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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक गद्य

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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नबोनारायण मिश्र

एकटा पाकल आम

भाइमे एकसरे, परम दुलारू पाँच बर्षीय बालक ईश्वरजी अपन पिता द्वारा देल गेल मात्र एकटा पाकल आमपर प्रतिक्रियामे खिन्न होइत बाजि उठल-"पापा, एतेक रास आम किनलहँ अछि, एहिमे हमर हिस्सा एकहिटा भेल?" जँ सएह, तैयो शंकर भाइजी (खासे पितियौत) हमरा स बाछि कऽ एकहुटा वस्तु नहि खाइत छथि तँइ हेतु कमसँ कम एकहुटा आर आम हुनका लेल दिअ। एकसरे खेनाइ हमरा नीक नहि लगैए। पिताकें पुत्र द्वारा पूछल गेल एहन प्रश्नक आशा नहि छलन्हि । बारम्बार एकहि बातक आग्रहसँ तंग भऽ पिता पोलहबैत बाजि उठलाह - बेटा, जँ ओकरो सभक भार-चिन्ता हमहीं रखितहुँ तखन भिन्ने किएक होइतहँ? एही लेल ओकरा सभसँ भिन्न भेलहुँ जे अहाँकेँ सभ वस्तुक सुविधा ओकरासँ बेसी भेटय।। अहाँ बकलेल नेना जकाँ हठ पकरने छी। ओतेक जे हम ताकय लागब तखन आर दू किलो आम कीनय परत।
पिताक उत्तर सुनि ईश्वरजी निरास होइत बाजि उठल- ठीक छैक, हम अहाँकेँ आब कहियो तंग नहि करब, हमर चिन्ता छोड़ि दिअ। हम दूनू भाइ एकहिटा आममे आधा-आधा बाँटि कऽ खा लेब। ताहिमे नहि ने अहाँ आ माय हमरा रोकब? 

(नबोनारायण मिश्रजीक ई रचना कर्णामृतक जुलाई-सितम्बर २००४ मे लघुकथा कहि प्रकाशित भेल छल)

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