प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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१० टा कविता

मूल हिन्दी-अविनाश मिश्र

मैथिली अनुवाद- पल्लवी मण्डल

01 विवेक

 

बुझल रहत जौं

सुंदरताक माने

तखन विपतियोमे

जाएत नहि, सुंदरताक स्मरण

 

बेथा

दुख

विलापहुमे

बजा लेत

गहदाएल सुंदरता

 

रहलापर नहि

नइ रहलापर

मोन पड़ैत अछि

रहब

 

रहैत चलि जाएब

हमरा मन अछि।

 

02. इत्र

 

एहि तरहेँ प्रवेश करए चाहै छी हम; अहाँमे

की हमर कोनहुँ रूप नहि रहय

हम अहाँकेँ कनियोँ नहि छेकी

मुदा, अहाँकेँ पूरा झाँपि ली।

 

03. औपरिष्टक

 

अहींसँ मांगब हम; अहाँकेँ 

खाली अहींकेँ...

मुदा अहाँ नहि, नइ कहब

दइसँ घटै नहि छइ

आओर बँचबैत तँ ओ अछि किने

जिनका लग कम होइ छइ।

 

04. संकल्प

 

अहाँकेँ एतेक चाहलौं

कि एकर बदलामे

किछु नहि चाहलौं

अहाँक अवधान तक नहि।

 

05. पूर्व प्रेमीसँ प्रेमक कविता

 

की उमेर छल अहाँक

जखन पहिल खेप

अहाँपर उतरल रहए दुख

 

हमरा हुनक नाओं कहू

जे अहाँक आलोकसँ आलोकित नहि भऽ सकल

 

हमरा ओहि वंचितक पता दीअ

जे अहाँक स्पर्शसँ विमुख रहि गेल

 

ओकरा अहाँ अप्पन पूर्व प्रेमी नहि कहियौ

अभागा कहियौ वा अधम कहियौ

ओकरा प्रेमी किन्नहु नहि कहियो

 

अहाँक प्रेममे पड़ि

असंभव अछि

अहाँक पूर्व प्रेमी होएब!

 

06. अव्यक्त आश्चर्य

 

सभसँ कम मोल रहि गेल अछि, विचारक

जखन कि पोथी निरंतर महग भेल जा रहल अछि

पहुँचक बाहर भऽ गेल अछि किछु; बेस जरूरी चीज

जखन कि बहुत किछु मंंगनीमे सेहो बाँटल जा रहल अछि

 

अस्पताल अइ रूपेँ महग भऽ गेल जे

माए इलाजक अभावमे मरि गेली

 

अइ एक समयमे चीज एतेक महग

आओर एतेक रास रहल

की बुधियार बच्चा

कनैत रहल मुहसँ बिनु आवाज निकालने

 

नहि रहि गेल आब हल्लुक

पर्यटन आओर प्रवास

जे जेतए रहल ओ ओतइ बनल रहल

बिनु कोनो भूमिकाक

 

एक गोट घर सपनामे बनैत, बसैत

आओर उजड़ैत रहल

 

सलाय केर दाम तैयो नहि बढ़ल

पछिला कतेको बर्खसँ..!

 

07. सांप्रदायिक वक्तव्य

 

हम सदिखन गलत लिखै छी 'सांप्रदायिक'

आओर 'वक्तव्य' सेहो

 

सांप्रदायिक वक्तव्य हम गलत लिखै छी

हम गलत लिखैत छी 'सांप्रदायिक वक्तव्य'।

 

08. पाथर होएब बेहतर अछि

 

अहाँ कि गेलौं

बेसुरक भऽ गेलौं हम

जीवनसँ संगीत आओर

वस्तुगत आकर्षण सभ चलि गेल

 

हम पांतियोकेँ हरा गेला पर

कानल छी

तखन तँ अहाँ समुच्चा स्त्री छेलौं!

 

09. स्थिति केहनो होउ

 

कखनो-कखनो सफलता पूरा भेटैत अछि

आ कखनो-कखनो आधा

कखनो-कखनो तँ भेटिते नहि अछि

 

स्थिति केहनो रहए

हम सफलतासँ आसक्त

आ असफलतासँ घबराइ नहि छी

 

स्थिति केहनो रहए

हम कखनो मयसँ भरल गिलास तोड़ै नइ छी

ऊँचगर आवाजमे बजै नइ छी

 

स्थिति केहनो किएक ने रहए

ई हमर प्रश्न नहि होएत अछि

हमर प्रश्न अछि-

'आखिर हम कऽ की सभ सकै छी'।

 

10.आगू जीवन अछि

 

खूब रास आत्मस्वीकृति अछि

खूब रास दर्द आ सांत्वना सेहो

 

बड्ड कम समय आ खूब रास शुभकामना

ओना, सभ परिचित पाछू छूटि चुकल छथि

 

आब, एकटा छोट सन कोठरी मात्र अछि

जतए एक गोट छत-पंखा अप्पन अधिकतम गतिसँ

घुमैत रहैत अछि

 

जेतए हम, प्रत्येक भोरमे टुटैत देहसँ उठैत रहै छी

जेतए भविष्य पहिनहिसँ उपस्थित रहैत अछि

 

ई बुझबैत कि

हमरा अवसाद आओर नाउम्मीदीसँ बँचबाक अछि

 

थकान आओर उदासीसँ बँचबाक अछि

जलन आओर अधैर्यसँ सेहो; बँचबाक अछि

 

हमरा अभिनय नहि, सच केर संग जीबाक अछि

ओना, ई सभ दिनो-दिन कठिन भेल जा रहल अछि

 

भरमाएबैए पड़ोसी आओर नगरक लोक

मुदा घृणा नहि, हमरा सभ चीजमे भरोस बना कऽ रखबाक अछि

 

किएक तऽ संभावनासँ स्थिति अखनो छूछ नहि अछि

धिया-पुता अखनो हँसि रहल अछि

 

हिनका सभक हाथ अखनो कोमल आ सफेद अछि

सक्कत होइत समयपर, अखनो

हिनकर पकड़ मजगूत छनि।

 

(अविनाश मिश्रक दस गोट हिंदी कविताक मैथिली अनुवाद। हिंदीसँ मैथिलीमे अनुवाद पल्लवी मण्डल।)

 

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