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१.शिव कुमार झा‘‘टिल्लू‘‘-कक्का
औ २.
किशन
कारीग़र- किडनी चोर
१
शिव कुमार झा‘‘टिल्लू‘‘,
नाम : शिव कुमार झा, पिताक नाम: स्व0 काली कान्त झा ‘‘बूच‘‘, माताक नाम: स्व. चन्द्रकला देवी, जन्म तिथि : 11-12-1973, शिक्षा : स्नातक (प्रतिष्ठा), जन्म स्थान ः मातृक ः मालीपुर मोड़तर, जि0 - बेगूसराय,मूलग्राम ः ग्राम + पत्रालय - करियन,जिला - समस्तीपुर, पिन: 848101, संप्रति : प्रबंधक, संग्रहण, जे. एम. ए. स्टोर्स लि., मेन रोड, बिस्टुपुर, जमशेदपुर - 831 001, अन्य गतिविधि : वर्ष 1996 सॅ वर्ष 2002 धरि विद्यापति परिषद समस्तीपुरक सांस्कृतिक गतिवधि एवं मैथिलीक प्रचार- प्रसार हेतु डा. नरेश कुमार विकल आ श्री उदय नारायण चौधरी (राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक) क नेतृत्वमे संलग्न।
कक्का औ (बाल साहित्य)-शिव कुमार झा टिल्लू
सिबू मरसएब बड़ मरखाह छथि
छक्का छोड़ौलनि कक्का औ
दाँत कीचि दुनू भौं सिकुड़ाबथि
हाथमे नरकटिक सटक्का औ...
भूगोलक पहरि संस्कृत वचै छथि
क्षणे-क्षण नोंइस लऽ हाँफी छिकै छथि
पंचतंत्र पर करथि टिटम्भा
विष्णुशर्मा सँ नमछर खम्भा
बरहर गाछ तर गदहा बना कऽ
पाँछासँ मारथि धक्का औ...
जखन कोनो छन्दक अर्थ पुछै छी
कहै छथि कुकुर पर लेख लिखें रौ
कहू तँ कोना हम एक्के पहरिमे
रंग-बिरंगक बयना सीखू
हाथ मचोरि पीआठ पर देलनि
बज्जर सन दू मुक्का औ...
मुरुखे रहब आ महिस चराएब
कहियो नहि ओहि इसकुल जाएब
एहन राकस सँ जान छोड़ाउ
भरि जिनगी अहँक गुण गाएब
बजै छी किछु जौं नजरि झुका कऽ
खिसियाबथि कहि भूतक्का औ...
२.
किशन
कारीग़र
परिचय:- जन्म- 1983ई0 कलकता में ,मूल नाम-कृष्ण कुमार राय ‘किशन’। पिताक नाम- श्री
सीतानन्द राय ‘नन्दू’ , माताक नाम- श्रीमती अनुपमा देबी। मूल निवासी-ग्राम-मंगरौना
भाया-अंधराठाढ़ी, जिला-मधुबनी बिहार। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन
कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक, आकाशवाणी सॅं प्रसारित
एवं लघु कथा,कविता,राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में
संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी।शिक्षाः-एम फिल पत्रकारिता एवं बी एड
कुरूक्षे़त्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।
किडनी चोर।
देखू-देखू केहेन जमाना आबि गेल
मनुखक हृदय भऽ गेल केहेन कठोर
सभ सॅं मुॅंह नुकौने, चुपेचाप
भागि रहल अछि एकटा किडनी चोर।
डॉक्टर भऽ के करैत अछि डकैति
कोनो ग़रीबक बेच लैत अछि किडनी
पुलिस तकैत अछि ओकरा इंडिया मे
मुदा ओ परा जाइत अछि सिडनी।
कोनो ग़रीबक किडनी बेचि कऽ
संपति अरजबाक, केहेन ई अमानवीय भूख
केकरो मजबूरीक फायदा उठा कऽ
डॉक्टर तकैत अछि, खाली अपने सूख।
केकरो जिनगी बॅंचौनिहार डॉक्टर, रूपयाक लोभ में
बनि गेल आब किडनी चोर
छटपटा रहल अछि एकटा गरीबक करेजा
कनैत-कनैत सूखा गेलै, ओकर ऑंखिक नोर।
मनुख आब केहेन लोभी भऽ गेल
आब ओ किडनी बेचब सेहो सीख गेल
राता-राति अमीर बनबाक सपना देखैत अछि
रूपया खातीर ओ किछू कऽ सकैत अछि।
मनुख भऽ के मनुखक घेंट काटब
कोन नगर में सिखलहुॅं अहॉं
आबो तऽ, बंद करू किडनी बेचबाक धंधा
मानवताक नाम सगरे घिनेलहुॅं अहॉं।
कोनो गरीबक किडनी बेचि कऽ
महल अटारी बनाएब उचित नहीं थीक
एहेन डॉक्टरीक पेशा सॅं, कतहू
मजूरी बोनिहारी करब बड्ड नीक।
हम अहिं के कहैत छी, यौ किडनी चोर
एक बेर अपने करेजा पर, छूरी चला कऽ देखू
कतेक छटपटाइत छैक करेजा
एक बेर अपन किडनी बेचि कऽ तऽ देखू।
