विदेह ४३४ म अंक पर पाठकीय मन्तव्य
गंगेश कुमार पाठक
शुभेच्छा
बहूत नीक एतिहासिक धरोहर के संरक्षण आ संवर्धन के लेल विदेह कें धन्यवाद्
संगहि शुभकामना अशेष🙏
-बोकारो स्टील सीटी, झारखंड।
आशीष अनचिन्हार
मनोज झा मुक्तिजीक कथा बहुत दिन बाद पढ़बाक लेल भेटल। मुदा
कथामे मुक्तिजी जाहि समाजक वर्णन केने छथि से समाज प्रायः एखन धरि नै भेटै
छै, अपवाद छोड़ि। बहुत संभव जे एहन समाज भविष्यमे होइक।
दू-दू टा जीवनी धारवाहिक रूपमे आबि पत्रिकाकेँ नीक बना रहल।
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