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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१७. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

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१.ओम प्रकाश- गजल २.सत्यनारायण झा- मोनक  गीत

ओम प्रकाश

गजल
गमक' लागलै बसंती हवा
चहक' लागलै बसंती हवा
करेजाक टीस बढ़बै हमर
चमक' लागलै बसंती हवा
चलल झूमि मस्त हाथी जकाँ
बहक' लागलै बसंती हवा
अगिनबाण मारलक बीच हिय
दहक' लागलै बसंती हवा
चिड़ै गीत गाब' लागल मधुर
ठहक' लागलै बसंती हवा
मात्राक्रम (1-2-2, 1-2) दू बेर प्रत्येक पाँतिमे।

सत्यनारायण झा

मोनक गीत
तखनहि ओकर याद अबैत अछि ।

मोनक तृष्णा शान्त होयत अछि
लोक वेद सभ नीन्द लैत अछि

पछबा पुरबा वायु चलैत अछि
हृदयक अन्दर स्नेह जगैत अछि
तखनहि ओकर याद अबैत अछि 
जखन ओकर नोर देखाइत अछि 
आगु पाछू किछु ने सोहाइत अछि 
आँखिक भीतर समा जाइत अछि 
मरल मोन फेर जागि पड़ैत अछि 
तखनहि ओकर याद अबैत अछि
ओकर काया हमर हीया,
दुनू मिलि कए एक बनैत अछि 
आध पहर रातिए मे निस दिन
मानस पटल हमर खुलैत अछि 
भए विह्वल हीय नाचि उठैत अछि
अपन तन मन लुप्त रहैत अछि 
तखनहि ओकर याद अबैत अछि 
स्वप्न लोक विचरैत विचरैत,
मोहन मुरली बाजि उठैत अछि 
तन कए सुधि रहय ने केखनो
मोनक गीत गबाय लगैत अछि
सुधा पीबि मोन झुमि उठैत अछि 
तखनहि ओकर याद अबैत अछि ।

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