव-नव पथपर चलबाले

 

देखल  दुनियामे  सभ नाटक

किछु हँसबाले किछु कनबाले

 

फूलो सभ दिन नव-नव फूलय

जीवनमे  करुणा  भरबाले

                                                                                         ६

फाँड़ बान्हिक’ सोझ बाटपर चलबाले’

बुच्ची छथि तैयार समयसँ  लड़बाले’

 

महिषासुरले’ आइ स्वयं दुर्गा बनती

मुक्त धराकें   बलतकारसँ   करबाले’

 

हे सीते जुनि स्वर्ण-मृगाकेर लोभ करू

घूमि रहल मारीच अहाँकें   ठकबाले’

 

अप्पन लछुमन-रेखाकें चीन्हू सभक्यो

आयल अछि रावण सीताकें  हरबाले’

 

केहेन भेषमे कत्त’-कत्त’ अछि रावण

चलू चलैछी आत्म-निरीक्षण करबाले’ 

                                                                                                                 ७

रास रचलक ई दुनिया, हमर दुनिया

गीत गजलक ई दुनिया, हमर दुनिया

 

शांति तकलक ई दुनिया, हमर दुनिया

फूल कमलक ई दुनिया, हमर दुनिया                           

 

लोक सूतल जे छल भांग खाक’ बहुत

नाक दबलक ई दुनिया, हमर दुनिया

 

लोक जागल जे छल नाचमे बाझल

नाम गनलक ई दुनिया, हमर दुनिया

 

लोक टूटल जे छल भीड़मे  छूटल

ताकि अनलक ई दुनिया, हमर दुनिया

 

लोक करजामे डूबल हजारो जत’

हाल जनलक ई दुनिया, हमर दुनिया

 

लोक भागल जे छल रूसि कय गामसं

नेह बँटलक ई दुनिया, हमर दुनिया

( मात्रा-क्रम : 21222-221222)

(तेसर शेरमे दू टा लघुकें दीर्घ मानल गेल)

01.01.2018

               

गजलक धुनिमे मातल छी

ओ बूझै छथि  पागल छी

 

सत सबहक मुंहपर कहलौं 

तें भरि गामक बारल  छी

 

बाढिक लूटल छी  अपने

हम रौदीके  मारल  छी

 

ऐ खेलाके  यैह  नियम

सभ जीतल सभ हारल छी

 

अपनहिकें हम नहि जनलौं

कोना कहबै जागल  छी

 

सीखै छी किछु-किछु सदिखन

नहि हम बाटक थाकल छी

 

ई  डोरी   प्रेमक डोरी

जैमे हम सभ बान्हल छी

 

एकहि आमक कतरा हम

ईश्वर लग नहि बाँटल छी

 

(मात्रा-क्रम : 2222222)

(चारिम शेरमे दू टा लघुकें दीर्घ मानल गेल)   

         ९

एत्ते बात सुनतै के

एत्ते तूर  धुनतै के

 

एत्ते पानि बहितै नै

एत्ते तूर  धुनतै के

 

ई रस्ता त सबहक छै

एत्ते तूर  धुनतै के

एत्ते मूस के मारत

एत्ते भूर  मुनतै के

एत्ते माछ के पकड़त

एत्ते जाल बूनतै के

एत्ते रास पढतै के

पढ़ियो लै त गुनतै के

१०

दीनता अशिक्षा और अन्हार अछि मिथिलामे

अनगिनती  नोरक  टघार  अछि मिथिलामे

 

गाम बहुत अछि बिला  गेल कोसीक बाढ़िमे

अनगिनती सूखल  इनार  अछि  मिथिलामे

 

अल्हुआ  मडुआ आ बिसाँढ एखनहु  खेबाले’

सुतबाले’ एखनहु  पुआर  अछि  मिथिलामे

 

गाम  छोड़िक’ लोक  भगैए  दिल्ली  मुंबई

किछुए अनार लाखो बिमार अछि मिथिलामे

 

कतेक   योजना   शापित   एखनहु   जहां-तहां

एखनहु   रामक   इंतिजार   अछि   मिथिलामे

 

कोन   कृष्ण  कहिया  एथिन  से के जानय

दुख केर गोबर्धन पहाड़ अछि अछि मिथिलामे

११ 

दिन के दिन बजबोमे छै बड़का झंझट

और  चुप्प  रहबोमे छै बड़का  झंझट

 

कहथि पिता भरि राति पानिमे ठाढ़ रहू

एत्ते  दुख  सहबोमे  छै  बड़का झंझट

 

सबहक तील चाउर खा’ सोचथि नेताजी

पांच  साल  बहबोमे छै बड़का झंझट

 

ओ पच्छिमकें पूब कहथि अहूँ ‘हं’ कहियौ

संग हुनक चलबोमे छै बड़का झंझट

 

दान दक्षिणा जप तप दंड-प्रणाम करू

कतहु शिष्य बनबोमे छै बड़का झंझट

 

सभ चाहै छथि घर बनितै किछु नव ढंगक  

आ पुरना  ढह्बोमे  छै बड़का  झंझट

 

बहर काफिया और रदीफ मिलान करू

भाइ गजल कहबोमे  छै बड़का झंझट

 

( मात्रा क्रम :2222 2222 222)

दू टा अलग-अलग लघुकें एक

दीर्घ मानल गेल अछि.            

 १२

अपन नाम परिचय आ घर त्यागिक’ हम

कहू की  सोचै छी एत’ आबिक’ हम

 

सभठाँ  अहाँकेर  संगे  छी  हमहूँ

आब जायब कतयसं कतय भागिक’ हम

 

ओ सभ गाछ ब’रक  सुखा गेल असमय

त सुस्ताएब जा कय कतय थाकिक’ हम

 

सत बात  बाजी  से  होइछ  सिहन्ता

से चुप छी अहाँ  केर मुंह ताकिक’ हम

 

सपनेमे  देखल   करब  हम   अहाँकें

निकलि जाएब भोरे गजल गाबिक’ हम

 

(मात्रा क्रम : 2222 2222 22

दू टा अलग-अलग लघुकें एक दीर्घ मानल गेल अछि |

 

१३

फुनगीपरसं खसलाक बाद और  हाथ-पैर  टुटलाक बाद

लोक मुरती  बनाओत अहांकेर चितापर  चढलाक बाद

 

कियो नै करत अहाँक कहल मुदा फूल चढ़ाएत मुरतीपर

क्यो लागि जाएत मुरती  तोडबामे मुरती बनलाक बाद

  

के चीन्हत आब अहाँ जी एम छलहुँ  आ कि डी जी एम

लोक भ’ जाइए ग्राहक कि मरीज कुरसीसं उतरलाक बाद

  

बड़ी  काल  धरि  एसगरमे  करैत रही साहोर ! साहोर !!

भाइ  आब  मोन  लगैए हल्लुक तूफानसं गुजरलाक बाद

  

सुख  भेटि सकैए किछु  कालले’ पहाड़पर  अथवा जंगलमे

मुदा आनन्द भेटत अपन गाम अपन घ’र पहुँचलाक बाद

 

गम-गम कर’ लगैछै सभटा घ’र आंगन टोल गाम आ शहर

गाछी  सभ  लाग’ लगैछै  सोहनगर  आम मजरलाक बाद

 

सजबैत  रहू  अपनाकें  सभदिन  पवित्रताक  आभूषणसं

गाछी सभ लाग’ लगैछै बड भुताहि आम झखडलाक बाद

 

विधान छै कनियाँक लेल महफाक  ओहारक आ कहारक

गजलहु बनैछ गजल काफिया आ बहरमे  उतरलाक बाद

 

(मात्रा क्रम : 2222  2222  2222  2222)

दूटा अलग-अलग लघुकें एक दीर्घ मानल गेल अछि |

22.10.2018

१४

बथान  हमर  नै  छी,  दलान  हमर नै छी

    दस   कोठलीके   मकान  हमर  नै छी

 

पदबी   हमर   ओगरबाह   एहि    गाछीक

खेत   खोपड़ी  और  मचान  हमर  नै छी

 

लोकक    लहासपर    फुनगीपर   चढ़बाले’

लुत्ती   लगबैत   ई  परान   हमर   नै  छी

 

बलतकार   हत्या  तलाक     मोकदिमा

ई विधि हमर नै छी विधान हमर नै छी

 

पुत्र  बिना  मोक्षकें    कहैत   हो  असंभव

त शास्त्र हमर नै छी, पुराण हमर नै छी

 

मात्रा-क्रम : 2222 2222 222

दू टा  लघु कें एक दीर्घ मानल गेल अछि |

१५

बेर-बेर   बौआ खसै छी किए

अहाँ धडफडायल चलै छी किए

 

अहाँ चुप्प र’हू  कोनो बात नै

अहाँ रातिकें दिन कहै छी किए

 

‘सरस’‘चन्द्रमणि’कि ‘रवीन्द्र’क सुनाउ

अहाँ भोजपूरी गबै छी किए

 

छुबि कान देखू हकमै किए छी

कौआके पाछाँ भगै छी किए

 

सूतल जे मन अछि तकरा जगाबी

अनकासं तुलना करै छी किए

 

संतान  छी  हम  परमात्माकेर

तखन मृत्युसं हम डरै छी किए

(मात्रा क्रम :222222222)

1.दूटा अलग-अलग लघुकें एक दीर्घ

मानल गेल अछि |

2.पांचम शेरमे ‘जे’आ ‘सं’ कें क्रमशः

लघु आ दीर्घमे गिनती कैल गेल अछि |

 १६

लोक दौगल जा रहल अछि सभ्यताक बिहाड़िमे

गाम छूटल जा रहल अछि सभ्यताक बिहाड़िमे

 

ठाढ  कत्ते दिन  रहत  ई चार  बालुक भीतपर

खेत खूनल जा रहल अछि सभ्यताक बिहाड़िमे

 

शहरमे की सड़कपर की अपन घ’रहिमे एखन

लोक लूटल जा रहल अछि सभ्यताक बिहाड़िमे

 

श्रद्धा करुणा और ममता स’भ किछु सभठाँ कमल

पाइ चूनल जा रहल अछि सभ्यताक बिहाड़िमे

 

संस्कृति पड़ि गेल आइ उक्खड़ि समाठक बीचमे

प्रेम कूटल जा रहल अछि सभ्यताक बिहाड़िमे

( मात्रा क्रम : 2222  2222  2222  2)

दूटा अलग-अलग लघुकें एक दीर्घ मानल गेल अछि |

 

१७

रंग-विरंगक सभ फुलवारी नीक लगैए

दुश्मन-दुश्मनमे भैयारी नीक लगैए

 

नीक लगै छनि हुनकाई तिलकोरक तड़ुआ

हमरा अरिकोंचक तरकारी नीक लगैए

 

सबहक जीवनमे आनंदक सपना देखी

लिखबा आ पढबाक बीमारी नीक लगैए

 

नहि सोहायल हमरा कहियो चौका-छक्का

हमरा गीत-गजल संग यारी नीक लगैए

 १८ 

एना  करब  हम  ओना  करब

आ धन कहुना हम जमा करब

 

सभटा   संगे   नेने  जायब

त जुनि पूछू से कोना करब

 

स्वयंसं लड़बै  जीतब दुनिया

से पाइ पैरबी  बिना  करब 

 

सबहक सोझाँ मूंह दुसै  छी

की की सभ आगाँ अहाँ करब

 

लगा कबाछु कहै छथि झा जी

हे यौ ठाकुरजी   क्षमा करब

 

सभ पंडित छथि सभ बूझै छथि

सैह पाएब जे जेना  करब

 

पिपही-ढोल बजाकय अनलौं

की आब कना कय बिदा करब

( मात्रा क्रम :2222 2222)

दूटा अलग-अलग लघुकें एक दीर्घ मानल गेल अछि |

१९ 

कोनो  गाछक  छाहरि  तकबाक  संस्कार नै अछि

एखने कतहु पसरिक’ सूति रहबाक बिचार नै अछि 

 

पहिल कर्तव्य अछि अपन तन-मनकें  ठीक राखब

हमरा अखन  बीमार  पडबाक  अधिकार नै अछि

 

लदै  छी  क्रोध  काम  लोभ मोह  आ अहंकारसं

कोनो  अस्पतालमे  एहि सबहक उपचार नै अछि

 

सबहक  हाथमे  छै स्मार्ट  फोन बेटा छै हाकिम

गाममे  आब  लोहार सोनार कि कहार  नै अछि

 

देखिते-देखिते खाली जगह भ’ जाइ छै  पंचमहला

सुरक्षित   आब   कोनो   खेत-पथार   नै अछि

 

हम ताकि रहल छी सभ स्त्रीमे देवी आ पुरुषमे देवता

हमरा और कोनो तीर्थमे  घुमबाक  नियार  नै अछि

 

एकटा  पहलवान आ हजारटा पैर  घीच’बला

एनामे  कोनो  समाजक  उद्धार   नै  अछि

 

कतहु कियो छीनि नै सकैए हमर सुख-संपत्ति

असलमे हमर स्थायी पता ई संसार नै अछि

२०

मात्रा क्रम :

     2 2 2 2       2 2 2 2       2 2 2 2       2 2 2 2

अज्ञानताक    और    अन्यायक   एतेक   कथा   गढ़ैत    काल

बहुत   कानल   हेताह    व्यासजी    महाभारत   रचैत    काल

 

जरैत   रहि   गेल   लोभ  आ  अहंकारक  आगिमे  जीवनभरि

दुर्योधन किछु नहि ल’ जा सकल संगे दुनियासं चलैत काल

 

हम सभ लीखैत रहैत छी अपन भाग्य अपन सोचसं सदिखन

द्रौपदी    नहि   सोचलनि     बात  दुर्योधनपर  हंसैत   काल

 

मंगनीमे  भेटल  ई  सम्मान  एतेक  महग   सिद्ध  हैत

से नहि बुझलनि कर्ण अंग देशक मुकुट धारण करैत काल

 

नहि द’ सकलीह अपन  संतान सभकें  सदाचारक आशीष

गांधारी  मरि  गेल  छलीह आँखिपर पट्टी  बन्हैत काल

 

अपमानक बदला उचित छल आत्मज्ञानक शस्त्रक उपयोग

चुकि गेलाह गुरुवर अपन शिष्यसं गुरुदक्षिणा मंगैत काल 

 

उठौने   एलाह   तीन-तीनटा  राजकुमारीकें    काशीसं

पुरुष-सिंह बनि गेल छलाह बिलाइ घरमे कुकुर भुकैत काल

 

प्रतीक्षा होइत रहैत अछि शंख घड़ीघन्टा आ  प्रसादक

सभ रहैत अछि सूतल सत्य नारायणक कथा सुनैत काल

 

अन्हड़ उजाड़ि दैत अछि कते घर तोड़ि दैत अछि कते गाछ

धिया-पुताकें  नीक  लगै छै  गाछीमे टिकुला बिछैत काल 

 

फूलो तोड़ब  थिक  बलतकार  गाछक संगे  से के मानत

ढोल-पिपही  बजबैत  रहै छी हम सभ छागर कटैत काल

 

सत्यकेर अवहेलना हरि लैत अछि आत्माक सुख आ शान्ति

से  नै  बुझलनि  देवी कुंती  शिशुकें  धारमे छोड़ैत  काल

 

२१

बाघ जकां लोक आ हुराड़ जकां लोक  

गाम-गाम भेटता  सियार जकां लोक  

 

जहां-तहां  पोखरि-इनार  जकां लोक  

सागर  नदी आओर धार जकां लोक  

 

खाधि जकां लोक किछु आरि जकां लोक  

देखने छी नार आ पुआर जकां लोक  

 

सभठाँ  करथि  मोल-भाव नाप-तौल

भेटि जेता हाट आ बजार जकां लोक  

 

रूसलकें  बौंसय  भूखलकें  नोतय

जामुन लताम  कुसियार जकां लोक

 

गंगाक ज’ल-सन किछु लोक भेटला

भेटला  हिमालय पहाड़ जकां लोक  

 

लोकेले’ जीबय आ लोकेले’ जान देत

गेंदा गुलाब हरसिंगार जकां लोक   

( सरल वार्णिक बहर/ वर्ण-14  )

    

२२

गीत लीखि-लीखिक’ गजल लीखि-लीखिक’

ह’म मौन भेल छी नोरेमे भीजि-भीजिक’

 

लोकेकें देखि-देखि प्रेम हम करैत छी

लोककें ठकैत छी लोकेकें देखि-देखिक’

 

संस्कृतिक ऊपर सभ्यता सवार भेल

फ्लैट हम किनैत छी खेत बेचि-बेचिक’

 

क्यो ख़ुशीसं जान दैत अछि मातृभूमिले’

क्यो मगन रहैए देशेकें लूटि–लूटिक’ 

 

सत्यक पराजय ‘असत्यमेव जयते’

घोषणा करैछ कियो ताल ठोकि-ठोकिक’

 

एना किए ओना किए एहेन किये भेलै

राति-दिन झकैत छी यैह सोचि-सोचिक’

(सरल वार्णिक बहर/ वर्ण-15 )  

                     

२३

अहंकारमे सदिखन   छी

अहाँ कंस छी रावण छी

 

अहाँ बात सबहक काटी 

अहीं बाउ दुरजोधन छी

 

महावीर मनभावन  छी

अहाँ राम आ लछुमन छी

 

अहाँ चुप्प रहि जाइत छी

महाधीर मनमोहन छी 

 

जते दृश्य अछि दुनियामे

महाभारतक जीवन छी

 

हमर मोन नीपल आंगन

अहाँ ओहिमे अरिपन छी

 

अबै राति आ दिन अहिना

कते नीक आयोजन  छी

 

( सभ पांतिमे मात्रा क्रम-1221-2222)

२४

हुनका सोझाँ लिबल ने भेल

‘प्रेम करैछी’ कहल ने भेल

 

हमरा मोनक चैन चोरेलौं

मुदा अहाँकें जहल ने भेल

 

छलै अशरफी ओत्तै गाडल

हमरा जैठाँ रहल ने भेल

 

केश माथमे जते,तते दुःख

गन’ चाहलौं गनल ने भेल

 

 

ठोहि पाड़िक’कियो कनै छल

घ’र बंद क’ पडल ने भेल

 

नोरहिसं लिखने छलीह ओ

चिट्ठी हमरा पढल ने भेल

 

बिना बहरके पद्य ‘अनिल’

कविता भेलै गजल ने भेल

 

(सरल वार्णिक बहर/वर्ण-11 )

   २५

युद्ध करू जुनि शोक करू

हे अर्जुन जुनि सोच करू

 

धर्मक्षेत्र   कुरुक्षेत्रमे   छी

पापक  तीब्र  विरोध  करू

 

मित्र कियो नै शत्रु कियो नै

बुझियौ  और  संतोष  करू

 

जीतू भोगू सुख धरतीक

अथवा स्वर्गक भोग करू

 

अहाँ आतमा अविनाशी छी

तन आ मोनक योग करू

 

सत्य और शांतिक जय हो

नूतन नित्य प्रयोग करू

 

जय हो जय हो पवित्रता 

आउ एखन उद्घोष  करू

 

(सरल वार्णिक बहर/वर्ण-10 )

 २६

वेद-पुराणक महिमा सभटा बूझल अछि

मुदा लोक हमरे करतबसं  रूसल अछि

 

राति आ दिन ओझराएल रहै छी हम जैमे

इहो जाल त अपनहि हाथक बूनल अछि

 

भूमि-भवन गहना-गुडिया एफ डी सभटा

सोचि रहल छी की अरजल की लूटल अछि

 

ह्रदय कहैए ई अन्हार हटतै एकदिन

सपता-विपताकेर कथा सभ सूनल अछि

 

जे जागल अछि ओकरा खातिर भरि दुनिया

‘अनिल’ ओकर की जे सपनेमे डूबल अछि   

 

(सरल वार्णिक बहर/वर्ण-17)

                २७

रावणकेर संहार  केलौं  अपने मनमे

रामक हम दर्शन कयने  छी जीवनमे

 

पढबा-लिखबामे  आनंद  अबैत  रहल

मोन रमल नै कतौ और किछु अर्जनमे

 

दूर रहैत एलौं सभदिन चौका-छक्कासं                 

लागल  रहलौं  शब्दक सागर-मंथनमे

 

माए बाबू दादी दादा नानी नाना मामी मामा 

सभ क्यो छथि  हमरा संगे शुभ  चिंतनमे

 

कोना  बिसरबै  राति   दिसंबर  सोलहके

शाप  सुनै  छी निरभयाक  ओइ  क्रंदनमे

(सरल वार्णिक बहर/वर्ण-16)

 

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