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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मानुषीमिह संस्कृताम्

ISSN 2229-547X VIDEHA

विदेह नूतन अंक

 विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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पूनम झा

 

२ टा बीहनि कथा

 

"काकी बजलीह"
--
"
काकी गोर लगै छी ।" अंगना अबैत विष्णु ( दियोर क बेटा ) बाजल ।
"
नीके रह बौआ । कहिया एलां ?"भनसा घर सं काकी बजलीह 
"
काल्हि एलौं काकी । कक्का कत छथीन ?"
"
अहिठाम छथीन।  अहिठाम आबै आ बैस ।"
"
काकी ! कक्का सं आब भानस करबै छियैन्ह ?"
"
बौआ! जखन बाल-बच्चा अपना में व्यस्त रहतै त माय-बाप सेहो एक दोसर के नै देखतै ?"

'परवाह'

"आई अहां सेब काटि क हमरा नै देलौं न ?" घरवाली दूध क बरतन चुल्हा पर चढाबैत बजलीह।
"
हैया लिय पहिने सेब खा लिय ।" घरबला सेब काटि क दैत बजलाह ।
"
हूंउउ..  हैया खाय छी ।"
"
पूरा द दिय की ?"
"
नै नै आधा सं बेसी हम नहि खा पबै छियै, से अहां के बूझल अछि न ?"
"
हमरा सेब नीक नै लगै अछि मुदा अहां के दुआरे ई आधा सेब हमरा खाय पड़ैत अछि ।" घरबला सेब क टुकड़ा चबाबैत बजलाह।
घरबाली मोनेमोन बुदबुदेली 'हमरे कोन नीक लगैत अछि, मुदा अहांके सेब खुएबाक कोनो दोसर तरीका हमरा नै अबैत अछि।'

--पूनम झा
कोटा,राजस्थान  

Mob-Wats  - 9414875654


 

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