प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
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अंक ३९५ आ ३९६ पर टिप्पणी

कल्पना झा, पटना
विदेह
- नरेन्द्र झा विशेषांक (०१.०६.२०२४)- सद्यः प्रकाशित विदेहक "नरेन्द्र झा विशेषांक", जे विदेहक ३९५ म अंक आ तीसम "विशेषांक" अछि,निस्संदेह प्रशंसनीय ओ सराहनीय काज अछि विदेहक। एहि सराहनीय काज लेल साधुवाद विदेह टीम केँ !
१५/०६/२००८ कऽ प्रकाशित "हाइकू विशेषांक" सँ शुरु भेल विदेहक विशेषांक-यात्रा गजल विशेषांक,बीहनिकथा, बाल-साहित्य,नाटक,समीक्षा,अनुवाद, बाल गजल,भक्ति गजल,गजल आलोचना-समालोचना-समीक्षा विशेषांक सन,साहित्यिक विधा ओरिएंटेड विशेषांक सभ प्रकाशित करैत अनवरत चलि रहल अछि।
व्यक्ति-विशेष पर पहिल विशेषांक काशीकान्त मिश्र 'मधुप' जी पर एक जनवरी २०१५ कऽ प्रकाशित भेल। इहो विशेषांक प्रशंसनीय मुदा अहू सँ बेसी प्रशंसनीय काज अछि जीवित लेखक पर विशेषांक प्रकाशित करब। जकर शुरुआत भेल अरविन्द ठाकुर जी पर विशेषांक निकालब सँ। पीठे लागल दोसर जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल'जी पर प्रकाशित भेल।
विदेह द्वारा जीवैत लेखक पर विशेषांक प्रकाशित करबाक विचारक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। ई विशेषांक सभ निस्संदेह विदेह केँ एकटा सफल "ई मैगजीन"क रूप मे स्थापित करबा मे सहायक भेलए। रामलोचन ठाकुर विशेषांक आ रवीन्द्रनाथ ठाकुर विशेषांक प्रकाशित होएबा सँ पहिने ओ दुनू गोटे स्वर्गीय भऽ गेलाह,तकरा खराप संजोग कहबाक चाही। मुदा आगाँ केदारनाथ चौधरी विशेषांक ओ स्वयं पूरा पढ़ने छलाह,एहन Ashish Anchinhar जीक पोस्ट सँ जनतब भेटल छलए। ई वास्तव मे संतोषक बात भेल।
केदारनाथ चौधरीक उपरान्त प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' जी, शरदिन्दु चौधरी जी,कथाकार अशोक सर,राम भरोस कापड़ि "भ्रमर"जी आ लक्ष्मण झा 'सागर' जी पर विशेषांक निकालल गेल आ स्वाभाविके बात जे ओ सभ अपना उपर विशेषांक पढ़ि संतोषक अनुभव कएलनि।
"केदारनाथ चौधरीजी केँ संपूर्ण रूपेँ जनबाक लेल विदेहक विशेषांक पहिल आ एखन धरिक एकमात्र माध्यम छै पाठक लेल।" ई कहब छनि आशीष जीक। एहि सँ अनुमान लगा सकैत छी,जे ई विशेषांक सभ निकालि कतेक महत्वपूर्ण काज कऽ रहल अछि विदेह टीम। महत्वपूर्ण दस्तावेज सन जोगा कऽ राखएबला काज अछि सभटा। एखन धरि प्रकाशित जतेक विशेषांक अछि,से सभटा महत्वपूर्ण अछि,ओहि व्यक्ति केँ संपूर्ण रूपेँ जनबाक लेल,जनिका पर विदेह विशेषांक निकालल गेल अछि।
हमहूँ किछु विशेषांक लेल सहयोग कऽ सकलियनि,से संतोषक बात हमरा लेल। एक टा सार्थक काज मे सहयोग केलहुँ,से भाव आबैए मोन मे। विदेहक संग जुडथि आ सार्थक काज मे सहयोग करथि सभ साहित्यकर्मी,से आग्रह हमर।
ने आत्मप्रचार,ने विदेहक प्रचार।नीक काजक सराहना हेबाक चाही।

प्रणव झा
विदेह के
३९५ म अंक नरेंद्र झा विशेषांक के रूप मे बहरायल। विभिन्न पेशा से जुडल लेखक आ पाठक लोकनि अपन अनुभव, मन्तव्य आ विचार नई खाली श्री नरेंद्र झा के मैथिली लेखन के विषय मे रखलाह अछि अपितु मैथिली मे आर्थिक आ आन आन विषय पर लेखन, मिथिला के आर्थिक परिस्थिति आ श्री नरेद्न् जी के परिवार आ व्यक्तिगत जीवन परिचय सहित हुनक अर्धांगिनी डॉ० पन्ना झा के अकादमिक आ लेखकीय परिचय पर सेहो खूब लिखलइथ। बेस ई सब आलेख विभिन्न पाठक वर्ग मे पढ़ल सेहो गेल हेतय। ई रेखांकित करय छैक जे विदेह के संपादक मण्डल नरेंद्र झा विशेषांक निकालबा के जै उद्देश से नियाराने छलाह से फलीभूत भेलइन।

श्रीमती कल्पना झा अपन लेख "अनुशीलन"क अनुशीलन आवश्यक, के माध्यम से श्रीमती पन्ना झा के लेखकीय परिचय हुनक लेखनी के अंश के माध्यम से बड्ड सुन्नर रूप मे केलिह अछि। सुश्री मुन्नी कामत जी के लेख सेहो सारगर्भित लागल आ ओ श्री नरेंद्र झा के पोथी पर चर्चा के माध्यम से लेखक के लेखकीय विषय वस्तु पर इजोरिया दैत छथीन। डॉ० धनकर ठाकुर के आलेख सूचना आ समालोचना से भरल आ पठनीय छैक। श्री आशीष अनचिन्हार के सुगठित व्यंग आलेख अहिना रहल की देखन मे छोटन लगे चोट करे गंभीर। सीमित शब्द मे श्री आशीष अनचिन्हार विशेषांक लेखक के लेखकीय परिचय दैत, देश-विदेश मे विज्ञान, अर्थशास्त्र, मानविकी आदि के विभिन्न विधा मे कार्यरत मैथिल बुद्धिजीवी सब के उकटइत आ व्यंग वाण छोड़ईत नै खाली सफल आलोचना क के निकैल जाय छैथ अपितु ऐ वर्ग के पाठक मे अपन विषय वस्तु पर मैथिली मे लेखन के लेल प्रेरणा के एकटा बीया सेहो रोपबा मे सफल होइत छैथ एहन हमर मन्तव्य अछि।

ेश

श्री राजीव एकान्त द्वारा,बहुत नीक समीक्षा/आलोचना, डा. रामावतार यादवक चर्चित पोथीक कयल गेल अछि। आलोच्य पोथीक जाहि बिन्दु सबहक आलोचना,प्रस्तुत कयल गेल अछि,से सब आलोचना- बिन्दु, असंगत नहिं अछि। मैथिलीक बोली 'अंगिका'(आ ग्रियर्सनक 'छिक्का छिक्की')क उत्पत्ति, 'भाषाक रुप मे', 'मैथिलीक संग हेबाक' 'अ-तथ्य' लिखब,कटु आलोच्ये नहिं, मिथिला-मैथिलीक लेल 'अहितकारी आ अकल्याणकारी सेहो' अछि। 'हिस्टोरियोग्राफी औफ मैथिली लेक्जिकोग्राफी'क 'केन्द्रीय विषय' नहिं बनब, पोथीक आ प्रश्नगत पोथीक 'नामकरण'क, 'महत्व आ प्रासंगिकता' घटा दैत अछि। अइ मे,ने त' 'हिस्टोरियोग्राफी'( मैथिली शब्दकोषक एखन धरिक इतिहास-लेखनक अद्यतन विश्लेषण आ तकर सिद्धांत निरुपण) पर विशेष किछु लिखायल,आ ने एखन धरिक मैथिली 'लेक्जिकोग्राफी'( मैथिली शब्दकोष निर्माण-विज्ञानक स्थिति अथवा सैद्धान्तिक विश्लेषण)क प्रसंग मे,विशेष लिखायल...(?),तखन त' मात्र 'बुचानन के शब्दकोष' हावी रहल,पोथी पर..? ..आ ब्रिटिश उपनिवेशवादी 'भारोपीय भाषा सिद्धांत' (मैथिलीक उत्पत्तिक सन्दर्भ मे) त' समर्थक छथिए,डा.यादव! से कोनो 'नव आ नीक बात' नहिंएं अछि! तखन,त' पोथीक संग,हिनकर भाषाशास्त्रीय विचार(मैथिलीक उत्पत्ति आ विकासक सन्दर्भ मे) सेहो आलोच्ये अछि! कुल्लम मे,श्री राजीव एकान्तक प्रकाशित ई 'आलोचना-आलेख', बेसी तर्कसंगत अछि!

कल्पना झा पटना


डॉ. रामावतार यादव जीक व्यक्तित्व ओ कृतित्व सँ परिचित होएबाक इच्छुक लोकक लेल 'विदेह'क ३९६ म अंक "भाषाविद् रामावतार यादव विशेषांक" सँ नीक कतहु किछु उपलब्ध हेतनि,से संभावना नगण्ये बुझू । जेना कि आशीष अनचिन्हार जी एहि विशेषांक केर पहिल लेख "प्रस्तुत विशेषांकक संदर्भ मे" कहलनि अछि,ताहि सँ तँ सएह बुझाइत अछि। आशीष जीक वक्तव्य अछि "प्रो. डा. रामावतार यादव जीक रचना वा हुनकर अवदानक ऊपर कतहु किछु प्रकाशित भेल हो तकर संख्या बहुत कम हएत कारण कमसँ कम हम ओकरा अवलोकन करबासँ वंचित छी।" ओना आगाँ ओ इहो स्वीकार करैत छथि जे "बहुत संभव प्रो. डा. रामावतार यादव जीक ऊपर लिखल गेल हो मुदा हमहीं नै देख सकल होइ।"

नेपालक मैथिली केँ प्रतिनिधित्व कएनिहार डॉ. रामावतार यादव जीक व्यक्तित्वक सभ आयाम पर चर्चा देखबालेल भेटल एहि विशेषांकक लेख सभ मे। सभ आयाम मतलब नीक/बेजाए सभ। विदेह द्वारा एखन धरि प्रकाशित विशेषांक सभ जकाँ इहो अंक एकटा महत्वपूर्ण दस्तावेज सन अछि। आ विदेहक अपन जे काज करबाक शैली छैक,ताहि शैलीक तहत इहो अंक मात्र अभिनन्दन ग्रन्थ नहि बनल अछि। ई तँ सर्वविदित अछिए जे कोनो मनुष्य सर्वगुणी नहि होइत अछि। तँ से कोनो व्यक्ति होइथ कि संस्था, गुण-दोष दुनूक चर्चा होइत रहल अछि विदेहक विशेषांक सभ मे।

विदेह टीमक ई कार्य शैली बहुतो लोकक लेल प्रेरणाक स्रोत सेहो बनि सकैत अछि। 'बनि सकैत अछि' नहि,बनबे टा करत,से कहबाक चाही। एहि तरहक काजक उपयोगिता सभ आयु वर्गक लोकलेल रहत। अनन्त काल धरि। जा धरि मैथिली भाषा जीबैत रहत । लेखक,संपादक वा कोनो तरहक साहित्यिक गतिविधि सँ जुड़ल लोक सँ ल' क' रिसर्च स्कॉलर धरि, सभलेल उपयोगी सिद्ध होएत।

उक्त विशेषांक मे पाठक केँ डॉ. रामावतार जीक शैक्षणिक उपलब्धिक जनतब तँ भेटबे करतनि संगहि हुनकर साहित्यिक, सामाजिक, व्यावहारिक गतिविधि पर लिखल लेख सेहो भेटतनि। डॉ. रामावतार यादव जीक विद्वता सँ पाठक परिचित होएताह हिनकर प्रकाशित कृतिक नमहर सूची देखि। जाहि मे हिनकर लिखल 95 टा शोधपत्र,जे कि मैथिली एवं भाषाविज्ञान सँ संबंधित अछि, से Nepal, India, USA, UK आ Germany आदि देश मे प्रकाशित भेल अछि,सेहो सन्निहित अछि। हिनकर विस्तृत वृत्ति-क्षेत्रक संग हिनका प्राप्त सम्मानक नमहर सूची देखि स्पष्ट भ' रहल अछि, जे वास्तव मे डॉ. रामावतार यादवजी मिथिला रत्न छथि।

नेपाल सरकारक विभिन्न शैक्षिक-प्रशासनिक पदपर अपन सेवा देनिहार डॉ. रामावतार यादव जीक पद-प्रतिष्ठा देखि हुनकर रचना वा हुनकर व्यक्तित्वक मात्र गुणगान करब विवशता नहि बुझाएल एहि विशेषांक लेल लेख लिखनाहर सभक। देखलहुँ जे,ताहि तरहक लेख कम अछि। कोनो पत्रिका लेखक आ पाठकक बीच सेतुक काज सेहो करैए,जखन कोनो विद्वान पर एहि तरहक काज होइत अछि तखन। एहन कहब छनि आशीष जीक।
"अंततः हरेक विद्वान जनते-जनार्दन लेल होइत छथि आ तेँ जनता-जनार्दन केँ ओहि विद्वान सभ सँ किछु ने किछु अपेक्षा रहिते छै।" एहि संपादकीय नोटक संग संतोष कुमार मिश्र (जनकपुर) जीक लेख प्रकाशित करब प्रशंसनीय अछि। संतोष जी लिखैत छथि,
"आदरणीय डा रामावतार यादव नहि तऽ ओ हमरा सँ
किछु पुछला आ नहि हमरा किछु कहबाक मौका भेटल।हुनकासँ भेंट करबाक इच्छा मनमे लागले रहि गेल। एक बेर बहुत प्रयास कएलाक बाद हमरा हुनकर फोन नं. उपलव्ध भेल, फोन कएलियनि। ओ व्यस्त छलथि। बात नहि भेल।
ओ 'बादमे भेटब' कहलखिन। फेर ओ बाद कहिया आओत, नहि जानि।"

तहिना कवि राजीव झा 'एकान्त' जीक लेख यादव जीक पोथी "Histography of Maithili Lexicography & Francis Bucanan's cpmparative Vocabularies" पर समीक्षात्मक लेख अछि। एकान्त जीक कहब छनि," सत्त कही तऽ अइ समस्त पोथी मे इतिहासक नामे बुकाननक शब्दकोश आ बाँकी डाटा संग्रहक अतिरिक्त सार्थक आयाम मात्र बुकाननक आलोचनात्मक व्याख्या टा अछि। लेखक नूतन अन्वेषणक दृष्टि आ क्षमताक प्रदर्शन नहि कऽ सकलाह अछि।"

एहि "भाषाविद् रामावतार यादव विशेषांक" मे हिनकर कृति सभ केहन छनि,ताहू पर चर्चा अछि,किछु आलेख संस्मरणात्मक अछि। किछु समीक्षात्मक आ परिचयात्मक सेहो। मतलब खटमधुर सुआद सँ युक्त अछि 'विदेह'क ई विशेषांक। ठाम ठाम पर लिंक सभ संलग्न अछि जकरा खोलि क' कोनो पर्टिकुलर विषय पर विस्तृत विवरण देखल जा सकैए। कुन्दन कुमार कर्ण जी अपन आलेख "डा. रामवतार यादवसँ पहिल भेंटक संस्मरण" मे एकटा वीडियोक लिंक साझा केलनि अछि । लिंक पर जा क हुनका नीक जकाँ सुनि सकैत छथि पाठक। हुनका देखि सकैत छथि -

https://www.youtube.com/watch?v=TrnRTpwHDbk&t=4s

धीरेन्द्र झा 'मैथिल' जीक आलेख सेहो संस्मरणे छनि।

हुनकर सान्निध्य मे किछुओ समय जे बितौलक,से हुनकर विद्वता सँ प्रभावित भेल,एहन कइअक टा संस्मरणात्मक आलेख पढ़ि अनुभव कएलहुँ हम। धीरेन्द्र जीक शब्द छनि - "भाषा आ शब्द जे हुनका मूँहसँ निकलि रहल छलनि से गंभीर ओ भरिगर हमरा अनुभव भेल।"

डा रामावतार यादव जीक कहब छनि,"भाषा ब्राह्मण वा अन्य ककरो खरीदल नै छै। सज्झा संपति छै। भाषोक जाति अनुसार बाँट-बखरा जे केयो करऽ चाहै छथि ओ नीक नहि छथि।" धीरेन्द्र जीक आलेख मे उदधृत।

भीमनाथ झा जीक संस्मरण "'तहिया'केँ तहियाक'
राखल- श्री रामावतार बाबू" पढ़ि बाल्यकालहि सँ हुनकर प्रतिभाशाली होएबाक जनतब भेटैत छै लोककेँ। भीमनाथ जीक शब्द मे-
"प्रतिभाशाली रहबे करथि,अवसरो भेटैत गेलनि देश-विदेशमे पढ़लनि-पढ़ौलनि, भाषाविज्ञानमे विशेषज्ञता प्राप्त कयलनि, शोध-अनुसन्धानमे अन्तर्राष्ट्रीय नाम भेलनि।फलत: समस्त प्रबुद्ध मैथिल समाजक बीच ई चुनल
शीर्षस्थ विद्वन्मणिमालाक एक दाना मानल जाय
लगलाह।"

उदयनारायण सिंह 'नचिकेता' जी अपन आलेख
"रामावतार यादव जी-जेना हम हुनका चिन्हने छलियनि" मे कहलनि अछि -
'हमरा ज्ञानतः एहन कोनो मैथिली के विद्वान नहि छथि जे हिनका सँ बेसी प्रभावी ढंग सँ अंग्रेजी तथा जर्मन मे अपन बात कें अंतर्राष्ट्रीय फोरम मे राखि सकै छथि।"
आगाँ कहि रहल छथि -
'हमर ज्ञानतः मैथिली कियैक, हिन्दियो मे भरिसक एहन अध्ययन क्यो नहि क' रहल छल। हँ, ई बात अवश्ये कहब जे आगाँ चलि कय श्रद्धेय डॉ सुभद्र झा जी के सुपुत्र डॉ प्रभाकर झा पेरिस मे एही तरहक काज कयने छलाह।"

केदार कानन जी अपन लेख "विद्वानक सत्संग-कथा" मे रामावतार यादव जीक संग भेल पत्राचारक चर्चा करैत लिखैत छथि -"हुनका सन भाषाशास्त्री, मृदुभाषी , सुलेख मे लिखनाहर विद्वानक संसर्ग मे अक्षरक माध्यमे,पत्र पत्रिकाक आदान प्रदानक माध्यमे हम जुड़ल रहलहुँ से निश्चित रूपेँ हमर सौभाग्य थिक।"

शैलेन्द्र मिश्र जीक आलेख "डॉ रामावतार यादव : मैथिली भाषा- साहित्यक असाध्य काज साधवला एकटा निष्काम कर्मयोगी" मे हुनकर मृदु स्वभाव ओ एकटा जागरूक अभिभावकक गुण, आ यादव जीक मैथिली भाषा ओ साहित्यक प्रति माश्चर्य आ दायित्व भावक परिचय भेटैत अछि।

राम चैतन्य धीरज,डॉ.धनाकर ठाकुर,डॉ. शिव कुमार मिश्र
सभ गोटाक लेख स्तरीय,जनतब युक्त बुझाएल।

ठीके कहलनि अछि अयोध्यानाथ चौधरी जी - जहिना हुनकर दुर्लभ योग्यता, जहिना हुनकर दुर्लभ भाग्य तहिना हुनकर दुर्लभ कृतित्व। हमरा जनैत हुनक एक-एकटा कृति मैथिली
भाषा-साहित्यक हेतु अनमोल धरोहर अछि। मैथिली भाषा-साहित्यक इतिहास अनन्त समय धरि गर्व करैत रहत।

लालदेव कामत

प्रो० डॉ० राम अवतार यादव विशेषांक मादे
पछिला बरख अर्थात् २० दिसम्बर २०२३ ई० केँ विदेह इन्टरनेट मैथिली पाक्षिक पत्रिका मेँ मैथिली भाषा मर्मज्ञ प्रोफेसर (डॉक्टर) रामावतार यादव जीक उपर विशेषांक निकलबाक घोषणा भेल रहय। से १५ जून २०२४ केँ नुतन अंक -३९६ समय पर बहरायल अछि। एहि भगिरथ परियास लेल विदेह टीमकेँ साधुवाद दैत छीयैन। एहि विषयमे चयनित कयल गेल अनेकों विद्वतजनके आलेख - रचना पढबाक सौभाग्य प्राप्त भेल। वरेण्य साहित्यकार श्री गजेन्द्र ठाकुर जीक सम्पादकीय आ प्रस्तुत विशेषांक 'क संदर्भमे श्री आशिष अनचिन्हार जीके रपट सँ विशेष जनतब पाठकगण केँ भेटैत छैन। विदेहक समावेशी योजना सँ समान्य पाठककेँ प्रशन्नता होयब सोभाविक छैक। सन् २००८ सँ २०२४ धरिमे ३२ गोट विशेषांक मूलतः निकलल अछि। पहिल चरणमे २००८ सँ जनवरी २०१५ धरि विशेषांक केर नामकरण लिखल नहिं गेलैक । दोसर चरणमे २०१५ सँ एखनधरि जीवीत लेखक उपर विशेषांक प्रकाशित भेल अछि। तेसर चरणमे नीत नवल सिरीज़ रूपेँ निकालल गेल अछि। मिथिला - मैथिली लेल जे उत्कृष्ट काज करय बाला संस्था, रंगमंच - रंगकर्मी , संगीतकर्मी , साहित्यकार - सम्पादक सब भेलाह अछि ; हुनका कृतित्व पर विशेषांक श्रृंखला निकालबाक पहिल परियास ई-पत्रिका 'विदेह' मैथिली पाक्षिक म भेल हन्। एहि संग कोनू व्यक्ति केर विषयमे पाठककेँ समेकित रूपेँ विस्तृत जनतब पेयबाक यथेष्ट काज मानल जायत। प्रो० (डॉ०) रामावतार यादव जीक रचना ओ हुनकर अवदान 'क उपर अध्ययन लेल वंचित रही, से प्रतिपूर्ति विदेह जून द्वितीय अंक कयलक अछि। नेपालक रहनिहार मैथिली भाषा विशेषज्ञके मादे संवत् केर उल्लेख भेटत, संवत् मे सँ ५७ अंक निघटाए केँ अंग्रेजी ईस्वीक सन् सहज रूपेँ जानि जाएब। एहि ले उजगुजेबाक नहिँ रहत। वर्तनी ओ मानकीकताक शव्द वोधमे किछु अन्तर सेहो पाठक अनुभव करैत होथि, कियाक तँ तीने कोस पर पानि-वाणी मेँ किछु अन्तर आबि जाइत छैक। व्याकरणिक दृष्टिये समुन्नत मैथिली भाषाके आधार पर जँ शुद्धता पकड़ि केँ चलब तँ मिथिलाक मातृवाणी तीन भाग सँ बेसियेमे फुटि जाएत। पछिम भागक भाषाकेँ बज्जिका बोली आ पूरब दछिन कोनाक बाजबकेँ अंगिका वाणी कहि समृद्ध मैथिलीकेँ खंडित कयल जाइछ। मुदा सबसँ निशन ठेंठी मैथिली भाषा बाजब - लिखब छैक ,जे आवादी अनुसारे सर्वाधिक देख पड़ैत य। विदेहक विशेषता रहल अछि जे एहिमे अखैन धरि कोनूटा विशेषांक अभिनन्दन ग्रन्थ बनय सँ बाँचल अछि। तेँ एहि बाबत आलोचना - प्रशंसा सब कथु पढ़ैक अवसर भेटैत छैक। नेपालक प्रतिनिधित्व करयबाला प्रो० यादव जीके नेपालमे भाषा विज्ञानी रूपेँ अधिकतर लोक कमतर आँकैत छन्हि। डाक्टर साहेवकेँ नेपाल अधिराजमे हुनकर भाषानिति कारणेँ पसीन नहिं कयल जाइत छनि। मुदा भारत - नेपाल 'क चोटिक विद्वान लेखकगण हुनका विषयमे दिलक गहिंरपन सँ निम्न तथ्य पाठक लेल परसि अधिगम बोध मुल्यांकन कयलनि। यथा -: प्रो० भीमनाथ झा जी लिखलन्हि - 'तहिया'-केँ तहियाक' लागल - श्री राम अवतार बाबू। आगू करैत छथि- १९५८-६० सत्रमे सहपाठी छलियनि,से तकर अनुभव भेल ५०-५५ बरखक बाद। सेकेंड डिवीजन सँ मैट्रिक पास भेल रही। ककरौल बाला पीसाजी हमर आई ए में आर के कालेजमे नाम बिनु टांगते पतरके लिखा देलनि प्रिंसिपल साहब सँ कहि केँ। प्रिंसिपल प्रो० अरूण कुमार दत्त जीके बिना एकोपाई देने धरि हमर नामांकन भ' गेल। वाद में सबटा प्रक्रिया पुरा कयल। धरि रौल नं०-५ ए' सेक्शन भेटल रहय। ओई समयमे हमर विषय -: सिभिक्स ,प'साक्लोजी आ मैथिली केँ लोक चूरा दही चीनी केर मेल बूझैक। कला संकायके दू हजार विद्यार्थी परीक्षार्थी मेँ सँ मात्रे पाँच छ नाम प्रथम श्रेणिमे रहैक,जाहिमे एक नाम रामावतार यादव जीके सेहो अखबारमे छपल रहनि। ता बिहारमे मगध आ पटना यूनिवर्सिटी मात्रे रहैक। हमरा तँ द्वितीय श्रेणी सँ उत्तीर्ण हेबाक सौभाग्य प्राप्त भेल छल। रामावतार जी देश विदेशमे पढ़लनि- पढ़ौलनि। भाषा विज्ञानमे विशेषता प्राप्त केलनि। शोध अनुसंधानमे अन्तर राष्ट्रीय नाम भेलनि, एक पर एक उत्कृष्ट ग्रन्थ आ शोध प्रवन्धक' लेखन प्रकाशन कयलनि। अनेकों महत्वपूर्ण विलुप्त पाण्डुलिपिकेँ ताकि सम्पादित क' सोझा अनलन्हि। तेँ समस्त प्रवुध्द मैथिल समाजक बीच ई चुनल शिर्षस्थ विद्वन्मणिमालाक एक दाना मानव जाए लगलाह अछि। मिथिला मैथिलीक खुटाकेँ विश्व भाषाक अध्ययन संसारमे मजगुति सँ गाड़ने छथि।"
श्री उदय नारायण सिंह 'नचिकेता ' - रामावतार यादव जी - जेना हम हुनका चिन्हने छलयनि आलेखमे एकठाम लिखने छथि -" हमरा ज्ञानत: एहन कोनू मैथिलीके विद्वान नहिं छथि जे हिनका सँ बेसी प्रभावी ढंग सँ अंग्रेज़ी तथा जर्मनमे अपन बातके अन्तर्राष्ट्रीय फोरममे राखि सकै छथि। अध्यापक रूपमे ओ त्रिभुवन विश्व विद्यालय आ पाटन कालेज मेँ पढ़ौने छलथि। मुदा केंसास विश्व विद्यालयके प्रशिक्षण हुनका दक्षिण एशियाई देशमेयक प्रमुख ध्वनि -विज्ञानी बना देलकनि। ओ मात्र भाषाचार्य टा नहि साहित्यो क्षेत्रमे एकटा प्रतिष्ठित नाम छथि। पूर्वांचल विश्वविद्यालयक कुलपति सेहो नियुक्त भेला। "
धीरेन्द्र झा 'मैथिल '- " हम जनकपुर उद्योग वाणिज्य संघक सभा हौलमे एक अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनमे कार्यक्रम सँ पूर्वहि उपस्थित डॉ० रामावतार यादव जीकेँ पहिल खेप एक गोटे सँ प्लास्टिक कुर्सी पर बैसल गप्प करैत देखलियैन ‌ओहि सँ पहिले परीचय नहिं रहने , हुनक भेंटक अभिलाषी रही। मैथिली शव्द, वाक्य आ भाषा विज्ञान संबंधी विषय वस्तु ककरो बुझबैत रहथिन।ओ गम्भीर आ भरिगर हुनका मुँह सँ निकलल आवाज हमरा कर्णप्रियता आ ज्ञानवर्धक लागल। प्रसंग उठल छलैक - ब्राह्मण कायस्थक भाषा एवं अन्य जातिक भाषामे फर्क रहल ,जकर उल्लेख ओ करैत जगहक अनुसारे मैथिली भाषामे फरक होइते छैक। मैथिली समृद्ध भाषा अछि । अपन बात रखैक क्रममे ओ जे लोक हमरा बाभन बुझैत अछि। ताहि अनजान व्यक्ति क' कहैत छथि- हम ब्राह्मण केँ मजगूत नहिं करैत छी, हम तँ कहैत छी हिन्दी, अंग्रेजी, नेपाली वा आन भाषा' क व्याकरण जकाँ मैथिलिक सेहो छैक। तेँ शुद्ध शव्द लिखनाई आ बाजब पैघ बात छैक। " राम चैतन्य धीरज जीके कथन - "हमरा जनैत आब मैथिली साम्राज्यवादी मानसिकताक गुलामी खटबाक लेल तैयार नहिं अछि। एकर स्वतंत्र इतिहास दृष्टि छैक, तथा अवधारणा आ विचारक आयाम छैक; जाहिसँ ऐतिहासिक संस्कृति लोकभाषा आ वेद भाषाक व्यवहार सामंजस्यमे सुरक्षित अछि।"
डॉ० धनाकर ठाकुर केर कहब छनि - " ध्वनिविज्ञान भाषाक एकटा शाखा नीक, जकरा विषयमे सामान्य जनके ज्ञान सीमित रहैत अछि। डाक्टर रामवतार यादव एहिपर काज कयलनि आओर मैथिली पर से हो। ओ वर्ण रत्नाकरक भाषा मैथिली मानैत छथि।।"
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@gmail.com पर पठाउ।