प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
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अंक ३८७ पर टिप्पणी

सौरभ पाण्डेय [सार्थक बतकुच्चन (पोथी परिचय) [आशीष अनचिन्हार] पर]
हम्मर मोन टा मुग्ध भ गेल, आशीष अनचिन्हारजी। अहाँ 'बात प बात बतकूचनक' भोजपुरी आलेखक परिचय प्रस्तुत केने छी। तक्कर माने पढ़बाक प्रयास भेल अछि। साहित्यकार समाजमे एहेन प्रयास आयकाल कत भ रहल अछि? दुर्लभे बुझियौ। अहाँ सत्य कहलहुँ, जे समाज भोजपुरिया हुऐ, अथवा मैथिली, भाषा छोड़ जमीनी तथ्य आ लोकक विचार मे कोनो बेसी भेद नै अछि। 'बात प बात बतकूचन' हमर भोजपुरी भाषा में प्रथम कृति अछि। अहाँक अनुमोदन आ प्रोत्साहन हमरा लेल कोनो उच्च पुरस्कार सँ लहान नै। हम हृदयतल सँ धन्यवाद ज्ञापित कर रहल छी। आ, मैथिली समाज मे हमर पुस्तकक परिचय करबाक लेल आभार पठा रहल छी। परिचय में एकटा सुधार करबाक लेल हम निवेदन क रहल छी। हमरा संपादन में दूसर संग्रह केर नाम 'गीत-प्रसंग' अछि। 'परों को खोलते हुए -2' के प्रकाशन नहि भेल।
 

कल्पना झा, पटना
नीक अंक अछि। स्तरीय आलेख सभ। नीक गजल,भजन,कविता सभ। एहि अंक मे सभ सँ विशेष अछि,धनाकर ठाकुर जीक लेख "विषाणु:विष वा नव-जीवनक निर्माण"क पुनर्प्रकाशन। ई एकटा नब सराहनीय ओ प्रशंसनीय काज सोझाँ आएल अछि विदेह टीमक। ओतेक पुरान आलेख,सेहो तीन रूप मे उपलब्ध करओल गेल अछि पाठक लेल। मूल मैथिली,लेखक द्वारा कएल गेल अंग्रेजी अनुवाद आ पत्रिका मे छपल पन्ना सेहो। ज्ञानवर्धक आलेख लिखलनि अछि धनाकर ठाकुरजी। पचास साल पहिलुक लिखल आलेख पुनः असंख्य पाठक धरि पहुँचल। एहि तरहक प्रयास आगाँ सेहो होएत,से अपेक्षा। आशीष अनचिन्हार जी द्वारा एकटा भोजपुरी पोथीक परिचय मैथिली भाषा मे देब नीक लागल। आ ताहू सँ नीक लागल मैथिल आ भोजपुरिया लोक मे व्यावहारिक समानताक चर्चा संग पोथी परिचय देब। "सार्थक बतकुच्चन" वास्तव मे नीक पोथी परिचय अछि।
[प्रीति कारण सेतु बान्हल: सम्पादक- आशीष अनचिन्हार- विदेह पेटार]
बहुत नीक संकलन। नीक संपादन। जबरदस्त तरीका सँ बिगुल बजा देल गेल अछि - "मेंहथ गाम,कृपानंद ठाकुर क आँगन मे बैसि एखन धरि अहाँ सभ जे पढ़लहु से मात्र प्रस्तावना छल। आब एहि ठाम सँ डेग उठा रहल छथि दंपति रचनाकार 22म शताब्दीक मैथिली साहित्यिक कोबर लेल जे पूर्णतया सजि कऽ तैयार छनि खास हिनके लेल। इएह कोबर घर साक्षी बनत नव-नव योजना-परियोजनाक। इएह कोबर घर साक्षी बनत भाषा-साहित्य केर सिनेहक। इएह कोबर घर साक्षी बनत वचन केर, चुपचाप वचन निमाहि देबाक। इएह कोबर घर साक्षी बनत ओहि नेंओं केर जाहि पर ठाढ़ हएत 32म-35म शताब्दीक मैथिली............."
प्रतीक्षा रहत,एहि कोबर घर सँ केहन नव नव योजना परियोजना बहराइत अछि,तकर प्रतीक्षा लेखकीय प्रति समाप्त केलक।

भीमनाथ झा [प्रीति कारण सेतु बान्हल: सम्पादक- आशीष अनचिन्हार- विदेह पेटार]
अनेकश: धन्यवाद एहन सुन्दर लेखकीय प्रति
उपहार लेल। ग्रन्थक अनुरूपे शाही पैकेट। रसे-रसे पढ़बाक आनन्द लेब। शुभकामना। विहंगम दृष्टिएँ देखल अछि। हुनक व्यक्तित्व-कृतित्वक प्रसार आ अहाँक संयोजन-सम्पादनकलाक विस्तार सहजहिँ झलकि जाइत अछि। एहि महत्वपूर्ण काज लेल भूरि-भूरि धन्यवाद।

रबीन्द्र नारायण मिश्र
किताब बहुत नीक छपल अछि।फोंट बहुत आकर्षक आ पैघ रहलासं पढ़बामे बहुत सुविधाजनक अछि। लेखकीय प्रति पठेबाक हेतु पुनः धन्यवाद।

धनाकर ठाकुर
नीक काज करैत रहू।
 

लक्ष्मण झा सागर
बहुत नीक अंक भेल अछि।बहुत सुन्दर।
[प्रीति कारण सेतु बान्हल: सम्पादक- आशीष अनचिन्हार- विदेह पेटार]
विद्यापतिक पांती पर पोथीक नामकरण अतिशय शोभनीय आ आकर्षक अछि। चिर प्रतिक्षित पोथीके लेखकीय प्रति उनटाबयमे आइ दिन भरि लागि गेल।पुरा पढ़बामे साल भरि त जरूर लागत।अपना 71 बर्खक जिनगीमे एहेन गतगर पोथी किनको पर लिखल एहिसं पहिने हमरा नै अभरल अछि।एहि पोथीक रचनाक संकलन आ सम्पादनमे आशीस अनचिन्हार जीक मेहनति आ भुमिका सराहनीय अछि।हुनका प्रति बहुत बहुत आभार! अहाँक सपत्नीकें हार्दिक बधाइ! शुभकामना!!

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