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वि दे ह 

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक पद्य  

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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(c)२००४-१७. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन।

 

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डॉ. कैलाश कुमार मिश्र

गामक कचोट

 

बूढ़ी आ बूढ़क भुरुकबा पराती
मस्ती करैत पोखरि आ नहरि में हेलब
फुलबारी में कनैल, अड़हुल, चम्पा, फूल लोढ़ब 
हाथ सँ माटिक महादेब- हज़ार, लखराम बनाएब 
मंदिर, तुलसी चौरा, भगवती घर के निपब आ पूजाक ठाम
शालीग्रामक पूजा, भगबतीक पातरि, भगवानक भोग
कबड्डी, झिटकी, नुका-चौड़ी, झिझिया खेलायेब
अन्हरिया राति में पानिक झट्टक के सङ्गे आम बिछब
आम ख़ेसारी साग, अडरनेवा के झखहा
कंसार वाली सँ भुजबैत चाउर, गहूम, चुरा, बदाम
मड़ुआ के रोटी में पोठी मछरिया
बकेन महिसक दूध-दही, छाली
नब बियायल महिसक खिड़सा
उदासी, सोहर, समदाउन, जोग, खेलोना लोकगीत 
 
चैताबर, बसन्त, तिरहुत, बारहमासा, छौमासा सजनी गीत
महेशबानी, नचारी, ब्राह्मण, भगबती, विष्णुक भजन
हरियर कचोर पोखरिक पानि
निर्मल जल इनारक जे करैत छल पियास केर शांत
लह-लह करैत बहैत नदिक अछिन्जल जल
कादो में भीजल आ कदियाल गृहस्थक देह आ वस्त्र
मारकीन के नुआ में प्रकृति सुन्नरि बनल गामक युवती
लताम, केरा, कटहर, बरहर, आता, सरिफा, टाभ नेबो
मह-मह गमकैत रंग-विरंगक फल
झींगा, इचना, बुआरी, रहु, गैंचा, कबइ, पोठी, मारा
सिंघी, मांगुर, दरही, छही माछ
डोका आ कांकोड के तीमन
बाड़ीक पटुआ, झाड़िक तिलकोरा आ कन्ना पातक तरुआ
ज़मीरी नेबो देल ओलक सन्ना
घुरक पाकल सोन्हगर आलू आ अल्हुआ
तरल कदिमाक फूल आ खमहारु
माय-पितियैन केर बिना लोभक अशीर्वादक सँग नीक बोल
आ ने जानि की की सब समाप्त भ गेल???
शहर में आबि भ गेल मनुख घड़िक सुई पर नचनिया
नीक वस्त्र, घर, गाड़ी, A. C. सब सुविधा में रहैत अछि 
मुदा जीवन मे एना लगैत छैक जेना नाना तरहक मिष्ठान्न परसल हो

लेकिन मधुमेह सँ ग्रसित रोगी हो मनुख ?
जे सब वस्तुक उपलब्धता के बादो ओकर उपयोग सँ बंचित हो!!!

ओह गाम! अप्पन गाम! मिथिलाक गाम!!!

 

 

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