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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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लालदेब कामत

पानक बरैब 

एकटा गीतकार केँ" खाकय मगहिया पान यौ पाहुन हम्मर,जान किए लै छी। जान किये लै छी, प्राण किए लै छी...... संगीत सुनि मिथिला मेँ पानक चलनसारि आ महौत तकर नियमित उपयोगक मोन सहजे पड़ै य। से ललिचगर पान सर्वत्र चौक - चौड़ाहाक पसल पर सब तरहक भेटि जाइछ।परंच एहनो सौखगर पानखेनिहारक कमि नहिँ जे पानक भरल दोकानमे अपना हिस्सक केर 'मिठगर पत्ता' पान नहिँ भेंटने औनाईत पराइत छैक।पानक महिमा अति प्राचीनकालसँ शास्त्र- पुराणमे सेहो भेटैत अछि। एहि लेल एकर उद्भव आ उत्पादन पर विचार करब परम आवश्यक बुझाय परल। तेँ मुहँक लाली 'पान' आओर तकर जैविक खेती कोना भ' रहल छैक से संतनगर, तमुरिया आ मटरस आदि मधुबनी जिलाक गाममे बेख देखय परिभ्रमण कयलहुँ।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण सँ पान एकटा वनस्पति थीक। ई आठ वर्षीय सदाबहार लत्तीदार एकलिंग श्रेणिक बेल (लती) छी। पान भारतीय इतिहास आ परम्परा सँ बड लगीच जुटल छै। एहिक उदभव स्थल मलाया द्विप थीक। पानकेँ संस्कृतमे ताम्बूल, तेलगूमे पक्कू, तमील आ मलयालम मेँ वेटिलाई एवं गुजरातीमे नागुरवेल कहल जाईछ। हरियर पानक पत्ताके सेवाद्वारा उजर बनायल जाइछ, तकरा बहुत पाकल वा सफेदपान कहल जाइत छैक। बनारसमे पानक सेवा बढ़ श्रमसँ कयल जाईछ। मगह केर एकटा पानक नश्लके कतेको मासधरि बढ़ जतनसँ ओरियाके पकाउल जाइछ, जकरा मगही पान कहल जाईछ। ओ अत्यंत मूल्यवान आ सुस्वादु कहल गेल हन। एहिक पाँच प्रमुख प्रजातिक नाम थीक बंगला, मगही, साँची, देशावरी, कपुरी आ मिठापता। डांटकी लागल छुट्टापान पूजामे देव-पितर केँ चढावल जाइछ। गृह गोसाईं केँ विशेष अनुष्ठानमे डबल आ ट्रिपल मुड़ीबाला पानक काज पड़ैत छैक से ५गुणा बेसीदाममे बढ़ कठिनाई सँ भेटैत छैक। खैर (कथ) चुन सुपारीक योग सँ बिरा लगातार, पानखिल्ली मुंहक सुन्दरता-सुगन्धि आ शुद्धिक संगे श्रृंगार बढबैत छैक। पान चिबाकऽ कायल जाइछ, जाहिमे सोहनगर जर्दा (तमाकूल) अनेक तरहक मशाला, लौंग-इलाईची, भुजल नारिकेल आ मीठाक लेल रसना-हीरामोती सौंप अवश्य देल जाइछ। चेन्नई दिन बिनु कतेक पान खेबाक प्रचलन बढल छैक। ओना मिथिलामे से हो पाना थोड़ा खिली कल्लामे दबेलाक बाद उपर सँ मिझाईलचून डांटते लगाकय चटैत देखते अबैछ। भोजनोपरान्त पानक बीड़ा वा खिल्ली तथा गछपानक छोट खिलि शोभाकारी मानव गेल ऐ। तम्बाकू (जर्दा) केर संग नियमित पान खाईत-खाईत लोक प्राय:एहिक व्यसनि भ'जाइछ, जे अभ्यास बिनु दांत खराब केयने आ रोग एवं दुर्गन्धक कारणेँ छोड़त नहिँ।

ओना पानमे औषधियगुण से हो प्रचुर मात्रामे रहैत छैक। कड़गर मोलाइम छोट पैघ रुखगर आ सागपातसन पानक सुआद कटु कषाय तिक्त आओर मधुर होईछ। पानमे रसायनिक गुण पावर जाईछ। एहिमे वाष्पशील तेलक अतिरिक्त अमीनो अम्ल, कार्बोहाइड्रेट आ किछु विटामिन प्रचुर मात्रामे रहैत छैक। पान औषधिय गुणक बखान तँ चरक संहिता मेँ खुब भेल अछि। देहाती क्षेत्रमे पानक पात्रता सँ घाघौस फोंका केर उपचारमे पुल्टिसक रुपेँ साटल जाइछ। हितोपदेश'क अनुसारे बलगम कफ हटेबाक लेल, मुखसुध्दि, अपच,सांश रोगक निदान हेतु पानमे औषधियगुण देकर गेल छैक। एहिमे विटामिन ए खूब छैक। भोरमे जलखै कयलासन्ता मरीचक संग पानक सेवन सँभुख निकसँ जगैत छैक। ओना यूजिनाॅल अवयबके कारणेँ होईत छैक। रात्रि मेँ सुतै सँ पूर्व पानके नून आ अजवाईनक संग मुँहमे रखला पर नींन नीक जेकाँ होइत छैक। क्योंकि आ दम्मा रोगीकेँ पान सँ लाभ होईछ।

 भारतमे पानक प्रचलन एकटा प्रथाक रुप समाज मेँकहिया आयल से प्राचीन ग्रंथरघुवंश आ वात्स्यायन कामसूत्र मेँ भेटैत छैक; ताहि सँ अनुमान लगा सकैत छी। ठंडामे उकासी रोकय लेल गर्म हरैदके पानमे द'के चिबाऊ,रातिके उकासी तेज करै तँ हरैदक जगह अजवाइन द'के चिबाऊ। किडनीक रोगी पानमे बिनु किछ फेंटने खाई। पानमे १०ग्राम कर्पुर द केँदिनमे ३-४बेर पान चिबाऊ, सेव नहिं घोटाले; एहि सँ दाँत

'क पैरिया शिकायत दुर होइत छैक। पाकला पर आ छलाउदार पर पानके रस शुसुम कयके लगौनाई हितकर होईछ। पीलिया ज्वर आ कब्जमे पानक व्यवहार लाभकारी होइछ। जुखाममे पानमे लौंग द'के खाऊ, जुकाम झटदय पँकि जायत। मगही, बनारसी, गंगातिरी आ देशीपान दवाईक रुपे वेशीकाल व्यवहारिक होईछ। सुश्रुत संहिता सदृश्य आयुर्वेदिक प्राचिन ग्रंथ मेँ सेहो पानके औषधीये द्रव्यगुणक महिमा वर्णित भेल छैक। सब पुराण, संस्कृत साहित्यक ग्रंथ, स्त्रोत आदिमे तांबूल केर , वादमे ५वीं शताव्दीक अनेकों अभि उत्तरी बिहारमे मुख्यतः बंगला आ दछिण बिहार दिश मगही प्रभेदक पान केर खेती कयल जाइछ। पान उत्पादन उष्ण जलवायुमे छाहदार नमस्थान मेँ कयल जाइछ। गर्मी आ ठंडी सँ बचेबाक लेल कृत्रिम मंडप (छाही) केर भीतर पान उगायल जाइछ, जकरा वरेजा आ वरेठ (बरैब) सेहो कहल जाइछ। ऊंचगर ढरकाह जलनिकास जोकरक बलुई दोमट वा बलूआही मटियारि, कार्वनिक आ पूर्ण जीवांशबाली मांटि पर जाकर pHमान५.७सँ८.२होय,से पानक खेती लेल उपयुक्त होइछ। पोखरिक मुहार पर खत्ताक हत्ता  पर एहिक खेती सुगम होइछ। अप्रील मासक अंतिम हफ्तामे कल्टीहर सँ जोताई करैत जून मासक रौंद लगाकय खरपतवार उन्मूलन कयल जाइत छैक। जूनक तेसर सप्ताहमे चौकियाके फेरों सँ महिन जोताय आ चौकी दैत मांटि भुरभुरी जेकाँबनावल जायत। थोकरा कचरा आदि ओलि लेबाक आ चून सँ डाईर बनाबैत ३०सेमी०धरि ऊँच आ ५०सेमी०धरि चौरगर आड़ाक निर्माण कमल जाइछ। बीच सँ जल निकासी लेल ५०/३०सेमी चौड़गर नालाक निर्माण कयल जाइछ। लाईनमे दूहाथक दुरीपर ३-४ मीटरके बांसक खुटा गारल जाइछ, ताहि पर दू दिस आधाआधी पर सँ करची जोड़िकय नमगर चौड़गर बढाकय उपर छप्पर बनाबैत ओहिपर पुआर खर आदि सँ छारल जाइछ। हवा बिहारिमे उड़य नहिं, ताहि लेल उपर सँ बांसबल्ला आ बत्ती दैत बन्हन कतौह कतौह टांकल जाइछ। तीन सलिया पानक लत्ती सँ दूं गीरह बाला डंटल एक कठामे तीन हजार अलूआ जेकाँ दंगपर रोपल जाइछ। पतियानी सँ पतियानी क'दुरौस ३०सेमी०आ पौध सँ पौधक दुरी १५ सेमी०राखल जाइछ। लत्तीक कटिंग केँ उपचारित करय लेल १०ग्राम ट्राईकोडरमा विरिडि , मालिकों राईजा (वैम) आ स्यूडोमीनस फ्लोरोसेंस केर मिश्रण सँनिरोग लतीकेँ डुमाकय राखल जाईछ। खेती-किसानी तैयारी मेँ ५०किलोधरि प्रतिकठा नीम-सरिसौ बा अण्डीक खैर देल जाईछ। वर्मी कम्पोस्ट सँ सेहो काज चलावल जा सकैछ।जैविक आ सूक्ष्म पोषक तत्व केर अतिरिक्त शालमे एकबेर १००किग्रा० नेत्रजन, १००किलो पोटाश मई -जूनमे माँटि चढबैत काल प्रवन्धन कयल जा सकैत अछि। नवरोपमे एकदिनमे दूबेर हलुक सिंचाई आ फरबरी सँ अप्रैल धरि खूब अधिक पटौनी कयल जाइछ। माटमे पानि भड़िकय संग्रहित करैत घैल सँ छिच्चा दैत पटाओल जाईछ। ठंडिमे 10-15दिन पर सिंचाई कयल जाईछ। करचीआ खरही -सरपत सँ सहारा दैत लत्तीकेँ उपर चढाओल जाइछ। पान रोग पदगलन , सिमांत झूलसा, अंगमारी , पर्णदाग सँ अक्रान्त पौध पर औषधिक प्रयोग करैत सुरक्षित पानक पात तैयार कय बजारमे बेचल जाइत छैक । बरैवमे ललका मोकरा , उज्जर मांछी, मिलीवग आ महुआ कीट सँ सुरक्षा केनाई लाभकारी रहैत छैक। पान हानिकारक जड़गांठ सूत्रकृमि आ रैनीफार्म सुत्रकृमि सेहो पैघ अवघात करैत छैक। पान 200पातक एक ढोली बनाकय वा फीसैकड़ा हिसाब सँ ढोली बनाकय सांस्कृतिक जालीदार छिट्टामे राखि पठावल जाईछ बजार।भीजलपुआर तहेतह द'केँ सैंतल जाइछ। पानक बरैबमे कतौह-कतौह गोबरमे सराईल सांस्कृतिक नोकगर खुँटि जे तैयार कयल जाईछ तकरा एहि तरहें गाड़ल जाईछ जे चोरी सँ पान तोरय बालाकेँ पैरमे गँथि जाईछ जे घातक टेटनश रोगक त्वरित गतिये शिकार भ'जाइछ बरैबमे ।

-लालदेब कामत, नौआबाखर, घोघरडीहा- 7631390761

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