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कल्पना झा- मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान -२४

कल्पना झा

उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' जीक परिवारक अन्य सदस्यक विवरण

'व्यास' जीक 'ऑलराउंडर' बालक: डॉ. शैलेन्द्र कुमार झा

 'व्यास' जीक तेसर बालक डॉ. शैलेन्द्र कुमार झा, घरक नाम केशव जीक चर्चा शुरु करब हम मैथिली साहित्य मे हुनकर योगदानहि सँ। 'व्यास' जीक सन्तान मे सँ ई पहिले एहन भेलाह जे पिताक जीवनकालहि मे मैथिली साहित्य जगत मे पदार्पण कएलनि। सन् 1994 मे ऑफिशियली मैथिली 'लेखक' रूप मे अपन नाम अंकित करबा चुकल छलाह 'व्यास' जीक 'हैंडसम' 'डैशिंग' 'हीरो' सन बालक केशव जी। 'हीरो' सन बालकक भीतर किछु लक्षण सेहो फिल्मी हीरो बला छलनि। 17 जुलाइ 1952 मे जन्मल ई हीरो ताहि जमाना मे (1976) अपन क्लासमेट भानु झा संगे प्रेम विवाह क' ' तहलका मचा देने छलाह, मैथिल समाज मे।

 

मातृभाषाक प्रति अनुराग रहितहु, अत्यधिक व्यस्तताक कारणेँ मैथिली मे कम लिखलनि। कारण, समय-समय पर हिन्दी, अंग्रेजी मे सेहो काजक पोथी सभ प्रकाशित होइत रहल छनि। मतलब समय खर्च करैत रहलाह, अन्यान्य एकेडमिक गतिविधि सभ मे संलिप्त रहैत। हिनकर लिखल सैकड़ों शोध-पत्र राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय अकादमिक पत्रिका (journals) मे प्रकाशित भ' चुकल छनि। हिनकर लिखल किछु अंग्रेजी पोथी विदेशी विश्वविद्यालयक कोर्स मे सेहो सम्मिलित कएल गेल अछि। डॉ. शैलेन्द्र कुमार झाक प्रकाशित कृतिक लिस्ट देखि स्वयं बुझबा मे आबि सकैत छनि लोक कें, जे कतेक-की काज क' चुकल छथि ओ। देखल जाउ-

1. आरोह-अवरोह (कथा-संग्रह, 1994)

2. The Economic Heritage Of Mithila (1996)

3. संस्कार (उपन्यास; यू. आर. अनंतमूर्तिक मूल कन्नड़ उपन्यासक मैथिली अनुवाद; साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा प्रकाशित, 1999)

4. दसम खुट्टी (कथा-संग्रह, 1999)

5. Imperatives Of Globalization (2003)

6. मुझे चाँद नहीं चाहिए (कविता-संग्रह 2006)

7. प्राचीन भारतीय वाङ्मय में अन्तर्निहित आर्थिक अवधारणाएँ (2009)

8. संघ-चिंतन; व्यवस्थाएँ और विकल्प (2010)

9. फेर एक बेर (कथा-संग्रह, 2019)

10. चालीस नम्बर पन्द्रहम तल्ला (मैथिली उपन्यास, 2024)

11. गाँधी मानुष (मूल उड़िया, साहित्य अकादमी पुरस्कार सँ पुरस्कृत ग्रन्थक मैथिली अनुवाद; साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा अनुबंधित एवं प्रकाशित, (2025)

12. डी. डी. कोशाम्बीक ग्रन्थक अंग्रेजी सँ मैथिली मे अनुवाद; (National Translation Commission द्वारा अनुबंधित; प्रकाशनाधीन)

13. अर्ध-यात्रा (कथा-संग्रह; प्रकाशनाधीन)

 

एकेडमिक गतिविधि मे संलिप्तता/साहित्य-लेखनक अतिरिक्त किछु सौख सेहो पोसने छथि डॉ. शैलेन्द्र कुमार झा। कुकिंग, सिंगिंग के संग-संग खेल-कूद मे सेहो रुचि छलनि। स्टेट लेवल धरि सेलेक्शन भेल छलनि क्रिकेट, बैडमिंटन, लॉन टेनिस, सभ खेल मे। कटिहार रहैत नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवेज (NFR) क अंदर होमए बला खेल प्रतियोगिता मे भाग लैत छलाह, विजयी होइत छलाह। रेलवे विभाग आ पुलिस विभाग मे शारीरिक आ मानसिक स्वास्थ्य कें बढ़ावा देबाक उद्देश्य सँ विभिन्न खेल सभक प्रतियोगिता आयोजित कएल जाइत रहैए, प्रशिक्षण देल जाइए, से सर्वविदित अछिए। खेल-कूदक संग संगीत मे सेहो अगाध रुचि छलनि। रुचिए टा नहि राखैत छलाह, पारंगत छलाह, से कहि सकैत छी। मात्र गायन मे नहि, तबला आ वॉयलिन बजाबए मे सेहो। बाकायदा सिखने छलाह तबला आ वॉयलिन बजाएब। फोटाग्राफी सेहो नीक करैत छथि। नीके नहि, बहुत नीक करैत छथि। होमियोपैथी दवाइ सभक नीक जनतब राखैत छथि महोदय। मतलब पी.एच.डी होल्डर के संग संग होमियोपैथी डॉक्टर सेहो छथि, से कहल जा सकैए। एहि सभ गुणक संग एकटा 'विशेष गुण छनि, अपन गप्प सँ सामने बला केँ प्रभावित करब। बहुत नीक वक्ता छथि। से चाहे घरक लोक सँ सामान्य गप्प सरक्का काल 'कैजुअल' गप्पक बात हुअए आ कि मंच पर वक्तव्य देबाक बात हुअए, एकदम संतुलित वक्तव्य दैत बुझेताह 'व्यास' जीक ई 'ऑलराउंडर' बालक। 

 

हालहि मे (2024) हिनकर नबका मैथिली पोथी (उपन्यास) "चालीस नम्बर पन्द्रहम तल्ला" प्रकाशित भेलनि अछि। जाहि लेल लेखक केँ चेतना समिति द्वारा "कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान-2025" सँ सम्मानित कएल गेलनि अछि। एहि उपन्यास सँ पहिने हिनकर तीन गोट मैथिली कथा-संग्रह "आरोह अवरोह" "दसम खुट्टी" आ "फेर एक बेर" प्रकाशित भ' चुकल छनि। चारिम कथा-संग्रह "अर्ध-यात्रा" प्रकाशनाधीन छनि। माने कुल पाँच गोट मैथिली पोथी (मूल) रूपी फूल अपन मातृभाषाक पएर पर अर्पित कएनिहार मैथिली साहित्यकार छथि।

 

पहिल कथा-संग्रह "आरोह अवरोह"क चौदह गोट कथा मे सँ कोनहु कथा पढ़ि, एक रत्ती लागत नहि जे ई रचनाकारक पहिल प्रकाशित कृति छनि। माने ततेक परिपक्व, स्थापित रचनाकार सन छनि सभटा कथा, जे पाठक कथा पढ़ला उत्तर कतेक काल धरि कथा मे डूबल रहि जाइए। एहन-एहन चरित्र सभ गढ़ने छथि जे लोक केँ चिंतन-मनन करबालेल विवश क' दैत अछि। चाहे ओ 'सीमाबद्ध' कथाक होमी बाबू होइथ किंवा 'लीभ-एप्लिकेशन'क गौरी। 'अनुत्तरित' कथाक बारह-तेरह बरखक अनाम बच्चा होइक वा 'फिल्ली-ब्लैक'क दस वर्ष चारि मासक फिलिप, सभ पात्र दिमाग मे बड़ी काल धरि घुरिआइत रहए बला छनि। 

 

दोसर कथा-संग्रह "दसम खुट्टी"क तँ बाते की कएल जाए। शीर्षक कथा 'दसम खुट्टी'क कथानक तँ तेहन जबरदस्त छनि, जे हम मामा सँ पुछनहुँ छलियनि, "एहि कथाक प्लॉट कतए सँ भेटल, कोना भेटल?" आ जतबा नीक कथानक, तेहने शिल्प, भाषा, सभ किछु बेजोड़। ओना शिल्प आ भाषा तँ हिनकर सभ कथा आ कथा-संग्रह मे उत्कृष्ट रहल छनि। से होएब स्वाभाविको। कारण साहित्य तँ हिनका शोणित मे छनि। साहित्यिक परिवेश मे पालन-पोषण, साहित्यिक लोकक संग उठब-बैसब। माने साहित्ये ओढ़न, साहित्ये पहिरन बला गप्प। "दसम खुट्टी" कथा-संग्रहक बहुत रास कथा सभ मे पात्रक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण अद्भुत भेल अछि, जेना 'लालकार्ड'क मुख्य पात्र 'मनकी'क मनोदशाक चित्रण। तहिना 'प्रतीक्षा' शीर्षक कथा मे एकटा निस्संतान स्त्रीक मनोदशाक चित्रण करबा मे सफल भेल छथि लेखक। 'कुछो ने कहिह'....कथा मे घर सँ भागल छौंड़ीक आँखिक कातरता, निरीहता, फेर आतंक सँ ओकर चिकड़ब..."हमर बाबू  के कुछो ने कहिह....." आत्मा केँ झकझोरए बला दृश्य प्रस्तुत करैए। आ 'घोँकल गंगाजल'क मुख्य पात्र लछमीक पूछब "हमरा निकाल त" न देब पप्पाजी.....?" मे ओकर मोनक धुकधुकीक अभिव्यक्ति मार्मिक भेल छनि। विशेष रूप सँ बाल मनोविज्ञान पर हिनकर पकड़, अचम्भित करैए। एक टा कथा 'बाक्' मोन पड़ैए, जाहि मे पल्ली माने पल्लवीक बाक् लागब आस्ते-आस्ते कोना कम भ' जाइत छै, आ पुनः बाक् लागए लागैत छै। एहि प्रकरण केँ कथाक रूप मे बूनल गेल अछि आ बड्ड नीक सँ बूनल गेल अछि। पल्लवीक मनोदशाक चित्रण अद्भुत भेल अछि।

 

तहिना "आरोह-अवरोरह"क सर्वश्रेष्ठ कथा 'फिल्ली ब्लैक' सेहो बाल मनोविज्ञान पर आधारित कथा अछि। बाल मनोविज्ञान हमर पढ़ल विषय अछि, तैँ बाल मनोविज्ञान सँ संबंधित कथा सभ हमरा विशेष आकर्षित करैत अछि, चाहे ओ कोनो रचनाकारक होअए।

 

तेसर कथा-संग्रह "फेर एक बेर" लम्बा अन्तराल पर आएल मुदा निस्सन आएल। एगारह गोट कथाक संकलन मे 'झाड़खण्डी स्टोव' 'एक टा छल कथाकार' विशेष प्रभावित करएबला। 'कीच' कथा मे सिपाही जखन जैकेटक जेबी टेबए लागल, तखन कागज मे मोड़ल, थकुचाएल एक खिल्ली पान भेटब, हृदयविदारक अछि। 'एक टा छल कथाकार' मूलतः मेकिंग ऑफ कथाकार अछि। माने एक टा कथाकारक, कथाकार बनबाक प्रकरण। 'नियतिबद्ध', 'अंततः', 'ऑनलाइन', ई कथा सभ कनि आत्मकथात्मक भ' गेल छनि। 'मिस करेला', 'हमहीं देबै मालिक', 'किछु भेटल अछि', सभ कथाक कथानक जेहने मजगूत, शिल्प तेहने सधल।

 

आब गप्प डॉ. शैलेन्द्र कुमार झाक एकेडमिक उपलब्धि, व्यावसायिक उपलब्धि आ हुनकर व्यक्तिगत पारिवारिक जीवनक। हिनकर स्कूलिंग भेल छनि जिला स्कूल, राँची सँ। इंटरमीडिएट आ ग्रेजुएशन केलनि पटना कॉलेज सँ। तत्पश्चात पटना यूनिवर्सिटी सँ मास्टर्स के डिग्री प्राप्त केलनि। पी.एच.डी. केलनि भागलपुर युनिवर्सिटी सँ। एतेक रास डिग्री हासिल कएलाक उपरान्तहुँ किछु साल लेल प्राइवेट जॉब करबा लेल विवश भ' गेल छलाह। बैसारी मे। चूँकि विवाह भ' गेल छलनि, गृहस्थीक गाड़ी खिंचबाक छलनि। अन्ततः जनवरी 1978 मे पूर्णिया कॉलेज ज्वॉइन करैत शिक्षण क्षेत्र मे प्रवेश केलाह। शुरुआत मे लेक्चरर, आगाँ जा क' Head of the post graduate department, फेर University head, फेर CCDC क पद धरि पहुँचलाह। हिनका अन्दर दर्जन सँ अधिक शोधार्थी शोध कएलथिन। साल 2017 मे अवकाश प्राप्त केलनि। D. S. College कटिहार सँ। बेसी समय एतहि पोस्टेड रहलाह डॉ. शैलेन्द्र कुमार झा।

 

हिनकर अर्द्धांगिनी भानु झा सेहो पति सँ कनिको कम नहि छलीह, प्रतिभाक मामला मे। ओहो लेक्चरर छलीह एम.जे.एम. महिला कॉलेज कटिहार मे। केहुनिया गामक बेटी छलीह। बहुत लोकमन्त महिला। राजनीति (भाजपा) मे सेहो सक्रिय रहए लागल छलीह बादक समय मे। जतबे टा जीवन रहलनि, ताहि मे अपन सभ जिम्मेदारी इमानदारी सँ निभाबैत सभक मोन मे जगह बनएबा मे सफल रहलीह। असाध्य रोगक चपेट मे आबि फरवरी 2008 मे बिच्चहि बाट मे पतिक संग छोड़ि इहलोक त्यागि गेलीह। जे बहुत पैघ झटका छलनि, पतिक संग दुनू सन्तान लेल सेहो। जिन्दगी कतेक भयंकर तरीका सँ पटरी पर सँ उतरल सन बुझना गेल हेतनि, से अनुमान लगाओल जा सकैछ।

 

एहि दम्पत्तिक दू गोट सन्तान। एक पुत्र, एक पुत्री। पुत्र राजा, ऑफिशियल नाम अंशुमान कुमार "यस बैंक" मे कार्यरत छथिन। हिनकर विशेष गुण फोटोग्राफी छनि। पिता सँ बहुत बेसी नीक फोटोग्राफर छथि राजा। प्रोफेशनल फोटोग्राफर सन पारंगत छथि, फोटोग्राफी मे। राजाक सुखद गृहस्थ जीवन जीबि रहलाह अछि। दू टा पुत्रक पिता छथि। सम्प्रति बैंगलुरु मे रहैत छथि। डॉ. शैलेन्द्र कुमार झाक पुत्री अनुरिता, अपन पढ़ाइ पूरा क' 2009 मे "miss gorgeous"क प्रतियोगिता जीति फिल्म लाइन मे प्रवेश कएलनि। अद्यतन फिल्मे लाइन मे छथि आ नव तरहक काज सभ क' रहल छथि। मैथिली सिनेमा "मिथिला मखान" मे अनुरिता, क्रान्ति प्रकाश झा संगे मुख्य भूमिका मे छलीह। नितिन चंद्रा द्वारा निर्देशित एहि सिनेमा के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त भेलैक 2016 मे। आब अनुरिता पटकथा लेखन आ निर्देशन मे सेहो हाथ आजमा रहलीह अछि। निर्माणाधीन शॉर्ट फिल्म "गुठली"क कथा अनुरिता स्वयं लिखलनि अछि आ स्वयं निर्देशित सेहो केलनि अछि। संगहि मुख्य पात्र सेहो स्वयं छथि। देखबाक चाही दर्शकक केहन रिस्पॉन्स भेटैत छनि।

 

वेल सेटल्ड बेटा-बेटीक अछैतो अठारह वर्ष सँ एकाकी जीवन जीबाक लेल अभिशप्त छथि डॉ. शैलेन्द्र कुमार झा। जीवनसंगिनीक संग छुटलाक उपरान्त साहित्यिक गतिविधि मे स्वयं कें पूर्णरूपेण लिप्त क' लेने छथि। हमर अनुमान अछि जे 'लिखब' हुनका लेल 'थेरेपी'क काज करैत हेतनि। लिखैत रहथि, थेरेपी चलैत रहनि, समाजक सोझाँ किछु सार्थक परिणाम आबैत रहए, ताहि मे कोनो हर्जो तँ नहिए ने?

शैलेन्द्र कुमार झा अपन पत्नीक संगे

 

संपादकीय सूचना- एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी-

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-1

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