
कल्पना झा
हेरायल मऽन
संउसे घर इजोत,
बडु कष्टप्रद अछि इस इजोत !
अंहारे घर कते जगमग छल,
किछु फुसि किछु सते सब अनदेखल छल,
कते महग भेल ई,
समय क डोढ़ि,
झलफलाइत आंखि क कोन ठेकान,
सियान भेल धी पूत ,
बसल आन मोकाम,,
बेसी नय मुद्दा भरोस छल,
अंहार घर में टोहैत,
मातृत्व क ओ क्षुद्धा
काल्पनिक छल की सते,
बताहि भेने कोनो फ़ायदा नय,
भावी जिंदगी जुआरि में,
खेतक आरि बनने कोनो फ़ायदा नय,
निहोरा केने ठार छी,
सदि खन इजोते रहै।
-कल्पना झा, बोकारो
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